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वकीलों पर हमलों के विरोध में मानव श्रृंखला, प्रदर्शन, एसपी से मांगा इस्तीफा

resignation demanded from sp

Human chain, demonstration against attacks on lawyers, resignation demanded from SP जितेंद्र श्रीवास्तवजबलपुर। अधिवक्ताओं पर हमलों के विरोध में मानव श्रृंखला बनाई गई। जिला अदालत के गेट नंबर तीन से रैली के रूप में एकत्र होकर अधिवक्तागण कलेक्ट्रेट तक आंदोलन का शंखनाद किया।‌ मानव श्रृंखला बनाकर अधिवक्ताओं ने विरोध दर्ज कराया। इस दौरान जमकर प्रदर्शन किया, आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की और ऐसा न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।बार अध्यक्ष अधिवक्ता मनीष मिश्रा व सचिव ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि जिला बार के सह सचिव मनोज शिवहरे व उनके पुत्र शिवांग उर्फ नयन शिवहरे पर प्राणघातक हमला हुआ है। इसी तरह अधिवक्ता के उवैश अंसारी व उनके पिता के साथ भी मारपीट की गई है। लगातार अधिवक्ताओं पर हमले बढ़ रहे, अधिवक्ताओं ने पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनके इस्तीफे की मांग भी की।

भिंड में कांग्रेस कार्यालय के लिए भूमि उपलब्ध कराने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

memorandum submitted to the collector

Memorandum submitted to the collector to provide land for Congress office in Bhind भिण्ड। जिला कांग्रेस कमेटी भिण्ड द्वारा नगर निगम सीमा के अंतर्गत कांग्रेस कार्यालय भवन हेतु उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने की मांग को लेकर कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मानसिंह कुशवाह के नेतृत्व में सौंपा गया। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक पुराना राजनीतिक संगठन है, लेकिन भिण्ड जिले में कार्यालय भवन के अभाव में संगठन के कार्यक्रमों का सुचारू संचालन संभव नहीं हो पा रहा है। कार्यालय के लिए भूमि की अत्यंत आवश्यकता है जिससे भवन निर्माण कर कार्यक्रम संचालित हो सके।ज्ञापन में मांग की गई कि नगर निगम भिण्ड की सीमा के अंतर्गत उपयुक्त भूमि आवंटन की जावे । इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मानसिंह कुशवाह के अलावा शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राधेश्याम शर्मा,प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव धर्मेंद्र पिंकी भदोरिया, प्रदेश सचिव प्रमोद चौधरी, पूर्व जिला कांग्रेस के अध्यक्ष जय श्री राम बघेल, उपाध्यक्ष वीरेंद्र यादव, सेवादल अध्यक्ष संदीप मिश्रा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष रेखा भदोरिया ,नगर अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी आदि नेता उपस्थित रहे।

मानसून में कौन-से फल खाने चाहिए और किनसे बचना जरूरी है? जानिए हेल्दी चॉइस

know the healthy choice

Which fruits should be eaten during monsoon and which ones should be avoided? Know the healthy choice Know the healthy choice मानसून का मौसम अपने साथ ताजगी और ठंडक तो लाता है, लेकिन साथ ही बीमारियों और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा देता है। इस दौरान हवा में नमी ज़्यादा होने के कारण डाइजेशन स्लो हो जाता है, जिससे इन्फेक्शन, पेट दर्द और सर्दी-जुकाम जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं। ऐसे में आपकी डाइट का हेल्दी और बैलेंस होना बेहद जरूरी है—खासकर फलों के चयन को लेकर। हर फल सेहत के लिए फायदेमंद होता है, लेकिन मानसून में कुछ फल विशेष रूप से लाभकारी होते हैं, वहीं कुछ फल सेहत पर नकारात्मक असर भी डाल सकते हैं। आइए जानते हैं इस मौसम में कौन से फल आपकी इम्युनिटी को मजबूत बनाएंगे और कौन से फल से दूरी बनाना बेहतर होगा। मानसून में फल चुनने की सही रणनीति क्या होनी चाहिए?मानसून में फल का चयन करते वक्त सबसे पहले अपनी पाचन क्षमता और स्वास्थ्य समस्याओं को ध्यान में रखें। इस मौसम में केला और सेब जैसे आम फलों को लेकर सबसे अधिक भ्रम रहता है। केला – फायदेमंद या नुकसानदायक?केला ऊर्जा का अच्छा स्रोत है लेकिन मानसून में यह कफ बढ़ा सकता है, जिससे सर्दी, खांसी और पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।जिन्हें गैस, कब्ज या अपच की समस्या है, उन्हें इस मौसम में केले का सेवन सीमित मात्रा में और दिन में ही करना चाहिए। सेब – मानसून का भरोसेमंद साथीसेब हल्का, पचने में आसान और फाइबर युक्त फल है जो पाचन को मजबूत बनाता है।इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर शरीर को डिटॉक्स करता है और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाता है। इसे छिलके सहित खाना और भी फायदेमंद होता है। Know the healthy choice मानसून में फायदेमंद फल (Best Fruits in Rainy Season) Read more : क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव फल खाते समय इन बातों का ध्यान रखें Know the healthy choice Conclusion : मानसून में सेहत बनाए रखने के लिए फलों का सही चुनाव बहुत जरूरी है। ताजे, हल्के और जल्दी पचने वाले फल आपकी इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं और संक्रमण से बचाते हैं। वहीं गलत फल का सेवन आपकी सेहत को नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए हर फल खाने से पहले उसके गुण और आपकी बॉडी की ज़रूरतों को समझें।

