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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने Gen Z प्रदर्शन पर जताई अपनी राय, बोले- नीतियों का निर्धारण अलग ढंग से होता है

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नई दिल्ली  विजयादशमी के कार्यक्रम में RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत को पड़ोसी देशों में हुईं अशांति की घटनाओं पर बात की। उन्होंने कहा कि जब सरकार लोगों और उनकी परेशानियों से दूर रहती है, तो उसके खिलाफ प्रदर्शन होते हैं। हालांकि, उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों को गलत बताया है और कहा है कि इस तरीके से कभी किसी का फायदा नहीं हुआ। हाल ही में नेपाल में Gen Z आंदोलन हुआ, जिसमें युवाओं ने सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए थे। भागवत ने कहा, 'श्रीलंका में, बाद में बांग्लादेश में, बाद में नेपाल में। हमारे पड़ोसी देशों में हमने इसका अनुभव किया है। अब कभी कभी हो जाता है। प्रशासन जनता के पास नहीं रहता, संवेदनशील नहीं रहता। उनकी जनता की अवस्थाओं को ध्यान में रखकर नीतियां नहीं बनती, तो असंतोष रहता है। परंतु उस असंतोष को इस प्रकार व्यक्त होना, किसी के लाभ की बात नहीं है।' उन्होंने कहा, '…अगर हम अभी तक का इतिहास देखेंगे तो जब से उथल पुथल वाली तथाकथित क्रांतियां आई हैं। किसी क्रांति ने अपने उद्देश्यों को प्राप्त नहीं किया। राजा के खिलाफ फ्रांस की राज्य क्रांति हुई, उसकी परिणाम क्या हुआ? नेपोलियन बादशाह बन गया। वही राज्यतंत्र कायम है। इतनी सारी तथाकथित साम्यवादी क्रांतियां हुईं, सभी साम्यवादी देश आज पूंजीवादी तंत्र पर चल रहे हैं।' संघ प्रमुख ने कहा कि अगर देश में स्थिति खराब होती है, तो बाहर की ताकतें हावी होने की कोशिश करती हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसे हिंसक प्रदर्शनों से उद्देश्य प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि अराजकता की स्थिति में देश की बाहर की ताकतों को अपने खेल खेलने का मौका मिलता है। इसलिए हमारे पड़ोसी देशों में जो उथल पुथल हो रही है। ये हमारे ही जैसे हैं, ये हमसे दूर नहीं हैं। ये हमारे अपने है। उनमें इस प्रकार की अस्थिरता होना, वह आत्मीयता के संबंध के चलते चिंता का विषय है।' इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित थे।  

