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Aastha Pandey

Writer News & Blogger

IndiGo फ्लाइट कैंसिलेशन संकट: क्यों रद्द हो रहीं फ्लाइटें

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) पिछले कुछ दिनों से बड़े ऑपरेशनल संकट से जूझ रही है। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक ही दिन में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और चार दिनों में यह संख्या 2000 के पार पहुंच गई। लगभग 3 लाख यात्री सीधे तौर पर प्रभावित हुए, जिससे देशभर के एयरपोर्ट्स पर भारी अफरा-तफरी मच गई। यह पूरा संकट आखिर कैसे शुरू हुआ, सरकार ने क्या कदम उठाए और यात्रियों की परेशानी इतनी क्यों बढ़ी—आइए इसे बहुत आसान और साफ भाषा में समझते हैं। IndiGo की 1000+ उड़ानें रद्द – 4 दिन में लाखों यात्री प्रभावित। FDTL नियम, पायलट कमी व DGCA की छूट ने लाया हवाई अराजकता। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इन दिनों एक बड़े संकट से जूझ रही है। दिसंबर 2025 की शुरुआत में एक ही दिन में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। इसके बाद अगले तीन-चार दिन में कुल रद्द उड़ानों की संख्या 2000 के पार चली गई। अनुमान है कि इस दौरान करीब 3 लाख से अधिक यात्री सीधे प्रभावित हुए। Flughorizons पर अफरा-तफरी, टिकट काउंटर पर लंबी कतारें और गुस्साए यात्रियों की तस्वीरें आम हो गईं। इस संकट की जड़ है नया नियम — Flight Duty Time Limitation (FDTL) — जिसे पायलटों की सुरक्षा व थकान कम करने के लिए लागू किया गया था। लेकिन IndiGo ने इस बदलाव के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं की। 🚩 FDTL:नियम तूफान’ खड़ा किया नया FDTL नियम नवंबर 2025 से पूरी तरह लागू हुआ। इसमें पायलटों के काम-आराम समय को बदल दिया गया। पुराने अनुसार 36 घंटे की साप्ताहिक आराम-छुट्टी (weekly rest) अब बढ़ाकर 48 घंटे की गई। रात की उड़ानों व नाइट-लैंडिंग की सीमा भी तय की गई। इसका मकसद पायलटों की थकान कम करना और हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाना था। लेकिन इससे इंडिगो जैसे बड़े नेटवर्क वाली एयरलाइन्स के लिए क्रू प्लानिंग मुश्किल हो गई। IndiGo हर दिन करीब 2,200–2,300 उड़ानें संचालित करती है। इतना बड़ा नेटवर्क अगर पायलटों की कमी से चलना हो — तो एक छोटी गड़बड़ी पूरे नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है। ये खबर भी पढ़े …सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी में सामाजिक एकता का संदेश क्रू कमी व खराब प्लानिंग DGCA (DGCA) की रिपोर्ट कहती है कि नवंबर में IndiGo ने 1,232 उड़ानें रद्द कीं — जिनमें से 755 उड़ानें सिर्फ क्रू / FDTL कारणों से थीं। एयरलाइन ने खुद स्वीकार किया कि उसने नए नियम लागू होने पर “क्रू जरूरत” का सही अनुमान नहीं लगाया। पायलट यूनियन (क्रू एसोसिएशन) ने आरोप लगाया कि IndiGo ने पायलटों की भर्ती रोक दी थी, तनख्वाह स्थिर रखी थी और नॉन-पोचिंग समझौते पर काम कर रही थी — यानी, उनकी कर्मचारी व्यवस्था जानबूझकर पतली थी। इस वजह से, जब FDTL लागू हुआ — पायलटों की संख्या कम पड़ गई, और रात की उड़ानों व शिफ्टों के कारण बहुत सी उड़ानें रद्द हो गईं। ये खबर भी पढ़े …महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब पायलटों की भारी कमी इंडिगो ने खुद माना कि उनके पास कम से कम 200 पायलटों की कमी है।