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खाकी सख्त, हेलमेट अनदेखा करना भारी पड़ेगा – तीसरी बार चालान होने पर जुर्माना दोगुना!

भोपाल सड़कों पर लोगों के चालान काट खुद नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले पुलिसकर्मियों को यातायात सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब बहुत भारी पड़ेगी। पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (पीटीआरआई) ने पुलिसकर्मियों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य किया है। नए निर्देशों में कहा गया है कि दो बार से अधिक बिना हेलमेट किसी पुलिसकर्मी का चालान हुआ तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। बात यहीं तक नहीं है। नये आदेशों में यह भी है कि इस कार्रवाई के बाद भी पुलिसकर्मी यातायात सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने से बाज नहीं आए तो उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी। यानी इस मनमानी से उनकी नौकरी पर भी आंच आ सकती है। पीटीआरआई के इस निर्देश के बाद पूरे प्रदेश की पुलिस में हलचल मच गई है। भोपाल में ही अब तक 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के चालान बनाए जा चुके हैं। इनमें अधिकतर ऐसे हैं जो बिना हेलमेट ड्यूटी पर या निजी काम से दोपहिया वाहन लेकर निकले थे। कई मामलों में तो पुलिसकर्मी खुद ट्रैफिक सिग्नल तोड़ते या मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाते हुए पकड़े गए।   पीटीआरआई ने सभी जिला पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर नियमित निगरानी रखें और यदि कोई नियमों की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। यह भी कहा गया है कि सड़क पर पुलिसकर्मी आम जनता के सामने अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक होते हैं, ऐसे में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे खुद ट्रैफिक नियमों का पालन कर उदाहरण प्रस्तुत करें। अधिकारियों का कहना है कि इस सख्ती का मकसद केवल अनुशासन बनाना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति पुलिसकर्मियों में जागरूकता बढ़ाना भी है। अगर पुलिस ही नियमों को तोड़ेगी तो जनता से पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है? इस तरह पकड़ में आएगी खाकी की बदमाशी चालानी कार्रवाई के दौरान पुलिस नाम और मोबाइल नंबर का ब्यौरा लेती है। जिस-जिस व्यक्ति का चालान बनता है, उसका रिकॉर्ड जिला पुलिस के पास दर्ज होता है। एक निश्चित समय के बाद जिला पुलिस देखेगी कि कितने पुलिसकर्मियों पर लगातार हेलमेट नहीं पहनने को लेकर कार्रवाई हुई है। उनका डाटा तैयार किया जाएगा और फिर दो बार से अधिक उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव तैयार होगा। पुलिस को समाज के आदर्श के रूप में देखा जाता है। नए आदेश के जरिए पुलिसकर्मियों में हेलमेट के प्रति अनुशासन बढ़ाने का प्रयास है। यदि वे लगातार उल्लंघन करते पाए जाते हैं तो कार्रवाई होगी। शाहिद अवसार, एआईजी, पीटीआरआई।

