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महर्षि वाल्मीकि जयंती : योगी सरकार का निर्देश- जनपद, तहसील व विकासखंड स्तर पर कराए जाएं कार्यक्रम

महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर, चित्रकूट में होगा वृहद आयोजन इस वर्ष भी स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच देगी योगी सरकार जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति ने किया कलाकारों का चयन सभी देव मंदिरों व महर्षि वाल्मीकि से संबंधित स्थलों पर होंगे महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण पाठ, सांस्कृतिक आयोजन, भजन-कीर्तन, दीप प्रज्ज्वलन/दीपदान आदि कार्यक्रम लखनऊ,  योगी सरकार 7 अक्टूबर को पूरे प्रदेश में धूमधाम से वाल्मीकि जयंती मनाएगी। इस दौरान अनेक भव्य कार्यक्रम होंगे। सभी देव मंदिरों, महर्षि वाल्मीकि से संबंधित स्थलों में महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन, कीर्तन, दीप प्रज्ज्वलन आदि कराए जाएंगे। महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली चित्रकूट में वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। योगी सरकार प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच देगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया है कि कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति के साथ जनसहभागिता पर विशेष जोर रहे।   यूपी के सभी जनपदों में होंगे आयोजन योगी सरकार के निर्देशानुसार 7 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों में वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। सभी देव मंदिरों, महर्षि वाल्मीकि से संबंधित स्थलों आदि पर दीप प्रज्ज्वलन, दीपदान के साथ-साथ रामायण पाठ कराए जाएंगे। यह कार्यक्रम जनपद, तहसील व विकास खंड स्तर पर होंगे। सीएम योगी ने हर आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, पेयजल, ध्वनि, प्रकाश व सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था का निर्देश दिया है। महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर चित्रकूट में होगा वृहद आयोजन योगी सरकार महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर चित्रकूट में वृहद आयोजन कराएगी। उप निदेशक (पर्यटन) आरके रावत को कार्यक्रम का नोडल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि लालापुर में महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति पर माल्यार्पण के साथ सुबह 11 बजे कार्यक्रम का शुभारंभ होगा। दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत विराट महाराज व संस्कृत के अध्ययनरत बच्चों द्वारा रामायण पाठ होगा। दयाराम रैकवाड़ व टीम की तरफ से आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पूजन-हवन, भजन, वाल्मीकि रामायण पाठ, लवकुश प्रसंग समेत अन्य कार्यक्रम भी होंगे। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और जनसहभागिता भी रहेगी। इसके अलावा तुलसीदास आश्रम राजापुर चित्रकूट, वाल्मीकि आश्रम बिठूर कानपुर, वालमीकि आश्रम श्रावस्ती, अयोध्या, प्रयागराज समेत पूरे प्रदेश में आयोजन होगा। स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच देगी योगी सरकार देव मंदिरों में होने वाले रामायण पाठ समेत अन्य कार्यक्रमों में योगी सरकार स्थानीय कलाकारों को आध्यात्मिक मंच उपलब्ध कराएगी। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा जनपद में चयनित मंदिरों व स्थलों पर कार्यक्रम के लिए कलाकारों का चयन किया गया है। इसका समन्वय संस्कृति विभाग, सूचना-जनसंपर्क विभाग, जिला पर्यटन व संस्कृति परिषद द्वारा किया जाएगा। हर जनपद में आयोजन के लिए नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। योगी सरकार का कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ जनसहभागिता पर जोर है।

मुख्यमंत्री ने राज्य कर विभाग की राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा की, जोनल अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद

