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Drishti Sharma

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बुद्ध पूर्णिमा: प्रेम और शांति का सन्देश

1 मई 2026 को मनाई जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा केवल भगवान बुद्ध के जन्मदिन का पर्व नहीं है। यह दिन उनके जीवन में घटित तीन महाचमत्कार—जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—के कारण ‘तीन बार धन्य उत्सव’ कहा जाता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु शांति, करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश ग्रहण करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व वैशाख पूर्णिमा को मनाया जाता है और यह हिंदू व बौद्ध दोनों धर्मों में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थीं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए इसे त्रिगुणधन्य दिवस भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व शुक्रवार, 1 मई को मनाया जाएगा। सिद्धार्थ गौतम का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा को लुंबिनी (आधुनिक नेपाल) में राजा शुद्धोधन और रानी महामाया के घर सिद्धार्थ का जन्म हुआ। वे बाद में गौतम बुद्ध कहलाए। यह घटना न केवल उनके जीवन की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि मानवता के लिए ज्ञान और करुणा का आरंभ भी मानी जाती है।ज्ञान की प्राप्ति परम ज्ञान की प्राप्ति सिद्धार्थ गौतम ने 35 वर्ष की आयु में बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान करके परम ज्ञान प्राप्त किया। इस समय से वे ‘बुद्ध’ कहलाए और उनकी शिक्षाएं दुनिया भर में सत्य और करुणा का मार्ग दिखाने लगीं। बुद्ध पूर्णिमा पर बोधि वृक्ष के पास ध्यान और पूजा का विशेष महत्व है।महापरिनिर्वाणबुद्ध पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में महात्मा बुद्ध ने सांसारिक बंधनों को त्याग कर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। इसका अर्थ है जन्म-मृत्यु के चक्र से पूर्ण मुक्ति। इसे ध्यान, संयम और आध्यात्मिक परिपूर्णता का प्रतीक माना जाता है।इन तीन अद्भुत घटनाओं के कारण बुद्ध पूर्णिमा को केवल जन्मदिन नहीं, बल्कि जीवन चक्र की पूर्णता और आध्यात्मिक परिपूर्णता का दिन कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु शांति, अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेते हैं। पूजा और मंत्रों का महत्व बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध के ध्यान और मंत्रों का जाप विशेष फलदायक माना जाता है। श्रद्धालु ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ का जाप कर मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, पीपल वृक्ष की पूजा करते समय ‘ मणि पद्मे हुं’ मंत्र का जाप लाभकारी होता है। इस प्रकार, बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन में ज्ञान, करुणा और अहिंसा की सीख देने वाला दिन है। इस दिन किए गए ध्यान, पूजा और जप से मानसिक शांति, आध्यात्मिक विकास और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मोहिनी एकादशी व्रत से मिलती समृद्धि

27 अप्रैल 2026 को मनाई जाने वाली मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है। इस व्रत को करने से मोह-माया से मुक्ति, सुख-समृद्धि और जीवन में उन्नति प्राप्त होती है।मोहिनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 27 अप्रैल, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मोहिनी रूप धारण किया था, जिससे देवताओं को अमृत प्राप्त हुआ और दानवों से उसका संरक्षण हुआ।पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 26 अप्रैल की शाम से होगा और इसका समापन 27 अप्रैल की शाम को होगा। उदयातिथि के आधार पर व्रत 27 अप्रैल को ही रखा जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 4:43 से 5:28 तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 से 1:02 तक पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है पूजा के दौरान ‘नमो भगवते वासुदेवाय’ और ‘ नमो नारायणाय’ जैसे मंत्रों का जाप करने से मन शांत होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। इसके साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम और मंगल स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत शुभ माना जाता है।इस व्रत का पारण 28 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 6:12 से 8:46 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना आवश्यक होता है, अन्यथा व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। मोहिनी एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन से मोह, माया और नकारात्मक विचार दूर होते हैं घर में सुख, शांति और धन-समृद्धि का वास होता है भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं और दिनभर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करते हैं। शाम के समय दीपदान और तुलसी पूजन का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है।इस प्रकार मोहिनी एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन में संयम, भक्ति और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है।

