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Aastha Pandey

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महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स में महिलाओं की निजता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर केंद्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा, दिशानिर्देश बनाने पर हो सकती है बड़ी पहल।सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की गरिमा और अधिकारों को केंद्र में रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर पहल की है। हरियाणा के एमडीयू में महिलाओं की कथित ‘पीरियड चेकिंग’ की खबर ने देश को झकझोर दिया, और इसी के बाद अदालत ने केंद्र और हरियाणा सरकार से तत्काल जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि पीरियड्स एक प्राकृतिक और निजी प्रक्रिया है, जिसे किसी भी महिला के सम्मान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। अब अदालत ऐसे अपमानजनक मामलों को रोकने के लिए पूरे देश में समान और सख्त दिशानिर्देश बनाने पर विचार कर रही है। यह फैसला महिलाओं की निजता, स्वास्थ्य और सम्मान की सुरक्षा में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। पीरियड्स कोई शर्म की बात नहीं –सुप्रीम कोर्ट ये खबर भी पढ़े…एआईसीटीई की नई मंजूरी प्रक्रिया: 2026–27 में खुलेंगे नए इंजीनियरिंग कॉलेज नयी दिल्ली की सर्द सुबह में जब सुप्रीम कोर्ट की एक महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स के दौरान महिलाओं की निजता और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार दोनों को नोटिस जारी किया। यह मामला तभी उठा जब हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में महिला सफाई कर्मचारियों की कथित तौर पर फिजिकल चेकिंग किए जाने की खबरें सामने आईं। यह चेकिंग इस लिए की गई कि यह पता लगाया जाए कि कौन सी महिला “पीरियड में है और कौन नहीं’। यह खबर चौंकाने वाली थी, और इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने एक जनहित याचिका दायर की ताकि पूरे देश में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट और मजबूत दिशानिर्देश तैयार किए जा सकें। ये खबर भी पढ़े…NEET PG में नया सीट चार्ट – हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बदला हुआ फैसला “महिलाओं की इज्जत पर कोई समझौता नहीं”-सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान पीठ की अगुआई कर रहीं जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला पीरियड्स की वजह से भारी काम नहीं कर पा रही है, तो नियोक्ता का कर्तव्य है कि: उसे हल्का काम दिया जाए, या किसी और को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाए।उन्होंने साफ कहा— “पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, कोई जांच का विषय नहीं।” जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि समाज में कुछ लोगों की सोच अब भी महिलाओं के प्रति भेदभाव से भरी है, और एमडीयू की घटना इसी मानसिकता को दिखाती है। ये खबर भी पढ़े…डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर? “देश भर में ऐसी घटनाएं हो रही हैं” SCBA के अध्यक्ष विकाश सिंह ने अदालत को बताया कि हरियाणा ही नहीं, देश के दूसरे राज्यों से भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां महिलाओं से पीरियड्स के बारे में अनैतिक और अपमानजनक तरीके से सवाल या जांच की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें: महिलाओं की निजता का उल्लंघन करती हैं, संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 का सीधा हनन करती हैं और महिलाओं को मानसिक व भावनात्मक रूप से अपमानित करती हैं। इस पर पीठ ने गंभीर टिप्पणी की— “इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” हरियाणा सरकार की रिपोर्ट— हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि:- प्रशासन ने इस मामले में सहायक रजिस्ट्रार समेत दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। ठेके पर रखे गए दो सुपरवाइजर्स को बर्खास्त करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, यदि किसी महिला के साथ जातीय या सामाजिक भेदभाव हुआ है, तो SC/ST (अत्याचार रोकथाम) कानून भी लगाया गया है। अदालत ने इस अपडेट को गंभीरता से लिया और कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। पूरे देश के लिए दिशानिर्देश बनेंगे? सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अदालत सोच रही है कि क्या पूरे देश के लिए: स्पष्ट दिशानिर्देश- और सख्त नियम बनाए जाएं- ताकि कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में कोई भी महिला अपमानजनक जांच या भेदभाव का शिकार न हो। जस्टिस नागरत्ना ने कहा— “यह एक गंभीर मुद्दा है, और इस पर बात करने की जरूरत है।” उन्होंने कर्नाटक में “मंथली पीरियड लीव” नीति के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा:“अगर छुट्टी का प्रावधान बने, तो क्या महिलाओं से यह साबित करने के लिए कहा जाएगा कि वे पीरियड्स में हैं?” यह टिप्पणी अदालत की चिंता को साफ दर्शाती है।अगली सुनवाई अगले सप्ताह—महिलाओं के अधिकारों पर हो सकता है बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा दोनों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड प्रज्ञा बघेल ने दायर की थी। याचिका में कई पुराने मामलों और घटनाओं का उल्लेख भी है, जहां महिलाओं के साथ मासिक धर्म के नाम पर अत्याचार किया गया था। यह मामला आगे चलकर पूरे देश में महिलाओं की निजता की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, सुरक्षा, और सम्मान से जुड़े कानूनों को नए रूप देने का आधार बन सकता है। FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल हाँ, ऐसी जांच महिलाओं की निजता का उल्लंघन है और संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट भी इसी मुद्दे पर दिशानिर्देश बनाने की सोच रहा है। क्योंकि हरियाणा के एमडीयू में महिलाओं की पीरियड्स जांच का मामला सामने आया था। अदालत चाहती है कि देशभर में ऐसी घटनाएं न हों और इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।