UPI पेमेंट का नया दौर: चेहरे से तुरंत भुगतान — सुरक्षा और तरीका एक नज़र में

नई दिल्ली NPCI (नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नए डिजिटल पेमेंट फीचर्स का ऐलान किया है. नए फीचर के तहत बिना PIN के भी UPI पेमेंट की जा सकेगी. अभी तक UPI पेमेंट करने के लिए यूजर्स को पिन एंटर करना होता था, लेकिन अब यूजर्स बायोमैट्रिक्स के जरिए पेमेंट कर सकेंगे.  साथ ही स्मार्ट ग्लासेस के जरिए भी पेमेंट हो सकेगी. इससे UPI का इस्तेमाल आसान होगा. यूजर्स किसी भी पेमेंट को वेरिफाई करने के लिए अपने फिंगरप्रिंट या फेस अनलॉक का इस्तेमाल PIN की जगह कर सकते हैं. ये फीचर यूजर्स को मैन्युअली सेट करना होगा.  इन बातों का रखें ध्यान  शुरुआत में बायोमैट्रिक्स के जरिए UPI पेमेंट को सीमित रखा गया है. यूजर्स 5000 रुपये तक की ही पेमेंट इसके जरिए कर सकते हैं. स्मार्टफोन के जरिए होने वाले UPI पेमेंट में बायोमैट्रिक्स का इस्तेमाल किया जा सकेगा. माना जा रहा है कि इससे UPI पेमेंट आसान और सुरक्षित तरीके से होंगे.  इस फीचर के आने के बाद यूजर्स को अब PIN एंटर नहीं करना होगा. हालांकि, बड़ी पेमेंट्स के लिए अभी भी बायोमैट्रिक्स की जरूरत होगी. UPI की ये सर्विस शुरू हो गई है. हालांकि, अभी ज्यादातर UPI सर्विस ऑफर करने वाले ऐप्स पर ये सुविधा नहीं मिल रही है. आइए जानते हैं आप इस सर्विस को एक्टिवेट कैसे कर सकते हैं.  कैसे इस्तेमाल कर सकेंगे बायोमैट्रिक्स ऑथेंटिकेशन?      सबसे पहले आपको UPI ऐप ओपन करना होगा. इसके बाद आपको एक नई पेमेंट शुरू करनी होगी.       इसके लिए आप किसी QR कोड को स्कैन कर सकते हैं या फिर किसी कॉन्टैक्ट को चुन सकते हैं.      अब आपको पेमेंट का अमाउंट एंटर करना होगा. फिर बैंक चुनना होगा जिससे पैसे ट्रांसफर करना चाहते हैं.      जब आपसे UPI PIN एंटर करने के लिए कहा जाए, तो आपको यूज बायमैट्रिक का विकल्प चुनना होगा. हालांकि, ये विकल्प अभी ज्यादातर ऐप्स पर नहीं दिख रहा है.      आपको अपना फिंगरप्रिंट या फेस ऑथेंटिकेट करना होगा. इसके बाद कन्फर्मेशन मैसेज का इंतजार करना होगा. कन्फर्मेशन के बाद पेमेंट ऑटोमेटिक हो जाएगी.  

इंदौर मेट्रो अपडेट: ट्रायल रन के बाद अब रेडिसन चौराहा तक कमर्शियल संचालन की तैयारीइंदौर मेट्रो अपडेट: ट्रायल रन के बाद अब रेडिसन चौराहा तक कमर्शियल संचालन की तैयारी

इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन का 17 किलोमीटर का ट्रायल रन गुरुवार को पूरा हुआ। अब गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का ट्रायल रन की राह आसान हो गई है। पहली बार मेट्रो ट्रेन सुखलिया ग्राम, विजय नगर और मालवीय नगर क्षेत्र के लोगों ने ट्रेक पर चलते हुए देखी। पहले दिन मेट्रो ट्रेन ने यह सफर एक घंटे में पूरा किया। पहली बार मेट्रो ट्रेन की स्पीड काफी कम रखी गई थी। अब धीरे-धीरे रफ्तार के साथ रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का ट्रायल रन होगा। अगले साल तक 17 किलोमीटर तक मेट्रो का संचालन शुरू हो जाएगा। मेट्रो ट्रेन गांधी नगर स्टेशन से निकली। सात किलोमीटर तक स्पीड तेज रखी गई, लेकिन चंद्रगुप्त मोर्य प्रतिमा चौराहे के पास कम स्पीड में ट्रायल रन लिया गया। पहली बार मेट्रो को देख शहरवासी रुक गए और हाथ हिलाकरअभिवादन करने लगे। हार्न बजाते हुए मेट्रो धीरे-धीरे रेडिसन चौराहा तक पहुंची, फिर गांधी नगर डिपो की तरफ रवाना हुई।   तीन स्टेशन तैयार नहीं अभी मेट्रो के तीन स्टेशन पूरी तरह तैयार नहीं हुए है। इस कारण रेडिसन चौराह तक मेट्रो की सवारी शहरवासी टिकट लेकर नहीं कर सकते है। चार माह के भीतर तीनों स्टेशन तैयार हो जाएंगे। इसके बाद फिर मेट्रो कार्पोरेशन कमर्शियल रन की अनुमति लेगी। दो साल पहले मेट्रो का सात किलोमीटर का ट्रायल रन हुआ था। दो माह में 13 किलोमीटर तक का ट्रायल रन हुआ। अब गुरुवार को 17 किलोमीटर तक मेट्रो ट्रेन चली, लेकिन इससे आगे के ट्रायल में अब लंबा समय लगेगा, क्योकि खजराना चौराहा तक मेट्रो के ट्रेक भी अभी तक नहीं बन पाए है।    