नीति निर्धारण पर केंद्रित मुख्यमंत्री की विभागीय समीक्षा बैठक

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शासकीय कामकाज में बढ़ी पारदर्शिता: बेहतर परफ़ॉर्म करने वाले अधिकारियों की हुई सराहना, अधिकारियों को स्व-मूल्यांकन कर सुधार करने के निर्देश पूंजीगत व्यय और शासकीय कामकाज के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा जेम पोर्टल से होने वाली शासकीय खरीदी में अनियमितता पर होगी कड़ी कार्रवाई मंत्रालय में उप सचिव स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों के लिए 01 दिसंबर से लागू होगी बायोमैट्रिक अटेंडेंस गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्यों में लाएँ तेजी, सुगम आवागमन के लिए सड़कों के सुधार और रखरखाव पर ज़ोर रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में  विभागीय सचिवों और विभागाध्यक्षों की मैराथन बैठक ली। उन्होंने विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अधिकारियों को विभागीय समन्वय और टीम भावना के साथ कार्य करने हेतु प्रेरित किया। मुख्यमंत्री साय ने उच्च स्तरीय बैठक में पूंजीगत व्यय में तेजी, शासकीय कामकाज में पारदर्शिता, आमजनों की समस्याओं का त्वरित निराकरण तथा गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्यों को समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों की सराहना की और अधिकारियों को स्व-मूल्यांकन कर सुधार लाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली से शासन के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है और इससे सुशासन का संकल्प साकार हो रहा है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि लगभग सभी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली लागू हो चुकी है। शेष विभाग दिसंबर 2025 तक इसे अनिवार्य रूप से लागू करें। मुख्यमंत्री ने सुगम आवागमन के लिए सड़कों के सुधार और रखरखाव पर विशेष बल दिया। साथ ही, जेम पोर्टल से होने वाली शासकीय खरीदी में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय से राज्य की आधारभूत संरचना मज़बूत होती है और दीर्घकालिक विकास की नींव पड़ती है। उन्होंने कम पूंजीगत व्यय वाले विभागों को कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के रजत जयंती वर्ष को “अटल निर्माण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इस वर्ष के बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक प्रावधान किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बजट में प्रावधानित कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति समय पर दी जाए, स्वीकृत कार्यों के टेंडर शीघ्र जारी हों और बिना विलंब कार्य प्रारंभ हो। उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय के सभी कार्य जनता के हित से सीधे जुड़े हैं, इसलिए इन्हें समय पर पूरा करना आवश्यक है। जिन विभागों का व्यय पिछले वर्ष की तुलना में कम है, वे इसके कारणों की पहचान कर तत्काल सुधार करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि बरसात अब समाप्ति की ओर है, ऐसे में आगामी दो महीनों का सदुपयोग करते हुए निर्माण कार्यों से संबंधित सभी औपचारिकताएँ शीघ्र पूरी करें। जनता की समस्याओं को धैर्य से सुनें अधिकारी मुख्यमंत्री श्री साय ने विभागीय सचिवों से कहा कि आप सभी जनता की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनें और उनका निराकरण करें। उन्होंने कहा कि सतत मॉनिटरिंग और नियमित प्रवास से विकास की गति बढ़ती है। प्रभारी सचिव अपने-अपने प्रभार वाले जिलों का हर दो माह में दौरा कर योजनाओं के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा करें। मंत्रालय के कामकाज में कसावट के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस मुख्यमंत्री श्री साय ने मंत्रालय के कामकाज में कसावट लाने के उद्देश्य से 1 दिसंबर से बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी समय पर कार्यालय पहुँचें और अपने अधीनस्थों को भी समयपालन के लिए प्रेरित करें। मुख्य सचिव श्री विकास शील ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 1 दिसंबर से मंत्रालय में उप सचिव स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों तक के लिए बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली लागू होगी। इस अवसर पर मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित सभी विभागीय सचिव और विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

दशहरे पर करें ये दिव्य मंत्रों का जाप, हर बाधा होगी समाप्त

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दशहरा भारत के सबसे पवित्र और विजय उत्सवों में से एक है। यह दिन अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है। यही वह दिन है जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी और मां दुर्गा ने महिषासुर जैसे राक्षस का संहार किया था। इस दिन को शक्ति, विजय, साहस और सकारात्मक ऊर्जा के रूप में मनाया जाता है। दशहरे के दिन यदि सही मंत्रों का जाप किया जाए, तो न सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति मिलती है बल्कि जीवन में चल रही बाधाएं भी दूर होती हैं। आइए जानते हैं दशहरे पर किए जाने वाले महत्त्वपूर्ण मंत्रों, उनके लाभ और जाप की विधि के बारे में। इन मंत्रों का करें जाप ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः दशहरे के दिन ही श्री राम ने रावण का वध कर देश में शांति और सच्चाई का राज्य स्थापित किया। ऐसे में यदि आप इस मंत्र का जाप करते हो तो आपको मनचाही सफलता मिलेगी। ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।। यह शक्ति, साहस और रक्षा प्रदान करता है। दशहरे के दिन इस मंत्र के जाप से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की हर बुराई का अंत होता है। ॐ हनुमते नमः श्रीराम भक्त हनुमान दशहरा के अवसर पर विशेष पूजनीय होते हैं। यह मंत्र जीवन से डर, भय, और नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो कर्ज, कोर्ट-कचहरी, या शत्रु बाधा से पीड़ित हैं। ॐ अपराजितायै नमः  इस मंत्र का जाप करने से व्यक्ति को हर कार्य में सफलता मिलती है। यदि कोई भी शुभ कार्य करने जा रहे हो तो इस मंत्र का जाप कर के घर से बाहर निकलें। ऐसा करने के बाद आपको कभी भी निराशा का मुंह नहीं देखना पड़ेगा। मंत्र जाप की सही विधि दशहरा के दिन विजय मुहूर्त जो दोपहर के समय आता है और अपराह्न काल मंत्र जाप के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं। स्नान के बाद, स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर बैठें। यदि संभव हो तो लाल या पीले रंग के आसन का प्रयोग करें। जाप शुरू करने से पहले हाथ में जल, फूल और चावल लेकर अपने उद्देश्य  का संकल्प लें। मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष या तुलसी की माला का प्रयोग करें। जाप करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

