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5-6 अक्टूबर 2025 की शरद पूर्णिमा: जानें चांदनी रात में खीर बनाने की परंपरा और विज्ञान

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हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। इसके अलावा आपने देखा होगा कि इस दिन चांदनी रात में खीर रखी जाती है लेकिन क्या आपने सोचा है कि इसके पीछे की वजह क्या है? वहीं इस साल लोगों में बड़ा सवाल है कि शरद पूर्णिमा 2025 कब है 5 अक्टूबर या 6 अक्टूबर कब है? क्योंकि आपने देखा कि नवरात्रि में भी व्रत पूरे 10 दिन रखे गए थे और 11वें दिन विजयदशमी मनाई गई थी। इसलिए शरद पूर्णिमा को लेकर भी कंफ्यूजन है। शास्त्रों के अनुसार तिथि और नक्षत्र मिलान से सही मुहूर्त का निर्धारण किया जाता है। इस दिन व्रत, जागरण और लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। आइए जान लेते हैं कि इस बार शरद पूर्णिमा कब है और चांदनी रात में खीर रखने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है? कब है शरद पूर्णिमा? इस बार शरद पूर्णिमा कब है ये जान लेते हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी जो 7 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। शरद पूर्णिमा के दिन रात की पूजा का महत्व होता है और चंद्र देवता की पूजा होती है तो इस वजह से शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर 2025, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। चांदनी रात में खीर रखने का धार्मिक कारण मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व बरसता है और उसी वजह से खीर को रातभर चांदनी में रखने की परंपरा है। कहा जाता है कि चांदनी से युक्त खीर को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का प्रसाद माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चांद की पूजा की जाती है जिन्हें शीतलता और शांति का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में रखी खीर में औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसे खाने से स्किन संबंधी बीमारी दूर होती है और कई तरह के रोगों से छुटकारा मिलता है। ये माना जाता है कि शास्त्रों में वर्णन है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अमृत वर्षा करता है। उस अमृत से युक्त खीर का सेवन करने से तन-मन शुद्ध और रोगमुक्त होता है। माना जाता है कि यह खीर धन, सुख और मोक्ष प्रदान करती है। ये खीर शरीर को शुद्ध करती है और मन को शांत करती है। बता दें कि इस खीर को उसी रात नहीं बल्कि अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। चांदनी रात में रखी खीर खाने का वैज्ञानिक कारण आपने शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में रखी खीर खाने का धार्मिक कारण तो जान लिया है अब वैज्ञानिक कारण भी जान लेते हैं। बता दें कि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत निकट होता है और उसकी अल्ट्रावायलेट किरणे सीधे धरती पर पड़ती हैं। वो किरणें खीर में पड़ती है तो वो पौष्टिक और सेहत के लिए बहुत लाभकारी बन जाती है। ऐसा कहा जाता है कि रात भर चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को खाने से पाचन तंत्र ठीक रहता है और शरीर को ठंडक मिलती है। इसके अलावा ये खीर सुपाच्य होती है जो पित्त दोष और मानसिक तनाव से राहत देती है। कम लोगों को पता होगा कि चंद्रमा की रोशनी कैल्शियम को सक्रिय करती है, जिससे यह खीर और अधिक पौष्टिक बनती है।

ड्रैगन के वॉटर बम का इलाज — इंडिया का मेगा-डैम, सुरक्षा व जलप्रबंधन दोनों का समाधान