शिक्षा रैंकिंग में ऑक्सफोर्ड का जलवा कायम, भारत को टॉप 100 में नहीं मिली जगह

नई दिल्ली टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 जारी कर दी गई है और एक बार फिर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय दुनिया का टॉप विश्वविद्यालय बना है. लगातार दसवें साल ऑक्सफोर्ड ने यह प्रतिष्ठित स्थान हासिल किया है. रैंकिंग में चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी तीसरे साल लगातार 12वें स्थान पर रही, जबकि पेकिंग यूनिवर्सिटी 13वें स्थान पर रही. खास बात यह है कि इस बार टॉप 100 में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय शामिल नहीं है. 14 साल में पहली बार एशिया के विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई है. भारतीय विश्वविद्यालय शीर्ष 100 में नहीं हैं. इसके बावजूद, सूचीबद्ध विश्वविद्यालयों की कुल संख्या में भारत अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है. चीन ने 13 विश्वविद्यालयों के साथ अपनी स्थिति मजबूत रखी है. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) इस बार 17वें स्थान पर रही. अमेरिका का दबदबा टॉप 10 में अमेरिका के 7 विश्वविद्यालय शामिल हैं. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) दूसरे स्थान पर है. प्रिंसटन विश्वविद्यालय ने इस बार संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर पहुंचकर अपनी अब तक की सर्वोच्च रैंकिंग हासिल की है. पिछले साल की तुलना में शीर्ष 20 में छह विश्वविद्यालयों की संख्या कम हुई है. शीर्ष 100 में अमेरिका के विश्वविद्यालयों की संख्या 35 रह गई है, जबकि शीर्ष 500 में कुल 102 अमेरिकी संस्थान शामिल हैं, जो अब तक का सबसे कम रिकॉर्ड है. ब्रिटेन की स्थिति टॉप 10 में ब्रिटेन के तीन विश्वविद्यालय शामिल हैं. ऑक्सफोर्ड पहले स्थान पर है, कैम्ब्रिज तीसरे स्थान पर और इंपीरियल कॉलेज लंदन आठवें स्थान पर है. यूके के 105 रैंक वाले विश्वविद्यालयों में से 27% की रैंक में गिरावट आई है और केवल 12% विश्वविद्यालयों में सुधार देखा गया है. लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) 52वें स्थान पर और यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक 122वें स्थान पर हैं. भारतीय विश्वविद्यालयों का हाल भारतीय विश्वविद्यालयों की स्थिति इस रैंकिंग में निराशाजनक रही. भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) को 201-250 के बीच स्थान मिला है. जामिया मिलिया इस्लामिया 401-500, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय 501-600, आईआईटी इंदौर 501-600, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय 501-600 और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय 601-800 रैंक में शामिल हैं. यह दर्शाता है कि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान अब भी वैश्विक स्तर पर अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं.

