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करवा चौथ 2025: सबसे खूबसूरत दिखने के लिए अपनाएं ये 5 स्टाइलिंग ट्रिक्स

करवा चौथ हर सुहागन के लिए सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि सजने-संवरने का त्योहार भी है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए सोलह शृंगार करती हैं। इस दिन हर महिला चाहती है कि वह सबसे खूबसूरत दिखे और उसके पति की नजरें उससे हटे ही न। अगर आप भी चाहती हैं कि इस करवा चौथ पर आपका लुक सभी के दिलों पर छा जाए, तो ये 5 आसान लेकिन असरदार स्टाइलिंग टिप्स आपके काफी काम आएंगे। आइए जानें इस बारे में। अपने स्किन टोन के अनुसार चुनें आउटफिट करवा चौथ पर साड़ी, लहंगा या अनारकली- आप जो भी पहनें, उसका रंग आपकी स्किन टोन के साथ मैच होना चाहिए। गेहुंआ रंगत वाली महिलाओं पर मरून, मैजेंटा या रॉयल ब्लू जैसे गहरे शेड्स बेहद खिलते हैं, जबकि फेयर कॉम्प्लेक्शन पर रेड, पिंक और गोल्डन टोन बहुत आकर्षक लगते हैं। अगर आप मॉडर्न टच चाहती हैं, तो ट्रेडिशनल साड़ी को स्टाइलिश ब्लाउज के साथ पहनें- जैसे डीप बैक या स्लीवलेस डिजाइन। सही ज्वैलरी चुनें करवा चौथ का सोलह श्रृंगार ज्वैलरी के बिना अधूरा है। लेकिन ध्यान रखें कि बहुत सारे ज्वैलरी भी आपके लुक को खराब कर सकता है। अगर आपकी साड़ी या लहंगा भारी है, तो हल्के गहने पहनें। वहीं, सिंपल आउटफिट के साथ आप स्टेटमेंट नेकलेस या हैवी ईयररिंग्स ट्राय कर सकती हैं। मांगटीका और नथ आपके लुक में रॉयल टच देंगे। गोल्ड और कुंदन ज्वैलरी इस मौके पर सबसे क्लासिक ऑप्शन हैं। लॉन्ग-लास्टिंग मेकअप व्रत के दौरान सुबह से रात तक आपका मेकअप टिका रहना चाहिए। इसके लिए पहले प्राइमर लगाएं, फिर लाइटवेट फाउंडेशन से बेस बनाएं। रेड या मैरून लिपस्टिक करवा चौथ लुक की पहचान है- इसे अपने आउटफिट के रंग के अनुसार चुनें। आंखों को डिफाइन करने के लिए गोल्डन या ब्राउन आईशैडो और विंग्ड आईलाइनर ट्राय करें। फेस पर हल्का हाइलाइटर लगाना न भूलें, जिससे शाम को चांद के साथ आप भी दमकें। हेयरस्टाइल से पाएं परफेक्ट फिनिश आउटफिट और मेकअप के साथ हेयरस्टाइल भी उतना ही जरूरी है। अगर आप साड़ी पहन रही हैं, तो क्लासिक बन या जूड़ा परफेक्ट रहेगा। इसे ताजे फूलों या गजरे से सजाकर और भी खूबसूरत बनाया जा सकता है। वहीं, मॉडर्न लुक के लिए सॉफ्ट कर्ल्स या साइड-स्वेप्ट हेयरस्टाइल आजमाएं। बस ध्यान रखें कि आपके बाल फ्रिज-फ्री हों। डिटेलिंग पर ध्यान दें कई बार छोटी-छोटी चीजें ही पूरे लुक को संवार देती हैं- जैसे सही तरीके से बिंदी लगाना, नेल पेंट का सही रंग या दुपट्टे को सलीके से ड्रेप करना। अपने आउटफिट के साथ मेल खाती बिंदी और नेल कलर चुनें। इसके अलावा चूड़ियां, पायल और बिछुए जैसे पारंपरिक आभूषण भी आपके लुक को पूरा करेंगे।  

मध्य प्रदेश में मौसम ने बदली चाल: भारी बारिश खत्म, अब दक्षिणी हिस्सों में हल्की फुहारें