एआईसीटीई की नई मंजूरी प्रक्रिया: 2026–27 में खुलेंगे नए इंजीनियरिंग कॉलेज

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आईसीटीई ने 2026–27 शैक्षणिक सत्र के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है, जिसके तहत देशभर में नए मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना का रास्ता खोल दिया गया है। तकनीकी शिक्षा में तेजी से बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए परिषद ने 28 नवंबर से आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इस बार न सिर्फ नए कॉलेजों को अवसर मिलेगा, बल्कि पुराने संस्थानों को भी अपनी स्वीकृति बढ़ाने या नए कोर्स जोड़ने का मौका दिया जाएगा। नए कॉलेज खोलने व मंजूरी की प्रक्रिया शुरू एआईसीटीई ने 2026-27 सत्र के लिए नए तकनीकी संस्थान (इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशन आदि) खोलने व पुरानी संस्थाओं की मंजूरी (renewal) का आवेदन आमंत्रित किया है। आवेदन प्रक्रिया 28 नवंबर 2025 से शुरू हो चुकी है। संस्थानों को आवेदन करने के लिए National Single Window System (NSWS) पोर्टल का उपयोग करना होगा। नए कॉलेज खोलने वाले संस्थानों की समय-सीमा 28 नवंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 है। पुराने कॉलेजों के लिए renewal/application की तिथि अलग-अलग ये खबर भी पढ़े…NEET PG में नया सीट चार्ट – हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बदला हुआ फैसला इंदौर में क्या बदलने की तैयारी है? खबर के अनुसार, आप जिस तरह बता रहे थे — यानी इंदौर में लगभग 76 मैनेजमेंट कॉलेज पहले से हैं — अब एआईसीटीई की इस नई प्रक्रिया के चलते 2 और मैनेजमेंट कॉलेज और 1 नया इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू हो सकते हैं। इसके लिए संस्थानों को एआईसीटीई से पूरी मंजूरी लेनी होगी — यानी partial approval नहीं, बल्कि हर कोर्स और संस्था के लिए पूरी मंजूरी अनिवार्य होगी। ये खबर भी पढ़े…डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर? एआईसीटीई के नए नियम इससे पहले कुछ संस्थान इन पाठ्यक्रमों को बिना कठोर मानकों के चला रहे थे; अब उनकी इन्फ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी, अन्य गुणवत्ता मानकों के आधार पर समीक्षा होगी। ये खबर भी पढ़े…JEE Main 2026: अगर नियम तोड़े-3 साल तक होगी परीक्षा से बैन 📈 Intake (छात्र संख्‍या) पर पहले की पाबंदी हटाई एआईसीटीई ने 2024 से उन “well-performing” इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए छात्रों की intake पर लगी सीमा (cap) हटा दी है। अब इनमें एक साथ तीन साल की मंजूरी दी जा सकती है। मतलब, यदि कॉलेज infrastructural क्षमता और गुणवत्ता बनाए रखे, तो seats बढ़ाई जा सकती हैं। इससे इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ने की गुंजाइश है। 🖥️ ऑनलाइन एवं ओपन कोर्सेस की मंजूरी जरूरी इस स्थिति में नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने से पहले यह देखना होगा कि वे स्थाई रूप से कामयाब रह सकेंगे या नहीं — तभी मान्यता मिलना संभव है। एआईसीटीई की नई पॉलिसी इसी की ओर इशारा करती है। छात्रों और अभिभावकों को क्या जानना चाहिए यदि आप 12वीं पास हैं और मैनेजमेंट, BBA/BCA या इंजीनियरिंग में दाखिला लेना चाहते हैं – ध्यान रखें कि अब कॉलेजों को एआईसीटीई से मान्यता मिलनी चाहिए। बिना मान्यता वाला कॉलेज चुनना जोखिम भरा हो सकता है। 1.नए कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू है — इसलिए इस समय भाईचारे (campus), फैकल्टी स्ट्रेंगटी 2.इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेसमेंट रिकार्ड्स आदि देखने पर ज़्यादा ध्यान दें। 3.यह भी देख लें कि कॉलेज ने NSWS पोर्टल पर आवेदन किया है या स्वीकृति पायी है — ताकि भविष्य में डिग्री व मान्यता से संबंधित दिक्कत न आए। 4.साथ में, यह भी ध्यान रखें कि निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों का ट्रैक रिकॉर्ड अब उतना मजबूत नहीं है — इसलिए विकल्पों को समझ-समझकर चुनें। FAQs Q1. क्या अब BBA / BCA कॉलेजों को भी एआईसीटीई से मंजूरी लेनी जरूरी है?हाँ. 2025–26 से, BBA, BCA तथा अन्य मैनेजमेंट/कंप्यूटर एप्लीकेशन पाठ्यक्रम अब एआईसीटीई के अंतर्गत आए हैं। किसी भी कॉलेज को ये पाठ्यक्रम चलाने के लिए एआईसीटीई स्वीकृति (approval) लेना जरूरी है। Q2. नए इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट कॉलेज खोलने के लिए आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी?संस्था को 28 नवंबर 2025 से शुरू हुए ऑनलाइन NSWS पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके बाद एआईसीटीई एप्रूवल प्रक्रिया (inspection, infrastructure, faculty आदि) के आधार पर मंजूरी देगा। नए संस्थानों के लिए अंतिम तिथि 12 जनवरी 2026 है। Q3. मध्यप्रदेश में इतने कॉलेज बंद क्यों हो रहे हैं — फिर भी नए कॉलेज खोलने की अनुमति क्यों दी जा रही है?पिछले दशक में निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में छात्रों की संख्या कम हुई है और 126 कॉलेज बंद हुए हैं।

NEET PG में नया सीट चार्ट – हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बदला हुआ फैसला

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की सख्ती के बाद 2025 की NEET PG काउंसलिंग में बड़ा बदलाव हुआ है। अब निजी और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50% सीटें ऑल-इंडिया कोटे के लिए होंगी। साथ ही, संस्थागत वरीयता (इंस्टीटूशनल परेफरेंस) को भी सीमित कर दिया गया है, ताकि सिर्फ राज्य के छात्रों को मौका न मिले। इस फैसले से अब दूसरे राज्यों और बाहर के छात्रों को भी MP के कॉलेजों में पढ़ने का मौका मिलेगा। इस सुधार से उम्मीद है कि प्रतियोगिता और योग्यता के आधार पर चयन होगा, और ज़्यादा न्यायपूर्ण अवसर मिलेंगे। अब छात्रों के लिए सीमाओं की बजाय, हुनर और मेहनत मायने रखेंगी। हाई कोर्ट ने क्यों कदम उठाया हाल ही में Madhya Pradesh High Court (MP हाई कोर्ट) ने आदेश दिया कि निजी मेडिकल कॉलेजों में PG-सेट्स पर 100% इंस्टीटूशनल परेफरेंस + In-service + NRI” आरक्षण असंवैधानिक है। कोर्ट ने कहा कि कुल आरक्षण किसी भी तरह से 50% से ज़्यादा नहीं हो सकता। अदालत ने 3 सितंबर 2025 को राज्य सरकार द्वारा बदली गई नियमावली (Rules) को रद्द कर दिया, जिसमें केवल एमपी (Madhya Pradesh) में MBBS पूरा करने वाले छात्रों को PG में प्राथमिकता दी गई थी। ये खबर भी पढ़े…AIBE 20 परीक्षा 2025: पूरी गाइडलाइन व तैयारी की जानकारी 🔹 अब कैसे होंगे PG सीटों का आवंटन स्टेट काउंसलिंग (Directorate of Medical Education, Madhya Pradesh — DME) ने नया सीट चार्ट जारी किया है। इसमें निजी व सरकारी कॉलेजों के लिए सीटें निम्न रूप से तय की गई हैं: ये खबर भी पढ़े…डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर? निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए 50% सीटें — ऑल इंडिया कोटा (All India Quota / AIQ) 15% — NRI कोटा 30% — इन-सर्विस (In-service) कोटा 5% — इंस्टीटूशनल परेफरेंस (पूर्व MBBS वाले, आदि) — सरकारी कॉलेजों के लिए: 50% — ऑल इंडिया कोटा 30% — इन-सर्विस कोटा 20% — Institutional Preference इसका मतलब है कि पहले की तुलना में Private colleges में इंस्टीटूशनल परेफरेंस की हिस्सेदारी काफी कम हो गई है, और बहुत बड़ी संख्या में सीटें (50%) अब All India Quota में चली गई हैं। ये खबर भी पढ़े…JEE Main 2026: अगर नियम तोड़े-3 साल तक होगी परीक्षा से बैन 🔹 MP में PG सीटों की स्थिति 2025 के लिए MP के private मेडिकल कॉलेजों में कुल 569 + 30 (PWD) + 243 (in-service) सीटें घोषित की गई हैं। 1. सरकारी कॉलेजों में भी स्लॉट उपलब्ध हैं — कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर राज्य में PG की संभावित सीट बढ़ाई गई है।2. क्यों है यह बदलाव — मेडिकल पढ़ने वालों के लिए अहम3, अब वो छात्र जो MP के बाहर MBBS कर चुके हैं, या अन्य राज्यों से हैं — उन्हें MP के PG-काउंसलिंग में प्रयास करने का मौका मिलेगा। पहले केवल MP MBBS ग्रेजुएट्स को फायदा था।4. इंस्टीटूशनल परेफरेंस या domicile-based quota के कारण जो भेदभाव हो रहा था — उसे कोर्ट ने असंवैधानिक माना। अब मेरिट (NEET PG रैंक आदि) के आधार पर अवसर मिलेंगे।5. Private कॉलेजों में सीटें सिर्फ एक ही श्रेणी (इंस्टीटूशनल परेफरेंस आदि) में बाँटना — अब बंद हो गया है; यानी “100% आरक्षण + 0% खुली सीट” नहीं हो पाएगी। छात्रों के लिए क्या करना है — क्या बदल जाएगा अगर आप PG के लिए 2025 counselling में भाग ले रहे हैं — ध्यान रखें कि registration, choice filling आदि निर्देश DME द्वारा तय किए गए हैं। अब All India Quota का अधिक हिस्सा निजी और सरकारी दोनों कॉलेजों में खुल गया है — इसका मतलब है कि मेरिट आधार पर सीटें मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इंस्टीटूशनल परेफरेंस पर बहुत निर्भर न रहें — सभी को खुली प्रतियोगिता में भाग लेना पड़ेगा। FAQs Q1: MP NEET PG 2025 में इंस्टीटूशनल परेफरेंस पूरी तरह खत्म हो गई है?नहीं — इंस्टीटूशनल परेफरेंस पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। निजी कॉलेजों के लिए इंस्टीटूशनल परेफरेंस अब मात्र 5% सीटों के लिए है, और सरकारी कॉलेजों में लगभग 20% सीटें इंस्टीटूशनल परेफरेंस के लिए आरक्षित हैं। बाकी सीटें All India Quota, NRI quota और In-service quota में बंटी हुई हैं। Q2: क्या अब MP के बाहर MBBS करने वाले छात्र भी PG के लिए आवेदन कर सकते हैं?हाँ — हाई कोर्ट के आदेश और नए सीट चार्ट के अनुसार, अब All India Quota (AIQ) सहित अन्य कोटे में सीटें खुली हैं। इसलिए जो अन्य राज्यों से हैं, वे भी मेरिट (NEET PG रैंक आदि) के आधार पर आवेदन कर सकते हैं। Q3: इस नए सीट चार्ट से MP के पहले MBBS करने वालों (इंस्टीटूशनल परेफरेंस वाले) को नुकसान होगा?कुछ हद तक — क्योंकि अब निजी कॉलेजों में इंस्टीटूशनल परेफरेंस सिर्फ 5% रह गया है, पहले की तुलना में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। लेकिन सरकारी कॉलेजों में 20% इंस्टीटूशनल परेफरेंस है, तो वहाँ उनका मौका अभी भी बना हुआ है।

डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर?

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भारत में UI/UX, Animation, VFX और Virtual/Extended Reality (XR) जैसे Creative-Tech कोर्स की डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है। पहले डिज़ाइन को सिर्फ आर्ट समझा जाता था, लेकिन अब यह टेक्नोलॉजी, कोडिंग, रिसर्च और डिजिटल स्किल के साथ जुड़कर एक नया करियर रास्ता बना रहा है। आज कंपनियों को ऐसे क्रिएटिव लोग चाहिए जो ऐप, वेबसाइट, गेम, फिल्म और वर्चुअल दुनिया को और ज़्यादा रियल और यूज़र-फ्रेंडली बना सकें। स्टूडेंट्स के लिए यह बड़ा मौका है क्योंकि इस क्षेत्र में न सिर्फ सीखने का दायरा बड़ा है, बल्कि जॉब ऑप्शन भी बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। UI/UX में यूज़र एक्सपीरियंस डिज़ाइन किया जाता है, Animation और VFX फिल्मों व एड्स को जीवंत बनाते हैं, जबकि XR नई वर्चुअल दुनिया तैयार करता है। क्यों अब Creative-Tech करियर फेमस हो रहा है दुनिया बदल रही है — मनोरंजन, गेमिंग, डिजिटल मीडिया की मांग बढ़ रही है। IBEF रिपोर्ट के अनुसार, भारत में VFX और Animation इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही है। ग्लोबल रूप से भी Mordor Intelligence के अनुसार Animation और VFX मार्केट 2025 में USD 197.3 billion था, और 2030 तक यह USD 348.5 billion तक पहुंचने की उम्मीद है। इसका मतलब — कलात्मक क्षमता + टेक्नोलॉजी + डिजिटल स्किल = भविष्यकौन-कौन से कोर्स / संस्थान हैं — और क्या सीखते हैं ये खबर भी पढ़े…AIBE 20 परीक्षा 2025: पूरी गाइडलाइन व तैयारी की जानकारी 🔹 कोर्स और स्किल्स 1.अगर आप BSc Animation & VFX चुनते हैं — तो 3D मॉडलिंग, 3D एनिमेशन, VFX, Compositing, टेक्सचरिंग, एनिमेशन प्रोडक्शन, स्टोरीबोर्डिंग सीखते हैं।२. UI/UX डिज़ाइन कोर्स में आप वेब / मोबाइल ऐप का डिजाइन, यूज़र-इंटरफेस, यूज़र एक्सपीरियंस, इंटरफेस एनिमेशन, प्रोटोटाइपिंग सीख सकते हैं। ३. अब नया ट्रेंड है — Motion Graphics, Real-time Rendering, Virtual / Extended Reality (XR), 3D Animation + टेक्नोलॉजी + कोडिंग + AI / मशीन-लर्निंग (जहाँ प्रैक्टिकल हिसाब से सीखना है)। ये खबर भी पढ़े…10वीं के बाद पढ़ाई आसान, Post Matric Scholarship देगी पूरा खर्च 🔹 संस्थान / विकल्प 2025 में भारत में Indian Institute of Creative Technologies (IICT) नाम से एक नई क्रिएटिव-टेक्नोलॉजी संस्था शुरू हुई है। यह Animation, Gaming, XR, VFX आदि में इनोवेटिव कोर्स ऑफर करती है। इसके अलावा पारंपरिक संस्थान जैसे NID, NIFT, उन निजी डिजाइन / आर्ट / मीडिया कॉलेजों में भी अब पुराने “फाइन आर्ट्स / डिज़ाइन” से आगे बढ़कर डिजिटल डिज़ाइन, UI/UX, 3D, VFX आदि कोर्स देने लगे हैं। ये खबर भी पढ़े…इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड 🔹करियर के नए दरवाज़े: कौन-कौन से रोल बन सकते हैं आज का “डिज़ाइनर” केवल ड्रॉइंग या आर्टिस्ट नहीं — वो मल्टी-स्किल्ड पेशेवर है: 3D Animator / VFX Artist / Motion Graphics Designer UI/UX Designer / UI Animator / Interaction Designer Virtual Production Specialist / XR Developer / AR-VR Designer 3D Environment Creator, Game Designer, Real-Time 3D/VR Content Creator Freelance Graphic / Motion / UI Designer — फ्रीलांसिंग और क्लाइंट बेस्ड काम भी संभव भारत में और दुनिया में मीडिया, फिल्म, गेमिंग, विज्ञापन, फिल्म-मेकिंग, डिजिटल मार्केटिंग आदि क्षेत्रों में इन विशेषज्ञों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। ये खबर भी पढ़े…Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी 🔹कोर्स चुनते समय आपके पास क्रिएटिव स्किल + टेक्नोलॉजी का रुझान होना चाहिए — ड्रॉइंग, डिजिटल डिज़ाइन + कंप्यूटर-ग्राफिक्स + कंप्यूटिंग में रुचि। अगर आप 10+2 करते हैं — किसी भी स्ट्रीम से Animation / VFX के UG कोर्स में जा सकते हैं। अपने पोर्टफोलियो (Portfolio) पर काम करें — 3D मॉडल्स, एनिमेशन, UI-डिज़ाइन, प्रोटोटाइप आदि करें — ये कोर्स में प्रवेश और बाद में नौकरी दोनों के लिए जरूरी है। अगर आप ग्रेजुएट हैं (किसी भी स्ट्रीम में) — Postgraduate या सर्टिफिकेट कोर्स करके डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी फील्ड में जा सकते हैं। ये खबर भी पढ़े…JEE Main 2026: अगर नियम तोड़े-3 साल तक होगी परीक्षा से बैन 🔹भारत में अवसर + भविष्य भारत की VFX और Animation इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है। IBEF के अनुसार, भारत अब आसानी से विदेशी VFX-प्रोजेक्ट्स और ग्लोबल फिल्म-प्रोडक्शन में हिस्सा ले रहा है। विश्लेषण बताते हैं कि 3D Animation मार्केट 2024-2030 के बीच लगभग 17.2% प्रति साल (CAGR) बढ़ने की उम्मीद है।मतलब — अगर आपने अब समय पर इस फील्ड में स्किल बना ली है, तो आने वाले समय में आपके लिए जॉब, ग्लोबल क्लाइंट, फ्रीलांसिंग और सफलता के रास्ते बहुत खुले होंगे। 🔹इस फील्ड को क्यों देखें अगर आप आर्ट, क्रिएटिविटी के साथ टेक्नोलॉजी भी पसंद करते हैं — तो Animation / VFX / UI-UX / XR जैसे कोर्स सिर्फ एक कोर्स नहीं, बल्कि भविष्य-तैयारी है। यह एक ऐसा करियर है जिसमें कला + कौशल + टेक्नोलॉजी तीनों का मेल है। आज डिज़ाइन सिर्फ “खूबसूरत” दिखने का नहीं — “यूज़र अनुभव (User Experience) + टेक्निक + रियल-टाइम 3D / इंटरैक्टिविटी” का है। और भारत में, दुनिया में — वो मांग है। FAQs Q1: Animation और VFX कोर्स करने के लिए क्या 10+2 के बाद आर्ट स्ट्रीम जरूरी है?नहीं। आप किसी भी स्ट्रीम (Science, Commerce, Arts) से 10+2 पास करके Animation / VFX स्नातक (UG) कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। Q2: अगर मुझे टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर में भी दिलचस्पी है, तो क्या मैं UI / UX डिज़ाइन सही चुनूँ?हाँ — UI/UX डिज़ाइन उन लोगों के लिए है जिन्हें डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी + यूज़र इंटरैक्शन में रुचि हो। इसकोर्स में आप ऐप/वेब डिज़ाइन, इंटरफेस, उपयोगकर्ता अनुभव (User Experience), प्रोटोटाइपिंग आदि सीखते हैं, जो आधुनिक डिजिटल दुनिया में बहुत मांग में है। Q3: भारत में Animation / VFX / Creative-Tech में करियर बन सकता है? या मुझे विदेश जाना बेहतर होगा?बिलकुल — भारत में इस समय Animation, VFX, XR, डिजिटल मीडिया में तेजी है। कई भारतीय स्टूडियो, OTT प्लेटफ़ॉर्म, विज्ञापन एजेंसियाँ और विदेशी प्रोजेक्ट्स भारत से कंटेंट लेते हैं। अगर आपके पास स्किल है — नौकरी, फ्रीलांस, या भारत में ही ग्लोबल क्लाइंट मिल सकते हैं।

