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Aastha Pandey

Writer News & Blogger

New labor codes implemented: श्रमिकों के लिए ऐतिहासिक बदलाव

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भारत में 21 नवंबर 2025 से चार नए लेबर कोड लागू हुए — न्यूनतम सैलरी , सोशल सिक्योरिटी , गिग वर्कर्स को कानूनी पहचान। नई दिल्ली, जेएनएन। सरकार ने देश के सभी लेबर और एम्प्लाइज के लिए एक बड़ा फैसला करते हुए शुक्रवार से चार नए लेबर कोड लागू किए हैं।  पहले के 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को अब 4 लेबर कोड में बदला गया है। नए नियमों का मकसद हर कामगार को समय पर और ओवरटाइम वेतन, न्यूनतम मजदूरी, महिलाओं को बराबर मौका और सैलरी, सोशल सिक्योरिटी, फ्री हेल्थ चेकअप देना है। नए कानून से कर्मचारी को 5 की जगह उदेश्य भारत सरकार ने 21 नवंबर 2025 को चार नई श्रम संहिताएँ (लेबर कोड) लागू कर दी हैं। ये कोड पुराने और बिखरे हुए 29 श्रम कानूनों को एक सरल, आधुनिक और एकीकृत ढाँचे में बदलते हैं। इन बदलावों को सरकार ने “श्रमिक-केंद्रित सबसे बड़े सुधारों में से एक” करार दिया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने श्रमिकों को नई श्रम संहिताओं के देशभर में लागू होने पर हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि ये परिवर्तन न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और कामगारों की गरिमा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे ऐतिहासिक दिन बताया है। उन्होंने कहा: “Shramev Jayate!” — आज इस सुधार के साथ भारत की मजदूर नीति एक नए युग में प्रवेश कर रही है। ये खबर भी पढ़े…Launch of the book ‘Modi’s Mission’: एक विचार की कहानी नए कोड: क्या-क्या बदल रहा है? चार लेबर कोड – एक नई नींव वेज कोड (Code on Wages, 2019): न्यूनतम वेतन की कानूनी गारंटी, समय पर भुगतान अनिवार्य। औद्योगिक संबंध कोड (Industrial Relations Code, 2020): श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच संबंधों को व्यवस्थित करने के नए नियम सामाजिक सुरक्षा कोड (Code on Social Security, 2020): गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवर मिलेगा। OSHWC कोड (Occupational Safety, Health & Working Conditions, 2020): काम-गारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और वार्षिक चेकअप जैसे प्रावधान शामिल हैं। श्रमिकों को मिलेंगे ये फायदे अपॉइंटमेंट लेटर: हर श्रमिक को नियुक्ति-पत्र अनिवार्य मिलेगा, जिसमें पोस्ट, वेतन और सुरक्षा सुविधाओं का जिक्र होगा।  फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी: अब स्थायी कर्मचारियों के बराबर लाभ — छुट्टियां, मेडिकल, सामाजिक सुरक्षा आदि। ग्रेच्युटी पाने के लिए सिर्फ एक साल की सेवा होगी जरूरी। 1.न्यूनतम वेतन: सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन लागू होगा। 2.ओवरटाइम: तय समय के बाद अतिरिक्त घंटे काम करने पर दोगुना भुगतान देना होगा। 3.स्वास्थ्य सुरक्षा: 40 वर्ष से ऊपर के श्रमिकों को मुफ्त वार्षिक हेल्थ चेकअप। 4.महिला कामगारों के अधिकार: समान वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, और रात की पाली में काम करने की अनुमति (सुरक्षा के साथ और उनकी सहमति पर)। 4.गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स: पहली बार कानूनी परिभाषा; एग्रीगेटर कंपनियों को 1-2% सालाना कारोबार सामाजिक सुरक्षा फंड में देना होगा। 