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ठंड की समय से पहले एंट्री! पहाड़ों पर बर्फ, दिल्ली-NCR में भीगता अक्टूबर

नई दिल्ली दिल्ली-NCR, बिहार, बंगाल समेत देश भर के कई इलाकों में सोमवार-मंगलवार को रुक-रुक कर हुए तेज बारिश और पहाड़ों पर शुरू हुई बर्फबारी से मौसम ने करवट बदल ली है, जिससे लोगों को अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही दिसंबर जैसी ठंड का एहसास होने लगा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मंगलवार को तड़के दिल्ली-NCR के कई इलाकों में पर हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिसमें गरज-बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं. इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी हल्की बारिश देखी गई. मौसम विभाग ने बताया कि दिल्ली में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 2:30 बजे तक तापमान 21.8°C दर्ज किया गया, जबकि नमी का स्तर 98 प्रतिशत तक पहुंच गया. हवाएं शांत बनी हुई हैं, जिसके कारण कोहरे छाया हुआ है और ठंडी हवा का माहौल बना हुआ है. सामान्य रहेगा न्यूनतम तापमान आईएमडी के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से 1-2 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है. सुबह के समय उत्तर-पूर्व दिशा से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो दोपहर में पूर्वी दिशा से 10 किमी प्रति घंटे से कम रफ्तार की हवाएं चलेंगी, जो शाम और रात तक दक्षिण-पूर्व दिशा से 8 किमी प्रति घंटे से कम रफ्तार की रहेंगी.  बुधवार को बादल छाए रहेने की संभावना IMD ने बुधवार के मौसम का पूर्वानुमान जताते हुए कहा, 'बुधवार को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है. अधिकतम तापमान 31-33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20-22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जो सामान्य के आसपास होंगे. सुबह में उत्तर-पूर्व दिशा से 5-10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो दोपहर में उत्तर-पश्चिम दिशा से 10-15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक बढ़ेगी और शाम व रात में भी इसी रफ्तार से चलती रहेंगी.' बिहार और बंगाल में भी ठंडक दिल्ली-एनसीआर के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल में भी बारिश ने मौसम को ठंडा कर दिया है. इन राज्यों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में कमी आई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्टूबर की शुरुआत में ही ठंड का एहसास होना असामान्य है, लेकिन ये मौसमी बदलाव राहत के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी ला रहा है. हिमाचल-उत्तराखंड और J-K में बर्फबारी शुरू वहीं, उत्तर भारत के ऊंचे पहाड़ी इलाकों, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हो गई है. इस बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी देखा जा रहा है, जहां ठंडी हवाओं ने मौसम को और सर्द कर दिया है. ऐसा ही बना रहेगा मौसम का मिजाज मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक यह मौसमी पैटर्न बना रह सकता है. जिससे ठंड का एहसास और बढ़ेगा. मौसम विभाग ने लोगों से बारिश और ठंड को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है. खासकर दिल्ली-एनसीआर, बिहार और पश्चिम बंगाल में रहने वाले लोगों को सुझाव दिया गया है कि वे मौसम अपडेट्स पर नजर रखें और यात्रा या बाहरी गतिविधियों के दौरान उचित तैयारी करें. पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.

