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Drishti Sharma

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बुद्ध पूर्णिमा: प्रेम और शांति का सन्देश

1 मई 2026 को मनाई जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा केवल भगवान बुद्ध के जन्मदिन का पर्व नहीं है। यह दिन उनके जीवन में घटित तीन महाचमत्कार—जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—के कारण ‘तीन बार धन्य उत्सव’ कहा जाता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु शांति, करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश ग्रहण करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व वैशाख पूर्णिमा को मनाया जाता है और यह हिंदू व बौद्ध दोनों धर्मों में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थीं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए इसे त्रिगुणधन्य दिवस भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व शुक्रवार, 1 मई को मनाया जाएगा। सिद्धार्थ गौतम का जन्म वैशाख मास की पूर्णिमा को लुंबिनी (आधुनिक नेपाल) में राजा शुद्धोधन और रानी महामाया के घर सिद्धार्थ का जन्म हुआ। वे बाद में गौतम बुद्ध कहलाए। यह घटना न केवल उनके जीवन की शुरुआत का प्रतीक है, बल्कि मानवता के लिए ज्ञान और करुणा का आरंभ भी मानी जाती है।ज्ञान की प्राप्ति परम ज्ञान की प्राप्ति सिद्धार्थ गौतम ने 35 वर्ष की आयु में बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान करके परम ज्ञान प्राप्त किया। इस समय से वे ‘बुद्ध’ कहलाए और उनकी शिक्षाएं दुनिया भर में सत्य और करुणा का मार्ग दिखाने लगीं। बुद्ध पूर्णिमा पर बोधि वृक्ष के पास ध्यान और पूजा का विशेष महत्व है।महापरिनिर्वाणबुद्ध पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में महात्मा बुद्ध ने सांसारिक बंधनों को त्याग कर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। इसका अर्थ है जन्म-मृत्यु के चक्र से पूर्ण मुक्ति। इसे ध्यान, संयम और आध्यात्मिक परिपूर्णता का प्रतीक माना जाता है।इन तीन अद्भुत घटनाओं के कारण बुद्ध पूर्णिमा को केवल जन्मदिन नहीं, बल्कि जीवन चक्र की पूर्णता और आध्यात्मिक परिपूर्णता का दिन कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु शांति, अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेते हैं। पूजा और मंत्रों का महत्व बुद्ध पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध के ध्यान और मंत्रों का जाप विशेष फलदायक माना जाता है। श्रद्धालु ‘बुद्धं शरणं गच्छामि’ का जाप कर मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, पीपल वृक्ष की पूजा करते समय ‘ मणि पद्मे हुं’ मंत्र का जाप लाभकारी होता है। इस प्रकार, बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन में ज्ञान, करुणा और अहिंसा की सीख देने वाला दिन है। इस दिन किए गए ध्यान, पूजा और जप से मानसिक शांति, आध्यात्मिक विकास और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

मोहिनी एकादशी व्रत से मिलती समृद्धि

27 अप्रैल 2026 को मनाई जाने वाली मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार को समर्पित है। इस व्रत को करने से मोह-माया से मुक्ति, सुख-समृद्धि और जीवन में उन्नति प्राप्त होती है।मोहिनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 27 अप्रैल, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मोहिनी रूप धारण किया था, जिससे देवताओं को अमृत प्राप्त हुआ और दानवों से उसका संरक्षण हुआ।पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 26 अप्रैल की शाम से होगा और इसका समापन 27 अप्रैल की शाम को होगा। उदयातिथि के आधार पर व्रत 27 अप्रैल को ही रखा जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 4:43 से 5:28 तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 से 1:02 तक पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है पूजा के दौरान ‘नमो भगवते वासुदेवाय’ और ‘ नमो नारायणाय’ जैसे मंत्रों का जाप करने से मन शांत होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। इसके साथ ही विष्णु सहस्त्रनाम और मंगल स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत शुभ माना जाता है।इस व्रत का पारण 28 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 6:12 से 8:46 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना आवश्यक होता है, अन्यथा व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। मोहिनी एकादशी का व्रत केवल उपवास नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम माना जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से व्यक्ति के जीवन से मोह, माया और नकारात्मक विचार दूर होते हैं घर में सुख, शांति और धन-समृद्धि का वास होता है भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं और दिनभर भजन-कीर्तन में समय व्यतीत करते हैं। शाम के समय दीपदान और तुलसी पूजन का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति होती है।इस प्रकार मोहिनी एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन में संयम, भक्ति और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है।

