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गोवंश संरक्षण के लिए सरकार संकल्पित, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का बड़ा बयान

घर-घर में गौपालन को प्रोत्साहित करने और गोवंश की देखभाल के लिए जारी है अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव से कंप्यूटर बाबा ने की सौजन्य भेंट भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से  नामदेव दास त्यागी कंप्यूटर बाबा ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में घर-घर में गौपालन को प्रोत्साहित करने और गोवंश की देखभाल के लिए गौशालाएं स्थापित करने का अभियान चल रहा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में 5 हजार संख्या तक संख्या में गौ माताएं रखी जा सकें, इस प्रकार की गौशालाऐं स्थापित की जा रही हैं। राज्य शासन ने गौ माता के लिए अनुदान की राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए किया है। दस हजार गौ माताएं रखने की क्षमता वाली गौशालाएं स्थापित करने की दिशा में भी कार्य हो रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। हमारा प्रयास है कि मध्य प्रदेश, दुग्ध उत्पादन में देश में प्रथम हो। इस उद्देश्य से घर-घर में गौ-पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। गोपालन की इस प्रकार की कई योजनाओं पर राज्य सरकार कार्य कर रही है। कंप्यूटर बाबा का भी इस दिशा में सहयोग प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में भगवान राम वन गमन पथ पर कार्य किया जा रहा है। साथ ही जहां-जहां भगवान कृष्ण की लीलाएं हुईं, उन क्षेत्रों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन सब गतिविधियों में भी कंप्यूटर बाबा का सहयोग प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट के बाद कंप्यूटर बाबा ने बताया कि उन्होंने गौ माता को राजमाता का दर्जा देने और प्रदेश में गौ अभयारण्य स्थापित करने का सुझाव राज्य शासन के सम्मुख विचार के लिए रखा है। कंप्यूटर बाबा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव की गौ माता के प्रति आस्था तथा राज्य सरकार द्वारा गौ संरक्षण के लिए किया जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संत समाज गौ संरक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के साथ है।  

शेयर बाजार में लगातार तेजी, Titan और TCS ने बढ़ाया जोश

मुंबई  शेयर बाजार (Stock Market) में तेजी का सिलसिला जारी है और बुधवार को लगातार पांचवें कारोबारी दिन सेंसेक्स-निफ्टी ग्रीन जोन में ओपन हुए. ओपनिंग के साथ ही जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा चढ़कर 82,200 के पार निकल गया, तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी अपने पिछले बंद की तुलना में बढ़त के साथ खुला. शुरुआती कारोबार में टाटा ग्रुप की Titan कंपनी का शेयर रॉकेट की रफ्तार से भागता हुआ नजर आया, तो वहीं TCS, Infosys से लेकर HCL Tech तक के स्टॉक्स में भी शानदार तेजी दिखी.  82200 के पार निकला सेंसेक्स शेयर मार्केट में ग्रीन जोन में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स 81,899.51 पर ओपन हुआ औऱ कुछ ही देर में ये 300 अकों से ज्यादा की उछाल के साथ 82,257.74 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आने लगा. कुछ ऐसी ही चाल एनएसई के निफ्टी की भी रही. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद के मुकाबले मामूली सुस्ती लेकर 25,079.75 पर खुला और फिर सेंसेक्स की चाल से चाल मिलाकर 25,192.50 के स्तर तक चढ़ गया. 1307 शेयरों ने की तेज शुरुआत बाजार में तेजी के बीच बुधवार को करीब 1307 कंपनियों के स्टॉक्स ने अपने पिछले बंद के मुकाबले तेजी लेकर कारोबार की शुरुआत की. इसके साथ ही बाजार में मौजूद 1073 कंपनियों के शेयर ऐसे रहे, जिनकी ओपनिंग गिरावट के साथ रेड जोन में हुई. वहीं करीब 140 कंपनियों के शेयरों की स्थिति में किसी भी तरह का कोई बदलाव देखने को नहीं मिला. शुरुआती कारोबारी में Titan Company, Asian Paints, Bajaj Finance, Tata Steel और Max Healthcare के शेयर सबसे ज्यादा भागने वाले स्टॉक्स की लिस्ट में आगे रहे. कल आई थी जोरदार तेजी इससे पहले बीते कारोबारी दिन मंगलवार को भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी, लेकिन मार्केट क्लोज होने पर इसकी रफ्तार कुछ धीमी पड़ी थी. हालांकि, इसके बावजूद दोनों इंडेक्स ग्रीन जोन में बंद हुए थे. सेंसेक्स कारोबार के दौरान 400 अंकों से ज्यादा की बढ़त लेने के बाद अंत में 136.63 अंक चढ़कर 81,926.75 पर क्लोज हुआ था. तो वहीं निफ्टी ने महज 30 अंकों की बढ़त के साथ 25,108.30 पर क्लोजिंग की थी.  टाइटन का धमाल, ये शेयर भी कमाल सबसे तेज भागने वाले शेयरों की टॉप-10 लिस्ट पर नजर डालें, तो टाटा ग्रुप की कंपनी Titan का शेयर अव्वल रहा और ये 4.20% की तेजी लेकर 3559.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था. इसके बाद लार्जकैप में शामिल अन्य स्टॉक्स में Infosys (2.50%), Tech Mahindra (2.10%), TCS (2.10%) और HCL Tech Share (1.60%) की तेजी लेकर कारोबार करता नजर आया.  इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल कंपनियों में Escorts Share (4.68%), Relaxo Share (2.84%) और Tata Elxsi (2.70%) की बढ़त लेकर कारोबार कर रहा था. स्मॉलकैप कंपनियों में सबसे तेज उछाल ITI Share में आया और ये 11 फीसदी से ज्यादा की बढ़त लेकर ट्रेड कर रहा था.

