Public Sootr

लहर खबरों की

Public Sootr

Writer News & Blogger

लाइव सर्च का नया तरीका: गूगल AI से तुरंत पाएं जवाब

नई दिल्ली आपके आसपास कई बार बहुत कुछ ऐसा दिखता है, जिसके बारे में पता नहीं होता। अब इसी समस्या को गूगल AI मोड में लाइव सर्च से दूर किया गया है। मोबाइल निकालिए, फोटो लीजिए, फिर गूगल बता देगा कि फोटो में दिख रही चीज क्या है? किचन में कुछ खाने के लिए बनाना है तो सामान दिखाइए, गूगल बता देगा कि कैसे बना सकते हैं? नए अपडेट के बाद गूगल से सिर्फ लिखकर या बोलकर ही नहीं, उससे इंसानों की तरह बातचीत करते हुए भी जानकारी ले सकते हैं। गूगल सर्च की वाइस प्रेजिडेंट (प्रोडक्ट मैनेजमेंट) हेमा बुडाराजू ने बताया कि भारत गूगल के लिए सबसे बड़ा वॉइस और विजुअल सर्च मार्केट है। यानी यहां के लोग बोलकर या कैमरे से सर्च करने में दुनिया में सबसे आगे है। यही वजह है कि कंपनी ने इस तकनीक को अमेरिका के बाद भारत में शुरू करने की तैयारी की है। एआई का इस्‍तेमाल हर क्षेत्र में बढ़ रहा है। आप भी पीछे ना रहें। एआई के बारे और गहराई से जानने के लिए NBT Upskill AI से करियर ग्रोथ वर्कशॉप में रजिस्टर करें। क्या है AI Mode और Search Live? अब तक हम गूगल पर कोई सवाल टाइप करते थे या वॉयस सर्च से बोलकर पूछते थे। लेकिन अब AI Mode में गूगल न सिर्फ आपका सवाल समझेगा, बल्कि आपसे आगे बात भी करेगा। और Search Live इसमें नया ट्विस्ट लाता है। अब आप गूगल के साथ लाइव बातचीत कर सकते हैं। आप कैमरा ऑन कर सकते हैं, चीजें दिखा सकते हैं और साथ ही पूछ सकते हैं कि यह क्या है या इसका क्या करना चाहिए? मान लीजिए, आप घर पर शाही पनीर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सामने रखे सारे सामान को कैमरे में दिखाकर पूछिए… इन चीजों से शाही पनीर कैसे बनाएं? गूगल तुरंत जवाब देगा और स्टेप-बाय-स्टेप बताएगा कि कैसे परफेक्ट शाही पनीर बना सकते हैं। कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं?     अपने फोन में Google App खोलें।     सर्च बार के नीचे Live आइकन पर टैप करें।     या फिर Google Lens खोलें और नीचे Live ऑप्शन चुनें।     अब कैमरा ऑन करें और बोलकर या टेक्स्ट में सवाल पूछें। 7 भारतीय भाषाओं में AI मोड गूगल सर्च ने AI Mode को अब 7 नई भारतीय भाषाओं, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तमिल, तेलुगु और उर्दू में भी शुरू करने की तैयारी की है। यानी अब हर कोई अपनी पसंदीदा भाषा में गूगल से बात कर सकेगा। हेमा बुडाराजू ने कहा कि यह सिर्फ ट्रांसलेशन नहीं है, बल्कि इसका AI Gemini Model हर भाषा की बारीकियों को समझने में सक्षम है। मतलब, अगर आप स्थानीय अंदाज में बात करेंगे, तो भी AI आपकी बात को समझकर सही जवाब देगा।

घर जाने की टेंशन खत्म! इन ट्रेनों में उपलब्ध हैं सीटें, रेलवे ने जारी की पूरी सूची

