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शुभमन गिल ने बताया, रोहित शर्मा की तरह कप्तान बनने का उनका सपना और जिम्मेदारी

नई दिल्ली  भारत की वनडे टीम के नवनियुक्त कप्तान शुभमन गिल ने गुरुवार को कहा कि वह इस महीने के अंत में ऑस्ट्रेलिया दौरे से इस प्रारूप की कमान संभालने पर अपने पूर्ववर्ती रोहित शर्मा की तरह ड्रेसिंग रूम में शांत माहौल बनाए रखने की कोशिश करेंगे। पहले ही भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी संभाल रहे 25 वर्षीय गिल 19 से 25 अक्टूबर तक ऑस्ट्रेलिया में होने वाली तीन मैचों की श्रृंखला के साथ अपनी एकदिवसीय कप्तानी की शुरुआत करेंगे। गिल से जब शुक्रवार से वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू हो रहे दूसरे टेस्ट मैच से पहले उनकी भूमिका बढ़ाए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘रोहित भाई का धैर्य और उन्होंने टीम में जो दोस्ती कायम की है मैं उसे आत्मसात करना चाहता हूं।’’ गिल ने रोहित और स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर भी विराम लगाने की कोशिश की, जो दोनों अब केवल एकदिवसीय प्रारूप में ही उपलब्ध हैं। उन्होंने टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट से संन्यास ले लिया है। गिल ने कहा, ‘‘इन दोनों ने भारत के लिए कई मैच जीते हैं। बहुत कम लोगों के पास इतना कौशल और अनुभव होता है। हमें उनकी ज़रूरत है।’’ कोहली इस समय लंदन में हैं और रोहित मुंबई में अपने घर पर हैं। दोनों 15 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया रवाना होने से पहले टीम से जुड़ेंगे। एकदिवसीय प्रारूप की कप्तानी मिलने पर गिल ने कहा कि वह इससे सम्मानित महसूस कर रहे हैं। गिल ने कहा, ‘‘वेस्टइंडीज के खिलाफ (अहमदाबाद में) पहले टेस्ट के बाद इसकी घोषणा की गई थी, लेकिन मुझे इसके बारे में थोड़ा पहले पता चल गया था। भारत का नेतृत्व करना सम्मान की बात है।’’ उन्होंने मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ अपने संबंधों पर भी बात की, जिन्हें भारतीय क्रिकेट में चल रहे बदलाव का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है। गिल ने कहा, ‘‘हमारे रिश्ते अच्छे हैं। हम खिलाड़ियों को सुरक्षित माहौल कैसे प्रदान किया जाए इस पर बात करते हैं। इसके अलावा, हम तेज़ गेंदबाज़ों का एक पूल तैयार करने पर भी बात करते हैं।’’  

राजस्थान में ठंड का असर: सिरोही में शीतलहर और गिरता पारा

 जयपुर बारिश थमने के साथ ही उत्तर-पश्चिमी हवाएं सक्रिय हो गई हैं, जिससे राजस्थान में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और वहां से आने वाली ठंडी हवाओं ने राज्य में सर्दी का असर बढ़ा दिया है। सिरोही में रात का तापमान गिरकर 15.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन की सबसे ठंडी रात रही। वहीं शेखावाटी, हनुमानगढ़, बीकानेर और गंगानगर क्षेत्रों में भी न्यूनतम तापमान लगातार 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल राज्य में अगले कुछ दिन मौसम शुष्क रहेगा। दिन में धूप खिलने से अधिकतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी होगी, लेकिन सुबह-शाम उत्तरी हवाओं के चलते ठंडक बनी रहेगी। पिछले 24 घंटों में जयपुर, अलवर, सीकर, नागौर, बीकानेर, चूरू और पिलानी सहित अधिकांश शहरों में दिन का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। सीकर का अधिकतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राज्य में सबसे कम रहा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण हो रही बर्फबारी का असर मैदानी राज्यों तक पहुंच रहा है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई इलाकों में सुबह हल्का कोहरा और ठंडी हवाएं महसूस की जा रही हैं। ग्रामीण इलाकों में अब रात के समय पंखे और कूलर बंद हो चुके हैं, वहीं लोग हल्के गर्म कपड़े पहनने लगे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव रहेगा लेकिन सर्द हवाओं का असर जारी रहेगा। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के प्रमुख जिलों का न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा- अजमेर 18.6, जयपुर 20.8, सीकर 17.5, कोटा 21.7, चित्तौड़गढ़ में 21.2, बाड़मेर में 22.6, जैसलमेर 25.0, जोधपुर 21.5, बीकानेर में 20.4 डिग्री, चूरू में 19.4 डिग्री और श्री गंगानगर में 19.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का कहना है कि आगामी 14-15 अक्टूबर को उत्तरी इलाकों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। ऐसे में दीपावली के आसपास फिर से बारिश होने की आशंका है।