जीएसटी के ‘नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म’ से बाजार में तेजी, आने वाले महीनों में दिखेगा सकारात्मक असर: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, धनतेरस व दीपावली पर अनावश्यक छापेमारी या जांच से बचें सितम्बर तक राज्य कर विभाग को ₹55,000 करोड़ की प्राप्ति बोगस फर्मों व फर्जी आईटीसी पर कार्रवाई जारी, अब तक ₹873.48 करोड़ के फर्जी दावे पकड़े गए लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य कर विभाग में तैनाती का आधार केवल ‘परफॉर्मेंस’ होगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि फील्ड में वही अधिकारी तैनात किए जाएं जो लक्ष्य प्राप्ति के प्रति प्रतिबद्ध हों और जिनकी छवि पूरी तरह साफ हो। मुख्यमंत्री रविवार को राज्य कर विभाग की राजस्व प्राप्तियों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोनल अधिकारियों से सीधा संवाद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी के ‘नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म’ के बाद बाजार में तेजी देखी जा रही है और आने वाले महीनों में इसके सकारात्मक परिणाम निश्चित रूप से दिखाई देंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि धनतेरस और दीपावली के अवसरों पर अनावश्यक जांच अथवा छापेमारी की कार्रवाई से बचा जाए। व्यापारियों और उद्यमियों के उत्पीड़न की शिकायत कहीं से भी नहीं आनी चाहिए। बैठक के दौरान जोनवार समीक्षा में अवगत कराया गया कि बरेली (64.2%), सहारनपुर (63.7%), मेरठ (63.0%), गोरखपुर (62.5%) और झांसी (62.1%) जैसे जोनों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा है। वहीं कुछ जोनों में लक्ष्य पूर्ति 55 से 58 प्रतिशत के बीच रही, जहां सुधार की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने वाराणसी प्रथम व द्वितीय, गोरखपुर, प्रयागराज, अयोध्या, लखनऊ प्रथम व द्वितीय, कानपुर प्रथम व द्वितीय, इटावा, झांसी, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद प्रथम व द्वितीय, गौतमबुद्ध नगर और सहारनपुर सहित सभी जोनों की संभागवार और खंडवार समीक्षा की। उन्होंने सभी जोनल अधिकारियों से कहा कि 50 प्रतिशत से कम राजस्व संग्रह वाले खंडों की स्थिति का कारण स्पष्ट करें और सुधार की कार्ययोजना तत्काल तैयार करें। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि बरेली, झांसी और कानपुर प्रथम जोन में कोई भी खंड 50 प्रतिशत से कम संग्रह वाला नहीं है, जो संतोषजनक है। वहीं, असंतोषजनक प्रदर्शन करने वालों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व वृद्धि राज्य की आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति का संकल्प लेकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मार्केट मैपिंग करें, सामान्य रूप से बाजार में जाएं, व्यापारियों से मिलें और उनकी अपेक्षाओं को समझें। मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मंडी शुल्क में कमी से किसानों को राहत और राजस्व में वृद्धि दोनों हुई हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि पारदर्शी और सरल कर प्रणाली हमेशा लाभकारी होती है। उन्होंने व्यापारियों से संवाद बनाए रखने पर बल देते हुए कहा कि जीएसटी पंजीकरण बढ़ाने और समय से रिटर्न फाइल कराने के लिए ठोस प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में सितम्बर माह तक राज्य कर विभाग को कुल ₹55,000 करोड़ की प्राप्ति हुई है। इसमें ₹40,000 करोड़ जीएसटी तथा ₹15,000 करोड़ वैट/नॉन-जीएसटी से प्राप्त हुए हैं। गत वित्तीय वर्ष की समान अवधि में ₹55,136.29 करोड़ की प्राप्ति हुई थी। चालू वित्तीय वर्ष के लिए राज्य कर विभाग को ₹1.75 लाख करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष के ₹1,56,982 करोड़ की तुलना में लगभग ₹18,700 करोड़ अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय जीएसटी संग्रह में अग्रणी योगदान देना चाहिए और इसके लिए नियोजित प्रयास किए जाएं। बैठक में बोगस फर्मों और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के मामलों पर विशेष चर्चा हुई। विभाग द्वारा अब तक 104 फर्मों में ₹873.48 करोड़ के फर्जी आईटीसी की पहचान की गई है, जिन पर जांच एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व संग्रह में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और ईमानदारी सर्वोपरि है। जहां कमी दिखाई दे, वहां कारणों की समीक्षा कर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। उन्होंने बकाया वसूली, फर्जी आईटीसी की रोकथाम और लंबित जीएसटी/वैट मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि करदाताओं की सुविधा और विश्वास अर्जन ही स्थायी राजस्व वृद्धि का आधार है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि करदाता-मित्रवत वातावरण तैयार करते हुए ई-गवर्नेंस प्रणाली को और सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि “राजस्व वृद्धि राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने का आधार है। विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में राज्य कर विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि कर संग्रह का प्रत्येक रुपया प्रदेश के विकास में योगदान दे।” उन्होंने विभागीय अधिकारियों को राजस्व सृजन की गति और पारदर्शिता, दोनों पर समान ध्यान देने तथा करदाता जनसहजता बढ़ाने के निर्देश दिए।

वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया नमन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अदम्य शौर्य और साहस की प्रतिमूर्ति वीरांगना रानी दुर्गावती की जयंती पर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि अपनी वीरता, दृढ़ता और साहस से अमर शौर्य गाथा लिखने वाली, नारी शक्ति की अद्वितीय प्रतिमूर्ति, महान वीरांगना रानी दुर्गावती का मातृभूमि व स्वाभिमान की रक्षा के लिए मुगलों के विरुद्ध संघर्ष और उनका बलिदान हम सबके लिए सदैव प्रेरणास्पद रहेगा।

पहला घातक ट्रांसप्लांट: एक की मौत से दूसरे को मिली ज़िंदगी, उठे नैतिक सवाल

कनाडा कनाडा ने चिकित्सा इतिहास में एक भयंकर और विवादास्पद मील का पत्थर तय किया है। देश में पहली बार Medically Assisted Death (MAiD) यानि चिकित्सकीय सहायता से मृत्यु  के माध्यम से मृत घोषित व्यक्ति का हृदय सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया। इस घटना में 38 वर्षीय ALS (अमायलोट्रॉफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) रोगी को पहले इच्छा मृत्यु दी गई फिर उसकी मृत्यु के सिर्फ सात मिनट बाद उसका हृदय "पुनर्जीवित" किया गया और अमेरिका ले जाकर प्रत्यारोपित किया गया। यह घटना बेशक Organ Donation after Euthanasia (ODE) के क्षेत्र में कनाडा को विश्व में अग्रणी बनाती है लेकिन इसने एक नई बहस भी छेड़ दी है। 2021 तक वैश्विक ODE मामलों में 286 में से 136 कनाडा में हुए। 2024 में कनाडा में हुए सभी अंग प्रत्यारोपणों में 5% अंग MAiD से आए। इसका मतलब यह है कि अब कनाडा मृत्यु और अंगदान के बीच एक नई, विवादास्पद कड़ी स्थापित कर रहा है। कनाडा के ओंटारियो प्रांत के 38 वर्षीय व्यक्ति, जो एएलएस (Amyotrophic Lateral Sclerosis) नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, ने टोरंटो जनरल हॉस्पिटल में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग (MAiD) प्रक्रिया के तहत स्वेच्छा से जीवन समाप्त करने का निर्णय लिया। उनकी मृत्यु के तुरंत बाद, उनका हृदय एयरलिफ्ट कर पिट्सबर्ग (अमेरिका) भेजा गया, जहां यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग मेडिकल सेंटर में एक 50 वर्षीय हृदय रोगी में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) किया गया।  कनाडा आज विश्व में MAiD के बाद अंगदान करने वाले देशों में अग्रणी बन चुका है। केवल 2023 में ही 13,000 से अधिक MAiD मामले दर्ज किए गए। हालांकि, इस प्रथा को लेकर देश में नैतिकता और मानवाधिकारों पर गंभीर बहस छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि ऐसी प्रक्रियाओं में सहमति (consent) की पारदर्शिता और कमजोर मरीजों पर संभावित मानसिक दबाव जैसे मुद्दे गहराई से जांच के योग्य हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रणाली मानवाधिकारों और नैतिकता पर गंभीर सवाल उठाती है। ऐसे रोगी जो खुद को समाज या परिवार के लिए बोझ मानते हैं, वे “अर्थपूर्ण योगदान देने” के बहाने मृत्यु को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। अंगदान की इच्छा कभी-कभी मौत का निर्णय प्रभावित कर सकती है, जिससे कमजोर व्यक्तियों पर अप्रत्यक्ष दबाव बन सकता है। कनाडा की स्वास्थ्य नीति अब एक ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है जहां सबसे कमजोर लोगों की मृत्यु का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए किया जा रहा है। कनाडा की स्वास्थ्य एजेंसियों और नैतिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अंगदान की प्रक्रिया को MAiD के साथ जोड़ने से समाज में नैतिक और कानूनी जोखिम पैदा हो सकते हैं। कुछ आलोचकों का कहना है कि यह प्रणाली मौत को केवल उपयोगी साधन बनाने की ओर जा रही है। वैश्विक स्तर पर, विशेषज्ञों ने पूछा है कि क्या कनाडा की यह नीति मानवाधिकारों के लिए खतरा नहीं है। मानवाधिकार और नैतिकता पर बहस गरम   इस मुद्दे पर सोशल मीडिय पर तीखी बहस छिड़ गई है।  Jason Gregor ने लिखा, “आप इस पोस्ट में कई अनुमान लगा रहे हैं। जब तक आप उनकी स्थिति में नहीं रहे, आपको अंदाजा नहीं है कि वे कैसा महसूस करते हैं। MAiD का उपयोग करने के लिए उन्हें स्वस्थ मानसिक स्थिति में होना जरूरी है। मृत्यु के बाद किसी की मदद करने का विकल्प होना उनके लिए स्वागतयोग्य हो सकता है। MAiD एक अविश्वसनीय विकल्प है।” Sreliata ने लिखा, “ALS का कोई इलाज नहीं है और पीड़ा निश्चित है। मैं नहीं समझता कि जब तक व्यक्ति अपने सही मानसिक हाल में है, वह इस रास्ते को क्यों नहीं चुन सकता? असिस्टेड ‘सुसाइड’ के विरोधी वही होते हैं जिन्होंने कभी शारीरिक कष्ट नहीं झेला।”वहीं Tybernicus ने सवाल उठाया, “क्या कनाडा में किसी को उस समय दिल की ज़रूरत नहीं थी या उसे सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को बेचा गया? उस दिल के लिए कनाडा को कितना मिला? वह पैसा मृतक के परिवार को क्यों नहीं मिला?” Chokic ने लिखा, “मैंने भी असहनीय शारीरिक कष्ट झेला है, लेकिन मैं इसके खिलाफ हूं।”   Monica P ने कहा, “अगर ALS इतनी हालत बना दे कि जीना असंभव हो जाए, तो यह व्यक्ति का अधिकार है कि वह क्या करे। अगर वह अंगदान भी करना चाहे तो यह उसका निर्णय है। गूगल सर्च से पता चलता है कि इस बीमारी का अंत कितना भयानक होता है।” Van K Tran ने कहा, “इलाज खोजने की बजाय आप असिस्टेड सुसाइड चुनते हैं और अब इसमें एक ‘इंसेंटिव’ भी जुड़ गया है। इलाज शायद कभी न मिले, लेकिन यह रास्ता सवाल खड़े करता है।” कनाडा का यह कदम केवल चिकित्सा उपलब्धि नहीं है, बल्कि समाज और नैतिकता के लिए एक बड़ा सवाल भी है।     क्या अंगदान के नाम पर मौत को "उपयोगी" बनाना सही है?     क्या कमजोर रोगियों को अप्रत्यक्ष दबाव में जीवन समाप्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है?     यह बहस अब केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रही।     यह मानवाधिकार, नैतिकता और समाज की संवेदनशीलता पर गहराई से सवाल उठा रही है।  