घर में तितली का आना लाता है खुशखबरी

घर में तितलियों का आना सदियों से शुभ माना गया है। यह न केवल सौभाग्य का प्रतीक है, बल्कि जीवन में नई संभावनाओं, प्रेम और समृद्धि के संकेत भी देता है।घर में तितलियों का आना भारतीय परंपरा और ज्योतिष शास्त्र में एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। यह संकेत केवल सौभाग्य का नहीं, बल्कि जीवन में खुशियों, नई शुरुआत और रिश्तों में सामंजस्य का भी प्रतीक है। तितलियों की उपस्थिति को अक्सर प्रकृति की शुभ चेतावनी कहा जाता है, जो बताती है कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ रहा है। विशेषकर रंग-बिरंगी तितलियाँ नीली, पीली या सफेद, घर में आने पर इसे और भी शुभ माना जाता है। इनके आने का समय भी महत्वपूर्ण होता है। सुबह के समय आने वाली तितलियाँ नयी शुरुआत और शिक्षा या करियर में सकारात्मक बदलाव का संकेत देती हैं। वहीं, शाम के समय आने वाली तितलियाँ परिवार में सौहार्द और सुख-शांति लाने की ओर इशारा करती हैं। ज्योतिष के अनुसार घर के उत्तर-पूर्व दिशा में तितलियों का प्रवेश विशेष रूप से शुभ होता है। यह दिशा घर की सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानी जाती है। अगर यह दिशा साफ-सुथरी और रोशन हो, तो तितलियों का प्रवाह घर में खुशियों और समृद्धि को बढ़ाता है। इसके विपरीत, अगर घर अव्यवस्थित हो या गंदगी हो, तो तितलियाँ जल्दी बाहर चली जाती हैं, जिससे शुभ संकेत का पूरा लाभ नहीं मिलता। तितलियों को घर में देखना बच्चों के लिए भी शुभ माना जाता है इसे उनके स्वास्थ्य, पढ़ाई और मानसिक विकास में सकारात्मक प्रभाव के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा, प्रेम और संबंधों में भी यह संकेत माना जाता है कि पुराने मतभेद दूर होंगे और जीवन में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनेगा।घर में तितलियों की उपस्थिति को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए कुछ उपाय भी सुझाए जाते हैं। घर में पौधे, खासकर फूलों के पौधे, रखना चाहिए। यह तितलियों को आकर्षित करता है और उनके आने की संभावना बढ़ाता है। साथ ही, घर की सफाई और प्राकृतिक प्रकाश बनाए रखना आवश्यक है। ताजगी और साफ-सुथरा वातावरण तितलियों के लिए स्वागत योग्य होता है। अगर तितलियाँ घर में लंबे समय तक रहती है इसे सौभाग्य और समृद्धि का स्थायी संकेत माना जाता है। ज्योतिषियों का मानना है कि तितलियों का उडऩा नए अवसर और सकारात्मक परिवर्तन लाता है। घर के सदस्यों को चाहिए कि वे अपने काम में सकारात्मकता बनाए रखें और परिश्रम करते रहें।तितलियों का आना केवल प्राकृतिक सौंदर्य का हिस्सा नहीं, बल्कि घर में संतुलन, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन में छोटी-छोटी खुशियाँ और सौभाग्य के संकेत आसपास ही मौजूद रहते हैं। जब हम इनका स्वागत करते हैं, तो जीवन में शांति और समृद्धि अपने आप बढ़ती है।

घर में पूजा-सज्जा से बढ़े सकारात्मक ऊर्जा

TULSI MAA

घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे पर दीपक और जल अर्पित करने से न केवल घर की ऊर्जा सकारात्मक होती है, बल्कि परिवार में सौभाग्य और शांति का वास भी बढ़ता है।घर को सजाना और उसमें नियमित पूजा करना न केवल धार्मिक कृत्य है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक शांति का भी स्रोत माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर हल्का दीपक और ताजे फूल लगाना अत्यंत शुभ होता है। यह न केवल आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, बल्कि नकारात्मक प्रभावों को भी कम करता है। दीपक का प्रकाश अंधकार और नकारात्मकता को दूर करता है और फूलों की ताजगी वातावरण में सुख और उत्साह भर देती है। तुलसी का पौधा भारतीय घरों में विशेष महत्व रखता है इसे केवल पौधा नहीं, बल्कि घर का संरक्षक और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। तुलसी के पौधे पर जल अर्पित करना और उसके पास दीपक जलाना शुभ रहता है। यह न केवल स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि करता है, बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सहानुभूति को भी बढ़ाता है। प्रतिदिन तुलसी के पास दीपक जलाने से मानसिक तनाव कम होता है और घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है। पूजा-सज्जा में ध्यान देने योग्य एक और पहलू है सामग्री का चयन फूलों में गुलाब, चमेली और गेंदा के फूल विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। दीपक के लिए हल्का तिल का तेल या घी का दीपक प्रयोग करना उत्तम रहता है। इसके अलावा, घर के मुख्य स्थानों में हल्का रंग और साफ-सुथरा वातावरण रखना भी आवश्यक है। अंधेरे को दूर करने के लिए दीपक का नियमित प्रयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। घर में नियमित पूजा और सजावट करने से घर में न केवल आध्यात्मिक बल्कि भौतिक लाभ भी होता है परिवार के सदस्य स्वस्थ और खुशहाल रहते हैं। बच्चों की पढ़ाई और करियर में सकारात्मक प्रभाव महसूस किया जा सकता है। तुलसी और दीपक का संयोजन घर की समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, यह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का एक सरल और प्रभावशाली तरीका भी है। आज के समय में जब लोग तनाव और भागदौड़ की जिंदगी जी रहे हैं, घर में पूजा-सज्जा एक प्रकार का मानसिक विश्राम भी प्रदान करती है। यह रिवाज केवल परंपरा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी माना गया है। प्रकाश और प्राकृतिक सजावट का प्रभाव घर में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि लाने में महत्वपूर्ण होता है। घर में पूजा-सज्जा का महत्व केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी माध्यम है। नियमित दीपक जलाना, तुलसी को जल अर्पित करना और ताजे फूलों से घर को सजाना हर परिवार के लिए लाभकारी और शुभ होता है।