अबूझमाड़ को नई राह: नेशनल हाईवे 130-डी जोड़ेगा नारायणपुर से महाराष्ट्र तक

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए सरकार सतत प्रयासरत : मुख्यमंत्री साय रायपुर, बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी। नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से इस नेशनल हाईवे के अबूझमाड़ इलाके में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता खुल गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल सड़क नहीं बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। हमारी सरकार ने इस परियोजना को तेजी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि बस्तर अंचल के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

मायावती का नया खेल: आकाश आनंद को लेकर पार्टी में क्या कही BSP प्रमुख ने?

लखनऊ कांशीराम की पुण्यतिथि पर गुरुवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की महारैली में मायावती ने इशारों-इशारों में बता दिया है कि बसपा का अगला मुखिया कोन होगा? उन्होंने समर्थकों से कहा कि जिस तरह आपने कांशीराम का साथ दिया। उनके बाद मेरा साथ दिया। उसी तरह मेरे साथ-साथ आप आकाश आनंद का भी साथ दीजिए। इस बयान के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि मायावती ने अनौपचारिक रूप से आकाश आनंद को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। लखनऊ में महारैली में आई भीड़ को देखकर उत्साहित पार्टी अध्यक्ष मायावती ने दावा किया कि 2027 में उनकी पार्टी की सरकार उत्तर प्रदेश में बनना तय हो गया है। मायावती ने कहा कि 2027 में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनेगी। स्मारक स्थल पर कांशीराम को श्रद्धांजलि देते हुए मायावती ने कहा कि भीड़ ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचे हैं। रैली में पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तराखंड राज्यों से आए समर्थक भी शामिल हैं। महारैली को देखते हुए पार्टी की तरफ से पांच लाख भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए हर जिले से कार्यकर्ताओं व समर्थकों के आगमन को लेकर परिवहन की व्यवस्था पदाधिकारियों और नेताओं की तरफ से की गई थी। वहीं दूसरे प्रदेशों में शामिल हरियाणा, पंजाब, दल्लिी आदि राज्यों से भी पदाधिकारी व समर्थक आये थे। खचाखच भीड़ से भरे रैली स्थल को लेकर पार्टी के नेताओं का दावा है कि अपेक्षा के अनुरूप काफी संख्या में समर्थक आये हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में जब उत्तर प्रदेश में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी, तब इन जातिवादी पार्टियों के चेहरे बेनकाब हो गए। कांग्रेस, भाजपा और सपा ने मिलकर षड्यंत्र किया कि बसपा को केंद्र की सत्ता तक न पहुंचने दिया जाए। रही-सही कसर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) ने पूरी कर दी। मायावती ने आरोप लगाया कि इन दलों ने बैलेट पेपर की जगह ईवीएम का इस्तेमाल कर लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ किया, जबकि चुनाव बैलेट पेपर से भी शांति और पारदर्शिता के साथ कराए जा सकते हैं। अपने संबोधन में कांग्रेस पर पहला निशाना साधते हुये उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर देश के संविधान और बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सद्धिांतों का अपमान किया था। कांग्रेस ने कभी भी डॉ. आंबेडकर और दलित समाज का सच्चा सम्मान नहीं किया। आज वही कांग्रेस नेता संविधान की कापी लेकर नाटकबाजी कर रही है।  

मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने किया सम्मान, खिलाड़ियों ने जताया आभार

सीएम योगी के सम्मान से बढ़ा खिलाड़ियों का हौसला   पदक विजेता बेटियों ने कहा– अब देश के लिए जीतेंगे मेडल  मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ से सम्मान पाकर खिले खिलाड़ियों के चेहरे  मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने किया सम्मान, खिलाड़ियों ने जताया आभार  योगी सरकार की खेल नीति से बदल रहा माहौल, बेटियाँ बोलीं– अब हमारी बारी है झांसी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने झांसी की धरती पर न केवल खेलों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकल्प दोहराया, बल्कि अपनी प्रेरणादायक उपस्थिति से युवा खिलाड़ियों के सपनों को पंख भी लगा दिए। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के 36वें क्षेत्रीय खेलकूद समारोह के समापन अवसर पर सीएम योगी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों को को सम्मानित किया। इन खिलाड़ियों के चेहरे पर चमकते आत्मविश्वास और आंखों में जगमगाते सपनों ने साबित कर दिया कि योगी सरकार का खेल को बढ़ावा देने की नीति न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत कर रहा है, बल्कि युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय पटल पर चमकाने का मंत्र भी दे रहा है। रुद्रिका सिंह, तारा देवी इंटर कॉलेज की होनहार छात्रा हैं, जिन्हें इस साल खेलो इंडिया में मेडल जीतने के लिए सम्मानित किया गया। रुद्रिका ने उत्साह से कहा कि मैं बहुत खुश हूं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में खेल का ऐसा अच्छा माहौल बनाया है कि हर सपना साकार लगता है। आगे मैं और मेहनत करूंगी, जिससे देश के लिए खेलने का मौका मिले और मैं अपने देश व प्रदेश का नाम रोशन कर सकूं।  इसी समारोह में संध्या राजपूत, महाराजा अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की तेजतर्रार धाविका ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि मेरी 3000 मीटर और 1500 मीटर दौड़ की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान आया। पिछले साल एसडीएफआई के अंडर 14 प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल किया। आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे सम्मानित किया, मैं बहुत खुश हूं। यहां खेल का अच्छा माहौल है, आगे देश के लिए मेडल जीतना चाहती हूं।  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूम मचाने वाली शीलू यादव, सरस्वती विद्या मंदिर की वेस्ट खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा कि मैं साउथ कोरिया में मेडल जीती हूं। मैं एक अंतरराष्ट्रीय मेडलिस्ट हूं। यहां झांसी में सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ती हूं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज यहां सम्मानित किया है। मैं बहुत खुश हूं, आगे देश के लिए और मेडल जीतना चाहती हूं। काशी प्रांत की ओवरऑल चैंपियनशिप विजेता पल्लवी सिंह ने कहा कि इस सम्मान से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती हूं। उन्होंने कहा कि सीएम योगी ने प्रदेश में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। वह केवल पदक ही नहीं बांटते हैं, बल्कि युवाओं के हौसले को भी मजबूत करते हैं।

ओबीसी कोटे पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई नवंबर में, सरकार ने फिर समय मांगा