मोबाइल पीछे से गरम हो रहा है? फटने से बचाने के लिए अपनाएं ये 4 ट्रिक

आजकल स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हो गए हैं। शायद ही कोई ऐसा हो जो घर से बाहर निकलते हुए मोबाइल अपने साथ लेकर ना जाए। लेकिन कई बार स्मार्टफोन्स में ओवरहीटिंग की समस्या देखने को मिलती है। फोन के गरम होने से बैटरी की लाइफ कम हो सकती है, डिवाइस धीमा हो सकता है और कभी-कभी तो आग लगकर फटने का खतरा भी होता है। इसलिए जरूरी है कि फोन जैसे ही ओवरहीट होने लगे, कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। लापरवाही बरतने से फोन के फटने का डर भी रहता है। इतने से अधिक तापमान में फोन यूज न करें रिपोर्ट बताती है कि कुछ स्मार्टफोन में टेंपरेचर को कंट्रोल करने के लिए सेफ्टी फीचर्स होते हैं। अगर फोन ज्यादा गर्म हो जाए, तो यह खुद-ब-खुद स्टैंडबाई मोड में चला जाता है या अपने आप बंद हो जाता है। ऐपल, सैमसंग और गूगल जैसे ब्रांड्स कहते हैं कि 35 डिग्री सेल्सियस (95 डिग्री फारेनहाइट) से ज्यादा तापमान में फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर आप फोन को बंद करके रख रहे हैं, तो यह 45 डिग्री सेल्सियस तक सह सकता है, लेकिन इससे ज्यादा गर्मी खतरनाक हो सकती है। स्मार्टफोन कब गर्म होने लगता है? स्मार्टफोन के गर्म होने के कई कारण हो सकते हैं। यदि अगर आप वीडियो कॉल कर रहे हैं, गेम खेल रहे हैं या फोन को चार्जर पर लगाकर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह गर्म होने लगता है। खासकर सस्ते चार्जर या मोटे कवर का इस्तेमाल करने से हीट और बढ़ सकती है। इंसानों की तरह फोन पसीना नहीं बहा सकते, इसलिए गर्मी अंदर ही जमा होती रहती है। स्क्रीन की ब्राइटनेस ज्यादा रखने या कई ऐप्स एक साथ चलाने से भी फोन गर्म हो सकता है। फोन का कवर हटा दें फोन गर्म हो जाए तो तुरंत इसके मोटे कवर को निकाल दें, फिर इसे ऐसी जगह पर रखें, जहां हवा चल रही हो। हवा का प्रवाह फोन को ठंडा रखने में मदद करता है। इसके अलावा, फोन को मोटे कवर में रखने से भी बचना चाहिए। ब्राइटनेस कम करें, लो पावर मोड ऑन करें आप जितना अधिक फोन का इस्तेमाल करते हैं, उतनी ही ज्यादा गर्मी पैदा होगी। जरूरत न हो तो फोन का इस्तेमाल कम करें। स्क्रीन की ब्राइटनेस को कम करें और लो पावर मोड चालू करें। इससे फोन पर कम दबाव पड़ेगा और गर्मी भी कम होगी। बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स बंद करें बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स फोन को गर्म करती हैं। iPhone में स्क्रीन के नीचे से ऊपर स्वाइप करें और अनचाही ऐप्स को बंद करें। एंड्रॉयड में मेन्यू आइकन पर टैप करके या स्क्रीन के नीचे से ऊपर स्वाइप करके ऐप्स बंद करें। इससे फोन के प्रोसेसर को आराम मिलेगा। फोन को बंद कर दें अगर फोन बहुत गर्म हो रहा है, तो उसे बंद कर देना सबसे अच्छा है। इससे हीट कम होगी और डिवाइस को नुकसान होने से बचेगा। कुछ मिनटों बाद डिवाइस को छूकर देखें, यदि यह नॉर्मल तापमान पर आ गया है तो इसे यूज कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया आसाम के वन्य जीव कन्वेंशन सेंटर का भ्रमण

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को आसाम राज्य के कोहोरा स्थित वन्य जीव कन्वेंशन सेंटर का अवलोकन किया। उन्होंने सेंटर में वन्य जीवों के संधारण एवं प्रजाति संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि “वन्य जीव हमारी धरोहर हैं। ये धरती की खुशहाली का प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश में भी वन्य जीव संरक्षण के लिए अनेक नवाचार और प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस कन्वेंशन सेंटर कम म्यूजियम की पहचान न केवल वन्य जीव संरक्षण कार्यों से, बल्कि अवैध शिकार और वन्यजीवों के अवैध व्यापार पर रोकथाम के लिए किए गए ठोस कदमों से भी जुड़ी है। यहाँ 22 सितंबर 2021 को विश्व गैंडा दिवस के अवसर पर यहां राज्यभर से बरामद 2,479 गैंडों के सींगों का औपचारिक दहन किया गया था। यह कदम आसाम की वन्यजीव संरक्षण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा। इन सींगों के विनाश से पहले चुनिंदा सींगों के नमूने सावधानीपूर्वक सुरक्षित किए गए थे, ताकि भविष्य के वैज्ञानिक अध्ययनों में उनका उपयोग किया जा सके। जुलाई 2025 में इन नमूनों की संख्या बढ़कर 2,573 हो गई, जिन्हें डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) भेजा गया था। इस सेंटर में हुई यह वैज्ञानिक पहल इसीलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जब्त किए गए सींगों की उत्पत्ति का पता लगाने, उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि करने और वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध फोरेंसिक जांच को मजबूती देने में सहायक सिद्ध हो रही है। इससे गैंडा प्रजाति के संरक्षण में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पूरी पारदर्शिता के साथ प्रभावी कार्यवाही को अंजाम देने के लिए सशक्त आधार (इथिकल बेसिस) भी मिल रहे हैं।

टूरिज्म को मिलेगा जोरदार बढ़ावा, रीवा से शुरू होंगी देश के महानगरों के लिए फ्लाइट्स