सोने में निवेश करें आज, 2050 तक होगा कितना मुनाफा? जानिए विस्तार से

मुंबई  आज के रेट्स के हिसाब से देखें तो भारत में 24 कैरेट सोना करीब 1,23,100 प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है. अलग-अलग शहरों में मामूली फर्क जरूर है, लेकिन फिलहाल यही बाजार की औसत दर है.सोने की कीमतों में लगातार उछाल की कई वजहें हैं. सबसे पहले तो दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिका और यूरोप की कमजोर होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव ने लोगों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर खींचा है. दूसरा बड़ा कारण है डॉलर और रुपये का समीकरण. जब डॉलर महंगा होता है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो भारत में सोने की कीमत अपने आप ऊपर चली जाती है क्योंकि भारत ज्यादातर सोना आयात करता है.त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में भी सोने की मांग बढ़ जाती है, जिससे बाजार में इसके दाम और उछलते हैं. साथ ही, कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं ताकि अपनी विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रख सकें. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमतों में इजाफा हो रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि अगर आप आज 1,00,000 का सोना खरीदते हैं, तो 2050 तक उसकी कीमत कितनी होगी? इसका सीधा जवाब तो किसी के पास नहीं है, लेकिन पिछले 25 सालों के आंकड़ों से एक अंदाजा लगाया जा सकता है.साल 2000 में 10 ग्राम सोना करीब 4,400 रुपये के आसपास था, जबकि आज वही लगभग 1,23,100 के आसपास पहुंच गया है. यानी 25 साल में करीब 25 गुना बढ़ोतरी हुई.अगर आने वाले 25 सालों तक सोना औसतन 10 प्रतिशत की दर से बढ़ता रहा, तो 1,00,000 का सोना 2050 तक लगभग 11-12 लाख के आसपास हो सकता है. अगर वृद्धि दर 8% रही तो ये मूल्य करीब 7 लाख और अगर 12% रही तो 15 लाख से ऊपर पहुंच सकता है. एक किलो सोना तो 2050 में कितनी होगी कीमत? जान लें नफा-नुकसान  सोना हमेशा से इन्वेस्टमेंट के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ऑप्शन माना गया है. इसका आकर्षण केवल इसकी कीमत में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक अनिश्चितताओं के समय यह एक भरोसेमंद साथी भी होता है. ऐसे में अगर आप आज एक किलो सोना खरीदते हैं, तो सवाल उठता है कि 2050 तक इसकी कीमत कितनी हो सकती है और निवेश से कितना लाभ या नुकसान हो सकता है. आइए, वर्तमान रेट और ऐतिहासिक ट्रेंड के आधार पर इसकी कीमतों का आंकलन करते हैं. वर्तमान सोने की कीमत  अक्टूबर 2025 में भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 11,942 रुपये प्रति ग्राम के आसपास है. इसका मतलब है कि एक किलो यानि 1000 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,19,42,000 रुपये तक हो सकती है. यह दाम अलग-अलग शहरों और बाजारों में थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन तकरीबन यही मूल्य देखा गया है. 2050 तक सोने की कीमत एक साधारण गणना के आधार पर देखा जाए तो यदि सोने की कीमतों में वर्तमान दर से औसतन 8% वार्षिक बढ़ोतरी होती है, तो 2050 तक सोने की कीमत में लगभग 25 गुना वृद्धि हो सकती है. इसका मतलब है कि 2050 में एक किलो सोने की कीमत लगभग 30-35 करोड़ तक पहुंच सकती है. लेकिन अगर सोने की कीमतें 10% वार्षिक दर से बढ़े तो यह 45-50 करोड़ रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है. यह अनुमान केवल ट्रेंड और औसत वृद्धि दर पर आधारित है. भविष्य में इसमें कमी या बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. नफा-नुकसान का आंकलन पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है. सोना इन्वेस्टमेंट के लिहाज से सुरक्षित विकल्प माना जाता है, खासकर आर्थिक अनिश्चितताओं के समय में सुरक्षित होता है. सोने की कीमतें आमतौर पर इन्फ्लेशन के साथ बढ़ती हैं, जिससे यह इन्फ्लेशन से सुरक्षा देता है. क्या हो सकता है नुकसान? एक किलो सोने को सुरक्षित रखने के लिए उचित स्टोरेज और सुरक्षा की जरूरत होती है, जो इसके लिए एक्स्ट्रा खर्च का कारण बन सकता है. सोने को तुरंत नकदी में परिवर्तित करना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है, खासकर बड़े दाम में. ऐसे में इसके फायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. 