अगर कंपनी ने शुरुआती समय पर भर्ती की होती, तो आज यह संकट नहीं आता। नए पायलटों को भर्ती करने, ट्रेनिंग देने और लाइसेंस जारी करने में 6–8 महीने का समय लगता है। इसलिए अचानक हुए बदलाव ने पूरे सिस्टम को झटका दे दिया। हालत इतनी बिगड़ी एयरपोर्ट पर बैठे हुए यात्रियों की भीड़, टिकट काउंटर पर हंगामा, बोर्डिंग गेट्स पर गुस्से, कई उड़ानें 4–10 घंटे तक लेट हुईं। आमतौर पर जब उड़ानें कम रद्द होती थीं, किराया स्थिर रहता था। लेकिन इस आपदा के बीच कुछ रूट्स पर किराया 4–6 गुना तक बढ़ गया। इससे लोगों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ा। कई लोग अपनी यात्रा कैंसिल करके ट्रेन या बस से जाना पड़े; कुछयों को होटल में रात गुजारनी पड़ी। ये खबर भी पढ़े …धर्मेंद्र का आख़िरी सफर: बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ एक युग छोड़कर चला गया IndiGo की सफाई DGCA ने FDTL नियम के ‘weekly rest substitution’ वाले प्रावधान को फौरन वापस लिया — यानी अब छुट्टी को रेस्ट न मानने की शर्त हटा दी गई। IndiGo ने कहा है कि वह 8 दिसंबर से अपने ऑपरेशन को नियंत्रित करेगी, और पूरी तरह से 10 फरवरी 2026 तक सामान्य ऑपरेशन बहाल कर देगी। DGCA ने एक जांच समिति बना दी है, ताकि पता चल सके कि गलत योजना थी या शेड्यूल बढ़ा देने की मंशा थी। क्या यह सिर्फ IndiGo की गलती है? कई पायलट संगठन कहते हैं कि ये सिर्फ क्रू कमी नहीं है। सिंक में यह मानना गलत होगा कि FDTL नियम — पायलटों की सेहत के लिए – ही हवाई अराजकता की वजह है। उन्होंने कहा कि दूसरी एयरलाइन्स ने नियमों की तैयारी समय पर कर ली, इसलिए वे प्रभावित नहीं हुईं। कुछ लोग इसे एक तरह का दबाव मानते हैं — कि IndiGo ने जानबूझकर किरायों और शेड्यूल का हाल खराब करके नियमों की ढील दिलाई हो। हालांकि यह आरोप है, पर यात्रियों की असुविधा सच थी। अब आगे क्या होगा ? IndiGo कह रही है कि 10 फरवरी 2026 तक सब सामान्य हो जाएगा — यानी नए पायलटों की भर्ती, शेड्यूल में कटौती, और बेहतर क्रू प्रबंधन। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पायलट भर्ती, ट्रेनिंग, रेस्ट-शेड्यूल, और चार्टर्ड फ्लाइट नेटवर्क पर अच्छी प्लानिंग नहीं हुई -तो फिर से ऐसा संकट दोबारा हो सकता है। सरकार और DGCA को अब सुनिश्चित करना होगा कि यात्रियों का भरोसा बहाल हो, फीस-नियंत्रण हो और एयरलाइन्स भविष्य के लिए सुरक्षित व टिकाऊ योजना बनाएं। यह संकट सिर्फ एक एयरलाइन या एक नियम का नहीं है — यह पूरी इंडस्ट्री, योजना, सुरक्षा, जहाज़ी कर्मचारियों और यात्रियों के विश्वास का मसला है। जहाँ पायलटों की थकान कम करना ज़रूरी है, वहीं यात्रियों को सुविधा व भरोसे की गारंटी भी चाहिए। IndiGo की यह चूक, DGCA की ढील, और यात्रियों की पीड़ा — यह सब हमें याद दिलाता है कि वायु-यात्री व्यवस्था में संतुलन बहुत नाज़ुक है। उम्मीद है कि आगे से बेहतर तैयारी होगी; ऐसी स्थिति फिर नहीं आएगी; और यात्रियों को भरोसा मिलेगा कि उनका सफर आरामदायक, सुरक्षित व विश्वसनीय रहेगा। FAQs … Read more