PoK में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना का कहर, 12 नागरिकों की जान गई

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इस्लामाबाद  पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बीते तीन दिनों से जारी बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो उठे हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक कम से कम 12 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत नाजुक बताई जा रही है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलियां और आंसू गैस के गोले दागे। मारे गए नागरिकों में पांच मुजफ्फराबाद, पांच धीरकोट और दो डडियाल के बताए जा रहे हैं। इस दौरान झड़प में कम से कम तीन पुलिसकर्मी भी मारे गए हैं। प्रदर्शन की शुरुआत सरकार की मूलभूत मांगें पूरी न करने से हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि क्षेत्र में लगातार शोषण और संसाधनों की लूट हो रही है, जबकि बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। हिंसा में घायल हुए अधिकांश लोगों को गोलियों से चोटें आई हैं। कई अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से हालात और बिगड़ रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह आंदोलन PoK में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा जनविरोध है, जिसने पाकिस्तान प्रशासन और सेना के खिलाफ नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है। जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने अशांत क्षेत्र में जनजीवन को ठप कर दिया है। इस आंदोलन के केंद्र में पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित पीओके की 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने की मांग है। 29 सितंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से बाजार, दुकानें और स्थानीय व्यवसाय बंद हैं। मोबाइल, इंटरनेट और लैंडलाइन सेवाएं भी पूरी तरह से बंद हैं। इस बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।  

भारत के खिलाफ तैयार हो रहा वैश्विक गठजोड़? असल वजह क्या है

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नई दिल्ली  रूसी तेल की खरीद को लेकर 7 देशों के समूह जी7 ने बड़े ऐक्शन की तैयारी की है। खबर है कि यह समूह उन देशों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है, जो रूस से तेल खरीद को बढ़ा रहे हैं। खास बात है कि भारत और चीन रूसी तेल के बड़े खरीददार हैं। वहीं, भारत की तरफ से साफ किया जा चुका है कि उसे अमेरिका और यूरोपीय संघ निशाना बना रहे हैं। बुधवार को जी7 ने कहा कि रूस पर दबाव बनाने के लिए साझा कदम उठाए जाएंगे। समूह के वित्त मंत्री ने कहा कि यूक्रेन पर आक्रमण के कारण रूस के राजस्व को कम करने की कोशिशें जारी हैं। सदस्य देशों की बैठक के दौरान टैरिफ और इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट बैन जैसे व्यापार संबंधी उपायों पर भी चर्चा की गई थी। साझा बयान के अनुसार, 'हम उनको निशाना बनाएंगे, जो यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से रूसी तेल खरीद को बढ़ाना जारी रखे हुए हैं।' ट्रंप ने की थी पहल सितंबर में ही अमेरिका ने जी7 देशों से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने का अनुरोध किया है। अमेरिका ने जोर देकर कहा कि केवल एकीकृत प्रयास से ही मॉस्को की युद्ध मशीन को धन मुहैया कराने वाले स्रोत को बंद किया जा सकता है। अमेरिका ने यह भी कहा कि ऐसा करके ही रूस को 'बेवकूफी भरी हत्या' को रोकने के लिए पर्याप्त दबाव बनाया जा सकता है। जी7, अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन सहित समृद्ध, औद्योगिक देशों का एक अंतर-सरकारी समूह है। कनाडा इस वर्ष जी-7 की अध्यक्षता का प्रमुख है। चीन पर नहीं लगाया ज्यादा शुल्क अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। जबकि, चीन के मामले में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत पर है। ट्रंप ने भारत के खिलाफ पहले 25 फीसदी शुल्क का ऐलान किया था और रूसी तेल की खरीद को लेकर जुर्माना भी लगाया था। बाद में उन्होंने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा की। वह व्यक्तिगत रूप से भी रूसी तेल को लेकर भारत पर निशाना साध चुके हैं।  