JEE Main 2026: अगर नियम तोड़े-3 साल तक होगी परीक्षा से बैन

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने JEE Main 2026 के लिए इस बार नियमों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दिया है। वजह साफ है—पिछले कुछ सालों में परीक्षा के दौरान नकल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग, फर्जी दस्तावेज और कई तरह की गलत गतिविधियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। छात्रों को ईमानदार मेहनत का सही मूल्य मिले, इसलिए NTA ने Unfair Means यानी UFM के लिए कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है। अब अगर कोई भी छात्र परीक्षा में मोबाइल, ब्लूटूथ स्मार्टवॉच, स्क्रीन रिकॉर्डिंग जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करता है, किसी और को संकेत देता है, या दस्तावेजों में गड़बड़ी करता पकड़ा जाता है—तो उसका परिणाम तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। यही नहीं, ऐसे छात्रों को तीन साल तक JEE Main से पूरी तरह बैन कर दिया जाएगा। नया बदलाव: JEE Main 2026 में सख्त दिशा-निर्देश वर्ष 2025 की परीक्षाओं में नकल या अन्य अनैतिक गतिविधियों (Unfair Means Practices — UFM) के कारण कई छात्रों पर कार्रवाई हुई। जनवरी 2025 सत्र में 39 छात्र अनफेयर मीन्स मामले में फँसे, जबकि अप्रैल 2025 सत्र में 110 छात्रों का रिजल्ट रद्द हुआ। इन मामलों को देखते हुए NTA ने 2026 के लिए नियम और ज़्यादा सख्त बना दिए हैं। अब UFM पाए जाने पर छात्र 3 साल तक JEE Main में बैठ नहीं पाएगा। ये खबर भी पढ़े…AIBE 20 परीक्षा 2025: पूरी गाइडलाइन व तैयारी की जानकारी JEE Main में क्या चीजें अब वर्जित हैं NTA ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों को परीक्षा के दौरान निम्न चीजों से बचना होगा:1. मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, स्मार्टवॉच, ईयरफोन, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या उपकरण को साथ लेकर नहीं जाना।2. बिना अनुमति के किसी अन्य छात्र को संकेत, इशारे, हाथ के हाव-भाव या कोडेड संदेश देना।3. रफ शीट पर लिखकर कॉपी देना या लेना।4. प्रश्नपत्र की डिजिटल कॉपी लेना / स्क्रीन रिकॉर्डिंग / फोटो / स्क्रीनशॉट लेना।5. अनुमति प्राप्त केंद्र (centre) के अलावा किसी अन्य केंद्र से परीक्षा देना।6. किसी अन्य व्यक्ति को अपना स्थान पर परीक्षा दिलाना (impostor / impersonation)।7. एक ही साल में अधिक आवेदन करना या दो अलग आवेदन-क्रम (multiple application number) देना।8. अगर ऐसा कोई भी उल्लंघन होता है, तो UFM माना जाएगा और सख्त कार्रवाई होगी। ये खबर भी पढ़े…Central government advice — एनपीएस से यूपीएस में स्विच करने की आखिरी मौका NTA की सख्ती — क्यों यह कदम जरूरी था 2025 में सैकड़ों छात्रों के खिलाफ UFM के नोटिस जारी हुए — 110 उम्मीदवारों का रिजल्ट रद्द हुआ।2024 में भी 39 छात्रों को तीन वर्ष के लिए बैन किया गया था।NTA की कोशिश है कि परीक्षा पूरी तरीके से निष्पक्ष और पारदर्शी हो — ताकि मेहनत करने वाले छात्रों का हक सुरक्षित रहे। इसलिए 2026 में नियमों की सख्ती — ताकि परीक्षा में नकल या अन्य अनुचित व्यवहार ना हो पाए। ये खबर भी पढ़े…मध्यप्रदेश ESB भर्ती परीक्षाएं 2025 टलीं — युवाओं की बढ़ी चिंता छात्र — क्या करें और क्या नहीं 1. अगर आप 2026 में JEE Main देने वाले हैं, तो ध्यान रखें: 2. परीक्षा केंद्र में केवल NTA द्वारा अनुमति प्राप्त चीजें ले जाएँ। 3. किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, स्मार्टवॉच, मोबाइल, ब्लूटूथ आदि को साथ न रखें। 4. अनुमति न होने पर किसी अन्य को आपका उत्तर पत्र (answer sheet) न दें। 5. Admit Card, ID proof, अन्य दस्तावेज सही और असली लेकर जाएँ — फर्जी दस्तावेज या फोटोकॉपी न करें। 6. परीक्षा के बीच नियमों का उल्लंघन नहीं करें — जैसे कि बिना अनुमति बाहर निकलना, दूसरों के साथ संपर्क करना आदि। ये खबर भी पढ़े… FAQs Q1: अगर परीक्षा के दौरान गलती से मेरी घड़ी स्मार्टवॉच जैसी दिख गई — क्या मुझे 3 साल के लिए बैन किया जाएगा?हाँ — NTA के नियमों में साफ-साफ लिखा है कि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (जैसे स्मार्टवॉच, मोबाइल, ब्लूटूथ) परीक्षा हॉल में नहीं लाई जा सकती। गलती से भी अगर पाई जाए — तो वह Unfair Means (UFM) माना जाएगा और 3 साल के लिए बैन हो सकते हैं। Q2: क्या सिर्फ नकल पकड़े जाने पर या दस्तावेज फर्जी होने पर ही बैन होगा, या अन्य नियम टूटने पर भी?नहीं — सिर्फ नकल या फर्जी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि किसी भी प्रकार का नियम उल्लंघन (जैसे कि असंबंधित इलेक्ट्रॉनिक सामान ले जाना, किसी अन्य को उत्तर पत्र देना, बिना अनुमति हॉल से बाहर निकलना आदि) UFM माना जाएगा। इसलिए, सावधानी रखें और परीक्षा के नियमों का पूरी तरह पालन करें। Q3: अगर मेरी गलती से UFM हुआ — क्या NTA उसके खिलाफ अपील सुनती है या माफ कर देती है?नहीं — NTA पहले से कह चुकी है कि UFM पाए जाने पर रिजल्ट रद्द हो जाएगा और तीन साल तक परीक्षा देने का अवसर नहीं मिलेगा। किसी प्रकार की अपील स्वीकार नहीं की जाती है। इसलिए, अपील की कोशिश करने से पहले ही नियम पालन करें।

