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राजस्थान का नया शैक्षणिक कैलेंडर: 1 अप्रैल से शुरुआत, शिक्षकों को चिंता है तेज़ी से काम निपटाने की

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जयपुर   राजस्थान के शिक्षा महकमे ने आगामी शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. इससे सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए स्कूलों के अधिग्रहण से छात्रों की बाधित होने वाली पढ़ाई की भरपाई होगी. साथ ही सरकारी स्कूल प्राइवेट स्कूलों से प्रतिस्पर्धा भी कर पाएंगे. हालांकि, शिक्षक इससे इत्तेफाक नहीं रखते. उनका मानना है कि राजस्थान में 1 अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू करने की कवायत राजस्थान की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी इस तरह के प्रयोग किए गए हैं, जो फेल हुए हैं. मार्च तक परीक्षा और रिजल्ट : शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने बताया कि 1 अप्रैल से शुरू करने का संदर्भ ही यही है कि परीक्षा और रिजल्ट का काम मार्च तक पूरा करना पड़ेगा, जो संभव नहीं है. इस सत्र में सितंबर खत्म होने को आ गया है, लेकिन अब तक छात्रों को किताबें प्राप्त नहीं हुई हैं और यदि मार्च में सत्र खत्म होगा तो छात्रों तक किताबें पहुंचना भी एक चुनौती होगी. इसलिए सरकार की ये सोच राजस्थान की भौगोलिक दृष्टि के हिसाब से ठीक नहीं है. पहले भी ये अनुभव किया जा चुका है, बावजूद इसके बार-बार प्रयोग करके शिक्षा विभाग को बर्बाद करने का प्रयास किया जा रहा है. ये सरकार को बंद करना चाहिए. कम से कम इस विषय में शिक्षा से जुड़े हुए शिक्षक संगठनों से बातचीत करके कोई निर्णय करना चाहिए. तानाशाही तरीके से जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वो कभी भी शिक्षा के लिए फलदाई नहीं रहे और फिर सरकार को बाद में बदलाव करना पड़ता है. किसने क्या कहा, सुनिए. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में रखना होगा तारतम्य : हालांकि, शिक्षकों का एक धड़ा इस पहल का स्वागत भी कर रहा है. राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान में प्राइवेट स्कूल 1 अप्रैल या उससे भी पहले से एडमिशन शुरू कर देते हैं. जबकि सरकारी स्कूल 1 जुलाई से प्रवेश उत्सव शुरू करते हैं. इससे सरकारी स्कूल पीछे रह जाते हैं और नामांकन में संतोषजनक वृद्धि नहीं होती. यदि सत्र 1 अप्रैल से सत्र शुरू होगा, तो सरकारी स्कूलों का नामांकन निश्चित रूप से बढ़ेगा. साथ ही शहरी क्षेत्र में लगभग 35 से 40 दिन प्रतियोगी परीक्षाओं के कारण जो पढ़ाई के दिन कम हो रहे हैं, उनकी भरपाई भी होगी. हालांकि, उन्होंने इसके साथ ही चुनौतियां गिनाते हुए कहा कि विभाग को इसके लिए विशेष तैयारी करनी होगी. सबसे बड़ी चुनौती परीक्षाओं के टाइम टेबल को लेकर रहेगी. बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं को पहले आयोजित करना जरूरी होगा. शिक्षा मंत्री का दावा- छात्रों और अभिभावकों को राहत : हालांकि, शिक्षा मंत्री इस प्रयोग से आश्वस्त हैं. मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि ये अभी प्रस्ताव है. अंतिम मोहर लगनी बाकी है, लेकिन यदि सत्र 1 अप्रैल से शुरू होता है तो गरीब बच्चों को भी लाभ मिलेगा और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ेगा. निजी स्कूल फीस के मामले में कभी-कभी अनुचित तरीके अपनाते हैं. ऐसे में ये नई व्यवस्था अभिभावकों को भी राहत देगी. दिलावर ने ये भी स्पष्ट किया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले एक से डेढ़ महीने की पढ़ाई का टेस्ट लिया जाएगा. विभाग ये सुनिश्चित करेगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को उनका कोर्स अप्रैल के पहले सप्ताह में ही मिल जाए, ताकि परीक्षा में छात्र अच्छा प्रदर्शन कर सकें. उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से 15 मई तक शिक्षक घर-घर जाकर एडमिशन लेंगे, जिससे जुलाई में प्रवेश उत्सव की आवश्यकता नहीं होगी. इसके अलावा, ड्रॉपआउट छात्रों को प्रोत्साहित कर उनका भी संबंधित कक्षा में दाखिला कराया जाएगा. शिक्षा विभाग की होगी बड़ी 'परीक्षा' : बहरहाल, 1 अप्रैल से सत्र शुरू होने से कक्षा 1 से 12 तक की परीक्षाएं 31 मार्च तक खत्म कर रिजल्ट जारी करना होगा. अप्रैल के पहले सप्ताह में किताबें, वर्क बुक छात्रों तक पहुंचानी होगी, क्योंकि यदि सामग्री अप्रैल तक नहीं पहुंचती है तो ग्रीष्मावकाश में इसे छात्रों को उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा. वहीं, यदि इसे मूर्त रूप मिलता है तो इसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों और उनके अभिभावकों को मिलेगा.  