घर में तितली का आना लाता है खुशखबरी

घर में तितलियों का आना सदियों से शुभ माना गया है। यह न केवल सौभाग्य का प्रतीक है, बल्कि जीवन में नई संभावनाओं, प्रेम और समृद्धि के संकेत भी देता है।घर में तितलियों का आना भारतीय परंपरा और ज्योतिष शास्त्र में एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। यह संकेत केवल सौभाग्य का नहीं, बल्कि जीवन में खुशियों, नई शुरुआत और रिश्तों में सामंजस्य का भी प्रतीक है। तितलियों की उपस्थिति को अक्सर प्रकृति की शुभ चेतावनी कहा जाता है, जो बताती है कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ रहा है। विशेषकर रंग-बिरंगी तितलियाँ नीली, पीली या सफेद, घर में आने पर इसे और भी शुभ माना जाता है। इनके आने का समय भी महत्वपूर्ण होता है। सुबह के समय आने वाली तितलियाँ नयी शुरुआत और शिक्षा या करियर में सकारात्मक बदलाव का संकेत देती हैं। वहीं, शाम के समय आने वाली तितलियाँ परिवार में सौहार्द और सुख-शांति लाने की ओर इशारा करती हैं। ज्योतिष के अनुसार घर के उत्तर-पूर्व दिशा में तितलियों का प्रवेश विशेष रूप से शुभ होता है। यह दिशा घर की सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है। अगर यह दिशा साफ-सुथरी और रोशन हो, तो तितलियों का प्रवाह घर में खुशियों और समृद्धि को बढ़ाता है। इसके विपरीत, अगर घर अव्यवस्थित हो या गंदगी हो, तो तितलियाँ जल्दी बाहर चली जाती हैं, जिससे शुभ संकेत का पूरा लाभ नहीं मिलता। तितलियों को घर में देखना बच्चों के लिए भी शुभ माना जाता है इसे उनके स्वास्थ्य, पढ़ाई और मानसिक विकास में सकारात्मक प्रभाव के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा, प्रेम और संबंधों में भी यह संकेत माना जाता है कि पुराने मतभेद दूर होंगे और जीवन में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनेगा।घर में तितलियों की उपस्थिति को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ उपाय भी सुझाए जाते हैं। घर में पौधे, खासकर फूलों के पौधे, रखना चाहिए। यह तितलियों को आकर्षित करता है और उनके आने की संभावना बढ़ाता है। साथ ही, घर की सफाई और प्राकृतिक प्रकाश बनाए रखना आवश्यक है। ताजगी और साफ-सुथरा वातावरण तितलियों के लिए स्वागत योग्य होता है। अगर तितलियाँ घर में लंबे समय तक रहती है इसे सौभाग्य और समृद्धि का स्थायी संकेत माना जाता है। ज्योतिषियों का मानना है कि तितलियों का उडऩा नए अवसर और सकारात्मक परिवर्तन लाता है। घर के सदस्यों को चाहिए कि वे अपने काम में सकारात्मकता बनाए रखें और परिश्रम करते रहें।तितलियों का आना केवल प्राकृतिक सौंदर्य का हिस्सा नहीं, बल्कि घर में संतुलन, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में छोटी-छोटी खुशियाँ और सौभाग्य के संकेत आसपास ही मौजूद रहते हैं। जब हम इनका स्वागत करते हैं, तो जीवन में शांति और समृद्धि अपने आप बढ़ती है।

घर में पूजा-सज्जा से बढ़े सकारात्मक ऊर्जा

TULSI MAA

घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे पर दीपक और जल अर्पित करने से न केवल घर की ऊर्जा सकारात्मक होती है, बल्कि परिवार में सौभाग्य और शांति का वास भी बढ़ता है।घर को सजाना और उसमें नियमित पूजा करना न केवल धार्मिक कृत्य है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक शांति का भी स्रोत माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर हल्का दीपक और ताजे फूल लगाना अत्यंत शुभ होता है। यह न केवल आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, बल्कि नकारात्मक प्रभावों को भी कम करता है। दीपक का प्रकाश अंधकार और नकारात्मकता को दूर करता है और फूलों की ताजगी वातावरण में सुख और उत्साह भर देती है। तुलसी का पौधा भारतीय घरों में विशेष महत्व रखता है इसे केवल पौधा नहीं, बल्कि घर का संरक्षक और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। तुलसी के पौधे पर जल अर्पित करना और उसके पास दीपक जलाना शुभ रहता है। यह न केवल स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि करता है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सहानुभूति को भी बढ़ाता है। प्रतिदिन तुलसी के पास दीपक जलाने से मानसिक तनाव कम होता है और घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है। पूजा-सज्जा में ध्यान देने योग्य एक और पहलू है सामग्री का चयन फूलों में गुलाब, चमेली और गेंदा के फूल विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। दीपक के लिए हल्का तिल का तेल या घी का दीपक प्रयोग करना उत्तम रहता है। इसके अलावा, घर के मुख्य स्थानों में हल्का रंग और साफ-सुथरा वातावरण रखना भी आवश्यक है। अंधेरे को दूर करने के लिए दीपक का नियमित प्रयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। घर में नियमित पूजा और सजावट करने से घर में न केवल आध्यात्मिक बल्कि भौतिक लाभ भी होता है परिवार के सदस्य स्वस्थ और खुशहाल रहते हैं। बच्चों की पढ़ाई और करियर में सकारात्मक प्रभाव महसूस किया जा सकता है। तुलसी और दीपक का संयोजन घर की समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, यह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का एक सरल और प्रभावशाली तरीका भी है। आज के समय में जब लोग तनाव और भागदौड़ की जिंदगी जी रहे हैं, घर में पूजा-सज्जा एक प्रकार का मानसिक विश्राम भी प्रदान करती है। यह रिवाज केवल परंपरा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी माना गया है। प्रकाश और प्राकृतिक सजावट का प्रभाव घर में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने में महत्वपूर्ण होता है। घर में पूजा-सज्जा का महत्व केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी माध्यम है। नियमित दीपक जलाना, तुलसी को जल अर्पित करना और ताजे फूलों से घर को सजाना हर परिवार के लिए लाभकारी और शुभ होता है।