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नई दिल्ली हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों के बीच, जहां नदियां जीवन का आधार हैं, वहां एक नया विवाद खड़ा हो गया है. भारत सरकार एक विशालकाय डैम बनाने की योजना बना रही है, जो चीन के पानी के हथियार से बचाव के लिए है. लेकिन अरुणाचल प्रदेश के आदिवासी लोग इसे अपनी मौत का पैगाम मान रहे हैं. ऊंचे पहाड़ों से घिरे एक फुटबॉल मैदान पर आदिवासियों ने जोरदार भाषण दिए और विरोध जताया. यह डैम भारत-चीन के पानी पर चल रहे झगड़े का नया मोड़ है. हिमालय दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला है, जहां से ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदियां निकलती हैं. ये नदियां भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को पानी, बिजली और खेती के लिए जीवन रेखा हैं. चीन तिब्बत में ऊपरी हिस्से में एक रिकॉर्ड तोड़ने वाला डैम बना रहा है. भारत को डर है कि चीन इस डैम को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है. यानी, अचानक बहुत सारा पानी छोड़कर बाढ़ ला सकता है, जिसे वाटर बम कहा जा रहा है. इस वजह से भारत अब जवाबी कदम उठा रहा है.  चीन इस समय एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट बांध से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट पर 167 अरब डॉलर खर्च होंगे। यह बांध तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर बन रहा है। इस नदी को भारत में सियांग कहते हैं। चीन का कहना है कि इस बांध के बनने से चीन में बिजली की समस्या काफी बेहतर होगी। वहीं इस बांध के कई खतरे भी सामने आए हैं। इससे बड़ा खतरा भारत को भी है। इसे 'वॉटर बम' भी कहा जा रहा है क्योंकि यहां से छोड़ा गया पानी भारत के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। लेकिन अब भारत ने भी चीन के इस बांध का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। भारत भी एक बहुत बड़ा बांध बनाने की योजना बना रहा है। यह बांध चीन के 'वॉटर बम' का जवाब देने के लिए है। यह बांध भारत और चीन के बीच हिमालय के पानी को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा में भारत का नया कदम है। भारत का कहना है कि यह नया बांध चीन के एक बड़े बांध का मुकाबला कर सकता है। भारत ने चुनी कौन सी जगह? प्रस्तावित नक्शों से पता चलता है कि भारत अरुणाचल प्रदेश में एक विशाल जलाशय बनाने पर विचार कर रहा है। यह जलाशय चार मिलियन ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल जितना बड़ा होगा। यह जलाशय 280 मीटर (918 फुट) ऊंचे बांध के पीछे बनेगा। क्या है भारत का प्लान? भारत का बांध 9.2 बिलियन क्यूबिक मीटर का एक विशाल जलाशय बनाएगा। इससे 11,200 से 11,600 मेगावाट पनबिजली पैदा की जा सकती है। यह इसे देश का सबसे शक्तिशाली बांध बना देगा। इससे भारत के कोयले पर निर्भर बिजली ग्रिड से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। लेकिन, नेशनल हाइड्रोपावर कॉर्पोरेशन (NHPC) के एक वरिष्ठ इंजीनियर के मुताबिक भारत की प्राथमिकता बिजली पैदा करना नहीं है। NHPC वह केंद्रीय एजेंसी है जिसे बांध बनाने का काम मिला है। इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर चीन अपने बांध को हथियार बनाना चाहता है और इसे वॉटर बम की तरह इस्तेमाल करना चाहता है तो भारत का यह बांध जल सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण का काम करेगा। चीन के प्रोजेक्ट का भारत में विरोध चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। भारत इस दावे को पूरी तरह से खारिज करता है। बीजिंग का कहना है कि इस परियोजना का नीचे की ओर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। नीचे की ओर से मतलब है कि वहां रहने वाले लोगों पर इसका कोई असर नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इन इलाकों में रहने वाले कुछ लोग चीन के इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। यह इलाका भारत में आता है। चीन की योजना में 5 पनबिजली स्टेशन शामिल हैं। ये स्टेशन चीन के विशाल थ्री गॉर्जेस बांध से तीन गुना ज्यादा बिजली पैदा कर सकते हैं। थ्री गॉर्जेस बांध दुनिया का सबसे बड़ा बिजली घर है। क्यों कहा जा रहा 'वॉटर बम'? चीन जिस नदी पर बांध बना रहा है, वह ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी है। भारतीय अधिकारियों को डर है कि चीन अपने बांध का इस्तेमाल कर पानी पर कंट्रोल कर सकता है। इससे चीन खास तौर से भारतीय इलाके में घातक सूखा पैदा कर सकता है या नीचे भारत की ओर ढेर सारा पानी छोड़ सकता है। पानी का यह बहाव का असर किसी बम की तरह होगा। इस कारण इसे 'वॉटर बम' कहा जा रहा है। हालांकि चीन इस बात को खारिज करता है। चीन का कहना है कि याक्सिया पनबिजली परियोजना को 'वॉटर बम' बताने वाली बातें बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण हैं।  

धनतेरस 2025 की उलझन खत्म! जानें किस दिन मनाएं और क्या है पूजन मुहूर्त

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दशहरा का त्योहार निकल चुका है और अब जल्द ही 5 दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत हो जाएगी। दीपावली का त्योहार धनतेरस से शुरू होता है और 5 दिनों तक चलता है। धनतेरस के दिन लोग भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजन करते हैं। इस दिन सोना चांदी और नए बर्तन की खरीदी करना भी शुभ माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अगर हम खरीदी करके घर में लाते हैं तो घर में सुख समृद्धि धन और बरकत बनी रहती है। चलिए जान लेते हैं कि 18 या 19 अक्टूबर धनतेरस कब मनाई जाने वाली है और मुहूर्त क्या है। कब मनाई जाएगी धनतेरस  पंचांग के मुताबिक कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 पर होगी। यह 19 अक्टूबर को दोपहर 1:51 पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के मुताबिक ये पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूजन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो अगर प्रदोष काल में पूजन करना है तो 7:16 से लेकर 8:20 तक का समय शुभ है। इस समय आप भगवान धन्वंतरि माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजन अर्चन कर सकते हैं। कैसे करें पूजन?     अगर आप धनतेरस पर पूजा करना चाहते हैं तो इसकी विधि बहुत ही सरल है।     सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।     आप को घर के मंदिर की अच्छी तरह से साफ सफाई करनी है।     एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा स्थापित करें।     अब घी का दीपक जलाएं और भगवान धनवंतरी को चंदन का तिलक लगाएं।     सबसे पहले आपको भगवान गणेश की पूजन करनी है उसके बाद सभी देवी देवताओं की पूजन करें।     कुबेर जी के मंत्र और धन्वंतरि स्त्रोत का पाठ करें।     अब आपको भगवान की सच्ची श्रद्धा के साथ आरती करनी है।     सभी देवी देवताओं को मिठाई और फल का भोग लगाएं।     इस भोग को सभी में प्रसाद के रूप में वितरित जरूर करें।     पूजन के पश्चात दान देना ना भूलें। अपने सामर्थ्य के मुताबिक दान देने का प्रतिफल आपको जरूर मिलेगा। कब करें खरीदारी अगर आप धनतेरस पर खरीदारी करना चाहते हैं तो दोपहर 12:01 से 12:48 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। लाभ और उन्नति का चौघड़िया दोपहर 1:51 से 3:18 तक है। प्रदोष कल शाम 6:11 से रात 8:41 तक है। इस दौरान आप आसानी से खरीदारी कर सकते हैं। धनतेरस का महत्व क्या है? धनतेरस पर भगवान धनवंतरी माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजन का विशेष महत्व है। यह तीनों ही सुख समृद्धि धन और बरकत के देवता है। किसी के साथ इस दिन की गई खरीदारी धन में 13 गुना वृद्धि करती है। भगवान धन्वंतरि के आशीर्वाद से आरोग्य और स्वास्थ्य मिलता है। माता लक्ष्मी की पूजन करने से धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