रीवा-मऊगंज में खाद-बीज और बिजली की समस्या से जूझ रहे किसान: सुखेन्द्र सिंह

farmers are facing problems

Farmers are facing problems of fertilizers, seeds and electricity in Rewa-Mauganj: Sukhendra Singh रीवा ! Farmers are facing problems मऊगंज के पूर्व विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सुखेन्द्र सिंह बन्ना ने कहा कि पूरे मऊगंज एवं रीवा जिले का किसान खाद बीज एवं बिजली की समस्या से जूझ रहा है. पूरा प्रशासनिक अमला खाद बीज की कालाबाजारी को बढ़ावा देकर वसूली में व्यस्त है और जिले का अन्नदाता पूरे भ्रष्ट सिस्टम से त्रस्त है. सिंह ने पत्रकारवार्ता के दौरान उक्त आरोप लगाए. Read more: कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का आगाज “कांग्रेस का ‘नव संकल्प’: 2028 की रणभेरी मांडू से” उन्होने कहा कि स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली विभाग की लूट से किसान एवं जनता परेशान हैं. बारिश के शुरुआती दौर में ही पूरे जिले में बाढ़ जैसे हालत निर्मित हुए यह भी गंभीर विषय है. पूरा प्रशासनिक तंत्र केवल खानापूर्ति करने में लगा है जमीन हकीकत में पूरा प्रशासनिक तंत्र फेल है. पूर्व विधायक ने शासन प्रशासन को सख्त लहजे में आगाह करते हुए कहा है कि जल्द खाद बीज बिजली की समस्या का शीघ्र निदान नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी किसानों एवं आम जनता को न्याय दिलाने के लिए उग्र आंदोलन करेगी.

महिला कांग्रेस ने किया प्रदर्शन ,कलेक्ट्रेट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

