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Aastha Pandey

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उत्तराखंड में UKMSSB ने निकाली नर्सिंग अधिकारी भर्ती: 587 पदों के लिए 2025 में अवसर

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उत्तराखंड मेडिकल सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड (UKMSSB) ने 2025 में बड़ी भर्ती का ऐलान किया है, जिसके तहत कुल 587 नर्सिंग ऑफिसर (Nursing Officer) पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक शानदार अवसर है। आवेदन प्रक्रिया 27 नवंबर 2025 से शुरू होकर 17 दिसंबर 2025 शाम 5 बजे तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह लिखित परीक्षा के आधार पर होगी, जिसमें उम्मीदवारों की नर्सिंग से संबंधित ज्ञान, दक्षता और व्यवहारिक समझ का आकलन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को वेतन स्तर-7 के अनुसार ₹44,900 से ₹1,42,400 प्रतिमाह का आकर्षक वेतनमान प्राप्त होगा, जो इस पद को और भी प्रतिष्ठित बनाता है। इन पदों के लिए आवेदकों के पास ब्रिटिश नर्सिंग काउंसिल, भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) या संबंधित राज्य नर्सिंग परिषद से मान्यता प्राप्त डिग्री/डिप्लोमा होना आवश्यक है। UKMSSB की यह भर्ती नर्सिंग क्षेत्र में युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक सरकारी नौकरी का मौका प्रदान करती है। उदेश्य उत्तराखंड मेडिकल सेवा चयन बोर्ड (UKMSSB) ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती 2025 की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती में कुल 587 रिक्तियां हैं, जिसमें पुरुष और महिला दोनों नर्सिंग अधिकारी के पद शामिल हैं। यह भर्ती राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, हल्द्वानी में है। वेतन और ग्रेड चयनित अभ्यर्थियों को लेवल-7 पगार संरचना के अंतर्गत वेतन मिलेगा, जो ₹44,900 से ₹1,42,400 प्रतिमाह के बीच है। इसका मतलब यह है कि यह नौकरी नर्सिंग पेशेवरों के लिए आकर्षक स्थिरता और भविष्य की संभावनाओं वाला सरकारी पद ह पदों का विभाजन नर्सिंग अधिकारी (महिला) – डिप्लोमा धारक: 336 पद नर्सिंग अधिकारी (महिला) – डिग्री धारक: 144 पद नर्सिंग अधिकारी (पुरुष) – डिप्लोमा धारक: 75 पद नर्सिंग अधिकारी (पुरुष) – डिग्री धारक: 32 पद समुदायवार आरक्षण भी है: SC, ST, OBC, EWS और सामान्य वर्ग के लिए अलग-अलग स्थान आरक्षित हैं। कुल मिलाकर 118 SC, 21 ST, 82 OBC, 58 EWS और 308 सामान्य (अनारक्षित) पद हैं। शैक्षणिक योग्यता B.Sc (Hons) Nursing, या B.Sc Nursing, या Post-Basic B.Sc Nursing, या GNM (General Nursing & Midwifery) डिप्लोमा। इसके अलावा, उम्मीदवारों को नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण होना चाहिए (भारतीय या राज्य नर्सिंग-काउंसिल)। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि हिंदी भाषा का कामकाजी ज्ञान होना भी जरूरी है। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 21 वर्ष अधिकतम आयु: 42 वर्ष, जैसा कि अधिसूचना में दिया गया है। विशेष वर्ग (आरक्षित श्रेणियों) को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया चयन लिखित परीक्षा के आधार पर किया जाएगा। परीक्षा में दो पेपर हो सकते हैं: नर्सिंग विषय (100 अंकों) सामान्य हिंदी, सामान्य ज्ञान, सामान्य अध्ययन (100 अंकों) — हालांकि कुछ स्रोत स्पष्ट रूप से यह विवरण नहीं दे रहे हैं। परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग की जानकारी भी दी गई है: गलत उत्तर पर एक-चौथाई अंक काटे जाएंगे। इसके बाद, सफल अभ्यर्थियों को दस्तावेज़ सत्यापन और मेडिकल परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है। कैसे आवेदन करें — स्टेप-बाय-स्टेप फॉर्म जमा करने के बाद कॉन्फ़र्मेशन पेज डाउनलोड/प्रिंट करना न भूलें। UKMSSB की आधिकारिक वेबसाइट (ukmssb.org) पर जाएँ। “Recruitment” सेक्शन में “Nursing Officer Recruitment 2025” लिंक चुनें। “Apply Online” बटन क्लिक करें — यह 27 नवंबर 2025 से सक्रिय होगा। पंजीकरण के लिए अपना ई-मेल और मोबाइल नंबर दर्ज करें, और ओटीपी के ज़रिए वेरिफाई करें। अपना शैक्षणिक, व्यक्तिगत और कैटेगरी विवरण सावधानी से भरें। सभी ज़रूरी दस्तावेज (जैसे Marksheet, पंजीकरण प्रमाणपत्र) स्कैन करके अपलोड करें। आवेदन शुल्क का भुगतान करें (यदि लागू हो)। FAQs Q1. UKMSSB नर्सिंग अधिकारी भर्ती 2025 में आवेदन करने के लिए कौन-सी शैक्षणिक योग्यता चाहिए?उत्तर: उम्मीदवार के पास B.Sc Nursing (General / Hons) या Post-Basic B.Sc Nursing या GNM डिप्लोमा होना चाहिए। इसके साथ-साथ नर्सिंग काउंसिल (भारतीय नर्सिंग परिषद या राज्य नर्सिंग परिषद) में पंजीकरण अनिवार्य है। Q2. आवेदन के लिए अंतिम तिथि कब है और आवेदन कैसे करना होगा?आवेदन ऑनलाइन किया जाना है और प्रक्रिया 27 नवंबर 2025 से शुरू होगी। उम्मीदवार 17 दिसंबर 2025 शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। Q3. चयन प्रक्रिया क्या है और लिखित परीक्षा के बाद क्या कदम होंगे?चयन पूरी तरह लिखित परीक्षा पर आधारित है। उसके बाद दस्तावेज़ सत्यापन किया जाएगा। मेरिट लिस्ट केवल लिखित परीक्षा के अंक के आधार पर तैयार की जाएगी।

टालमटोल की आदत कैसे छोड़ें: आसान Time Management Techniques जो हर स्टूडेंट को जाननी चाहिए

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क्या आप भी पढ़ाई या किसी जरूरी काम को बार-बार बाद में करने की सोचकर छोड़ देते हैं? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं, क्योंकि आज की तेज़ लाइफ में टालमटोल की आदत हर उम्र के लोगों में आम होती जा रही है। कई बार हम काम को इसलिए शुरू नहीं करते क्योंकि वह हमें कठिन लगता है, तो कभी इसलिए क्योंकि दिमाग एक बड़ा टास्क सोचकर डर जाता है। धीरे-धीरे यही आदत हमारी पढ़ाई, काम और प्रोडक्टिविटी को नुकसान पहुँचाती है।तो आइए जानें कि कैसे छोटी-छोटी टेक्निक्स आपकी बड़ी मुश्किल को आसान बना सकती हैं। टालमटोल की आदत क्यों होती है? हम में से कई लोग अक्सर पढ़ाई या किसी जरूरी काम को कल पर टाल देते हैं, और फिर वही आदत धीरे-धीरे हमारे रूटीन का हिस्सा बन जाती है। मैं खुद भी यह आदत लेकर संघर्ष करता था, और सोचता था कि शायद मेरे जैसे और भी होंगे। रिसर्च बताती है कि लोग अक्सर किसी काम के बड़े या मुश्किल दिखने के कारण उसे टालने लगते