नवरात्र पर इंदौरवासियों की धूम, 9 दिनों में 9 हजार से ज्यादा वाहनों की खरीद

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 इंदौर  नवरात्र के नौ दिनों में वाहन बाजार ने नई गति पकड़ी। प्रदेश भर में जहां कुल 67,507 वाहन बिके, वहीं अकेले इंदौर में 9,344 वाहनों की बिक्री दर्ज हुई। यह आंकड़ा प्रदेश की कुल बिक्री का करीब 14 प्रतिशत है, जो बताता है कि इंदौर वाहन खरीददारों का सबसे बड़ा केंद्र रहा। प्रदेश में बिके वाहनों का हर सातवां वाहन इंदौर में बिका। नौ दिनों में इंदौर में बिक गए 9344 वाहन नवरात्र के पहले दिन ही जीएसटी दरों में कटौती ने खरीददारों को बड़ी बचत दी। इसलिए नवरात्र में वाहनों की बिक्री खूब हुई। वाहन बिक्री में दोपहिया का दबदबा सबसे ज्यादा रहा। प्रदेश में 50,894 दोपहिया वाहन बिके, जिनमें से 6,025 इंदौर में खरीदे गए। इसी तरह प्रदेश में 12,097 कारों की बिक्री हुई, जिनमें से 2,562 कारें इंदौरवासियों ने खरीदीं। नवरात्र में ईवी वाहनों का क्रेज भी इस बार साफ दिखाई दिया। नवरात्र के दौरान पूरे प्रदेश में 6,806 इलेक्ट्रिक वाहन बिके, जबकि अकेले इंदौर में 1,023 ईवी की बिक्री हुई। इंदौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर में उल्लास छाया रहा वाहन विक्रेताओं का कहना है कि नवरात्र के पहले दिन यानी 21 सितंबर से जीएसटी दरों में मिली छूट ने ग्राहकों की खरीदारी को और बढ़ावा दिया। शो रूम पर सुबह से रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रही और बुकिंग में रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिला। दशहरा पर 700 कार बिकने का अनुमान नवरात्र के बाद दशहरा पर इंदौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर में उल्लास छाया रहा। सुबह से लेकर देर रात तक शुभ मुहूर्त वाहनों की खरीदी होती रही। अनुमान के अनुसार दशहरे पर 700 कार और तीन हजार करीब दो पहिया वाहन बिकने का अनुमान है।

‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा: टाटा कर्नाटक में बनाएगा एयरबस का आधुनिक H125 हेलिकॉप्टर

