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Aastha Pandey

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महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स में महिलाओं की निजता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर केंद्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा, दिशानिर्देश बनाने पर हो सकती है बड़ी पहल।सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की गरिमा और अधिकारों को केंद्र में रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर पहल की है। हरियाणा के एमडीयू में महिलाओं की कथित ‘पीरियड चेकिंग’ की खबर ने देश को झकझोर दिया, और इसी के बाद अदालत ने केंद्र और हरियाणा सरकार से तत्काल जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि पीरियड्स एक प्राकृतिक और निजी प्रक्रिया है, जिसे किसी भी महिला के सम्मान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। अब अदालत ऐसे अपमानजनक मामलों को रोकने के लिए पूरे देश में समान और सख्त दिशानिर्देश बनाने पर विचार कर रही है। यह फैसला महिलाओं की निजता, स्वास्थ्य और सम्मान की सुरक्षा में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। पीरियड्स कोई शर्म की बात नहीं –सुप्रीम कोर्ट ये खबर भी पढ़े…एआईसीटीई की नई मंजूरी प्रक्रिया: 2026–27 में खुलेंगे नए इंजीनियरिंग कॉलेज नयी दिल्ली की सर्द सुबह में जब सुप्रीम कोर्ट की एक महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स के दौरान महिलाओं की निजता और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार दोनों को नोटिस जारी किया। यह मामला तभी उठा जब हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में महिला सफाई कर्मचारियों की कथित तौर पर फिजिकल चेकिंग किए जाने की खबरें सामने आईं। यह चेकिंग इस लिए की गई कि यह पता लगाया जाए कि कौन सी महिला “पीरियड में है और कौन नहीं’। यह खबर चौंकाने वाली थी, और इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने एक जनहित याचिका दायर की ताकि पूरे देश में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट और मजबूत दिशानिर्देश तैयार किए जा सकें। ये खबर भी पढ़े…NEET PG में नया सीट चार्ट – हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बदला हुआ फैसला “महिलाओं की इज्जत पर कोई समझौता नहीं”-सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान पीठ की अगुआई कर रहीं जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला पीरियड्स की वजह से भारी काम नहीं कर पा रही है, तो नियोक्ता का कर्तव्य है कि: उसे हल्का काम दिया जाए, या किसी और को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाए।उन्होंने साफ कहा— “पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, कोई जांच का विषय नहीं।” जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि समाज में कुछ लोगों की सोच अब भी महिलाओं के प्रति भेदभाव से भरी है, और एमडीयू की घटना इसी मानसिकता को दिखाती है। ये खबर भी पढ़े…डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर? “देश भर में ऐसी घटनाएं हो रही हैं” SCBA के अध्यक्ष विकाश सिंह ने अदालत को बताया कि हरियाणा ही नहीं, देश के दूसरे राज्यों से भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां महिलाओं से पीरियड्स के बारे में अनैतिक और अपमानजनक तरीके से सवाल या जांच की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें: महिलाओं की