अब 8 घंटे काम के बाद ही वेतन: रायपुर सफाईकर्मियों के लिए नया नियम

 रायपुर शहर की सफाई में काम करने वाले कर्मियों का अब आठ घंटे की पूरी ड्यूटी करनी पड़ेगी। प्रतिदिन आठ घंटे की ड्यूटी होने पर ही उन्हें सैलरी मिलेगी। नगर निगम द्वारा जोन स्तर अनुबंधित किए जाने वाले ठेका सिस्टम को भी खत्म करने जा रहा है। अब निगम हेड ऑफिस से ठेका एजेंसी नियुक्त की जाएगी, जो पूरे शहर में सफाई के लिए कर्मचारी, उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराएगी। नगर निगम की शहरी सरकार ने हाल ही में एमआइसी की बैठक में इस प्रस्ताव पर प्रारंभिक चर्चा की। बैठक में यह भी तय किया गया कि शहर की सफाई व्यवस्था को सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि शहर के वार्डों में सफाई कर्मचारी अक्सर निर्धारित संख्या से कम ड्यूटी पर मिलते थे, जिससे सफाई कार्य में कोताही होती है। इससे शहर की सफाई का स्तर अपेक्षित नहीं रह पाया। अन्य नगर निगमों जैसे भिलाई, बिलासपुर, कोरबा, जगदलपुर और अंबिकापुर में सेंट्रलाइज्ड टेंडर से बेहतर परिणाम मिले हैं। इस नए सिस्टम के तहत पूरे शहर की सफाई के लिए एक बड़ी एजेंसी को आनलाइन टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाएगा। वार्डवार मानिटरिंग संबंधित जेडएचओ के माध्यम से होगी। हर वार्ड में अलग ठेकेदार की जगह अब एक सेंट्रलाइज्ड ठेका होगा, जिसमें पापुलेशन और वार्ड वाइज सफाई प्लान तैयार किया जाएगा। निगम प्रशासन की चुनौती वर्तमान में नगर निगम हर महीने लगभग 7 करोड़ रुपये 70 वार्डों की सफाई के एवज में अलग-अलग ठेका एजेंसियों को भुगतान करता है। इसके बावजूद कई वार्डों में सफाई पर्याप्त नहीं हो पा रही थी। इस समस्या का समाधान करने के लिए अब केंद्रीकृत सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था से शहरवासियों को साफ-सुथरी गलियां, व्यवस्थित सफाई और बेहतर सार्वजनिक सुविधा उपलब्ध होगी। निगम प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में सेंट्रलाइज्ड टेंडर प्रक्रिया पूरी कर नई प्रणाली लागू कर दी जाएगी। सेंट्रलाइज्ड टेंडर से मिलने वाले फायदे     कर्मचारी को 8 घंटे ड्यूटी करनी होगी और हाजिरी लगाना अनिवार्य होगा।     सफाईकर्मी एक समान वर्दी पहनेंगे, जिससे पहचान आसान होगी।     सफाई के लिए स्पष्ट रूट चार्ट तैयार होगा।     ठेका एजेंसी के काम में मनमानी और गड़बड़ी पर रोक लगेगी।     10 जोन के 70 वार्ड पूरे शहर में एक ही एजेंसी कवर करेगी।     भुगतान में पारदर्शिता और मानिटरिंग में आसानी होगी।

डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रणाली की ओर बढ़ते कदम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जोर

कलेक्टर्स-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस पहला दिन नागरिकों को सुगम राजस्व सेवाएं प्राप्त हों : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजस्व सहित जनहित के मुद्दों पर समर्पित रहा पांचवा सत्र भोपाल  कलेक्टर्स-कमिशनर्स कॉन्फ्रेंस के पहले दिन के पांचवें सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर्स से कहा कि राजस्व विभाग को और भी जनोन्मुखी बनाया जाए जिससे शहरी और ग्रामीण नागरिकों को समय पर सुगम राजस्व विभाग की सेवाएं प्राप्त हो सकें। उन्होंने राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण, भू-अर्जन योजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण किये जाने तथा राजस्व भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण कार्य में तेजी लाने की जरूरत बताई। पांचवे सत्र का अपर मुख्य सचिव  संजय कुमार शुक्ल ने संचालन किया। इस सत्र में राजस्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, EHRMS (ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम, अविरल नर्मदा, शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग और सीएम हेल्पलाइन जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण इस सत्र में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी दी गई। फेसलैस और पेपरलैस क्षेत्राधिकार मुक्त साइबर तहसील की स्थापना को लेकर चर्चा हुई। राजस्व न्यायालयों में समर्पित पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति और प्रत्येक कार्यदिवस में राजस्व न्यायालय के संचालन को लेकर भी विमर्श हुआ। इस दौरान जानकारी दी गई कि 3 राजस्व महाभियानों में 1 करोड़ से अधिक राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया गया है। प्रदेश के 55 जिलों में पांच चरणों में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन किया गया है, इसमें 39 लाख 63 हजार हितग्राहियों को निजी अधिकार अभिलेख वितरित किए गए हैं। भू-अर्जन प्रकरणों के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निराकरण के लिए लैंड एक्विजिशन मैनेजमेंट सिस्टम (LAMS) का विकास किया गया है। मध्यप्रदेश डिजिटल क्रॉप सर्वे में जीरो इंटरफ़ेरेंस (शून्य बफर) के साथ कार्य करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध सत्र में जानकारी दी गई कि प्रदेश के नागरिकों की समग्र परिवार आईडी 2 करोड़ 16 लाख हैं और कुल 6 करोड़ 47 लाख ई-केवायसी (E-kyc) की गई हैं। केस प्रबंधन एवं ट्रैकिंग प्रणाली (CMTS) बनाई गई है जो विभिन्न शासकीय विभागों में विविध प्रकरणों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित करती है। यह प्रणाली, न्यायालयीन प्रकरणों में शासन की दक्षता, जवाबदेही एवं समन्वय को सुदृढ़ करती है। यूनिफाइड पोर्टल ऐप MPeSeva के माध्यम से सभी सरकारी सेवाएं उपलब्ध हैं। सिंगल साइन ऑन के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक ही लॉगिन एवं पासवर्ड से विभिन्न पोर्टल में लॉगिन की सुविधा दी गई है। सभी विभागों के नियमित कर्मचारियों के लिए तैयार वर्क फ्लो आधारित पोर्टल प्रदेश के सभी विभागों के 6 लाख 50 हजार से अधिक नियमित कर्मचारियों के लिए वर्क फ्लो आधारित पोर्टल तैयार किया गया है। अब तक 45 विभागों एवं 84 विभागाध्यक्ष कार्यालयों के 2 लाख 25 हजार कर्मचारी ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। "अविरल नर्मदा" गतिविधियों के समन्वय के लिए समिति गठन पर चर्चा सत्र में विमर्श हुआ कि निर्मल नर्मदा के लिए 16 जिलों को मुख्यतः कार्य करना होगा। नर्मदा क्षेत्र में क्रियान्वित गतिविधियों के समन्वय एवं अनुश्रवण के लिए समिति के गठन को लेकर भी चर्चा हुई। शैक्षणिक संस्थाओं एवं अस्पतालों हेतु जनसहयोग, सीएम हेल्पलाइन पर हुई सारगर्भित चर्चा इस दौरान में रेडक्रास एवं रोगी कल्याण समितियां, शाला विकास एवं जनभागीदारी समितियां, सीएसआर एवं जनभागीदारी योजना सहित विभिन्न बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। जिला एवं स्थानीय निकायों द्वारा संचालित कार्यक्रम एवं प्रयासों की जानकारी दी गई। सत्र में सीएम हेल्पलाइन के गंभीरतापूर्वक क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा हुई। मिशन कर्मयोगी पर सीखें सप्ताह एवं पाठ्यक्रम प्रकाशन की जानकारी भी साझा की गईं।  