तालिबान के नए फरमान: अफगानिस्तान में क्या-क्या हो चुका है बंद? जानिए पूरी लिस्ट

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काबुल  तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में टेलीकॉम सर्विसेज और इंटरनेट सेवा को बंद करने का आदेश दे दिया है. ग्लोबल इंटरनेट निगरानी संस्था नेटब्लॉक्स की मानें तो पूरे देश में बीते दिन कनेक्टिविटी सामान्य से एक फीसदी के भी कम रह गई है. संस्था का कहना है कि यह इंटरनेट शटडाउन पूरी तरह से ब्लैकआउट के बराबर है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है, जब तालिबान ने अफगानिस्तान में किसी चीज पर बैन लगाया हो. इससे पहले भी जब तालिबान अफगानिस्तान में सत्ता में आया था, तब भी कई चीजों पर रोक लगाई गई है. चलिए जानें. सत्ता में आया तालिबान, घर में सिमटीं महिलाएं अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के बाद से महिलाओं की जिंदगी तो बिल्कुल सिमट गई है. अगस्त 2021 में तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया और तब से अब तक महिलाओं और लड़कियों पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा चुकी हैं. शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन से जुड़े अधिकार उनसे धीरे-धीरे छीन लिए गए हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार तालिबान की नीतियों की आलोचना होती रही है, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. लड़कियों की पढ़ाई हुई बैन तालिबान के आने के बाद सबसे पहला असर लड़कियों की पढ़ाई पर पड़ा. तालिबान ने 2021 में लड़कियों के लिए छठी कक्षा से आगे की पढ़ाई पर रोक लगा दी. धीरे-धीरे विश्वविद्यालयों में भी उनका प्रवेश बंद कर दिया गया. आज स्थिति यह है कि अफगानिस्तान की लाखों लड़कियां और युवतियां स्कूल-कॉलेज जाने से वंचित हैं. शिक्षा का यह अधिकार उनसे पूरी तरह छीन लिया गया है. रोजगार के अवसरों पर लगी पाबंदी केवल शिक्षा ही नहीं, महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बंद कर दिए गए. तालिबान सरकार ने कई क्षेत्रों में महिलाओं के काम करने पर रोक लगाई, जिनमें गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं. इसके चलते हजारों महिलाएं जो पहले समाज में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं, अब घरों में कैद होकर रह गई हैं. ब्यूटी पार्लर भी कर दिए गए बंद महिलाओं की सार्वजनिक उपस्थिति को भी सीमित कर दिया गया है. उनके लिए पार्क, जिम और पब्लिक बाथहाउस जैसी जगहों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है. यहां तक कि यात्रा करने के लिए भी महिलाओं को अब पुरुष अभिभावक यानी उनके पिता या पति की जरूरत पड़ती है. यह नियम उनकी स्वतंत्रता को पूरी तरह खत्म कर देता है. जुलाई 2023 में तालिबान ने महिलाओं के लिए ब्यूटी पार्लर बंद करने का भी आदेश जारी किया था. अफगानिस्तान में हजारों महिलाएं ब्यूटी पार्लर में काम करती थीं और यह उनका रोजगार का साधन भी था.  तालिबान में सामान्य जीवन नहीं जी सकते लोग इन तमाम पाबंदियों के बीच तालिबान का तर्क यही रहता है कि ये फैसले उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक व्याख्या पर आधारित हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि तालिबान की नीतियां सीधे तौर पर महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का हनन हैं. आज अफगानिस्तान में हालात ऐसे हैं कि लड़कियों की किताबें छिन चुकी हैं, कामकाजी महिलाओं की रोजी-रोटी खत्म हो चुकी है और सामान्य जीवन जीने के मौके भी लगातार सीमित किए जा रहे हैं.    