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नई दिल्ली एयरबस हेलीकॉप्टर्स और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने मिलकर भारत का पहला निजी हेलीकॉप्टर असेंबली प्लांट लगाने का ऐलान किया है. यह प्लांट कर्नाटक के वेमागल में बनेगा. यहां मेड इन इंडिया H125 हेलीकॉप्टर बनेंगे. पहला हेलीकॉप्टर 2027 की शुरुआत में तैयार हो जाएगा. यह न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दक्षिण एशिया के देशों के लिए निर्यात भी होगा. यह कदम भारत की हवाई यात्रा और रक्षा को मजबूत बनाएगा. H125: बहुमुखी हेलीकॉप्टर, हिमालय के लिए भी तैयार H125 दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर है. यह एयरबस की इक्यूरुइल फैमिली का हिस्सा है, जिसने दुनिया भर में 4 करोड़ घंटे से ज्यादा उड़ान भरी है. यह हेलीकॉप्टर ऊंचाई और गर्मी वाले इलाकों में आसानी से काम करता है. इसे कई कामों के लिए बदला जा सकता है, जैसे आग बुझाना, कानून व्यवस्था, बचाव, एयर एम्बुलेंस, पैसेंजर ट्रांसपोर्ट और हवाई सर्वे. यह हेलीकॉप्टर माउंट एवरेस्ट पर उतर चुका है, जो दिखाता है कि यह ऊंचे पहाड़ों पर कितना कुशल है. भारत के हिमालयी इलाकों के लिए यह परफेक्ट है, जहां सैनिकों को लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर की जरूरत है. सिविल और पैरा-पब्लिक क्षेत्रों में भी यह नई संभावनाएं खोलेगा, जैसे इमरजेंसी मेडिकल फ्लाइट्स, आपदा राहत, पर्यटन और कानून प्रवर्तन. सैन्य संस्करण H125M: आत्मनिर्भर भारत का सपना इस प्लांट से सिविल के साथ-साथ सैन्य संस्करण H125M भी बनेगा. इसमें भारतीय कंपोनेंट्स और टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल होगा. यह चीता और चेतक हेलीकॉप्टर्स का बेहतरीन उत्तराधिकारी होगा, जो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ एयरबस की 60 साल पुरानी साझेदारी से बने थे. ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना ने गर्व से इस्तेमाल किए हैं. H125M से आत्मनिर्भर भारत योजना को बल मिलेगा. यह रक्षा क्षेत्र में हेलीकॉप्टर बनाने की क्षमता बढ़ाएगा और मौजूदा सिस्टम को मजबूत करेगा. पहली निजी कंपनी बनेगी हेलीकॉप्टर बनाने वाली टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) भारत की पहली निजी कंपनी होगी जो हेलीकॉप्टर बनाएगी. कंपनी H125 के मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, असेंबली, इंटीग्रेशन और फाइनल फ्लाइट टेस्ट करेगी. इसमें स्ट्रक्चरल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स और कंपोनेंट्स को जोड़ना शामिल है. TASL के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर सुकर्ण सिंह ने कहा कि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को भारत की पहली निजी कंपनी बनने पर गर्व है जो हेलीकॉप्टर बनाएगी. यह सिविल और रक्षा दोनों जरूरतों को पूरा करेगा. यह एयरबस के साथ हमारी दूसरी FAL है, जो भारत के लिए हमारी साझेदारी को मजबूत करती है. टाटा एयरोस्पेस सेक्टर में मजबूत है और फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट के साथ-साथ हेलीकॉप्टर भी बना सकता है. यह प्लांट गुजरात के वडोदरा में C295 मिलिट्री एयरक्राफ्ट प्लांट के बाद एयरबस का भारत में दूसरा असेंबली प्लांट है. इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, मेंटेनेंस, डिजाइन, डिजिटल और ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट का पूरा इकोसिस्टम बनेगा. एयरबस-टाटा साझेदारी: भारत के लिए नया अध्याय एयरबस इंडिया और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर जर्गेन वेस्टरमीयर ने कहा कि भारत हेलीकॉप्टरों के लिए आदर्श देश है. मेड इन इंडिया हेलीकॉप्टर इस बाजार को बढ़ाएगा और राष्ट्र निर्माण का जरूरी टूल बनेगा. हमारे भरोसेमंद पार्टनर टाटा के साथ यह नया अध्याय जोड़कर हमें खुशी हो रही है. एयरबस भारत से हर साल 1.4 अरब डॉलर से ज्यादा के कंपोनेंट्स और सर्विसेज लेता है, जैसे एयरक्राफ्ट डोर, फ्लैप-ट्रैक बीम और हेलीकॉप्टर कैबिन स्ट्रक्चर्स. यह साझेदारी दक्षिण एशिया के रोटरक्राफ्ट मार्केट की पूरी क्षमता खोलेगी. भारत की एविएशन इंडस्ट्री को फायदा यह प्रोजेक्ट भारत की एविएशन इंडस्ट्री को तेजी से बढ़ाएगा. सिविल और रक्षा दोनों क्षेत्रों में नौकरियां बढ़ेंगी. H125 हेलीकॉप्टर आपदा राहत, पर्यटन और कानून प्रवर्तन जैसे महत्वपूर्ण कामों में मदद करेंगे. H125M से सैन्य क्षमता मजबूत होगी. यह कदम दिखाता है कि भारत अब हेलीकॉप्टर बनाने में आत्मनिर्भर बन रहा है.  