निजता का उल्लंघन करती हैं, संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 का सीधा हनन करती हैं और महिलाओं को मानसिक व भावनात्मक रूप से अपमानित करती हैं। इस पर पीठ ने गंभीर टिप्पणी की— “इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” हरियाणा सरकार की रिपोर्ट— हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि:- प्रशासन ने इस मामले में सहायक रजिस्ट्रार समेत दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। ठेके पर रखे गए दो सुपरवाइजर्स को बर्खास्त करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, यदि किसी महिला के साथ जातीय या सामाजिक भेदभाव हुआ है, तो SC/ST (अत्याचार रोकथाम) कानून भी लगाया गया है। अदालत ने इस अपडेट को गंभीरता से लिया और कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। पूरे देश के लिए दिशानिर्देश बनेंगे? सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अदालत सोच रही है कि क्या पूरे देश के लिए: स्पष्ट दिशानिर्देश- और सख्त नियम बनाए जाएं- ताकि कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में कोई भी महिला अपमानजनक जांच या भेदभाव का शिकार न हो। जस्टिस नागरत्ना ने कहा— “यह एक गंभीर मुद्दा है, और इस पर बात करने की जरूरत है।” उन्होंने कर्नाटक में “मंथली पीरियड लीव” नीति के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा:“अगर छुट्टी का प्रावधान बने, तो क्या महिलाओं से यह साबित करने के लिए कहा जाएगा कि वे पीरियड्स में हैं?” यह टिप्पणी अदालत की चिंता को साफ दर्शाती है।अगली सुनवाई अगले सप्ताह—महिलाओं के अधिकारों पर हो सकता है बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा दोनों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड प्रज्ञा बघेल ने दायर की थी। याचिका में कई पुराने मामलों और घटनाओं का उल्लेख भी है, जहां महिलाओं के साथ मासिक धर्म के नाम पर अत्याचार किया गया था। यह मामला आगे चलकर पूरे देश में महिलाओं की निजता की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, सुरक्षा, और सम्मान से जुड़े कानूनों को नए रूप देने का आधार बन सकता है। FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल हाँ, ऐसी जांच महिलाओं की निजता का उल्लंघन है और संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट भी इसी मुद्दे पर दिशानिर्देश बनाने की सोच रहा है। क्योंकि हरियाणा के एमडीयू में महिलाओं की पीरियड्स जांच का मामला सामने आया था। अदालत चाहती है कि देशभर में ऐसी घटनाएं न हों और इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।

एआईसीटीई की नई मंजूरी प्रक्रिया: 2026–27 में खुलेंगे नए इंजीनियरिंग कॉलेज

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आईसीटीई ने 2026–27 शैक्षणिक सत्र के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है, जिसके तहत देशभर में नए मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना का रास्ता खोल दिया गया है। तकनीकी शिक्षा में तेजी से बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परिषद ने 28 नवंबर से आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इस बार न सिर्फ नए कॉलेजों को अवसर मिलेगा, बल्कि पुराने संस्थानों को भी अपनी स्वीकृति बढ़ाने या नए कोर्स जोड़ने का मौका दिया जाएगा। नए कॉलेज खोलने व मंजूरी की प्रक्रिया शुरू एआईसीटीई ने 2026-27 सत्र के लिए नए तकनीकी संस्थान (इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशन आदि) खोलने व पुरानी संस्थाओं की मंजूरी (renewal) का आवेदन आमंत्रित किया है। आवेदन प्रक्रिया 28 नवंबर 2025 से शुरू हो चुकी है। संस्थानों को आवेदन करने के लिए National Single Window System (NSWS) पोर्टल का उपयोग करना होगा। नए कॉलेज खोलने वाले संस्थानों की समय-सीमा 28 नवंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 है। पुराने कॉलेजों के लिए renewal/application की तिथि अलग-अलग ये खबर भी पढ़े…NEET PG में नया सीट चार्ट – हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बदला हुआ फैसला इंदौर में क्या बदलने की तैयारी है? खबर के अनुसार, आप जिस तरह बता रहे थे — यानी इंदौर में लगभग 76 मैनेजमेंट कॉलेज पहले से हैं — अब एआईसीटीई की इस नई प्रक्रिया के चलते 2 और मैनेजमेंट कॉलेज और 1 नया इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू हो सकते हैं। इसके लिए संस्थानों को एआईसीटीई से पूरी मंजूरी लेनी होगी — यानी partial approval नहीं, बल्कि हर कोर्स और संस्था के लिए पूरी मंजूरी अनिवार्य होगी। ये खबर भी पढ़े…डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर? एआईसीटीई के नए नियम इससे पहले कुछ संस्थान इन पाठ्यक्रमों को बिना कठोर मानकों के चला रहे थे; अब उनकी इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी, अन्य गुणवत्ता मानकों के आधार पर समीक्षा होगी। ये खबर भी पढ़े…JEE Main 2026: अगर नियम तोड़े-3 साल तक होगी परीक्षा से बैन 📈 Intake (छात्र संख्‍या) पर पहले की पाबंदी हटाई एआईसीटीई ने 2024 से उन “well-performing” इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए छात्रों की intake पर लगी सीमा (cap) हटा दी है। अब इनमें एक साथ तीन साल की मंजूरी दी जा सकती है। मतलब, यदि कॉलेज infrastructural क्षमता और गुणवत्ता बनाए रखे, तो seats बढ़ाई जा सकती हैं। इससे इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ने की गुंजाइश है। 🖥️ ऑनलाइन एवं ओपन कोर्सेस की मंजूरी जरूरी इस स्थिति में नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने से पहले यह देखना होगा कि वे स्थाई रूप से कामयाब रह सकेंगे या नहीं — तभी मान्यता मिलना संभव है। एआईसीटीई की नई पॉलिसी इसी की ओर इशारा करती है। छात्रों और अभिभावकों को क्या जानना चाहिए यदि आप 12वीं पास हैं और मैनेजमेंट, BBA/BCA या इंजीनियरिंग में दाखिला लेना चाहते हैं – ध्यान रखें कि अब कॉलेजों को एआईसीटीई से मान्यता मिलनी चाहिए। बिना मान्यता वाला कॉलेज चुनना जोखिम भरा हो सकता है। 1.नए कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू है — इसलिए इस समय भाईचारे (campus), फैकल्टी स्ट्रेंगटी 2.इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेसमेंट रिकार्ड्स आदि देखने पर ज़्यादा ध्यान दें। 3.यह भी देख लें कि कॉलेज ने NSWS पोर्टल पर आवेदन किया है या स्वीकृति पायी है — ताकि भविष्य में डिग्री व मान्यता से संबंधित दिक्कत न आए। 4.साथ में, यह भी ध्यान रखें कि निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों का ट्रैक रिकॉर्ड अब उतना मजबूत नहीं है — इसलिए विकल्पों को समझ-समझकर चुनें। FAQs Q1. क्या अब BBA / BCA कॉलेजों को भी एआईसीटीई से मंजूरी लेनी जरूरी है?हाँ. 2025–26 से, BBA, BCA तथा अन्य मैनेजमेंट/कंप्यूटर एप्लीकेशन पाठ्यक्रम अब एआईसीटीई के अंतर्गत आए हैं। किसी भी कॉलेज को ये पाठ्यक्रम चलाने के लिए एआईसीटीई स्वीकृति (approval) लेना जरूरी है। Q2. नए इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट कॉलेज खोलने के लिए आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी?संस्था को 28 नवंबर 2025 से शुरू हुए ऑनलाइन NSWS पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके बाद एआईसीटीई एप्रूवल प्रक्रिया (inspection, infrastructure, faculty आदि) के आधार पर मंजूरी देगा। नए संस्थानों के लिए अंतिम तिथि 12 जनवरी 2026 है। Q3. मध्यप्रदेश में इतने कॉलेज बंद क्यों हो रहे हैं — फिर भी नए कॉलेज खोलने की अनुमति क्यों दी जा रही है?पिछले दशक में निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों की संख्या कम हुई है और 126 कॉलेज बंद हुए हैं।

NEET PG में नया सीट चार्ट – हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बदला हुआ फैसला

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की सख्ती के बाद 2025 की NEET PG काउंसलिंग में बड़ा बदलाव हुआ है। अब निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50% सीटें ऑल-इंडिया कोटे के लिए होंगी। साथ ही, संस्थागत वरीयता (इंस्टीटूशनल परेफरेंस) को भी सीमित कर दिया गया है, ताकि सिर्फ राज्य के छात्रों को मौका न मिले। इस फैसले से अब दूसरे राज्यों और बाहर के छात्रों को भी MP के कॉलेजों में पढ़ने का मौका मिलेगा। इस सुधार से उम्मीद है कि प्रतियोगिता और योग्यता के आधार पर चयन होगा, और ज़्यादा न्यायपूर्ण अवसर मिलेंगे। अब छात्रों के लिए सीमाओं की बजाय, हुनर और मेहनत मायने रखेंगी। हाई कोर्ट ने क्यों कदम उठाया हाल ही में Madhya Pradesh High Court (MP हाई कोर्ट) ने आदेश दिया कि निजी मेडिकल कॉलेजों में PG-सेट्स पर 100% इंस्टीटूशनल परेफरेंस + In-service + NRI” आरक्षण असंवैधानिक है। कोर्ट ने कहा कि कुल आरक्षण किसी भी तरह से 50% से ज़्यादा नहीं हो सकता। अदालत ने 3 सितंबर 2025 को राज्य सरकार द्वारा बदली गई नियमावली (Rules) को रद्द कर दिया, जिसमें केवल एमपी (Madhya Pradesh) में MBBS पूरा करने वाले छात्रों को PG में प्राथमिकता दी गई थी। ये खबर भी पढ़े…AIBE 20 परीक्षा 2025: पूरी गाइडलाइन व तैयारी की जानकारी 🔹 अब कैसे होंगे PG सीटों का आवंटन स्टेट काउंसलिंग (Directorate of Medical Education, Madhya Pradesh — DME) ने नया सीट चार्ट जारी किया है। इसमें निजी व सरकारी कॉलेजों के लिए सीटें निम्न रूप से तय की गई हैं: ये खबर भी पढ़े…डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर? निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए 50% सीटें — ऑल इंडिया कोटा (All India Quota / AIQ) 15% — NRI कोटा 30% — इन-सर्विस (In-service) कोटा 5% — इंस्टीटूशनल परेफरेंस (पूर्व MBBS वाले, आदि) — सरकारी कॉलेजों के लिए: 50% — ऑल इंडिया कोटा 30% — इन-सर्विस कोटा 20% — Institutional Preference इसका मतलब है कि पहले की तुलना में Private colleges में इंस्टीटूशनल परेफरेंस की हिस्सेदारी काफी कम हो गई है, और बहुत बड़ी संख्या में सीटें (50%) अब All India Quota में चली गई हैं। ये खबर भी पढ़े…JEE Main 2026: अगर नियम तोड़े-3 साल तक होगी परीक्षा से बैन 🔹 MP में PG सीटों की स्थिति 2025 के लिए MP के private मेडिकल कॉलेजों में कुल 569 + 30 (PWD) + 243 (in-service) सीटें घोषित की गई हैं। 1. सरकारी कॉलेजों में भी स्लॉट उपलब्ध हैं — कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर राज्य में PG की संभावित सीट बढ़ाई गई है।