अटल प्रगति पथ फिर अधर में: नाम बदला, सर्वे बदला, लेकिन काम अब भी ठप

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Atal Pragati Path once again in limbo: Name changed, survey changed, but work still stalled मुरैना। Atal Pragati Path once चंबल अंचल के मुरैना, भिंड और श्योपुर जिलों को उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जोड़ने वाला अटल प्रगति पथ (पूर्व में चंबल एक्सप्रेस-वे) अब तक सरकारी असमंजस में उलझा हुआ है। 2018 से लेकर 2025 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना का न तो कोई ठोस स्वरूप तय हो पाया है और न ही निर्माण का काम धरातल पर उतरा है। अब तक इस परियोजना का पाँच बार नाम और तीन बार अलाइनमेंट बदला जा चुका है। सर्वे भी बदला, समाधान नहीं मिला Atal Pragati Path onceमार्च 2023 तक तीसरे चरण का भूमि अधिग्रहण सर्वे लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन किसानों के विरोध के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मौखिक रूप से सर्वे रद्द करने के निर्देश दे दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि आज तक उस सर्वे को लिखित रूप से रद्द नहीं किया गया, जिससे कई कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं। नया सर्वे भी अधर मेंचौथे सर्वे के आदेश 2022 के अंत में दिए गए थे, लेकिन वह कभी शुरू ही नहीं हो पाया। 03 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पहले बजट में इस परियोजना की नए सिरे से घोषणा की थी और इसे 299 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित किया गया। जबकि पूर्व प्रस्तावित लंबाई 404 किलोमीटर थी। किसानों की ज़मीन अधर में Atal Pragati Path onceमार्च 2023 के रिकार्ड के अनुसार, 214 गांवों के 26448 किसानों की लगभग 1965 हेक्टेयर भूमि इस प्रोजेक्ट के लिए चिह्नित की गई थी। लेकिन सर्वे के निरस्त होने और लिखित आदेश न आने के चलते किसान न तो ज़मीन का नामांतरण करा पा रहे हैं और न ही बिक्री-रजिस्ट्री हो पा रही है। घड़ियाल सेंक्चुरी बनी बड़ी बाधाएक्सप्रेस-वे का पहला अलाइनमेंट चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी से होकर गुजरता था, जिस कारण वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्ति जताई। दूसरा और तीसरा अलाइनमेंट भी बीहड़ों और निजी खेतों से होकर गुजरता था, जिसे लेकर भारी विरोध हुआ। चौथा सर्वे अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है। प्रशासन ने दी स्थिति स्पष्टता\”मार्च 2023 में शासन से निर्देश मिलने के बाद से कोई नई दिशा नहीं आई है। परियोजना की स्थिति पूर्ववत है। जैसे ही आदेश मिलेगा, आगे की कार्रवाई की जाएगी।\”— सीबी प्रसाद, अपर कलेक्टर, मुरैना Atal Pragati Path once , जिसे कभी चंबल एक्सप्रेस-वे के नाम से शुरू किया गया था, अब तक सिर्फ कागजों और घोषणाओं का प्रोजेक्ट बनकर रह गया है। ज़मीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंज़ूरी और प्रशासनिक अस्पष्टता इसकी सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। यदि मोहन सरकार इसे गंभीरता से नहीं लेती, तो यह प्रोजेक्ट भी एक अधूरी योजना बनकर इतिहास में दर्ज हो जाएगा।

उत्साह उमंग व शिद्दत के साथ कुकिंग प्रतियोगिता में समजा की महिलाओं ने बनाये स्वादिष्ट व्यंजन