भोपाल   एक बार फिर मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण दिए जाने के मामले पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई टाल दी गई है. पहले इस मुद्दे पर 8 अक्टूबर से नियमित सुनवाई होने वाली थी लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी. MP सरकार की तरफ से तुषार मेहता ने इस मामले की सुनवाई को 9 अक्टूबर से  किए जाने का आग्रह किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था. लेकिन एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से इस सुनवाई के लिए वक्त मांगा है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर पहले ही नोटिस जारी कर चुका है. वहीं कांग्रेस इस मामले में लगातार सरकार की मंशा पर सवाल उठाती आयी है. शुरू होते ही मांग ली तारीख सुनवाई के लिए सुबह 10.30 बजे जैसे ही बेंच शुरू हुई, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसमें समय देने की मांग की। उन्होंने कहा कि अभी कुछ मुद्दों पर आपस में चर्चा करना है, इसलिए छुट्टियों के बाद इसमें समय दे सकें। अनारक्षित पक्ष ने कहा कि बेहतर होगा इसे खत्म किया जाए। इस पर ओबीसी वेलफेयर कमेटी की ओर से कहा गया कि इसे सुना जाए। इस पर मेहता ने कहा कि आगे बढ़ा दिया जाए। अब इस तारीख को होगी सुनवाई सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में जज के सामने ओबीसी आरक्षण के मामले में और वक्त देने की मांग रखते हुए कहा कि "इसमें कई तकनीकी पक्ष हैं, जिनको समझने के लिए थोड़े और वक्त की जरूरत है. वहीं अब इस मामले की सुनवाई अगले महीने (नवंबर) के पहले हफ्ते में होगी." ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा फाइनल हियरिंग होगी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस पर कहा कि ठीक है, अभी छुट्टियां लग जाएंगी तो आप बताइए क्या संभावित समय बताएं। मेहता ने कहा कि नवंबर पहले या दूसरे सप्ताह में। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूसरे सप्ताह नवंबर रख रहे हैं लेकिन यह फाइनल हियरिंग होगी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में केस वापस करने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। दो मिनट की सुनवाई में डेट आगे बढ़ गई। ओबीसी कमेटी ने कहा कि हाईकोर्ट के स्टे हटा दीजिए इस पर ओबीसी वेलफेयर कमेटी के अधिवक्ता वरूण ठाकुर ने कहा कि कम से कम हाईकोर्ट के स्टे को हटा दीजिए, एक्ट कहीं भी चैलेंज नहीं है। स्टे हटा दीजिए ताकि एक्ट के तहत भर्ती हो सके। लेकिन इस पर बेंच ने कोई जवाब नहीं दिया। 87 और 13 फीसदी का मामला उलझा मध्यप्रदेश की सियासत में कहा जाता है कि OBC समुदाय जिसके साथ रहेगा सत्ता की चाबी उसके पास रहेगी. यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों पिछड़ा वर्ग का हितैषी बनने की कोशिश करती हैं. विपक्ष का आरोप है सरकार गुमराह कर रही है, और सरकार कहती है — हम तो OBC के साथ हैं. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ऐसे आरोपों को सिरे नकारते हैं. वे कहते हैं कि हमारी सरकार का रुख साफ है. हम ओबीसी को 27℅ आरक्षण देने के स्टैंड पर हम कायम हैं.  मध्यप्रदेश में OBC की आबादी 50 फीसदी से अधिक है, लेकिन ओबीसी वर्ग 27% आरक्षण के पेंच में उलझ गया है.