2. क्यों है यह बदलाव — मेडिकल पढ़ने वालों के लिए अहम3, अब वो छात्र जो MP के बाहर MBBS कर चुके हैं, या अन्य राज्यों से हैं — उन्हें MP के PG-काउंसलिंग में प्रयास करने का मौका मिलेगा। पहले केवल MP MBBS ग्रेजुएट्स को फायदा था।4. इंस्टीटूशनल परेफरेंस या domicile-based quota के कारण जो भेदभाव हो रहा था — उसे कोर्ट ने असंवैधानिक माना। अब मेरिट (NEET PG रैंक आदि) के आधार पर अवसर मिलेंगे।5. Private कॉलेजों में सीटें सिर्फ एक ही श्रेणी (इंस्टीटूशनल परेफरेंस आदि) में बाँटना — अब बंद हो गया है; यानी “100% आरक्षण + 0% खुली सीट” नहीं हो पाएगी। छात्रों के लिए क्या करना है — क्या बदल जाएगा अगर आप PG के लिए 2025 counselling में भाग ले रहे हैं — ध्यान रखें कि registration, choice filling आदि निर्देश DME द्वारा तय किए गए हैं। अब All India Quota का अधिक हिस्सा निजी और सरकारी दोनों कॉलेजों में खुल गया है — इसका मतलब है कि मेरिट आधार पर सीटें मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इंस्टीटूशनल परेफरेंस पर बहुत निर्भर न रहें — सभी को खुली प्रतियोगिता में भाग लेना पड़ेगा। FAQs Q1: MP NEET PG 2025 में इंस्टीटूशनल परेफरेंस पूरी तरह खत्म हो गई है?नहीं — इंस्टीटूशनल परेफरेंस पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। निजी कॉलेजों के लिए इंस्टीटूशनल परेफरेंस अब मात्र 5% सीटों के लिए है, और सरकारी कॉलेजों में लगभग 20% सीटें इंस्टीटूशनल परेफरेंस के लिए आरक्षित हैं। बाकी सीटें All India Quota, NRI quota और In-service quota में बंटी हुई हैं। Q2: क्या अब MP के बाहर MBBS करने वाले छात्र भी PG के लिए आवेदन कर सकते हैं?हाँ — हाई कोर्ट के आदेश और नए सीट चार्ट के अनुसार, अब All India Quota (AIQ) सहित अन्य कोटे में सीटें खुली हैं। इसलिए जो अन्य राज्यों से हैं, वे भी मेरिट (NEET PG रैंक आदि) के आधार पर आवेदन कर सकते हैं। Q3: इस नए सीट चार्ट से MP के पहले MBBS करने वालों (इंस्टीटूशनल परेफरेंस वाले) को नुकसान होगा?कुछ हद तक — क्योंकि अब निजी कॉलेजों में इंस्टीटूशनल परेफरेंस सिर्फ 5% रह गया है, पहले की तुलना में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। लेकिन सरकारी कॉलेजों में 20% इंस्टीटूशनल परेफरेंस है, तो वहाँ उनका मौका अभी भी बना हुआ है।

डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर?

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भारत में UI/UX, Animation, VFX और Virtual/Extended Reality (XR) जैसे Creative-Tech कोर्स की डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है। पहले डिज़ाइन को सिर्फ आर्ट समझा जाता था, लेकिन अब यह टेक्नोलॉजी, कोडिंग, रिसर्च और डिजिटल स्किल के साथ जुड़कर एक नया करियर रास्ता बना रहा है। आज कंपनियों को ऐसे क्रिएटिव लोग चाहिए जो ऐप, वेबसाइट, गेम, फिल्म और वर्चुअल दुनिया को और ज़्यादा रियल और यूज़र-फ्रेंडली बना सकें। स्टूडेंट्स के लिए यह बड़ा मौका है क्योंकि इस क्षेत्र में न सिर्फ सीखने का दायरा बड़ा है, बल्कि जॉब ऑप्शन भी बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। UI/UX में यूज़र एक्सपीरियंस डिज़ाइन किया जाता है, Animation और VFX फिल्मों व एड्स को जीवंत बनाते हैं, जबकि XR नई वर्चुअल दुनिया तैयार करता है। क्यों अब Creative-Tech करियर फेमस हो रहा है दुनिया बदल रही है — मनोरंजन, गेमिंग, डिजिटल मीडिया की मांग बढ़ रही है। IBEF रिपोर्ट के अनुसार, भारत में VFX और Animation इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही है। ग्लोबल रूप से भी Mordor Intelligence के अनुसार Animation और VFX मार्केट 2025 में USD 197.3 billion था, और 2030 तक यह USD 348.5 billion तक पहुंचने की उम्मीद है। इसका मतलब — कलात्मक क्षमता + टेक्नोलॉजी + डिजिटल स्किल = भविष्यकौन-कौन से कोर्स / संस्थान हैं — और क्या सीखते हैं ये खबर भी पढ़े…AIBE 20 परीक्षा 2025: पूरी गाइडलाइन व तैयारी की जानकारी 🔹 कोर्स और स्किल्स 1.