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With enthusiasm and passion, the women of Samaja prepared delicious dishes in the cooking competition भोपाल । सिंधी मेला समिति द्वारा सिंधी व्यंजन की परंपरा को बरकरार रखने के उद्देश्य से शनिवार को राजधानी भोपाल में कुकिंग प्रतियोगिता का आगाज हो गया। राजधानी के 12 सेंटरों पर आयोजित इस प्रतियोगिता में 12 साल की बालिका से 80 साल तक की बुजुर्ग महिला ने हिस्सा लिया। संत कवरराम कॉलोनी, सिंधी कॉलोनी, विजय नगर, सुविधा विहार, कोटरा सुल्तानाबाद, एयरो सिटी, ग्रीन एकड़ में एक साथ सुरु हुआ, जसमे सिंधी समाज की 400 से अधिक महिलाओं ने इस प्रतिस्पर्धा में भाग लिया। इस महिलाओं ने विशेष रूप से सिंधी व्यंजन तैयार किए थे जिनमें बीह पटाटा, साई भाजी, सेयल मानी, खोराक, सिंगर जी मिठाई आदि शामिल है। सिंधी व्यंजन प्रतियोगिता में महिलाओं का उत्साह देखने योग्य रहा, इस अवसर पर सिंधी मेला समिति के अध्यक्ष मनीष दयरानी ने कहा कि सिंध प्रांत में बनने वाले व्यंजनों को देखकर सिंध की यादें ताजा हो गईं। शनिवार को भोपाल के 12 स्थानों पर इस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रविवार को यह आयोजन भोपाल में 11 सेंटरो पर आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही इस प्रतियोगिता में चयनित हुई महिलाओं को 2 अगस्त को मानस भवन में आयोजित मुख्य समारोह में बेस्ट कुकिंग अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

MP विधानसभा मानसून सत्र 2025: अनुपूरक बजट, कांग्रेस की रणनीति और सवालों की बारिश

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भोपाल। MP Vidhansabha Monsoon Session 2025 मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, और 8 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में कुल 10 बैठकें प्रस्तावित हैं। यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार जहां अनुपूरक बजट लेकर आने वाली है, वहीं कांग्रेस विपक्ष जनहित और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। नई भूमिका में हेमंत खंडेलवाल MP Vidhansabha Monsoon Session 2025बैतूल से विधायक हेमंत खंडेलवाल, जिन्हें हाल ही में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनाया गया है, अब विधानसभा में पहली पंक्ति में स्थान पाएंगे। यह न सिर्फ उनकी बढ़ी हुई भूमिका का संकेत है, बल्कि पार्टी के भीतर नई राजनीतिक रणनीति का भी प्रतीक है। 3,377 प्रश्न, 191 ध्यानाकर्षण और एक स्थगन प्रस्तावविधानसभा सचिवालय को इस सत्र के लिए 3,377 सवाल मिल चुके हैं, जिनमें से अनेक सवाल शासन की जवाबदेही को कठघरे में खड़ा करेंगे। 191 ध्यानाकर्षण सूचनाएं और एक स्थगन प्रस्ताव यह दर्शाते हैं कि सत्र में विपक्ष आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। बजट की प्राथमिकता – सिर्फ जनहितमोहन सरकार अनुपूरक बजट लाने की तैयारी में है, लेकिन इस बार सरकार का रुख फिजूलखर्ची के खिलाफ सख्त और जनहित योजनाओं के पक्ष में दिख रहा है। वित्त विभाग ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वाहन जैसी गैर-ज़रूरी मांगें न भेजें। यह रुख सरकार की वित्तीय अनुशासन और छवि सुधार की मंशा को दर्शाता है। Read more: बिहार में बेलगाम अपराध पर चिराग पासवान का फूटा ग़ुस्सा; नीतीश सरकार को चेतावनी रणनीति की थाली: कांग्रेस विधायकों की डिनर बैठक MP Vidhansabha Monsoon Session 2025सत्र की पूर्व संध्या पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक होटल में होगी। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, मांडू में हुए नव संकल्प शिविर में तय किए गए मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। चर्चा है कि जल जीवन मिशन घोटाले जैसे संवेदनशील मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाया जाएगा। सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे रोस्टर मंत्रीमुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि हर दिन सदन में कम से कम तीन मंत्री रोस्टर अनुसार अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। ये मंत्री न केवल सवालों के जवाब सुनिश्चित करेंगे, बल्कि विधायकों की उपस्थिति भी ट्रैक करेंगे। यह पहल सरकार की तैयारियों को संगठित रूप में दर्शाती है। मानसून सत्र – बहस, बजट और भरोसे की परीक्षा MP Vidhansabha Monsoon Session 2025यह मानसून सत्र सिर्फ सामान्य प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और विपक्ष की धार का टेस्ट बन गया है। एक ओर जहां सरकार बजट से भरोसा पैदा करना चाहती है, वहीं विपक्ष जवाबदेही से सरकार को झकझोरने की रणनीति बना रहा है। अगले दस दिन नीतियों से ज्यादा नीयत की परीक्षा साबित होंगे। मध्यप्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 28 जुलाई से शुरू होगा। सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी और कांग्रेस जल जीवन मिशन जैसे मुद्दों पर घेराव की तैयारी में है। पढ़ें पूरी रणनीति और सत्र की प्रमुख बातें।