Assam Anti Polygamy Bill 2025: बहुविवाह पर सख़्त रोक: असम में बिल को मंजूरी

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असम विधानसभा ने 2025 में Polygamy-Ban Bill पास कर एक बड़ा सामाजिक बदलाव शुरू किया है। इस बिल के बाद अब राज्य में एक से ज्यादा शादी करना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाना, विवाह में समानता लाना और समाज में न्याय को मजबूत करना है। आसान शब्दों में समझें तो अब असम में कोई भी व्यक्ति पहली शादी होते हुए दूसरी शादी नहीं कर सकता, और अगर वह ऐसा करता है तो इसे अपराध माना जाएगा। इस नए कानून के तहत दोषी को 7 से 10 साल तक की जेल हो सकती है, और साथ ही पीड़ित महिला को मुआवज़ा भी दिया जाएगा। सरकार मानती है कि इस कानून से उन महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें बहुविवाह की वजह से आर्थिक और मानसिक तकलीफ झेलनी पड़ती थी। यह बिल समाज में एक संदेश देता है कि हर महिला को सम्मान, सुरक्षा और बराबरी का अधिकार है, और किसी भी तरह की धोखाधड़ी या छुपाई गई शादी अब कड़ी सजा के दायरे में आएगी। 🛑 असम में क्या हुआ — एक नई शुरुआत Assam Prohibition of Polygamy Bill, 2025 (असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025) को 27 नवंबर 2025 को राज्य विधानसभा में पास कर दिया गया है। इस बिल का मकसद असम में बहुविवाह (polygamy) यानी एक ही व्यक्ति का एक से अधिक विवाह: पूरी तरह रोकना है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने संसद में कहा कि ये कानून हर धर्म, हर समुदाय के लिए है — 🛑 इसका उद्देश्य महिलाओं कीक्या-क्या प्रावधान हैं – यदि कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा है और उसकी पहली शादी वैध है — फिर भी दूसरी शादी करता है — तो यह अपराध होगा। यदि दूसरी शादी करते समय पहले विवाह की जानकारी छिपाई गई — यानी पहली शादी होने का पता नहीं दिया — तो सजा और भी कड़ी: 10 साल तक जेल हो सकती है। 🛑 किन क्षेत्रों / समुदायों पर लागू नहीं होगा इस बिल का दायरा उन लोगों तक नहीं है जो Sixth Schedule (छठी अनुसूचित अनुचर्‍चा) वाले इलाकों में रहते हैं — जैसे Bodoland Territorial Region, इसी तरह, उन लोगों को भी बिल की पाबंदी से अलग रखा गया है जो अनुसूचित जनजाति (ST) से आते हैं। 👥 विवाह कराने वालों और दान-पोषक / अभिभावकों पर भी सजा अगर कोई धर्मगुरु / काजी / पंडित / गांव प्रमुख जानबूझकर या फरेब से ऐसी शादी कराता है — तो उसे जेल ( upto 2 साल) या जुर्माना (कुछ लाख ₹) हो सकता है। माता-पिता, अभिभावक, गांव प्रमुख या कोई भी ऐसा दान-पोषक जिसने पहले विवाह छुपा कर दूसरी शादी कराने में मदद की — वो भी कानून के दायरे में आएँगे। 💵 मुआवजा और सामाजिक सुरक्षा जो महिलाएं इस तरह की गैरकानूनी बहुविवाह की शिकार होंगी — उन्हें मुआवजा (compensation) देने का प्रावधान है। सरकार एक अधिकृत प्राधिकरण बनाएगी जो हर मामले की समीक्षा कर मुआवजा तय करेगा। अपराध साबित होने पर दोषी व्यक्ति चुनाव लड़ने, सरकारी नौकरी लेने या किसी भी सरकारी योजना में लाभ लेने के लिए योग्य नहीं होगा। क्यों लाया गया ये कानून — उद्देश्य और सामाजिक असर बहुविवाह में अक्सर महिलाओं को आत्म-गौरव, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा से वंचित होना पड़ता था; इस बिल का उद्देश्य उन्हें न्याय दिलाना है। राज्य सरकार की मंशा है कि निजी विवाह कानूनों में समान नागरिक अधिकार लागू हों। इस बिल को उन पहले कदमों में से एक माना जा रहा है। हालांकि यह कानून सभी पर लागू नहीं होगा — एसटी समुदाय व छठी अनुसूची क्षेत्र के लोगों को बहुविवाह की अपनी परंपराएं बनाए रखने की आजादी दी संभावित बहसें और चुनौतियाँ कुछ लोग इस बिल को धार्मिक आज़ादी या सांस्कृतिक आज़ादी की सीमाओं में हस्तक्षेप कह सकते हैं — विशेषत: वे समुदाय जो पारंपरिक रूप से बहुविवाह करते रहे हैं। छठी अनुसूची क्षेत्र और एसटी लोगों को छूट देना — कुछ लोगों के लिए ये असमान लग सकता है। ऐसे में “क्यों और किसके लिए” यह छूट होगी, इस पर बहस हो सकती है। मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया — कैसे तय होगा कि कौन पीड़ित महिला है, प्रमाण कैसे होंगे, अधिकारी कितने निष्पक्ष होंगे — इन सवालों के जवाब समय के साथ ही मिलेंगे। अब आगे क्या हो सकता है?राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि अगर फिर से सरकार बनी — तो वे Uniform Civil Code (UCC) लाने की तैयारी कर रहे हैं — और यह बिल, UCC की दिशा में पहला कदम है। लागू कानूनों की निगरानी और सही क्रियान्वयन — जैसे शिकायत, जांच, मुआवजा — यह देखना होगा कि नया कानून समाज में उतनी ही असरदार साबित हो जितना उसकी मंशा है। सामाजिक जागरूकता — केवल क़ानून पर्याप्त नहीं; लोगों में जागरूकता, समझदारी और महिलाओं के अधिकारों का सम्मान बढ़ना चाहिए। FAQs Q1. क्या असम में हर धर्म वाले लोग इस बिल से प्रभावित होंगे?हाँ — बिल धर्म, जात-पंथ, समुदाय देखे बिना लागू होगा। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई या अन्य — सभी पर polygamy रोक है। Q2. अगर कोई पहले विवाह को छुपा कर शादी करता है — सज़ा कितनी होगी?ऐसा करने पर 10 साल तक की जेल + जुर्माना हो सकती है। Q3. क्या एसटी समुदाय या छठी अनुसूची क्षेत्र के लोग इस कानून के दायरे में आएँगे?नहीं। एसटी समुदाय और छठी अनुसूची वाले इलाकों के लोग — इस बिल की पाबंदी से फिलहाल बाहर रखे गए हैं। Q4. क्या धर्मगुरु या पंडित अगर शादी कराएंगे तो उन्हें भी सज़ा होगी?हाँ। अगर वो जानबूझ कर या धोखे से ऐसी शादी कराते हैं — उन्हें 2 साल की जेल या जुर्माने का प्रावधान है। Q5. क्या महिलाएं मुआवजा भी पा सकती हैं?हाँ। इस बिल में ‘पीड़ित महिला’ को मुआवजा देने की व्यवस्था है — जिस पर सरकार एक प्राधिकरण बनाएगी।