mahila congress staged a protest

Mahila Congress staged a protest, reached the Collectorate and submitted a memorandum addressed to the President छिन्दवाड़ा ! महिला संबंधी अपराधों में अंकुश लगाने महिला कांग्रेस ने विरोध प्रर्दशन कर महामहिम राष्ट्रपति के नाम कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है. ज्ञापन में महिला कांग्रेस ने महिलाओं, युवतियों व नाबालिग बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग व बढ़ते हुए अपराध पर विराम लगाने ठोस कदम उठाने की मांग की है।जिला महिला कांग्रेस की पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर राजीव कांग्रेस भवन से महिलाओं पर बढ़ते हुए अपराध के खिलाफ रैली के रूप में निकली। राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए महिलाएं जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय ज्ञापन देने पहुंची। बरसते हुए पानी में महिलाएं मुख्य गेट पर खड़ी रहीं और काफी देर तक जब प्रशासनिक अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे तब मातृशक्ति के सब्र का बाण टूट गया और वे गेट खोलकर मुख्य गेट पर पहुंची तब महिला अधिकारी ज्ञापन लेने पहुंची। ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए जिला महिला कांग्रेस ने कहा कि प्रदेश में लगातार नारी पर जारी अत्याचार व दुराचार के अपराधों की संख्या देश में सर्वाधिक है। अपराधी अब दिन दहाड़े मासूम बेटियों के साथ दुराचार व सामूहिक दुष्कर्म जैसी जघन्य वारदातों को अंजाम दे रहे। जिससे प्रदेश व देश शर्मसार है। अकेले भोपाल से प्रतिमाह लगभग 70 बच्चे लापता हो रहे, इनमें 70 प्रतिशत बेटियां होती है, जो वापिस घर नहीं लौट रही, यही स्थिति दुराचार की भी है। फिर भी सरकार कुंभकर्णी नींद में सोई है। तीन सूत्रीय मांगों का सौंपा ज्ञापनमहामहिम राष्ट्रपति के नाम प्रस्तुत ज्ञापन जिला महिला कांग्रेस ने कहा कि जिले के साथ ही नगर, गांव व कस्बों में मातृशक्ति से सम्बंधित अपराध घटित हो रहे हैं जिसे रोकने में पुलिस पूरी तरह विफल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार केवल भाषणों और घोषणाओं में चल रही है। बढ़ते अपराध को रोकने पर उनका कोई ध्यान नहीं है। महिला उत्पीडऩ के बढ़ते मामले प्रदेश सरकार की लचर कानून व्यवस्था को खुलकर उजागर कर रही है। सरकार इस दिशा में अविलम्ब ठोस व कारगर कदम उठाएं ताकि महिलाएं निर्भिक व सुरक्षित होकर रह सकें।जिला महिला कांग्रेस ने प्रस्तुत ज्ञापन के माध्यम से अंत में कहा कि महिलाओं व नाबालिग बेटियों के साथ घटित अपराध में मप्र देश में नम्बर एक पर है। प्रदेश की भाजपा सरकार पूरी तरह से निरंकुश हो चुकी है। महिलाओं व सम्पूर्ण मानव समाज के हित में प्रदेश सरकार तत्काल ठोस कदम उठाएं। ज्ञापन सौंपते वक्त कांग्रेस नेत्रियां रही उपस्थित ज्ञापन प्रस्तुत करते समय जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती किरण चौधरी, मनीषा पाल, दीपा यादव, रानू डेहरिया, संगीता ठाकुर, संतोषी गजभिये, नंदा ठाकरे, शोभा शर्मा, आम्रपाली, ममता चौखे, साधना जंघेला, साक्षी चौखे, जुबेदा, यास्मीन, सपना वर्मा, साक्षी चौबे, राधा सैनी, शालू, रोशनी श्रीवास, पायल सिंग, सुमन पवार, दुर्गा सोमकुंवर, श्वेता कौर, फरीदा बानो सहित महिला कांग्रेस की अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्तागण बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

VP Resignation पर राकेश टिकैत का तीखा वार: \”धनखड़ को इस्तीफा नहीं दिया गया, दिलवाया गया\”

rakesh tikait's sharp attack on vp resignation

Rakesh Tikait\’s sharp attack on VP Resignation: \”Dhankhar was not given resignation, he was made to resign\” नई दिल्ली ! भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर बड़ा बयान दिया है। टिकैत का कहना है कि यह स्वेच्छा से दिया गया इस्तीफा नहीं, बल्कि \’पूंजीपतियों की सरकार\’ द्वारा लिया गया त्यागपत्र है। उन्होंने दावा किया कि जो भी सरकार के विरुद्ध, गांव-गरीब और किसान की बात करेगा, उसे व्यवस्था से बाहर कर दिया जाएगा। मंगलवार को अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए टिकैत ने कहा — “धनखड़ हमेशा गांव, गरीब और किसान की बात करते थे। ऐसी बात करने वाले इस सरकार में टिक नहीं सकते। इस सरकार में पूंजीपतियों की चलेगी, न कि किसानों की।” उन्होंने आगे कहा कि इस्तीफे से पहले कोई भी मेडिकल कारण या स्पष्ट राजनीतिक स्थिति सामने नहीं आई। “यह सीधा संकेत है कि सरकार अब पूरी तरह पूंजीपतियों के इशारे पर काम कर रही है। राजनीतिक दलों और संवैधानिक पदों पर भी अब नियंत्रण कर लिया गया है।” टिकैत ने भाजपा पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा — “अब जो 50 साल से कम उम्र के लोग पार्टी में समझौते करेंगे, उन्हें दुष्यंत चौटाला बना दिया जाएगा, और जो उससे ऊपर होंगे, उन्हें सतपाल मलिक या फिर जगदीप धनखड़ जैसा बना दिया जाएगा।” \”अबकी बार ढोल किसी और के दरवाजे पर बजेगा\”इस लाइन के जरिए टिकैत ने आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अबकी बार परिणाम सत्ता पक्ष के अनुकूल नहीं होंगे। \”गांव तक के लोग कह रहे हैं कि इस्तीफा लिया गया है। यानी जनता सब समझ रही है।\” क्या यह लोकतंत्र बनाम कॉरपोरेट का संघर्ष है?टिकैत के इस बयान को केवल एक किसान नेता की टिप्पणी नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक असंतोष की आवाज के रूप में देखा जा रहा है। यह उस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है, जो सत्ता में किसानों और ग्रामीण भारत की भागीदारी कम होने पर सवाल उठा रही है।