बरेली त्योहारी सीजन में रेलवे और रोडवेज दोनों ही विभागों पर भार है। इसी बीच पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर की ओर से ट्रेनों की सूची जारी की गई है, जिसमें विशेष ट्रेनों में सीट की उपलब्ध अलग-अलग तिथियों पर है। इसमें बरेली से होकर गुजरने वाली छह ट्रेनें भी शामिल हैं। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह की ओर से इसकी सूचना सार्वजनिक की गई है। इन ट्रेनों में सीटों की है उपलब्धता – 05049 छपरा-अमृतसर पूजा विशेष ट्रेन… 10 अक्तूबर को एसी तृतीय इकोनॉमी में 686 बर्थ और 17 अक्तूबर को एसी तृतीय इकोनॉमी श्रेणी में 773 सीट उपलब्ध है। – 04607 छपरा-अमृतसर पूजा विशेष ट्रेन… 13 अक्तूबर को एसी द्वितीय श्रेणी में 497 सीट, 20 अक्तूबर को एसी तृतीय में 536 व स्लीपर में 324 सीट और 27 अक्तूबर को एसी तृतीय श्रेणी में 491 व स्लीपर में 242 बर्थ उपलब्ध है। – 05301 मऊ-अम्बाला कैंट पूजा विशेष ट्रेन… नौ अक्तूबर को एसी प्रथम में 06, एसी द्वितीय में 102, एसी तृतीय श्रेणी में 314, एसी तृतीय इकोनॉमी श्रेणी में 105 सीट उपलब्ध हैं। इसके अलावा 16 अक्तूबर को एसी प्रथम में 06, एसी द्वितीय में 100, वातानुकूलित तृतीय में 328, एसी तृतीय इकोनॉमी में 124 व स्लीपर में 231 सीट हैं। 23 अक्तूबर को एसी द्वितीय में 73, एसी तृतीय में 300 और वातानुकूलित तृतीय इकोनॉमी में 101 सीट और 30 अक्तूबर को एसी प्रथम में एक एवं एसी द्वितीय में 12 सीट उपलब्ध है। – 05005 बढ़नी-अमृतसर पूजा विशेष ट्रेन… 15 अक्तूबर को स्लीपर में 363, 22 अक्तूबर को स्लीपर में 329 तथा 29 अक्तूबर को स्लीपर में 366 सीट उपलब्ध हैं। – 05023 गोमती नगर-खातीपुरा पूजा विशेष ट्रेन… 14 अक्तूबर को एसी द्वितीय में 25, एसी तृतीय में 125 स्लीपर श्रेणी में 384, 21 अक्तूबर एसी द्वितीय में 21, एसी तृतीय में 118 और स्लीपर में 351 सीट तथा 28 अक्तूबर को एसी द्वितीय श्रेणी में 21, एसी तृतीय श्रेणी में 118 एवं स्लीपर में 304 सीट उपलब्ध है। – 04021 गोरखपुर-नई दिल्ली पूजा विशेष ट्रेन…11 अक्तूबर एसी प्रथम श्रेणी में 17, एसी द्वितीय श्रेणी में 77, एसी तृतीय श्रेणी में 338, स्लीपर में 224 सीट उपलब्ध हैं। 18 अक्तूबर को एसी प्रथम में 17, एसी द्वितीय में 76, एसी तृतीय श्रेणी में 339, स्लीपर में 303 और 25 अक्तूबर को एसी द्वितीय में 22, एसी तृतीय में 162 सीट उपलब्ध हैं।

चुनाव प्रणाली में बदलाव: गणना फार्म अनिवार्य, प्रदेश में मतदान प्रक्रिया हुई अपडेट

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बिहार की तरह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इसके तहत प्रदेश में हर मतदाता को गणना फॉर्म भरकर साइन करना होगा। चुनाव आयोग से तिथियां जारी होते ही यह गणना फॉर्म लेकर बीएलओ घर-घर जाएंगे। इस संबंध में यूपी के मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी संबंधित अधिकारियों को ट्रेनिंग दे दी है। एसआईआर के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची वेबसाइट ceouttarpradesh.nic.in पर अपलोड करने का काम चल रहा है। यह वो मतदाता सूची हैं, जिनका प्रयोग विधानसभा व लोकसभा चुनाव में होता है। उसके बाद बीएलओ प्रि-प्रिंटेड (पहले से भरे) गणना फॉर्म दो प्रतियों में मतदाताओं को देंगे। इसमें से एक प्रति मतदाता के साइन करवाकर अपने पास रख लेंगे। अगर मतदाता का नाम वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट में है, तो वह सत्यापन के दौरान उसकी डिटेल बीएलओ को दे देगा। आयोग का प्रयास है कि बीएलओ खुद ही 2003 की वोटर लिस्ट की डिटेल निकालकर संबंधित मतदाताओं के गणना फॉर्म के साथ लगा दें, ताकि मतदाताओं को कोई असुविधा न हो। 2003 की मतदाता सूची से पुष्ट मतदाताओं के नाम फाइनल सूची मे शामिल कर लिए जाएंगे।   देनी होगी ये डिटेल जिन मतदाताओं के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है और उनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें आयोग की ओर से मान्य 11 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज बीएलओ को देना होगा। इसी तरह से तीसरी श्रेणी में वे मतदाता होंगे, जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ है, उन्हें अपना कोई एक मान्य दस्तावेज और अपने माता या पिता में से किसी एक का मान्य दस्तावेज देना होगा। अगर इस अवधि में जन्म लेने वाले मतदाता के माता या पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में है, तो उसका ब्योरा भी प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। चौथी श्रेणी में दो दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वाले मतदाता होंगे। उन्हें अपने और अपने माता-पिता दोनों का कोई एक मान्य दस्तावेज देना होगा। जन्म की अवधि की ये तिथियां नागरिकता संबंधी अधिनियम में समय-समय पर हुए संशोधनों को ध्यान में रखते हुए तय की गई हैं। यहां बता दें कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में करीब 15 करोड़ 42 लाख मतदाता हैं। माना जा रहा है कि करीब 70 प्रतिशत मतदाताओं का सत्यापन 2003 की मतदाता सूची के आधार पर हो जाएगा।  

