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लहर खबरों की

Drishti Sharma

Writer News & Blogger

भारत–दक्षिण कोरिया CEPA वार्ता फिर शुरू करने पर सहमति, व्यापार संबंधों को मिलेगा नया आयाम

भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को दक्षिण कोरिया के व्यापार, उद्योग और संसाधन मंत्रालय (MOTIR) के व्यापार मंत्री येओ हान-कू के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें दोनों देशों के बीच पहले से लागू व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) को उन्नत बनाने और उसकी वार्ताओं को दोबारा शुरू करने पर सहमति बनी। CEPA समझौते को अपग्रेड करने पर जोर भारत और दक्षिण कोरिया के बीच CEPA समझौता जनवरी 2010 से लागू है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था। हालांकि, बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य और नई आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए अब इस समझौते को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार अपडेट करने की जरूरत महसूस की जा रही है। बैठक के बाद पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने CEPA को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वार्ताओं को पुनः शुरू करने और इसमें सुधार लाने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की। औद्योगिक सहयोग और नई संभावनाएं इस उच्चस्तरीय बैठक में केवल व्यापार समझौते तक ही चर्चा सीमित नहीं रही, बल्कि दोनों देशों ने औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने के नए अवसरों पर भी विचार किया। विशेष रूप से हरित ऊर्जा (Green Energy), डिजिटल व्यापार (Digital Trade) और उन्नत तकनीक आधारित उद्योगों में साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने माना कि आने वाले समय में इन क्षेत्रों में सहयोग से न केवल आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि रोजगार और नवाचार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कोरियाई प्रतिनिधिमंडल का भारत दौरा दक्षिण कोरिया के व्यापार मंत्री येओ हान-कू इस समय राष्ट्रपति ली जेई मियूंग के साथ भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। उनके साथ कोरिया के प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक संगठनों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत–दक्षिण कोरिया संबंधों का भविष्य दोनों देशों के बीच सहयोग पहले से ही जारी है।अब CEPA समझौते के उन्नयन के साथ उम्मीद की जा रही है कि व्यापार की बाधाएं कम होंगी और दोनों देशों के बीच व्यापार मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो भारत–दक्षिण कोरिया आर्थिक साझेदारी एशिया में एक मजबूत व्यापारिक मॉडल के रूप में उभर सकती है।इस बैठक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत और दक्षिण कोरिया अपने आर्थिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं। CEPA वार्ता की पुनः शुरुआत और सहयोग के नए क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ लेकर आ सकता है।

जम्मू बस हादसा: उधमपुर में 20 की मौत, ब्लाइंड मोड़ पर बेकाबू बस खाई में गिरी

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जम्मू-कश्मीर के Udhampur जिले में सोमवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक यात्री बस अचानक नियंत्रण खोकर गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें 20 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।यह हादसा रामनगर इलाके के कागोर्ट गांव के पास उस समय हुआ, जब बस एक खतरनाक ब्लाइंड मोड़ से गुजर रही थी। बताया जा रहा है कि चालक का संतुलन बिगड़ते ही बस पलट गई और सीधे पहाड़ी से नीचे जा गिरी।हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोग सबसे पहले मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी थी और मलबे में तब्दील हो गई थी।इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये खबर पढ़े। …आत्मविश्वास से भरा नया अध्याय :स्पष्ट विज़न के साथ पहाड़ी रास्ते पर बड़ा हादसा, 20 लोगों की मौत जम्मू-कश्मीर के Udhampur जिले में सोमवार सुबह दर्दनाक हादसा हुआ।एक यात्री बस पहाड़ी रास्ते से फिसलकर गहरी खाई में जा गिरी।इस हादसे में 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।करीब 20 अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।यह दुर्घटना सुबह करीब 10 बजे रामनगर इलाके में हुई।बस एक दूरदराज गांव से उधमपुर की ओर जा रही थी। ये खबर पढ़े। …फ्लाइट कैंसिलेशन संकट: क्यों रद्द हो रहीं फ्लाइटें ब्लाइंड मोड़ बना हादसे की वजह अधिकारियों के अनुसार हादसा एक खतरनाक ब्लाइंड मोड़ पर हुआ।बस चालक अचानक नियंत्रण खो बैठा और वाहन पलट गया।इसके बाद बस सीधे पहाड़ी से नीचे खाई में गिर गई।हादसा इतना भयानक था कि बस पूरी तरह मलबे में बदल गई।यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मलबे में तब्दील बस, चीख-पुकार से गूंजा इलाका बस के खाई में गिरते ही जोरदार आवाज के साथ अफरा-तफरी मच गई।घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने तुरंत मदद के लिए दौड़ लगाई।चारों तरफ चीख-पुकार और दर्दनाक दृश्य देखने को मिले।स्थानीय लोगों ने सबसे पहले राहत और बचाव कार्य शुरू किया।उन्होंने बस के अंदर फंसे घायलों को बाहर निकालने की कोशिश की। राहत और बचाव अभियान तेजी से चला पुलिस और प्रशासन की टीम भी जल्द ही मौके पर पहुंच गई।बचाव दल ने मलबे से एक-एक कर शव और घायलों को बाहर निकाला।सड़क पर लाशों का ढेर लग गया, जिससे माहौल बेहद दुखद हो गया।घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।अधिकारियों ने बताया कि कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री का हस्तक्षेप, घायलों को एयरलिफ्ट की तैयारी केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने हादसे पर तुरंत संज्ञान लिया।उन्होंने उधमपुर प्रशासन से संपर्क कर राहत कार्य की जानकारी ली।गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट करने की व्यवस्था की जा रही है।मंत्री ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।सरकार ने बचाव कार्य को तेज करने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, मुआवजे का ऐलान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया।उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की।घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का भी ऐलान किया गया।प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में सरकार पीड़ित परिवारों के साथ है।उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। बार-बार सामने आ रहे ऐसे हादसे, उठे सवाल पहाड़ी इलाकों में सड़क हादसे लगातार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं।ब्लाइंड मोड़ और संकरी सड़कें अक्सर बड़े हादसों का कारण बनती हैं।इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्राइविंग सावधानी और सड़क सुधार जरूरी हैं।ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। FAQs उधमपुर जिले में एक यात्री बस खाई में गिर गई, जिसमें 20 लोगों की मौत हुई।करीब 20 यात्री घायल हुए, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई गई है। हादसा ब्लाइंड मोड़ पर चालक के नियंत्रण खोने के कारण हुआ।बस पलटकर सीधे पहाड़ी से नीचे खाई में गिर गई थी। सरकार ने मुआवजा घोषित किया और घायलों के इलाज की व्यवस्था की।साथ ही गंभीर घायलों को एयरलिफ्ट करने की तैयारी भी की गई।