यही आरक्षण युवाओं की गले की फांस बनता जा रहा है.दरअसल मध्यप्रदेश में हो रही भर्ती परीक्षाओं में 87:13 का फॉर्मूला लागू है, इसके तहत 87% रिजल्ट जारी हो रहे हैं जबकि 13% रिजल्ट होल्ड पर हैं आलम ये है कि कई युवा सरकारी नौकरी की राह देखते-देखते ओवर एज हो चुके हैं तो कुछ ने पढ़ाई ही छोड़ दी है. एमपी हाईकोर्ट जाएगा या नहीं यह तय नहीं यह केस अब हाईकोर्ट में वापस जाएगा या नहीं यह तय नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर गुरुवार को कोई बात नहीं हुई। इसके पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्यों ना केस को हाईकोर्ट भेज दें, क्योंकि आरक्षण स्थानीय मुद्दे, टोपोग्राफी, जनसंख्या इन सभी से जुड़ा होता है और यह हाईकोर्ट बेहतर समझ सकता है। इस पर बात आई थी कि हाईकोर्ट ने कई याचिकाओं में स्टे दे दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम स्टे वेकेट करके इसे रिवर्ट कर देते हैं। इस पर अनारक्षित पक्ष को आपत्ति थी क्योंकि स्टे हटने का मतलब था कि मप्र में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण (27 percent OBC reservation case) लागू हो जाएगा। पांच मिनट की सुनवाई के बाद तय हुआ कि इस मुद्दे को प्रैक्टिकली देखा जाएगा और 9 अक्टूबर को सुनेंगे, लेकिन फिर सरकार ने समय मांग लिया। सरकार लगातार समय मांग रही है मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में लगातार समय मांग रही है। यह मामला साल 2019 से चल रहा है। पहले हाईकोर्ट ने इसमें ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण (27 percent OBC reservation) देने पर रोक लगाई और फिर इसमें सुनवाई की जगह शासन ने ट्रांसफर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर कर दी। इसके बाद इन्हें खारिज किया गया और हाईकोर्ट फिर भेजा गया लेकिन फिर वहां से सुप्रीम कोर्ट में दूसरी ट्रांसफर याचिकाएं लगाई गई। हाईकोर्ट में हर बार शासन ने यह कहा कि एपेक्स कोर्ट में केस है, इसलिए सुनवाई नहीं हो सकती है। इसके बाद मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में सुना गया और सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से कहा कि सरकार 6 साल से सो रही थी, अब अंतरिम राहत नहीं देंगे अंतिम फैसला देंगे। लेकिन 8 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अचानक कहा कि क्यों ना इसे हाईकोर्ट भेज दिया। लेकिन 9 अक्टूबर को हाईकोर्ट भेजने पर कोई चर्चा नहीं हुई। ओबीसी कमेटी के आरोप: चुनाव के कारण राजनीति हुई ओबीसी वेलफेयर कमेटी की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने मीडिया से कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कल कहा था कि स्टे वेकेट करते हुए केस हाईकोर्ट को रिमांड करेंगे। आज (9 अक्टूबर)  सुनवाई के दौरान उम्मीद थी कि स्टे हटकर हाईकोर्ट में केस जाएगा, लेकिन सुबह सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहताजी ने मेंशन लेकर मामले की फाइनल सुनवाई का निवेदन किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानते हुए दूसरे सप्ताह नवंबर में रखा गया है, फाइनल सुनवाई के लिए कहा है। अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि … Read more