लिवर की हेल्थ का सीक्रेट: कुल वजन में मामूली कमी से मिल सकता है बड़ा फायदा

मुंबई  पुराने जमाने में लोग शरीर में मोटापा बढ़ने को स्वस्थ और हट्टा-कट्टा होने की निशानी समझते थे लेकिन वास्तव में मोटापा कई बीमारियों की जड़ है. खासतौर पर आजकल के दौर में बहुत सारे लोग मोटापे से जूझ रहे हैं जिसकी वजह से उन्हें फैटी लिवर, लिवर की कई और बीमारियों, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिसीस और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां होने का भी रिस्क होता है.          अमेरिका की हेल्थ वेबसाइट Webmd ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दुनिया भर में हुई रिसर्च से इस बात के सबूत मिले हैं  कि केवल वजन कम करने से ही प्री-सिरोसिस MASLD (Metabolic dysfunction-associated steatotic liver disease) को रिवर्स किया जा सकता है. प्री-सिरोसिस MASLD का मतलब ऐसी कंडीशन जो आगे चलकर गंभीर रूप से लिवर डैमेज, लिवर कैंसर और मौत का रिस्क बढ़ाती है.  Webmd ने आगे बताया कि वजन घटाने और MASLD पर किए गए अध्ययनों का जब साल 2021 में रिव्यू किया गया तो उसमें पाया गया कि MASH से पीड़ित 85% से 90% लोगों, जिन्होंने अपने शुरुआती शरीर के वजन का करीब 10% कम किया था, उनका एक साल बाद ही MASH ठीक हो गया था.  वजन कम करने के कई तरीके हैं जिनमें सबसे हेल्दी और असरदार तरीका है अपना खानपान कंट्रोल में करना. वजन बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से दूरी ही आपकी आधी से ज्यादा परेशानी हल कर देती है. इसके अलावा कितना खाते हैं, कितनी बार खाते हैं और किस समय खाते हैं, इसकी निगरानी कर भी तेजी से वजन घटाया जा सकता है. इसके अलावा रोज की फिजिकल एक्टिविटी यानी आप दिन भर में कितने सक्रिय रहते हैं, यह भी आपके वजन को प्रभावित करता है. अगर आप हेल्दी डाइट के साथ रोजाना कोई ना कोई एक्सरसाइज जैसे वॉक, जॉगिंग, साइकिलिंग, स्विमिंग या योग करते हैं तो आप आसानी से अपना वजन कम कर सकते हैं.  कुल मिलाकर अगर आप फैटी लिवर की बीमारी के खतरे से बचना चाहते हैं या फिर अगर आपको यह बीमारी है तो उससे छुटकारा पाना है तो तुरंत अपना वजन कम करने में जुट जाएं. इससे आप फैटी लिवर की बीमारी को रिवर्स कर सकते हैं. लिवर हमारे शरीर के लिए बहुत सारे काम करता है. यह खून को साफ करता है, टॉक्सिंस को बाहर निकालता है, पाचन में सहायता करता है, शरीर में संक्रमण से लड़ने में भी मदद करता है. इसलिए हमें हमेशा अपने लिवर की हेल्थ का ख्याल रखना चाहिए. 

घुसपैठ पर सख्ती: CM मोहन यादव ने पुलिस को दिए निर्देश – \’जेल भेजो बांग्लादेशी घुसपैठियों को\’

भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कलेक्टर-कमिश्नर और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी तरह बांग्लादेश घुसपैठियों को रहने की इजाजत नहीं है। इन्हें ढूंढकर जेल में भेजो। यह लोग प्रदेश में आकर छिपकर रहने लगते हैं। इन पर नजर रखी जाए। सीएम ने बढ़ते महिला अपराधों पर नाराजगी व्यक्त की सीएम डॉ मोहन यादव ने महिला अपराधों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब ऑनलाइन समाधान बैठक होती है तो शाम को ही गुमशुदा महिला मिल जाती है। वर्ना दो-दो महीनों तक उनका कोई पता नहीं रहता है। ऐसे बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाना होगा। प्रदेश में ड्रग माफिया, जमीन माफिया और दूसरे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। एसपी ध्यान रखें कि सिर्फ बेसिक पुलिसिंग से काम नहीं चलने वाला। नई रणनीतियां तैयार करके अपराधियों को जेल में डालना होगा। बस्तियों में पनप रहा नेटवर्क राज्य में देखा गया है कि संकरी गलियों या बस्तियों में अपराधियों का नेटवर्क ऑपरेट होता है। जहां पर कई बार पुलिस जाने से भी कतरती है। इस मामले पर सीएम ने कहा कि संकरी गलियों वाली बस्ती या मोहल्ले को चिन्हित करें। यहां पर अपराधी अपना गढ़ बनाकर काम कर रहे हैं। 

मासूमों की मौत पर न्याय की उम्मीद: कफ सिरप मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई

भोपाल  बीते कुछ समय से देश के कई राज्यों में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। इन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस संबंध में वकील विशाल तिवारी द्वारा एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज  यानी शुक्रवार, 10 अक्टूबर को सुनवाई का भरोसा दिया है। दर्ज याचिका में मांग की गई है कि इस संवेदनशील मामले की गहन जांच राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या सीबीआई के माध्यम से विशेषज्ञों की समिति बनाकर कराई जाए। यह जनहित याचिका गंभीर स्वास्थ्य संकट और दवा सुरक्षा पर तत्काल ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को उजागर करती है। विषैले रसायनों की बिक्री पर सख्त नियम बनाने की मांग याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज द्वारा किए जाने की मांग की है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने याचिका में उन रसायनों के उपयोग पर सख्त नियम बनाने की मांग की गई है, जिनके कारण बच्चों की मौतें हुई हैं। बता दें कि इन रसायनों में डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल शामिल है। विषैले सिरप बनाने कंपनी के लाइसेंस को रद्द करने की मांग याचिका में कफ सिरप के नाम पर "विषैले सिरप" बनाने वाली इन कंपनियों के लाइसेंस तुरंत रद्द की मांग की गई है। कहा गया है कि इन कंपनियों को फौरन बंद किया जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, बाजारों में उतरे कंपनियों के प्रोडक्ट को वापस मंगाया जाए, ताकि अन्य लोगों को बचाया जा सके। साथ ही एक प्रभावी ड्रग्स रिकॉल पॉलिसी बनाने की आवश्यकता के बारे में याचिका में मांग की गई है। पीड़ितों के लिए मुआवजा की मांग सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी की गई है, ताकि इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को कुछ हद तक राहत मिल सके। वकील विशाल तिवारी ने मांग की है कि बच्चों की मौत के संबंध में विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक ही जगह ट्रांसफर किया जाए, ताकि जांच में तेजी लाई जा सके। इससे जांच सही तरीके से हो पाएगी और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सकेगी।  Coldrif पर 2 साल पहले ही लग चुकी थी रोक, WHO ने भी मांगा स्पष्टीकरण यह कफ सिरप जिस फॉर्मूले से बनाई गई थी, उसे सरकार दो साल पहले ही 4 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रतिबंधित कर चुकी थी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने 18 दिसंबर 2023 को राज्यों को आदेश में कहा था कि क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट आईपी 2 मिलीग्राम और फेनाइलफ्राइन एचसीएल आईपी 5 मिलीग्राम कॉम्बिनेशन को चार साल तक के बच्चों को नहीं दिया जाए। यह आदेश फाइल 04-01/2022- डीसी के तहत जारी किया गया। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव ङ्क्षसह रघुवंशी की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि इस कॉम्बिनेशन वाले सिरप के लेबल और प्रचार सामग्री पर चेतावनी भी छापी जाए। इसके बाद भी पालन नहीं हुआ। तमिलनाडु सरकार ने की कंपनी सील बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने कांचीपुरम स्थित एक फार्मास्युटिकल फैक्ट्री को सील कर दिया है। कार्रवाई कोल्ड्रिफ कफ सिरप के कारण हुई। तमिलनाडु के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने 4 अक्टूबर को सिरप के नमूनों को मिलावटी घोषित किया था।  तमिलनाडु ने झाड़ा पल्ला तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोलर और वहां की सरकार ने श्रीसन को बंद कराने के बाद पल्ला झाड़ लिया है। मप्रस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वहां के ड्रग कंट्रोलर बताने को तैयार नहीं कि कोल्ड्रिफ में अवैध रूप से उपयोग किया जाने वाला जहरीला सॉल्वेंट बनाने वाली कंपनी ने कितनी मात्रा में निर्माण किया। श्रीसन को कब से बेच रही थी। किन राज्यों को सप्लाई किया। केंद्र को बताया तमिलनाडु की कंपनियों (Coldrif) व अफसरों की अनदेखी के कारण जहरीले कारोबार को मप्र समेत कई राज्यों में जगह मिली। मप्र सरकार की ओर से बुधवार को विस्तृत जानकारी केंद्र को दी गई। 1470 कंपनियों के पास प्रमाण पत्र नहीं केंद्र ने दवा कंपनियों के लिए डब्ल्यूएचओ प्रमाणपत्र अनिवार्य किया था। 5308 में 1470 कंपनियों ने आवेदन तक नहीं किया। डब्ल्यूएचओ सक्रिय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 'Coldrif' के निर्यात के संबंध में भारतीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। स्वास्थ्य एजेंसी ने भारतीय अधिकारियों से पूछा है कि यह सिरप विदेश भेजा गया है या नहीं। ताकि जरूरत पड़ने पर अलर्ट जारी किया जा सके।