भोपाल  कोई मजबूत मौसम प्रणाली के सक्रिय ना होने और मानसून के कमजोर होने से मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर थम गया है, जिससे मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि दक्षिणी जिलों में अगले तीन दिन तक हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक सिवनी में 73.4, शिवपुरी में 11, टीकमगढ़ में पांच, गुना में दो, दतिया में 1.3 मिमी वर्षा हुई।अबतक 12 जिलों से दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई हो चुकी है और अगले 72 घंटे के बाद प्रदेश के कई जिलों से मानसून विदा होने लगेगा। मध्य प्रदेश मौसम विभाग ताजा पूर्वानुमान     दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा अभी भी 20° उत्तर / 69° पूर्व, वेरावल, भरूच, उज्जैन, झांसी,  शाहजहांपुर और 30° उत्तर / 81° पूर्व से होकर गुजर रही है। गुजरात के शेष भागों, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और भागों तथा महाराष्ट्र के कुछ भागों से आगामी 3-4 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं।     पश्चिम-मध्य और इससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर के ऊपर स्थित गहरा दबाव (चक्रवाती तूफान “शक्ति” का अवशेष) कमजोर होकर एक दबाव में परिवर्तित हो गया है और यह अक्षांश 19.0° उत्तर और देशांतर 60.5° पूर्व के पास निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में केंद्रित है। जो कि मसिराह (ओमान) से लगभग 250 किमी दक्षिण-पूर्व, रास अल हद्द (ओमान) से 370 किमी दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम, अल-गैदाह (यमन) से 950 किमी पूर्व-उत्तर-पूर्व, कराची (पाकिस्तान) से 950 किमी दक्षिण- पश्चिम, द्वारका से 970 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नलिया से 990 किमी पश्चिम-दक्षिण- पश्चिम में स्थित है। इसके पश्चिम-मध्य और इससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर के ऊपर धीरे-धीरे दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ने और एक चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में परिवर्तित होनेकी संभावना है।     पश्चिमी विक्षोभ, उत्तर राजस्थान और उससे सटे हरियाणा के ऊपर एक प्रेरित निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। इससे संबंधित ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवातीय परिसंचरण समुद्र तल से 9.6 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है और ऊँचाई के साथ उत्तर-पश्चिम की ओर झुका हुआ है।उत्तर-पश्चिम राजस्थान और उससे सटे दक्षिण पंजाब के ऊपर समुद्र तल से 3.1 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ चक्रवातीय परिसंचरण अब उपरोक्त चक्रवाती परिसंचरण में विलीन हो गया है।एक ट्रफ रेखा, उत्तर तटीय ओडिशा से पूर्वी तेलंगाना तक (आंतरिक ओडिशा, दक्षिण छत्तीसगढ़ होते हुए) समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई पर बनी हुई है। मध्य प्रदेश : अबतक 12 जिलों से मानसून विदा अबतक मध्य प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इसमें उज्जैन, राजगढ़,अशोकनगर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन शामिल हैं।आमतौर पर मानसून 6 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार नए वेदर एक्टिव होने से मानसून की वापसी में देरी हो रही थी और अब मानसून वापसी की परिस्थितियां अनुकूल है, ऐसे में 10-12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। गुना में सबसे ज्यादा बारिश, शाजापुर सबसे सूखा जिला इस मानसून सीजन में गुना जिले में सबसे अधिक 65.6 इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला और रायसेन में भी 62 इंच से ज्यादा वर्षा हुई। वहीं श्योपुर और अशोकनगर में 56 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर, शाजापुर (28.9 इंच), खरगोन (29.6 इंच), खंडवा (32 इंच), बड़वानी (33.5 इंच) और धार (33.6 इंच) प्रदेश के सबसे कम बारिश वाले जिले रहे।  1 जून से 6 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

धार्मिक आस्था की मिसाल: 245 किमी की पदयात्रा कर मैहर में जुटे 5000 श्रद्धालु, आज होगा मुर्ति विसर्जन

