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उत्साह उमंग व शिद्दत के साथ कुकिंग प्रतियोगिता में समजा की महिलाओं ने बनाये स्वादिष्ट व्यंजन

with enthusiasm and passion, the women

With enthusiasm and passion, the women of Samaja prepared delicious dishes in the cooking competition भोपाल । सिंधी मेला समिति द्वारा सिंधी व्यंजन की परंपरा को बरकरार रखने के उद्देश्य से शनिवार को राजधानी भोपाल में कुकिंग प्रतियोगिता का आगाज हो गया। राजधानी के 12 सेंटरों पर आयोजित इस प्रतियोगिता में 12 साल की बालिका से 80 साल तक की बुजुर्ग महिला ने हिस्सा लिया। संत कवरराम कॉलोनी, सिंधी कॉलोनी, विजय नगर, सुविधा विहार, कोटरा सुल्तानाबाद, एयरो सिटी, ग्रीन एकड़ में एक साथ सुरु हुआ, जसमे सिंधी समाज की 400 से अधिक महिलाओं ने इस प्रतिस्पर्धा में भाग लिया। इस महिलाओं ने विशेष रूप से सिंधी व्यंजन तैयार किए थे जिनमें बीह पटाटा, साई भाजी, सेयल मानी, खोराक, सिंगर जी मिठाई आदि शामिल है। सिंधी व्यंजन प्रतियोगिता में महिलाओं का उत्साह देखने योग्य रहा, इस अवसर पर सिंधी मेला समिति के अध्यक्ष मनीष दयरानी ने कहा कि सिंध प्रांत में बनने वाले व्यंजनों को देखकर सिंध की यादें ताजा हो गईं। शनिवार को भोपाल के 12 स्थानों पर इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रविवार को यह आयोजन भोपाल में 11 सेंटरो पर आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही इस प्रतियोगिता में चयनित हुई महिलाओं को 2 अगस्त को मानस भवन में आयोजित मुख्य समारोह में बेस्ट कुकिंग अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

MP विधानसभा मानसून सत्र 2025: अनुपूरक बजट, कांग्रेस की रणनीति और सवालों की बारिश

mp vidhansabha monsoon session 2025

भोपाल। MP Vidhansabha Monsoon Session 2025 मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, और 8 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में कुल 10 बैठकें प्रस्तावित हैं। यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार जहां अनुपूरक बजट लेकर आने वाली है, वहीं कांग्रेस विपक्ष जनहित और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। नई भूमिका में हेमंत खंडेलवाल MP Vidhansabha Monsoon Session 2025बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल, जिन्हें हाल ही में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है, अब विधानसभा में पहली पंक्ति में स्थान पाएंगे। यह न सिर्फ उनकी बढ़ी हुई भूमिका का संकेत है, बल्कि पार्टी के भीतर नई राजनीतिक रणनीति का भी प्रतीक है। 3,377 प्रश्न, 191 ध्यानाकर्षण और एक स्थगन प्रस्तावविधानसभा सचिवालय को इस सत्र के लिए 3,377 सवाल मिल चुके हैं, जिनमें से अनेक सवाल शासन की जवाबदेही को कठघरे में खड़ा करेंगे। 191 ध्यानाकर्षण सूचनाएं और एक स्थगन प्रस्ताव यह दर्शाते हैं कि सत्र में विपक्ष आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। बजट की प्राथमिकता – सिर्फ जनहितमोहन सरकार अनुपूरक बजट लाने की तैयारी में है, लेकिन इस बार सरकार का रुख फिजूलखर्ची के खिलाफ सख्त और जनहित योजनाओं के पक्ष में दिख रहा है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वाहन जैसी गैर-ज़रूरी मांगें न भेजें। यह रुख सरकार की वित्तीय अनुशासन और छवि सुधार की मंशा को दर्शाता है। Read more: बिहार में बेलगाम अपराध पर चिराग पासवान का फूटा ग़ुस्सा; नीतीश सरकार को चेतावनी रणनीति की थाली: कांग्रेस विधायकों की डिनर बैठक MP Vidhansabha Monsoon Session 2025सत्र की पूर्व संध्या पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक होटल में होगी। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मांडू में हुए नव संकल्प शिविर में तय किए गए मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। चर्चा है कि जल जीवन मिशन घोटाले जैसे संवेदनशील मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाया जाएगा। सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे रोस्टर मंत्रीमुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि हर दिन सदन में कम से कम तीन मंत्री रोस्टर अनुसार अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। ये मंत्री न केवल सवालों के जवाब सुनिश्चित करेंगे, बल्कि विधायकों की उपस्थिति भी ट्रैक करेंगे। यह पहल सरकार की तैयारियों को संगठित रूप में दर्शाती है। मानसून सत्र – बहस, बजट और भरोसे की परीक्षा MP Vidhansabha Monsoon Session 2025यह मानसून सत्र सिर्फ सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और विपक्ष की धार का टेस्ट बन गया है। एक ओर जहां सरकार बजट से भरोसा पैदा करना चाहती है, वहीं विपक्ष जवाबदेही से सरकार को झकझोरने की रणनीति बना रहा है। अगले दस दिन नीतियों से ज्यादा नीयत की परीक्षा साबित होंगे। मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू होगा। सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी और कांग्रेस जल जीवन मिशन जैसे मुद्दों पर घेराव की तैयारी में है। पढ़ें पूरी रणनीति और सत्र की प्रमुख बातें।