आर्कटिक में भारत के लिए नए अवसर, पुतिन की रणनीति से चीन पर शिकंजा कसा जाएगा

मॉस्को/ नईदिल्ली  वैश्विक भू-राजनीति के बदलते परिदृश्य में, रूस और भारत के बीच सदियों पुरानी दोस्ती एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छूने वाली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौते की नींव भी रखेगी। यह समझौता नॉर्दर्न सी रूट (NSR) और संसाधन विकास पर केंद्रित होगा जो भारत को आर्कटिक परिषद में बड़ी भूमिका दिलाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह कदम न केवल आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा, बल्कि चीन की बढ़ती आर्कटिक महत्वाकांक्षाओं के बीच रूस के लिए एक रणनीतिक संतुलन भी साबित होगा। पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में छोटा यह मार्ग ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली की नॉर्दर्न सी रूट के विकास में संभावित भागीदारी को लेकर बातचीत चल रही है और संभावना है कि इस साल होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में इस दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं। नॉर्दर्न सी रूट रूस के उत्तरी तट के साथ आर्कटिक महासागर से होकर गुजरता है और पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में करीब 40% छोटा है। इस मार्ग से यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बीच तेज, सुरक्षित और किफायती कार्गो परिवहन संभव हो सकेगा। जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्कटिक शिपिंग में सहयोग की संभावनाओं को लेकर एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी। यह समूह रूस के विशेष आर्कटिक विकास प्रतिनिधि व्लादिमीर पानोव (Rosatom) और भारत के नौवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा की संयुक्त अध्यक्षता में काम कर रहा है। इस कार्य समूह की पहली बैठक अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में हुई, जिसमें आर्कटिक जहाज निर्माण परियोजनाओं में साझेदारी, भारतीय नाविकों को ध्रुवीय नौवहन प्रशिक्षण देने, और एनएसआर पर कार्गो शिपिंग सहयोग के लिए एक एमओयू तैयार करने पर चर्चा हुई। भारत को आर्कटिक काउंसिल में बड़ी भूमिका देना चाहता है रूस सूत्रों के अनुसार, रूस चाहता है कि भारत को आर्कटिक काउंसिल में अधिक प्रभावशाली भूमिका दी जाए। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि मॉस्को क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल को संतुलित करना चाहता है। आर्कटिक इलाका जीवाश्म ईंधन और महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध है, जिससे रूस और भारत दोनों के लिए यह रणनीतिक रूप से अहम बनता है। इसके साथ ही रूस इस बात पर भी जोर दे रहा है कि नॉर्दर्न सी रूट को ईरान के चाबहार बंदरगाह से जोड़ा जाए। भारत ने इस बंदरगाह के संचालन की जिम्मेदारी अगले दस वर्षों के लिए हासिल की है। रूस इस बंदरगाह का इस्तेमाल भारतीय महासागर क्षेत्र तक पहुंच के लिए करना चाहता है। पुतिन के आगामी भारत दौरे से उम्मीद की जा रही है कि भारत-रूस आर्कटिक सहयोग में एक नया अध्याय शुरू होगा, जो न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आर्कटिक: वैश्विक व्यापार का नया गेटवे आर्कटिक क्षेत्र पृथ्वी के सबसे ठंडे और संसाधन-समृद्ध इलाकों में से एक है। यह आज जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रहा है। इससे न केवल नए शिपिंग मार्ग खुल रहे हैं, बल्कि तेल, गैस, दुर्लभ खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच भी आसान हो रही है। रूस आर्कटिक महासागर के 53 प्रतिशत तट को नियंत्रित करता है। वह इस क्षेत्र में अपनी प्रभुता कायम रखने के लिए सक्रिय है। 2024 में NSR से 37 मिलियन टन से अधिक माल ढोया गया, जो 2025 में और बढ़ने की उम्मीद है। भारत के लिए यह अवसर सुनहरा है। स्वेज कनाल या पनामा चैनल जैसे पारंपरिक मार्गों की तुलना में NSR एशिया और यूरोप के बीच यात्रा को 40 प्रतिशत छोटा कर देता है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि व्यापारिक लागत भी घटेगी। रूसी स्रोतों के अनुसार, पुतिन की यात्रा के दौरान NSR के उपयोग पर ठोस कार्रवाई की योजना बनेगी। इसमें भारत को रूसी आइसब्रेकर बेड़े (जिसमें 40 आइसब्रेकर और 8 न्यूक्लियर-संचालित जहाज शामिल हैं) का सहयोग मिलेगा। यह कदम चीन की 'पोलर सिल्क रोड' महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के लिए रूस की रणनीति का हिस्सा है। आर्कटिक में चीन की बढ़ती उपस्थिति रूस के लिए चुनौती बनी हुई है, और भारत का प्रवेश एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में काम करेगा। भारत-रूस संबंध: इतिहास से वर्तमान तक भारत और रूस के बीच संबंध सोवियत काल से ही विशेष रहे हैं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में सोवियत संघ का समर्थन हो या आज रूस का S-400 मिसाइल सिस्टम, दोनों देशों की साझेदारी रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अटूट रही है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 63 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें रूसी तेल भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना। यूक्रेन संघर्ष के बावजूद, भारत ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता बनाए रखी, जिसकी आलोचना अमेरिका ने की। लेकिन राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में वलदाई चर्चा क्लब में कहा, "भारत हमारे ऊर्जा वाहकों को अस्वीकार करे तो उसे 9-10 अरब डॉलर का नुकसान होगा। हमारी साझेदारी मजबूत है।" पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "प्रिय मित्र" और "बुद्धिमान नेता" कहा, जो देश की भलाई के बारे में सोचते हैं।