AIBE 20 परीक्षा 2025: पूरी गाइडलाइन व तैयारी की जानकारी

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AIBE 20 परीक्षा 30 नवंबर 2025 को आयोजित की जाएगी, जिसके लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड, वैध फोटो ID प्रूफ, रिपोर्टिंग समय और परीक्षा केंद्र में ले जाने-न-ले जाने वाली वस्तुओं को लेकर विस्तृत निर्देश अनिवार्य रूप से पढ़ना जरूरी है। गाइडलाइन के अनुसार, परीक्षार्थी परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, ईयरफ़ोन, कैलकुलेटर या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ प्रवेश नहीं कर पाएंगे। केवल निर्धारित दस्तावेज़ और बुनियादी स्टेशनरी ले जाने की अनुमति होगी। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुँचे और प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर लें। BCI ने स्पष्ट किया है कि OMR शीट पर गलत जानकारी भरने, प्रतिबंधित सामग्री रखने या परीक्षा अनुशासन का उल्लंघन करने पर परीक्षा रद्द की जा सकती है। सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी परीक्षण केंद्रों पर कड़ी निगरानी की व्यवस्था की गई है। AIBE 20 परीक्षा 2025 – पूरी जानकारी हर वह LAW ग्रेजुएट जो भारत में वकालत करना चाहता है, उसके लिए Bar Council of India (BCI) द्वारा आयोजित All India Bar Examination (AIBE) 20 परीक्षा 30 नवंबर 2025 को आयोजित हो रही है। नीचे जानिए — इस परीक्षा के लिए क्या-क्या जरूरी है, और परीक्षा वाले दिन आपको किन नियमों का पालन करना है। AIBE 20 – कब, कहाँ और क्या हो रहा है परीक्षा तिथि: 30 नवंबर 2025 परीक्षा प्रारूप: 100 बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न, कानून की विभिन्न शाखाओं से। प्रवेश प्रमाणपत्र: एडमिट कार्ड पहले ही जारी हो चुका है — यदि आपने डाउनलोड नहीं किया है, तो तुरंत डाउनलोड करें। AIBE 20 – एडमिट कार्ड, फोटो-ID प्रूफ व अन्य दस्तावेज परीक्षा में शामिल होने के लिए नीचे दिए गए दस्तावेज ज़रूरी हैं: प्रिंट किया हुआ AIBE 20 Admit Card एक वैध सरकारी फोटो ID — Aadhaar, Passport, Voter ID, Driving Licence आदि स्वीकार्य हैं। (यदि ज़रूरत हो) PwD उम्मीदवारों के लिए वैध प्रमाण पत्र / सिक्रिब के कागजात बिना Admit Card या वैध ID के परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। परीक्षा केंद्र कब पहुँचें – उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे कम-से-कम 1 घंटे पहले परीक्षा केंद्र पहुँचें, ताकि फ्रीस्किंग व दस्तावेज़ जांच सही समय पर हो सके। अक्सर प्रवेश बंद होने का समय 1:15 बजे बताया गया है — इस समय के बाद प्रवेश नहीं मिलेगा। क्या लेकर जाएँ – और क्या नहीं Admit Card + Photo ID दो-तीन नीली / काली ball-point पेन — OMR शीट भरने के लिए।यदि आवश्यक हो, तो Bare Acts — लेकिन बिना नोट्स, हाइलाइट या टिप्पणियाँ। ❌ नहीं ले जाने योग्यमोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच या कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बैग, हैंडबैग, किताबें, नोट्स, पेन ड्राइव, कैलकुलेटर — कोई भी ऐसी चीज़ जो नियमों के विरुद्ध हो सकती है। पेंसिल या अन्य रंग के पेन से OMR भरना — केवल काली/नीली ही स्वीकार होगी। पेंसिल से भरने पर अयोग्य घोषित किया जा सकता है। परीक्षा के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें– प्रश्न-पुस्तिका सेट कोड, रोल नंबर आदि OMR शीट पर बिल्कुल ठीक भरें। गलती होने पर जवाब पत्र अमान्य हो सकता है। परीक्षा समाप्त होने से पहले हल-शीट जमा करना न भूलें। बिना सबमिशन के, परिणाम नहीं मिलेगा। परीक्षा हॉल से पहले निकलना, परीक्षात्मक अनुशासन का उल्लंघन होगा। PwD व ScribeCandidates के लिए कुछ ख़ास बातें यदि आप विशेष रूप से दिव्यांग (PwD) हैं और अतिरिक्त समय या scribe की व्यवस्था चाहते हैं, तो आपको समुचित डॉक्यूमेंटेशन (जैसे डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट) ले जाना होगा। scribe भी स्वयं ही आपको लाना होगा, तथा उसकी पहचान व योग्यताएं प्रमाणित होनी चाहिए। परीक्षा पासिंग क्राइटीरिया व Bare Acts AIBE 20 पास करने के लिए GEN / OBC उम्मीदवारों को कम-से-कम 45% अंक चाहिए होंगे; SC / ST / PwD के लिए 40% पासिंग मार्क्स हैं। ध्यान दें कि AIBE अब ओपन-बुक परीक्षा नहीं है। आप केवल बिना टिप्पणी वाले Bare Acts ला सकते हैं। नोट्स या किसी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी वाले Acts लेकर जाना वर्जित है। परीक्षा से पहले छात्रों के लिए सलाह परीक्षा केंद्र की लोकेशन पहले ही देख लें — ताकि दिन पर समय पर पहुँच सकें। Admit Card व ID की प्रति + मूल दोनों साथ रखें। अपने पेन तैयार रखें — Ball-point, काला/नीला। बैग, मोबाइल आदि पहले ही किसी भरोसेमंद व्यक्ति को दे दें — परीक्षा हॉल में ले जाने से बचें। शांत रहें, परीक्षा प्रारंभ से पहले निर्देश ध्यान से सुनें, OMR शीट को ठीक से भरें। FAQs Q1: AIBE 20 परीक्षा में मोबाइल या स्मार्टवॉच ले जा सकते हैं?A: नहीं। BCI ने स्पष्ट कहा है कि मोबाइल, स्मार्टवॉच, कैलक्युलेटर, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स परीक्षा हॉल में ले जाना वर्जित है। यदि आप इन्हें साथ पाए गए, तो आपका नाम परीक्षा से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। Q2: Bare Acts (कानून की मूल पुस्तकें) लेकर जाना है — नोट्स/हाइलाइटेड वर्शन चलेगा?A: Bare Acts लेकर जाना ठीक है, लेकिन नोट्स, हाइलाइट, कमेंट्स या किसी प्रकार की टिपण्णी वाली कॉपी वर्जित है। केवल साफ-सुथरी, बिना मार्किंग वाली Bare Act ही अनुमति है। Q3: यदि मैं देर से पहुँचूँ — क्या 1:15 बजे के बाद प्रवेश मिलेगा?A: नहीं। BCI की गाइडलाइन है कि 1:15 बजे के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। इसलिए建议 है कि आप समय पर पहुँचें।