टैरिफ हटने से फार्मा शेयरों को बड़ा फायदा, अमेरिकी फैसले से बढ़ी उम्मीदें

वाशिंगटन अमेरिका से गुरुवार को एक गुड न्यूज आई है. तमाम रिपोर्ट्स में ऐसा संकेत दिया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप अपने फार्मा प्रोडक्ट्स पर 100% टैरिफ ऐलान से जेनेरिक दवाओं को दूर रख सकते हैं. US में बिकने वाली ज्यादातर दवाओं पर शुल्क लगाने के मुद्दे पर महीनों की बहस के बाद, ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि वह विदेशी देशों से आने वाली जेनेरिक दवाओं पर शुल्क लगाने की योजना नहीं बना रहा है. बता दें ये भारत के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि देश से भारी मात्रा में ऐसे दवाओं का निर्यात अमेरिका को किया जाता है. इसके साथ ही इन रिपोर्ट्स के बाद फार्मा स्टॉक्स भी फोकस में हैं.  जेनेरिक दवाओं रह सकती हैं टैरिफ से दूर! वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट में ऐसे संकेत दिए हैं कि ट्रंप प्रशासन आने वाले हफ्तों में फार्मा टैरिफ को लेकर अपने रुख में बदलाव कर सकता है. इसमें कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ से अलग रख सकता है. बता दें कि ट्रंप द्वारा ब्रांडेड और पेटेंटेड विदेशी फार्मा प्रोडक्ट्स 100% टैरिफ लगाए जाने के ऐलान के बाद से ही जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ को लेकर काफी आशंकाएं और अटकलें चल रही हैं. रिपोर्ट के बाद शेयर बाजार में कारोबार के दौरान फार्मा स्टॉक्स में हरियाली भी देखने को मिल रही है.  भारत को कहा जाता है ‘दुनिया की फार्मेसी’ आईक्यूवीआईए (IQVIA) नामक वैश्विक चिकित्सा डेटा एनालिटिक्स कंपनी के अनुसार, अमेरिका में फार्मेसियों में बेची जाने वाली कुल जेनेरिक दवाओं में से 47 प्रतिशत दवाएं भारत से आती हैं। अमेरिका के घरेलू निर्माता करीब 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि बाकी हिस्सा अन्य देशों से आता है। जिसमें भारत की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। यही वजह है कि भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। वाइट हाउस का यू-टर्न वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा चल रही दवाओं पर टैरिफ जांच के दायरे को सीमित करता है। अप्रैल में शुरू हुई इस जांच में पहले कहा गया था कि “जेनेरिक और नॉन-जेनेरिक दोनों प्रकार की तैयार दवाओं” के साथ-साथ दवा निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल (ड्रग इंग्रेडिएंट्स) को भी जांच के दायरे में रखा जाएगा। लेकिन वाइट हाउस के भीतर इस पर भारी खींचतान देखने को मिली। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) गुट के कठोरपंथी सदस्य चाहते थे कि दवा निर्माण को वापस अमेरिका में लाया जाए और इसके लिए विदेशी दवाओं पर भारी टैरिफ लगाया जाए। उनका तर्क था कि यह “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जुड़ा मामला है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप की घरेलू नीति परिषद के कुछ सदस्य इस फैसले के खिलाफ थे। उन्होंने दलील दी कि यदि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाया गया, तो अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी और दवाओं की कमी भी हो सकती है। साथ ही, जेनेरिक दवाओं का उत्पादन भारत जैसे देशों में इतना सस्ता है कि भारी टैरिफ लगाने के बाद भी अमेरिकी उत्पादन आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं होगा। ट्रंप की ‘टैरिफ पॉलिसी’ पर फिर सवाल ट्रंप प्रशासन पहले भी अपने टैरिफ युद्धों के कारण आलोचनाओं में रहा है। चीन पर लगाए गए टैरिफ के बाद चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, खासकर सोयाबीन की खरीद बंद कर दी, जिससे अमेरिकी किसान बुरी तरह प्रभावित हुए। अब अमेरिकी सरकार को किसानों की मदद के लिए 16 अरब डॉलर की सब्सिडी देनी पड़ रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इन सब्सिडियों का असली बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ता पर ही पड़ेगा। एक किसान ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते हुए लिखा, “सरकार हमसे पैसा वसूल रही है और वही पैसा हमें वापस दे रही है।” ऐसे में, ट्रंप प्रशासन ने शायद यह महसूस किया कि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाकर जनता को एक और “कड़वी दवा” नहीं दी जा सकती। भारतीय दवाओं से अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को मिली भारी बचत अनुमानों के अनुसार, साल 2022 में भारतीय जेनेरिक दवाओं ने अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली को करीब 219 अरब डॉलर की बचत कराई। पिछले एक दशक में यह बचत 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। भारतीय कंपनियों की अहम भूमिका टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में सिप्ला, सन फार्मास्युटिकल्स और डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, अवसाद, अल्सर और नर्वस सिस्टम डिसऑर्डर जैसी प्रमुख बीमारियों के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाओं में आधे से अधिक प्रिस्क्रिप्शन सप्लाई किए। इनमें मेटफॉर्मिन (डायबिटीज), एटोरवास्टेटिन (कोलेस्ट्रॉल), लोसार्टन (ब्लड प्रेशर), और आम एंटीबायोटिक्स (एमॉक्सिसिलिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन) जैसी दवाएं शामिल हैं, जो अमेरिकी मरीजों के इलाज में रोजाना उपयोग की जाती हैं।