MCU Bhopal: कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमोस्ट्रेशन

MCU Bhopal

MCU Bhopal Cartoon Shows Exhibitions and Live Demonstrations भोपाल। अखबार का धड़कता हुआ दिल पन्नों पर दिखने वाली छोटी सी काठी नहीं, बल्कि वह तेज़, तीक्ष्ण और कभी-कभी दर्दनाक दृष्टि है जो हँसी के बहाने समाज को आईने में दिखाती है। राजधानी के इस अनूठे कार्टून कार्यक्रम में पेंसिलों ने शब्दों से भी ज़्यादा कुछ कह दिया। लाइव स्केचिंग, प्रदर्शनी और चर्चाओं ने यह प्रमाणित किया कि कार्टून केवल चुटकला नहीं, सोचने का माध्यम भी है। मंच पर हर रेखा में सवाल थे और हर हँसी के पीछे एक गहरी सीख नजर आ रही थी। यह नज़ारा था शुक्रवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमॉन्सट्रेशन का। सोचने पर मजबूर हम रेखाओं से दिमाग की तरह की नसों पर हल्का सा खरोंच करते हैं हँसी आती है तो सोच भी जग जाती है। अखबार का दिल तब और जोर से धड़कता है जब कार्टून उसकी सूनी राहों में परोक्ष सच फेंक देते हैं। और मंच से देशभर के नामी कार्टूनिस्टों ने भी कुछ ऐसे ही तीखे-मीठे बयान दिए जो मीडिया के विद्यार्थियों को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर कर रहे थे। अभिन्न अंग है शब्द और शीर्षक अखबार का ढांचा खड़ा करते हैं, कार्टून किसी अखबार का धड़कता हुआ दिल है।” यह उद्गार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने उद्घाटन सत्र में कहे। उन्होंने कहा कि कार्टूनिंग अखबार का एक अभिन्न अंग है और मीडिया के पाठ्यक्रमों में कार्टूनिंग जैसे विषयों को शामिल करना चाहिए। उनका मानना था कि कार्टून की कला तब तक रहेगी जब तक मानव जीवन रहेगा, क्योंकि शब्दों की सीमाओं के बाहर भी चित्र और रेखाएँ बहुत कुछ बोल जाती हैं। कार्यक्रम में प्रदर्शनी, लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन तथा कार्टून एप्रिशिएशन कार्यशाला से यह साबित हुआ कि कार्टून कला न केवल जीवित है, बल्कि बदलते मीडिया परिदृश्य और सोशल मीडिया की चुनौतियों के बीच नए आकार ले रही है। छात्रों के सवालों और कलाकारों के जवाबों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह विधा अभी भी उस क्षमता से भरी है जो समाज को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर कर दे। विज्ञापन हावी कार्टून की कला के बारे में कहा जाता है कि यह सिमटती जा रही है। हर तरह के मीडिया में कार्टून के लिए जगह सिमटती जा रही है, इस विषय पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट डा. देवेंद्र शर्मा ने कहा कि मौजूदा वक्त में मीडिया में बहुत बदलाव आ गए हैं। कार्टून की कला में बहुत कमी आ रही है ऐसा पूरी तरह से सही नहीं है, दरअसल कार्टून को लोग अब भी देखना चाहते हैं। आज मीडिया में विचार कम दिखते हैं, विज्ञापन हावी है और बाजार के अन्य कारकों का दबाव भी है, लेकिन इसके बावजूद कार्टून की कला लगातार अपनी जगह बनाए हुए है और नए आकार ले रही है। इसी बात पर सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी ने कहा कि कार्टून में ह्यूमर और व्यंग्य दोनों ही होते हैं। आज कार्टून सोशल मीडिया पर भी पसंद किए जा रहे हैं और बहुत बड़ी तादाद में लोग उन्हें फालो करते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह के रिएक्शन आते हैं उससे हार्ड विषयों पर कार्टून बनाना मुश्किल भी होता जा रहा है। लेकिन कार्टून के कलाकार लगातार व्यंग्य और हास्य के साथ कार्टून बना रहे हैं। कार्टूनिंग की कला वरिष्ठ कार्टूनविद त्र्यम्बक शर्मा ने कहा कि आज सोशल मीडिया जैसे नए माध्यमों में ह्यूमर का स्वरूप बदल गया है। हमारी सोच भी बदलती जा रही है। हमारे जीवन में एआई का दखल बढ़ रहा है। इन सब का असर स्वाभाविक तौर पर कार्टूनिंग की कला पर पड़ रहा है। पत्रकारिता और मीडिया में कार्टून के विषयों पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट हरिमोहन ने कहा कि कार्टून जर्नलिज्म का शुद्धतम रूप है। इस विधा में ज्यादातर राजनैतिक विषयों पर ही कार्टून बनते हैं। कार्टूनिस्ट शिरीष श्रीवास्तव ने कहा कि ज्यादातर कार्टूनिस्टों के लिए राजनीति एक सदाबहार विषय होता है लेकिन समसामयिक आधार पर विषयों का चयन बदलता रहता है। गुणों का होना जरूरी मुंबई से इस अवसर पर आए वरिष्ठ कार्टून विशेषज्ञ प्रशांत कुलकर्णी ने कहा कि कार्टूनिस्ट के नजरिये से हमें हर चीज ह्यूमर लगती है। चुनावी वक्त भी कार्टून निमार्ण के विषयों के लिहाज से बहुत अच्छा होता है। प्रसिद्ध कार्टूनिस्टर इस्माइल लहरी ने कहा कि कार्टून के कलाकार की दृष्टि अलग होती है। उसका नजरिया जरा हटकर होता है। वह चीजों को एक अलग तरह से देखता है। और उसमें इन गुणों का होना जरूरी है। तभी कार्टून अच्छे और प्रभावशाली बन पाते हैं। उन्होंने कहा कि कार्टून केवल चुटकला नहीं है। यह एक गंभीर विधा है। वरिष्ठ कार्टूनिस्ट गोविंद लाहोटी ने कहा कि कार्टूनिस्ट के भीतर विचार हमेशा कौंधते रहते हैं। यह सतत चलने वाली एक प्रक्रिया है। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्टूनविद माधव जोशी ने कहा कि दरअसल कोई भी कलाकार दुनिया को अपनी कला से कुछ न कुछ देता है। कार्टून बनाने वाले हास्य और व्यंग्य के साथ आम जन को मीडिया के जरिये एक विषय देते हैं जिस पर वे सोच सकते हैं।सभी विशेषज्ञों ने कहा कि कार्टून कलाकार निर्जीव चीजों में भी प्राण डाल देते हैं। यह हंसने की नहीं सोचने की चीज है। हम सभी में एक कार्टूनिस्ट होता है। वे उन्हें सजीव बनाने का सार्मथ्य रखते हैं। लाइव स्केचिंग पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आयोजित हुए इस अनूठे कार्टून शो एवं लाइव स्केचिंग में देश के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट देवेंद्र शर्मा, त्रयंबक शर्मा, प्रशांत कुलकर्णी, माधव जोशी, हरिमोहन वाजपेयी, चंद्रशेखर हाडा और अभिषेक तिवारी , इस्माइल लहरी और कुमार, हरिओम और शिरीष शामिल हुए। वरिष्ठ पत्रकार शिफाली पांडे ने इस पहले सत्र का संचालन किया। दूसरे सत्र में सभी विशेषज्ञों ने दोपहर दो बजे तक्षशिला और विक्रमशिला परिसर में दो ज्वलंत विषयों शहरी विकास यात्रा और भ्रष्टाचार पर लाइव स्केचिंग भी की। अपनी तरह के अनूठे कार्टून शो के इस पहले सीजन में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने अलग_अलग विषयों पर लाइव स्केच बनते हुए देखे तथा कलाकारों से संवाद भी किया। विस्तार से चर्चा कार्यक्रम के अंतिम सत्र में कार्टून एप्रिशिएसन कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें वरिष्ठ कार्टून कलाकार प्रशांत कुलकर्णी ने सोशल कार्टूनिंग … Read more

