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मुख्यमंत्री ने भवानी मंदिर स्थल का नामकरण कौशल्या धाम करने की घोषणा

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रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय कोरबा में  राम कथा महोत्सव में हुए शामिल मुख्यमंत्री ने जगद्गुरू  रामभद्राचार्य के दर्शन कर लिया आशीर्वाद, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की मुख्यमंत्री ने भवानी मंदिर स्थल का नामकरण कौशल्या धाम करने की घोषणा रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय कोरबा जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान कोरबा नगरीय क्षेत्र स्थित भवानी मंदिर परिसर में आयोजित  राम कथा महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने परिसर में राम कथा वाचन हेतु पधारे   1008 जगद्गुरू  रामभद्राचार्य के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने महोत्सव में आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सभी को नवरात्रि एवं दशहरा पर्व की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि जगद्गुरू के कोरबा आगमन से ऊर्जाधानी की यह धरती धन्य हो गई है और उनका आशीर्वाद प्रदेशवासियों पर सदैव बना रहेगा।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन माटी माता कौशल्या का मायका है तथा हमारे आराध्य भगवान  राम का ननिहाल भी। यहां प्रभु  राम ने माता सीता एवं भाई लक्ष्मण के साथ अपने वनवास के दौरान अधिकांश समय व्यतीत किया।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में मोदी की गारंटी को पूरा करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। आने वाले दिनों में हमारा राज्य विकसित छत्तीसगढ़ के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के नेतृत्व में 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया गया है। प्रदेश में नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हमारे बहादुर जवान साहसपूर्वक नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं और हमें लगातार सफलता प्राप्त हो रही है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  रामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में प्रभु  राम के दर्शन का लाभ प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय भवानी मंदिर स्थल का नामकरण कौशल्या धाम करने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने भवानी मंदिर एवं नव-निर्मित कौशल्या धाम मंदिर पहुँचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की खुशहाली, शांति एवं समृद्धि की मंगल कामना की। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच माता भवानी की प्रतिमा पर नारियल, पुष्प, चंदन एवं फल अर्पित कर आरती की। मुख्यमंत्री  साय ने नव-निर्मित कौशल्या धाम मंदिर में माता कौशल्या की मूर्ति का नमन किया। इस मंदिर में माता कौशल्या की गोद में बाल रूप में भगवान  राम की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो मंदिर का मुख्य आकर्षण है। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर का अवलोकन कर निर्माण कार्य की सराहना की। इस दौरान उन्होंने मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं से भेंट कर उनका हालचाल जाना। स्थानीय श्रद्धालु एवं जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री  साय का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ओपन थियेटर मैदान में रामलीला महोत्सव में हुए शामिल मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय कोरबा प्रवास के दौरान शहर के घंटाघर ओपन थिएटर मैदान में आयोजित रामलीला महोत्सव में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने नगरवासियों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं तथा सभी के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि पर्व हमें शक्ति, भक्ति और सद्भाव का संदेश देता है। इन नौ दिनों में हम माता के नौ रूपों की आराधना करते हैं। उन्होंने आयोजन समिति को रामलीला महोत्सव के सफल आयोजन के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलीला हमारे जीवन मूल्यों और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि रामलीला देखकर बचपन की स्मृतियाँ ताज़ा हो गईं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  साय एवं अन्य अतिथियों का स्वागत राम दरबार की प्रतिकृति, शॉल एवं फल भेंट कर किया गया। इस अवसर पर उद्योग मंत्री  लखन लाल देवांगन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल, महापौर मती संजू देवी राजपूत सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

MP नगर निगम में बदलाव: कर्मचारियों की हाजिरी होगी फेस अटेंडेंस से, जानिए पूरी डिटेल

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भोपाल इंदौर की तर्ज पर मध्य प्रदेश के सभी नगर निगमों में फेस अटेंडेंस (चेहरे से उपस्थिति) व्यवस्था लागू की जाएगी। इसको लेकर अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग नगर निगमों को पत्र लिखेगा। दरअसल, निगमों में कर्मचारियों की सेवाओं को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि रिकॉर्ड में कर्मचारी सेवारत है लेकिन वे ड्यूटी पर कभी-कभार ही आते हैं। प्रत्येक कर्मचारी की फेस अटेंडेंस व्यवस्था कई कर्मचारी तो निगम के रिकार्ड में होकर मंत्री और अधिकारियों के बंगलों पर सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग यह अनिवार्यता करने जा रहा है कि निगम के अधिकारियों से लेकर प्रत्येक कर्मचारी की फेस अटेंडेंस व्यवस्था की जाए। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल की चोरी रोकने के लिए भी व्यवस्था का डिजिटलाइजेशन किया जाएगा।   नगरीय निकायों में भी लागू कराया बिजली, ईंधन और स्थापना व्यय की बचत के लिए भी कार्ययोजना बनाई जा रही है। बता दें कि नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय में भी फेस अटेंडेंस व्यवस्था लागू है। नगर निगम के बाद नगरीय निकायों में भी इसे लागू कराया जा रहा है। अधिकांश नगर निगमों में फेस अटेंडेंस व्यवस्था लागू की गई है। अब तक 70 हजार कर्मचारी इसके दायरे में लाए जा चुके हैं। इसके अलावा कर्मचारी जहां है उसे अपने मोबाइल से आन ड्यूटी उपस्थित दर्ज करना अनिवार्य है। इंदौर में यह प्रयोग सफल रहा है। इससे फर्जी लोग कम हो जाएंगे और समय पर वेतन मिलेगा। – संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास  