5.लचीला लाइसेंसिंग और नियम: नियोक्ताओं के लिए पैन-इंडिया लाइसेंस, एकल पंजीकरण, एकल सालाना रिटर्न जैसी व्यवस्थाएँ। ये खबर भी पढ़े…IED Practice: CISF को विस्फोट कवच में तीसरा स्थान, शीर्ष तीन में पहुंचने वाला एकमात्र CAPF वास्तविकता और चुनौतियाँ ट्रेड यूनियनों ने कुछ प्रावधानों पर चिंता जताई है। वे कहती हैं कि छंटनी (रिट्रेंचमेंट) के नियम अस्पष्ट हैं और केंद्र-राज्य स्तर पर मनमानी हो सकती है। कुछ छोटे व्यवसायों को डर है कि ओवरटाइम दोगुना देने और बेसिक वेतन बढ़ाने से उनकी लागत बहुत बढ़ेगी। सभी राज्यों ने अभी तक नए कोड के लिए नियम नहीं तैयार किए हैं। उदाहरण के लिए, PIB की रिपोर्ट के अनुसार 32 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने मसौदा नियम जारी किए, लेकिन कुछ अभी पीछे हैं। क्यों है यह सुधार इतना महत्वपूर्ण? यह कदम इसलिए भी बड़ा है क्योंकि लगभग 29 पुराने कानून (1930-1950 के दशक के) को नई, साफ़ और आधुनिक व्यवस्था से बदल रहा है। गिग-इकॉनॉमी, प्लेटफॉर्म काम, छोटे उद्योग और असंगठित श्रमिक – ये सभी अब पहले से अधिक संरक्षित होंगे। सरकार का कहना है कि यह भारत को विकसित, आत्मनिर्भर और भविष्य-तैयार राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये खबर भी पढ़े…IFFI Award 2025: 20 नवंबर से शुरू, अभिनेता रजनीकांत को 50 साल के कैरियर पर सम्मान निष्कर्ष इन चार नए लेबर कोड्स के लागू होने से भारत के श्रमिकों को बचपन की पुरानी अपेक्षाएँ अब हकीकत में बदलने का मौका मिलेगा। नियुक्ति पत्र से रोज़गार की गारंटी होगी, न्यूनतम वेतन का अधिकार मिलेगा, और गिग वर्कर्स जैसी अस्थिर श्रेणियाँ अब सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में आएंगी। यह पूरी दिशा “श्रमिक-पहचान, सम्मान और सुरक्षा” की ओर इंगित करती है। हालाँकि, चुनौतियाँ भी हैं – पूरी नीतियों को लागू करना, राज्यों को नियम बनाना, और निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करना। ये कदम तभी सफल होंगे जब केंद्र और राज्य मिलकर पारदर्शी और जवाबदेह क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। FAQs प्रश्न 1: नई श्रम संहिताओं का मुख्य उद्देश्य क्या है? नई चार लेबर कोड्स का मकसद पुराने, बिखरे और जटिल श्रम कानूनों को सरल और आधुनिक बनाना है। इनको लागू करके सरकार श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन, समय पर भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करना चाहती है। प्रश्न 2: क्या गिग वर्कर्स (जैसे फूड डिलीवरी, प्लेटफॉर्म कर्मचारी) इन नए कोड्स के तहत आ जाते हैं? हाँ। नए कोड्स में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की कानूनी पहचान दी गई है। उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजना (PF, बीमा, पेंशन आदि) का दायरा मिलेगा। एग्रीगेटर कंपनियों को उनके लिए सालाना 1-2% कारोबार सामाजिक सुरक्षा फंड में जमा करना होगा। प्रश्न 3: महिला श्रमिकों के लिए नए कोड्स में क्या-क्या बदलाव हैं? महिला श्रमिकों को समान वेतन (equal pay for equal work) का अधिकार मिला है। साथ ही, उन्हें रात की पाली में काम करने की अनुमति है, बशर्ते सुरक्षा उपाय हों और उनकी सहमति हो। मातृत्व अवकाश 26 सप्ताह तक बढ़ाया गया है और शिकायत निवारण समितियों में महिला प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया है।