एक दिन में 53.5 लाख LPG सिलेंडर डिलीवरी, सप्लाई पूरी तरह सामान्य

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ऊर्जा संकट की खबरों के बीच भारत से एक राहत भरी तस्वीर सामने आई है।जहां दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। वहीं भारत में LPG सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह सुचारू बनी हुई है।सिर्फ एक दिन में 53.5 लाख से ज्यादा सिलेंडर डिलीवर होना बड़ी उपलब्धि है।यह दिखाता है कि देश की सप्लाई चेन कितनी मजबूत और व्यवस्थित है।डिजिटल बुकिंग के बढ़ते इस्तेमाल ने इस सिस्टम को और आसान बनाया है। सरकार भी लगातार निगरानी कर रही है ताकि कहीं कोई कमी न हो।आम लोगों के लिए यह खबर राहत और भरोसा दोनों लेकर आई है। ऊर्जा संकट के बीच भारत में LPG सप्लाई सामान्य बनी रही पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा सप्लाई पर चिंता बढ़ रही है।इसके बावजूद भारत में LPG सिलेंडर की डिलीवरी पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।केंद्र सरकार ने साफ कहा कि घरेलू गैस की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं है।लोगों को खाना बनाने के ईंधन की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। सरकार के मुताबिक देशभर में वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से काम कर रही है।इससे आम नागरिकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा। एक दिन में रिकॉर्ड 53.5 लाख सिलेंडर की डिलीवरी हुई आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 18 अप्रैल 2026 को बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई।इस दिन देशभर में 53.5 लाख से अधिक LPG सिलेंडरों की डिलीवरी की गई।यह आंकड़ा बताता है कि सप्लाई चेन पूरी तरह मजबूत और सक्रिय बनी हुई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी इस बात की पुष्टि की है।उन्होंने कहा कि किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर के पास सिलेंडर की कमी नहीं है। डिजिटल बुकिंग ने बदली LPG वितरण की तस्वीर सरकार ने LPG बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर दिया है।अब लगभग 98 प्रतिशत उपभोक्ता ऑनलाइन माध्यम से ही गैस बुक कर रहे हैं।इससे समय की बचत के साथ पारदर्शिता भी बढ़ी है। डिलीवरी प्रक्रिया में भी तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।करीब 93 प्रतिशत डिलीवरी ‘डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड’ के जरिए सत्यापित हो रही हैं। सरकार ने घरों तक सप्लाई को दी प्राथमिकता मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार ने घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी है।यह सुनिश्चित किया गया है कि हर घर तक समय पर गैस सिलेंडर पहुंचे।खाना पकाने जैसे जरूरी काम प्रभावित न हों, इसका पूरा ध्यान रखा गया। सरकार लगातार निगरानी कर रही है ताकि किसी क्षेत्र में कमी न हो।इससे लोगों में भरोसा बना हुआ है और घबराहट की स्थिति नहीं है। जरूरी सेक्टर को भी मिल रही प्राथमिकता सप्लाई कमर्शियल LPG की सप्लाई भी जरूरी क्षेत्रों के लिए जारी रखी गई है।अस्पताल, स्कूल, दवा कंपनियां और उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है।स्टील, ऑटोमोबाइल और कृषि सेक्टर को भी नियमित गैस मिल रही है। सरकार ने संतुलन बनाते हुए हर सेक्टर की जरूरतों को ध्यान में रखा है।इससे देश की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित नहीं हो रही हैं। प्रवासी मजदूरों के लिए खास व्यवस्था की गई प्रवासी मजदूरों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खास कदम उठाए गए हैं।5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG सिलेंडरों की सप्लाई को दोगुना किया गया।यह फैसला पिछले महीनों की खपत को देखते हुए लिया गया है। इससे छोटे उपभोक्ताओं को भी आसानी से गैस उपलब्ध हो रही है।सरकार का लक्ष्य हर वर्ग तक ईंधन पहुंचाना सुनिश्चित करना है। वैकल्पिक ईंधन से भी मांग को संतुलित किया गया LPG की बढ़ती मांग को संतुलित करने के लिए अन्य ईंधनों का सहारा लिया गया।केरोसिन और कोयले जैसे विकल्प भी लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं।इससे गैस पर दबाव कम करने में मदद मिल रही है।कोयला मंत्रालय ने कंपनियों को सप्लाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।इससे छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। PNG और CNG कनेक्शन बढ़ाने पर भी जोर राज्यों को नए PNG कनेक्शन देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।घरेलू और कमर्शियल दोनों उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिल रहा है।इससे LPG पर निर्भरता धीरे-धीरे कम करने की योजना बनाई गई है। सरकार का उद्देश्य ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का संतुलन बनाना है।ताकि भविष्य में किसी संकट की स्थिति से बेहतर तरीके से निपटा जा सके। कमर्शियल LPG सप्लाई में भी सुधार देखने को मिला मार्च के बाद से कमर्शियल LPG सप्लाई में लगातार सुधार हुआ है।अब तक 1.67 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गैस की सप्लाई की जा चुकी है।यह लगभग 88 लाख सिलेंडरों के बराबर मानी जा रही है। सरकार ने बताया कि यह स्तर सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है।आने वाले दिनों में इसमें और सुधार की उम्मीद जताई गई है। सरकार की नजर हर स्थिति पर बनी हुई है सरकार ने स्पष्ट किया कि वह हर स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना सरकार की पहली प्राथमिकता है।साथ ही सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों को भरोसा दिलाया गया है कि किसी भी तरह की कमी नहीं होगी।भारत में LPG सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बनी रहेगी। FAQs हाँ, सरकार के अनुसार LPG सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।देशभर में किसी भी तरह की कमी या रुकावट की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। लगभग 98 प्रतिशत LPG बुकिंग अब डिजिटल माध्यम से की जा रही है।इससे प्रक्रिया आसान, तेज और पारदर्शी हो गई है। सरकार ने वैकल्पिक ईंधन जैसे कोयला और केरोसिन उपलब्ध कराए हैं।साथ ही PNG और CNG कनेक्शन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