समोसे को पचाने में क्यों लगता है 4 घंटे? सेब तो आधे घंटे में ही हो जाता है हजम!

नई दिल्ली सेब खाना सभी को अच्छा लगता है और इसे खाने के बाद लोग कंफर्टेबल महसूस करते हैं. सेब में पोषक तत्वों का खजाना होता है, जिसकी वजह से इसे शरीर के लिए बेहद फायदेमंद फल भी माना जाता है. कई बार हम जब समोसा खाते हैं, तो उसके बाद पेट भारी लगने लगता है. खाने की कुछ चीजें जल्दी पच जाती हैं, जबकि कुछ चीजों को पचने में ज्यादा समय लगता है. एक ताजा सेब खाकर आपका पेट उसे आसानी से पचा लेता है, लेकिन समोसा को पचाने में शरीर को घंटों लग जाते हैं. अब सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? चलिए जानते हैं कि दोनों को पचने में कितना वक्त लगता है और दोनों के पाचन समय में इतना ज्यादा अंतर किस वजह से है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो सेब और समोसा को पचने में लगने वाले समय में काफी अंतर होता है. इसकी वजह दोनों की बनावट और न्यूट्रिशन कंटेंट होता है. सेब एक फल है, जिसमें पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होती है. इसलिए सेब आसानी से और जल्दी पच जाता है. एक सेब को पचने में लगभग 30 मिनट से 1 घंटे का समय लगता है. जबकि समोसा तला हुआ और भारी भोजन है, जिसमें फैट और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है. ड्रीप फ्राइड समोसा को पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. समोसा को पचने में लगभग 4 से 6 घंटे या उससे ज्यादा समय भी लग सकता है. सेब में फाइबर, पानी और नेचुरल शुगर होती है, जो आसानी से पच जाती हैं. सेब में कम कैलोरी होती है और यह ताजगी से भरपूर होता है. सेब का फाइबर आपके पाचन तंत्र को साफ करता है और खाने को जल्दी पचाने में मदद करता है. इसके अलावा सेब में मौजूद विटामिन्स और एंजाइम्स खाने को जल्दी ब्रेक करने में मदद करते हैं. इसलिए जब आप सेब खाते हैं, तो आपका शरीर इसे जल्दी से तोड़कर एनर्जी में बदल देता है. यही वजह है कि सेब खाने के कुछ घंटों बाद ही आपको भूख लगने लगती है. अब समोसे की बात कर लेते हैं. समोसा कार्बोहाइड्रेट, ऑयल और मसालों से भरपूर होता है. तला हुआ खाना पचाने में शरीर को ज्यादा वक्त लगता है, क्योंकि उसमें भारी फैट होता है, जो आपके पेट में लंबे समय तक रहता है. पेट के एंजाइम्स को इस फैट को तोड़ने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इसके अलावा तला हुआ खाना पाचन तंत्र को धीमा कर सकता है, जिससे गैस, अपच और भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए समोसे का पाचन समय ज्यादा होता है. पाचन तंत्र का भी फूड्स को बचाने में अहम योगदान होता है. आपकी उम्र, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल पाचन की गति को प्रभावित करते हैं. युवा और हेल्दी व्यक्ति का पाचन तंत्र जल्दी काम करता है, लेकिन अगर किसी को पाचन संबंधी समस्या या कमजोर इम्यूनिटी हो तो पाचन धीमा हो सकता है. इसी वजह से कभी-कभी हल्का भोजन भी कुछ लोगों को देर से पचता है. इसलिए स्वस्थ पाचन के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना जरूरी है. फल, सब्जियां और फाइबर युक्त चीजें खाने से पाचन बेहतर होता है और भारी तले हुए खाने से बचना चाहिए.