बीजापुर के 32 पूर्व माओवादियों ने सीखा कुक्कुटपालन और बकरीपालन का गुर

समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन की अभिनव पुनर्वास नीति से मिल रहा लाभ रायपुर, माओवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे बीजापुर जिले के 32 आत्मसमर्पित माओवादियों ने अब विकास और स्वरोजगार की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इन सभी ने जगदलपुर स्थित क्षेत्रीय स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में एक महीने का कुक्कुटपालन और बकरीपालन का विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से पूर्व नक्सलियों ने न केवल पशुपालन के वैज्ञानिक तरीके सीखे, बल्कि एक सफल उद्यमी बनने की बारीकियों को भी जाना। एक माह की गहन ट्रेनिंग में आत्मसमर्पित माओवादियों को कुक्कुटपालन और बकरीपालन से संबंधित हर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। यहां उन्होंने उन्नत नस्लों का चयन, चारा प्रबंधन और संतुलित आहार की जानकारी, टीकाकरण, रोगों की पहचान और उपचार के तरीके के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, ऋण प्राप्त करने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की रणनीति के संबंध में प्रशिक्षण लिया।           प्रशिक्षण लेने वाले एक आत्मसमर्पित माओवादी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जंगल में जीवन बहुत मुश्किल और खाली था। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जो पुनर्वास नीति बनाई गई है, वह एक अभिनव प्रयास है। जिससे अब हम अपने हाथों से काम करके परिवार के लिए एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन-यापन कर सकते हैं। सरकार के इस कदम से हमें बहुत हिम्मत मिली है।

योगी सरकार ने किया साहसी बेटियों का सम्मान, समाज में गूँजा संदेश हर बालिका को मिले जीवन का अधिकार

मिशन शक्ति 5.0: बेटियों ने ठुकराया बाल विवाह, चुना शिक्षा और आत्मनिर्भरता का रास्ता  बाल विवाह को ना कार्यक्रम के जरिए योगी सरकार का 2030 तक प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प योगी सरकार ने किया साहसी बेटियों का सम्मान, समाज में गूँजा संदेश हर बालिका को मिले जीवन का अधिकार  योगी सरकार ने पेश की मिसाल, राष्ट्रीय औसत से नीचे यूपी में बाल विवाह  नाटक, गोष्ठी और संवाद के जरिए योगी सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ चलाया सामूहिक चेतना का अभियान  कानून और सामाजिक जागरूकता के साथ आगे बढ़ा मिशन शक्ति, बदल रही है समाज की सोच लखनऊ  मिशन शक्ति 5.0 अभियान के तहत योगी सरकार ने बाल विवाह की कुप्रथा के खिलाफ ऐतिहासिक अभियान छेड़ दिया है। अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह (3 से 11 अक्टूबर) के थीम पर "बाल विवाह को ना" कार्यक्रम के माध्यम से सभी जिलों में एक साथ आयोजित कार्यक्रमों ने बालिकाओं और महिलाओं ने कुप्रथाओं के बंधनों से मुक्त करने का संकल्प दोहराया।  इस अभियान ने न केवल बाल विवाह के दुष्परिणामों पर जन-जागरूकता फैलाई, बल्कि उन साहसी बालिकाओं को सम्मानित कर समाज को नई दिशा भी दिखाई, जिन्होंने दबावों के बावजूद विवाह ठुकराकर शिक्षा और आत्मनिर्भरता का मार्ग चुना। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के दृष्टिकोण से यह प्रयास प्रदेश को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित इस अभियान में प्रदेशभर के सामुदायिक केंद्रों, स्कूलों और पंचायतों में सामुदायिक संवाद, गोष्ठियां, नाटक, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और व्याख्यान आयोजित किए गए। विशेषज्ञों, अध्यापकों, समाजसेवियों और बालिकाओं ने खुलकर बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक दुष्प्रभावों पर चर्चा की। बाल विवाह से बालिकाओं की शिक्षा बाधित होती है, करियर की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। नाबालिग आयु में गर्भधारण मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर बढ़ाता है, जबकि किशोरावस्था में मातृत्व शारीरिक-मानसिक समस्याएं पैदा करता है। घरेलू हिंसा और शोषण का खतरा भी बढ़ जाता है। यह कुप्रथा समाज की आर्थिक-सामाजिक प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक पहलू रहा उन साहसी बालिकाओं का सम्मान, जिन्होंने सामाजिक दबावों का डटकर मुकाबला किया। इन बालिकाओं ने परिवार और समाज की अपेक्षाओं को तोड़कर किताबों का दामन थामा, स्वाभिमान को चुना। हर बालिका को अपने भविष्य का निर्णय खुद लेने का हक है।  उत्तर प्रदेश में बाल विवाह के खिलाफ अभियान का दिख रहा सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बाल विवाह का औसत 15.8 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत 23.3 से काफी नीचे है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर है, लेकिन विगत पांच वर्षों में योगी सरकार के प्रयासों से इसमें उल्लेखनीय कमी आई है। विभाग ने अब तक 2000 से अधिक संभावित बाल विवाह रोककर सैकड़ों बालिकाओं को बचाया है। मिशन शक्ति 5.0 के तहत यह अभियान सरकार की 2030 तक प्रदेश को बाल विवाह मुक्त बनाने की संकल्पना को साकार कर रहा है। समाज को आईना दिखा रहा योगी सरकार का अभियान भारत सरकार के बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत विवाह कराना या उसमें शामिल होना दंडनीय अपराध है। प्रदेश में जिला प्रोबेशन अधिकारियों को प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त कर कानूनी क्रियान्वयन मजबूत किया गया है। लेकिन कानून के साथ-साथ परिवार स्तर पर मानसिकता परिवर्तन जरूरी है। मिशन शक्ति 5.0 ने इसी दिशा में काम किया, जहां पिता-भाइयों को भी बालिकाओं के अधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया गया। योगी सरकार का यह अभियान नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इस कार्यक्रम ने बालिकाओं को न केवल संकल्प दिलाया, बल्कि समाज को आईना भी दिखाया।  महिला एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जोहरी ने कहा, "बाल विवाह केवल सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के अधिकारों का घोर उल्लंघन है। सरकार शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण से बालिकाओं को मजबूत बना रही है। आज बालिकाओं का साहस ही नया उत्तर प्रदेश गढ़ेगा। सामूहिक प्रयास से ही इस कुप्रथा का अंत संभव है।"