Bhopal News: डिवीजनल आईटीआई कैंपस प्लेसमेंट – टर्नर ट्रेड में 29 का चयन

Campus Placement

Divisional ITI Campus Placement – 29 selected in Turner trade भोपाल। सरकारी डिवीजनल आईटीआई गोविंदपुरा,भोपाल ने एक बार फिर उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल की है। प्रतिष्ठित कंपनी मॉथरसन ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजीज़ एंड इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव में संस्थान के कुल 36 प्रशिक्षुओं का चयन किया गया। इनमें टर्नर ट्रेड के सर्वाधिक 29, फिटर के 3 तथा मशीनिस्ट के 2 प्रशिक्षु शामिल हैं। उद्योग से रोजगार उल्लेखनीय है कि सभी चयनित प्रशिक्षु अभी अपने अंतिम वर्ष में ही अध्ययनरत हैं, इसके बावजूद उन्हें उद्योग से रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था, बेहतर तकनीकी शिक्षा तथा उद्योग- संबंधी कौशलों को दर्शाती है। कौशल विकास मिशन टर्नर ट्रेड के उत्कृष्ट परिणाम के लिए प्रशिक्षण अधिकारी संदीप चौकसे के मार्गदर्शन और सतत प्रयासों की विशेष सराहना की गई है, जिन्होंने छात्रों को कौशल आधारित प्रशिक्षण और उद्योग-उन्मुख तैयारी प्रदान की। डिवीजनल आईटीआई,भोपाल की यह सफलता न केवल संस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि प्रदेश के कौशल विकास मिशन को भी नई दिशा प्रदान करती है।

Bhopal News: किसान भाई फार्मर आईडी बनवाएं, कलेक्टर सिंह ने की अपील

Collector bhopal

Collector Singh appeals to farmers to get their Farmer IDs made भोपाल । कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जिले के सभी किसान भाइयों से अपील है कि सभी अपनी फार्मर आईडी बनवाएं जिससे शासन की कल्याणकारी योजनाओं का निरंतर लाभ प्राप्त हो सके। सुविधाजनक विपणन कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने उन्होंने बताया कि समस्त भू-धारियों को एक यूनिक फार्मर आई.डी. प्रदान की जाएगी, जिसके माध्यम से शासन की योजनाओं का नियोजन, लाभार्थियों का सत्यापन एवं कृषि उत्पादों का सुविधाजनक विपणन हो सकेगा। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुगम एवं पारदर्शी तरीके से प्रदान करने हेतु लक्ष्य निर्धारण एवं पहचान हो सकेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद फार्मर आईडी से फसल बीमा योजना का लाभ प्राप्त करने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद में कृषकों के पंजीयन में सुगमता होगी। फार्मर आईडी से किसानों के लिए कृषि ऋण एवं अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए कृषि सेवाओं की सुगमता। फार्मर आईडी से विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु बार-बार सत्यापन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।