इतिहास की किताबों में बदलाव: अकबर-टीपू के आगे ‘महान’ हटाया, RSS नेता का दावा

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महाराष्ट्र के नागपुर शहर में आयोजित ऑरेंज सिटी लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इतिहास की किताबों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि NCERT ने इतिहास को अधिक संतुलित और तथ्याधारित स्वरूप देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठाया है। उनके अनुसार, अब नई इतिहास पुस्तकों में अकबर और टीपू सुल्तान के आगे ‘महान’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, क्योंकि इतिहास का मूल्यांकन अब घटनाओं और प्रमाणों के आधार पर किया जा रहा है। NCERT ने किए 11वीं तक के सिलेबस में चेंज अपने संबोधन में आंबेकर ने बताया कि NCERT ने कुल 15 किताबों में से 11 कक्षाओं की किताबों में इम्पोर्टेन्ट अमेंडमेंटस कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में भी बदलाव अगले साल लागू किए जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि किताबों से किसी का नाम हटाया नहीं गया है। “हमारे इतिहास के कठोर सच भी बच्चों को जानने चाहिए” उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को यह समझना जरूरी है कि इतिहास में कौन-सी घटनाएं लोगों के लिए पीड़ा का कारण बनीं, और किन कारणों से समाज को संघर्ष करना पड़ा। इसलिए किसी चरित्र को हटाने के बजाय उनके कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण जरूरी है। ये खबर भी पढ़े…भारत के ‘आधार’ की तर्ज पर ब्रिटेन लाएगा नया ID कार्ड सिस्टम, क्या है पीएम स्टारमर का प्लान? क्यों हटाया गया ‘महान’ शब्द? आंबेकर का कहना था कि ‘महान’ शब्द किसी ऐतिहासिक चरित्र को एकतरफा रूप से महिमामंडित कर देता है, जबकि इतिहास का उद्देश्य संतुलित दृष्टिकोण देना है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास बहुत बड़ा है और इसे दुनिया को देने से पहले हमें स्वयं उस ज्ञान को समझने की आवश्यकता है।पुरानी किताबों की भाषा पर उठे थे सवाल कई इतिहासकार और शिक्षाविद लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि इतिहास पुस्तकों में इस्तेमाल शब्दों को तटस्थ बनाया जाए। इसी कारण NCERT ने अध्यायों की भाषा को सरल और तथ्यपरक बनाने पर काम किया। ये खबर भी पढ़े…हिंद-प्रशांत में नहीं चलेगी चीन की चालबाज़ी, भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 3 बड़ी रक्षा संधियाँ नालंदा यूनिवर्सिटी पर भी बोले RSS नेता अपने भाषण में उन्होंने नालंदा यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए बताया कि यह केवल धार्मिक शिक्षा का केंद्र नहीं थी। नालंदा में 76 स्किल-बेस्ड कोर्स पढ़ाए जाते थे। उनके अनुसार, नालंदा में 76 प्रकार के कौशल कोर्स पढ़ाए जाते थे, जिनमें— अर्बन प्लानिंग खेती की तकनीक शासन व्यवस्था मेकअप और आर्ट सीक्रेट एजेंट ट्रेनिंग मैकेनाइजेशन जैसे विषय शामिल थे।उन्होंने कहा कि भारत का यह प्राचीन ज्ञान आज भी आधुनिक समाज के लिए उदाहरण बन सकता है। ये खबर भी पढ़े…हंगरी के लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को मिला ये सम्मान, नोबेल पुरस्कार 2025 का हुआ ऐलान भारत विकास की राह पर, लेकिन संतुलन जरूरी अंत में आंबेकर ने कहा कि भारत तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन दुनिया के कई देशों ने विकास के दौरान अपनी संस्कृति व पारिवारिक मूल्यों के साथ समझौता कर दिया था। उन्होंने सलाह दी कि भारत को इस दिशा में सावधान रहना होगा और विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना होगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इतिहास और ज्ञान पर आधारित शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वह समझ सके कि भारत कहाँ से गुजरा है और भविष्य में उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है। FAQs Q1. क्या NCERT ने अकबर और टीपू सुल्तान को इतिहास की किताबों से हटा दिया है। नहीं, NCERT ने उन्हें किताबों से नहीं हटाया है। केवल उनके नाम के आगे लगे ‘महान’ शब्द को हटाने का निर्णय लिया गया है ताकि इतिहास को अधिक तटस्थ और तथ्याधारित ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। Q2. इतिहास की किताबों में यह बदलाव कब से लागू होंगे? Q3. अब तक कक्षा 1 से 11 तक की अधिकांश किताबों में बदलाव किए जा चुके हैं। कक्षा 9, 10 और 12 की किताबों में संशोधन अगले सत्र से लागू होंगे। Q4. RSS नेता सुनील आंबेकर ने इस बदलाव को क्यों सकारात्मक बताया? उन्होंने कहा कि पुरानी किताबों में पक्षपातपूर्ण भाषा थी, जबकि नई किताबें तटस्थ दृष्टिकोण देती हैं। इस बदलाव के जरिए बच्चों को अकबर और टीपू सुल्तान जैसे ऐतिहासिक पात्रों के कार्यों का तथ्यात्मक विश्लेषण मिलेगा।