‘नो हैंडशेक पार्ट 4’: पाकिस्तान से टकराएंगी भारत की बेटियां, मैदान में दिखेगा दम

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नई दिल्ली भारत और पाक‍िस्तान के बीच महिला वर्ल्ड कप में 5 अक्टूबर को भ‍िड़ंत होनी है. लेकिन इस मुकाबले में दोनों ही टीमों के बीच मैदान पर माहौल कैसा रहेगा, क्या जो भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने एश‍िया कप के दौरान ऐसा किया? वही काम हरमनप्रीत कौर एंड कंपनी करती दिखेगी. इस पर कई सवाल हैं. पुरुष टीम ने 3 बार एश‍िया कप के दौरान हैंडशेक नहीं किया, ऐसे में सवाल है? क्या महिला क्रिकेट टीम नो हैंडशेक पार्ट 4 को वर्ल्ड कप के दौरान कंटीन्यू करेगी.  यह भी पढ़ें: भारत के सख्त तेवर, सूर्या ही नहीं रव‍ि शास्त्री ने भी क‍िया PAK कप्तान सलमान आगा को इग्नोर..! टॉस के बाद नहीं की बात इस बार का एशिया कप 2025 का ऐसे समय में हुआ, जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं. पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद दोनों टीमें पहली बार क्रिकेट के मैदान में आमने-सामने उतरी थीं. लिहाजा मैदान पर भी उस तनाव की छाया साफ नजर आई. भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत से ही यह रणनीति बना ली थी कि पाकिस्तान से किसी तरह की औपचारिकता नहीं निभाई जाएगी. मैच से पहले और बाद में भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से परहेज किया. मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच किसी तरह की बातचीत भी नहीं हुई. क्रिकेट के जरिये भारत ने यह संदेश दिया कि वह पाकिस्तान से बेहद नाराज है और हालिया घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता. भारतीय खिलाड़ियों ने यह साफ कर दिया कि क्रिकेट में औपचारिकता निभाने के बावजूद वह पाकिस्तान के साथ सामान्य रिश्तों का दिखावा नहीं करेंगे. यह कदम पाकिस्तान को कड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश माना गया.  अब महिला टीम भी अपनाएगी यही रुख अब वही रवैया भारतीय महिला टीम में भी देखने को मिलेगा. महिला वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला रविवार को कोलंबो के न्यूट्रल वेन्यू पर खेला जाएगा. मैच दोपहर तीन बजे शुरू होगा. इस मुकाबले में भी भारतीय महिला खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाएंगी और औपचारिकता से दूरी बनाए रखेंगी. माना जा रहा है कि यह फैसला पुरुष टीम के कदम से प्रेरित है और भारत का सामूहिक संदेश है कि पाकिस्तान के साथ सामान्य व्यवहार की कोई गुंजाइश नहीं है.  भारत की इस रणनीति को सिर्फ खेल तक सीमित नहीं माना जा रहा. यह कदम कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने वाला है. क्रिकेट हमेशा से दोनों देशों के रिश्तों का आईना माना गया है और इस बार भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि हालात सामान्य होने तक क्रिकेट के मैदान पर भी सामान्य शिष्टाचार की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. BCCI ने भारत-पाक मैच पर क्या कहा? देवजीत सैकिया ने BCCI Stumped को हैंडशेक को लेकर कहा-  मैं कुछ भी पूर्वानुमान नहीं लगा सकता, लेकिन उस देश के साथ हमारा संबंध वैसा ही है, पिछले हफ्ते में कोई बदलाव नहीं हुआ है. भारत वह मैच पाकिस्तान के खिलाफ कोलंबो में खेलेगा, और सभी क्रिकेट प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा. मैं केवल यह सुनिश्चित कर सकता हूं कि जो कुछ भी एमसीसी (MCC) के क्रिकेट नियमों में लिखा है, वह किया जाएगा. हाथ मिलाने होंगे या गले मिलने होंगे, इसके बारे में मैं इस समय कुछ भी आश्वस्त नहीं कह सकता. 

BJP का नया प्लान: बिहार में लागू होगा गुजरात मॉडल, कई नेताओं की टिकट पर संकट

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पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है. दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती एंटी इनकंबेंसी से निबटना है. जनता के बीच लंबे समय से जीत रहे विधायकों और मंत्रियों को लेकर बेहद नाराजगी है. इस चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए भाजपा बिहार में गुजरात मॉडल लागू करने जा रही है. गुजरात की तरह बिहार में भी मौजूदा कई मंत्रियों और विधायकों का टिकट काटा जायेगा. ऐसे करीब 30 विधायकों की सूची तैयार की गयी है, जिन्हें पार्टी इस बार बेटिकट कर सकती है. वोटरों की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा का प्रदर्शन संतोषप्रद रहा था. नीतीश कुमार की कम सीटें आने के बाद भी बिहार में एनडीए की सरकार बनी. नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए पांचवीं बार चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहा है. भाजपा के पास अभी 80 विधायक हैं, जिनमें 22 मंत्री हैं. कई सीटों पर इस बार स्थानीय विधायक के प्रति विरोधी लहर पहले के मुकाबले मजबूत है. भाजपा ऐसे विधायकों की जगह नये चेहरों को मौका देने पर विचार कर रही है. वैसे जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए ऐसा करना आसान नहीं है. बिहार में भाजपा एक वरीय नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकार की योजनाओं के कारण जनता में पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी नहीं है, लेकिन स्थानीय विधायकों से जनता नाराज है. मौजूदा विधायकों के प्रति मतदाताओं की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है. गुजरात की तरह कई कद्दावर नेता होंगे बेटिकट पार्टी का जनाधार बढ़ाने और एंटी इनकंबेंसी को साधने के लिए अमित शाह लगातार बिहार की टीम के साथ विचार मंथन कर रहे हैं. उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले एक फार्मूले पर काम किया जा रहा है. पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा बिहार में भी गुजरात मॉडल लागू कर सकती है. भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में इसपर गंभीरता से विचार-विर्मश हुआ है. भाजपा ने 2022 में गुजरात चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की सूची में बड़ा बदलाव किया था. उसी तर्ज पर बिहार में भी एक व्यापक फेरबदल किया जा सकता है. लगातार सातवीं बार गुजरात जीतने के लिए भाजपा ने पूरा मंत्रिमंडल बदल दिया था. साथ ही अपने 108 मौजूदा विधायकों में से 45 का टिकट काट दिया था, जिनमें कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल थे. बिहार में भी भाजपा इसी रास्ते सत्ता में वापसी का प्लान बना रही है.