Jeffrey Epstein Case: अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट से 16 फाइलें गायब

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अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट से 16 एप्स्टीन से जुड़ी फाइलें गायब, ट्रंप की फोटो समेत महत्वपूर्ण दस्तावेज़ अचानक हट गए। पारदर्शिता पर विवाद बढ़ा। 21 दिसंबर 2025 — अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice-DOJ) की वेबसाइट से कम से कम 16 दस्तावेज़ और तस्वीरें अचानक गायब हो गई हैं, जो पहले सार्वजनिक रिकार्ड के हिस्से के रूप में पोस्ट किए गए थे। इन फाइलों में कुछ ऐसे चित्र शामिल थे जिनमें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, एप्स्टीन और उसकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल के साथ अन्य तस्वीरें थीं। यह विवाद उस क़ानून के तहत सामने आया है जिसे नवंबर में पारित किया गया था — Epstein Files Transparency Act, जिसमें DOJ को एप्स्टीन से जुड़े जांच दस्तावेज़ जनता के सामने लाने का आदेश दिया गया था। हालांकि यह रिकार्ड जारी किए गए, लेकिन उनमें से कुछ गायब हो गए, और विभाग ने अभी तक गायब होने की कोई स्पष्ट वजह नहीं बताई है। DOJ से फाइलें गायब कैसे हुईं? वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेज़ शुक्रवार को प्रकाशित किए गए थे, लेकिन कम से कम 16 फाइलें शनिवार तक उपलब्ध नहीं रहीं, जिसमें नग्न कलाकारों की पेंटिंग्स की तस्वीरें भी शामिल थीं। DOJ ने किसी भी तरह से सरकारी नोटिस या सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया कि यह हटाना जानबूझकर किया गया या तकनीकी कारणों से हुआ। DOJ अधिकारियों ने कहा है कि कुछ फोटो और सामग्री की समीक्षा और शीघ्र लालकरन (redaction) की प्रक्रिया जारी है ताकि पीड़ितों की सुरक्षा और गोपनीयता बनी रहे। लेकिन गायब दस्तावेज़ों के पीछे की असली वजह स्पष्ट नहीं है। ये खबर भी पढ़े …62 की उम्र में ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने रचाई शादी, जानें Jodie Haydon कौन हैं गायब फाइलों में था क्या कुछ फाइलों में शामिल थे: ट्रंप, एप्स्टीन और मैक्सवेल की फोटो — एक चित्र जिसमें ट्रंप, मेलानिया ट्रंप और एप्स्टीन जुड़े दिखते थे। नग्न महिलाओं की पेंटिंग की तस्वीरें। क्रेडेंज़ा ड्रेसर में रखी सामना फ़ोटो का समूह — जहाँ ट्रंप की तस्वीर भी थी। कुछ फाइलों के निर्दिष्ट विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या विभाग ने संवेदनशील जानकारी हटाई है या कुछ जानकारी छुपाई जा रही है। ये खबर भी पढ़े …ऑक्सफोर्ड डिबेट विवाद: पाकिस्तान झूठ बोला, भारत ने पोल खोली ट्रंप के साथ जुड़े चित्रों का महत्व और विवाद जिस फ़ाइल को लेकर सबसे अधिक विवाद उत्पन्न हुआ वह फाइल नंबर 468 थी, जिसमें कथित तौर पर ट्रंप, एप्स्टीन और मैक्सवेल के साथ एक तस्वीर थी। डेमोक्रेटिक सांसदों ने कहा है कि इस तरह की तस्वीर का अचानक गायब हो जाना पारदर्शिता के सिद्धांत के खिलाफ है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि ट्रंप किसी भी आपराधिक आरोप का सामना नहीं कर रहे हैं इस मामले में, और तस्वीर का होना या गायब होना उन पर आरोप का सबूत नहीं है। डॉक्यूमेंट्स में दिखायी गई तस्वीरें केवल पुराने सामाजिक संपर्कों को दर्शाती हैं, और कोई सबूत नहीं मिलता कि ट्रंप ने बच्चों के यौन शोषण में भाग लिया था। ये खबर भी पढ़े …इतिहास की किताबों में बदलाव: अकबर-टीपू के आगे ‘महान’ हटाया, RSS नेता का दावा पारदर्शिता कानून और DOJ की प्रतिक्रिया अमेरिकी कांग्रेस ने यह कानून पारित किया ताकि जनता को एप्स्टीन से जुड़े सभी रिकार्ड एक जगह पर उपलब्ध हो सकें। DOJ ने कहा कि कुछ सामग्री को पीड़ितों की सुरक्षा और गोपनीयता के कारण लालकृत और हटाया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन सी सामग्री अभी भी आने वाली है। डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों सांसदों ने DOJ की आलोचना की है कि यह कानून की भावना और उद्देश्य का पालन नहीं कर रहा है, और कुछ ने इसे सरकारी जवाबदेही के अभाव के रूप में देखा है। एप्स्टीन केस की संक्षिप्त पृष्ठभूमि जेफरी एप्स्टीन एक प्रभावशाली फाइनेंसर और नाबालिगों के यौन शोषण का आरोपी था, जिसे 2019 में फेडरल सेक्स ट्रैफिकिंग आरोपों के तहत गिरफ़्तार किया गया था। इसे आरोप था कि उसने कई नाबालिग लड़कियों का यौन शोषण किया और उन्हें भुगतान भी किया था। कुछ पीड़ितों की उम्र केवल 14 वर्ष थी। जुलाई 2019 में एक अदालत ने उसे हिरासत में रखने का आदेश दिया और जमानत देने से इनकार कर दिया। कुछ समय बाद जेल में उसकी मृत्यु आत्महत्या के रूप में घोषित की गई, जिसने पूरे मामले को और भी विवादित बना दिया। FAQs Q1. DOJ से एप्स्टीन से जुड़ी फाइलें क्यों गायब हुईं?DOJ ने कहा है कि कुछ फोटोज़ और दस्तावेज़ों पर रीडैक्शन और समीक्षा जारी है ताकि पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रहे। अभी तक सरकार ने कोई पूर्ण स्पष्टीकरण नहीं दिया है कि गायब होना जानबूझकर या तकनीकी गलती थी। Q2. क्या गायब हुई फाइलों में ट्रंप की फोटो थी?हाँ, रिपोर्टों के मुताबिक गायब फाइलों में एक तस्वीर थी जहां ट्रंप, मेलानिया ट्रंप और घिस्लेन मैक्सवेल के साथ एप्स्टीन दिख रहा था। इस फोटो का अचानक हट जाना जनमानस में ज्यादा विवाद का कारण बना। Q3. क्या इस घटना से एप्स्टीन के अपराध से जुड़े सबूत छिपाए जा रहे हैं?वर्तमान में कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है कि फाइलें छिपाई जा रही हैं। DOJ का कहना है कि रीडैक्शन पीड़ितों की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए है। आलोचक कहते हैं कि पारदर्शिता का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन कोई ठोस cover-up प्रमाण नहीं मिला है।