मैहर  भक्ति, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला जब कोतमा से माँ दुर्गा की ऐतिहासिक पदयात्रा मंगलवार को मैहर पहुँची। 245 किलोमीटर की कठिन यात्रा और 5000 से अधिक श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा के साथ यह भव्य यात्रा माँ शारदा के दरबार में समर्पित हुई। जैसे ही माँ दुर्गा की प्रतिमा का रथ डेल्हा मोड़ पहुँचा, 'जय माँ शारदा' के जयकारों से पूरा नगर गूंज उठा। डमरू, ढोल और शंखध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस पावन अवसर पर मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, डेल्हा सरपंच अभिषेक जायसवाल, समाजसेवी आदिनारायण शुक्ला समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने माँ के जयकारों के साथ यात्रा का स्वागत किया। विधायक चतुर्वेदी ने माँ दुर्गा की प्रतिमा का पूजन-अर्चन कर पुष्पवर्षा की और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। माँ के चरणों में सबकी आस्था, सबकी भक्ति, यही है कोतमा से मैहर यात्रा की शक्ति।' यह यात्रा न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि आस्था, अनुशासन और एकता का जीवंत प्रतीक भी है। माँ के जयकारों से गूंजता मैहर आज इस दिव्य यात्रा का साक्षी बन गौरवान्वित हो उठा है। तीन दशकों की अविरल परंपरा, 1987 में हुई थी शुरुआत यात्रा संयोजक हनुमान गर्ग ने बताया कि इस धार्मिक परंपरा की शुरुआत सन् 1987 में महज 100 श्रद्धालुओं के जत्थे से हुई थी। तब से निरंतर यह कोतमा से माँ शारदा धाम, मैहर तक पैदल यात्रा का रूप ले चुकी है। इस वर्ष यह यात्रा 2 अक्टूबर को कोतमा बस स्टैंड परिसर से आरंभ होकर फुनगा, अनूपपुर, बुढ़ार, शहडोल, घुनघुटी, पाली, उमरिया, चंदिया और बरही होते हुए मैहर पहुँची। पाली नगर में माँ की यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। नगरवासियों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया और श्रद्धालुओं के लिए चाय, नाश्ता और पेय पदार्थों की सेवा की। वहीं माँ बिरासिनी मंदिर में दर्शन कर श्रद्धालुओं ने माँ से आशीर्वाद प्राप्त किया। माँ काली के रूप में सजे श्रद्धालु बने आकर्षण का केंद्र यात्रा के दौरान 8 से 10 श्रद्धालु माँ काली के रूप में सजे नृत्य करते हुए चल रहे थे। उनके भावनात्मक प्रदर्शन से यात्रा की भव्यता और भी बढ़ गई। ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा। यात्रा मार्ग में जगह-जगह भक्तों के लिए भोजन, जल, विश्राम और चिकित्सा व्यवस्था की गई थी। स्थानीय नगरवासियों की सेवा भावना इस यात्रा की विशेष पहचान बनी। आज होगा विसर्जन, माँ शारदा के दरबार में सामूहिक भंडारा माँ की प्रतिमा का विसर्जन आल्हा-ऊदल के ऐतिहासिक तलैया में किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु माँ शारदा देवी मंदिर में दर्शन-पूजन कर सामूहिक भंडारा में सम्मिलित होंगे। इसके साथ ही इस वर्ष की भव्य पदयात्रा का विधिवत समापन किया जाएगा।

पीला रंग: मां बगलामुखी की आराधना में क्यों माना जाता है शुभ?