ओबीसी आरक्षण पर उच्च न्यायालय में प्रस्तुत हलफनामा: मध्यप्रदेश सरकार का पक्ष सामने आया

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भोपाल     राज्य शासन के संज्ञान में यह आया है कि कतिपय शरारती तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर यह कहते हुए कुछ टिप्पणियां/सामग्री वायरल की जा रही है कि वह टिप्पणियां माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मध्यप्रदेश शासन के ओबीसी आरक्षण से संबंधित प्रकरण के हलफनामे का भाग है।     शासन द्वारा उक्त शरारती सामग्री का गंभीरता से परीक्षण कराया गया है I माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष पिछड़ा वर्ग आरक्षण के प्रचलित प्रकरण में अभिलेख के प्रारंभिक परीक्षण से यह तथ्य सामने आया है कि उल्लेखित सोशल मीडिया की टिप्पणियां एवं कथन पूर्णतः असत्य, मिथ्या एवं भ्रामक है एवं दुष्प्रचार की भावना से किए गए हैं।     यह स्पष्ट किया जाता है कि वायरल की जा रही सामग्री मध्यप्रदेश शासन के हलफनामे में उल्लेखित नहीं है एवं ना ही राज्य की किसी घोषित या स्वीकृत नीति अथवा निर्णय का भाग हैं ।     प्रथम दृष्टया यह ज्ञात हुआ है कि वस्तुतः उल्लेखित सामग्री मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, अध्यक्ष श्री रामजी महाजन द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन (भाग-1) का हिस्सा हैं। उक्त आयोग का गठन दिनांक 17-11-1980 को किया गया था। आयोग द्वारा दिनांक 22-12-1983 को अपना अंतिम प्रतिवेदन तत्कालीन राज्य शासन को प्रेषित किया था।     राज्य शासन ने माननीय उच्चतम न्यायालय में ओबीसी आरक्षण संबंधित प्रकरण में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के विभिन्न प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किए हैं, जो शासन के अभिलेखों में सुरक्षित हैं। इन प्रतिवेदनों में महाजन आयोग की रिपोर्ट के साथ-साथ 1994 से 2011 तक के वार्षिक प्रतिवेदन तथा वर्ष 2022 का राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का प्रतिवेदन भी सम्मिलित है।     महाजन आयोग का उक्त प्रतिवेदन माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष भी अभिलेख का भाग रहा है। अतः माननीय उच्चतम न्यायालय में भी उक्त प्रतिवेदन स्वतः ही न्यायिक अभिलेख का हिस्सा है।     मध्यप्रदेश सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ एवं सामाजिक सद्भावना के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। शासन स्पष्ट करता है कि वायरल की जा रही सामग्री शासन के हलफनामे में उल्लेखित नहीं है एवं ना ही राज्य शासन के किसी स्वीकृत या आधिकारिक नीति या निर्णय का हिस्सा है। यह उल्लेखनीय है कि महाजन रिपोर्ट में 35% आरक्षण की अनुशंसा की गई थी, जबकि राज्य शासन ने 27% आरक्षण लागू किया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य शासन का निर्णय महाजन रिपोर्ट पर आधारित नहीं है।     भारतवर्ष में आरक्षण को लेकर विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के प्रतिवेदन, समय-समय पर गठित आयोग के रिपोर्ट एवं वार्षिक प्रतिवेदन तथा अन्य आधिकारिक सामग्री जो पूर्व से ही शासकीय अभिलेखों का भाग है एवं विभिन्न प्रकरणों में अभिलेखों का भी भाग है, माननीय न्यायालय के समक्ष हमेशा से प्रस्तुत की जाती रही हैं I     ऐसे एकेडमिक विश्लेषण एवं समय-समय पर गठित विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के अत्यंत विस्तृत प्रतिवेदनों एवं रिपोर्ट के किसी एक भाग को, बिना किसी संदर्भ के स्पष्ट किए सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के रूप में प्रस्तुत किया जाना एक निंदनीय प्रयास है I इसके संबंध में राज्य शासन द्वारा गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।    