डूंगरपुर में हिरासत मौत मामला: अफसर निलंबित, नेताओं की अनसुनी, गुस्से में परिजन व ग्रामीण

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बांसवाड़ा/डूंगरपुर बांसवाड़ा के समीपवर्ती डूंगरपुर जिले के दोवड़ा थाना क्षेत्र में चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए देवसोमनाथ निवासी दिलीप अहारी की पूछताछ के दौरान तबीयत बिगड़ गई थी। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसे उदयपुर के महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय रेफर किया गया, जहां मंगलवार दोपहर उसने दम तोड़ दिया। इस घटना को लेकर अब बवाल मचा हुआ है।  धरने पर बैठे परिजन और ग्रामीण युवक की मौत के बाद परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण पहले दोवड़ा थाने और फिर कलेक्ट्री के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि पुलिस की पिटाई से दिलीप की मौत हुई है। मृतक के परिवार और ग्रामीणों ने एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और दोवड़ा थाने में तैनात सभी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करने की मांग की है। मंत्री, सांसद और विधायक पहुंचे, वार्ता विफल घटना के बाद मंगलवार शाम को जनजाति विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद मन्नालाल रावत, विधायक गणेश घोघरा, उमेश डामोर, अनुतोष रोत सहित आदिवासी समाज के प्रतिनिधि प्रशासन के साथ बातचीत में शामिल हुए। देर रात तक कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और एसपी मनीष कुमार ने वार्ता की, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। बुधवार शाम तक भी ग्रामीण कलेक्ट्री परिसर में डटे रहे।   पांच पुलिसकर्मी निलंबित मामले की गंभीरता को देखते हुए डूंगरपुर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने कार्रवाई की है। दोवड़ा थानाधिकारी तेजकरण सिंह, सहायक पुलिस निरीक्षक वल्लभराम, हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार, कांस्टेबल पुष्पेंद्र सिंह और माधव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद इनका मुख्यालय डूंगरपुर रिजर्व पुलिस लाइन में कर दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र में भिड़ंत: पाकिस्तान के भाषण पर भारत के मोहम्मद हुसैन का जोरदार हमला