GPay-पेेटीएम को मिलेगी कड़ी टक्कर, Zoho उतरा पेमेंट वॉर में

 नई दिल्ली     स्वदेशी कंपनी Zoho इन दिनों सुर्खियों में है. हाल ही में कंपनी का इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप Arattai काफी पॉपुलर हुआ है और सरकार भी इसे प्रोमोट कर रही है. अब कंपनी हार्डवेयर स्पेस के लिए बड़ी तैयारी में दिख रही है.  Zoho ने अब पॉइंट ऑफ सेल डिवाइसेज यानी POS मशीन बेचना शुरू कर दिया है. इसमें इंटीग्रेटेड QR डिवाइसेज और साउंड बॉक्स शामिल हैं. भारत में फिलहाल Paytm और PhonePay के POS डिवाइसेज पॉपुलर हैं और ज्यादर रिटेल स्टोर्स पर यही पेमेंट ऑप्शन देखने को मिलता है. Zoho Payments के तहत लॉन्च किया गया ये POD डिवाइस पेटीएम और फोनपे सहित गूगल पे को कड़ी टक्कर दे सकता है. कंपनी के स्मार्ट POS डिवाइस में टच स्क्रीन इंटरफेस के साथ इनबिल्ट प्रिंटर भी है जो तुरंत रीसीट को प्रिंट कर देता है. Zoho का पेमेंट टर्मिनल 4G, WiFi और ब्लूटूथ सपोर्ट करता है. इस मशीन के जरिए मर्चेंट्स चिप कार्ड्स, UPI और QR कोड से पेमेंट ले सकते हैं. Zoho Payment के सीईओ ने कहा है कि ये कंपनी का नेचुरल एक्सपैंशन है जो 2024 में शुरू किया गया था. हालांकि तब सॉफ्टवेयर बेस्ड पेमेंट सल्यूशन था. कंपनी तब से किसी भी डिवाइसेज में ऑनलाइन पेमेंट सपोर्ट देती थी. अब कंपनी ने हार्डवेयर भी पेश कर दिया है. चूंकि Zoho के पास छोटे बिजनेस मैनेज करने के सभी टूल्स हैं, इसलिए पेमेंट टर्मिनल में भी उनका सपोर्ट देखने को मिलेगा. यानी मर्चेंट्स रियल टाइम पेमेंट ट्रैकिंग से लेकर पूरा लेखा जोखा एक जगह पर पा सकेंगे. बिजनेसेज के लिए युनिफाइड डैशबोर्ड भी है जहां से पेमेंट्स और बिलिंग की तमाम जानकारी रिटेलर्स और मर्चेंट्स को आसानी से मिल सकेगी. एडवांस्ड सिक्योरिटी के लिए Zoho ने PCI DSS सर्टिफाइड रखा है. अरट्टई हो रहा है पॉपुलर WhatsApp भारत में सबसे ज्यादा यूज किया जाने वाला इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप है. लेकिन अब Zoho का Arattai ऐप आ चुका है जो स्वदेशी है. इस ऐप पर चैटिंग के अलावा कॉलिंग और मीटिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं. अब तक चैटिंग में Arattai ने एंड टू एंड एन्क्रिप्शन नहीं दिया है, लेकिन कंपनी ने कहा है कि जल्द ही Arattai के चैट्स में एंड टू एंड एन्क्रिप्शन दिया जाएगा. गौरतलब है कि एंड टू एंड एन्क्रिप्शन को चैटिंग प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिए गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है. इस एन्क्रिप्शन के आ जाने के बाद Arattai पर की गई चैटिंग का डेटा कोई भी ऐक्सेस नहीं कर पाएगा. बिना एन्क्रिप्शन चैटिंग के साथ मुश्किल ये है कि पर्सनल डेटा हैकर्स या खुद कंपनी ऐक्सेस कर सकती है. WhatsApp में काफी पहले से एंड टू एंड एन्क्रिप्शन है जिसे इंडिपेंडेट सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने कई बार ऑडिट भी किया है. देखना दिलचस्प होगा कि स्वदेशी Arattai कैसे WhatsApp को टक्कर देता है.

टैरिफ पॉलिसी ने अमेरिका की जेब पर किया चोट, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