कैबिनेट मीटिंग अपडेट: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसले

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रायपुर    मंत्रिपरिषद की बैठक में शासकीय सेवकों की आकस्मिक वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से वेतन के विरूद्ध अल्पावधि ऋण उपलब्ध कराने के संबंध में बैंकों/वित्तीय संस्थाओं से प्रस्ताव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इस संबंध में आगे की कार्यवाही के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। वित्त विभाग द्वारा प्रक्रिया में पात्र पाए जाने वाले बैंक/वित्तीय संस्था से सम्पादित किए जाने वाले एमओयू के प्रारूप का भी अनुमोदन किया गया।      मंत्रिपरिषद द्वारा दिव्यांगजनों के हित में एक बड़ा निर्णय लेते हुए राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (NDFDC) की बकाया ऋण राशि रूपये 24,50,05,457/- (रूपये चौबीस करोड़ पचास लाख पांच हजार चार सौ सत्तावन मात्र) एकमुश्त वापस किये जाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के द्वारा राज्य के दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और शिक्षा हेतु न्यूनतम 3 प्रतिशत ब्याज की दर से ऋण प्रदाय किया जाता है।      मंत्रिपरिषद द्वारा स्पेशल एजुकेटर के पदों पर सीधी भर्ती हेतु स्कूल शिक्षा विभाग के भर्ती एवं पदोन्नति नियम-2019 के प्रावधानों में एक बार के लिये छूट प्रदान करने का निर्णय लिया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि वित्त विभाग द्वारा शिक्षा विभाग को राज्य में 100 स्पेशल एजुकेटर की भर्ती की अनुमति दी गई है। शिक्षा विभाग के भर्ती नियम-2019 को शिथिल करते हुए स्पेशल एजुकेटर के पदों पर सीधी भर्ती चयन परीक्षा के स्थान पर एक बार मेरिट के आधार पर करने का अनुमोदन मंत्रिपरिषद ने प्रदान किया।      मंत्रिपरिषद की बैठक में आज मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हो रहे 1989 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री अमिताभ जैन को भावभीनी  विदाई दी गई और नवनियुक्ति मुख्य सचिव श्री विकास शील (भारतीय प्रशासनिक सेवा 1994 बैच) का स्वागत किया गया। 

भारत ने वर्ल्ड कप का आगाज़ जीत से किया, श्रीलंका को हराकर बढ़ाया आत्मविश्वास

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गुवाहाटी  आईसीसी वुमेंस वनडे वर्ल्ड कप का आगाज हो गया है. भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने मंगलवार को आईसीसी महिला विश्व कप के अपने पहले मुकाबले में श्रीलंका को डकवर्थ-लुईस-स्टरन (DLS) पद्धति के तहत 59 रनों से हराकर शानदार शुरुआत की.  दरअसल, दो बार बारिश के कारण मैच को 50 से घटाकर 47 ओवर का करना पड़ा था. डीएलएस द्वारा 271 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम 45.4 ओवर में 211 रनों पर ऑल आउट हो गई, जिसमें दीप्ति ने 54 रन देकर 3 विकेट चटकाए. अमनजोत कौर (56 गेंदों पर 57 रन) और दीप्ति शर्मा (53 गेंदों पर 53 रन) की सातवें विकेट के लिए 103 रनों की शानदार साझेदारी ने भारत को मुश्किल स्थिति से उबारकर 47 ओवरों में 269/8 का मजबूत स्कोर खड़ा करने में मदद की. शुरुआत में लड़खड़ाई भारत की पारी पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही. श्रीलंका की स्पिनर इनोका राणावीरा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 46 रन देकर चार विकेट चटकाए, जिसके चलते भारत 124/6 की मुश्किल स्थिति में पहुंच गया था. शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर जैसे बड़े नाम जल्दी पवेलियन लौट गए. लेकिन इसके बाद अमनजोत कौर और दीप्ति शर्मा ने पारी को संभाला. दोनों ने सतर्क और आक्रामक बल्लेबाजी का मिश्रण पेश करते हुए 103 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की, जिसने भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया. अमनजोत ने अपनी 57 रनों की पारी में आक्रामकता दिखाई, जबकि दीप्ति ने संयम के साथ 53 रन बनाए. श्रीलंका 211 पर ढेर 271 रनों के डीएलएस लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंका की शुरुआत कप्तान चमारी अटापट्टू (43 रन) और निलाक्षिका सिल्वा (35 रन) ने संभाली, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. दीप्ति शर्मा ने झटके 3 विकेट दीप्ति शर्मा ने अपनी ऑफ-स्पिन से 3 विकेट झटके, जबकि स्नेह राणा (2/32) और श्री चरणी (2/37) ने भी दो-दो विकेट लेकर श्रीलंका की पारी को 45.4 ओवरों में 211 रनों पर समेट दिया. भारत की क्षेत्ररक्षण और गेंदबाजी में चुस्ती ने श्रीलंका को दबाव में रखा, जिसके चलते वे लक्ष्य से काफी पीछे रह गए. श्रीलंका प्लेइंग इलेवन : चमारी अटापट्टू (कप्तान), हासिनी परेरा, हर्षिता समरविक्रमा, विशमी गुणरत्ने, कवीशा दिलहारी, नीलाक्षिका सिल्वा, अनुष्का संजीवनी (विकेटकीपर), सुगंधिका कुमारी, अचिनी कुलसुरिया, उदेशिका प्रबोधनी, इनोका राणावीरा. भारत प्लेइंग इलेवन: स्मृति मंधाना, प्रतीका रावल, हरलीन देओल, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), जेमिमा रोड्रिग्स, ऋचा घोष (विकेटकीपर), दीप्ति शर्मा, अमनजोत कौर, स्नेह राणा, क्रांति गौड़, श्री चरणी. बता दें कि इस वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया शानदार फॉर्म में है. टूर्नामेंट में कुल 28 मैच खेले जाने हैं. फाइनल मैच 2 नवंबर को होना है. भारतीय टीम अपनी पहली ट्रॉफी की तलाश में है. अबतक दो बार भारत वर्ल्डकप के फाइनल में पहुंची है, लेकिन उसे दोनों ही बार हार का सामना करना पड़ा है. लेकिन इस बार भारत ट्रॉफी की प्रबल दावेदार मानी जा रही है. भारत का अगला मैच 5 अक्टूबर को पाकिस्तान के साथ होना है.