श्रीमद् भगवद् गीता का रहस्य और सार: आसान भाषा में समझें

BHAGAVAT

श्रीमद् भगवद् गीता का रहस्य क्या है? गीता का सार, अध्यायों का महत्व, रोज़ कौन सा अध्याय पढ़ें और मुक्ति का मार्ग—सबकुछ आसान, बोलचाल की हिंदी में समझें। यह लेख शिक्षा-प्रधान, विश्वसनीय और सरल भाषा में तैयार किया गया है। गीता का रहस्य: आखिर श्रीकृष्ण क्या कहना चाहते थे? श्रीमद् भगवद् गीता सिर्फ 700 श्लोकों की पुस्तक नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाला एक आध्यात्मिक विज्ञान है। महाभारत के युद्ध के बीच अर्जुन मोह और भ्रम में थे। सामने अपने ही रिश्तेदार थे, इसलिए उनका मन युद्ध करने को तैयार नहीं था। तभी श्रीकृष्ण ने समय रोककर अर्जुन को वह ज्ञान दिया, जिसे हम आज “भगवद् गीता” कहते हैं। इस ज्ञान का उद्देश्य सिर्फ युद्ध कराना नहीं, बल्कि मनुष्य को “कर्तव्य, विवेक और आत्मा” का असली अर्थ समझाना था। कई आध्यात्मिक आचार्यों के अनुसार, गीता का मूल सार दो शब्दों में समझा जा सकता है— “पैकिंग और माल” जिसका अर्थ है— शरीर पैकिंग है और आत्मा असली माल है। जो आत्मा को पहचान लेता है, वही जीवन का असली रहस्य जान लेता है। कथा की तरह समझें: क्यों अर्जुन को युद्ध के लिए कहा गया? अर्जुन एक क्षत्रिय थे और उनका जीवन-धर्म युद्धभूमि से भागना नहीं था। लेकिन मोह के कारण वे कर्तव्य भूल चुके थे। श्रीकृष्ण जानते थे कि यह मोह थोड़ी ही देर का है। इसलिए उन्होंने अर्जुन को झकझोरकर कहा— “तुम सिर्फ अपने धर्म का पालन करो, अहंकार और मोह छोड़ दो।” कृष्ण ने अर्जुन को यह नहीं कहा कि – “सबको मार डालो” बल्कि कहा— “कर्तव्य करो, पर अहंकार मत करो।” यही कर्मयोग का मूल है। कृष्ण का ‘अंतरआशय’: जो समझना सबसे कठिन है कृष्ण स्वयं कहते हैं कि गीता का गहराई वाला अर्थ हर कोई नहीं समझ सकता।उनका कहना था कि— 1000 में से 1 इंसान गीता का स्थूल अर्थ समझ सकता है। ऐसे 1000 में से 1 ही सूक्ष्म अर्थ समझता है। और ऐसे ही कई स्तरों को पार करने के बादएक व्यक्ति कृष्ण का असली “अंतरआशय” समझ पाता है। यही कारण है कि गीता पर हजारों टीकाएँ लिखी गईं, लेकिन असली मर्म बहुत कम लोग समझ पाते हैं। ‘पैकिंग और माल’ का असली मतलब क्या है? इस दुनिया में हर इंसान को हम उसके शरीर के आधार पर पहचानते हैं।किसी का शरीर सुंदर है, किसी का छोटा है, कोई बूढ़ा है, कोई जवान। पर असली सत्य यह है— शरीर बदलता है, आत्मा नहीं बदलती। यह वैसा ही है जैसे बाजार में अलग-अलग पैकिंग होती है, लेकिन अंदर का माल एक जैसा शुद्ध हो सकता है। कृष्ण कहते हैं— “अपने अंदर के माल को पहचानो, वही मैं हूँ, वही तुम हो।” जब कोई इस सत्य को समझ लेता है, उसका जीवन बदल जाता है। गीता रोज़ क्यों पढ़नी चाहिए? भारतीय परंपरा में कहा जाता है कि— उपनिषद गाय हैं और गीता उनका दुग्ध है। यानी उपनिषद का सार गीता में ही मिलता