बच्चों की विशेष सभा में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु की सकुशल वापसी का स्वागत

special gathering of children

Astronaut Shubhanshu\’s safe return welcomed in a special gathering of children भोपाल। रातीबड़ स्थित शारदा विद्या मंदिर स्कूल में बच्चों की विशेष सभा आयोजित की गई। सभा में छात्र-छात्राओं ने पढ़ाई के अतिरिक्त व्यक्तित्व विकास के उद्देश्य से अपने भीतर छिपी प्रतिभा को प्रदर्शित कर जानकारी साझा की। बच्चों में एक ने ‘‘मॉ’’ पर हिंदी, इंग्लिश और संस्कृत में वर्णन किया। तो कोई झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बनकर मंच पर आयी। सभी का उत्साह तब अधिक बढ़ गया जब स्कूली छात्र शिवांश अंतरिक्ष से सकुशल वापस लौटे शुभांशु की भूमिका में नजर आए। सभी ने शुभांशु का स्वागत किया। शारदा विद्या मंदिर की प्राचार्य ने बताया कि विद्यालय में अक्सर किसी अवसर का उत्सव मनाने, जानकारी साझा करने या प्रतिभा दिखाने के लिए इस प्रकार की स्पेशल असेम्बली का आयोजन किया जाता है। यह पढ़ाई में रूचि जाग्रत करने के साथ ही बच्चों को शिक्षा प्राप्ति के लिए उत्साहित एवं स्वप्रेरित करता है। विद्यार्थियों की उपलब्धियों का सम्मान करने स्कूल के भीतर संचार, प्रेरणा और सामुदायिक भावना को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में यह विशेष सभा कार्य करती हैं।स्वाधीनता दिवस से पूर्व इस प्रकार की विशेष सभा महापुरूषों के नाम रही। सभी बच्चों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। स्कूल के बच्चों, शिक्षिकाओं ने ही नहीं, उनके अभिभावकों ने भी विशेष सभा को सराहा और बच्चों को प्रोत्साहित किया। स्कूल शिक्षिका ने बताया कि आगे भी सामाजिक मुद्दों, पर्यावरण संबंधी चिंताओं या स्वास्थ्य संबंधी विषयों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए इस प्रकार की विशेष सभाएं की जाएंगी। बच्चों का मनोबल बढ़ाने, सकारात्मक विद्यालय वातावरण को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों में सम्मान, सहयोग और दायित्वबोध जैसे मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए यह आयोजन किया गया।

कूनो में बारिश से बढ़ी चीतों की मुश्किलें, पानी भरे गड्ढों-दलदली जमीन में फंसने का मंडरा रहा खतरा