हमास को 4 दिन का टाइमलाइन, ट्रंप की चेतावनी ने बढ़ाई तनाव की आशंका

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वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि हमास को उनकी गाजा शांति प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए करीब 3-4 दिनों का वक्त दिया गया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हमास इस प्रस्ताव को मानने से इनकार करता है, तो इसका बेहद दर्दनाक परिणाम निकलेगा। ट्रंप ने कहा कि हमास या तो इसे स्वीकार करेगा या नहीं, लेकिन अगर नकार दिया तो नतीजा बहुत ही दुखद होगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर चर्चा करने की कोई खास गुंजाइश नहीं बची है। इस प्रस्ताव को इजरायल और अरब देशों के नेताओं ने पहले ही हरी झंडी दे दी है, और अब हमास के फैसले का इंतजार है। वहीं जब अमेरिकी राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या इस प्रस्ताव पर सौदेबाजी की गुंजाइश है, तो ट्रंप ने कहा कि ज्यादा नहीं। क्या है ट्रंप का प्रस्ताव? बता दें कि सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की। इसके बाद वाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस प्रस्तावित योजना को जारी किया है, जिसके माध्यम से गाजा में जारी इजरा.ल-हमास युद्ध को समाप्त करने का प्रयास किया गया है। सोमवार को वाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद इजराजल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस योजना का समर्थन किया है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि हमास इस प्रस्ताव को स्वीकार करेगा या नहीं। ट्रंप की योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं..     गाजा को कट्टरपंथ से मुक्त और आतंकवाद-मुक्त क्षेत्र बनाया जाएगा, जो अपने पड़ोसियों के लिए कोई खतरा नहीं होगा।     गाजा का पुनर्निर्माण वहां के नागरिकों के हित में किया जाएगा, जिन्होंने लंबे समय से पीड़ा सही है।     दोनों पक्षों की सहमति पर युद्ध तत्काल समाप्त होगा; इजरायली सेना पीछे हटेगी और बंधकों की रिहाई की तैयारी की जाएगी। इस दौरान सभी सैन्य गतिविधियां स्थगित रहेंगी।     इजरायल द्वारा समझौता सार्वजनिक रूप से स्वीकार किए जाने के 72 घंटे के भीतर सभी बंधकों ( जीवित और मृत ) को वापस किया जाएगा।     सभी बंधकों की रिहाई के बाद इजरायल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 250 कैदियों और 1700 गाजा वासियों को रिहा करेगा, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल होंगे। मृत इजरायली बंधकों के बदले मृत गाजावासियों के शव भी लौटाए जाएंगे। प्रत्येक इजरायली बंधक के अवशेष की रिहाई के बदले इजराइल 15 मृत गाजावासियों के अवशेष जारी करेगा।     जो हमास सदस्य शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को स्वीकार करेंगे और अपने हथियार त्यागेंगे, उन्हें माफी दी जाएगी। जो सदस्य गाजा छोड़ना चाहेंगे, उन्हें सुरक्षित निकासी दी जाएगी।     समझौते के तहत गाजा में तुरंत पूर्ण मानवीय सहायता भेजी जाएगी, जिसमें आधारभूत ढांचे का पुनर्निर्माण भी शामिल होगा।     सहायता का वितरण संयुक्त राष्ट्र, रेड क्रीसेंट और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगरानी में होगा। राफा क्रॉसिंग को खोलने का निर्णय 19 जनवरी 2025 के समझौते के तहत तय तंत्र के अनुसार होगा।     गाजा का प्रशासन एक अस्थायी, तकनीकी और गैर-राजनीतिक फिलस्तीनी समिति को सौंपा जाएगा, जिसकी निगरानी 'बोर्ड ऑफ पीस' करेगा। इस निकाय के अध्यक्ष राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे और इसमें पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर सहित अन्य वैश्विक नेता सदस्य बनाए जाएंगे।     गाजा के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए एक विशेष योजना बनाई जाएगी, जिसमें पश्चिम एशिया की आधुनिक शहर परियोजनाओं में योगदान देने वाले विशेषज्ञ शामिल होंगे।     एक विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना की जाएगी जिसमें व्यापारिक रियायतें और विशेष शुल्क दरें निर्धारित की जाएंगी।     किसी को गाजा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, और जो लोग जाना या लौटना चाहें, उन्हें स्वतंत्रता दी जाएगी।     हमास और अन्य गुटों को गाजा के शासन में किसी भी प्रकार की भागीदारी की अनुमति नहीं होगी। पूरे क्षेत्र का पूर्ण निरस्त्रीकरण स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की निगरानी में किया जाएगा।     क्षेत्रीय साझेदार गारंटी देंगे कि हमास और अन्य गुट इस समझौते का उल्लंघन नहीं करेंगे और गाजा किसी के लिए खतरा नहीं बनेगा।     अमेरिका, अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर गाजा में एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) तैनात करेगा, जो स्थानीय फिलस्तीनी पुलिस बलों को प्रशिक्षित करेगा और सुरक्षा बनाए रखेगा।     इजरायल गाजा पर कब्जा नहीं करेगा और न ही उसे अपना हिस्सा बनाएगा। आईएसएफ द्वारा स्थिरता सुनिश्चित किए जाने के बाद, इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) चरणबद्ध रूप से क्षेत्र से हटेंगे, सिवाय उन सीमावर्ती इलाकों के जो अंतिम सुरक्षा सुनिश्चित होने तक नियंत्रण में रहेंगे।     यदि हमास इस प्रस्ताव को अस्वीकार करता है, तो सहायता और अन्य उपाय उन क्षेत्रों में लागू किए जाएंगे जिन्हें आईडीएफ ने आईएसएफ को सौंप दिया है।     शांति, सह-अस्तित्व और सहिष्णुता पर आधारित एक अंतरधार्मिक संवाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी।  