हिंदू धर्म में, प्रत्येक देवी-देवता का एक विशेष रंग होता है, जो उनकी शक्ति और स्वरूप को दर्शाता है. लेकिन जब बात मां बगलामुखी की आती है, तो उनके जीवन और पूजा में पीले रंग का महत्व अतुलनीय हो जाता है. मां के वस्त्र से लेकर हर पूजा सामग्री तक, सब कुछ पीला होता है. उन्हें पीतांबरा देवी के नाम से भी जाना जाता है. देवभूमि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बनखंडी में स्थित मां बगलामुखी का सिद्धपीठ, पीले रंग के इसी अद्भुत महत्व को दर्शाता है. यह एक ऐसा पवित्र स्थल है, जहां हर वर्ष देश-विदेश से भक्त अपने कष्टों के निवारण और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए आते हैं. आइए जानते हैं कि मां बगलामुखी और पीले रंग का यह गहरा संबंध क्यों है और इस रंग की महत्ता क्या है. मां बगलामुखी और पीले रंग का पौराणिक रहस्य मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं हैं. उन्हें ‘स्तंभन शक्ति’ की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, यानी वे अपने भक्तों के शत्रुओं की बुद्धि और बल को स्तम्भित (रोक) कर देती हैं. मां को पीला रंग अत्यंत प्रिय होने के पीछे मुख्य रूप से दो पौराणिक मान्यताएं हैं: उत्पत्ति का रहस्य: पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां बगलामुखी की उत्पत्ति हल्दी के रंग वाले जल से हुई थी. चूंकि हल्दी का रंग पीला होता है, इसलिए उन्हें पीताम्बरा देवी कहा गया और यह रंग उनकी पहचान बन गया. उनका संपूर्ण स्वरूप स्वर्ण के समान पीला और दिव्य है, जो समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है. स्वरूप और शक्ति: पीला रंग ज्ञान, प्रकाश, दिव्यता और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. मां का यह स्वर्ण-सा पीला रंग न केवल उनके अलौकिक सौंदर्य को दर्शाता है, बल्कि उनकी शक्ति को भी प्रदर्शित करता है, जो भक्त को हर क्षेत्र में विजय दिलाती है. बनखंडी मंदिर में पीले रंग का महत्व हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में रानीताल-देहरा सड़क के किनारे बनखंडी में स्थित मां बगलामुखी का भव्य मंदिर देश के दो मुख्य सिद्ध शक्तिपीठों में से एक है. इस मंदिर की वास्तुकला और वातावरण में पीला रंग हर जगह दिखाई देता है: पीले वस्त्र और आभूषण: मंदिर में मां बगलामुखी पीले वस्त्र, पीले आभूषण और पीले पुष्पों की माला धारण करती हैं. पीली पूजा सामग्री: मां की पूजा में मुख्य रूप से पीले वस्त्र, हल्दी की माला, पीले फूल और पीले रंग के फल एवं मिठाई (नैवेद्य) का इस्तेमाल किया जाता है. पीले रंग के आसन और पंडाल: हवन और अनुष्ठान के लिए हवन कुंड से लेकर आसन और पंडाल तक, सब कुछ पीले रंग का ही रखा जाता है. पीले वस्त्र में साधक: मां की आराधना करने वाले साधकों को भी अनिवार्य रूप से पीले वस्त्र ही धारण करने चाहिए. यह नियम पूजा में एकाग्रता और शुभता बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है. पूजा से मिलती है सफलता और समृद्धि मां बगलामुखी की साधना शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता पाने, व्यापार में वृद्धि और जीवन को निष्कंटक बनाने के लिए की जाती है. मां की पूजा-पाठ और मंत्र जप (जैसे “ॐ ह्लीं बगलामुखी नमः”) सच्चे मन से करने पर भक्त को कई विशेष लाभ मिलते हैं: शत्रु नाश: मां भक्तों के भय को दूर कर उनके शत्रुओं और उनकी बुरी शक्तियों का नाश करती हैं. यहाँ ‘शत्रुओं’ से आशय काम, क्रोध, लोभ, मद और मोह जैसे आंतरिक विकारों से भी है. अखंड सफलता: माता अपने भक्तों को विद्या, लक्ष्मी, यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और संतान सुख प्रदान करती हैं. उनकी कृपा से भक्त जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है. हवन का विशेष महत्व: बनखंडी धाम में हवन का विशेष महत्व है. मान्यता है कि यहां किया गया हवन कभी निष्फल नहीं होता और माता भक्तों को 36 दिनों के भीतर ही फल प्रदान कर देती हैं. मां बगलामुखी का पीला रंग सिर्फ एक रंग नहीं है, बल्कि यह उनकी दिव्य शक्ति, शुभता और समृद्धि का प्रतीक है. यही कारण है कि इस सिद्धपीठ में हर वस्तु और हर विधान में पीले रंग को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है.

संदिग्ध गिरफ्तारी: जुबीन गर्ग हत्या केस में DSP और परिवार के सदस्य संदीपन गर्ग पर कार्रवाई

असम गायक जुबीन गर्ग के निधन मामले में चल रही जांच में एक नया मोड़ आया है। पुलिस ने गायक के चचेरे भाई और असम पुलिस सेवा अधिकारी संदीपन गर्ग को गिरफ्तार कर लिया है। वह सिंगापुर में उस नौका पर गायक के साथ मौजूद थे, जहां उनका निधन हुआ था। एसआईटी/सीआईडी ने अब तक इस मामले में कार्यक्रम आयोजक श्यामकानु महंत, जुबीन गर्ग के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, जुबीन के बैंडमेट शेखर ज्योति गोस्वामी और सह-गायक अमृतप्रभा महंत सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया सीआईडी की तरफ से की गई कई पूछताछ के बाद संदीपन गर्ग को गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले दिवंगत गायक के कई करीबी सहयोगियों के साथ भी पूछताछ की गई थी। संदीपन गर्ग को आज चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में पेश किया जाएगा। संदीपन गर्ग से पहले, पुलिस ने इस मामले में चार अन्य को गिरफ्तार किया था। शेखर ज्योति गोस्वामी ने आरोप लगाया था कि गायक के मैनेजर और सिंगापुर में जिस कार्यक्रम में उन्हें परफॉर्म करना था, उसके आयोजक ने उन्हें जहर दिया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने इस बात को छिपाने के लिए खास तौर पर एक विदेशी जगह चुनी। 19 सितंबर को हुआ था निधन ख्याल रहे कि असमिया गायक जुबीन गर्ग का 19 सितंबर को सिंगापुर में एक द्वीप के पास तैरते समय निधन हो गया था। वह नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में परफॉर्म करने के लिए सिंगापुर में थे और नौका यात्रा पर गए थे। उनके निधन के बाद उनके शव को दिल्ली लाया गया। इसके बाद असम में लाया गया। यहां दोबारा पोस्टमार्टम के बाद उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।  

सस्ता इंटरनेट, डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज: पीएम मोदी ने किया IMC 2025 का शुभारंभ

नई दिल्ली भारत और एशिया के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी मेले के तौर पर पहचान रखने वाले इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 का आज आगाज हो गया है। आईएमसी 2025 का आयोजन 8 से 11 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज इस इवेंट का उद्घाटन करते हुए लोगों को संबोधित किया। मोदी बोले- 'तेजी से बदल रही है टेक्नोलॉजी' पीएम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की युवा पीढ़ी टेक क्रांति में अहम योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि पहले फ्यूचर का मतलब अगला शतक या अगले 10-20 साल होते थे, लेकिन टेक्नोलॉजी इतनी तेजी से बदल रही है कि अब हम कहते हैं, "द फ्यूचर इज हेयर एंड नाऊ।" चाय की कीमत से भी कम में डेटा पीएम मोदी ने भारत में सस्ते मोबाइल डेटा की ओर ध्यान खींचते हुए कहा, "आज देश में 1 जीबी वायरलेस डेटा की कीमत एक कप चाय की कीमत से भी कम है। डेटा खपत की बात करें, तो भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। इसका मतलब है कि डिजिटल कनेक्टिविटी अब कोई विलासिता या विशेषाधिकार नहीं रही, बल्कि भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।" मोदी ने कहा,"मैंने प्रदर्शनी में लगे कुछ स्टॉल्स देखे जिसमें मुझे भविष्य की झलक दिखी। टेलीकॉम कनेक्टिविटी, 6जी टेक्नोलॉजी, एआई, साइबर सिक्योरिटी सेमीकंडक्टर्स, ड्रोन-स्पेस टेक्नोलॉजी, डीप-सी और ग्रीन-टेक आदि समेत अन्य टेक्नोलॉजी सेक्टर्स में आने वाला समय बिलकुल ही अलग होने जा रहा है।" पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि 6जी टेक्नोलॉजी में भारत दुनिया को लीड करेगा। मोदी ने इंटरनेट स्पीड का महत्व बताते हुए कहा कि इंटरनेट स्पीड केवल नंबर और रैंकिंग के लिए ही नहीं होते, बल्कि अच्छी इंटरनेट स्पीड "इज ऑफ लिविंग" को भी बढ़ा देते हैं। उन्होंने कहा, "इंटरनेट स्पीड बढ़ने से कनेक्टिविटी और आसान हो जाती है। टेक्नोलॉजी ने आम नागरिकों को वो अधिकार दिलाने में सहायता की है जो पहले मिलना मुश्किल थे और इसमें टेलीकॉम सेक्टर ने बड़ी भूमिका निभाई है।" 2 लाख ग्राम पंचायतों में पहुंचा केबल इंटरनेट पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत नेट प्रोजेक्ट ने 2 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड इंटरनेट से जोड़ा है। मोदी ने कहा कि अटल टिंकरिंग लैब (ATL) मिशन में 10,000 लैब्स के जरिए 75 लाख बच्चों को कटिंग-एज टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा चुका है। पीएम ने आगे कहा कि आज तकनीकी संस्थानों में 100 यूज्ड केस लैब्स की शुरूआत से इसका ग्राफ बढ़ने वाला है। एशिया का सबसे बड़ा टेक और टेलीकॉम इवेंट इंडिया मोबाइल कांग्रेस एशिया का सबसे बड़ा टेलीकॉम, मीडिया और टेक्नोलॉजी इवेंट है। इस बार इसमें दुनिया भर के उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता, और टेक इनोवेटर्स हिस्सा लेंगे। चार दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कम्युनिकेशन, 6G, और फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर्स जैसे कई अहम विषयों पर प्रदर्शनी और चर्चा होगी। IMC 2025 में 150 से ज्यादा देशों के 1.5 लाख से अधिक विजिटर्स और 400 से ज्यादा कंपनियां भाग ले रही हैं। कार्यक्रम में 800 से ज्यादा स्पीकर्स और 100 से अधिक सेशन होंगे, जिनमें जापान, कनाडा, ब्रिटेन, रूस, आयरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों के प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होंगे। इस इवेंट को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