62 की उम्र में ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने रचाई शादी, जानें Jodie Haydon कौन हैं

Shadi

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज (62) ने 29 नवंबर 2025 को अपनी लंबे समय से साथी रही जोडी हेडन (46) से शादी की वो पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने कार्यकाल के दौरान शादी की; उनकी प्रेम-कहानी, निजी समारोह और शादी की ख़ास बातें अब सामने आई हैं। इन दोनों के उम्र में 16 साल का अतंर है। ◆ ऐतिहासिक शादी  क्यों खास है? ये खबर भी पढ़े…सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी में सामाजिक एकता का संदेश ◆ समारोह और शादी की बातें ये खबर भी पढ़े…महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब ◆ प्रेम कहानी: कैसे शुरू हुई थी? ये खबर भी पढ़े…Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन पर ◆ निजी जीवन और पहले परिवार की जानकारी  FAQs Q1: कौन हैं जोडी हेडन — प्रधानमंत्री की नई दुल्हन?उत्तर: जोडी हेडन एक अनुभवी वित्तीय / सुपरएनेशन (retirement savings/ fund) पेशेवर रही हैं। उनकी पर्सनल लाइफ आलोचना/सरकारी दबाव में नहीं रही, और उन्होंने निजी तौर पर 2020 में अल्बानीज से मुलाक़ात की थी। उन्होंने बाद में सोशल मीडिया के जरिये उनसे संपर्क किया। 2024 में दोनों की सगाई हुई, और 2025 में शादी हुई। Q2: शादी किस तरह हुई — क्या यह सार्वजनिक समारोह था या निजी?उत्तर: यह शादी एक बहुत निजी, गोपनीय समारोह थी — सिर्फ करीबी परिवार, दोस्त और कुछ मंत्री उपस्थित थे। समारोह स्थान था प्रधानमंत्री का सरकारी निवास The Lodge, लेकिन शादी-व्यवस्था और खर्च दोनों दम्पति ने निजी रूप से किए थे। मीडिया को तब तक जानकारी नहीं दी गई थी जब तक शादी पूरी न हो गई थी। Q3: क्या यह पहली बार है कि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ऑफिस में रहते हुए शादी कर रहे हैं?उत्तर: हाँ। 29 नवंबर 2025 की यह शादी इतिहास रचने वाली रही: एंथनी अल्बानीज बने पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जिन्होंने अपने पदकाल के दौरान विवाह किया।

ऑक्सफोर्ड डिबेट विवाद: पाकिस्तान झूठ बोला, भारत ने पोल खोली

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भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भले ही नया नहीं है, लेकिन ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनियन डिबेट में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। यह बहस भारत-पाक नीति पर होने वाली थी, जिसमें दोनों देशों के वक्ताओं को अपने पक्ष रखने थे। भारत से एडवोकेट जे साई दीपक, एक्टिविस्ट मनु खजूरिया और पंडित सतीश के शर्मा शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही जानकारी मिली कि पाकिस्तानी पक्ष बहस में आने से पीछे हट गया है। 🇮🇳 क्या हुआ — असली मामला एक बहुप्रतीक्षित डिबेट थी — ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन में, जिस विषय पर बहस होनी थी: “This House Believes India’s Policy Towards Pakistan Is a Populist Strategy Sold as Security Policy”पाकिस्तान की तरफ से वक्ता रहने वाले थे: पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर, पूर्व सेना जनरल ज़ुबैर महमूद हयात और ब्रिटेन में पाकिस्तान के राजदूत मोहम्मद फैसल — ये पहले ही लंदन पहुंचे हुए थे। भारत की ओर से मूल वक्ता थे: पूर्व सेना प्रमुख M.M. Naravane (सेवानिवृत्त), पूर्व कानून मंत्री व सांसद सुब्रमनियन स्वामी, और पूर्व राज्य मंत्री व नेता सचिन पायलट — लेकिन ये तीनों आखिरी समय पर उपलब्ध नहीं रहे। भारत-पक्ष की ओर से J Sai Deepak थे, जिनके अनुसार उन्होंने पहले से तैयारियों की पुष्टि कर रखी थी। बाद में, नियत वक्ताओं के न होने पर उन्होंने ब्रिटेन में रह रहे अन्य व्यक्तियों — Manu Khajuria व Satish K Sharma — को विकल्प के रूप में शामिल कराया। ये खबर भी पढ़े…UIDAI: 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर बंद, पोर्टल पर दी गई यह सुविधा भी 🛑 विवाद कैसे शुरू हुआ डिबेट से ठीक कुछ घंटे पहले ही आयोजकों यानी Oxford Union के अध्यक्ष Moosa Harraj (जो पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन मंत्री के बेटे बताए गए हैं) ने J Sai Deepak को कह दिया कि पाकिस्तान की टीम लंदन नहीं पहुंची है — इसलिए डिबेट रद्द करनी पड़ी। लेकिन इसके ठीक बाद यह जानकारी मिली कि पाकिस्तान की टीम असल में लंदन में थी और होटल में रुकी थी — यानी उनकी अनुपस्थिति के दावे में गड़बड़ी थी। भारत की ओर से यह वादा था कि अगर समय रहते स्पीकर उपलब्ध न हो सके, तो दूसरा पैनल भेजा जाएगा — लेकिन आयोजकों ने वो प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इस वजह से British-based भारतीय नागरिक (Manu Khajuria, Satish K Sharma) की अनुमति देने में भी आनाकानी हुई ये खबर भी पढ़े…IFFI Award: जापानी ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’, इफ्फी प्रेमियों ने लिया आनंद 🇵🇰 पाकिस्तान का दावा और भारत की प्रतिक्रिया पाकिस्तान हायर कमीशन लंदन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि “भारतीय वक्ताओं ने आखिरी समय पर बहस से पीछे हटने का फैसला किया”। इस दावे ने पाकिस्तान को वॉकओवर जीत का हवाला दिया। इसके जवाब में J Sai Deepak ने कहा कि भारत की टीम तैयार थी, और बहस रद्द होना असल में पाकिस्तान की टीम की अनुपस्थिति व आयोजन प्रबंधन की असफलता का परिणाम था। उन्होंने ईमेल और कॉल-लॉग्स सार्वजनिक कर दिए। Deepak ने कहा: “अगर पाकिस्तान वालों में हिम्मत है, तो अब वे सीधे भाजपा, मीडिया या सोशल-मीडिया के मंच की बजाय वही मंच चुनें जहाँ मुद्दे पर खुलकर बहस हो सके।” कुछ दक्षिण एशियाई और ब्रिटिश मीडिया तथा आकलनकर्ता भी इस पूरे नाटक को “स्टंट” या “ड्रामा” कह रहे हैं — उनका कहना है कि शुरुआत से ही यह बहस एक असली बहस नहीं थी, बल्कि एक प्रचार-प्रयोग था। ये खबर भी पढ़े…Assam Anti Polygamy Bill 2025: बहुविवाह पर सख़्त रोक: असम में बिल को मंजूरी 🎯 इस घटना का मतलब क्या है यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, जहाँ अकादमिक मंचों और डिबेट सोसायटीज़ की प्रतिष्ठा होती है, वे भी राजनीतिक एजेंडा, दावे और प्रचार के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच अब सिर्फ बॉर्डर या नीति का विवाद नहीं है; बहस की तक़ाज़ा, सार्वजनिक बाहस और छवि-प्रबंधन की जंग भी अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँच गई है। जो देश या पक्ष खुलकर बहस से भागता दिखे — उसकी विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आती है। इस मामले में, पाकिस्तान की ओर से पहले दावे, फिर उनके असत्य साबित होने से, बहस के महत्व और तर्क-वाद की जगह प्रचार की प्राथमिकता उजागर हुई। FAQs Q1: यह डिबेट आखिर किन राज्यों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच तय थी?इस डिबेट में पाकिस्तान की ओर थे पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर, पूर्व जनरल जुबैर महमूद हयात और यूके में पाकिस्तानी राजदूत मोहम्मद फैसल। वहीं भारत की ओर मूल वक्ता थे पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे, पूर्व मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी और सचिन पायलट। बाद में जब ये तीनों उपलब्ध नहीं हुए, तो भारत-पक्ष ने अन्य वक्ताओं (Manu Khajuria, Satish K Sharma) को प्रस्तावित किया। Q2: डिबेट रद्द क्यों हुई — पाकिस्तान के न पहुँचने की वजह से या भारत के हटने की वजह से?भारत-पक्ष का कहना है कि डिबेट रद्द इसलिए हुई क्योंकि पाकिस्तान की टीम आखिरी समय में उपस्थित नहीं हुई; आयोजक द्वारा सूचना दी गई थी कि पाकिस्तानी वक्ता लंदन में नहीं पहुँचे। वहीं पाकिस्तान हाई कमीशन का दावा था कि भारत के वक्ता पीछे हट गए। लेकिन J Sai Deepak ने दोनों दावों को असत्य साबित किया — उन्होंने कॉल-लॉग्स व ईमेल सबूत दिखाए। Q3: क्या इस घटना का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अब विश्वसनीय बहस नहीं होती?हां — यह घटना एक उदाहरण है कि कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल सच्ची बहस की बजाय पब्लिक ट्रंपेटिंग व प्रचार के लिए किया जाता है। जहाँ पर तैयारी, भरोसा, और तर्क-वाद की बजाय, आखिरी समय की रणनीतियाँ, बदलाव और कथित ‘वॉकओवर’ की चाल होती है। इस तरह के मामलों में विश्वसनीयता और निष्पक्षता हमेशा नहीं रहती।

इतिहास की किताबों में बदलाव: अकबर-टीपू के आगे ‘महान’ हटाया, RSS नेता का दावा

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महाराष्ट्र के नागपुर शहर में आयोजित ऑरेंज सिटी लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इतिहास की किताबों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि NCERT ने इतिहास को अधिक संतुलित और तथ्याधारित स्वरूप देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया है। उनके अनुसार, अब नई इतिहास पुस्तकों में अकबर और टीपू सुल्तान के आगे ‘महान’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, क्योंकि इतिहास का मूल्यांकन अब घटनाओं और प्रमाणों के आधार पर किया जा रहा है। NCERT ने किए 11वीं तक के सिलेबस में चेंज अपने संबोधन में आंबेकर ने बताया कि NCERT ने कुल 15 किताबों में से 11 कक्षाओं की किताबों में इम्पोर्टेन्ट अमेंडमेंटस कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में भी बदलाव अगले साल लागू किए जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि किताबों से किसी का नाम हटाया नहीं गया है। “हमारे इतिहास के कठोर सच भी बच्चों को जानने चाहिए” उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को यह समझना जरूरी है कि इतिहास में कौन-सी घटनाएं लोगों के लिए पीड़ा का कारण बनीं, और किन कारणों से समाज को संघर्ष करना पड़ा। इसलिए किसी चरित्र को हटाने के बजाय उनके कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण जरूरी है। ये खबर भी पढ़े…भारत के ‘आधार’ की तर्ज पर ब्रिटेन लाएगा नया ID कार्ड सिस्टम, क्या है पीएम स्टारमर का प्लान? क्यों हटाया गया ‘महान’ शब्द? आंबेकर का कहना था कि ‘महान’ शब्द किसी ऐतिहासिक चरित्र को एकतरफा रूप से महिमामंडित कर देता है, जबकि इतिहास का उद्देश्य संतुलित दृष्टिकोण देना है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास बहुत बड़ा है और इसे दुनिया को देने से पहले हमें स्वयं उस ज्ञान को समझने की आवश्यकता है।पुरानी किताबों की भाषा पर उठे थे सवाल कई इतिहासकार और शिक्षाविद लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि इतिहास पुस्तकों में इस्तेमाल शब्दों को तटस्थ बनाया जाए। इसी कारण NCERT ने अध्यायों की भाषा को सरल और तथ्यपरक बनाने पर काम किया। ये खबर भी पढ़े…हिंद-प्रशांत में नहीं चलेगी चीन की चालबाज़ी, भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 3 बड़ी रक्षा संधियाँ नालंदा यूनिवर्सिटी पर भी बोले RSS नेता अपने भाषण में उन्होंने नालंदा यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए बताया कि यह केवल धार्मिक शिक्षा का केंद्र नहीं थी। नालंदा में 76 स्किल-बेस्ड कोर्स पढ़ाए जाते थे। उनके अनुसार, नालंदा में 76 प्रकार के कौशल कोर्स पढ़ाए जाते थे, जिनमें— अर्बन प्लानिंग खेती की तकनीक शासन व्यवस्था मेकअप और आर्ट सीक्रेट एजेंट ट्रेनिंग मैकेनाइजेशन जैसे विषय शामिल थे।उन्होंने कहा कि भारत का यह प्राचीन ज्ञान आज भी आधुनिक समाज के लिए उदाहरण बन सकता है। ये खबर भी पढ़े…हंगरी के लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को मिला ये सम्मान, नोबेल पुरस्कार 2025 का हुआ ऐलान भारत विकास की राह पर, लेकिन संतुलन जरूरी अंत में आंबेकर ने कहा कि भारत तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन दुनिया के कई देशों ने विकास के दौरान अपनी संस्कृति व पारिवारिक मूल्यों के साथ समझौता कर दिया था। उन्होंने सलाह दी कि भारत को इस दिशा में सावधान रहना होगा और विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना होगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इतिहास और ज्ञान पर आधारित शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वह समझ सके कि भारत कहाँ से गुजरा है और भविष्य में उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है। FAQs Q1. क्या NCERT ने अकबर और टीपू सुल्तान को इतिहास की किताबों से हटा दिया है। नहीं, NCERT ने उन्हें किताबों से नहीं हटाया है। केवल उनके नाम के आगे लगे ‘महान’ शब्द को हटाने का निर्णय लिया गया है ताकि इतिहास को अधिक तटस्थ और तथ्याधारित ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। Q2. इतिहास की किताबों में यह बदलाव कब से लागू होंगे? Q3. अब तक कक्षा 1 से 11 तक की अधिकांश किताबों में बदलाव किए जा चुके हैं। कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में संशोधन अगले सत्र से लागू होंगे। Q4. RSS नेता सुनील आंबेकर ने इस बदलाव को क्यों सकारात्मक बताया? उन्होंने कहा कि पुरानी किताबों में पक्षपातपूर्ण भाषा थी, जबकि नई किताबें तटस्थ दृष्टिकोण देती हैं। इस बदलाव के जरिए बच्चों को अकबर और टीपू सुल्तान जैसे ऐतिहासिक पात्रों के कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण मिलेगा।

Japan-IMF: एशिया के छात्रों को मिलेगी पीएचडी में छात्रवृत्ति, 2025 में सुनहरा मौका

Japan-IMF

Japan-IMF PhD Scholarship 2025 जापान-आईएमएफ (Japan-IMF) छात्रवृत्ति कार्यक्रम 2025 का ऐलान हो गया है। यह कार्यक्रम जापान सरकार और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) द्वारा संचालित है। इसका उद्देश्य एशिया और प्रशांत क्षेत्र में उच्च योग्य अर्थशास्त्रियों को तैयार करना है। यह छात्रवृत्ति डॉक्टरेट स्तर की पढ़ाई (Ph.D. in Economics) के लिए दी जाती है। चयनित उम्मीदवारों को पूर्ण ट्यूशन शुल्क और अन्य वित्तीय सहायता दी जाएगी। कार्यक्रम का लक्ष्य नीति निर्माण में सक्षम विशेषज्ञ तैयार करना है। योग्यता आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को कुछ योग्यताएं पूरी करनी होंगी। पहली शर्त है कि उम्मीदवार किसी एशियाई या प्रशांत देश का नागरिक हो। दूसरी, उम्मीदवार के पास अर्थशास्त्र या संबंधित विषय में मास्टर डिग्री (Master’s Degree) हो। तीसरी, उम्मीदवार ने अपने देश से बाहर मास्टर डिग्री प्राप्त न की हो। चौथी, उसे किसी शीर्ष विजापान-आईएमएफ (Japan-IMF) छात्रवृत्ति कार्यक्रम 2025 का ऐलान हो गया है। यह कार्यक्रम जापान सरकार और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) द्वारा संचालित है। इसका उद्देश्य एशिया और प्रशांत क्षेत्र में उच्च योग्य अर्थशास्त्रियों को तैयार करना है। बेनेफिट्स यह छात्रवृत्ति डॉक्टरेट स्तर की पढ़ाई (Ph.D. in Economics) के लिए दी जाती है। चयनित उम्मीदवारों को पूर्ण ट्यूशन शुल्क और अन्य वित्तीय सहायता दी जाएगी। कार्यक्रम का लक्ष्य नीति निर्माण में सक्षम विशेषज्ञ तैयार करना है अप्लाई डेट्स इसका आवेदन 20 सितंबर 2025 से शुरू होगा। अंतिम तिथि 20 अक्टूबर 2025 रात 11:59 (JST) तय की गई है। योग्य उम्मीदवारों को समय पर आवेदन करने की सलाह दी गई है। यह अवसर एशियाई युवाओं के लिए करियर बदलने वाला साबित हो सकता है। अर्थशास्त्र में अनुसंधान और नीति अध्ययन में रुचि रखने वालों के लिए यह आदर्श मौका है।