अवकाश के दिन बिजली बिल भुगतान आसान: खुलेंगे विशेष भुगतान केन्द्र

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भोपाल  मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत 07 अक्टूबर (महर्षि वाल्मीकी जयंती), 21 अक्टूबर (गोवर्धन पूजा), समस्त शनिवार (04, 11, 18 एवं 25 अक्टूबर) तथा समस्त रविवार (05, 12, 19 एवं 26 अक्टूबर)को बिल भुगतान केन्द्र सामान्य कार्य दिवसों की तरह कार्य करते रहेंगे। भोपाल शहर वृत्त के अंतर्गत चारों शहर संभाग यथा पश्चिम, पूर्व, दक्षिण तथा उत्तर संभाग के अंतर्गत सभी जोनल कार्यालय और दानिश नगर, मिसरोद, मण्डीदीप में बिल भुगतान केन्द्र उक्त अवकाश के दिन भी सामान्य कार्य दिवस की तरह खुले रहेंगे। बिजली उपभोक्ताओं से अपील है कि वे राजधानी के जोनल आफिस में पीओएस (pos) मशीन से कैश के जरिए बिल भुगतान तथा ऑनलाइन भी बिल भुगतान कर सकते हैं। कंपनी ने यह भी निर्देश दिए हैं कि कंपनी कार्य क्षेत्र के सभी 16 जिलों में बिजली वितरण केन्द्र/बिल भुगतान केन्द्र अवकाश के दिनों में खुले रहेंगे। इसके लिए सभी मैदानी महाप्रबंधकों को निर्देशित किया गया है। ऑनलाइन भुगतान करें और पाएं छूट मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निम्न दाब घरेलू उपभोक्ताओं को ऑनलाइन भुगतान करने पर उनके कुल बकाया बिल पर 0.50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है साथ ही अधिकतम छूट के लिए कोई सीमा बंधन नहीं है। इसी प्रकार उच्च दाब उपभोक्ताओं को प्रति बिल कैशलेस भुगतान पर 100 रूपये से 1000 रुपये तक की छूट दी जा रही है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने उपभोक्ताओं से बिजली का बिल ऑनलाइन भुगतान करने की अपील की है। कंपनी ने कहा है कि उपभोक्ताओं को एम.पी.ऑनलाईन, कॉमन सर्विस सेन्टर, कंपनी पोर्टल portal.mpcz.in (नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, यूपीआई, ईसीएस, बीबीपीएस, कैश कार्ड एवं वॉलेट आदि) फोन पे, अमेजान पे, गूगल पे, पेटीएम एप एवं उपाय मोबाइल ऐप से बिल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।  