अगर आप BSc Animation & VFX चुनते हैं — तो 3D मॉडलिंग, 3D एनिमेशन, VFX, Compositing, टेक्सचरिंग, एनिमेशन प्रोडक्शन, स्टोरीबोर्डिंग सीखते हैं।२. UI/UX डिज़ाइन कोर्स में आप वेब / मोबाइल ऐप का डिजाइन, यूज़र-इंटरफेस, यूज़र एक्सपीरियंस, इंटरफेस एनिमेशन, प्रोटोटाइपिंग सीख सकते हैं। ३. अब नया ट्रेंड है — Motion Graphics, Real-time Rendering, Virtual / Extended Reality (XR), 3D Animation + टेक्नोलॉजी + कोडिंग + AI / मशीन-लर्निंग (जहाँ प्रैक्टिकल हिसाब से सीखना है)। ये खबर भी पढ़े…10वीं के बाद पढ़ाई आसान, Post Matric Scholarship देगी पूरा खर्च 🔹 संस्थान / विकल्प 2025 में भारत में Indian Institute of Creative Technologies (IICT) नाम से एक नई क्रिएटिव-टेक्नोलॉजी संस्था शुरू हुई है। यह Animation, Gaming, XR, VFX आदि में इनोवेटिव कोर्स ऑफर करती है। इसके अलावा पारंपरिक संस्थान जैसे NID, NIFT, उन निजी डिजाइन / आर्ट / मीडिया कॉलेजों में भी अब पुराने “फाइन आर्ट्स / डिज़ाइन” से आगे बढ़कर डिजिटल डिज़ाइन, UI/UX, 3D, VFX आदि कोर्स देने लगे हैं। ये खबर भी पढ़े…इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड 🔹करियर के नए दरवाज़े: कौन-कौन से रोल बन सकते हैं आज का “डिज़ाइनर” केवल ड्रॉइंग या आर्टिस्ट नहीं — वो मल्टी-स्किल्ड पेशेवर है: 3D Animator / VFX Artist / Motion Graphics Designer UI/UX Designer / UI Animator / Interaction Designer Virtual Production Specialist / XR Developer / AR-VR Designer 3D Environment Creator, Game Designer, Real-Time 3D/VR Content Creator Freelance Graphic / Motion / UI Designer — फ्रीलांसिंग और क्लाइंट बेस्ड काम भी संभव भारत में और दुनिया में मीडिया, फिल्म, गेमिंग, विज्ञापन, फिल्म-मेकिंग, डिजिटल मार्केटिंग आदि क्षेत्रों में इन विशेषज्ञों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। ये खबर भी पढ़े…Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी 🔹कोर्स चुनते समय आपके पास क्रिएटिव स्किल + टेक्नोलॉजी का रुझान होना चाहिए — ड्रॉइंग, डिजिटल डिज़ाइन + कंप्यूटर-ग्राफिक्स + कंप्यूटिंग में रुचि। अगर आप 10+2 करते हैं — किसी भी स्ट्रीम से Animation / VFX के UG कोर्स में जा सकते हैं। अपने पोर्टफोलियो (Portfolio) पर काम करें — 3D मॉडल्स, एनिमेशन, UI-डिज़ाइन, प्रोटोटाइप आदि करें — ये कोर्स में प्रवेश और बाद में नौकरी दोनों के लिए जरूरी है। अगर आप ग्रेजुएट हैं (किसी भी स्ट्रीम में) — Postgraduate या सर्टिफिकेट कोर्स करके डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी फील्ड में जा सकते हैं। ये खबर भी पढ़े…JEE Main 2026: अगर नियम तोड़े-3 साल तक होगी परीक्षा से बैन 🔹भारत में अवसर + भविष्य भारत की VFX और Animation इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। IBEF के अनुसार, भारत अब आसानी से विदेशी VFX-प्रोजेक्ट्स और ग्लोबल फिल्म-प्रोडक्शन में हिस्सा ले रहा है। विश्लेषण बताते हैं कि 3D Animation मार्केट 2024-2030 के बीच लगभग 17.2% प्रति साल (CAGR) बढ़ने की उम्मीद है।