है। गीता को समझने के चार चरण बताए गए है पठन/श्रवण – पहले सिर्फ शब्द समझ आते हैं मनन – फिर मतलब समझ आने लगता है निदिध्यासन – समझ को जीवन में उतारने की प्रक्रिया अनुभव – जब ज्ञान जीवन का हिस्सा बन जाता है इसीलिए गीता को बार-बार पढ़ना आवश्यक माना गया है। कौन सा अध्याय रोज़ पढ़ना चाहिए? हालाँकि पूरी गीता ज्ञान का खजाना है, लेकिन कुछ अध्याय खास रूप से दैनिक पठन के लिए जरूरी माने गए हैं। इसमें पूरी गीता का सार दिया गया है। 78 श्लोकों वाला यह अध्याय जीवन के व्यावहारिक मार्ग पर सबसे ज्यादा प्रकाश डालता है। रोज़ थोड़ी मात्रा में पढ़ना भी बहुत उपयोगी माना जाता है। अध्याय 5 – कर्मयोग का सरलतम वर्णन कर्म और मन के संबंध को समझाता है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर हर जीव में समान रूप से रहते हैं। यह अध्याय जाति-भेद, छुआ-छूत और भेदभाव खत्म करने का संदेश देता है। अध्याय 15 – आत्मा का ज्ञान इसमें बताया गया है कि शरीर नश्वर है और आत्मा अमर है। यह अध्याय ‘पुरुषोत्तम योग’ भी कहलाता है। अध्याय 14 – प्रकृति के तीन गुण सत्व, रज और तम – इन तीन गुणों से मनुष्य का स्वभाव कैसे बनता है, यह समझाया गया है। किस अध्याय से मुक्ति का मार्ग बताया गया है? अध्याय 16 और 18 – मोक्ष का ज्ञान इन अध्यायों में बताया गया है कि—कौन से गुण मनुष्य को बांधते हैं कौन से गुण मनुष्य को मुक्त करते हैं जीवन और मृत्यु के बाद आत्मा किस दिशा में जाती है अध्याय 8 – अंतिम समय का विज्ञान मृत्यु के समय व्यक्ति जो सोचता है, उसकी आत्मा वहीं पहुंचती है। इसलिए इस अध्याय को मरते हुए व्यक्ति को सुनाना लाभकारी माना जाता है। यह अध्याय “अक्षर ब्रह्म योग” भी कहलाता है। गागर में सागर: गीता का सार 12 सरल वाक्यों में 1. शरीर अस्थायी है, आत्मा अमर है।2. मनुष्य को अपने कर्तव्य से कभी नहीं भागना चाहिए।3. कर्म करो, फल की चिंता मत करो।4. मोह और डर मनुष्य को कमजोर बनाते हैं।5. ज्ञान और विवेक जीवन की असली शक्ति हैं।6. हर जीव में भगवान समान रूप से मौजूद हैं।7. मन को जीतने वाला संसार को जीत लेता है।8. सही विवेक मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाता है।9 लोभ, क्रोध, अहंकार से दूरी जरूरी है।10 जीवन में संतुलन सबसे बड़ी साधना है।11. भक्त, ज्ञानी और कर्मयोगी—सब ईश्वर तक पहुँच सकते हैं।12. आत्मा को पहचानना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है। FAQs नहीं। गीता का ज्ञान सार्वभौमिक है और हर धर्म व हर व्यक्ति के लिए उपयोगी है। हाँ। गीता आपको सही निर्णय, मानसिक शांति और जीवन का उद्देश्य समझाती है। मूल गीता दार्शनिक है, लेकिन सरल भाषा में टीकाएँ उपलब्ध हैं, जिन्हें हर कोई समझ सकता है। अध्याय 12 (भक्ति योग) सबसे सरल और सहज माना जाता है। हाँ, रोज़ कुछ श्लोक पढ़ना भी मन को शांत और मजबूत बनाता है।