करवा चौथ का शुभ संयोग: ‘शिववास योग’ में करें व्रत व पूजा, मिलेगी सुख-समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद

सुहागिनों का सबसे प्रिय और महत्वपूर्ण पर्व करवा चौथ इस साल शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार करवा चौथ पर कई अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिनमें सिद्धि योग और शिववास योग प्रमुख हैं. माना जा रहा है कि इन शुभ संयोगों में की गई पूजा और व्रत से वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर होंगे और मनोकामनाएं पूरी होंगी. करवा चौथ पर बन रहे हैं ये दो महासंयोग कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पड़ रहा करवा चौथ इस वर्ष दो विशेष शुभ योगों के साथ आ रहा है. सिद्धि योग ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, करवा चौथ की तिथि यानी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है. महत्व: यह योग किसी भी कार्य में सफलता और सिद्धि दिलाने वाला माना जाता है. इस योग में की गई पूजा और साधना विशेष फलदायी होती है. माना जाता है कि करवा चौथ के दिन सिद्धि योग में व्रत रखने और पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है और जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. अवधि: पंचांग के अनुसार, सिद्धि योग का संयोग शाम 05 बजकर 41 मिनट तक रहेगा. शिववास योग करवा चौथ पर शिववास योग का बनना बहुत ही शुभ माना गया है. शिववास का अर्थ है भगवान शिव का निवास. महत्व: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब शिववास कैलाश पर होता है, तो वह काल पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक और व्रत के लिए बेहद शुभ माना जाता है. शिववास योग में पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद शीघ्र प्राप्त होता है. करवा चौथ के दिन यह संयोग सुहागिनों के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ाता है. इस योग में की गई पूजा से पति-पत्नी के बीच प्रेम और अटूट बंधन बना रहता है. शुभ योगों में पूजा करने से मिलेंगे ये लाभ करवा चौथ पर सिद्धि योग और शिववास योग जैसे शुभ संयोगों का बनना भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इन शुभ योगों में विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन में खुशहाली आती है. सौभाग्य की वृद्धि: शिववास योग के कारण माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. संकटों से मुक्ति: मान्यता है कि सिद्धि योग में की गई पूजा वैवाहिक जीवन और अन्य निजी संकटों को दूर करने में सहायक होती है. मनोकामना पूर्ति: यह शुभ संयोग आपकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला माना जाता है, खासकर पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सफलता के लिए की गई प्रार्थनाएं. अखंड प्रेम: इन शुभ योगों में व्रत रखने से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रगाढ़ता आती है और उनका प्रेम अटूट बना रहता है. करवा चौथ व्रत का महत्व करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के बीच के प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है. इस दिन स्त्रियां सूर्योदय से चंद्रोदय तक निराजला (पानी भी न पीकर) व्रत रखती हैं. शाम को सोलह श्रृंगार करके पूरे विधि-विधान से करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है. रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है. वहीं इस साल बन रहे शुभ योग इस पावन पर्व के महत्व को और भी बढ़ा रहे हैं.