MP भाजपा कार्यकारिणी में 60% फेरबदल, दिल्ली की मंजूरी के बाद होगी अंतिम घोषणा

भोपाल  मध्यप्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा का काम अब लगभग पूरा हो चुका है। अब जल्द टीम का ऐलान होगा। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मिलकर प्रदेश पदाधिकारियों के नामों पर चर्चा की और लिस्ट तैयार की। अब यह लिस्ट केंद्रीय नेतृत्व से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि जल्द इस लिस्ट पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से फाइनल मुहर लग जाएगी।  हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बने लगभग 100 दिन पूरे होने वाले हैं। उन्हें 2 जुलाई को अध्यक्ष बनाया गया था और तब से वे पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा की टीम के साथ काम कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों से वे लगातार कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी दिवाली से पहले घोषित हो सकती है। इसके बाद एमपी बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी बैठक होगी।  हेमंत खंडेलवाल की टीम में होंगे 60 फीसदी नए चेहरे वीडी शर्मा मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और उन्होंने 5 साल 4 महीने 17 दिन तक इस पद पर काम किया। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना के कारण उनका कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया गया था, फिर संगठन चुनाव में देरी के कारण उनका कार्यकाल बढ़ता गया। वीडी शर्मा की टीम में रहे 8 पदाधिकारी अब सांसद बन चुके हैं, जबकि 8 अन्य विधायक बन चुके हैं।  वीडी की टीम में रहे 60% चेहरे बाहर होंगे वीडी शर्मा मध्य प्रदेश भाजपा के 5 साल 4 महीने 17 दिन तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना संकट के चलते उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था। फिर संगठन चुनाव में हुई देरी के कारण उनका कार्यकाल अघोषित रूप से बढ़ता गया। वीडी शर्मा के साथ प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल रहे 8 पदाधिकारी सांसद और 8 पदाधिकारी विधायक बन चुके हैं। किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी सांसद और मंत्री बन गए हैं। नई कार्यकारिणी में टीम वीडी में शामिल रहे पदाधिकारियों में से 60% चेहरे बदले जाएंगे। पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी संभव सितंबर 2021 में बीजेपी ने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को संभागीय संगठन मंत्री पद से हटाकर प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य बनाया था। इन संगठन मंत्रियों में केशव भदौरिया को छोड़कर 5 नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में एडजस्ट किया था। अब बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी में इन पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी हो सकती है। इस बार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम में करीब 60% नए चेहरे होंगे। इसके अलावा किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा और महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी अब सांसद और मंत्री बन गए हैं। सितंबर 2021 में बीजेपी ने अपने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। उस समय बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को हटाकर उन्हें प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बना दिया था। इनमें से पांच नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में जगह दी थी, लेकिन केशव भदौरिया को इसमें शामिल नहीं किया गया था। अब बीजेपी की नई टीम में इन पुराने मंत्रियों की फिर से वापसी हो सकती है। मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी में इतने नेता मध्यप्रदेश बीजेपी की मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी के प्रदेश उपाध्यक्ष में एक मंत्री, तीन सांसद और दो विधायक हैं। वहीं, प्रदेश महामंत्री में दो विधायक और एक सांसद हैं। साथ ही, प्रदेश मंत्री में दो सांसद और एक विधायक है। वहीं, संयुक्त कोषाध्यक्ष में अनिल जैन कालूहेड़ा से विधायक हैं।    