कृषि क्षेत्र को नई ताकत: मुख्यमंत्री ने मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना को सराहा

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भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की समृद्धि के लिए हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए प्रदेश के राजगढ़ जिले की 'मोहनपुरा-कुंडालिया सिंचाई परियोजना' क्षेत्र की समृद्घि और किसानों की खुशहाली का आधार बन रही है। इस अनूठी परियोजना से जहां हर खेत में पानी पहुंच रहा है, वहीं उद्योगों को पानी मिलने और पेयजल की उपलब्धता ने नए निवेश के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। इससे आम-जीवन सुखमय हो रहा है। "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" पर आधारित विश्व की अनूठी परियोजना यह परियोजना "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" प्रणाली पर आधारित विश्व की अनूठी सिंचाई परियोजना है, जो मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' की अवधारणा को पूरा कर रही है। न केवल भारत के विभिन्न राज्यों से अपितु विदेशों के प्रतिनिधि दल भी आकर इसका अध्ययन कर रहे हैं। परियोजना को जल-संसाधन प्रबंधन के लिए भारत सरकार का प्रतिष्ठित 'सीबीआईपी' पुरस्कार भी मिल चुका है। प्रधानमंत्री की 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' की अवधारणा हुई फलीभूत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 'पर ड्रॉप, मोर क्रॉप' की अवधारणा दी. उनकी इस अवधारणा पर कार्य करते हुए हमारे इंजीनियर्स ने सिंचाई की अति आधुनिक तकनीकी "प्रेशराइज्ड पाइप नेटवर्क" पर काम करना प्रारंभ किया और उसका सुपरिणाम है 'मोहनपुरा कुंडलिया सिंचाई परियोजना'। इस सिंचाई परियोजना के माध्यम से न केवल 80% पानी बांध से किसानों के खेतों तक पहुंचता है, अपितु ऊंचे खेतों पर भी पानी आसानी से पहुंच जाता है. इसमें लगा 'स्काडा' (SCADA) आधारित ऑटोमेशन यह तय करता है कि फसलों की आवश्यकता के अनुसार किस क्षेत्र में कितना पानी पहुंचाना है। यह विश्व की अपनी तरह की अनूठी परियोजना है और आधुनिक युग की आवश्यकता भी, जब पानी की एक-एक बूंद का उपयोग आवश्यक है। नेवज नदी पर मोहनपुरा बांध और कालीसिंध नदी पर कुंडालिया बांध बनाकर शुरू की गई इस परियोजना से भूमिगत पाइप से सीधे खेत तक दबाव के साथ पहुंचाती है और ऊंचाई वाले खेत में भी पानी आसानी से पहुंचता है। इसके सेंसर और ऑटोमेशन से पानी का वितरण नियंत्रित होता है। यह क्रांतिकारी सोच थी, जिसने सूखाग्रस्त राजगढ़ जिले की किस्मत बदल दी। परियोजना के अंतर्गत 26 हजार किमी लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई है, इतनी लंबी प्रेशराइज्ड पाइप लाइन भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में एक मिसाल है। इसे जोड़ने के लिए 20 बड़े पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जो पानी को दबाव के साथ पाइप लाइन में भेजते हैं और पानी ऊंचे-नीचे खेतों तक आसानी से पहुंचता है। हर आउटलैट से लगभग एक से सवा हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है। 'स्काडा' आधारित ऑटोमेशन सिस्टम द्वारा पूरी प्रणाली को कंप्यूटर और सेंसर्स से जोड़ा गया है, जिससे कंट्रोल रूम से तय किया जा सकता है कि किस क्षेत्र को कितना पानी पहुंचाना है। केन्द्रीकृत पंपिंग प्रणाली से हर साल लगभग 69 मिलियन यूनिट बिजली की बचत होती है। इसकी एक और विशेषता यह है कि इसमें 'ला-रा' नैटवर्क का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें लगभग 1.5 लाख सेंसर्स और कंट्रोलर एक साथ जोड़े गए हैं, जो सौर ऊर्जा से चलते हैं। पंपिंग स्टेशर्न में लगे 'वैरिएबल फ्रीकवैन्सी ड्राइव्ज' फसलों की जरूरत और मौसम के अनुसार पानी का दबाव और मात्रा तय करते हैं। यह अत्यधिक आधुनिक सिंचाई प्रणाली आज पूरे विश्व के लिए पानी के इष्टतम उपयोग का अनूठा उदाहरण बन गई है।  

प्रशासनिक सर्जरी: मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर तबादले, 12 जिलों के कलेक्टर बदले गए