फर्स्ट कजिन मैरिज पर ब्रिटेन में छिड़ी बहस, सामाजिक-धार्मिक और मेडिकल पहलुओं पर क्या हैं तर्क?

लंदन  ब्रिटेन में फर्स्ट कजिन से शादी करना अबतक कानूनी रूप से वैध है. फर्स्ट कजिन में चचेरे, ममेरे, फुफेरे, मौसेरे भाई-बहन आते हैं. इस देश के नियमों के अनुसार यहां फर्स्ट कजिन आपस में विवाह कर सकते हैं. लेकिन हाल के वर्षों में इस पर स्वास्थ्य जोखिमों, सांस्कृतिक परंपराओं और सार्वजनिक नीतियों को लेकर तेज विवाद चल रहा है. यह मुद्दा मुख्य रूप से दक्षिण एशियाई देश (पाकिस्तानी और बांग्लादेशी) समुदायों से जुड़ा है, जहां यह प्रथा पारंपरिक रूप से प्रचलित है. हाल ही में ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस ने फर्स्ट कजिन के फायदे को बताते हुए अपनी वेबसाइट पर एक रिपोर्ट जारी की. नेशनल हेल्थ सर्विस की ये रिपोर्ट राजनीतिक और सांस्कृतिक विवादों में आ गई. जब विवाद बढ़ा तो ब्रिटिश सरकार ने चचेरे भाई-बहन के विवाह के संभावित लाभों को बताने वाली इस ऑनलाइन रिपोर्ट को चुपचाप हटा लिया. आइए सबसे पहले समझते हैं कि फर्स्ट कजिन होते कौन हैं? कौन होते हैं फर्स्ट कजिन फर्स्ट कजिन (First Cousin) वैसा रिश्तेदार होता है, जिनके माता-पिता और व्यक्ति के माता-पिता भाई-बहन होते हैं. आसान शब्दों में कहें तो  चाचा, चाची, मौसा, मौसी, मामा, मामी, फूफा या फूफी के बेटे-बेटियां फर्स्ट कजिन कहे जाते हैं. यानी किसी के माता या पिता के सगे भाई-बहन के जितने भी बच्चे हैं, वे सारे फर्स्ट कजिन (चचेरे, ममेरे, फुफेरे, मौसेरे भाई-बहन) हैं. फर्स्ट कजिन का यह भी मतलब होता है कि जिनके बीच रिश्ता जोड़ा जा रहा है उनके ग्रैंडपेरेंट्स (दादा-दादी या नाना-नानी) एक ही हैं. यह परिवार में नजदीकी खून का रिश्ता होता है. फर्स्ट कजिन को अंग्रेजी में simply 'Cousin' भी कहा जाता है, और परिवार के विस्तार में यह सबसे आम cousin रिलेशन है.  ब्रिटिश सरकार की रिपोर्ट में क्या था? फर्स्ट कजिन विवाद के फायदे बताने वाली ये रिपोर्ट नेशनल हेल्थ सर्विस के जिनोमिक्स एजुकेशन प्रोग्राम के तहत जारी की गई थी. इसका शीर्षक था 'क्या ब्रिटेन सरकार को चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए?'  फॉक्स न्यूज के अनुसार इस रिपोर्ट में फर्स्ट कजिन मैरिज के फायदे को बताते हुए कहा गया था कि इससे लोगों को परिवारों के विस्तार का फायदा मिलता है और आर्थिक लाभ भी होते हैं.  एनएचएस रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि वंशानुगत बीमारियों के बढ़ते जोखिम के कारण अंतर-पारिवारिक विवाह "लंबे समय से वैज्ञानिक चर्चा का विषय रहे हैं, रिपोर्ट के अनुसार यूके में फर्स्ट कजिन विवाह 1500 ईस्वी से ही वैध हैं, जब राजा हेनरी अष्टम ने अपनी पूर्व पत्नी की चचेरी बहन कैथरीन हॉवर्ड से विवाह किया था.  अमेरिका में भी चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह पर संघीय स्तर पर प्रतिबंध नहीं है, यहां 20 राज्यों में यह प्रथा अभी भी मान्य है.  डेली मेल की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एनएचएस लेख में कहा गया था कि पहले फर्स्ट कजिन के विवाहों में आनुवंशिक बीमारी के साथ पैदा होने का जोखिम "कम" होता है.  डेली मेल के अनुसार लेख में कहा गया है, "सामान्य आबादी में किसी बच्चे के आनुवंशिक बीमारी के साथ पैदा होने की आशंका लगभग दो से तीन प्रतिशत होती है; फर्स्ट कजिन के बच्चों में यह बढ़कर चार से छह प्रतिशत हो जाती है. इसलिए पहले चचेरे भाई-बहनों के ज़्यादातर बच्चे स्वस्थ होते हैं." ब्रिटिश पीएम स्टॉर्मर ने क्या कहा है? ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने फर्स्ट कजिन मैरिज पर पॉजिटिव रुख अपनाया है. इस साल के शुरुआत में स्टॉर्मर ने कहा था कि वे इस प्रथा पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाएंगे. चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार फर्स्ट कजिन विवाह से पैदा हुए बच्चों में सिकल सेल रोग और सिस्टिक फ़ाइब्रोसिस जैसी बीमारियों का खतरा ज़्यादा होता है.  कीर स्टार्मर ने अपनी लेबर सरकार के सदस्यों के साथ मिलकर तर्क दिया है कि इस मामले में लोगों को जागरुक किया जाना चाहिए.  हालांकि ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने एनएचएस की इस रिपोर्ट को "चौंकाने वाला" बताया और माफी की मांग करते हुए कहा कि चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह "उच्च जोखिम वाला और असुरक्षित" होता है. लेकिन सांसद इकबाल मोहम्मद ने ऐसे विवाहों का बचाव करते हुए कहा कि ये कई परिवारों के लिए सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं.  सांसद इकबाल ने स्वास्थ्य संबंधी खतरों को स्वीकार किया. लेकिन उन्होंने कहा कि कई परिवार ऐसे विवाहों को आपसी संबंध बनाने और वित्तीय सुरक्षा के लिए बढ़िया मानते हैं, उन्होंने ऐसे विवाहों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय आनुवांशिक जांच की सिफारिश की ताकि बीमारियों के खतरे से बचा जा सके. कंजरवेटिव सांसदों ने किया विरोध पिछले हफ्ते पहली बार प्रकाशित इस लेख की सांसद रिचर्ड होल्डन ने कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने स्टार्मर के नेतृत्व वाली लेबर सरकार पर "हानिकारक और दमनकारी सांस्कृतिक प्रथाओं के आगे घुटने टेकने" का आरोप लगाया था.  उन्होंने कहा, "कंजर्वेटिव भी चचेरे भाई-बहनों की शादी को समाप्त होते देखना चाहते हैं, लेकिन लेबर सरकार इन उचित मांगों के प्रति उदासीन है." सांसद रिचर्ड होल्डन फर्स्ट कजिन मैरिज को खत्म करने के लिए बिल लाने के पक्ष में है. इसी तरह कंजर्वेटिव सांसद क्लेयर कॉउटिन्हो ने एक्स पर कहा, "एनएचएस उम्र, बीएमआई और गर्भधारण के इतिहास के आधार पर आईवीएफ पर शर्तें लगाता है. एनएचएस आपको गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान या शराब न पीने के लिए बहुत कुछ कहता है. लेकिन एनएचएस चचेरे भाई-बहनों की शादी के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहेगा." फर्स्ट कजिन मैरिज पर रोक के पक्ष में ब्रिटिश New YouGov के नए शोध से पता चलता है कि तीन-चौथाई ब्रिटिश नागरिक (77 प्रतिशत) कहते हैं कि चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह को लीगल नहीं बनाया जाना चाहिए, जबकि केवल 9 प्रतिशत का मानना ​​है कि कानून यथावत रहना चाहिए. चचेरे भाई-बहनों के बीच विवाह पर प्रतिबंध का सपोर्ट सभी राजनीतिक दल कर रहे हैं.  फर्स्ट कजिन मैरिज के दुष्परिणाम हेल्थ एक्सपर्ट ने फर्स्ट कजिन मैरिज को अगली पीढ़ी के खतरनाक माना है. इससे आनुवंशिक स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है. क्योंकि नजदीकी रक्त संबंधों में समान जीन की संभावना अधिक होती है.  ब्रिटेन की ब्रैडफोर्ड स्टडी (2007-2025) के अनुसार फर्स्ट कजिन विवाह से बच्चों में जन्म दोष का जोखिम 2-3% से बढ़कर 4-6% हो जाता है. इनमें हृदय की बीमारियां, नर्वस सिस्टम की समस्याएं … Read more