खाद्य मंत्री राजपूत का निर्देश: हर जरूरतमंद तक पहुंचे राशन, योजना का हो प्रभावी पालन

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मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम आपका राशन-आपका अधिकार का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें : खाद्य मंत्री  राजपूत भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित पात्र हितग्राहियों की सुविधा, राशन सामग्री के प्रति जागरूक करने तथा राशन वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम "आपका राशन-आपका अधिकार" प्रारंभ किया गया है। उन्होंने योजना का बेहतर तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य 5.28 करोड़ पात्र हितग्राहियों को उनकी राशन सामग्री की मासिक हकदारी के प्रति जागरूक करना है। अन्त्योदय परिवार को 35 किलो प्रति परिवार एवं प्राथमिकता श्रेणी के परिवार को 5 किलो प्रति सदस्य खाद्यान्न निःशुल्क के साथ 1 किलोग्राम नमक 1 रूपये प्रति किलो की दर से और अन्त्योदय परिवारों को 1 किलोग्राम शक्कर 20 रूपये प्रति किलो की दर से वितरण किया जा रहा है। कार्यक्रम का क्रियान्वयन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित 130 लाख परिवारों के एक सदस्य का मोबाईल नंबर डाटाबेस में दर्ज है। इन परिवारों को प्रतिमाह विकासखण्ड स्तरीय 308 प्रदाय केंद्र से मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत 100 वाहनों से उचित मूल्य दुकानों को खाद्यान्न डिस्पेच होगा, उसी समय संबंधित उचित मूल्य दुकानों से पंजीबद्ध उपभोक्ताओं को राशन निकलने का सिस्टम जनरेटेड मेसेज रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जाएगा। विकासखण्ड स्तरीय प्रदाय केंद्र से उचित मूल्य दुकान पर जैसे ही खाद्यान्न प्राप्त होगा एवं उचित मूल्य दुकान के विक्रेता द्वारा पीओएस मशीन में राशन प्राप्ति की प्रविष्टि की जाएगी, उसी समय पंजीबद्ध पात्र परिवारों को उचित मूल्य दुकान पर राशन पहुंचने का सिस्टम जनरेटेड मेसेज मोबाइल नंबर पर जाएगा। उचित मूल्य दुकान पर लगाई गई पीओएस मशीन में पात्र परिवारों को बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद राशन का वितरण किया जाता है। पात्र परिवार द्वारा पीओएस से राशन प्राप्त होते ही उपभोक्ता को दिए गए राशन की मात्रा संबंधी सिस्टम जनरेटेड संदेश उपभोक्ताओं के मोबाइल नम्बर पर जाएगा। प्रत्येक उचित मूल्य दुकान से वर्ष भर में वितरित किये गये खाद्यान्न की जानकारी जनसमुदाय को देने के लिए वर्ष में दो बार 26 जनवरी एवं 02 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में विस्तृत विवरण पढ़ा जाएगा। उपभोक्ताओं में "आपका राशन-आपका अधिकार" संबंधी जागरुकता लाने के लिये समय-समय पर चरणबद्ध रूप से उपभोक्ता जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम से लाभ राशन सामग्री प्रदाय केन्द्र से उचित मूल्य दुकान तक पहुंचने पर उपभोक्ताओं द्वारा निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे परिवहन के दौरान सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। उपभोक्ताओं को उचित मूल्य दुकान पर सामग्री प्राप्त होने की सूचना मिलने से समय पर राशन सामग्री का वितरण किया जा सकेगा। उपभोक्ताओं को प्राप्त सामग्री की जानकारी सिस्टम से प्राप्त होने पर विक्रेता द्वारा दी गई सामग्री से मिलान किया जा सकेगा। इससे निर्धारित मात्रा से कम सामग्री देने पर रोक लगेगी। गाँव में पात्र परिवारों की सूची का वाचन करने से मृत तथा स्थाई रूप से प्रवासी हितग्राहियों को विलोपन किया जा सकेगा। इससे पात्र प्रतीक्षारत हितग्राहियों को जोड़ा जा सकेगा। ग्राम सभा में पात्र परिवारों को राशन वितरण की जानकारी देने से वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जनभागीदारी बढ़ेगी। मॉनीटरिंग ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय स्तर पर इसका क्रियान्वयन ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय एवं उचित मूल्य दुकान विक्रेता के द्वारा किया जाएगा। जनपद स्तर पर निगरानी SDM एवं ASO/JSO द्वारा की जाएगी। जिला स्तर पर निगरानी कलेक्टर एवं DSC/DSO द्वारा की जाएगी। राज्य स्तर पर संचालनालय खाद्य के कन्ट्रोल रूम से निगरानी की जाएगी।  

उद्योग और निवेश पर फोकस: 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में सीएम मोहन यादव का संवाद कार्यक्रम