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वाशिंगटन  भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में पाकिस्तान को सख्त लहजे में आड़े हाथों लिया और जमकर फटकार लगाई है। भारतीय राजदूत मोहम्मद हुसैन ने बुधवार को जिनेवा में हुई 60वें सत्र की 34वीं बैठक में कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान जैसे देश को मानवाधिकारों पर दूसरों को भाषण देने का साहस होता है, जबकि खुद उसके यहां अल्पसंख्यकों का लगातार दमन हो रहा है। हुसैन ने साफ कहा कि पाकिस्तान को प्रचार फैलाने की बजाय अपने घर के हालात सुधारने चाहिए और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों का सामना करना चाहिए। बैठक के दौरान अन्य वक्ताओं ने भी पाकिस्तान के मानवाधिकार हनन पर सवाल उठाए। भू-राजनीतिक शोधकर्ता जॉश बोव्स ने बलूचिस्तान में कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाया और बताया कि पाकिस्तान नाजुक समुदायों को दबाता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नैतिकता का ढोंग करता है। उन्होंने बताया कि यूएससीआईआरएफ (USCIRF) की धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट 2025 के अनुसार पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के तहत 700 से अधिक लोग जेल में हैं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 300% अधिक है। बलूच नेशनल मूवमेंट की मानवाधिकार इकाई पांक के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में ही 785 जबरन गुमशुदगियां और 121 हत्याएं दर्ज की गईं। वहीं पश्तून राष्ट्रीय जिरगा का कहना है कि इस साल तकरीबन 4,000 पश्तून अब भी लापता हैं। पीओके में बिगड़ता हालात यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के प्रवक्ता नासिर अजीज खान ने परिषद से अपील की कि पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में दमन की बढ़ती घटनाओं पर हस्तक्षेप किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में मानवीय संकट गहराता जा रहा है। कान ने कहा कि पाकिस्तान ने रेंजर्स की तैनाती कर दी है और फोन व इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि संसाधनों के स्वामित्व और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे अहिंसक आंदोलन को दबाया जा सके। इससे पहले जुलाई में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार को आगाह किया था कि वह अल्पसंख्यकों (विशेषकर अहमदी समुदाय) के खिलाफ बढ़ रही हिंसा, मनमाने ढंग से गिरफ्तारियां और पूजा स्थलों पर हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।  

हनुमान से की तुलना, टी. राजा ने कहा – देशभर में गूंजेगी मोदी की उपलब्धियों की गाथा

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भीलवाड़ा भीलवाड़ा का बुधवार (1 अक्टूबर) को वातावरण धार्मिक जोश और उत्साह से सराबोर रहा। अवसर था दुर्गा शक्ति अखाड़े के 9वें स्थापना दिवस का, जो हरी सेवा उदासीन आश्रम परिसर में बड़े हर्षोल्लास से मनाया गया। इस मौके पर तेलंगाना से विधायक टी राजा सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। बालिकाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने कहा कि “आने वाला समय भारत के लिए संघर्ष और युद्ध का समय है। इसलिए हर सनातनी बालिका को दुर्गा या काली बनना है, लेकिन कभी भी बुरखे वाली नहीं बनना।” उन्होंने आगे कहा कि धर्म की रक्षा के लिए शास्त्र और शस्त्र दोनों का ज्ञान जरूरी है। राजस्थान में बने धर्मांतरण विरोधी कानून के लिए उन्होंने राज्य सरकार को धन्यवाद दिया और इसे और प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि इसके लिए अलग विभाग और टास्क फोर्स बनाकर कंट्रोल रूम स्थापित करना चाहिए, ताकि धर्मांतरण की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई हो सके। सुबह 4000 से अधिक बालिकाएं घोष की गूंज के साथ पथ संचलन करती हुई माली समाज के नोहरे से रवाना हुईं। यह संचलन बड़ा मंदिर, सूचना केंद्र होते हुए हरि सेवा आश्रम पहुंचा। पूरे मार्ग में विभिन्न हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर बालिकाओं का स्वागत किया। धर्मसभा का शुभारंभ महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन, महंत बाबू गिरी, महंत प्रकाश दास, संत मयाराम, संत गोविंद राम, ब्रह्मचारी इंद्रदेव, सिद्धार्थ, मिहिर, पंडित धर्मेश, सत्यनारायण और मोनू शर्मा द्वारा राम दरबार के समक्ष दीप प्रज्वलन व शस्त्र पूजन के साथ हुआ। स्वामी हंसराम ने बालिकाओं को धर्म रक्षा हेतु एकजुट होकर कार्य करने की प्रेरणा दी। सभा में बोलते हुए टी राजा सिंह ने कहा कि “भारत के सामने आने वाला समय संघर्ष और युद्ध का है। जिस तरह औरंगजेब के समय मंदिरों में पूजा संभव नहीं थी, उसी प्रकार धर्म पर संकट कभी भी आ सकता है। इसलिए सनातन समाज को सतर्क रहकर धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने चेताया कि धर्मांतरण के नाम पर आज भी बेटियों को निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में राजस्थान को भी यूपी की तर्ज पर कठोर कार्रवाई करनी होगी। पत्रकारों से वार्ता के दौरान राजनीतिक सवालों पर उन्होंने कहा कि वे नरेंद्र मोदी, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के कार्यों से प्रभावित होकर राजनीति में आए थे, लेकिन अब चुनाव लड़ने में उनकी रुचि नहीं है। विधायक के रूप में उनका कार्यकाल शेष 3 साल का है, जिसके बाद वे राजनीति छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा, “जिस प्रकार हनुमान जी भगवान श्रीराम के प्रचारक थे, उसी तरह मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचारक के रूप में उनके धर्महित और राष्ट्रहित के कार्यों का प्रचार करता रहूंगा।” लद्दाख में हालिया हिंसा को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस समर्थित लोग हथियारों और पत्थरों के साथ तोड़फोड़ कर रहे थे। यह एक बड़ा षड्यंत्र था, जो विफल हो गया। उन्होंने कहा कि भारत की शांति और प्रगति कुछ लोगों को रास नहीं आ रही और यही लोग दंगे-फसाद की साजिशें कर रहे हैं। धर्मसभा के दौरान दुर्गा शक्ति अखाड़े की विभिन्न शाखाओं की बालिकाओं ने तलवार और अखाड़ा प्रदर्शन कर अपनी दक्षता का परिचय दिया। इस अवसर पर 5100 बालिकाओं को कटार दीक्षा दी गई और सभी को सामूहिक भोज कराया गया।