वाशिंगटन डोनाल्ड ट्रंप ने किसी देश पर 25%, तो भारत और ब्राजील जैसे देशों पर 50%  का हाई टैरिफ लगाया है, लेकिन उनका ये कदम खुद अमेरिका के लिए ही परेशानी का सबब बनता जा रहा है. दुनियाभर के तमाम दिग्गज इकोनॉमिस्ट ने इसकी आलोचना की है. अब IMF की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ भी इसमें शामिल हो गई हैं. उन्होंने कहा है कि US Tariff के छह महीने के बाद भी इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला है और अमेरिका में जो राजस्व बढ़ा है, वो खुद अमेरिकी जनता और यहां की कंपनियों से ही लिया गया है.  अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर निगेटिव असर ट्रंप टैरिफ के चलते दुनिया में ट्रेड वॉर जैसी स्थिति बनी है. फिर बात चाहे चीन के साथ व्यापार युद्ध की हो, या फिर ब्राजील जैसे देशों की. भारत के बारे में देखें, तो ट्रंप ने पहले 25% टैरिफ का ऐलान किया और फिर रूसी तेल खरीद को मुद्दा बनाते हुए इसे दोगुना करते हुए 50% कर दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ लगाकर आखिर अमेरिका को क्या हासिल हुआ? तो इसे लेकर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि इसका निगेटिव असर खुद US Economy पर ही हुआ है.  US के ग्राहकों-कंपनियों पर बढ़ा बोझ गीता गोपीनाथ ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ का ऐलान किए छह महीने से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन इसका कोई खास नतीजा नहीं निकल सका है. उन्होंने लिखा, 'अमेरिका के टैरिफ से क्या हासिल हुआ? क्या सरकार के लिए राजस्व बढ़ा? हां, काफी बढ़ा, लेकिन यह पैसा करीब-करीब पूरी तरह से अमेरिकी कंपनियों से ही वसूला गया और कुछ हद तक इसकी भरपाई अमेरिकी उपभोक्ताओं से की गई. कुल मिलकार ट्रंप का टैरिफ इनके लिए एक टैक्स जैसा ही साबित हुआ.  टैरिफ से सुधार के कोई संकेत नहीं IMF की पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ ने टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा कि ये सीधे तौर पर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए निगेटिव स्कोरकार्ड रहा है. भारत और ब्राजील से आयात पर 50% तक, और कुछ भारतीय दवाओं पर तो 100% तक टैरिफ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और व्यापार संतुलन में सुधार लाने के लिए थे. लेकिन इसका अमेरिका को बहुत कम या कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ है. उन्होंने लिखा कि न तो व्यापार संतुलन में सुधार और न ही अमेरिका विनिर्माण क्षेत्र में इसके पॉजिटिव असर का कोई संकेत मिला है.  उल्टा महंगाई में कर दिया इजाफा  गीता गोपीनाथ ने टैरिफ के चलते अमेरिका में महंगाई दर को लेकर कहा कि इसके लागू होने के बाद से देश में महंगाई में थोड़ा इजाफा देखने को मिला है. खासतौर पर घरेलू उपकरणों, फर्नीचर, कॉफी जैसी चीजों के दाम में बढ़ोतरी देखने को मिली है. गोपीनाथ ही नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम एक्सपर्ट्स ने भी अपने-अपने तरीके से ट्रंप के टैरिफ की आलोचना की है और इसे खुद अमेरिका के लिए खराब करार दिया है. 

MP में महिला कांग्रेस के संगठन को मिलेगी मजबूती, नवंबर तक होंगे पदाधिकारियों के चयन

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस की तरह ही मध्य प्रदेश में महिला कांग्रेस में भी संगठन सृजन अभियान के माध्यम से जिला अध्यक्ष की नियुक्ति होगी। नवंबर तक सभी जिला इकाइयों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी जाएगी। यह निर्णय मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भवन में आयोजित महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी में लिया गया। मध्य प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल के मुताबिक, बैठक में तय किया गया कि अखिल भारतीय महिला कांग्रेस और मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस मिलकर पर्यवेक्षक नियुक्त करेंगे, जो पूरे प्रदेश के जिलों का दौरा करेंगे। ये पर्यवेक्षक जिला स्तर पर महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करके उनकी राय के आधार पर जिला अध्यक्ष पद के लिए पैनल तैयार करेंगे। जन आंदोलन शुरू करेगी इसमें से सक्रिय और नेतृत्व क्षमता वाली महिला को जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाएगा। यह प्रक्रिया अक्टूबर अंत तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि नवंबर के पहले सप्ताह में नए जिला अध्यक्षों की घोषणा की जाएगी। इसके बाद महिला कांग्रेस राज्यभर में भाजपा सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के विरोध में राज्यव्यापी जन आंदोलन शुरू करेगी। इसमें महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, महिला अपराध, महिलाओं का लापता होना, महंगाई, लाड़ली बहनों के साथ तीन रुपये प्रतिमाह देने के नाम पर वादा खिलाफी और स्वास्थ्य, शिक्षा सेवाओं में गिरावट जैसे मुद्दे रहेंगे। नेतृत्व विकास को लेकर होगा प्रशिक्षण- महिला कांग्रेस एक संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इसमें नई जिला अध्यक्षों और प्रदेश पदाधिकारियों को संगठन प्रबंधन, नेतृत्व विकास और जनसंपर्क कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

भारतवंशी वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता: शुक्र ग्रह पर मिला भरपूर पानी