मतलब — अगर आपने अब समय पर इस फील्ड में स्किल बना ली है, तो आने वाले समय में आपके लिए जॉब, ग्लोबल क्लाइंट, फ्रीलांसिंग और सफलता के रास्ते बहुत खुले होंगे। 🔹इस फील्ड को क्यों देखें अगर आप आर्ट, क्रिएटिविटी के साथ टेक्नोलॉजी भी पसंद करते हैं — तो Animation / VFX / UI-UX / XR जैसे कोर्स सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि भविष्य-तैयारी है। यह एक ऐसा करियर है जिसमें कला + कौशल + टेक्नोलॉजी तीनों का मेल है। आज डिज़ाइन सिर्फ “खूबसूरत” दिखने का नहीं — “यूज़र अनुभव (User Experience) + टेक्निक + रियल-टाइम 3D / इंटरैक्टिविटी” का है। और भारत में, दुनिया में — वो मांग है। FAQs Q1: Animation और VFX कोर्स करने के लिए क्या 10+2 के बाद आर्ट स्ट्रीम जरूरी है?नहीं। आप किसी भी स्ट्रीम (Science, Commerce, Arts) से 10+2 पास करके Animation / VFX स्नातक (UG) कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। Q2: अगर मुझे टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर में भी दिलचस्पी है, तो क्या मैं UI / UX डिज़ाइन सही चुनूँ?हाँ — UI/UX डिज़ाइन उन लोगों के लिए है जिन्हें डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी + यूज़र इंटरैक्शन में रुचि हो। इसकोर्स में आप ऐप/वेब डिज़ाइन, इंटरफेस, उपयोगकर्ता अनुभव (User Experience), प्रोटोटाइपिंग आदि सीखते हैं, जो आधुनिक डिजिटल दुनिया में बहुत मांग में है। Q3: भारत में Animation / VFX / Creative-Tech में करियर बन सकता है? या मुझे विदेश जाना बेहतर होगा?बिलकुल — भारत में इस समय Animation, VFX, XR, डिजिटल मीडिया में तेजी है। कई भारतीय स्टूडियो, OTT प्लेटफ़ॉर्म, विज्ञापन एजेंसियाँ और विदेशी प्रोजेक्ट्स भारत से कंटेंट लेते हैं। अगर आपके पास स्किल है — नौकरी, फ्रीलांस, या भारत में ही ग्लोबल क्लाइंट मिल सकते हैं।

JEE Main 2026: अगर नियम तोड़े-3 साल तक होगी परीक्षा से बैन

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने JEE Main 2026 के लिए इस बार नियमों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दिया है। वजह साफ है—पिछले कुछ सालों में परीक्षा के दौरान नकल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग, फर्जी दस्तावेज और कई तरह की गलत गतिविधियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। छात्रों को ईमानदार मेहनत का सही मूल्य मिले, इसलिए NTA ने Unfair Means यानी UFM के लिए कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है। अब अगर कोई भी छात्र परीक्षा में मोबाइल, ब्लूटूथ स्मार्टवॉच, स्क्रीन रिकॉर्डिंग जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करता है, किसी और को संकेत देता है, या दस्तावेजों में गड़बड़ी करता पकड़ा जाता है—तो उसका परिणाम तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। यही नहीं, ऐसे छात्रों को तीन साल तक JEE Main से पूरी तरह बैन कर दिया जाएगा। नया बदलाव: JEE Main 2026 में सख्त दिशा-निर्देश वर्ष 2025 की परीक्षाओं में नकल या अन्य अनैतिक गतिविधियों (Unfair Means Practices — UFM) के कारण कई छात्रों पर कार्रवाई हुई। जनवरी 2025 सत्र में 39 छात्र अनफेयर मीन्स मामले में फँसे, जबकि अप्रैल 2025 सत्र में 110 छात्रों का रिजल्ट रद्द हुआ। इन मामलों को देखते हुए NTA ने 2026 के लिए नियम और ज़्यादा सख्त बना दिए हैं। अब UFM पाए जाने पर छात्र 3 साल तक JEE Main में बैठ नहीं पाएगा। ये खबर भी पढ़े…AIBE 20 परीक्षा 2025: पूरी गाइडलाइन व तैयारी की जानकारी JEE Main में क्या चीजें अब वर्जित हैं NTA ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान निम्न चीजों से बचना होगा:1. मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्टवॉच, ईयरफोन, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या उपकरण को साथ लेकर नहीं जाना।