Central government advice — एनपीएस से यूपीएस में स्विच करने की आखिरी मौका

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केंद्र सरकार ने एनपीएस (NPS) में शामिल कर्मचारियों से अपीलकी है कि वे 30 नवंबर 2025 तक यूपीएस (Unified Pension Scheme) विकल्प चुनें, ताकि बेहतर पेंशन और टैक्स फायदे मिल सकें। यूपीएस विकल्प- केंद्र सरकार ने सभी पात्र केंद्रशासित कर्मचारियों से एक जिम्मेदार चेतावनी जारी की है — अगर आप अभी भी एनपीएस (NPS) में हैं और एकीकृत पेंशन योजना (YUPS) का विकल्प लेना चाहते हैं, तो जल्दी आवेदन करें, क्योंकि 30 नवंबर 2025 अंतिम तारीख नज़दीक है। वित्त मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि नोडल ऑफिसों में भरा हुआ आवेदन पत्र जमा करना अनिवार्य है, साथ ही CRA (Central Recordkeeping Agency) पोर्टल पर ऑनलाइन भी अनुरोध किया जा सकता है। ये खबर भी पढ़े…मध्यप्रदेश ESB भर्ती परीक्षाएं 2025 टलीं — युवाओं की बढ़ी चिंता यूपीएस क्या है और क्यों है फायदेमंद? यूपीएस (Unified Pension Scheme) एक नई पेंशन योजना है, जिसे PFRDA (Pension Fund Regulatory and Development Authority) ने NPS के अंदर ऑप्शन के रूप में स्थापित किया है। गारंटीड पेंशन (assured pension): यूपीएस में पेंशन राशि सुनिश्चित होती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा बढ़ती है। स्विचिंग ऑप्शन: एक बार यूपीएस चुना तो बाद में वापस NPS में लौटने की भी सुविधा है (वन-टाइम, एक-तरफा स्विच)। कर छूट: यूपीएस में टैक्स लाभ भी उपलब्ध हैं, जो कई कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। त्यागपत्र और अनिवार्य सेवानिवृत्ति लाभ: यूपीएस में त्यागपत्र (resignation) और अनिवार्य सेवानिवृत्ति (compulsory retirement) पर विशेष लाभ हैं। आवेदन कैसे करें — स्टेप बाय स्टेप ये खबर भी पढ़े…एग्रीकल्चरल असिस्टेंट पदों पर भर्ती — जानिए पूरा प्रोसेस और योग्यता ऑनलाइन आवेदन पात्र कर्मचारी CRA (सेंट्रल रेकॉर्डकीपिं एजेंसी) की वेबसाइट या e-NPS पोर्टल पर लॉग इन करके “NPS से यूपीएस माईग्रेशन” सेक्शन में जाएँ और अपना अनुरोध सबमिट करें। ऑफलाइन आवेदन– आवेदन के लिए Form A2 भरें और इसे अपने नोडल कार्यालय में जमा करें। स्वीकृति और प्रोसेसिंग: नोडल ऑफिस निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सभी अनुरोधों पर कार्रवाई करेगा। ये खबर भी पढ़े…Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी स्विच-बैक ऑप्शन– यदि पहले यूपीएस चुना, तो आप वन टाइम, एक-तरफा स्विच करके NPS में वापस आ सकते हैं, पर उसके लिए कुछ शर्तें हैं — जैसे कि स्विच कम-से-कम एक साल पहले सुपरएन्नुएशन (सेवानिवृत्ति) या तीन महीने पहले VRS। सेवानिवृत्ति के बाद भी अप्लाई कर सकते हैं: अगर आप पहले (31 मार्च 2025 तक) रिटायर हो चुके हैं और NPS में थे, तो भी यूपीएस के लिए आवेदन करने का विवरण PFRDA की वेबसाइट पर है। सरकार का संदेश — जल्दी निर्णय लें वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह अंतिम मौका है। सरकार का मानना है कि यूपीएस में स्विच करने से कई कर्मचारी स्थिर और सुरक्षित पेंशन पा सकते हैं, खासकर उन लोगों को जो रिटायरमेंट के बाद भविष्य में आर्थिक अनिश्चितताओं से सावधान हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि इस विशेष अवधि में आवेदन न करने वाले कर्मचारी स्वतः NPS में ही बने रहेंगे। असली घटनाक्रम और चुनौतियाँ हालांकि विकल्प बढ़ाया गया है, लेकिन बहुसंख्यक कर्मचारी अभी भी NPS में बने हुए हैं। उदाहरण के लिए, एक रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय कर्मचारियों में से लगभग 96% ने यूपीएस में स्विच नहीं किया ह कुछ कर्मचारी संगठन और प्रतिनिधि अधिक समय की मांग कर रहे थे, इसलिए पहले जून की बजाय समय सीमा सितंबर में, और अब 30 नवंबर 2025 तक बढ़ा दी गई है। एक बार यूपीएस चुने जाने के बाद भी, कर्मचारी स्व-स्वीकार (resignation) या अनिवार्य सेवानिवृत्ति (compulsory retirement) जैसी परिस्थितियों में पूर्ण लाभ पाने के लिए न्यूनतम सेवा अवधि (जैसे 25 साल) पूरा करना होगा। FAQs

World Tourism : दुनिया की 8 रहस्यमयी जगहें जहां आम लोगों की एंट्री बैन

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दुनिया की 8 रहस्यमयी और प्रतिबंधित जगहें जानें, जहां सुरक्षा, संस्कृति और खतरों के कारण आम लोगों की एंट्री पूरी तरह बैन है। भूमिका: दुनिया में कुछ जगहें पूरी तरह बैन क्यों हैं? World Tourism हमें यात्रा की आज़ादी का महत्व समझाता है, लेकिन दुनिया में कई ऐसी जगहें भी हैं जहां जाना आम लोगों के लिए पूरी तरह मना है। ये स्थान या तो अत्यधिक सुरक्षित सैन्य क्षेत्र हैं, या फिर सांस्कृतिक रूप से इतने महत्वपूर्ण हैं कि उन्हें छूना भी गलत माना जाता है। कुछ जगहें प्राकृतिक रूप से इतनी खतरनाक हैं कि वहां जाना जीवन के लिए जोखिम भरा हो सकता है। नीचे हम आसान और शैक्षणिक भाषा में उन 8 सबसे प्रतिबंधित जगहों के बारे में पढ़ेंगे। यह पहाड़ भूटान में स्थित है और इसे स्थानीय लोग बहुत पवित्र मानते हैं। इसकी ऊँचाई लगभग 7,570 मीटर है, लेकिन 2003 में भूटान सरकार ने यहां पर्वतारोहण पूरी तरह बंद कर दिया। सरकार का कहना है कि यह क्षेत्र देवी-देवताओं का निवास माना जाता है, इसलिए यहां मानवीय हस्तक्षेप सही नहीं है। यह आज भी दुनिया का सबसे ऊँचा ऐसा पर्वत है जिस पर अब तक कोई नहीं चढ़ा। यह पूरा सैन्य परिसर ग्रेनाइट पर्वत के अंदर बनाया गया है। यह इतना मजबूत है कि परमाणु हमले की स्थिति में भी सुरक्षित रह सकता है। यहां अमेरिका की कई सुरक्षा एजेंसियां काम करती हैं। आम नागरिकों के लिए यहां प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का अत्यंत संवेदनशील स्थान है। वर्जीनिया, USA में स्थित यह जगह पूरी तरह अंडरग्राउंड और अत्यधिक गोपनीय है। इसे किसी बड़े संकट, जैसे युद्ध या राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान शीर्ष नेताओं को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है।यह US Government’s Continuity of Operations Plan का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए यहां केवल उच्च अधिकारी ही प्रवेश कर सकते हैं। नेवादा में स्थित Area 51 दुनिया की सबसे रहस्यमयी सैन्य जगहों में गिनी जाती है। यहां उन्नत हवाई जहाज, हथियार तकनीक और सीक्रेट प्रोजेक्ट्स पर रिसर्च होता है। पॉप-कल्चर में इसे UFOs और एलियंस से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सरकार ने इसकी गतिविधियों पर हमेशा गोपनीयता बनाए रखी है।यहां जाना तो छोड़िए, इसकी सीमा के करीब जाना भी अपराध माना जाता है। पहले इसे Vatican Secret Archives कहा जाता था, लेकिन नाम बदलकर अब Vatican Apostolic Archives रखा गया है। यहां चर्च से जुड़े हजारों वर्षों पुराने दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। यहां आम लोगों की एंट्री बिल्कुल नहीं होती, और सिर्फ अधिकृत शोधकर्ताओं को सीमित समय के लिए अंदर जाने की अनुमति दी जाती है। रूम 39 प्योंगयांग में स्थित एक सीक्रेट दफ्तर है, जो माना जाता है कि विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए काम करता है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह दफ्तर व्यापार, सोने के लेन-देन और साइबर गतिविधियों में शामिल हो सकता है। इसकी गतिविधियां इतनी गोपनीय हैं कि लोग इसके अस्तित्व पर भी सवाल उठाते हैं। ये खबर भी पढ़े…IRCTC Tour Package: सिर्फ इतने रुपए में करें हिमाचल की वादियों का दीदार ब्राजील के तट से दूर स्थित Ilha da Queimada Grande को लोग Snake Island कहते हैं। यहां दुनिया के सबसे ज़हरीले सांप पाए जाते हैं, जिनमें Golden Lancehead Viper सबसे खतरनाक है। इस द्वीप पर इंसान का जाना जीवन के लिए भारी खतरा पैदा कर सकता है, इसलिए ब्राजील की नौसेना ने इसे पूरी तरह बंद कर दिया है। ये खबर भी पढ़े…भारत के अनदेखे वेडिंग डेस्टिनेशन जहाँ आपका ड्रीम वेडिंग सच हो सकता है यह चीन के पहले सम्राट Qin Shi Huang का मकबरा है। इसके आसपास खुदाई में Terracotta Army मिली थी, लेकिन मुख्य मकबरे को आज तक नहीं खोला गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि अंदर पारे की नदियां और रासायनिक तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो इंसानों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। ये खबर भी पढ़े…IRCTC का ख़ास कश्मीर टूर पैकेज: सिर्फ ₹35,550 में न्यू ईयर में स्वर्ग जैसा सफर क्यों प्रतिबंध ज़रूरी हैं? इन जगहों पर पाबंदियां केवल सुरक्षा कारणों से नहीं लगाई गई हैं।कुछ स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़े हैं, जिनका संरक्षण बहुत जरूरी है।कुछ क्षेत्र इतने खतरनाक हैं कि वहां इंसानी उपस्थिति बड़ा हादसा करा सकती है।सरकारें भी कई जगहों पर गोपनीय प्रोजेक्ट्स और सुरक्षा कारणों से नियंत्रण बनाए रखती हैं। FAQs एरिया 51 दुनिया की सबसे प्रतिबंधित जगहों में गिनी जाती है, क्योंकि यह उन्नत सैन्य परीक्षण और गोपनीय तकनीकी शोध का केंद्र है। स्नेक आइलैंड पर अत्यधिक जहरीले Golden Lancehead Viper सांप पाए जाते हैं, जो इंसान को मिनटों में मार सकते हैं, इसलिए यहां आम लोगों की एंट्री पूरी तरह बैन है। भूटान सरकार ने इसे पवित्र पर्वत मानते हुए 2003 में पर्वतारोहण पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिससे स्थानीय धार्मिक आस्थाएँ सुरक्षित रह सकें।