ठंड की समय से पहले एंट्री! पहाड़ों पर बर्फ, दिल्ली-NCR में भीगता अक्टूबर

नई दिल्ली दिल्ली-NCR, बिहार, बंगाल समेत देश भर के कई इलाकों में सोमवार-मंगलवार को रुक-रुक कर हुए तेज बारिश और पहाड़ों पर शुरू हुई बर्फबारी से मौसम ने करवट बदल ली है, जिससे लोगों को अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही दिसंबर जैसी ठंड का एहसास होने लगा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, मंगलवार को तड़के दिल्ली-NCR के कई इलाकों में पर हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिसमें गरज-बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं. इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी हल्की बारिश देखी गई. मौसम विभाग ने बताया कि दिल्ली में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात करीब 2:30 बजे तक तापमान 21.8°C दर्ज किया गया, जबकि नमी का स्तर 98 प्रतिशत तक पहुंच गया. हवाएं शांत बनी हुई हैं, जिसके कारण कोहरे छाया हुआ है और ठंडी हवा का माहौल बना हुआ है. सामान्य रहेगा न्यूनतम तापमान आईएमडी के अनुसार, मंगलवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से 1-2 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है. सुबह के समय उत्तर-पूर्व दिशा से 15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो दोपहर में पूर्वी दिशा से 10 किमी प्रति घंटे से कम रफ्तार की हवाएं चलेंगी, जो शाम और रात तक दक्षिण-पूर्व दिशा से 8 किमी प्रति घंटे से कम रफ्तार की रहेंगी.  बुधवार को बादल छाए रहेने की संभावना IMD ने बुधवार के मौसम का पूर्वानुमान जताते हुए कहा, 'बुधवार को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है. अधिकतम तापमान 31-33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20-22 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है, जो सामान्य के आसपास होंगे. सुबह में उत्तर-पूर्व दिशा से 5-10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो दोपहर में उत्तर-पश्चिम दिशा से 10-15 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक बढ़ेगी और शाम व रात में भी इसी रफ्तार से चलती रहेंगी.' बिहार और बंगाल में भी ठंडक दिल्ली-एनसीआर के अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल में भी बारिश ने मौसम को ठंडा कर दिया है. इन राज्यों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में कमी आई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्टूबर की शुरुआत में ही ठंड का एहसास होना असामान्य है, लेकिन ये मौसमी बदलाव राहत के साथ-साथ कुछ चुनौतियां भी ला रहा है. हिमाचल-उत्तराखंड और J-K में बर्फबारी शुरू वहीं, उत्तर भारत के ऊंचे पहाड़ी इलाकों, विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हो गई है. इस बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी देखा जा रहा है, जहां ठंडी हवाओं ने मौसम को और सर्द कर दिया है. ऐसा ही बना रहेगा मौसम का मिजाज मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक यह मौसमी पैटर्न बना रह सकता है. जिससे ठंड का एहसास और बढ़ेगा. मौसम विभाग ने लोगों से बारिश और ठंड को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है. खासकर दिल्ली-एनसीआर, बिहार और पश्चिम बंगाल में रहने वाले लोगों को सुझाव दिया गया है कि वे मौसम अपडेट्स पर नजर रखें और यात्रा या बाहरी गतिविधियों के दौरान उचित तैयारी करें. पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण यात्रा करने वालों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है.