पीएम स्वनिधि योजना का असर: 13.46 लाख लोगों को मिला आसान ऋण, ₹2,078 करोड़ बांटे गए

पीएम स्वनिधि योजना में 13.46 लाख हितग्राहियों को दिया गया 2 हजार 78 करोड़ का ऋण ऋण राशि को भी बढ़ाया गया शहरी पथ-विक्रेताओं को जोड़ा जा रहा है अन्य योजनाओं से भी भोपाल प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में शहरी पथ-विक्रेताओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिये पीएम स्वनिधि योजना में अब तक 13 लाख 46 हजार प्रकरणों में 2 हजार 78 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से हितग्राहियों को ब्याज सब्सिडी के रूप में 30 करोड़ रुपये की राशि भी दी गई है। पीएम स्वनिधि में देश में पहले स्थान पर केन्द्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना का पुनर्गठन कर इसकी अवधि 31 मार्च, 2030 तक बढ़ा दी है। पथ-विक्रेताओं को योजना का लाभ देने के मामले में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। प्रदेश के 3 नगरीय निकायों उज्जैन, खरगोन और सारणी को सर्वाधिक ऋण वितरण के लिये पुरस्कृत भी किया जा चुका है। पीएम स्वनिधि योजना में 42 अन्य नगरीय निकायों एवं बैंक शाखाओें का चयन उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है। हितग्राहियों को प्रशिक्षण राज्य में पथ-विक्रेता योजना में सफलतापूर्वक काम कर सकें, इसके लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नगरीय निकायों के माध्यम से क्षमता निर्माण के लिये प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की है। हितग्राहियों को वित्तीय और डिजिटल साक्षरता, ई-कॉमर्स, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता का भी प्रशिक्षण दिलाया गया है। ऋण सीमा में वृद्धि योजना में चयनित हितग्राहियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गयी है। योजना में पूर्व में 10 हजार के स्थान पर 15 हजार और 20 हजार के स्थान पर 25 हजार रुपये और अंतिम किश्त के रूप में 50 हजार रूपये की ऋण राशि दी जा रही है। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिये हितग्राही को फुटकर लेन-देन पर 1200 रुपये और थोक व्यापार लेन-देन के लिये प्रतिवर्ष अधिकतम 400 रुपये तक कैश बेक की सुविधा दी जा रही है। पथ विक्रेता सुरक्षित रूप से व्यापार कर सके, इसके लिये नगरीय निकायों द्वारा आईडी प्रमाण-पत्र भी जारी किये गये हैं। पथ-विक्रेताओं और उनके परिवार को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिये जन-धन, पीएम सुरक्षा बीमा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति और पीएम श्रम योगी मानधन योजना, वन नेशन वन राशन कार्ड, जननी सुरक्षा, श्रमिक कल्याण और पीएम मातृ वंदना योजना से भी जोड़ा गया है। योजना में जो हितग्राही समय पर किश्त जमा कर रहे हैं, उन्हें क्रेडिट कार्ड की भी सुविधा भी दी जा रही है।  

नक्सल क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेगा विकास, सतत प्रयास कर रही है सरकार – मुख्यमंत्री साय

रायपुर  बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी। नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।  