पद (Post) नाम (Name) पद/कार्यक्षेत्र (Designation/Field) प्रदेश उपाध्यक्ष (State Vice President) नागर सिंह चौहान कैबिनेट मंत्री   आलोक शर्मा सांसद (भोपाल)   संध्या राय सांसद (भिंड)   सुमित्रा वाल्मीकि राज्यसभा सांसद   ललिता यादव विधायक   चिंतामणि मालवीय विधायक   चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी पूर्व विधायक (मेहगांव)   कांत देव सिंह     सीमा सिंह जादौन     जीतू जिराती पूर्व विधायक   बहादुर सिंह चौहान पूर्व विधायक   पंकज जोशी     श्याम महाजन     बृजराज सिंह चौहान पूर्व विधायक — — — प्रदेश महामंत्री (State General Secretary) कविता पाटीदार राज्यसभा सांसद   भगवानदास सबनानी विधायक   हरिशंकर खटीक विधायक   शरलेन्दु तिवारी पूर्व विधायक   रणवीर सिंह रावत पूर्व विधायक — — — प्रदेश मंत्री (State Secretary) लता वानखेड़े सांसद (सागर)   आशीष दुबे सांसद (जबलपुर)   मनीषा सिंह विधायक   रजनीश अग्रवाल     प्रभुदयाल कुशवाहा     राजेश पांडेय     नंदिनी मरावी पूर्व विधायक   राहुल कोठारी     संगीता सोनी     जयदीप पटेल     केशव सिंह भदौरिया     क्षितिज भट्ट     योगेश पाराशर   — — — कोषाध्यक्ष (Treasurer) अखिलेश जैन CA संयुक्त कोषाध्यक्ष (Joint Treasurer) अनिल जैन कालूहेड़ा विधायक प्रदेश कार्यालय मंत्री (State Office Secretary) राघवेन्द्र शर्मा   कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चों के भी बदलेंगे अध्यक्ष  बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी में जगह पाने के लिए नेताओं ने बड़े नेताओं से सिफारिशें करवाई हैं। सबसे ज्यादा कोशिश प्रदेश महामंत्री बनने के लिए की गई है। इसके अलावा, प्रदेश कार्यालय प्रभारी और कार्यालय मंत्री के लिए भी नेताओं ने नए प्रदेश अध्यक्ष से कई बार मुलाकात की है। बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चों के अध्यक्ष भी बदलेंगे। ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह कुशवाह अब मध्यप्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री बन गए हैं। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दर्शन सिंह होशंगाबाद से सांसद बन गए हैं। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष माया नारोलिया राज्यसभा सांसद बन चुकी हैं। इन बदलावों के साथ-साथ युवा मोर्चा, एससी मोर्चा और एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जाएंगे।      

पिन का जमाना हुआ पुराना! 8 अक्टूबर से UPI में फेस और फिंगरप्रिंट से करें भुगतान

नई दिल्ली भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. करोड़ों भारतीयों द्वारा हर दिन इस्तेमाल किए जाने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI से भुगतान करने का तरीका हमेशा के लिए बदलने वाला है. अब आपको पेमेंट करते समय 4 या 6 अंकों का पिन याद रखने और उसे डालने की जरूरत नहीं होगी. इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर से उपयोगकर्ता अपने चेहरे (फेशियल रिकग्निशन) और फिंगरप्रिंट के जरिए UPI पेमेंट को मंजूरी दे सकेंगे. यह कदम न केवल भुगतान प्रक्रिया को तेज और आसान बनाएगा, बल्कि इसे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित भी बना सकता है. जानकारों का कहना है कि यह भारत के डिजिटल सफर में एक मील का पत्थर साबित होगा, जहां आपकी पहचान ही आपका पासवर्ड बन जाएगी. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), जो UPI नेटवर्क का संचालन करता है, इस अत्याधुनिक सुविधा को मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल में प्रदर्शित करने की योजना बना रहा है. हालांकि, NPCI ने अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस नई तकनीक को लागू करने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. क्या है डिटेल NPCI (जो UPI का संचालन करती है) इस फीचर को ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल, मुंबई में प्रदर्शित करने जा रही है। इससे डिजिटल पेमेंट्स और तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेंगे। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नई सुविधा में पेमेंट की ऑथेंटिकेशन (वेरिफिकेशन) भारत सरकार की आधार प्रणाली में दर्ज बायोमेट्रिक डेटा के माध्यम से की जाएगी। यानी, यूजर्स का चेहरा या फिंगरप्रिंट उनके आधार डेटा से मैच किया जाएगा, जिससे पेमेंट की अनुमति मिल जाएगी। RBI के नए दिशानिर्देशों बता दें कि यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें डिजिटल ट्रांजैक्शनों के लिए वैकल्पिक ऑथेंटिकेशन तरीकों की अनुमति दी गई थी। इससे डिजिटल पेमेंट्स में सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव — दोनों को बेहतर बनाने की उम्मीद है। UPI अनुभव होगा और आसान वर्तमान में, हर UPI ट्रांजैक्शन के लिए यूजर्स को 4 या 6 अंकों का PIN दर्ज करना होता है। नई सुविधा लागू होने के बाद, फेस स्कैन या फिंगरप्रिंट सेंसर के जरिए पेमेंट तुरंत ऑथेंटिकेट हो जाएगा। इससे ट्रांजैक्शन समय घटेगा, सुरक्षा बढ़ेगी, और यूजर अनुभव और सहज होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से धोखाधड़ी की संभावना कम होगी, क्योंकि चेहरा या फिंगरप्रिंट किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कॉपी करना मुश्किल है। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए NPCI और UIDAI के बीच मजबूत तकनीकी प्रोटोकॉल अपनाए जाएंगे। कैसे काम करेगी यह नई तकनीक? यह नई बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली पूरी तरह से भारत सरकार की विशिष्ट पहचान प्रणाली ‘आधार’ पर आधारित होगी. सूत्रों में से एक ने स्पष्ट किया कि जब कोई उपयोगकर्ता भुगतान के लिए अपने चेहरे या फिंगरप्रिंट का उपयोग करेगा, तो उसका सत्यापन आधार के साथ संग्रहीत बायोमेट्रिक डेटा से किया जाएगा. इसका मतलब है कि केवल वही व्यक्ति भुगतान को मंजूरी दे पाएगा, जिसका बैंक खाता और UPI आईडी उसके आधार कार्ड से जुड़ा हुआ है. यह प्रक्रिया बेहद सरल होगी. भुगतान करते समय, उपयोगकर्ता को पिन डालने के बजाय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का विकल्प चुनना होगा. इसके बाद फोन का कैमरा या फिंगरप्रिंट स्कैनर सक्रिय हो जाएगा. एक सफल स्कैन के बाद, डेटा को सुरक्षित रूप से आधार सर्वर से मिलान के लिए भेजा जाएगा और मिलान होते ही भुगतान तुरंत सफल हो जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाएगी, जिससे भुगतान का अनुभव सहज और बाधा रहित हो जाएगा. यह कदम उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा जिन्हें अपना पिन याद रखने में कठिनाई होती है या जो सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहते हैं. क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? UPI में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को शामिल करने का यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है. यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सीधा परिणाम है. RBI ने भुगतान प्रणालियों में सुरक्षा और नवीनता को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणीकरण के वैकल्पिक तरीकों की अनुमति दी थी. केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और सुरक्षित बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे अपना सकें. मौजूदा पिन-आधारित प्रणाली, हालांकि काफी हद तक सुरक्षित है, फिर भी इसमें कुछ कमजोरियां हैं, जैसे कि कोई आपका पिन देख सकता है या फिशिंग के जरिए उसे चुरा सकता है. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण इन जोखिमों को लगभग समाप्त कर देता है, क्योंकि हर व्यक्ति का फिंगरप्रिंट और चेहरा अलग होता है.  

रुपये की गिरती चाल पर RBI का एक्शन, स्थिरता के लिए बनाया मास्टर प्लान

नई दिल्ली  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को गिरने से बचाने के लिए एक अहम कदम उठाया. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप (Buy/Sell Swap) के जरिए विदेशी मुद्रा बाजार (forex market) में दखल दिया. इस कार्रवाई के बाद रुपये की कीमत 88.77 प्रति डॉलर पर टिकी रही, जो उसके सर्वकालिक निचले स्तर 88.80 के बेहद करीब थी. ट्रेडर्स का कहना है कि RBI ने एक साथ स्पॉट मार्केट और फॉरवर्ड मार्केट में दखल देकर डॉलर की उपलब्धता और रुपये की स्थिरता दोनों को नियंत्रित करने की कोशिश की. जानिए आखिर ये ‘बाय/सेल स्वैप’ होता क्या है और इससे कैसे रुकती है रुपये की गिरावट. क्या होता है RBI का ‘डॉलर-रुपया बाय/सेल स्वैप’ ‘बाय/सेल स्वैप’ एक ऐसा सौदा होता है जिसमें RBI अभी के समय में (स्पॉट मार्केट में) डॉलर खरीदता है, लेकिन साथ ही यह तय कर लेता है कि भविष्य की किसी तारीख पर (फॉरवर्ड मार्केट में) वही डॉलर वापस बेच देगा. सीधे शब्दों में कहें तो यह एक तरह का टेंपरेरी ट्रांजेक्शन होता है, जिसका मकसद बाजार में अचानक आई डॉलर की मांग को पूरा करना और रुपये पर दबाव को कम करना होता है. इस प्रक्रिया में RBI न तो स्थायी रूप से डॉलर जमा करता है और न ही अपनी विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा बदलाव लाता है. बस इतना सुनिश्चित करता है कि डॉलर की कमी से रुपया कमजोर न पड़े. इससे रुपये की गिरावट कैसे रुकती है जब बाजार में डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है, जैसे तेल कंपनियां, इंपोर्टर्स या फॉरेन इन्वेस्टर्स एक साथ डॉलर खरीदने लगते हैं, तो डॉलर की कीमत बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है. ऐसे समय में RBI बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर डॉलर की कीमत को स्थिर रखता है. अगर RBI डॉलर बेचता है तो बाजार में डॉलर की भरमार हो जाती है और रुपया संभल जाता है. अगर RBI ‘बाय/सेल स्वैप’ करता है, तो वह अस्थायी तौर पर डॉलर खरीदता है लेकिन भविष्य में बेचने का वादा करता है. इससे बाजार में भरोसा बनता है कि RBI रुपया कमजोर नहीं होने देगा, जिससे ट्रेडर्स रुपये पर सट्टा लगाना कम कर देते हैं. फॉरवर्ड प्रीमियम क्यों घटा RBI की इस स्वैप कार्रवाई के बाद डॉलर-रुपया फॉरवर्ड प्रीमियम यानी भविष्य के सौदों पर ब्याज दरें कम हो गईं. 1-वर्षीय इम्प्लाइड यील्ड 6 बेसिस पॉइंट गिरकर 2.23% पर आ गई, जो एक महीने में सबसे निचला स्तर है. यह संकेत देता है कि बाजार को भरोसा है कि RBI स्थिति पर नियंत्रण रखेगा और आने वाले समय में रुपये में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है. क्यों जरूरी है RBI की ये दखलअंदाजी भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और डॉलर पर निर्भरता काफी ज्यादा है. ऐसे में डॉलर का महंगा होना सीधा असर महंगाई और आयात लागत पर डालता है. RBI के समय रहते कदम उठाने से एक ओर रुपये की स्थिरता बनी रहती है, तो दूसरी ओर विदेशी निवेशकों को भी भरोसा मिलता है कि भारतीय बाजार में वोलैटिलिटी सीमित रहेगी.