बिहार में बेलगाम अपराध पर चिराग पासवान का फूटा ग़ुस्सा; नीतीश सरकार को चेतावनी

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Chirag Paswan\’s Warning to Nitish Government पटना। बिहार में बढ़ते अपराध के मामलों ने सिर्फ जनता को नहीं, बल्कि सत्ता में सहयोगी दलों के नेताओं को भी चिंता में डाल दिया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने एक कड़ा और स्पष्ट बयान देकर नीतीश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘ऐसी सरकार का समर्थन कर दुख होता है’: चिराग पासवान Chirag Paswan\’s Warning to Nitishएक केंद्रीय मंत्री का सार्वजनिक रूप से यह कहना कि उन्हें ऐसी सरकार का समर्थन करना दुखद लगता है, जहां अपराध नियंत्रण से बाहर हो गया है — यह बयान मामूली नहीं, बल्कि सरकार की साख पर सीधा प्रहार है।पासवान ने कहा कि बिहार में एक के बाद एक आपराधिक घटनाओं की श्रृंखला बन गई है, और प्रशासन अपराधियों के सामने नतमस्तक नजर आ रहा है। प्रशासन की नाकामी या राजनीतिक असहायता?चिराग पासवान की टिप्पणी कि “प्रशासन पूरी तरह से नाकाम हो चुका है”, राज्य में मौजूदा हालात की गंभीरता को दर्शाती है। यह सिर्फ एक नेता की व्यक्तिगत नाराज़गी नहीं, बल्कि उस राजनीतिक गठबंधन के भीतर की बेचैनी है, जो सत्ता में भागीदार होते हुए भी अपने ही सहयोगियों से असंतुष्ट है। साजिश भी हो, ज़िम्मेदारी तो प्रशासन की ही बनती है Chirag Paswan\’s Warning to Nitishपासवान ने विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि अगर ये घटनाएं सरकार को बदनाम करने की साजिश के तहत भी हो रही हैं, तो भी प्रशासन जवाबदेह है। यह वक्तव्य प्रशासनिक तंत्र की उत्तरदायित्व से भागने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाता है। जनविश्वास पर गहराता संकटबिहार पहले ही बेरोजगारी, पलायन और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में अपराध का बेलगाम हो जाना राज्य को और पीछे धकेल सकता है। अगर सत्ता में शामिल केंद्रीय नेता ही खुद को असहाय महसूस करने लगें, तो जनता के मन में यह भरोसा कैसे बचेगा कि वे सुरक्षित हैं? यह चेतावनी है, विरोध नहीं : चिराग पासवान का बयान केवल आलोचना नहीं, एक चेतावनी है — उस सरकार के लिए, जिसका वे खुद हिस्सा हैं। यह बिहार की प्रशासनिक मशीनरी के लिए आईना है, और उस गठबंधन के लिए संकेत, जो अब भीतर से असहज दिख रहा है। बिहार की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहां सत्ता की मजबूरी और अपराध की मजबूती के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती है।अगर यह चुनौती स्वीकार नहीं की गई, तो यह सिर्फ राजनीतिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था और जनविश्वास का पतन भी बन सकता है।