मौलाना तौकीर के खिलाफ 10 मामले, अदालत में सुनवाई 14 अक्टूबर को

बरेली फतेहगढ़ जेल में बंद आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां कानूनी दांवपेंच के चक्रव्यूह में फंस गया है। फिलहाल उसका जेल से निकलना मुश्किल नजर आ रहा है। कोतवाली के अलावा बवाल के दिन दर्ज नौ अन्य मुकदमों में साजिशकर्ता के रूप में तौकीर को नामजद किया गया है। इन मुकदमों के विवेचकों ने तौकीर का वारंट बी फतेहगढ़ जेल में दाखिल किया है। मौलाना की तलबी 14 अक्तूबर को की जानी है। दंगा कराने में 2010 से मौलाना तौकीर का नाम कई बार उछलता रहा है, लेकिन मौलाना पर कभी बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। कभी सत्ताधारियों का करीबी होने का मौलाना को फायदा मिला तो कभी सरकारों ने दरगाह परिवार से जुड़ाव के मद्देनजर तौकीर को रियायत बख्श दी। इस बार 26 सितंबर को प्रदर्शन का आह्वान करके मौलाना तौकीर ने मुसीबत मोल ले ली। मौलाना फतेहगढ़ जेल में और उसके खास गुर्गे बरेली जेल में बंद हैं। पांच थानों में दर्ज हैं दस मुकदमे 26 सितंबर को शहर में हुए बवाल के बाद पुलिस ने पांच थानों में दस मुकदमे दर्ज किए थे। इनमें से कोतवाली के पांच मुकदमों समेत सात में मौलाना तौकीर का नाम शामिल था। चूंकि आयोजन तौकीर रजा के ही बुलावे पर होना था, इसलिए बाकी मामलों में भी साजिशकर्ता के तौर पर तौकीर का नाम जोड़ा गया है। इस तरह हालिया नौ मुकदमों में तौकीर को आरोपी बनाया गया है। इन नौ मामलों में बी वारंट फतेहगढ़ जेल में दाखिल किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2019 में सीएए एनआरसी मामले में निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का मामला अभी तक कोतवाली में प्रचलित था, इसके विवेचक ने भी मौलाना को अपने मामले में आरोपी बताकर बी वारंट दाखिल किया है। सोमवार को टली सुनवाई, अब 14 अक्तूबर को होगी शुरू में सात मामलों में मौलाना को तलब कराने के लिए बी वारंट दाखिल किया गया था। इसके लिए सोमवार को सुनवाई होनी थी। बताते हैं कि फतेहगढ़ जेल प्रशासन ने स्टाफ की कमी की मजबूरी जताई तो सुनवाई टल गई। अब 14 अक्तूबर की तारीख सुनवाई के लिए लगी है। तौकीर को इस दिन फतेहगढ़ जेल से लाकर बरेली कोर्ट में पेश किया जा सकता है। चूंकि जल्द ही दीपावली है, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई होने के आसार ज्यादा हैं। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि मौलाना तौकीर रजा से संबंधित सभी मुकदमों में विवेचना से लेकर गिरफ्तारी तक उच्च अधिकारियों की देखरेख में चल रही है। निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जा रही है। मौलाना को दी जा रहीं ज्ञानवर्धक पुस्तकें मौलाना तौकीर रजा 27 सितंबर से फतेहगढ़ सेंट्रल जेल की तन्हाई बैरक में बंद है। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी शासन स्तर से की जा रही है। मौलाना की गतिविधियों से लेकर उससे मुलाकात करने वालों तक का पूरा ब्योरा अपडेट रखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जेल प्रशासन ने मौलाना को ज्ञानवर्धक पुस्तकें मुहैया कराई हैं। उसे इच्छा के मुताबिक हिंदी व उर्दू साहित्य की पुस्तकें दी जा रही हैं।  

ऑस्ट्रेलिया की एशेज तैयारी को झटका, क्या ये स्टार प्लेयर नहीं होगा टीम का हिस्सा?

मेलबर्न   ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के लिए एशेज सीरीज से पहले एक बुरी खबर सामने आई है। टीम के कप्तान पैट कमिंस इंग्लैंड के खिलाफ 21 नवंबर को पर्थ में होने वाले पहले एशेज टेस्ट मैच से बाहर हो सकते हैं। कमिंस को पीठ में चोट लगी है और हालिया स्कैन से पता चला है कि उनकी यह चोट अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है। ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई टीम को उनके बिना ही इस मुकाबले में खेलना पड़ सकता है। गेंदबाजी के लिए फिट नहीं कमिंस रिपोर्ट्स के मुताबिक, कमिंस ने अपनी चोट में कुछ सुधार तो देखा है, लेकिन वह अभी भी गेंदबाजी के लिए पूरी तरह फिट नहीं हैं। एशेज सीरीज शुरू होने में अब सिर्फ छह हफ्ते बचे हैं, ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान का पहले टेस्ट में खेलना मुश्किल लग रहा है। सूत्रों का मानना है कि कमिंस की वापसी दिसंबर तक टल सकती है, जिससे वह सीरीज के शुरुआती और अहम मैच मिस कर सकते हैं। चोट से बचने के लिए कमिंस को फिलहाल गेंदबाजी या दौड़ने से दूर रहने की सलाह दी गई है। वह अपनी रिकवरी के लिए केवल जिम और साइकिलिंग तक ही सीमित हैं। स्टीव स्मिथ संभाल सकते हैं कप्तानी पैट कमिंस की गैरमौजूदगी में अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ टीम की कमान संभाल सकते हैं। स्मिथ, जिन्होंने पहले भी 40 टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया का नेतृत्व किया है, उन्हें कमिंस की जगह कप्तानी करने के लिए सबसे स्वाभाविक विकल्प माना जा रहा है। वहीं बात करें तेज गेंदबाजी यूनिट के बारे में तो, स्कॉट बोलैंड, मिचेल स्टार्क और जोश हेजलवुड अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि उन्हें कमिंस की कमी जरूर खलेगी। कमिंस ने पहले भी अपनी फिटनेस को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि एशेज से बाहर होना उनके लिए बहुत दुखद होगा। उन्होंने कहा था कि 'मैं सब कुछ करूंगा ताकि मैं उसके लिए ठीक हो जाएं… लेकिन मुझे विश्वास है कि मैं रिकवरी सही ढंग से करूंगा और पूरी कोशिश करूंगा।' कमिंस की चोट एशेज से पहले ऑस्ट्रेलिया की तैयारियों के लिए एक बड़ा झटका है।