भारत vs प्रतिद्वंदी: एशिया कप जीतने के लिए टीम की रणनीति और प्लान क्या है?

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नई दिल्ली  टीम इंडिया रविवार 28 सितंबर की रात को एशिया कप 2025 की चैंपियन बनी, लेकिन 2 अक्टूबर तक भारतीय टीम को ट्रॉफी नहीं मिली है। इसके पीछे का कारण ये है कि एशियन क्रिकेट काउंसिल यानी एसीसी के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने ट्रॉफी पर कब्जा किया हुआ है। नकवी ट्रॉफी किसी अन्य को देने के लिए तैयार नहीं हैं और भारत नकवी से ट्रॉफी लेने के लिए हरगिज तैयार नहीं है। हालांकि, आज भारत का एशिया कप की ट्रॉफी पर कब्जा हो सकता है। ये कैसे होगा? इसका पूरा प्लान जान लीजिए। दरअसल, इस तरह की मीडिया रिपोर्ट सामने आई है कि पाकिस्तान के गृह मंत्री और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चीफ मोहसिन नकवी, जो एसीसी चेयरमैन हैं, वह आज दुबई के होटल से चेकआउट करने वाले हैं और पाकिस्तान लौटने वाले हैं। जाहिर है कि वह भले ही एसीसी के चेयरमैन हों, लेकिन वह ट्रॉफी को पाकिस्तान नहीं ले जा सकते। एसीसी के हेडक्वार्टर में मोहसिन नकवी को ट्रॉफी रखनी होगी, जो अभी तक होटल में है। नकवी होटल से चेकआउट करेंगे तो ट्रॉफी भी एसीसी के मुख्यालय आएगी। एसीसी के मुख्यालय में एशिया कप की ट्रॉफी होगी और वहां मोहसिन नकवी नहीं होंगे तो कोई भी भारतीय उस ट्रॉफी को वहां से कलेक्ट कर सकता है। एसीसी के बाकी अधिकारी या युनाइटेड अरब अमीरात यानी यूएई बोर्ड के अधिकारी एशिया कप की ट्रॉफी को भारत को सौंप सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तान जाने से पहले मोहसिन नकवी ने कह दिया है कि ट्रॉफी एसीसी के मुख्यालय में है और वह भारत का स्वागत करते हैं कि वे ट्रॉफी ले जाएं। उन्होंने कहा था कि कप्तान सूर्यकुमार यादव आएं और उनसे ट्रॉफी लेकर जाएं। हालांकि, सूर्या ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि जब उन्होंने फाइनल में पाकिस्तान को हराने के बाद उनसे ट्रॉफी नहीं ली तो अब कैसे ट्रॉफी लेंगे।  