नई दिल्ली शुक्र ग्रह के बादल हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बने हुए हैं. क्या वहां जीवन हो सकता है? ये सवाल सालों से चर्चा में है. अब अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने 50 साल पुराने डेटा को दोबारा जांचा है. नतीजा चौंकाने वाला है – शुक्र के बादल ज्यादातर पानी से बने हैं.  ये पानी साफ-सुथरे बूंदों के रूप में नहीं, बल्कि हाइड्रेटेड सामग्री (जिसमें पानी बंधा हुआ हो) के रूप में मौजूद है. पुरानी सोच थी कि बादल ज्यादातर सल्फ्यूरिक एसिड से बने हैं, लेकिन अब पता चला है कि पानी का हिस्सा 62 प्रतिशत है. ये खोज नासा के पायनियर मिशन के पुराने आंकड़ों से आई है.  शुक्र के बादल: पृथ्वी जैसे हालात, लेकिन रहस्यमयी शुक्र सूर्य का सबसे करीब ग्रह है. इसका वातावरण बहुत गर्म और जहरीला है. सतह पर तापमान 460 डिग्री सेल्सियस तक जाता है. लेकिन उसके ऊपरी बादलों की परतें? वहां दबाव और तापमान पृथ्वी जैसे हैं – करीब 50 डिग्री सेल्सियस और सामान्य हवा का दबाव. इसलिए वैज्ञानिक सोचते हैं कि कहीं वहां सूक्ष्म जीवन (माइक्रोब्स) हो सकता है. लेकिन समस्या ये थी कि हम मानते थे बादल सल्फ्यूरिक एसिड (एक तेजाब) से भरे हैं. ये एसिड इतना जहरीला है कि जीवन की कल्पना मुश्किल लगती थी. पानी की कमी भी बड़ी बाधा थी. अब ये नया अध्ययन कहता है कि पानी बहुत ज्यादा है – बस वो हाइड्रेटेड रूप में बंधा हुआ है. कैसे हुई दोबारा जांच? पुराने डेटा की खोज ये खोज कैलिफोर्निया पॉलिटेक्निक स्टेट यूनिवर्सिटी (कैल पॉली पॉमोना), विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी और नासा के वैज्ञानिकों ने की. आइडिया आया डॉ. राकेश मोगुल (कैल पॉली पॉमोना) और डॉ. संजय लिमाये (विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी) की बातचीत से. वे शुक्र के बादलों की रचना पर चर्चा कर रहे थे. उन्होंने सोचा कि 1978 के नासा पायनियर वीनस मिशन के डेटा को दोबारा देखना चाहिए. पायनियर वीनस मिशन में एक बड़ा प्रोब (साउंडर) शुक्र के वातावरण में उतरा था. उस पर दो उपकरण थे – न्यूट्रल मास स्पेक्ट्रोमीटर (LNMS) और गैस क्रोमैटोग्राफ (LGC)। ये गैसों को मापने के लिए बने थे. लेकिन डेटा नासा के आर्काइव में माइक्रोफिल्म पर दबा था. पहले इसे डिजिटाइज करना पड़ा. ये काम आसान नहीं था – जैसे पुरानी किताबों को स्कैन करना. डेटा में क्या छिपा था? उपकरणों की 'जाम' से राज खुला वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रोब जब बादलों वाली मोटी हवा में उतरा, तो उपकरणों के इनलेट (छेद) बादलों के कणों से जाम हो गए. इससे CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड) का स्तर अचानक गिर गया. पहले इसे खराबी समझा गया, लेकिन अब इसे मौका माना गया.  प्रोब नीचे उतरता गया. गर्मी से जाम कण पिघले. अलग-अलग तापमान पर अलग-अलग गैसें निकलीं. इससे पता चला कि कण क्या बने हैं. मुख्य बातें…      पानी की भारी मौजूदगी: 185 डिग्री सेल्सियस और 414 डिग्री सेल्सियस पर पानी की बड़ी मात्रा निकली. ये हाइड्रेटेड फेरिक सल्फेट (लोहे का हाइड्रेटेड यौगिक) और हाइड्रेटेड मैग्नीशियम सल्फेट जैसे यौगिकों से आई. कुल कणों का 62 प्रतिशत पानी था – ज्यादातर बंधा हुआ.     सल्फ्यूरिक एसिड भी है: 215 डिग्री सेल्सियस पर SO2 (सल्फर डाइऑक्साइड) निकला, जो सल्फ्यूरिक एसिड के पिघलने से होता है. इसका हिस्सा 22 प्रतिशत.     एक और रहस्य: 397 डिग्री सेल्सियस पर फिर SO2 निकला, साथ ही लोहे के आयनों का स्पाइक. ये फेरिक सल्फेट (लोहे का सल्फेट) का संकेत है. इसका अनुमान 16 प्रतिशत. ये यौगिक ज्यादा गर्मी सहन करता है. लोहा कहां से आया? वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष की धूल (कॉस्मिक डस्ट) शुक्र के वातावरण में आती है. ये एसिड बादलों से रिएक्ट होकर फेरिक सल्फेट बनाती है. पुरानी भूल क्यों हुई? दूर से जांच vs करीब से जांच पहले दूरबीनों से स्पेक्ट्रोस्कोपी (रंगों से विश्लेषण) की जाती थी. ये सिर्फ हवा में घुला पानी दिखा सकती थी, न कि हाइड्रेटेड पानी. लेकिन प्रोब ने सीधे बादलों के कणों को मापा, इसलिए सही नतीजा मिला. ये रहस्य सुलझ गया. जीवन की संभावना पर क्या असर? नई उम्मीदें शुक्र के बादलों में जीवन का सबसे बड़ा तर्क पानी की कमी था. अब पता चला कि पानी बहुत है – 62 प्रतिशत. लेकिन ये तेजाबी पानी है, जो पृथ्वी के जीवों के लिए कठिन. एसिड-सहने वाले माइक्रोब्स (जैसे पृथ्वी के एसिड झीलों में) वहां जी सकते हैं. ये खोज एस्ट्रोबायोलॉजी (ग्रहों पर जीवन की खोज) को नई दिशा देगी.