सूरज की रौशनी पर संकट! भारत में घट रही धूप, वैज्ञानिकों ने जताई गहरी चिंता

नई दिल्ली प्रकृति से खिलवाड़ का असर दिखने लगा है. इससे दुनिया के हर देश और क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं. अब अपना ही देश देखिए ना. इस साल मानसून के सीजन में देश के उत्तरी हिस्से में कई जगहों पर औसत से काफी अधिक बारिश हुई. वहीं पूर्वी भारत पूरे मानसून में बारिश के लिए तरसता रहा. फिर लौटते-लौटते वहां भी मानसून ने बड़ी तबाही मचा दी. बिहार और पश्चिम बंगाल में मानसून के अंतिम दिनों में भारी बारिश हुई. मौसम में यह बदला यूं नहीं हो रहा है. इसके पीछे गहरे कारण सामने आ रहे हैं. इस बीच एक और चिंतित करने वाली स्टडी आई है. इसके मुताबिक भारत के भूभाग में सूरज की चमक फीकी पड़ने लगी है. एक तरह से भारत से सूरज रूठने लगा है. पूरे इलाके में धूप के घंटों में बड़ी कमी आई है. ऐसे में संकट की इस आहट से वैज्ञानिक बेचैन हो गए हैं. दरअसल, इस साल की लंबी मानसून और लगातार छाए बादलों से ऐसा महसूस हुआ कि मानो सूरज कहीं खो गया हो. लेकिन अब एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने इस धारणा को डेटा से पुष्ट किया है. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू), पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) और इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) जैसे संस्थानों के वैज्ञानिकों के एक संयुक्त अध्ययन में पाया गया है कि भारत के अधिकतर हिस्सों में पिछले तीन दशकों से धूप के घंटे लगातार घट रहे हैं. इसका प्रमुख कारण मोटे बादल और बढ़ता एरोसोल प्रदूषण है. रिपोर्ट के मुताबिक यह शोध इस महीने नेचर की साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन में 1988 से 2018 तक नौ क्षेत्रों के 20 मौसम स्टेशनों से धूप घंटों के डेटा का विश्लेषण किया गया. धूप घंटे वे होते हैं जब सूर्य की किरणें इतनी तेज होती हैं कि उन्हें रिकॉर्ड किया जा सके. निष्कर्षों के अनुसार सभी क्षेत्रों में सालाना धूप घंटे घटी हैं, सिवाय पूर्वोत्तर भारत के जहां मौसमी स्तर पर मामूली स्थिरता देखी गई. स्टडी में क्या कहा गया? 20 जगहों का डेटा वैज्ञानिकों ने 1988 से 2018 तक 9 इलाकों के 20 मौसम स्टेशनों के धूप-घंटे डेटा की जांच की. धूप-घंटा वो समय होता है जब सूरज की रोशनी इतनी तेज हो कि इसे रिकॉर्ड किया जा सके. नतीजा- सभी इलाकों में सालाना धूप के घंटे घटे हैं. सिर्फ पूर्वोत्तर भारत में मॉनसून के मौसम में थोड़ी स्थिरता दिखी.     BHU के वैज्ञानिक मनोज के. श्रीवास्तव ने बताया कि औसतन पश्चिम तट पर धूप के घंटे हर साल 8.6 घंटे कम हुए.     उत्तरी मैदानी इलाकों में सबसे ज्यादा गिरावट – 13.1 घंटे प्रति साल.     पूर्वी तट: 4.9 घंटे प्रति साल की कमी.     डेक्कन पठार: 3.1 घंटे प्रति साल की कमी.     