ट्रंप का नोबेल सपना अधूरा रह जाएगा? जानें क्या कहती हैं संभावनाएं, 8 दिनों में होगा ऐलान

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वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति खुलकर जाहिर कर चुके हैं कि वह नोबेल पुरस्कार चाहते हैं। हालांकि, इसकी संभावनाएं कम ही नजर आ रही हैं। जानकारों का कहना है कि उन लोगों के पुरस्कार जीतने की संभावनाएं ज्यादा हैं, जो सुर्खियों से दूर हैं और भुला दिए गए मुद्दों पर काम कर रहे हैं। खास बात है कि ट्रंप ने उन्हें नोबेल पुरस्कार दिए जाने के तार अमेरिका के सम्मान से जोड़े हैं। 10 अक्तूबर शुक्रवार को पुरस्कारों की घोषणा की जानी है। एएफपी के अनुसार नॉर्वे की राजधानी ओस्लो के कुछ जानकार बताते हैं कि अमेरिका फर्स्ट की नीति और विभाजनकारी तरीकों के चलते उन्हें पुरस्कार मिलने की संभावनाएं नहीं हैं। इतिहासकार ओविंद स्टीनर्सन ने कहा कि ट्रंप कई मायनों में उन आदर्शों के खिलाफ काम करते हैं, जिनका प्रतिनिधित्व नोबेल प्राइज करता है। अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि उन्होंने 6 या 7 युद्ध खत्म कराए हैं। जबकि, जानकारों की राय इससे अलग है। SIPRI यानी स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख करीम हैगाग ने कहा, 'नोबेल कमेटी आकलन करेगी कि शांति स्थापित करने में सफलता हासिल करने के स्पष्ट उदाहरण हैं या नहीं।' कहा जा रहा है कि नोबेल पीस प्राइज के लिए उम्मीदवारी जताने के लिए हजारों पात्र लोग हैं। ट्रंप ने अमेरिका के सम्मान से जोड़े तार ट्रंप ने कहा कि अगर सोमवार को घोषित गाजा संघर्ष को समाप्त कराने की उनकी योजना कामयाब हो जाती है तो उन्होंने कुछ ही महीनों में आठ संघर्षों को सुलझा लिया है। ट्रंप ने कहा, 'यह शानदार है। कोई ऐसा कभी नहीं कर पाया। फिर भी, ‘क्या आपको नोबेल पुरस्कार मिलेगा?’ बिल्कुल नहीं। वे इसे किसी ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने कुछ भी नहीं किया। वे इसे ऐसे व्यक्ति को देंगे जिसने डोनाल्ड ट्रंप के विचारों और युद्ध को सुलझाने के लिए क्या किया गया, इस पर कोई किताब लिखी है… जी हां, नोबेल पुरस्कार किसी लेखक को मिलेगा। लेकिन देखते हैं क्या होता है।' उन्होंने कहा, 'यह हमारे देश के लिए बड़े अपमान की बात होगी। मैं आपको बता दूं कि मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि यह देश को मिले। यह सम्मान देश को मिलना ही चाहिए क्योंकि ऐसा कुछ पहले कभी नहीं हुआ। इस बारे में सोचिएगा जरूर। मुझे लगता है कि यह (गाजा संघर्ष को समाप्त करने की योजना) सफल होगा। मैं यह बात हल्के में नहीं कह रहा, क्योंकि मैं समझौतों के बारे में किसी से भी ज्यादा जानता हूं।' उन्होंने कहा, 'लेकिन, आठ समझौते करना वाकई सम्मान की बात है।'