भोपाल के 22 सेंटरों पर आज से आयोजित होगा कुकिंग कॉम्पीटिशन

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Cooking competition will be organized at 22 centers in Bhopal from today भोपाल। सिंधी व्यंजन की परंपरा को बरकरार रखने के उद्देश्य से भोपाल की सिंधी मेला समिति द्वारा आज शनिवार 26 जुलाई एवं रविवार 27 अगस्त को राजधानी भोपाल के 21 से अधिक सेंटरो पर एक साथ इस कुकिंग कॉप्टिशन का आयोजन किया जा रहा है। समिती के अध्यक्ष मनीष दरयानी एवं महासचिव नरेश तलरेजा ने बताया कि बुधवार को यह प्रतियोगिता भोपाल के बाहर कुछ शहरों में आयोजित हुई जिसमे विदिशा, गंजबासोदा, नर्मदापुरम, हरदा, सुल्तानपुर रही, जिसमे सैकड़ो की संख्या में समाज की महिलाओं ने बढ़चड हिस्सा लिया व सिंधी व्यंजनों की इस परम्परा को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया इस आयोजन की इस कड़ी में आज शनिवार एवं रविवार को इस यह आयोजन भोपाल के 21 स्थानों आर आयोजित किया जा रहा है जिसमे भोपाल की हजारों महिलाए इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपने लजीज व्यंजनो के साथ अपने हुनर का जलवा दिखायेगी। इस कुकिंग कॉप्टिशन कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती माया पंजवानी, सह- संयोजिका श्रीमती भावना लालवानी एवं सह संयोजक हरीश विधानी को नियुक्त किया है।

Jhalawar School Roof Collapse: सिस्टम की लापरवाही ने ली मासूम छात्रों की जान! आखिर जिम्मेदार कौन?

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jhalawar school roof collapse negligence of the system took the lives of innocent students Jhalawar School Roof Collapse: राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से भयावह हादसा हुआ। इस हादसे में 8 मासूम बच्चों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल बच्चों को झालावाड़ के अस्पताल में भर्ती किया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। जानकारी के अनुसार स्कूल में हादसा उस वक्त हुआ जब प्रार्थना चल रही थी। हादसे के समय स्कूल के शिक्षक भवन के बाहर थे। जबकि छात्र स्कूल भवन के अंदर प्रार्थना कर रहे थे। यह हादसा सिर्फ एक निर्माण खामी नहीं था, बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही की भयावह मिसाल है। हादसे के बाद स्कूल के 5 शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक लापरवाही को उनकी जिम्मेदारी माना है लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ शिक्षकों पर कार्रवाई पर्याप्त है? क्या बड़ी जिम्मेदारी उस सिस्टम की नहीं, जो स्कूलों की हालत पर सही डाटा नहीं जुटा पा रहा? इस घटना के बाद राज्य सरकार भी हरकत में आ गई है। लेकिन, इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है कि यह हादसा पूरे सिस्टम की चूक का परिणाम है। यदि स्कूल प्रशासन ग्रामीणों की चेतावनी को अनदेखा नहीं करता, शिक्षा विभाग ने स्कूल की स्थिति की सही जानकारी रखकर उस दिशा में काम करता तो शायद इन आठ मासूमों और उनके परिवारों को इतने बड़े दुख से दो-चार नहीं होना पड़ता। इस हादसे की जिम्मेदारी सिर्फ गिरती हुई छत की नहीं, बल्कि उस लचर व्यवस्था की है जो बच्चों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकी। यह केवल एक इमारत की छत नहीं बल्कि उन माता-पिता का भरोसा गिरा है, जो उन्हें सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजते समय होता है। बहरहाल सरकार ने हादसे की जांच का आदेश दे दिया है लेकिन क्या इस बार भी दोषी केवल नीचे के कर्मचारी होंगे या सिस्टम की ऊपरी परतें भी जवाबदारी लेंगी? यह अनुत्तरित है।

राज्यपाल पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं के साथ किया सह-भोज