मध्य अंतर्देशी इलाका: करीब 4.7 घंटे प्रति साल की कमी. स्टडी कहती है कि अक्टूबर से मई तक (सूखे महीनों में) धूप बढ़ी, लेकिन जून से सितंबर (मॉनसून में) तेज गिरावट आई. क्यों घट रही धूप? बादल और प्रदूषण के दोषी वैज्ञानिकों का मानना है कि ये 'सोलर डिमिंग' (सूरज की रोशनी कम होना) एरोसोल कणों की वजह से है. एरोसोल छोटे कण होते हैं, जो फैक्ट्रियों के धुएं, जलते बायोमास (लकड़ी-कोयला) और गाड़ियों के प्रदूषण से निकलते हैं. ये कण बादलों के लिए 'बीज' का काम करते हैं. इससे बादल के छोटे-छोटे बूंदें बनती हैं, जो लंबे समय तक आसमान में टिके रहते हैं. नतीजा- ज्यादा बादल होने से कम धूप मिल रही है.  इस साल की मॉनसून में भी भारत के ज्यादातर हिस्सों में लगातार बादल छाए रहे, खासकर पश्चिम तट, मध्य भारत और डेक्कन पठार पर. बारिश न होने पर भी आसमान ढका रहा. स्टडी 2018 तक की है, लेकिन आज भी वही धुंध, नमी और बादल पैटर्न बने हुए हैं – बल्कि पहले से ज्यादा. श्रीवास्तव ने जोड़ा कि ज्यादा एरोसोल बादलों को वातावरण में लंबे समय तक रखते हैं, जिससे जमीन तक सूरज की रोशनी कम पहुंचती है. धूप के घंटों की कमी का बड़ा असर पड़ेगा…     सोलर एनर्जी: भारत दुनिया का तेज बढ़ता सोलर मार्केट है. लेकिन कम धूप से बिजली उत्पादन घटेगा. रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग मुश्किल हो जाएगी.     खेती: फसलें सूरज पर निर्भर. कम धूप से पैदावार प्रभावित होगी, खासकर मॉनसून के बाद वाली फसलें.     मौसम मॉडलिंग: क्लाइमेट चेंज की भविष्यवाणी में गड़बड़ी. प्रदूषण और बादलों का पैटर्न बदल रहा है. वैज्ञानिक कहते हैं कि ये ट्रेंड जारी रहा, तो भारत को प्रदूषण कंट्रोल और क्लाउड मॉनिटरिंग पर ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा. ये स्टडी बताती है कि विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन कैसे बिगड़ रहा है. लंबी मॉनसून अच्छी लगती है, लेकिन ज्यादा बादल और प्रदूषण से सूरज छिप रहा है. भारत को साफ हवा, कम एरोसोल और बेहतर मौसम पूर्वानुमान पर काम तेज करना होगा.  बीएचयू के वैज्ञानिक मनोज के. श्रीवास्तव के मुताबिक औसतन, पश्चिमी तट पर धूप घंटे प्रति वर्ष 8.6 घंटे कम हुए, जबकि उत्तरी भारतीय मैदानों में सबसे तेज गिरावट 13.1 घंटे प्रति वर्ष दर्ज की गई. पूर्वी तट और डेक्कन पठार पर भी क्रमशः 4.9 और 3.1 घंटे प्रति वर्ष की कमी देखी गई. केंद्रीय अंतर्देशीय क्षेत्र में भी लगभग 4.7 घंटे प्रति वर्ष का नुकसान हुआ. अध्ययन के मुताबिक, अक्टूबर से मई सूखे महीनों में धूप में थोड़ी वृद्धि हुई, लेकिन जून से सितंबर के मानसून काल में गिरावट तेज रही. वैज्ञानिकों ने इस लंबे समय के ‘सोलर डिमिंग’ को उच्च एरोसोल सांद्रता से जोड़ा है- ये छोटे कण औद्योगिक उत्सर्जन, बायोमास जलाने और वाहनों के प्रदूषण से निकलते हैं. छाए रहते हैं बादल एक वैज्ञानिक ने कहा कि ये एरोसोल संघनन नाभिक का काम करते हैं, जिससे बादल के छोटे-छोटे कण बनते हैं जो लंबे समय तक टिके रहते हैं और आकाश को लगातार ढक लेते हैं. इस साल का मानसून भी भारत के अधिकांश हिस्सों में लगातार बादलों से भरा रहा, खासकर पश्चिमी तट, मध्य भारत और डेक्कन पठार पर. यहां बिना बारिश के दिनों में भी ओवरकास्ट स्थितियां आम रहीं. हालांकि अध्ययन 2018 तक का है, लेकिन ये रुझान आज भी प्रासंगिक हैं- हवा, नमी और बादल पैटर्न पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गए … Read more