डॉ. यादव का निवेशकों संग संवाद, 9 अक्टूबर को मुंबई में इंटरएक्टिव सेशन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुंबई में 9 अक्टूबर को इंटरएक्टिव सेशन में निवेशकों से करेंगे संवाद रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण निर्माण सहित विभिन्न सेक्टर्स में निवेश पर होगी चर्चा मोहासा बाबई इंडस्ट्रियल जोन में निवेश पर होगा संवाद मैक्सिको, सिंगापुर, कनाडा और इटली के कॉन्सुल जनरल भी करेंगे शिरकत भोपाल  मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी निवेश गंतव्य बनाने के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सतत् प्रयास अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मध्यप्रदेश शासन ने निवेश-अनुकूल वातावरण को सुदृढ़ करते हुए पारदर्शिता, नीतिगत स्थिरता और उद्योगों के लिए तीव्र गति से अनुमतियाँ प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इन्हीं प्रयासों की श्रृंखला में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 9 अक्टूबर को मुंबई में इंटरएक्टिव सेशन में देश-विदेश के उद्योगपतियों से संवाद करेंगे। इंटरएक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट ऑपर्च्युनिटीज इन पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग एंड वाइट गुड्स इन मध्यप्रदेश 9 अक्टूबर को होटल ट्राइडेंट, नरीमन पॉइंट मुंबई में आयोजित किया जा रहा है। इस सत्र का उद्देश्य निवेशकों को मध्यप्रदेश में उभर रहे औद्योगिक अवसरों से अवगत कराना है, विशेष रूप से मोहासा-बाबई (नर्मदापुरम) में विकसित किए जा रहे पॉवर एवं रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (Phase-2) में निवेश को प्रोत्साहन देना है। इस औद्योगिक क्षेत्र में भूमि आवंटन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर निर्धारित की गई है। सेशन में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ सिंगापुर, मैक्सिको, कनाडा और इटली सहित विभिन्न देशों के कॉन्सुल जनरल और व्यापारिक प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। हिंदल्को इंडस्ट्रीज़, वेलस्पन ग्रुप, एलएंडटी, सन फार्मा, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, गॉदरेज इंडस्ट्रीज़, अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, बजाज ग्रुप, आईपीसीए लैब और रेमंड ग्रुप जैसी अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीतियों, निवेश-संभावनाओं और प्रमुख परियोजनाओं जैसे पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन, पीएम मित्र पार्क, फुटवियर पार्क और उद्योग आधारित क्लस्टर्स पर विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही उद्योगपतियों और प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर राज्य में निवेश को लेकर संवाद और डिप्लोमैट राउंडटेबल मीटिंग में अंतर्राष्ट्रीय निवेश और औद्योगिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सेशन को  वीर एस. अडवाणी, डिप्टी चेयरमैन, सीआईआई वेस्टर्न रीजन एवं प्रबंध निदेशक, ब्लू स्टार लिमिटेड संबोधित करेंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव  राघवेंद्र कुमार सिंह द्वारा मध्यप्रदेश की निवेश संभावनाओं की जानकारी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने निवेशकों के प्रति विश्वास और पारदर्शिता का जो वातावरण बनाया है, उसी का परिणाम है कि देश-विदेश की अग्रणी कंपनियाँ अब मध्यप्रदेश में औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित करने में गहरी रुचि दिखा रही हैं। इन सत्रों के माध्यम से प्रदेश में निवेश में वृद्धि होने से औद्योगिक निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार अवसर सृजित होंगे और मध्यप्रदेश उद्योग एवं रोजगार का मजबूत केंद्र बनकर उभरेगा।