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Governor Patel had lunch with differently abled girls भोपाल ! Governor Patel had lunch राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जीवन में सफलता और आगे बढ़ने के लिए निरंतर सीखते रहना चाहिए। राज्यपाल बहुदिव्यांग बालिकाओं से उनके शिक्षकों के माध्यम से राजभवन के सभा कक्ष जवाहर खण्ड में आत्मीय चर्चा कर रहे थे। राज्यपाल पटेल से सौजन्य भेंट करने के लिए आनंद सर्विस सोसायटी की मूकबधिर बहुदिव्यांग बालिकाएं शुक्रवार को इंदौर से राजभवन आईं थीं। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री के.सी. गुप्ता भी मौजूद थे। निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित Governor Patel had lunch राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने दिव्यांग बालिकाओं से उनके मार्ग दर्शकों के माध्यम से परिचय प्राप्त किया। उनके जीवन की कठिनाईयों और सफलताओं को जाना। उनको निरंतर सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। दिव्यांग बालिकाओं के साथ बालिका सुश्री गुरदीप कौर वासु के संघर्ष और सफलता की कहानी पर आधारित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। उन्होंने दिव्यांग बालिकाओं और शिक्षकों के साथ सह-भोज भी किया। राजभवन भ्रमण के अनुभव किए साझा राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने सभी बालिकाओं से राजभवन भ्रमण के अनुभव जाने और सामूहिक चित्र भी खिंचवाया। बालिकाओं ने सांकेतिक भाषा में ऐतिहासिक राजभवन परिसर और विशेष रूप से आर्ट गैलेरी भ्रमण के सुखद अनुभव साझा किए। उन्होंने राज्यपाल के प्रति मुलाकात, सह-भोज करने और राजभवन भ्रमण का अवसर देने के लिए आत्मीय आभार जताया। राज्यपाल को स्व-रचित कलाकृतियां की भेंट राज्यपाल मंगुभाई पटेल से भेंट के अवसर पर मूकबधिर बहुदिव्यांग बालिका सुश्री दिव्या गोले और वैष्णवी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया। उन्हें सुश्री किरण विश्वकर्मा और अन्य बालिकाओं ने स्वयं द्वारा सृजित पैंटिंग और कलाकृतियां भेंट की। राज्यपाल ने देखी बहुदिव्यांग गुरदीप पर बनी फिल्म राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने बालिकाओं के साथ मध्यप्रदेश वाणिज्य कर विभाग में कार्यरत मूकबधिर बहुदिव्यांग शासकीय सेवक सुश्री गुरदीप के जीवन और संघर्षों पर आधारित लघु फिल्म को देखा। उन्होंने उपस्थित बालिकाओं से गुरदीप के जीवन के संघर्षों और सफलताओं से प्रेरणा लेने और निरंतर सीखते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुरदीप के परिजनों, संस्था के शिक्षकों और प्रतिनिधियों के समर्पण की प्रशंसा की। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर सचिव उमाशंकर भार्गव, संस्था की को-फाउंडर और संचालक श्रीमती मोनिका पुरोहित, सचिव ज्ञानेन्द्र पुरोहित, गुरदीप की माताजी श्रीमती सीमा मंजीत कौर, शिक्षिका श्रीमती मृणालिनी शर्मा और बालिकाएं उपस्थित रही।

संसदीय क्षेत्र की विभिन्न सड़कों की मांग को लेकर केन्द्रीय मंत्री से मिले सीधी सांसद

sidhi mp met the union minister

Sidhi MP met the Union Minister demanding various roads of the parliamentary constituency सीधी। लोकसभा संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ राजेश मिश्रा संसद भवन में केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भेंट कर सीधी – सिंगरौली सड़क की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया तथा शीघ्र नया टेंडर कर कार्य प्रारंभ करने, सिंगरौली – प्रयागराज मार्ग की प्रक्रिया में तेजी लाने व सिंगरौली से जबलपुर वाया सरई, टिकरी, मझौली, ब्यौहारी, विजयसोता को राजमार्ग के रूप में स्वीकृति प्रदान करने हेतु आग्रह करते हुए मांग पत्र सौपा।केंद्रीय मंत्री गडकरी ने लोकसभा संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉक्टर मिश्रा द्वारा रखी गई बातों को गंभीरता से विचार करते हुए सीधी-सिंगरौली सड़क के संबंध में तत्काल अधिकारियों को कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया। इस हेतु लोकसभा संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉक्टर मिश्रा ने संसदीय क्षेत्र की जनता की ओर से केंद्रीय मंत्री का धन्यवाद ज्ञापित किया।