रेसलर अमन सहरावत पर की बड़ी कार्रवाई, लगा 1 साल का प्रतिबंध

हरियाणा  भारतीय कुश्ती महासंघ ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले रेसलर अमन सहरावत पर बड़ी कार्रवाई की है। WFI ने अमन को एक साल के लिए निलंबित कर दिया है। इस बैन का एलान होने के साथ अमन अगले एक साल तक रेसिलंग से जुड़ी किसी भी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। अमन ने पिछले साल पेरिस में हुए ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। वह सबसे कम उम्र में ओलंपिक मेडल जीतने वाले भारतीय बने थे। अमन ने सिर्फ 21 साल 24 दिन की उम्र में ओलंपिक मेडल अपने नाम किया था। अमन सहरावत को एक साल के लिए कुश्ती से बैन करने का फैसला भारतीय कुश्ती महासंघ ने सीनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनके बिना खेले ही बाहर होने के बाद उठाया है। दरअसल, अमन को मेंस की फ्रीस्टाइल 57 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लेना था। वह इवेंट के एक दिन पहले निर्धारित वजन सीमा से 1.7 किलो अधिक वजन पाये जाने के कारण बिना खेले ही अयोग्य करार दे दिए गए। खबर के अनुसार, WFI ने अमन को बैन करने के साथ उन्हें एक पत्र भी भेजा है, जिसमें लिखा कि आपको कारण बताओ नोटिस की तिथि से एक वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती से जुड़ी सभी गतिविधियों से निलंबित किया जाता है। यह निर्णय अंतिम है। निलंबन की अवधि के दौरान आपको राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर डब्ल्यूएफआई द्वारा आयोजित या स्वीकृत किसी भी गतिविधि में भाग लेने या उससे जुड़ने से प्रतिबंधित किया जाता है। गौरतलब हो कि रेसलिंग से एक साल के लिए बैन किए जाने वाले अमन सहरावत को भारतीय कुश्ती महासंघ ने 23 सितंबर 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा था। अब महासंघ ने कहा है कि अमन के जवाब को अनुशासन समिति ने अंसतोषजनक पाया, जिसमें 29 सितंबर को दिए गए आपके जवाब की विधिवत समीक्षा की।