हैं। एक स्टडी के अनुसार, लगभग 20–25% युवा रोज़ाना टालमटोल की समस्या का सामना करते हैं (American Psychological Association Research)। इसीलिए, यह समझना ज़रूरी है कि सही तकनीकें अपनाकर इस आदत को आसानी से बदला जा सकता है। टाइम मैनेजमेंट के Easy और Effective तरीके नीचे दिए गए सभी तरीके ऐसे हैं, जिन्हें स्टूडेंट्स और वर्किंग लोग आसानी से अपना सकते हैं। मैंने पहली बार यह तकनीक एक स्टडी में पढ़ी, जहाँ बताया गया कि दिमाग छोटे टास्क जल्दी स्वीकार करता है।इसमें आप बस पांच मिनट तक काम शुरू करते हैं और फिर आगे बढ़ने का निर्णय लेते हैं।आप महसूस करेंगे कि शुरुआत करने के बाद काम पहले जैसा भारी नहीं लगता।यह तकनीक टालमटोल तोड़ने का सबसे आसान और पहला कदम माना जाता है।बड़े टास्क को छोटे हिस्सों में करने से मन हल्का और फोकस बेहतर होता है। टाइम मैनेजमेंट की दुनिया में यह तकनीक सबसे लोकप्रिय मानी जाती है।इसमें 25 मिनट पढ़ाई या काम और 5 मिनट का छोटा ब्रेक शामिल होता है।चार राउंड पूरे करने के बाद 15–20 मिनट का बड़ा ब्रेक लिया जाता है।यह तकनीक दिमाग को फ्रेश रखती है और फोकस को लंबे समय तक बनाए रखती है।कई रिसर्च बताती हैं कि छोटे ब्रेक लेने से मानसिक थकान कम हो जाती है। ये खबर भी पढ़े…इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड कुछ लोगों को पढ़ाई के दौरान बैकग्राउंड म्यूजिक से बेहतर फोकस मिलता है।आप धीमी पियानो धुन, लो-फाई म्यूजिक या ध्यान वाला म्यूजिक चुन सकते हैं।साइकोलॉजी रिसर्च में बताया गया है कि सही आवाज़ें दिमाग को शांत बनाती हैं।साउंड ट्रिगर आपके दिमाग को संकेत देती है कि अब काम शुरू करने का समय है।यह तरीका उन छात्रों के लिए अच्छा है जिन्हें शुरू करने में दिक्कत होती है। ये खबर भी पढ़े…प्रधानमंत्री (PM) का पर्सनल सेक्रेटरी कैसे चुना जाता है – जाने पूरी डिटैल्स यह तकनीक आपको सीमित समय में काम खत्म करने का अभ्यास सिखाती है।आप 30 मिनट, 45 मिनट या जितना सही लगे, उतना समय सेट कर सकते हैं।समय पूरा होने पर छोटा ब्रेक लें और फिर दोबारा सेट करें।इससे दिमाग टाइम-लिमिट का आदी हो जाता है और आलस कम होता है।टास्क का स्ट्रक्चर साफ होने से टालमटोल जल्दी कम होने लगता है। ये खबर भी पढ़े…Lekhpal Recruitment : PET रिजल्ट जारी होते ही 7,994 पदों पर होगी सीधी भर्ती यह तरीका दिमाग में जमा भारी आइडियाज को हल्का बनाने में मदद करता है।स्टूडेंट्स के लिए यह तकनीक बहुत उपयोगी मानी जाती है।बस एक कागज लें और बिना सोचे सभी आइडियाज या स्टेप्स लिख दें।लिखने से काम स्पष्ट दिखने लगता है और डर कम हो जाता है।बहुत सी स्टडीज बताती हैं कि लिखने से दिमाग सक्रिय हो जाता है। कई बार समस्या यह होती है कि हम खुद को समय तय नहीं करते।डिजिटल कैलेंडर या रिमाइंडर ऐप्स इस स्थिति में बेहद उपयोगी होते हैं।आप अपने सभी टास्क और डेडलाइंस पहले से सेट कर सकते हैं।जब समय आता है, नोटिफिकेशन आपको काम शुरू करने के लिए तैयार करता है।इससे रूटीन मजबूत बनता है और टालमटोल खुद-ब-खुद कम होने लगता है। यह तरीका बड़े कामों को छोटे, मैनेजेबल ब्लॉक्स में बदल देता है।आप एक घंटे का ब्लॉक बनाएँ और पूरा समय ध्यान से काम करें।ब्लॉक पूरा होने पर खुद को छोटा इनाम दें, जैसे 5 मिनट आराम।