रीवा मध्य प्रदेश के साथ विंध्य क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश की जनता को दीवाली से पहले एक और बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। अब रीवा एयरपोर्ट से रीवा भोपाल के साथ-साथ रीवा से इंदौर के लिए इंडिगो की कनेक्टिंग फ्लाइट प्रतिदिन शुरू होने जा रही है। इनकी मदद से विंध्य के यात्री अब भारत के महानगरों का सफर आसानी से तय कर सकेंगे। इसके लिए इंडिगो कंपनी रीवा सहित नवी मुंबई में अपना सब स्टेशन शुरू करने जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार संभवत अक्टूबर माह के अंत में कनेक्टिंग इंडिगो फ्लाइट की शुरुआत रीवा से हो जाएगी। हवाई यातायात का विंटर शेड्यूल 26 अक्टूबर 2025 से 28 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। इस विंटर शेड्यूल में रीवा से दिल्ली व मुंबई फ्लाइट का भी जिक्र किया गया है। 8 अक्टूबर के बाद नई उड़ान नवी मुंबई के लिए प्रारंभ होगी। इसके साथ ही इंदौर से कनेक्टिंग फ्लाइट रीवा से जाने वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। यहां के लिए रहेगी कनेक्टिंग फ्लाइट बता दें कि ऐसे 12 शहर हैं जिन्हें कनेक्टिंग फ्लाइट रीवा से इंदौर जाने वाले यात्रियों को मिलेगी। इससे रीवा जल्द ही देश के सभी प्रमुख शहरों से हवाई मार्ग से जुड़ जाएगा। रीवा के लोगों के लिए रीवा-पुणे, रीवा-हैदराबाद, रीवा-बैंगलोर, रीवा-गोवा, दिल्ली और मुंबई जाना बेहद सुलभ और आसान हो जाएगा। फ्लाइट शुरू होने से बढ़ेगा निवेश इस संदर्भ में जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश के डेप्युटी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि रीवा इंदौर के बीच शुरू होने वाली इंडिगो की कनेक्टिंग फ्लाइट से जहां विंध्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, दूसरी ओर रीवा को मेडिकल हब बनाए जाने का सपना भी साकार हो सकेगा। विंध्यवासियों के लिए यह एक सौगात है। टूरिज्म इंडस्ट्री को मिलेगा बूस्ट इन कनेक्टिंग फ्लाइट के चालू होने से रीवा में टूरिज्म इंडस्ट्री को बूस्ट मिलेगा। विंध्य क्षेत्र के रीवा में घूमने के लिए कई प्राकृतिक जगहें,जिनमें झरना, नदी शामिल है। इसके साथ ही व्हाइट टाइगर सफारी, कई प्राचीन मंदिर है। फ्लाइट शुरू होने से बाहरी लोगों को यहां पहुंचना आसान हो जाएगा। बता दें अभी तक रीवा एयरपोर्ट से फ्लाइट ओला कंपनी का एक ही विमान भोपाल के लिए उड़ान भरता था। इंडिगो की कनेक्टिंग फ्लाइट शुरू हो जाने से आप रीवा से इंदौर सहित अन्य महानगरों से रीवा सीधे जुड़ सकेंगे।