rain in kuno has increased

Rain in Kuno has increased the difficulties of cheetahs, there is a danger of them getting trapped in water filled pits and marshy land ग्वालियर। Rain in Kuno has increased मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के पुनर्वास की महत्वाकांक्षी परियोजना एक बार फिर प्रकृति की चुनौती से जूझ रही है। लगातार हो रही भारी बारिश ने पार्क को दलदल में बदल दिया है, जिससे न सिर्फ ट्रैकिंग बाधित हो रही है बल्कि चीतों की जान पर भी खतरा मंडराने लगा है। सबसे चिंताजनक स्थिति उस वक्त उत्पन्न हुई जब मादा चीता \’आशा\’ अपने तीन शावकों के साथ पार्क की सीमा लांघकर बागचा क्षेत्र की ओर निकल गई। जिन इलाकों में वे पहुंचे हैं, वहां हर ओर जलभराव और कीचड़ है — और यहीं से चिंता गहराती है। Read more: विरोध का नया स्वर: OBC समागम व विपक्षी गठबंधन की रणनीति’ जंगल के बाहर, खतरे के भीतरचीतों का पार्क की सीमा से बाहर जाना कोई मामूली बात नहीं। बीते वर्ष \’पवन\’ नामक चीते की दर्दनाक मौत एक पानी से भरे गड्ढे में गिरकर हो गई थी, और अब \’आशा\’ व उसके नन्हे शावक उसी रास्ते पर हैं। बरसात के इस भीगे मौसम में, नहरें और गड्ढे जानलेवा जाल बन गए हैं। तकनीक भी बेबसहालांकि सभी चीतों के गले में ट्रैकिंग के लिए कालर ID लगे हैं, फिर भी भारी वर्षा और दलदली रास्तों ने ट्रैकर्स की पहुंच को सीमित कर दिया है। न गाड़ियाँ चल पा रही हैं और न ही पैदल ट्रैकिंग संभव है। ऐसे में निगरानी टीमें हर पल तनाव में हैं कि कहीं फिर कोई अनहोनी न घटे। प्राकृतिक चुनौती के सामने सुझाववन रक्षकों ने सुझाव दिया है कि मानसून समाप्त होने तक चीतों को सुरक्षित बाड़ों में शिफ्ट किया जाए, ताकि उनकी जान की हिफाज़त सुनिश्चित हो सके। हालांकि यह कदम उनके प्राकृतिक व्यवहार के अनुकूल नहीं होगा, परंतु वर्तमान हालात में यह सुरक्षा का बेहतर विकल्प बन सकता है। शावकों की नाजुक स्थितिशावकों के लिए यह मौसम और भी अधिक जोखिम भरा है। दलदली ज़मीन पर उनका संतुलन बनाना मुश्किल है और अगर वे गड्ढों या पानी में फंस गए तो बचाना बेहद कठिन हो सकता है। यही कारण है कि हर पल की निगरानी अब जरूरी बन गई है। सावधानी और सतर्कताकूनो के डीएफओ थिरूकुरल आर के अनुसार, सभी चीतों को संक्रमण से बचाने के लिए दवाएं दी जा चुकी हैं, और निगरानी लगातार जारी है। लेकिन निगरानी से ज्यादा अब ज़रूरत संरक्षण की रणनीति पर दोबारा विचार करने की है। चीतों को भारत की धरती पर फिर से बसाने का सपना, सिर्फ वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, पूरे देश का सपना है। लेकिन यह सपना तब तक साकार नहीं हो सकता जब तक हम प्रकृति के सामने झुककर नहीं, बल्कि उसकी चुनौतियों का समाधान खोजकर खड़े नहीं होते। कूनो में हो रही यह संघर्ष की कहानी एक बार फिर हमें सोचने पर मजबूर करती है — क्या हम सच में तैयार हैं \’प्रोजेक्ट चीता\’ को सफल बनाने के लिए?

विरोध का नया स्वर: OBC समागम व विपक्षी गठबंधन की रणनीति’

strategy of opposition india alliance

New voice of protest: OBC Sammelan and the strategy of opposition INDIA alliance कांग्रेस द्वारा 25 जुलाई को आयोजित “OBC न्याय और भागीदारी सम्मेलन” केवल एक विपक्षी सभा नहीं, बल्कि उनको जातीय जनगणना और आरक्षण सीमा हटाने जैसे संवैधानिक मुद्दों पर नया मोर्चा खोलने की रणनीति है CM सिद्धारमैया ने ‘अहिन्दा मॉडल’ को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के रूप में पेश करते हुए इसे सामाजिक न्याय की मिसाल बतायायह पूरी योजना कांग्रेस द्वारा पिछड़े वर्गों की राजनीतिक शक्ति को फिर से केंद्रित करने का स्पष्ट संकेत है। 19 जुलाई को हुई वर्चुअल बैठक में सीट बंटवारे, साझा घोषणा पत्र और आगामी चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय की समीक्षा हुईबीजेपी के बढ़ते चुनावी दबाव को देखते हुए यह बैठकों का सिलसिला अब और तेज़ हो रहा है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि दोनों ही दल विरोधी के बिल्कुल समान मुद्दे उठाते हुए जनता के बीच अलग-अलग प्रस्तुति दे रहे हैं। कांग्रेस ने OBC सम्मेलन को न सिर्फ नैरेटिव बदलने का जरिया बनाया है, बल्कि उससे आक्रामक विपक्षी रणनीति भी तैयार कर रही है।INDIA गठबंधन की बैठक इस दिशा में पहला ठोस कदम है, लेकिन इसके लिए राष्ट्रव्यापी समन्वय और स्पष्ट नेतृत्व की भी आवश्यकता है।बीजेपी और कांग्रेस के बीच की \’कॉपिकैट\’ रणनीतियों से स्पष्ट है कि आगामी चुनावी चर्चाएँ वस्तुनिष्ठ मुद्दों से हटकर प्रतीकात्मक राजनीति की ओर बढ़ रही हैं—जहां असली मुकाबला संवाद की न बजाय जुबानी प्रतिस्पर्धा की होगी। चुनौती और अवसर यदि विपक्ष की ये रणनीतियाँ स्थानीय जनभावनाओं से जुड़कर आगे बढ़ाईं गयीं, तो बीजेपी को न सिर्फ जवाबी मोर्चा बनाना पड़ेगा, बल्कि उसे नई राजनीतिक जोर जुटाना होगा।वहीं बीजेपी की जातिगत जनगणना अधिसूचना कांग्रेस की ओबीसी रणनीति को जबाव देने की सीधी कोशिश है—लेकिन देखना यह है कि कौन जनता को असली बदलाव का भरोसा दिला पाता है।