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भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेश बढ़ाने के लिए अब उत्तर–पूर्व भारत की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। वे 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज में उत्तर–पूर्व के उद्योगपतियों और निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। इस सत्र में फार्मास्यूटिकल, चाय, सीमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी और खाद्य प्रसंस्करण सहित कई क्षेत्रों के उद्योगपति भाग लेंगे। गुवाहाटी फार्मा उद्योग का प्रमुख केंद्र है, जहां सन फार्मा, अल्केम और अजंता जैसी कंपनियां सक्रिय हैं। इसके अलावा सीमेंट, पेट्रोकेमिकल्स, चाय उद्योग, पर्यटन, वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और कृषि–प्रसंस्करण के क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। डिब्रूगढ़ में ऑयल इंडिया का मुख्यालय और बीपीसीएल के बड़े प्रोजेक्ट हैं, तिनसुकिया चाय बागानों और लॉजिस्टिक्स का केंद्र है, जोरहाट चाय अनुसंधान का हब है, जबकि शिवसागर और नाज़िरा में ONGC की संपत्तियां हैं। नामरूप में असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड भी सक्रिय है। मध्य प्रदेश देगा बेहतर निवेश माहौल मध्यप्रदेश की निवेशक हितैषी नीतियां, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर कनेक्टिविटी इन क्षेत्रों के उद्योगपतियों को आकर्षित करने में सहायक होंगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह साझेदारी निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलेगी। गुवाहाटी के अलावा डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, जोरहाट, शिवसागर और नामरूप से प्रतिनिधि इस सत्र में शामिल होंगे। साथ ही शिलांग, अगरतला, आइजोल, इंफाल, कोहिमा और दीमापुर जैसे राज्यों से भी उद्योगपति भाग लेंगे। नई संभावनाओं की राह इस संवाद के जरिए मध्यप्रदेश और उत्तर–पूर्व दोनों क्षेत्रों के बीच भरोसे और साझेदारी की नई नींव रखी जाएगी। फार्मा, सीमेंट, पेट्रोकेमिकल्स, पर्यटन और कृषि–प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग से नई संभावनाएं और रोजगार के अवसर सामने आएंगे। गुवाहाटी का यह इंटरैक्टिव सेशन 5 अक्टूबर को रेडिसन ब्लू होटल में होगा, जिसमें विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के प्रमुख निर्णयकर्ता और निवेशक मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री की यह पहल मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निवेश का भरोसेमंद और प्रगतिशील गंतव्य बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी। 