छत्तीसगढ़ – जहां साहित्य और संस्कृति का हमेशा रहा है वास : मुख्यमंत्री साय

प्रभु श्रीराम के ननिहाल और माता शबरी की पावन भूमि पर हुआ राज्य स्तरीय युवा कवि सम्मेलन का आयोजन रायपुर छत्तीसगढ़ की साहित्यिक, सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से विगत रात्रि आयोजित राज्य स्तरीय युवा कवि सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रभु श्रीराम के ननिहाल और माता शबरी की पावन भूमि को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती सदा से साहित्य और संस्कृति की धरा रही है। मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि महाकवि कालिदास ने इसी धरती पर मेघदूत जैसे अमर काव्य की रचना की, वहीं गजानन माधव मुक्तिबोध और पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जैसे यशस्वी साहित्यकारों ने इसी मिट्टी से अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपने पूर्व संसदीय क्षेत्र रायगढ़ के सुप्रसिद्ध संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग का यह अभिनव प्रयास प्रदेश की कला, साहित्य और रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर उन्हें प्रोत्साहन देने का उत्कृष्ट माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवा साहित्यकारों, रचनाकारों और कलाकारों को निरंतर आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं से चयनित तीनों विजेताओं को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इस मंच के माध्यम से युवा कवियों को देश के ख्यातिलब्ध कवियों से मार्गदर्शन प्राप्त होगा, जिससे उनके रचनात्मक विकास को नई दिशा मिलेगी। छत्तीसगढ़ की संस्कृति गीत, नृत्य और भावनाओं का जीवंत संगम है : उपमुख्यमंत्री अरुण साव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि यह सम्मेलन केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवा कवियों के लिए सीखने और सृजन की प्रेरणा का अवसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति आरंभ से ही समृद्ध रही है — यहाँ मनुष्य के जीवन से लेकर मृत्यु तक हर अवसर पर गीत गाए जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब खेतों में बुआई का समय आता है, तो पूरे वातावरण में ददरिया की मधुर ध्वनि गूंजती है। यहाँ विविध वाद्य, गीत, नृत्य और लोककलाओं की अनूठी परंपरा रही है। श्री साव ने कहा कि यह प्रदेश संतों, महात्माओं और कवियों की कर्मभूमि रहा है, जहाँ से समाज को सदैव नई दिशा मिली है। उन्होंने प्रदेशभर से आए युवा कवियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया। प्रख्यात कवियों का मनमोहक काव्यपाठ सम्मेलन में देश के प्रतिष्ठित कवि शशिकांत यादव, दिनेश बावरा, नीलोत्पल मृणाल, कविता तिवारी और मनु वैशाली ने अपनी ओजपूर्ण एवं भावनात्मक कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। प्रदेश की प्रतिभाओं को मिला सम्मान राज्य स्तरीय युवा कवि प्रतियोगिता में बिलासपुर जिले की निधि तिवारी ने प्रथम स्थान, मीरा मृदु ने द्वितीय स्थान तथा कोरिया जिले की अलीशा शेख ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। मुख्यमंत्री साय ने सभी विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर सहित विभिन्न आयोग एवं मण्डल के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, कवि एवं बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।