2. बिना अनुमति के किसी अन्य छात्र को संकेत, इशारे, हाथ के हाव-भाव या कोडेड संदेश देना।3. रफ शीट पर लिखकर कॉपी देना या लेना।4. प्रश्नपत्र की डिजिटल कॉपी लेना / स्क्रीन रिकॉर्डिंग / फोटो / स्क्रीनशॉट लेना।5. अनुमति प्राप्त केंद्र (centre) के अलावा किसी अन्य केंद्र से परीक्षा देना।6. किसी अन्य व्यक्ति को अपना स्थान पर परीक्षा दिलाना (impostor / impersonation)।7. एक ही साल में अधिक आवेदन करना या दो अलग आवेदन-क्रम (multiple application number) देना।8. अगर ऐसा कोई भी उल्लंघन होता है, तो UFM माना जाएगा और सख्त कार्रवाई होगी। ये खबर भी पढ़े…Central government advice — एनपीएस से यूपीएस में स्विच करने की आखिरी मौका NTA की सख्ती — क्यों यह कदम जरूरी था 2025 में सैकड़ों छात्रों के खिलाफ UFM के नोटिस जारी हुए — 110 उम्मीदवारों का रिजल्ट रद्द हुआ।2024 में भी 39 छात्रों को तीन वर्ष के लिए बैन किया गया था।NTA की कोशिश है कि परीक्षा पूरी तरीके से निष्पक्ष और पारदर्शी हो — ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का हक सुरक्षित रहे। इसलिए 2026 में नियमों की सख्ती — ताकि परीक्षा में नकल या अन्य अनुचित व्यवहार ना हो पाए। ये खबर भी पढ़े…मध्यप्रदेश ESB भर्ती परीक्षाएं 2025 टलीं — युवाओं की बढ़ी चिंता छात्र — क्या करें और क्या नहीं 1. अगर आप 2026 में JEE Main देने वाले हैं, तो ध्यान रखें: 2. परीक्षा केंद्र में केवल NTA द्वारा अनुमति प्राप्त चीजें ले जाएँ। 3. किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, स्मार्टवॉच, मोबाइल, ब्लूटूथ आदि को साथ न रखें। 4. अनुमति न होने पर किसी अन्य को आपका उत्तर पत्र (answer sheet) न दें। 5. Admit Card, ID proof, अन्य दस्तावेज सही और असली लेकर जाएँ — फर्जी दस्तावेज या फोटोकॉपी न करें। 6. परीक्षा के बीच नियमों का उल्लंघन नहीं करें — जैसे कि बिना अनुमति बाहर निकलना, दूसरों के साथ संपर्क करना आदि। ये खबर भी पढ़े… FAQs Q1: अगर परीक्षा के दौरान गलती से मेरी घड़ी स्मार्टवॉच जैसी दिख गई — क्या मुझे 3 साल के लिए बैन किया जाएगा?हाँ — NTA के नियमों में साफ-साफ लिखा है कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (जैसे स्मार्टवॉच, मोबाइल, ब्लूटूथ) परीक्षा हॉल में नहीं लाई जा सकती। गलती से भी अगर पाई जाए — तो वह Unfair Means (UFM) माना जाएगा और 3 साल के लिए बैन हो सकते हैं। Q2: क्या सिर्फ नकल पकड़े जाने पर या दस्तावेज फर्जी होने पर ही बैन होगा, या अन्य नियम टूटने पर भी?नहीं — सिर्फ नकल या फर्जी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि किसी भी प्रकार का नियम उल्लंघन (जैसे कि असंबंधित इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाना, किसी अन्य को उत्तर पत्र देना, बिना अनुमति हॉल से बाहर निकलना आदि) UFM माना जाएगा। इसलिए, सावधानी रखें और परीक्षा के नियमों का पूरी तरह पालन करें। Q3: अगर मेरी गलती से UFM हुआ — क्या NTA उसके खिलाफ अपील सुनती है या माफ कर देती है?नहीं — NTA पहले से कह चुकी है कि UFM पाए जाने पर रिजल्ट रद्द हो जाएगा और तीन साल तक परीक्षा देने का अवसर नहीं मिलेगा। किसी प्रकार की अपील स्वीकार नहीं की जाती है। इसलिए, अपील की कोशिश करने से पहले ही नियम पालन करें।