ईरान के खतरे को लेकर नेतन्याहू का बड़ा बयान, अमेरिका के शहर और ट्रंप के घर पर जताई आशंका

तेहरान  इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि जल्द ही अमेरिका के बड़े शहर ईरानी एटॉमिक गन के दायरे में होंगे. एक इंटरव्यू के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि ईरान 8000 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली इंटर कांटिनेन्टल बैलेस्टिक मिसाइलें (ICBM) बना रहा है. उन्होंने कहा कि अगर इन मिसाइलों की क्षमता 3000 किलोमीटर और बढ़ा दी जाए तो इसके रेंज में न्यूयॉर्क और वाशिंगटन जैसे शहर होंगे.  यही नहीं मार-ए-लागो भी ऐसे मिसाइल के रेंज में आ जाएगा. मार-ए-लागो फ्लोरिडा के पाम बीच में स्थित एक भव्य रिसॉर्ट है. यहां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का एक घर भी है. 17 एकड़ जमीन पर फैला मार-ए-लागो डोनाल्ड ट्रंप का निजी आवास रहा है. यहां विलासिता की तमाम सुविधाएं मौजूद हैं.  इसी साल जून में ईरान से जंग लड़ चुके इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हथियारों को लेकर ईरान की महात्वाकांक्षा से अमेरिका और दुनिया को आगाह किया.  उन्होंने एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के मंसूबों के बारे में सतर्क करते हुए कहा कि ईरान 8000 किलोमीटर तक मार कर सकने में सक्षम इंटर कांटिनेन्टल बैलेस्टिक मिसाइलें बना रहा है.  नेतन्याहू ने कहा कि अगर ईरान भविष्य में इस क्षमता में 3000 किलोमीटर का इजाफा और कर लेता है तो उसके पास 11000 किलोमीटर तक परमाणु हमले करने की क्षमता होगी.  इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी बात को समझाते हुए कहा कि ईरान के पास इस क्षमता के होने का क्या मतलब है. इसका मतलब यह है कि अमेरिका के बड़े शहर जैसे न्यूयॉर्क सिटी, वाशिंगटन, बॉस्टन और मियामी यहां तक कि मार-ए-लागो भी ईरान के एटॉमिक गन के दायरे में आ जाएगा.  बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने ईरान के तीन यूरेनियम संवर्धन केंद्रों नतांज, इस्फहान और फोर्दो पर बी-2 बॉम्बर विमानों से हमला कर इसे तहत-नहस करने का दावा किया था. लेकिन ईरान ने कहा था कि यूरेनियम एनरिचमेंट एक विज्ञान है और इसे कोई खत्म नहीं कर सकता है.  इसके बाद पश्चिमी दुनिया में कयास लगाया जा रहा है कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को फिर से आगे बढ़ा सकता है. हालांकि ईरान ने कहा है कि वो परमाणु बम नहीं चाहता है कि लेकिन यूरेनियम एनरिचमेंट से उसे कोई नहीं रोक सकता है.  ईरान का ICBM प्रोग्राम ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम मध्य पूर्व में सबसे बड़ा और एडवांस है. ईरान इस पर 1980 के दशक से ही काम कर रहा है. यह कार्यक्रम मुख्य रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) द्वारा संचालित होता है और इसमें शॉर्ट-रेंज से लेकर मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें (MRBM) शामिल हैं. हालांकि विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का विकास अभी प्रारंभिक चरण में है. क्या होता है ICBM, क्यों होते हैं खतरनाक? ICBM एक लंबी दूरी की मिसाइल है, जो 5,500 किलोमीटर से अधिक रेंज तक वारहेड (परमाणु, रासायनिक या पारंपरिक) ले जा सकती है. यह  एक महादेश से दूसरे महादेश पर हमला करने के लिए डिजाइन की जाती है. यह मिसाइल पृथ्वी की कक्षा में उड़ान भरकर लक्ष्य तक पहुंचती है.  ICBM मिसाइल हाइपरसोनिक गति, मल्टिपल वारहेड्स और सटीक गाइडेंस सिस्टम के कारण बेहद खतरनाक मानी जाती हैं. अगर एशिया से हमला किया जाए तो ये मिसाइलें यूएस, यूरोप जैसे दूरस्थ टारगेट को निशाना बना सकती हैं. हालांकि मार्डन वारफेयर में ICBM का इस्तेमाल नहीं हुआ है. 

रियल एस्टेट सेक्टर में रिकॉर्ड निवेश, भारतीय निवेशकों ने ₹35,000 करोड़ लगाकर बनाए नए मुकाम

मुंबई घरेलू पूंजी के सहारे भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के पहले नौ महीनों (जनवरी से सितंबर) के दौरान इस सेक्टर में 4.3 बिलियन डॉलर (₹35,000 करोड़) का बड़ा निवेश हुआ है. यह आंकड़ा पिछले पांच सालों के औसत निवेश को पार कर गया है.  यह निवेश पिछले पांच वर्षों के जनवरी से सितंबर की अवधि के औसत 4 बिलियन डॉलर के प्रवाह से अधिक रहा है, जैसा कि कोलियर्स इंडिया (Colliers India) की एक रिपोर्ट में बताया गया है. यह प्रवृत्ति भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत मज़बूती और रियल एस्टेट बाज़ार में निवेशकों के लगातार विश्वास को दर्शाती है. कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बादल याग्निक ने कहा, "भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेश Q3 2025 (जुलाई-सितंबर तिमाही) में $1.3 बिलियन तक पहुंच गया, जो कि साल-दर-साल 11 प्रतिशत की वृद्धि है'.  घरेलू निवेशकों का बढ़ता दबदबा रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू संस्थागत पूंजी में साल-दर-साल (YoY) 52 प्रतिशत की भारी उछाल दर्ज की गई है, जो $2.2 बिलियन तक पहुंच गई है. यह भारतीय रियल एस्टेट में संस्थागत निवेशकों की बढ़ती गहराई और रुचि को दर्शाता है. घरेलू निवेशकों की सबसे अधिक रुचि ऑफिस और आवासीय (Residential) सेगमेंट में दिखी. तिमाही के दौरान घरेलू निवेश में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सा अकेले ऑफिस संपत्तियों का रहा, जो तैयार और निर्माणाधीन दोनों तरह की वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए लगातार भूख को दर्शाता है. कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बादल याग्निक ने कहा, "मुख्य एसेट क्लास में निरंतर मांग और घरेलू पूंजी की बढ़ती गहराई के साथ, निवेश की गति स्थिर रहने की संभावना है, भले ही वैश्विक चुनौतियों के कारण विदेशी निवेशक निकट भविष्य में सतर्क बने रहें." ऑफिस सेगमेंट और प्रमुख शहर ऑफिस सेगमेंट में निवेश का प्रवाह मजबूत बना हुआ है, जो वर्ष 2024 के स्तर के लगभग बराबर है, 2025 के पहले नौ महीनों में ऑफिस सेगमेंट में संस्थागत निवेश $1.5 बिलियन तक पहुंच गया, जो इस अवधि के कुल निवेश का 35 प्रतिशत है. पिछली छमाही की तुलना में Q3 2025 में ऑफिस सेगमेंट में संस्थागत निवेश में जबरदस्त उछाल आया, जो साल-दर-साल 27 प्रतिशत बढ़कर $0.8 बिलियन हो गया.  कोलियर्स इंडिया में राष्ट्रीय निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नाडार ने बताया, "ऑफिस संपत्तियों ने कुल तिमाही प्रवाह का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनाया, जिसका नेतृत्व तैयार वाणिज्यिक संपत्तियों के उल्लेखनीय अधिग्रहणों ने किया, खासकर चेन्नई और पुणे में." प्रमुख शहर और भविष्य की रणनीति मुंबई इस साल निवेश आकर्षित करने में सबसे आगे रहा, करीब $0.8 बिलियन के प्रवाह के साथ, मुंबई ने 2025 में कुल संस्थागत निवेश का 19 प्रतिशत आकर्षित किया, जिसका मुख्य कारण ऑफिस और आवासीय संपत्तियों में बड़ी डील्स थीं. इसके बाद बेंगलुरु का स्थान रहा, रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि घरेलू संस्थान निरंतर पूंजी का स्थिर स्रोत बने रहने की उम्मीद है.