तीसरे दिन की हिंदी कमाई: ‘कांतारा’ आगे, \’सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ पीछे

  मुंबई बॉक्स ऑफिस पर दो बड़ी फिल्मों का टकराव देखने को मिल रहा है। एक तरफ शशांक खैतान की डायरेक्टेड और धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी 'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी' है और दूसरी तरफ ऋषभ शेट्टी की ही डायरेक्टेड और होम्बले फिल्म्स की प्रोड्यूस्ड मूवी 'कांतारा: अ लेजेंड चैप्टर 1' है। दोनों ही फिल्म एक ही दिन 2 अक्टूबर को थिएटर्स में रिलीज हुई और इन्हें अलग-अलग रिस्पॉन्स मिला। दोनों की तीसरे दिन यानी पहले शनिवार को कितनी कमाई हुई, आइए जानते हैं। ऋषभ शेट्टी की निर्देशित और अभिनीत 'कांतारा अ लेजेंड चैप्टर 1' ने दो दिन में ही बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया था और पांच भाषाओं में 107.85 करोड़ का कलेक्शन कर लिया था। वहीं, जान्हवी कपूर, वरुण धवन, रोहित सर्राफ और सान्या मल्होत्रा स्टारर मूवी 'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी' दो दिन में सिर्फ 14.75 करोड़ रुपये की कमाई कर सकी थी। 'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी' बॉक्स ऑफिस डे 3 अब sacnik के मुताबिक, 'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी' ने पहले दिन जहां 9.25 करोड़ का कलेक्शन किया। वहीं, इसकी कमाई दूसरे दिन घटी और 5.5करोड़ रुपये दर्ज की गई। और तीसरे दिन यानी पहले शनिवार को थोड़ा इजाफा हुआ और करीब 7.25 करोड़ का कलेक्शन फिल्म ने किया। जो कि बहुत कम है। कुल कलेक्शन की बात करें तो वह अभी 22.02 करोड़ रुपये है। मगर जिस तरह से मूवी का प्रमोशन एक्टर्स ने किया था और कर रहे हैं, उस वजह से मेकर्स को ज्यादा उम्मीद थी। 'कांतारा चैप्टर 1' बॉक्स ऑफिस डे 3 बात करें ऋषभ शेट्टी की 'कांतारा: अ लेजेंड चैप्टर 1' की, तो इसने ओपनिंग 61.85 करोड़ रुपये से की थी। कन्नड़, तेलुगू, हिंदी, तमिल और मलयालम में रिलीज हुई इस पैन इंडिया फिल्म की भी कमाई दूसरे दिन गिरी और 46 करोड़ रुपये दर्ज की गई। मगर थोड़ा जोर लगा और तीसरे दिन बढ़ोत्तरी हुई और आंकड़ा पहुंच गया करीब 55 करोड़ रुपये। यानी इस मूवी ने बिना प्रमोशन और हाइप के ही अच्छा कलेक्शन कर लिया। ऐसे में इसकी कुल कमाई लगभग 162.85 करोड़ हो गई है। 'कांतारा चैप्टर 1' ने हिंदी में भी ज्यादा कमाई की उन लोगों के लिए, जिन्हें ये लग रहा कि ऋषभ शेट्टी की मूवी पैन इंडिया है, इसलिए उसने ज्यादा कमाई की है और वरुण-जान्हवी की फिल्म तो सिर्फ हिंदी में रिलीज हुई है, इसलिए कलेक्शन कम है। तो उन्हें बता दें कि हिंदी का भी आंकड़ा अगर 'कांतारा चैप्टर 1' का देखें तो वह 30 करोड़ के पार जा रहा है। पहले दिन हिंदी में फिल्म ने 18.5 करोड़ और दूसरे दिन 12.5 करोड़ रुपये कमाए थे। तीसरे दिन का आंकड़ा अभी आना बाकी है। वरुण धवन की फिल्म ने दो दिन में सिर्फ 14.75 करोड़ से ही झोली भरी थी। 'कांतारा चैप्टर 1'-'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी' का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 'सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी' ने वर्ल्डवाइड 21.70 करोड़ और ओवरसीज 4.00 करोड़ की कमाई की थी। जबकि इसका बजट 80 करोड़ रुपये है। वहीं, 'कांतारा' ने दुनियाभर में 148.00 करोड़ और ओवरसीज 18.50 करोड़ का कलेक्शन किया था। और इसका बजट 125 करोड़ रुपये है, जो इसने दो दिन में ही निकाल लिया है।

दिवाली के जश्न में खतरा: ग्रेटर नोएडा शनिवार को देश का सबसे प्रदूषित शहर, AQI गंभीर स्तर पर

ग्रेटर नोएडा ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है, लेकिन इस बार भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तैयारी लगभग न के बराबर है। दोनों विभाग टूटी-फूटी और धूल वाली सड़कों की सफाई के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं, जबकि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान लागू करने से पहले ही वायु प्रदूषण के स्रोत समाप्त करने का निर्देश दिया है। शनिवार को ग्रेटर नोएडा देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहर के रूप में सामने आया। ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 227 मापा गया है। जैसे ही सर्दियाँ आती हैं, दिल्ली एनसीआर क्षेत्र की हवा प्रदूषित हो जाती है। हर साल यह समस्या दोहराती है, इसलिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ठंड शुरू होने से पहले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। इसमें सड़कों से धूल हटाना, टूटी हुई सड़कों की मरम्मत करना, ट्रैफिक जाम दूर करना, खुले में कचरा फैलाने और जलाने पर रोक लगाना शामिल है। हालांकि इस बार भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं है। शहर की अधिकांश सड़कें खराब हालत में हैं, जहां धूल बिखरी हुई है और वाहनों की आवागमन से हवा में धूल उठ रही है। फिर भी धूल हटाने की कोई योजना बनाई नहीं गई है। सांस लेना भी मुश्किल ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है। लोग बताते हैं कि 1 से 15 अक्टूबर के बीच वायु प्रदूषण बहुत बढ़ जाता है। इस बार दिवाली और अन्य त्योहर भी हैं, जिनमें आतिशबाजी के कारण वायु प्रदूषण और गहरा हो जाता है, जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। इसके बावजूद प्राधिकरण और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई तैयारी नहीं की है, जिससे लोगों को प्रदूषण सहन करना पड़ सकता है। बारिश के बाद मिली तीन दिन की राहत खत्म होते ही ग्रेटर नोएडा में वायु प्रदूषण फिर से बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटों में यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 123 अंक बढ़कर ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। जहां शुक्रवार को एक्यूआई 104 था, वहीं शनिवार को यह 227 तक पहुंच गया। यदि यही स्थिति बनी रही, तो अगले दो दिनों में एक्यूआई 300 से ऊपर चले जाएगा।