सोना: शास्त्रों में पवित्र, आज के दौर में मिडिल क्लास की आर्थिक ढाल

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मुंबई  हर सुबह आंख खुलने के साथ, आप बिजनेस की खबरों में रुचि रखते हों या न रखते हों, लेकिन एक चीज पर आपकी निगाहें ज़रूर टिकती होंगी, वो है सोने का भाव- आंखें नचाते हुए आप ये जरूर कहते होंगे- अरे यार! सोना फिर इतना महंगा हो गया? चांदी भी कहां रुकने का नाम ले रही है. वाकई सोने-चांदी के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने मिडिल क्लास लोगों की नींद उड़ा दी है. बच्चों की शादी, सेविंग्स, इन्वेस्टमेंट, गहनों का शौक और कुछ शोशेबाजी… इन सारी जरूरतों को पूरा करता है सोना. कुल मिलाकर मिडिल क्लास फैमिली को अपने लेवल से कुछ ऊंचा उठाकर एलीट वाली लॉबी में एंट्री कर जाने की फीलिंग कराता है सोना. बीते कुछ सालों में सोने के भाव में बढ़ोतरी ने ख़रीदारों को बड़ा झटका दिया है. आज सोने की कीमत लगभग सवा लाख रुपये प्रति दस ग्राम (24 कैरेट) है. लिहाजा आगे आने वाले हैं करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार जो सोने की खरीदारी के खास दिन माने जाते हैं. वहीं लगन का समय भी शुरू होने वाला है, जो जूलरी की खरीदारी का सबसे डिमांडिंग टाइम है.  साल 2024 में धनतेरस पर खरीदारी इन सबके बावजूद कोई चौंकने वाली बात नहीं होगी कि महंगाई के इस बड़े आंकड़ों के बाद भी सोने की खरीदारी फेस्टिवल टाइम में कोई रिकॉर्ड बना जाए. साल 2024 के धनतेरस पर नजर डालें तो उस दौरान करीब 25 टन सोने की बिक्री हुई थी, जिसका मूल्य करीब 20 हजार करोड़ रुपये आंका गया था. इसी तरह देशभर में 250 टन चांदी भी बिकी थी. इसकी अनुमानित कीमत 2,500 करोड़ रुपये रही.  ये आंकड़ा तब है, जब साल 2024 में ही सोने में 30 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई थी. वहीं साल 2023 में धनतरेस के मौके पर सोने का भाव 60 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, जो 2024 में बढ़कर 80 हजार रुपये हो गया है. वहीं चांदी का भाव साल 2023 में 70 हजार रुपये किलो था, जो 2024 में  1 लाख रुपये के करीब पहुंच गया था. ये आंकड़े बताते हैं कि सोने-चांदी की कीमतों में इतनी भयानक तेजी होने के बाद भी लोगों में इसकी खरीदारी में कमी नहीं आती है और खास मौकों पर लोग सुनार के पास जुटते हैं.  सोने से मोह की क्या है वजह? सवाल उठता है कि आखिर इसकी वजह क्या है? सवाल ये भी है कि सोने-चांदी को ही ये तवज्जो क्यों मिलती है? जबकि हीरा, पन्ना, माणिक्य, मोती जैसे रत्न और प्लेटिनम जैसी सोने से भी कीमती धातु होने के बाद भी लोग आभूषण और सेविंग्स-इन्वेस्टमेंट के तौर पर सोना या चांदी को ही तरजीह देते हैं.  सोने के साथ लोगों का भावुकता से भरा जुड़ाव होने का पहला कारण तो धार्मिकता है. सोने को सनातन परंपरा में सबसे शुद्ध धातु बताया गया है. यह भी कहा गया है सोना इतना पवित्र है कि यह धारण करने वाले को हमेशा पवित्र बनाए रखता है. सोने की मौजूदगी होने के मातलब है कि आप के पास किसी न किसी रूप में लक्ष्मीदेवी की कृपा है. पुराणों में सोने को स्वर्ण कहा गया है और स्वर्ण को लक्ष्मी का स्वरूप बताया गया है. देवी लक्ष्मी की कृपा अगर किसी व्यक्ति पर होती है तो वह आसानी से सोने की संपदा का मालिक बन जाता है. उनकी कृपा को सोने के तौर पर ही दिखाया जाता है.  चारों वेदों में सोने का महत्व सोने के महत्व को समझने के लिए बीते युग में चलें तो इसका संदर्भ ऋग्वेद में भी मिलता है. ऋग्वेद के दशम मंडल में स्वर्ण के लिए हिरण्य शब्द आया है और इसके जरिए सूर्य को परिभाषित किया गया है. यानी पुराणों में जिस सूर्य का पहला नाम आदित्य (अदिति के पुत्र होने के कारण) है, वेदों में उसी सूर्य का पहला नाम हिरण्य है. जिसका अर्थ सुनहरा लिया जाता है. इस तरह सोना (हिरण्य) भारतीय संस्कृति में केवल भौतिक धातु नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और दैवीय शक्ति का प्रतीक माना गया है. वेदों में इसे कई जगहों पर प्रकाश, तेज, समृद्धि और अमरत्व से जोड़ा गया है. ऋग्वेद में सूर्य को "हिरण्यगर्भ" (स्वर्णगर्भ) कहा गया है. दशम मंडल में सूक्ति है 'हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्.'(ऋग्वेद 10.121.1) यहां सूर्य को सारी सृष्टि का स्वर्णगर्भ माना गया है. सूर्य का यह स्वर्णिम तेज ही लाइफ सोर्स और सपोर्टिंग सिस्टम है. इसी वेद में अग्नि, इन्द्र और मरुतों की आभा को 'हिरण्य' कहा गया है. इसका उदाहरण भी एक प्रमुख ऋग्वैदिक सूक्ति में मिलता है.  हिरण्ययैः सविता रश्मिभिर्व्याख्यात्.'(ऋग्वेद 1.35.2) इसका अर्थ है कि, सूर्य अपनी स्वर्णिम किरणों से आकाश और पृथ्वी को प्रकाशित करता है. इसी तरह यजुर्वेद में यज्ञ के साथ ही सोने का महत्व है. “हिरण्यपात्रं गृह्णामि ते ज्योतिरस्मि, ये सूक्ति कहती है कि हिरण्यपात्र (सोने का पात्र) यज्ञ में शुद्धि और तेज का प्रतीक है. यजुर्वेद (31.18) में "हिरण्ययूप" का भी उल्लेख मिलता है, जिसका अर्थ है स्वर्ण से निर्मित यज्ञ-स्तंभ. यह देवताओं को समर्पण की उच्चतम भावना का प्रतीक है. वहीं अथर्ववेद में सोने को स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगनिवारण का साधन माना गया है. इस बात को अथर्ववेद की एक सूक्ति साबित करती है, जो कहती है 'हिरण्यं भेषजं भवतु.' (अथर्ववेद 2.4.5) यानी सोना औषधि स्वरूप हो, जो जीवन में बल, ओज और आरोग्य प्रदान करे. सामवेद, जो कि देवताओं यज्ञ की ऋचाओं के गायन का संकलित ग्रंथ है, उसमें देवताओं कि पवित्रता को सोने की उपमा दी गई है. सूक्ति 'हिरण्यपाणिः सविता देवो अस्तु.' (सामवेद 1.3.1) में सूर्य को स्वर्ण करधनी और स्वर्णिम हाथों वाला देवता बताया गया है. यह स्वर्णिम प्रतीक देवत्व और दिव्यता का बोध कराता है. वेदों में सोना केवल भौतिक धातु नहीं, बल्कि सूर्य के तेज, देवताओं की आभा, यज्ञ की पवित्रता और औषधीय शक्ति का प्रतीक है. "हिरण्य" शब्द वेदों में बार-बार आता है, जो यह दर्शाता है कि स्वर्ण यानी सोने को मनुष्य के भौतिक और आध्यात्मिक जीवन दोनों में बहुत महत्व रहा है.  नीतिशतक जैसे ग्रंथों में सोने का महत्व सोने का महत्व अलग-अलग समय पर पौराणिक आख्यानों में, नीतिग्रंथों और यहां तक मनुस्मृति और पंचतंत्र तक में बताया गया है.  नीति शतक में एक सूक्ति आती है, जिसमें … Read more