इससे मोटिवेशन बढ़ता है और बड़ा काम छोटा लगता है।लंबे समय तक पढ़ाई करने वालों के लिए यह तरीका बेहद प्रभावी है। कई लोग डर के कारण काम शुरू ही नहीं कर पाते।इस तकनीक में आप काम का सिर्फ 5-सेकंड वाला छोटा हिस्सा कल्पना करते हैं।जैसे अगर 10 पेज लिखने हैं, तो बस पहला वाक्य सोचें।इससे दिमाग को लगेगा कि काम आसान है और शुरुआत सहज हो जाएगी।यह तरीका छोटे कदमों से बड़े कामों तक पहुँचने में मदद करता है। निष्कर्ष टालमटोल की आदत कोई बड़ी समस्या नहीं, बस सही तकनीक की कमी होती है।इन सभी टाइम मैनेजमेंट तरीकों को धीरे-धीरे अपनाकर आप अपनी पढ़ाई सुधार सकते हैं।रूटीन, मनःस्थिति और फोकस बदलने से टालमटोल अपने आप खत्म होने लगता है।हर तकनीक दिमाग को नया तरीका देती है और काम आसान बनाती है।नियमित अभ्यास से आपकी प्रोडक्टिविटी तेजी से बढ़ती दिखाई देगी। FAQs टालमटोल खत्म करने के लिए छोटे-छोटे स्टेप्स से शुरुआत करें।5 मिनट रूल, पॉमोडोरो और साउंड ट्रिगर जैसी तकनीकें तुरंत असर देती हैं।नियमित रूटीन और समय सीमाएँ दिमाग को अनुशासित बनाती हैं। सबसे आसान तरीका पॉमोडोरो तकनीक और 5-मिनट रूल माने जाते हैं।इनसे काम छोटा हो जाता है और मन तुरंत शुरू करने लगता है।स्टूडेंट्स और वर्किंग लोग दोनों इसे आसानी से अपना सकते हैं। साउंड ट्रिगर म्यूजिक, ब्लॉक टाइम और स्क्रैच पेपर बहुत मदद करते हैं।कमरा शांत रखें और मोबाइल नोटिफिकेशन बंद कर दें।स्पष्ट टाइमटेबल दिमाग को फोकस करने में जल्दी मदद करता है। American Psychological Association – Research on Procrastination University of Cambridge – Productivity Psychology Studies University of Cambridge – Productivity Psychology Studies Harvard Business Review – Time Management Techniques

इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड

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मैकिंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की “Skill Shift” रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक सोशल और इमोशनल स्किल्स की मांग 22-26% बढ़ेगी। यह बदलाव इसलिए हो रहा है क्योंकि ऑटोमेशन और एआई मशीनों से इंसानी समझ और इंपैथी उसकी जगह नहीं ले सकते। आज के कॉर्पोरेट वर्कप्लेस में दिल की ताकत (इमोशनल इंटेलिजेंस) ही नई सुपरपावर बन रही है। ग्लोबल वर्कप्लेस में बड़ा बदलाव आज की कॉर्पोरेट दुनिया एक गहरा ट्रांसफॉर्मेशन देख रही है। पहले जॉब में टेक्निकल स्किल्स और इंटेलिजेंस (IQ) को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाता था। लेकिन अब कंपनियां महसूस कर रही हैं कि इमोशनल स्टैमिना — यानी दबाव में शांत रहने, दूसरों को समझने और टीम को एक साथ बांधे रखने की क्षमता — भविष्य में सफलता की बड़ी कुंजी है। यह सिर्फ कंपनियों की भावना नहीं है, बल्कि मैकिंज़ी ग्लोबल इंस्टीट्यूट (MGI) की रिपोर्ट “Skill Shift: Automation and the Future of the Workforce” में यह साफ-साफ दिखाया गया है। ये खबर भी पढ़े…प्रधानमंत्री (PM) का पर्सनल सेक्रेटरी कैसे चुना जाता है – जाने पूरी डिटैल्स मैकिंजी रिपोर्ट की बड़ी बातें ये खबर भी पढ़े… क्यों बढ़ रही है इमोशनल स्किल की