बिहार में बेलगाम अपराध पर चिराग पासवान का फूटा ग़ुस्सा; नीतीश सरकार को चेतावनी

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Chirag Paswan\’s Warning to Nitish Government पटना। बिहार में बढ़ते अपराध के मामलों ने सिर्फ जनता को नहीं, बल्कि सत्ता में सहयोगी दलों के नेताओं को भी चिंता में डाल दिया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने एक कड़ा और स्पष्ट बयान देकर नीतीश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘ऐसी सरकार का समर्थन कर दुख होता है’: चिराग पासवान Chirag Paswan\’s Warning to Nitishएक केंद्रीय मंत्री का सार्वजनिक रूप से यह कहना कि उन्हें ऐसी सरकार का समर्थन करना दुखद लगता है, जहां अपराध नियंत्रण से बाहर हो गया है — यह बयान मामूली नहीं, बल्कि सरकार की साख पर सीधा प्रहार है।पासवान ने कहा कि बिहार में एक के बाद एक आपराधिक घटनाओं की श्रृंखला बन गई है, और प्रशासन अपराधियों के सामने नतमस्तक नजर आ रहा है। प्रशासन की नाकामी या राजनीतिक असहायता?चिराग पासवान की टिप्पणी कि “प्रशासन पूरी तरह से नाकाम हो चुका है”, राज्य में मौजूदा हालात की गंभीरता को दर्शाती है। यह सिर्फ एक नेता की व्यक्तिगत नाराज़गी नहीं, बल्कि उस राजनीतिक गठबंधन के भीतर की बेचैनी है, जो सत्ता में भागीदार होते हुए भी अपने ही सहयोगियों से असंतुष्ट है। साजिश भी हो, ज़िम्मेदारी तो प्रशासन की ही बनती है Chirag Paswan\’s Warning to Nitishपासवान ने विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि अगर ये घटनाएं सरकार को बदनाम करने की साजिश के तहत भी हो रही हैं, तो भी प्रशासन जवाबदेह है। यह वक्तव्य प्रशासनिक तंत्र की उत्तरदायित्व से भागने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाता है। जनविश्वास पर गहराता संकटबिहार पहले ही बेरोजगारी, पलायन और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में अपराध का बेलगाम हो जाना राज्य को और पीछे धकेल सकता है। अगर सत्ता में शामिल केंद्रीय नेता ही खुद को असहाय महसूस करने लगें, तो जनता के मन में यह भरोसा कैसे बचेगा कि वे सुरक्षित हैं? यह चेतावनी है, विरोध नहीं : चिराग पासवान का बयान केवल आलोचना नहीं, एक चेतावनी है — उस सरकार के लिए, जिसका वे खुद हिस्सा हैं। यह बिहार की प्रशासनिक मशीनरी के लिए आईना है, और उस गठबंधन के लिए संकेत, जो अब भीतर से असहज दिख रहा है। बिहार की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहां सत्ता की मजबूरी और अपराध की मजबूती के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती है।अगर यह चुनौती स्वीकार नहीं की गई, तो यह सिर्फ राजनीतिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था और जनविश्वास का पतन भी बन सकता है।