Religious: श्री जी के भामंडल की स्थापना, संस्कार और आचरण में परिवर्तन आना चाहिये

Religious

Religious change in the establishment of Shri Ji Bhamandal भोपाल। धार्मिक क्रिआओं तथा संत समागम से संस्कार और आचरण में परिवर्तन आना चाहिये-“भाव से ही भव सुधरता है और भाव से ही भव विगड़ता है”-“भाव शुद्धी हमारे धर्माचरण का मुख्य लक्ष्य होंना चाहिये उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने सोनागिरि स्थित दि. जैन मंदिर में प्रवास के दौरान व्यक्त किये। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रातःकाल मुनि के मुखारविंद से पिपलानी दि.जैन मंदिर में शांतिधारा संपन्न हुई तत्पश्चात सोनागिरि दि. जैन मंदिर में पधारे एवं भगवान के मस्तक पर तीन खंड का छत्र एवं श्री जी के भामंडल की स्थापना कराई। इस अवसर पर मुनि श्री ने सोनागिरि क्षेत्र के लोगों की सराहना करते हुये कहा अवधपुरी नजदीक होंने से आप लोगों ने चातुर्मास और गुरु समागम का नियमित आनंद लिया है। सन्त-समागम उन्होंने कहा आचार्य गुरुदेव मूकमाटी में कहते है कि”सन्त-समागम की यही तो सार्थकता है,संत बने या न बने संसार का अन्त दिखने लगता है” उन्होंने कहा कि धार्मिक क्रिआओं और संत समागम से यदि हमारे संस्कार और आचरण में परिवर्तन नहीं आया तो हमारी सभी धार्मिक क्रियायें और संतों का सानिध्य शून्य हो जाऐगा! मुनि श्री ने कहा आजकल क्रिआओं को तो प्रमुखता देते हें लेकिन भावों को गौण कर देते है, जबकि “धर्म का उद्देश्य अच्छीसोच, अच्छे विचार, और अच्छी भावना का होंना चाहिये जिससे हमारा मन हल्का रह सके,उन्होंने कहा कि यदि जीवन को अच्छा बनाना चाहते हो तो अपने मन के भीतर उतरो, और आत्मोनुखी दृष्टि को जगाइये तभी आपकी धार्मिक क्रियायें जिसमें पूजन प्रवचन और स्वाध्याय, जाप,वृत उपवास करना सार्थक हो, उन्होंने कहा कि आप लोग अच्छे भावों के साथ सभी क्रिआओं की शुरूआत करते हो लेकिन कभी कोई विपरीत निमित्त आया कि तुरंत करंट लग जाता है,तथा भावधारा बदल जाती है जैसे कंही विजली के नंगे तार को छू लिया हो,अपने भावों के तारों में सही समझ का इंशोलेसन चड़ाकर रखो जिससे निमित्त कैसा भी आऐ आप स्पार्किंग से बच सको। सम्यक् दर्शन उन्होंने कहा कि आप लोग पूजा पाठ वृत उपवास खूव कर रहे हो यह अच्छी बात है,”सम्यक् दर्शन के अभाव में कोई भी क्रिया कार्यकारी नहीं होती” आप ऊपर से कितने ही बदल जाओ अपने आपको धर्मात्मा बना लो लेकिन यदि अंदर से भाव विचार और व्यवहार पवित्र नहीं हुये तो आपका उद्धार संभव नहीं, उन्होंने कहा कि आप धर्मिक क्रियायें कर रहे हो यह अच्छी बात है,लेकिन धर्म के मर्म को समझो धर्म का मर्म समझोगे तभी आपका कर्म सुधरेगा अन्यथा धर्मी के रुप में आपकी यह पहचान कोरी आत्ममुग्धता है, उन्होंने मूल में भूल की बात करते हुये कहा अपने मन को समझाइए जो पल में रूठ जाता है,तो पल में उचट जाता है,और पल में भड़क जाता है इसको तभी सम्हाल सकते हो जब आप केन्द्र में आत्मा को स्थिर रख कर जीने का अभ्यास करोगे तथा आत्मज्ञान से अपने आपको शुद्ध करोगे तो आप अपने लक्ष्य और पुरुषार्थ को जगा पाओगे और छोटी छोटी बातों से बच जाओगे इसलिये संत कहते है कि अपने भाव को सम्हालो और अपने स्वभाव को पहचानो कि “में कौन हुं”? मुनि श्री ने एक उदाहरण के माध्यम से समझाया कि जैसे आप एक जिम्मेदार नागरिक होंने के नाते आपकी इच्छा कभी अपराध या गलत कार्य करने की नहीं होती हमेशा आपको अपनी छवि की याद रहती है कि यह कार्य मेरी छवि के अनुरुप नहीं है, उसी प्रकार जब आपको अपने स्वरूप का वोध हो जाऐगा कि यह कार्य मेरे खानदान मेरे कुल,मेरे धर्म के अनुकूल नहीं है,यह वोध आपके जीवन में संयम लाता है और जैसे जैसे यह वोध और गहरायेगा कि”में एक शुद्ध आत्मा हूं” अंतरंग में यह धारा विकसित हो जाऐगी तथा भटकाव समाप्त होकरभाव विशुद्धिआ जाऐगी तथा जीवन व्यवहार परिवर्तित हो जाऐगा।

Muni Shri Pramansagar: आलोचात्मक शव्दों के प्रयोग से बात और विगड़ती है

Muni Shri Pramansagar

Muni Shri Pramansagar Use of critical words makes matters worse भोपाल। “आरोप परख,आलोचात्मक,अपमान जनक आदेशात्मक इन चार सूत्रों का ध्यान रखते हुये यदि आप अपने बचनों का ध्यान रखेंगे तो आप विनम्रता की प्रतिमूर्ति कहलायेंगे” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने व्यक्त किये। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया शनिवार को प्रातः6 बजे मुनिसंघ का मंगलविहार पिपलानी दि. जैन मंदिर होते हुये सोनागिरि कालोनी की ओर होगा तथा प्रातःकालीन मंगल प्रवचन एवं आहार चर्या उपरांत वापिस अवधपुरी लौट आऐंगे एवं सांयकालीन शंकासमाधान होगा रविवार को प्रातः8:30 बजे प्रवचन के उपरांत विद्याप्रमाण गुरुकुलम् टीम द्वारा आमंत्रित करते हुये भोपाल जैन समाज बंधुओं के साथ 10:30 बजे से दीपावली मिलन समारोह रखा गया है तथा सभी के लिये भोजन व्यवस्था की गई है। अप्रिय बात मत करो मुनि श्री ने कहा पूंछतांछ किये बिना सीधे सीधे आरोपात्मक भाषा का प्रयोग कभी नहीं करना चाहिये जो बात आपको अच्छी नहीं लगती वह बात दूसरों को भी अच्छी नहीं लगेगी, कोई भी घटना घटे तो तुरंत अप्रिय बात मत करो उसे भी अपनी बात रखने का अवसर दीजिये, गलत का प्रतिकार गलत तरीकों से नहीं हो सकता है,दूसरा है “आलोचात्मक शव्दों का प्रयोग” न करते हुये उसे गल्ती का अहसास कराओ आलोचात्मक शव्दों के प्रयोग से बात और विगड़ेगी और वह आलोचना सुनकर आपसे दूर हो जाऐगा, उदाहरण के लिये मान लीजिये घर में पत्नी या बहु ने सब्जियां बनाई और मिर्च ज्यादा हो गयी तो सीधे सीधे वह बात न कहते हुये कह दो कि खाना बहुत अच्छा बना है,पर आज खाना बनाते समय शायद मन इधर उधर भटक गया होगा इसलिये मिर्ची ज्यादा हो गई, इससे आपने अपनी बात भी कह दी और उसे बुरा भी नहीं लगा इसीलिए कहा गया है कि “अच्छा देखोगे और अच्छा बोलोगे तभी अच्छा होगा,बुरा वोलने बाले के कभी अच्छे परिणाम नहीं निकलते, बोलचाल में तो सदैव अमीरी झलकना चाहिये संसार में जितने भी अमीर और अच्छे लोग है उनकी वाणी में सहजता और विनम्रता झलकती है,भले ही आप अमीर न भी हों लेकिन बोलचाल में गरीब क्यों बनते हो? देश की संस्कृति है मुनि श्री ने कहा कि भले ही आपका वह कर्मचारी हो या डिराईबर यदि आप उससे जी लगाकर बात करेंगे तो उसे भी अच्छा लगेगा और वह और अच्छे से कार्य को करेगा उन्होंने कहा एक बात सदैव ध्यान रखना कि “मान दैने से ही मान मिलता है,तथा अपमान करने वाला स्वतःअपमानित होता है” मुनि श्री ने कहा कि किसी को भी छोटा या तुच्छ मानकर ब्यव्हार मत करो जिससे कोई अपने आपको अपमानित महसूस करें कभी कभी अपमान करने से ऐसी गांठ वन जाती है,जो कि सर्वनाश का कारण वनती है मुनि श्री ने कहा कि यह तो हमारे देश की संस्कृति है कि अपने से बड़ों को जी लगाकर तथा सम्मान सहित बोलने से सभी को अच्छा लगता है। कोई भी कार्य हो किसी के साथ आदेशात्मक भाषा के साथ उपयोग न करें।