जरूरत? एआई और ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहे हैं, और मशीनें बहुत सारे रिपीटेबल काम बेहतरीन तरीके से कर सकती हैं। लेकिन इंसानी संवाद, संकट-सम्भालन, भरोसा बनाने और टीम बॉन्डिंग की भूमिका अभी भी मानव ही निभा सकते हैं। इसलिए कंपनियों ने यह समझा है कि सिर्फ तकनीक नहीं, मानवता ही आगे चलने वाला “स्किल” है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एंटरप्रेन्योरशिप (पहल करना), इनिशिएटिव लेने की क्षमता बढ़ेगी और लीडरशिप की मांग में इजाफा होगा। ये खबर भी पढ़े…Lekhpal Recruitment : PET रिजल्ट जारी होते ही 7,994 पदों पर होगी सीधी भर्ती बिजनेस स्कूल और मैनेजर ट्रेनिंग में बदलाव विश्व-स्तर की बड़ी कंपनियाँ जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, डेलॉइट और कई बिज़नेस स्कूल अब मैनेजर्स की ट्रेनिंग में इमोशनल इंटेलिजेंस (EI) को टॉप प्रायरिटी दे रही हैं। उनके मुताबिक, मशीनें काम तो कर सकती हैं, लेकिन काम को इंसानी मायना देना इंसान ही कर सकता है। मैनेजर्स को इसलिए सिखाया जा रहा है कि वे टीम में इम्पैथी कैसे लाएं, आपस में भरोसा कैसे बनाएँ और तनावपूर्ण स्थितियों में भी स्थिरता बनाए रखें। यह सिर्फ करियर की रणनीति नहीं — यह नई मानव-केंद्रित सुपरपावर बन रही है। ये खबर भी पढ़े…WhatsApp का सबसे बड़ा डेटा लीक: Meta की चूक ने 3.5 अरब यूज़र्स को खतरे में डाला, करें ये उपाय इमोशनल इंटेलिजेंस का असर कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि लोगों की इमोशनल बुद्धिमत्ता (emotional intelligence) का सीधा असर होता है टीम के प्रदर्शन, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व पर। जब टीम में कोई कठिन परिस्थिति आए, तो जिन लोगों में ज़्यादा इमोशनल स्किल होती है, वे टीम को बेहतर तरीके से मैनेज करते हैं और टीम को टूटने से बचाते हैं एचआर का नजरिया — अब सिर्फ रेजूमे नहीं, दिल देखना भी ज़रूरी आज की HR टीम सिर्फ उम्मीदवार की टेक्निकल स्किल या रेज़्यूमे को नहीं देख रही है। बल्कि उनकी भावनात्मक स्थिरता, कोलैबोरेशन की भावना और मानसिक लचीलापन भी देख रही है। इंटरव्यू में सवाल बदल गए हैं: इन्हीं सवालों से देखा जा रहा है कि उम्मीदवार सिर्फ “काम कर सकता है” इस योग्य नहीं है, बल्कि “इंसानों के बीच काम कर सकता है” — यह बहुत मायने रखता है। FAQs Q1: मैकिंज़ी की रिपोर्ट में “सोशल और इमोशनल स्किल्स” से क्या मतलब है?A1: मैकिंज़ी रिपोर्ट में “सोशल और इमोशनल स्किल्स” से वह क्षमताएँ हैं जैसे — इम्पैथी, अन्य लोगों के साथ संवाद, नेतृत्व, टीम मैनेजमेंट, सहयोग और भावनात्मक लचीलापन। ये स्किल्स मशीनों द्वारा आसानी से नकल नहीं की जा सकतीं। Q2: 2030 तक सोशल-इमोशनल स्किल्स की मांग क्यों बढ़ेगी?A2: क्योंकि ऑटोमेशन और एआई मशीनें कई रिपीटेबल और डेटा-संबंधित काम कर सकती हैं, लेकिन इंसानी भावनाओं, संवादों और संकट-प्रबंधन की जरूरत बनी रहेगी। मैकिंज़ी का अनुमान है कि 2016-2030 के बीच तकनीकी बदलावों के कारण सभी इंडस्ट्रीज़ में इन स्किल्स की मांग करीब 22-26% तक बढ़ेगी। Q3: अगर मैं करियर की शुरुआत कर रहा हूँ, तो मुझे इमोशनल स्किल्स कैसे सुधारनी चाहिए?A3: आप कई तरीके अपना सकते हैं: