Public Sootr

लहर खबरों की

Public Sootr

Writer News & Blogger

सिंहस्थ-2028 में डिजिटल सुरक्षा का कवच: VR से नजर आएंगे रास्ते, पुलिस देगी घर बैठे ट्रेनिंग

उज्जैन  उज्जैन पुलिस ने देशभर के 54 हजार जवानों को वर्चुअल रियलिटी (VR) तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। यह पहल 2028 के महाकुंभ के दौरान लागू की जाएगी, जो कि देश में अपनी तरह की पहली योजना होगी। उज्जैन पुलिस इस तकनीक का उपयोग करते हुए कुंभ ड्यूटी पर तैनात होने वाले पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करेगी। वर्चुअल रियलिटी से कुंभ ड्यूटी का प्रशिक्षण उज्जैन में महाकुंभ की तैयारियां जोरों पर हैं। पुलिसकर्मी वर्चुअल रियलिटी के माध्यम से उज्जैन की गलियों, सड़कों, चौराहों और श्रद्धालुओं के मार्ग को समझेंगे। उन्हें यह प्रशिक्षण अपने शहर में बैठे-बैठे ही मिलेगा। इस तकनीक के जरिए पुलिसकर्मी जान सकेंगे कि उन्हें कहां तैनात किया जाएगा और किस मार्ग का उपयोग करना होगा। जो अपने शहर राज्य में बैठकर उज्जैन की गलियों, सड़क, मार्ग, चौराहे, एंट्री एग्जिट और श्रद्धालुओं को किस मार्ग पर भेजना और रोकने की ट्रेनिंग भी VR के माध्यम से लेंगे। उज्जैन पुलिस ने फिलहाल 200 VR सेट मंगवाए हैं। VR से ट्रेनिंग पुलिस आर्म्स फोर्स होमगार्ड वॉलिंटियर्स को दी जाएगी। उज्जैन में होने वाले महाकुंभ के आयोजन में पुलिस हाईटेक टेक्नोलॉजी का उपयोग करेगी। ऐसा प्रयागराज कुंभ में भी देखने को नहीं मिला था। पहली बार VR टेक्नोलॉजी का उपयोग कर अपने अपने शहर में उज्जैन की सड़कों-गलियों आने-जाने के मार्ग की ट्रेनिंग VR से मिलेगी। पहले उज्जैन में, फिर अपने शहर में लेंगे ट्रेनिंग एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ट्रेनिंग में ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी का उपयोग करेंगे। दूसरे प्रदेश और जिले से आने वाले पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए VR ट्रेनिंग का माध्यम चुना है। सड़कों के 3D वीडियो बनवाए हैं। ये पुलिसकर्मियों को VR के माध्यम से उनके शहर में ही दिखाए जाएंगे। सोमवार को VR सेट का परीक्षण किया है। सबसे पहले पुलिसकर्मी उज्जैन आकर देखेंगे कि उनकी ड्यूटी कहां लगेगी। कौन सा रास्ता कहां से किधर जाएगा। इसके बाद उन्हें बार-बार ट्रेनिंग के लिए उज्जैन नहीं आना पड़ेगा। पुलिसकर्मी अपने प्रदेश में कहीं भी होगा, वह VR के माध्यम से शहर की भौगोलिक स्थिति और रियल टाइम स्थिति जानकर ट्रेनिंग पूरा कर लेगा। ट्रेनिंग प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ट्रेनिंग में अधिक से अधिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। दूसरे राज्यों और जिलों से आने वाले पुलिसकर्मियों के लिए VR तकनीक का चयन किया गया है। इसके तहत सड़कों के 3D वीडियो तैयार किए गए हैं, जिनका उपयोग पुलिसकर्मियों को उनकी शहर की भौगोलिक स्थिति समझाने के लिए किया जाएगा। सोमवार को VR सेट का परीक्षण किया गया, जिसके बाद पुलिसकर्मी उज्जैन आकर देखेंगे कि उनकी ड्यूटी कहां लगेगी। इससे उन्हें बार-बार उज्जैन आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, और वे अपने प्रदेश में कहीं से भी इस प्रशिक्षण को पूरा कर सकेंगे। आपातकालीन स्थितियों में VR का महत्व शुरुआत में इंदौर रोड से शिप्रा नदी के घाट तक का वीडियो तैयार किया गया है। इस वीडियो की मदद से पुलिसकर्मी आपातकालीन स्थितियों का सामना करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होंगे। एसपी ने बताया कि 200 VR सेट का ऑर्डर दिया गया है और भविष्य में उनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इस तकनीक का उद्देश्य यह है कि पुलिसकर्मी जब VR का उपयोग करेंगे, तो उन्हें ऐसा लगेगा जैसे वे वास्तव में उस स्थान पर खड़े हैं, जहां उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इससे उनकी प्रशिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसमें AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम, मोबाइल ऐप ट्रैकिंग जैसी तकनीकें भीड़ प्रबंधन में सहायक होंगी। उज्जैन के चार रेलवे स्टेशनों को भी हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें नई खेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामन और विक्रम नगर स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों पर फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर, हाई क्वालिटी CCTV कैमरे और ड्रोन निगरानी के माध्यम से संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जाएगी। स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए 5 हजार करोड़ रुपए की लागत से स्थायी कुंभ सिटी का निर्माण किया जाएगा। यह सिटी 2378 हेक्टेयर भूमि पर बनाई जाएगी, जिसमें इंटरकनेक्टेड चौड़ी सड़कें, अंडरग्राउंड लाइट, अस्पताल, स्कूल और अन्य सुविधाएं शामिल होंगी। इस परियोजना के माध्यम से उज्जैन को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहर बनाने का लक्ष्य है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव प्रदान करेगा। इस नई पहल से यह स्पष्ट होता है कि उज्जैन पुलिस और स्थानीय प्रशासन महाकुंभ को सफल और सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आपातकालीन समय में भी काम आएगा VR अभी शुरुआत में इंदौर रोड का शिप्रा नदी के घाट तक का वीडियो बनवाया है। इससे ट्रेनिंग की शुरुआत होगी। VR आपातकालीन समय में कैसे काम आ सकता है, इस पर भी काम कर रहे हैं। जल्द ही उस दिशा में भी आगे बढ़ेंगे। 200 वीआर सेट के ऑर्डर दिए हैं। बाद में धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती जाएगी। उज्जैन कुंभ में खड़े होने का होगा अहसास वीडियो में बैकग्राउंड में हिंदी और इंग्लिश में नरेशन भी है। इसमें पूरे शहर की हर छोटी-बड़ी डिटेल दी जाएगी। जो बाद में भी काम आएगी। एसपी प्रदीप शर्मा का कहना है कि ट्रेनिंग में मैप पर समझा भी देंगे तो याद नहीं रहेगा। लेकिन, जब वह पुलिसकर्मी VR से देखेंगे तो उन्हें ऐसा प्रतीत होगा जैसे उसी जगह खड़े हैं। जहां उनकी ड्यूटी लगाई गई है। इससे फील्ड याद रहेगा। कुछ प्लान चेंज भी हुए तो भी दिक्कत नहीं होगी। देश में पहली बार पुलिस उज्जैन में उपयोग करेगी। AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम भी सन 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके "हाईटेक" कुम्भ आयोजित होगा। जिसमें AI-आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम, मोबाइल ऐप ट्रैकिंग जैसी तकनीक भीड़ प्रबंधन में उपयोग में ली जायेगी। रेलवे स्टेशन भी हाईटेक होंगे उज्जैन के चार रेलवे स्टेशन नई खेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामन और विक्रम नगर स्टेशन को हाईटेक बनाया जाएगा। इन स्टेशनों पर अगर कोई अपराधी ट्रेन से उज्जैन आता है तो फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर, हाई क्वालिटी सीसीटीवी … Read more

भारत तैयार है अगली क्रांति के लिए, 6G में बनेगा ग्लोबल लीडर

मुंबई  नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में 2025 एशिया का सबसे बड़ा टेक इवेंट इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) शुरू हो चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया और भाषण में उन्होंने भारत की अपनी टेक्नोलॉजी की बड़ी उपलब्धि देश की होमग्रोन 4G स्टैक का ज़िक्र किया. उन्होंने इसे भारत की इंडिजिनस (स्वदेशी) तकनीक के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है. पीएम मोदी ने कहा कि यह नई 4G प्रणाली न सिर्फ तेज़ इंटरनेट स्पीड और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, बल्कि सेवाओं को भी ज्यादा भरोसेमंद बनाएगी. उन्होंने बताया कि देश में 1 लाख 4G टावर लगाए जा चुके हैं, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है. इसके अलावा, यह Made-in-India 4G स्टैक अब निर्यात के लिए तैयार है, जो भारत की तकनीकी क्षमताओं को दुनिया के सामने पेश करता है. उन्होंने पिछले दशक के अनुभव को देखते हुए कहा कि देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करने के लिए एक आधुनिक कानूनी ढांचा भी जरूरी है. इस अवसर पर संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा केवल 5G तक सीमित नहीं है. भारत का लक्ष्य 6G में 10% वैश्विक पेटेंट हासिल करना है. उन्होंने यह भी बताया कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन का बाजार 2033 तक तीन गुना बढ़कर लगभग 15 अरब डॉलर का हो जाएगा. सिंधिया ने कहा कि सैटकॉम आज जमीन से लेकर समुद्र और अंतरिक्ष तक कनेक्टिविटी बढ़ा रहा है. उन्होंने जोर दिया कि इस पूरी तकनीकी क्रांति के पीछे सबसे बड़ी ताकत भारत के लोग हैं. आने वाले समय में भारत दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल रूप से सक्षम ताकत बन जाएगा. ग्लोबल लेवल पर लीडर बना भारत सिंधिया ने भारत की डिजिटल नेतृत्व की दिशा की भी बात की और कहा कि देश अब तकनीक में पीछे रहने वाला नहीं बल्कि ग्लोबल लेवल पर डिजिटल पर अग्रणी बन गया है. उन्होंने कहा, ‘वो दिन दूर नहीं जब लोग कहेंगे कि दुनिया भारत पर निर्भर है. मैं आपसे आग्रह करता हूं कि यहां डिज़ाइन करें, यहां समाधान करें और उसे हर जगह स्केल करें. भारत नवाचार करता है, और दुनिया बदलती है.’ उन्होंने ये भी बताया कि भारत अब सिर्फ सेवा राष्ट्र (Service Nation) नहीं बल्कि उत्पादक राष्ट्र (Product Nation) बन गया है. प्रधानमंत्री के PLI (Production-Linked Incentive) योजना के जरिए अब तक लगभग 91,000 करोड़ रुपये का नया उत्पादन हुआ है, 18,000 करोड़ रुपये का निर्यात बढ़ा है और 30,000 नए रोजगार पैदा हुए हैं. इवेंट में पीएम मोदी ने कहा, ‘आज देश में 1GB वायरलेस डेटा की कीमत एक कप चाय से भी कम है,’ जो बताता है कि डिजिटल सेवाएं अब हर आम आदमी की पहुंच में हैं. उन्होंने ये भी ज़ोर देकर कहा कि देश में अब साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए कानून को और मज़बूत किया गया है और ग्रिवेंस रिड्रेसल सिस्टम भी बेहतर हुआ है.’ कुल मिलाकर, इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 ने भारत की तकनीकी उपलब्धियों और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं को उजागर किया. 4G और 5G नेटवर्क के विस्तार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, 6G के लिए तैयारी और डिजिटल कौशल में निवेश भारत को विश्व स्तर पर एक मजबूत तकनीकी ताकत बना रहा है.  

महाकाल भक्तों के लिए सुविधा: अब कैशलेस मिलेंगे लड्डू प्रसाद, दीपावली से शुरू होगी नई व्यवस्था

उज्जैन   विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यह नई व्यवस्था शुरू की गई है। भक्तगण अब मंदिर में दान देने और लड्डू प्रसाद खरीदने के लिए क्यूआर कोड का उपयोग कर सकते हैं। यह डिजिटल भुगतान की सुविधा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा शुरू की गई है। इसके कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद काउंटरों पर दीपावली से कैशलेस की सुविधा प्राप्त होगी। दर्शनार्थी क्यूआर कोड से भुगतान कर लड्डू प्रसाद खरीद सकेंगे। इस व्यवस्था से दर्शनार्थियों को काफी सुविधा होगी। मंदिर कर्मचारियों को भी खुल्ले पैसों की समस्या से निजात मिलेगी। महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह सुविधा शुरू होने में एक पखवाड़े का समय लग सकता है। महाकाल मंदिर समिति भगवान महाकाल के भोग प्रसाद के रूप में भक्तों को शुद्ध देशी घी से बने बेसन के लड्डू का विक्रय करती है। मंदिर परिसर स्थित काउंटरों से भक्तों को लड्डू प्रसाद का विक्रय किया जाता है। अभी तक लड्डू प्रसाद की बिक्री नकद होती है। प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार श्रद्धालु मंदिर परिसर में लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके दान राशि (भेंट) और लड्डू प्रसाद का भुगतान सीधे अपने बैंक खाते से कर सकते हैं। ये क्यूआर कोड मंदिर के दान काउंटरों, लड्डू प्रसाद काउंटरों और मंदिर परिसर में अन्य प्रमुख स्थानों पर लगाए गए हैं। आप किसी भी यूपीआइ आधारित पेमेंट ऐप जैसे कि गूगल पे, फोन-पे, पेटीएम आदि का उपयोग करके भुगतान कर सकते हैं। लड्डू प्रसाद 400 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध है और त्योहारों पर अतिरिक्त काउंटर लगाए जाते हैं। क्यूआर कोड से दान भी कर सकेंगे भक्त महाकाल मंदिर समिति क्यूआर कोड से लड्डू प्रसाद की बिक्री शुरू करने के साथ दान के लिए भी इस सुविधा को लागू करने की तैयारी कर रही है। मंदिर परिक्षेत्र में जगह-जगह बड़े-बड़े क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। मंदिर समिति ने यह योजना पहले भी लागू की थी। उस समय दान के लिए लगाए गए क्यूआर कोड में एक कर्मचारी ने अपना नंबर डाल दिया था। मामले में जांच भी बैठाई गई थी, लेकिन इसका खुलासा नहीं हो पाया था। मंदिर से जुड़े जानकारों का कहना है कि नए अधिकारियों को इस पूरे मामले की पड़ताल के बाद ही इस प्रकार की योजना शुरू करना चाहिए। एक ही दिन निकलेगी बाबा की दो सवारी महाकाल बाबा एक ही दिन में दो-दो बार दर्शन देने नगर भ्रमण करेंगे। इस बार कार्तिक मास में 3 नवंबर को वर्षों बाद यह संयोग बनने जा रहा है। पहली सवारी कार्तिक माह की होगी, जो शाम 4 बजे परंपरागत मार्ग से निकलेगी, जबकि दूसरी सवारी रात में हरिहर भेंट के लिए गोपाल मंदिर तक जाएगी, यह रात्रि 11 बजे महाकाल मंदिर से शुरू होगी। बदलेगा आरतियों का समय महाकालेश्वर मंदिर में कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा 8 अक्टूबर से तीन आरतियों का समय बदला जाएगा। पुजारियों के अनुसार शीतकाल की शुरुआत के साथ इसे लागू कर दिया जाएगा। पुजारी प्रदीप गुरु ने बताया हर छह माह में तीन आरती का समय बदलता है। जो ऋतु परिवर्तन के आधार पर किया जाता है। इनमें दद्योदक आरती सुबह 7 की जगह 7.30 से 8.15 बजे तक, भोग आरती सुबह 10 की जगह 10.30 से 11.15 बजे तक, संध्या आरती शाम 7 की जगह 6.30 से 7.15 बजे तक होगी। जबकि भस्म आरती, सांध्य पूजन और शयन आरती रात 10.30 बजे से 11 बजे तक में कोई बदलाव नहीं होगा।