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भोपाल  मध्यप्रदेश में मंगलवार शाम को बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। सरकार ने 24 आईएएस (IAS) अफसरों के तबादले करते हुए 14 जिलों के कलेक्टर बदल दिए हैं। जिन जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं उनमें भिंड, पन्ना, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, डिंडौरी, रतलाम, मुरैना, निवाड़ी, सिंगरौली, अलीराजपुर, पांढुर्णा और सिवनी शामिल हैं। अपर कलेक्टर इंदौर और अपर कलेक्टर जबलपुर का भी ट्रांसफर कर दिया गया है। इस बड़े फेरबदल में सिंगरौली, छिंदवाड़ा, रतलाम, मुरैना और डिंडोरी के कलेक्टर हटा दिए गए हैं. सबसे अधिक चर्चा में भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव का तबादला रहा, जिन्हें भाजपा विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा से हुए सार्वजनिक विवाद के बाद हटाया गया है. महत्वपूर्ण नियुक्तियों में, भोपाल नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण को छिंदवाड़ा का नया कलेक्टर बनाया गया है, जबकि श्रम आयुक्त रजनी सिंह अब नरसिंहपुर की कलेक्टर होंगी. गौरव बेनल को सिंगरौली कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह तबादला आगामी प्रशासनिक और राजनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है. पूरी लिस्ट देखें.. क्र. अधिकारी का नाम, बैच तथा वर्तमान पदस्थापना नवीन पदस्थापना 1. श्री सुरेश कुमार (2010), कलेक्टर, जिला पन्ना वि.क.अ.-सह-आयुक्त, चम्बल संभाग, मुरैना 2. श्री शीलेन्द्र सिंह (2010), कलेक्टर, जिला छिंदवाड़ा अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, नगरीय विकास एवं आवास विभाग 3. श्रीमती नेहा मारव्या सिंह (2011), कलेक्टर, जिला डिण्डोरी संचालक, विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति, भोपाल 4. श्री संजीव श्रीवास्तव (2011), कलेक्टर, जिला भिण्ड अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक निर्माण विभाग 5. श्रीमती ऊषा परमार (2011), अपर आयुक्त (राजस्व), भोपाल संभाग, भोपाल कलेक्टर, जिला पन्ना 6. श्री शिवराज सिंह वर्मा (2011), अपर सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग अपर आयुक्त (राजस्व), भोपाल संभाग, भोपाल 7. श्री राजेश बाथम (2012), कलेक्टर, जिला रतलाम अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग 8. श्रीमती रजनी सिंह (2013), वि.क.अ.-सह-श्रम आयुक्त, मध्यप्रदेश, इंदौर कलेक्टर, जिला नरसिंहपुर 9. श्री नीरज कुमार वशिष्ठ (2013), संचालक, विमुक्त घुमन्तु एवं अर्धघुमन्तु जनजाति, भोपाल कलेक्टर, जिला पांढुर्णा 10. श्रीमती शीतला पटले (2014), कलेक्टर, जिला नरसिंहपुर कलेक्टर, जिला सिवनी 11. श्री अंकित अस्थाना (2014), कलेक्टर, जिला मुरैना उप सचिव, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग तथा अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश स्टेट इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 12. श्री लोकेश कुमार रामचन्द्र जांगिड (2014), कलेक्टर, निवाड़ी कलेक्टर, जिला मुरैना 13. श्री चन्द्रशेखर शुक्ला (2014), कलेक्टर, जिला सिंगरौली उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग 14. डॉ. अभय अरविन्द बेडेकर (2014), कलेक्टर, जिला आलीराजपुर अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल 15. श्री अजय देव शर्मा (2014), कलेक्टर, जिला पांढुर्णा उप सचिव, राजस्व विभाग तथा अतिरिक्त आयुक्त, भू-संसाधन प्रबंधन, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 16. श्रीमती नीतू माथुर (2014), अपर आयुक्त (राजस्व), रीवा संभाग, रीवा कलेक्टर, जिला आलीराजपुर 17. श्रीमती अंजू पवन भदौरिया (2014), मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला रायसेन कलेक्टर, जिला डिण्डोरी 18. श्रीमती जमुना भिडे (2014), सचिव, जनजातीय प्रकोष्ठ, राजभवन, भोपाल कलेक्टर, जिला निवाड़ी 19. श्रीमती संस्कृति जैन (2015), कलेक्टर, जिला सिवनी आयुक्त, नगर पालिक निगम, भोपाल तथा अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार) 20. श्रीमती बिदिशा मुखर्जी (2015), अपर प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 21. श्री किरोड़ी लाल मीना (2016), अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल कलेक्टर, जिला भिण्ड 22. श्री गौरव बैनल (2016), अपर कलेक्टर, जिला इंदौर कलेक्टर, जिला सिंगरौली 23. श्री हरेन्द्र नारायण (2016), आयुक्त, नगर पालिक निगम, भोपाल कलेक्टर, जिला छिंदवाड़ा 24. सुश्री मिशा सिंह (2016), अपर कलेक्टर, जिला जबलपुर कलेक्टर, जिला रतलाम