Junior National Rowing Championship: 26 से 30 नवंबर तक खेल, राज्यों के खिलाड़ी लेंगे हिस्सा

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Junior National Rowing Championship: Games from 26 to 30 November players from different states will participate भोपाल। खेल एवं युवा कल्याण विभाग, मध्यप्रदेश की ओर से 26 से 30 नवंबर 2025 तक दो बड़े राष्ट्रीय रोइंग इवेंट आयोजित किए जा रहे हैं। अपर लेक पर होने वाले इन आयोजनों में 8वीं इंटर स्टेट चैलेंजर्स चैंपियनशिप और 45वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप शामिल हैं। प्रतियोगिताएँ रोइंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से होंगी, जिनमें देशभर के विभिन्न राज्यों के खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। 23 राज्यों से 500 प्रतिभागी इस वर्ष चैंपियनशिप में 23 राज्यों से 500 युवा रोअर्स भाग लेंगे। प्रतियोगिता में जूनियर एवं इंटर-स्टेट दोनों श्रेणियों में अत्याधुनिक रोइंग बोट्स के माध्यम से प्रतिभागी अपनी शारीरिक क्षमता, गति, कौशल और अनुशासन का प्रदर्शन करेंगे। ऊपरी झील के प्राकृतिक एवं अनुकूल जल क्षेत्र में प्रतियोगिता का आयोजन रोइंग खेल को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। अपर लेक बना प्रमुख खेल स्थल अपर लेक पूर्व में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वाटर स्पोर्ट्स इवेंट्स की सफल मेजबानी कर चुका है। इसी वजह से इसे रोइंग खेल के लिए आदर्श स्थल माना जाता है। इस बार भी बोट हाउस, वार्मअप ज़ोन, सुरक्षा व्यवस्था, मेडिकल टीम और तकनीकी सुविधाओं सहित सभी तैयारियाँ पूरी की जा रही हैं, ताकि खिलाड़ियों और दर्शकों को बेहतर अनुभव मिल सके। खेल क्षमताओं और पर्यटन को बढ़ावा राज्य सरकार का प्रयास है कि यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों को प्रेरित करने के साथ-साथ मध्यप्रदेश की खेल क्षमताओं और आयोजक कौशल का मजबूत संदेश देशभर में जाए। आयोजन से युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच मिलेगा और राज्य में खेल पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। विभाग की महत्वपूर्ण पहल मध्यप्रदेश शासन, विशेषकर खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा इस अंतरराज्यीय व राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप की मेजबानी राज्य में जल खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। विभाग का उद्देश्य अधिकतम युवाओं को रोइंग जैसे ओलंपिक खेलों से जोड़ना तथा खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना है। चैंपियनशिप में रोमांचक मुकाबले 26 नवंबर से 30 नवंबर तक चलने वाली इस चैंपियनशिप में स्पर्धाओं के लिए तकनीकी व्यवस्थाएँ, सुरक्षा इंतजाम, जलपथ चिन्हांकन और प्रतिभागियों की सुविधाएँ पूरी तरह सुनिश्चित की गई हैं। आयोजन समिति ने प्रतियोगिताओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया है ताकि खिलाड़ियों को सर्वोत्तम प्रतिस्पर्धी वातावरण प्रदान किया जा सके।

Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी

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CBSE ने 10वीं कक्षा के लिए बड़े बदलाव का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत अब बोर्ड परीक्षा दो सत्रों में होगी। नए मॉडल में पहला सत्र सभी छात्रों के लिए अनिवार्य रहेगा, जबकि दूसरा सत्र केवल सुधार, पुनः प्रयास या बेहतर स्कोर पाने का विकल्प देगा। खास बात यह है कि दूसरे सत्र में छात्र अधिकतम तीन विषयों की ही परीक्षा दे पाएंगे, जिससे अनावश्यक दबाव कम करने और स्कोर सुधारने का मौका मिलेगा। इस नई परीक्षा संरचना का उद्देश्य छात्रों को एक लचीला, तनाव-मुक्त और बेहतर प्रदर्शन वाला वातावरण देना है। वहीं 12वीं के लिए फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी—यानी एक ही मुख्य परीक्षा सत्र। ऐसा इसलिए क्योंकि 12वीं के छात्रों की प्रवेश परीक्षाओं और आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया में एक समान टाइमलाइन की आवश्यकता होती है। 10वीं में दो-सेशन परीक्षा का ढांचा पहले सत्र और दूसरे सत्र की विशेषताएं ये खबर भी पढ़े…IMD Recruitment 2025: भारत मौसम विज्ञान विभाग में 136 प्रोजेक्ट स्टाफ पदों पर भर्ती, करें अप्लाई परिणाम, सुधार और मार्कशीट ये खबर भी पढ़े…इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड 12वीं की परीक्षा में ब बदलाव नहीं 12वीं की परीक्षा व्यवस्था अभी एक-सत्र वाली ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि 12वीं के छात्र अक्सर JEE Main, NEET जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे होते हैं और उन्हें उसी सत्र में परिणाम चाहिए। छात्रों-अभिभावकों के लिए सुझाव ये खबर भी पढ़े…WhatsApp का सबसे बड़ा डेटा लीक: Meta की चूक ने 3.5 अरब यूज़र्स को खतरे में डाला, करें ये उपाय क्यों आया यह नया मॉडल? FAQs Q1. क्या मैं दूसरे सत्र में सभी विषयों को दोबारा दे सकता हूँ?नहीं। 10वीं में दूसरे सत्र में केवल अधिकतम तीन विषयों के लिए चयन कर सकते हैं। उन विषयों में ही सुधार संभव है जिनका बाह्य मूल्यांकन 50 % या उससे ज्यादा है। Q2. अगर पहले सत्र में तीन से ज़्यादा विषयों में फेल हो गया तो क्या होगा?यदि छात्र तीन या अधिक विषयों में पहले सत्र में अनुपस्थित रहा या फेल हुआ हो, तो उसे दूसरे सत्र में शामिल होने का अधिकार नहीं मिलेगा। उसे अगले वर्ष मुख्य परीक्षा में शामिल होना होगा (Essential Repeat)। Q3. क्या 12वीं के छात्रों को भी दूसरा सत्र मिलेगा?इस समय 12वीं के लिए एक-सत्र मॉडल ही जारी रहेगा। दूसरा सत्र फिलहाल नहीं होगा क्योंकि 12वीं के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े होते हैं।