Yoga: मन और शरीर विकार मुक्त सोहम योग … आर्यिका विश्वयशमति माताजी

Soham Yoga free

Soham Yoga free from disorders of mind and body Aryaka Vishwayashmati Mataji भोपाल।आध्यात्मिक चेतना का नव संचार सोहम योग अपनी आंतरिक चेतना को आदि आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का सरल उपाय सोहम् योग। मन और शरीर को तनाव रहित करके शांति प्रदान करने के साथ-2 प्रकृति से जुड़ने का यह माध्यम सोहम् योग वर्तमान परिवेश में मानसिक दबाव में शारीरिक स्वास्थ्य सामंजस को लेकर सोहम योग घर-घर स्वदेशी तथा पर्यावरण संरक्षण एवंस्वच्छ भोपाल को लेकर एक अभियान सृष्टि भूषण माताजी विश्वयशमति माताजी द्वारा मंगलवारा मंदिर कमेटी एवं दिगंबर जैन महासभा के संयुक्त तत्वाधान में सर्व समाज हेतु सर्व समाज के लिए हुआ सुबह वोट क्लब पर सोहम योग आर्यिका रत्न सृष्टि भूषण माताजी के परम सानिध्य में विश्वयशमती माता जी के निर्देशन में हुआ। स्वास्थ्य एवं मानसिक चेतना कार्यक्रम में आदित्य जैन मनिया एवं दिगंबर जैन महासभा के अध्यक्ष संजय जैन मुंगावली ने बताया सुबह सृष्टि भूषण माताजी संसंघ मंगलवारा जैन मंदिर से प्रस्थान करके वोट क्लब पहुंची। उनके साथ समाजजन महिला बच्चे बहु मंडल महिला मंडल बैय्या वृत्ति समिति जिनवाणी समिति के सभी लोग थे। पदयात्रा निकालूंगा कार्यक्रम को लेकर जैन समाज में उत्साह था उल्लेखनीय है कि श्रृष्टि भूषण माताजी सामाजिक एवं राष्ट्र हित के विषय को लेकर हमेशा जनहित के कार्यों निरंतर समाज को दिशा निर्देशित करती रहती है। कार्यक्रम में भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्वच्छता एवं पर्यावरण को लेकर आर्यिका माता का यह अभियान निश्चित तौर पर सराहनीय है। बड़े तालाब संरक्षण के लिए मैं हमेशा तत्पर हु जल्दी ही पदयात्रा निकालूंगा दक्षिण पश्चिम विधायक भगवान दास सबनानी जी ने कहा कि आर्यिका संघ के समाज और एवं राष्ट्रहित के कार्यों से में अभीभूत समाज के साथ हूं एवं योग और स्वच्छता तथा पर्यावरण संरक्षण हमारी नैतिक आवश्यकता है जैन समाज की पहल का स्वागत है । योग क्रियाएं करवाई कार्यक्रम में प्रमोद जैन हिमांशु पंकज जैन सुपारी विजय श्वेता सतीश शीतल डॉ अनुराग मनोज मन्नू राकेश अनुपम पदम सर्वज्ञ शैलेंद्र जैन माया नरेंद्र वर्धमान इंद्रजीत सिंह राजपूत संजय जैन खाली चुन्नी पंकज जैन दीपेश जैन टेलर रोहन जैन प्रयास जैन जयेश जैन पिंटू जैन सहित बहू मंडल भक्त मंडल भैया वृत्ति समिति जिनवाणी समाज उपस्थित रही। योगाचार्य अशोक जैन और राजीव जैन त्रिलोक ने योग क्रियाएं करवाई।

Bhopal News: गोवर्धन पूजा पर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, चंबल एकता मंच का आयोजन

Lord Shri Krishna on Govardhan Puja

Cultural presentations dedicated to Lord Shri Krishna on Govardhan Puja भोपाल। शहर के नागेश्वर धाम मंदिर, स्मार्ट सिटी रोड ,जवाहर चौक परिसर में चंबल एकता मंच भोपाल की ओर से गुरूवार को गोवर्धन पावन पर्व पर गोवर्धन महाराज पूजा, परिक्रमा, राधा-कृष्ण रास प्रस्तुति , गोवर्धन आरती और चंबल क्षेत्र के पारम्परिक व्यंजनों के भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता एवं क्षेत्रीय संस्कृति तथा परंपराओं का सुंदर संगम रहा। विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया कार्यक्रम का शुभारंभ सायं 7 बजे हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, चंबल क्षेत्र के लोगों एवं विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। आयोजन में मध्यप्रदेश शासन के हुजूर विधान सभा क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व प्रोटेम स्पीकर म प्र विधान सभा रामेश्वर शर्मा, भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधान सभा क्षेत्र के विधायक भगवानदास सबनानी, भोपाल नगर निगम की महापौर मालती राय, पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा, महाराणा प्रताप सामाजिक ट्रस्ट के ट्रस्टी डी एस भदौरिया , म प्र राजपूत समाज के महा सचिव दीपक चौहान , वार्ड 80 की पार्षद एवं जोन 18 की अध्यक्ष सुनीता गुड्डू भदोरिया , वार्ड 81 की पार्षद बविता डोंगरे, वार्ड 66 के पार्षद जीत राजपूत पार्षद जगदीश यादव, पार्षद आरती अनेजा, mic सदस्य मनोज राठौर, राघव तिवारी, नरेश शर्मा,गजेन्द्र कंसाना कमलेश राठौर, मंडल अध्यक्ष मनोहर मीणा , बीएस बाजपेयी , धीर सिंह भदौरिया , रामवीर सिकरवार, कप्तान सिंह यादव, शशिकांत शर्मा, अशोक बघेल, ज्ञान सिंह कुशवाह, रणवीर बघेल, हेमंत परिहार आदि सहित कार्यक्रम के संयोजक शैलेंद्र भदौरिया बड़ी संख्या में निवासरत चंबल के भिण्ड , मुरैना ग्वालियरी, धोलपुर, इटावा, आगरा, दतिया आदि क्षेत्रों के मूल निवासी तथा अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। पूजन के पश्चात श्रद्धालुओं ने गोवर्धन महाराज की परिक्रमा कर आशीर्वाद प्राप्त किया। राधा-कृष्ण रास प्रस्तुति एवं भजन संध्या ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम के अंतर्गत चंबल क्षेत्र के पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजनों का भंडारा आयोजित हुआ, जिसमें उपस्थित सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। प्रतिभाओं को सम्मानित किया इस अवसर पर चंबल एकता मंच के अध्यक्ष विष्णुपाल सिंह भदौरिया (गुड्डू) ने अपने परिवार, मित्रों एवं चंबल समाज के साथ धार्मिक परंपराओं के अनुरूप गोवर्धन पूजा संपन्न कर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ प्रदान की । उन्होंने कहा कि यह सामूहिक आयोजन “एकता, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक” है। इस अवसर पर चंबल क्षेत्र की प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन चंबल एकता मंच के मीडिया प्रभारी हेमंत बहादुर सिंह परिहार ने किया तथा आभार प्रदर्शन चंबल एकता मंच के महासचिव डॉ. रणवीर सिंह बघेल ने किया।