मध्यप्रदेश ESB भर्ती परीक्षाएं 2025 टलीं — युवाओं की बढ़ी चिंता

मध्यप्रदेश के लाखों युवा, जो 2025 में होने वाली बड़ी भर्तियों की तैयारी में महीनों से जुटे थे, अब निराश नज़र आ रहे हैं। वजह साफ है—मप्र कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने साल 2025 की चार प्रमुख भर्ती और पात्रता परीक्षाएं आगे बढ़ा दी हैं। जिन परीक्षाओं का इंतजार सबसे ज्यादा था, जैसे उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा, वनरक्षक-क्षेत्ररक्षक और जेल प्रहरी भर्ती, समूह-03 उपयंत्री परीक्षा और आईटीआई प्रशिक्षण अधिकारी परीक्षा—ये सभी अब 2026 में आयोजित होंगी। ये खबर भी पढ़े…एग्रीकल्चरल असिस्टेंट पदों पर भर्ती — जानिए पूरा प्रोसेस और योग्यता उदेश्य मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) की भर्ती परीक्षाएँ हमेशा से लाखों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का बड़ा माध्यम रही हैं। लेकिन 2025 का साल उन अभ्यर्थियों के लिए कठिन साबित हुआ है, जो सालभर तैयारी करते रहे और अब परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। ESB के आधिकारिक कैलेंडर में शामिल चार बड़ी भर्ती और पात्रता परीक्षाएँ इस साल आयोजित नहीं हो पाएंगी, जिससे लाखों उम्मीदवारों की चिंता और बढ़ गई है। ये खबर भी पढ़े…Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी इन परीक्षाओं में— उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा (HSTET) वनरक्षक, क्षेत्ररक्षक और जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा समूह-03 उपयंत्री भर्ती परीक्षा आईटीआई प्रशिक्षण अधिकारी भर्ती परीक्षा शामिल हैं। मंडल अब इन परीक्षाओं को 2026 के शेड्यूल में शामिल करेगा। यह जानकारी ESB की कार्ययोजना और विभागीय प्राथमिकताओं की समीक्षा से सामने आई है। ये खबर भी पढ़े…उत्तराखंड में UKMSSB ने निकाली नर्सिंग अधिकारी भर्ती: 587 पदों के लिए 2025 में अवसर क्यों टलीं MP ESB 2025 की मुख्य भर्ती परीक्षाएं? ESB ने इन परीक्षाओं को आगे बढ़ाने के दो प्रमुख कारण बताए हैं। पूरी कहानी इस प्रकार है— मंडल ने सबसे पहले उन परीक्षाओं को प्राथमिकता दी जो मूल वार्षिक कैलेंडर में शामिल नहीं थीं, लेकिन विभागों द्वारा तुरंत भर्ती की आवश्यकता बताई गई थी। इनमें शामिल हैं— आबकारी आरक्षक भर्ती पुलिस आरक्षक भर्ती सूबेदार (स्टेनो) ASI SI भर्ती परीक्षा इन नई व महत्वपूर्ण परीक्षाओं की वजह से ESB का पूरा शेड्यूल बदल गया। ऐसे में जो परीक्षाएं पहले से तय थीं, वे पीछे चली गईं। कितने आवेदन आए थे पिछली बार? चारों प्रमुख परीक्षाओं में पहले आए भारी आवेदन बताते हैं कि इन पर युवाओं की कितनी निर्भरता है— परीक्षा आवेदन पद फॉरेस्ट गार्ड/फील्ड गार्ड/जेल प्रहरी परीक्षा 2022 10,13,529 2,285 समूह-03 उपयंत्री भर्ती 2024 32,606 243 ITI प्रशिक्षण अधिकारी 2024 1,21,923 326 उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2022 1,85,118 योग्यता आधारित मध्यप्रदेश में ESB लगभग 50 ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों पर ही परीक्षाएं आयोजित कराता है।इन केंद्रों की क्षमता सीमित है— रोजाना अधिकतम 25–30 हजार उम्मीदवार ही परीक्षा दे पाते हैं। कई केंद्र अभी भी आधुनिक तकनीकी मानकों पर खरे नहीं उतरते। सुरक्षा और सर्वर क्षमता की समस्याएँ भी सामने आती हैं। इस वजह से जिन भर्ती परीक्षाओं में लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं, उन्हें सुरक्षित और सुचारू रूप से आयोजित करना चुनौती बन जाता है। कितने आवेदन आए थे पिछली बार? चारों प्रमुख परीक्षाओं में पहले आए भारी आवेदन बताते हैं कि इन पर युवाओं की कितनी निर्भरता है— परीक्षाआवेदन पद फॉरेस्ट गार्ड/फील्ड गार्ड/जेल प्रहरी परीक्षा 2022 10,13,529 2,285समूह-03 उपयंत्री भर्ती 2024 32,606 243ITI प्रशिक्षण अधिकारी 2024 1,21,923 326उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2022 1,85,118 योग्यता आधारित युवाओं की प्रतिक्रिया: इंतजार अब और लंबा कई अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई है। छात्र कहते हैं कि— परीक्षा कैलेंडर पर भरोसा करके तैयारी की जाती है। लेकिन बार-बार तिथियाँ बदली जाने से भविष्य योजना प्रभावित होती है। आर्थिक दबाव भी बढ़ता है क्योंकि तैयारी लंबी चलती जाती है। सरकार और ESB का कहना है कि सभी परीक्षाएं 2026 में बेहतर व्यवस्था, अधिक केंद्रों और सुरक्षित सिस्टम के साथ कराई जाएंगी। 2026 में क्या बेहतर होगा? सूत्रों के अनुसार: कई नए डिजिटल परीक्षा केंद्रों का प्रस्ताव तैयार है। तकनीकी अपग्रेडेशन पर तेजी से काम चल रहा है। ESB नए सर्टिफाइड परीक्षा केंद्र जोड़ने की प्रक्रिया में है। इन सुधारों के बाद बड़ी परीक्षाओं के आयोजन में परेशानी कम होगी। मुख्य कारण यह है कि ESB ने इस साल उन परीक्षाओं को प्राथमिकता दी जो पहले कैलेंडर में नहीं थीं। साथ ही सीमित ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों की वजह से बड़े स्तर की परीक्षाएं आयोजित करना मुश्किल था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ये सभी 4 प्रमुख परीक्षाएं अब 2026 के शेड्यूल में शामिल की जाएंगी। नोटिफिकेशन और रूलबुक भी अगले साल जारी होंगे। चारों परीक्षाओं में कुल मिलाकर 13 लाख से ज्यादा आवेदन आए थे, जिसके कारण इन परीक्षाओं के लिए बड़े स्तर की व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ती है।