रसिया खानपुर गांव में बुखार से संकट, जान गंवाने वालों की संख्या 7 तक पहुँची

पीलीभीत पीलीभीत के बीसलपुर तहसील के रसिया खानपुर गांव में बीते 24 घंटों में बुखार से तीन लोगों की मौत से गांव में हड़कंप मचा हुआ है। दो सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं, जिनका उपचार चल रहा है। लोग घरों से निकलने से कतरा रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि सिस्टम मौतों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इसका नतीजा गांव के लोग भुगत रहे हैं। एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने मंगलवार को दोपहर गांव रसिया खानपुर पहुंचकर स्थिति को परखा तो वहां स्वास्थ्य शिविर लगा हुआ नहीं मिला। इसपर उन्होंने नाराजगी जताई। कुछ देर बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने गांव में शिविर लगा दिया। बाढ़ की चपेट में आया था गांव पिछले दिनों जिले में हुई भारी बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद बीसलपुर तहसील क्षेत्र के कई गांवों भी बाढ़ की जद में आए थे। इसमें रसिया खानपुर गांव भी शामिल था। गांव में जलभराव की स्थिति बनी थी। बाढ़ के बाद जलभराव की स्थिति तो सामान्य हो गई, लेकिन संक्रमण तेजी के साथ पनपने लगा और बीमार फैल गई। ग्रामीणों के अनुसार पिछले 10 दिनों में सैकड़ों लोग बुखार से ग्रस्त हो गए। स्थिति गंभीर होने पर बरेली और शाहजहांपुर में ले जाकर मरीजों को भर्ती कराया गया। गांव में झोलाछापों के क्लीनिक भी मरीजों से भरने लगे। ग्रामीणों के अनुसार यही वजह रही कि पिछले 10 दिनों में सात लोगों की मौत बुखार से हुई है। निजी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट में भी बुखार की पुष्टि हुई लेकिन पूर्व में हुई चार मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के नाम पर बुखार की बात को नकारते हुए अलग-अलग बीमारियों से मौत होने का दावा किया गया। मंगलवार को गांव के अल्लू खान की पुत्री सकीना, 60 वर्षीय पूती बेगम व रेहान हुसैन (22) पुत्र एजाज हुसैन की बुखार से मौत हो गई। मंगलवार को ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के विरोध में प्रदर्शन किया। एसडीएम को निरीक्षण में नहीं लगा मिला स्वास्थ्य शिविर गांव रसिया खानपुर में मंगलवार को तेज बुखार से तीन लोगों की मौत होने की जानकारी मिलने पर एसडीएम, कोतवाल संजीव शुक्ला के साथ गांव में पहुंचे। जहां मृतकों के घर जाकर अफसरों ने जानकारी की। घर वालों ने बताया कि उनके परिजनों की तेज बुखार से ही मौत हुई है। इसके बाद एसडीएम स्वास्थ्य शिविर की स्थिति परखने को उच्च प्राथमिक विद्यालय गए, लेकिन मौके पर शिविर लगा हुआ नहीं मिला। इसपर उन्होंने नाराजगी जाहिर की तो दोपहर बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने आयुष्मान केंद्र में स्वास्थ्य शिविर लगाया। आयुष्मान केंद्र के द्वार पर ग्रामीणों ने रोष जताया। लोगों का आरोप था कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी जांच में रिपोर्ट नेगेटिव दिखा देते हैं। जबकि बरेली के निजी अस्पतालों में उन्हीं मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। प्रदर्शनकारियों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति काफी रोष दिखा। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि रसिया खानपुर गांव में तीन और लोगों की मौत की सूचना मिली है। स्थलीय निरीक्षण कर जांच कराई जा रही है। स्वास्थ्य कैंप लगाकर भी लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। जांच के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी। तीन हफ्ते पहले मौतों को गंभीरता से लेते तो नहीं जातीं और जानें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गांव रसिया खानपुर में तेज बुखार से पहले हुई मौतों को गंभीरता से लिया होता तो अब तीन और लोगों की जान नहीं जातीं। गांव रसिया खानपुर में करीब तीन सप्ताह पूर्व तेज बुखार फैला था। पिछले सप्ताह तेज बुखार से इस गांव में चार लोगों की मौत हो गई थी और करीब दो सौ लोग तेज बुखार की चपेट में आ गए थे। मामला जानकारी में आने पर स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर से बीमारी का उपचार शुरू कर दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले हुईं मौतों को हल्केपन से लिया। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने यदि पहले हुई ग्रामीणों की मौतों को गंभीरता से लिया होता और उसी हिसाब से बीमार लोगों का उपचार किया होता तो बाद वाली मौत नहीं होती। ग्रामीणों ने जताया रोष मोहम्मद हुसैल ने बताया कि गांव में आने वाली बीसलपुर के स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह से निष्क्रिय है। टीम की निष्क्रियता के कारण ही स्थिति बदतर हुई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम के लोगों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। समीम खान ने कहा कि गांव के जितने बीमार हैं उनका घर-घर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उपचार करना चाहिए। जब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर अपने बीमारी का उपचार नहीं करेगी तब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा। इदरीश खान ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम बीमारों का कायदे से उपचार करने के बजाय अपना बचाव करती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लापरवाही की वजह से स्थिति खराब हुई है।  

स्कूल बस दुर्घटना में 12 बच्चे घायल, ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर रोकी आवाजाही

सवाई माधोपुर जिले के शिवाड़-ईसरदा मार्ग पर बुधवार को हुए एक भयानक सड़क हादसे में बच्चों को लेकर जा रही एक निजी स्कूल की बस अनियंत्रित होकर बजरी से भरे डंपर में जा टकराई और पलट गई। हादसे के समय बस में लगभग 40 बच्चे सवार थे। टक्कर के बाद बस में चीख-पुकार मच गई। करीब 12 बच्चों को चोटें आई हैं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। बच्चों को बस से बाहर निकालकर उन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत की बात है कि किसी बच्चे को गंभीर चोट की सूचना नहीं है और सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। हादसे के बाद ग्रामीणों में भारी रोष फैल गया। उनका आरोप है कि इलाके में बजरी के डंपर तेज रफ्तार और लापरवाही से चलते हैं, जिसके कारण यह हादसा हुआ। गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया और अन्य डंपरों को रोक लिया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को शांत कराने तथा यातायात बहाल करने के प्रयास किए। पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।