नोबेल शांति पुरस्कार मचादो ले गई, डोनाल्ड ट्रंप हाथ मलते रह गए

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ओस्लो दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान शुक्रवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होते ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सपना चकनाचूर हो गया। इस बार का ‘नोबेल पीस प्राइज’ वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचादो को मिला है। बता दें कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी हर साल इस पुरस्कार के लिए ऐसे लोगों या संस्थाओं को चुनती है, जो शांति को बढ़ावा देने, देशों के बीच भाईचारे को मजबूत करने और समाज के लिए काम करने में योगदान देते हैं। बता दें कि यह पुरस्कार हमेशा चौंकाने वाला होता है। नोबेल प्राइज के लिए काफी बेचैन थे ट्रंप? नोबेल पीस प्राइज के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई दिनों से काफी बेचैन नजर आ रहे थे। ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की कुछ उपलब्धियों, जैसे शांति समझौतों को लेकर खुद की तारीफ की थी। लेकिन नोबेल विशेषज्ञों का पहले ही कहना था कि उनके जीतने की संभावना बहुत कम है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कमेटी आमतौर पर उन लोगों या संगठनों को पुरस्कार देती है, जो लंबे समय से शांति के लिए काम कर रहे हों। कौन हैं मारिया कोरिना मचाडो? मारिया कोरिना मचाडो का जन्म 7 अक्टूबर 1967 को हुआ था। वह वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और औद्योगिक इंजीनियर हैं। 2002 में उन्होंने वोट निगरानी समूह सूमाते की स्थापना की और वेंटे वेनेजुएला पार्टी की राष्ट्रीय समन्वयक हैं। 2011-2014 तक वे वेनेजुएला की नेशनल असेंबली की सदस्य रहीं। वह 2018 में बीबीसी की 100 प्रभावशाली महिलाओं और 2025 में टाइम पत्रिका की 100 प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल हुईं। निकोलस मादुरो सरकार ने उनके देश छोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 2023 में अयोग्यता के बावजूद, उन्होंने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी प्राथमिक चुनाव जीता, लेकिन बाद में उनकी जगह कोरिना योरिस को उम्मीदवार बना दिया गया। इन नामों की हो रही थी चर्चा नोबेल शांति पुरस्कार के लिए इस बार कई नाम सामने आए थे। पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट ओस्लो ने कुछ संभावित विजेताओं का जिक्र किया था, जिनमें शामिल थे: सूडान की इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स: यह एक समुदाय आधारित नेटवर्क है, जो सूडान के गृहयुद्ध के दौरान मानवीय सहायता का मजबूत आधार बना हुआ है। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट: ये दोनों संस्थाएं वैश्विक न्याय और शांति के लिए काम करती हैं। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स: यह अमेरिका आधारित संगठन प्रेस की आजादी को बढ़ावा देता है और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करता है। यह संगठन उन पत्रकारों की सूची भी तैयार करता है, जो अपने काम के दौरान मारे गए। पिछले साल किसने जीता था नोबेल शांति पुरस्कार? पिछले साल 2024 में नोबेल शांति पुरस्कार जापान की संस्था निहोन हिदानक्यो को दिया गया था। यह संगठन परमाणु हथियारों के खिलाफ दशकों से काम कर रहा है और हिरोशिमा-नागासाकी बम धमाकों के पीड़ितों की आवाज को दुनिया तक पहुंचाता है। क्यों खास है नोबेल शांति पुरस्कार? नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे बड़े पुरस्कारों में से एक है। बाकी नोबेल पुरस्कार (जैसे चिकित्सा, भौतिकी, रसायन और साहित्य) स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दिए जाते हैं, लेकिन शांति पुरस्कार का ऐलान और समारोह ओस्लो में होता है। इस हफ्ते स्टॉकहोम में चिकित्सा, भौतिकी, रसायन और साहित्य के पुरस्कारों का ऐलान हो चुका था जिसके बाद सबकी नजर शुक्रवार के ऐलान पर टिकी थीं। इसके अलावा, अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार सोमवार को घोषित किया जाएगा।

मुत्ताकी की भारत यात्रा से बिफरा पाकिस्तान, अफगानिस्तान में की एयरस्ट्राइक – क्या है इरादा?

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काबुल अफगानिस्तान की राजधानी काबुल शुक्रवार सुबह तेज धमाकों से दहल उठी. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विस्फोट पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) की कथित एयरस्ट्राइक के कारण हुए हैं. पाकिस्तानी चैनलों ने दावा किया कि इन हमलों का निशाना तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकाने थे. यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब तालिबान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी भारत दौरे पर हैं. मुत्तकी का यह दौरा अफगानिस्तान की नई सरकार और भारत के बीच संवाद की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि अफगानिस्तान की ज़मीन अगर पाकिस्तान विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होती है, तो ‘कड़ी कार्रवाई’ की जाएगी. उसी के कुछ दिन बाद यह कथित एयरस्ट्राइक सामने आई है. कतर में तालिबान के राजदूत मुहम्मद सुहैल शाहीन ने बयान जारी कर कहा, ‘काबुल में दो धमाकों की आवाज सुनी गई, लेकिन अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.’ पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया कि हमले में TTP प्रमुख नूर वली महमूद मारा गया. अफगान मीडिया के मुताबिक, अटैक के बाद TTP के प्रमुख नूर वली महसूद का एक ऑडियो सामने आया जिसमें उसने खुद के जिंदा होने की बात कही और पाकिस्तान पर ‘फर्जी प्रचार’ करने का आरोप लगाया. ख्वाजा आसिफ ने दी थी धमकी इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को धमकी भरे लहजे में अफगानिस्तान के अंतरिम प्रशासन को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अफगानिस्तान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को अपने देश के अंदर सुरक्षित पनाहगाह दे रहा है. उन्होंने कहा था कि ‘इनफ इज इनफ’ यानी अब बहुत हो गया. पाकिस्तानी सेना लगातार TTP के खिलाफ ऑपरेशन चला रही है. गुरुवार को कम से कम सात टीटीपी आतंकी मारे गए. मुत्ताकी की भारत यात्रा के बीच हमला एक कहावत है घर वाला घर नहीं हमें किसी का डर नहीं. यह धमाका ऐसे समय में हुआ है जब भारत और अफगानिस्तान के संबंध बेहतर हो रहे हैं और अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे. अगस्त 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद यह पहली बार है, जब काबुल से कोई मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधि नई दिल्ली का दौरा कर रहा है. मुत्तकी की यह यात्रा लगभग एक सप्ताह की है. इसे दोनों देशों के बीच संवाद की नई पहल के रूप में देखा जा रहा है.