कांग्रेस की चुनावी तैयारियों का आगाज \”कांग्रेस का \’नव संकल्प\’: 2028 की रणभेरी मांडू से\”

congress nav sankalp from mandu

Congress\’s election preparations begin \”Congress\’s \’Nav Sankalp\’: The battle cry of 2028 from Mandu\” Congress Nav Sankalp from Mandu मध्य प्रदेश की राजनीति में बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है। कांग्रेस ने 2028 विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है — और इसकी शुरुआत हो रही है ऐतिहासिक नगरी मांडू से। 21 और 22 जुलाई को आयोजित \’नव संकल्प शिविर\’ कांग्रेस की गंभीरता, तैयारी और भविष्य की लड़ाई के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह महज एक शिविर नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक पुनर्निर्माण और विचारधारा की पुनर्स्थापना का एक मंच है। 12 सत्रों में बंटे इस शिविर में विधायकों को विचारधारा, विपक्ष की भूमिका, जन मुद्दों की समझ, और सोशल मीडिया रणनीति जैसे पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाएगा। यह दिखाता है कि कांग्रेस अब सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाली पार्टी नहीं, बल्कि दिशा देने वाली ताकत बनना चाहती है। Congress Nav Sankalp from Mandu शिविर का सबसे अहम संदेश है — संगठन की मजबूती, विचारधारा की स्पष्टता और जनता से संवाद की नई शुरुआत। राहुल गांधी की वर्चुअल मौजूदगी और शीर्ष नेताओं — जैसे कमलनाथ, जीतू पटवारी, विवेक तन्खा, सुप्रिया श्रीनेत, अजय माकन — की सक्रिय भागीदारी इस बात को पुष्ट करती है कि कांग्रेस अब ‘नेताओं की भीड़’ नहीं, बल्कि ‘विचारधारा से जुड़ा कैडर’ बनाना चाहती है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने जहां एक ओर शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने सरकार की असफलताओं को उजागर करते हुए कांग्रेस के वैकल्पिक विज़न को भी सामने रखा। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को “झूठ का पुलिंदा” कहना और प्रदेश में बढ़ते अपराध, बेरोजगारी, और भ्रष्टाचार पर तीखे सवाल खड़े करना कांग्रेस के तीखे तेवरों को दर्शाता है। Read more: क्या बार-बार थकान और भूख न लगना फैटी लीवर की चेतावनी हो सकती है? जानिए कैसे बचाव संभव यह शिविर आने वाले वर्षों में कांग्रेस की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। अगर यह प्रशिक्षण और आत्ममंथन जमीन पर उतर पाया, तो मांडू कांग्रेस के लिए वही बन सकता है, जो कभी नव-भारत निर्माण के दौर में वर्धा और सेवाग्राम हुआ करते थे। कांग्रेस ने यह संकेत दे दिया है कि वह अब विपक्ष में बैठने के लिए नहीं, सत्ता में लौटने के लिए मैदान में है। अब देखना यह होगा कि मांडू से निकली यह संकल्पशक्ति 2028 तक कितना प्रभाव छोड़ती है।