Bhopal News: मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज करेंगे शंका का समाधान,धर्म सभा में दिए गुरूमंत्र

Muni Shri Praman Sagar Maharaj

Muni Shri Praman Sagar Maharaj resolve doubts भोपाल। “अच्छा देखू,अच्छा बोलूं, अच्छा करूं,औरअच्छा बनूं- यह चार भावनायें सभी के दिल और दिमाग में रहेंगी तो चारों ओर अच्छा ही अच्छा होगा” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने अवधपुरी के विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में गुरूवार को धर्म सभा में व्यक्त किये। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया शनिवार 25 अक्टूबर को प्रातः मुनिसंघ पिपलानी दि. जैन मंदिर की बंदना करते हुये सोनागिरि में पहुंचेंगे तथा प्रातःकालीन प्रवचन सभा को सम्वोधित करेंगे एवं आहार चर्या यंही से ही संपन्न होगी दौपहर में सामायिक के उपरांत बापिस अवधपुरी पहुंचेंगे एवं सांयकालीन शंकासमाधान संपन्न होगा। विसंगति में भी संगति 26अक्टूबर को प्रातः8:30 बजे से रविवारीय धर्मसभा एवं दीपावली मिलन कार्यक्रम रखा गया है। इस अवसर पर मुनि श्री ने कहा कि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महाराज ने हायकू लिखा “आलोचन से लोचन खुलते, सो स्वागत है” आलोचना सुनने से स्वंय के प्रति सजग हो जाओ, तो कभी दुःख नहीं होगा और जब दुःख नहीं होगा तो बुरा भी नहीं हो सकता उन्होंने कहा कि अच्छा बनने के लिये पहला सूत्र है “पांजेटिव एटिट्यूड” अर्थात बुराई मेंअच्छाई,दुःख में सुख,प्रतिकूलता में अनूकूलता, विसंगति में भी संगति देखने की कोशिश करें। दृष्टीकोण बदल गया मुनि श्री ने कहा कि दुःख तो सभी के जीवन में आता है, लेकिन दुःख के क्षणों में भी जो सुख खोज लेता है वही इंसान सुखी है। उन्होंने एक घटना सुनाते हुये कहा कि एक व्यक्ति के मकान में आग लग गई लोग आऐ और उन्होंने संवेदना व्यक्त की तो उसने कहा कि मुझे इस बात का दुःख नहीं कि मेरा मकान जल गया मुझे खुशी इस बात की है कि मेरा परिवार बच गया मकान तो फिर भी बन जाऐगा लेकिन यदि परिवार चला जाता तो कुछ भी नहीं बचता मुनि श्री ने कहा कि यदि आपका दृष्टीकोण बदल गया तो विपत्ति में संपत्ति,प्रतिकूलता में अनूकूलता दिखने लगेगी। सभी धर्मों के ग्रंथ मुनि श्री ने कहा कि गुरुओं के सानिध्य में रहकर यदि आपने अपनी सोच को सकारात्मक रखना शुरु कर दिया तो फिर तुम्हें न तो किसी व्यवस्था से सिकायत रहेगी और न ही समाज और रिस्तेदारों तथा घर परिवार से सिकायत रहेगी। यदि नकारात्मक सोच रखोगे तो नकारे हो जाओगे उन्होंने कहा कि अपने व्यवहार में बदलाव लाइये और अपने आपको भीतर से सम्हालने की चेष्टा कीजिये उन्होंने विवेकानंद का उदाहरण देते हुये कहा कि एक बार वह धर्म संसद में गये तो सभी धर्मों के ग्रंथ एक के ऊपर एक रखे थे लेकिन सबसे नीचे “गीता” थी तो किसी ने मजाक उड़ाते हुये कहा कि देख लो आपके धर्म ग्रंथ को सबसे नीचे रखकर आपका अपमान किया जा रहा है तो विवेकानंद ने सौम्यता के साथ कहा कि कोई अपमान नहीं उसे सही जगह रखा गया है क्यों कि वह फाउंडेशन है, सकारात्मक सोच का परिणाम हमेशा अच्छा ही निकलता है यह है बुराई से अच्छाई निकालने का “दृष्टिकोण” यदि आप अच्छे से रहोगे तो आपको हर जगह अच्छा ही अच्छा दिखेगा।