ग्रोथ के बावजूद खतरे में है स्थिरता? विश्व बैंक ने क्यों जताया दक्षिण एशिया में मंदी का अंदेशा

नई दिल्ली  इस वर्ष दक्षिण एशिया में 6.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर का अनुमान है, लेकिन एक गंभीर मंदी का खतरा मंडरा रहा है. विश्व बैंक ने अपने वार्षिक क्षेत्रीय दृष्टिकोण में कहा है कि व्यापार में खुलेपन और प्रौद्योगिकी अपनाने को बढ़ावा देने वाले सुधारों से इस क्षेत्र में रोजगार सृजन और विकास को गति मिल सकती है. नवीनतम दक्षिण एशिया विकास अद्यतन, नौकरियां, एआई और व्यापार, अनुमान लगाता है कि 2026 में इस क्षेत्र की वृद्धि दर धीमी होकर 5.8 प्रतिशत हो जाएगी. इस ग्रोथ में अप्रैल के पूर्वानुमान से 0.6 प्रतिशत अंकों की कमी है. नकारात्मक जोखिमों में वैश्विक आर्थिक मंदी और व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता, क्षेत्र में सामाजिक-राजनीतिक अशांति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकी के कारण श्रम बाजार में व्यवधान शामिल हैं. भारत के मजबूत उपभोग वृद्धि, बेहतर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मजदूरी वृद्धि के बल पर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की उम्मीद है. हालांकि, वित्त वर्ष 2026/27 के पूर्वानुमान को आंशिक रूप से निर्यात पर उच्च शुल्कों के कारण घटा दिया गया है. दक्षिण एशिया पर अमेरिकी शुल्कों की घोषणा 2 अप्रैल को की गई थी, फिर विलंबित और समायोजित की गई, और अंततः अगस्त में लागू की गई. प्रकाशन की तिथि तक, ये अतिरिक्त शुल्क भारत पर 50 प्रतिशत हैं. कुछ श्रेणियों की वस्तुओं पर उत्पाद-विशिष्ट शुल्क लागू होते हैं, जो वर्तमान में आम तौर पर देश-विशिष्ट शुल्कों से कम होते हैं, लेकिन भविष्य में बढ़ सकते हैं. इन वस्तुओं में जेनेरिक फॉर्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं, जो दोनों ही भारत से अमेरिकी आयात का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. वर्ष की शुरुआत में शेयर बाजार के मूल्यांकन में संघर्ष हुआ, लेकिन हाल ही में इसमें तेजी आई है. दरों में कटौती और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच जून में भारत में शुद्ध विदेशी पोर्टफोलियो निवेश नकारात्मक हो गया. यह 7.8 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) हो गया. मजबूत निजी उपभोग और निवेश से विकास को समर्थन मिला और उम्मीद से कम कीमतों से भी इसमें तेजी आई. सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, मजबूत ऋण वृद्धि और ढीली मौद्रिक नीति के समर्थन से निवेश वृद्धि मजबूत बनी हुई है. मुद्रास्फीति के केंद्रीय बैंक के लक्ष्यों के भीतर या उसके अनुरूप बने रहने की उम्मीद है. कमजोर निर्यात संभावनाओं, बढ़ते विदेशी मुद्रा दबाव और सामाजिक अशांति के कारण क्रमशः भारत, मालदीव और नेपाल के लिए 2026 के विकास पूर्वानुमानों को घटा दिया गया है. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सरकार के सुधारों कर स्लैब की संख्या कम करना और अनुपालन को सरल बनाना से गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. दक्षिण एशिया में भारत का विकास   देश का वित्तीय वर्ष स्थिर बाजार मूल्यों पर वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि (प्रतिशत) 23/24 24/25(e) 25/26(f) 26/27(f) पूर्वानुमान में संशोधन (प्रतिशत अंक) 25/26(e) 26/27(f) अप्रैल से मार्च 9.2 6.5 6.5 6.3 +0.2 -0.2 (ई) = अनुमान; (एफ) = पूर्वानुमान. हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका को भारत के लगभग तीन-चौथाई वस्तु निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के परिणामस्वरूप, वित्त वर्ष 26/27 के लिए पूर्वानुमान घटा दिया गया है. अप्रैल में भारत को अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ सकता था, लेकिन अगस्त के अंत तक उसे काफी अधिक टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. साल 2024 में भारत के वस्तु निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा संयुक्त राज्य अमेरिका को जाएगा, जो सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 2 प्रतिशत के बराबर है. मध्यम अवधि में भारत के ऊर्जा मांग का दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता स्रोत बनने और 2050 तक चीन को पीछे छोड़कर ऊर्जा मांग का सबसे बड़ा स्रोत बनने की उम्मीद है. सार्वजनिक निवेश वृद्धि औसतन 10 प्रतिशत रही. भारत में सार्वजनिक निवेश को बनाए रखते हुए, केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय ने विश्व बैंक के 2025 के अनुमान के अनुसार कुल गतिविधियों में 3-4 गुना वृद्धि की. भारत में रोजगार बाजार: भारत में, एक ही राज्य के पड़ोसी जिलों के बीच औसत प्रवास, भाषाई अंतर को ध्यान में रखते हुए भी, राज्य की सीमा के दोनों ओर स्थित पड़ोसी जिलों के बीच प्रवास की तुलना में कम से कम 50 प्रतिशत अधिक है. बांग्लादेश में, ग्रामीण रोजगार चाहने वाले लोग ढाका में उच्च उत्पादकता वाले कामों के लिए बड़े पैमाने पर पलायन करते हैं, लेकिन शहर बढ़ती भीड़भाड़ से जूझ रहा है. भारत का गैर-कृषि श्रम बाजार, जो 2023 में सफ़ेदपोश सेवाओं पर काफी हद तक निर्भर करता है, भारत में आईसीटी-बीपीएम बाजार ने 54 लाख रोजगार पैदा किए और सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 प्रतिशत का योगदान दिया. भारत और नेपाल, जहां कृषि क्षेत्र में बड़ी संख्या में कार्यबल और निम्न औसत कौशल स्तर हैं, इस क्षेत्र में सबसे कम रोजगार का रिकॉर्ड रखते हैं. दक्षिण एशिया में, भारत उन रोज़गार के अवसरों के मामले में सबसे ऊपर है जो पूरक हैं, जबकि श्रीलंका सबसे नीचे है. भारत में नौकरी बाजार: भारत में, भाषाई अंतर को ध्यान में रखते हुए भी, एक ही राज्य के पड़ोसी जिलों के बीच औसत प्रवास राज्य की सीमा के विभिन्न किनारों पर पड़ोसी जिलों की तुलना में कम से कम 50 प्रतिशत अधिक है. बांग्लादेश में, ग्रामीण नौकरी चाहने वाले बड़ी संख्या में ढाका में उच्च-उत्पादकता वाले काम की ओर पलायन करते हैं, लेकिन शहर बढ़ती भीड़भाड़ से जूझ रहा है. भारत का गैर-कृषि श्रम बाजार 2023 में सफेदपोश सेवाओं के काम पर बहुत अधिक निर्भर करता है, भारत में आईसीटी-बीपीएम बाजार ने 5.4 मिलियन नौकरियां पैदा कीं और सकल घरेलू उत्पाद में 7.5 प्रतिशत का योगदान दिया. भारत और नेपाल, जो कम औसत कौशल स्तर के साथ बड़े कृषि कार्यबल को जोड़ते हैं, इस क्षेत्र का सबसे कम जोखिम दर्ज करते हैं। दक्षिण एशिया में, पूरक नौकरियों के मामले में भारत सर्वोच्च स्थान पर है, जबकि श्रीलंका सबसे निचले स्थान पर है. भारत में रोजगार बाजार: भारत में, एक ही राज्य के पड़ोसी पर्यटकों के बीच औसत यात्रा हुई, भाषाई अंतर को ध्यान में रखते हुए भी, राज्य की सीमा के दोनों ओर स्थित पड़ोसी पर्यटकों के बीच यात्रा की तुलना में कम से कम 50 प्रतिशत अधिक है. बांग्लादेश में, ग्रामीण मजदूर सामान्य वाले लोग ढेका में उच्च श्रेणी वाले नौकरानियों के … Read more

दिवाली की तिथि को लेकर कंफ्यूजन खत्म! 2025 में किस दिन मनेगी रौशनी की ये रात?

एक बार फिर सनातन पर्व दीपावली की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है. कुछ ज्योतिषी 20 अक्टूबर को तो कुछ 21 अक्टूबर 2025 को दीपावली मनाने की सलाह दे रहे हैं. इस असमंजस के बीच काशी विद्वत परिषद, जो देश के प्रमुख विद्वानों का संगठन है, ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष दीपावली 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) को ही मनाई जाएगी. किस दिन मनाया जाएगा दीपावली का पर्व? परिषद ने इस विषय पर एक विशेष बैठक आयोजित की, जिसमें दीपावली से संबंधित तिथि निर्धारण पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. धर्मशास्त्रीय व्यवस्था और शास्त्र सम्मत गणना के अनुसार यह निष्कर्ष निकला कि पूर्ण प्रदोष काल व्यापिनी तिथि 20 अक्टूबर को ही प्राप्त हो रही है. वहीं, 21 अक्टूबर को तीन प्रहर से अधिक अमावस्या और साढ़े तीन प्रहर से अधिक वृद्धि गामिनी प्रतिपदा होने के कारण नक्त व्रत पारण का काल (जो लक्ष्मी पूजन का आवश्यक अंग है) उस दिन उपलब्ध नहीं हो रहा है. इसी कारण परिषद ने सर्वसम्मति से 20 अक्टूबर को ही दीपावली पर्व मनाने का निर्णय लिया. साल 2024 में भी बना था ऐसा संयोग काशी विद्वत परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि सनातन धर्म में व्रत-त्योहारों की तिथि निर्धारण की प्रक्रिया गणितीय गणना और धर्मशास्त्रीय नियमों पर आधारित होती है. लेकिन कभी-कभी गणितीय भिन्नता या किसी एक मत के कारण व्रत-पर्वों की तिथियों में अंतर दिखने लगता है. ऐसी ही स्थिति साल 2024 में भी बनी थी, जिसका निर्णय परिषद ने शास्त्र सम्मत रूप से किया था और पूरे देश ने उसी के अनुसार दीपावली मनाई थी. इस बार भी कुछ पंचांगों में 20 अक्टूबर तो कुछ में 21 अक्टूबर को दीपावली लिखे जाने के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है. इस पर परिषद के धर्मशास्त्र एवं ज्योतिष प्रकोष्ठ की ऑनलाइन बैठक 4 अक्टूबर 2025 को परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. रामचंद्र पांडेय की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक में उपस्थित सभी विद्वानों ने शास्त्रीय आधार पर बताया की कि 20 अक्टूबर 2025 को ही दीपावली मनाई जानी चाहिए, क्योंकि उस दिन ही लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोषकाल का संयोग बन रहा है. अंत में परिषद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ''सभी सनातन धर्मावलंबियों को शास्त्रवचनों का पालन करते हुए एक मत से 20 अक्टूबर 2025 को ही दीपावली मनानी चाहिए.'' दिवाली का शुभ मुहूर्त  ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस साल 20 अक्टूबर को ही दिवाली मनाई जाएगी. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अमावस्या तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 21 अक्टूबर की रात 9 बजकर 03 मिनट पर होगा.  दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन का सबसे शुभ समय शाम 7 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. इस अवधि को प्रदोष काल और स्थिर लग्न का संयोग कहा गया है, जो मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम माना जा रहा है. यानी लोगों को पूजा के लिए करीब 1 घंटा 11 मिनट का समय मिलेगा.