इलेक्ट्रिक गाड़ियों में अब आएगी आवाज! जानें क्या है AVAS और क्यों है ये जरूरी

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नई दिल्ली केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को पैदल यात्रियों और सड़क पर अन्य यूज़र्स के लिए और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें ऑकस्टिक व्हीकल अलर्ट सिस्टम (AVAS) की अनिवार्यता प्रस्तावित की गई है. तो आइये जानें क्या है ये सिस्टम और आम लोगों के लिए ये सिस्टम किस तरह से सुरक्षा प्रदान करेगा. क्या है प्रस्ताव? ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नियम के तहत, 1 अक्टूबर 2026 से लॉन्च होने वाले सभी नए पैसेंजर और माल-वाहन इलेक्ट्रिक वाहनों में AVAS सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा, जबकि पहले से उत्पादन में चल रहे मॉडल्स को 1 अक्टूबर 2027 तक इस नियम का पालन करना होगा. क्यों जरूरी है AVAS? AVAS, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए खास तौर पर ज़रूरी है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक इंजन वाले वाहनों की तुलना में बहुत शांत होते हैं. इससे सड़क पर पैदल यात्रियों और दोपहिया चालक सहित सभी के लिए सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलेगी. सरकार का मानना है कि इस कदम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी. मैंडेट का दायरा MoRTH की अधिसूचना के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से नए मॉडल और 1 अक्टूबर 2027 से मौजूदा मॉडल के लिए M और N कैटेगरी के इलेक्ट्रिफाइड वाहन AVAS के साथ उपलब्ध होंगे. यहाँ M कैटेगरी पैसेंजर व्हीकल और N कैटेगरी माल वाहक वाहनों के लिए है. इसका मतलब है कि इलेक्ट्रिक कार, बस, वैन और ट्रक सभी को AVAS के साथ अनिवार्य रूप से लैस करना होगा. हालांकि, मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और ई-रिक्शा इससे बाहर हैं.  कैसे काम करता है ये AVAS सिस्टम? यह सिस्टम वाहन के 20 किलोमीटर प्रति घंटे की कम स्पीड पर चलते समय आवाज उत्पन्न करता है, ताकि पैदल यात्री, साइकिल सवार और सड़क पर चलने वाले अन्य लोग वाहन के आने के बारे में जान सकें और सुरक्षित रहें. ये सिस्टम ऑटोमेटिकली 20 किमी/घंटा से कम की स्पीड पर और वाहन के रिवर्स करने के दौरान एक्टिव हो जाता है. वहीं हाई स्पीड में टायर और हवा की आवाज़ पर्याप्त होने के कारण यह सिस्टम बंद हो जाता है. क्या कहते हैं ग्लोबल एक्सपीरिएंस ग्लोबल रिपोर्ट्स भी यही बताते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन स्लो स्पीड में सड़क पर चल रहे पैदल यात्रियों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकते हैं. क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों में पारंपरिक इंजन के बजाय इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल होता है. ऐसे में स्लो स्पीड में कार से बिल्कुल आवाज नहीं आती है, जिससे सड़क पर चल रहे पैदल यात्रियों या दोपहिया वाहन चालकों को इस बात का आभास भी नहीं होता है कि, कोई चार पहिया वाहन उनके आसपास या पीछे से आ रही है.  अमेरिकी परिवहन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल और डीज़ल कारों की तुलना में पैदल यात्रियों के लिए 20 प्रतिशत अधिक और कम गति पर 50 प्रतिशत अधिक जोखिम पैदा करती हैं. AVAS पहले से ही अमेरिका, जापान और यूरोप में अनिवार्य है, और अब इसे भारत में भी अनिवार्य करने की तैयारी है. इन कारों में पहले से ही ये AVAS भारत में कुछ इलेक्ट्रिक वाहन पहले ही AVAS सिस्टम के साथ उपलब्ध हैं. जिसमें एमजी कॉमेट, टाटा कर्व ईवी, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक जैसे मॉडल शामिल हैं. इसके अलावा महिंद्रा द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए XEV 9e और BE 6 (पूर्व में BE 6e) भी इस तकनीक के साथ आते हैं, जो सड़क पर चल रहे पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों की सुरक्षा तय करते हैं. अन्य प्रस्तावित बदलाव AVAS नियम के अलावा सरकार ने यह भी प्रस्तावित किया है कि ट्यूबलैस टायर वाले वाहनों, जैसे कार, क्वाड्रिसाइकिल और कुछ थ्री-व्हीलर में स्पेयर टायर की अनिवार्यता को हटा दिया जाए. जैसे ही यह नियम अंतिम रूप लेगा, कार मेकर्स को 2026 से नए मॉडल में AVAS लागू करना होगा, जबकि पहले से उत्पादन में चल रहे इलेक्ट्रिक वाहनों को 2027 तक इसका पालन करना अनिवार्य होगा.