सोने में निवेश करें आज, 2050 तक होगा कितना मुनाफा? जानिए विस्तार से

मुंबई  आज के रेट्स के हिसाब से देखें तो भारत में 24 कैरेट सोना करीब 1,23,100 प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है. अलग-अलग शहरों में मामूली फर्क जरूर है, लेकिन फिलहाल यही बाजार की औसत दर है.सोने की कीमतों में लगातार उछाल की कई वजहें हैं. सबसे पहले तो दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है. अमेरिका और यूरोप की कमजोर होती अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव ने लोगों को सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर खींचा है. दूसरा बड़ा कारण है डॉलर और रुपये का समीकरण. जब डॉलर महंगा होता है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो भारत में सोने की कीमत अपने आप ऊपर चली जाती है क्योंकि भारत ज्यादातर सोना आयात करता है.त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में भी सोने की मांग बढ़ जाती है, जिससे बाजार में इसके दाम और उछलते हैं. साथ ही, कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं ताकि अपनी विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत रख सकें. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमतों में इजाफा हो रहा है. अब बड़ा सवाल यह है कि अगर आप आज 1,00,000 का सोना खरीदते हैं, तो 2050 तक उसकी कीमत कितनी होगी? इसका सीधा जवाब तो किसी के पास नहीं है, लेकिन पिछले 25 सालों के आंकड़ों से एक अंदाजा लगाया जा सकता है.साल 2000 में 10 ग्राम सोना करीब 4,400 रुपये के आसपास था, जबकि आज वही लगभग 1,23,100 के आसपास पहुंच गया है. यानी 25 साल में करीब 25 गुना बढ़ोतरी हुई.अगर आने वाले 25 सालों तक सोना औसतन 10 प्रतिशत की दर से बढ़ता रहा, तो 1,00,000 का सोना 2050 तक लगभग 11-12 लाख के आसपास हो सकता है. अगर वृद्धि दर 8% रही तो ये मूल्य करीब 7 लाख और अगर 12% रही तो 15 लाख से ऊपर पहुंच सकता है. एक किलो सोना तो 2050 में कितनी होगी कीमत? जान लें नफा-नुकसान  सोना हमेशा से इन्वेस्टमेंट के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ऑप्शन माना गया है. इसका आकर्षण केवल इसकी कीमत में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक अनिश्चितताओं के समय यह एक भरोसेमंद साथी भी होता है. ऐसे में अगर आप आज एक किलो सोना खरीदते हैं, तो सवाल उठता है कि 2050 तक इसकी कीमत कितनी हो सकती है और निवेश से कितना लाभ या नुकसान हो सकता है. आइए, वर्तमान रेट और ऐतिहासिक ट्रेंड के आधार पर इसकी कीमतों का आंकलन करते हैं. वर्तमान सोने की कीमत  अक्टूबर 2025 में भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 11,942 रुपये प्रति ग्राम के आसपास है. इसका मतलब है कि एक किलो यानि 1000 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,19,42,000 रुपये तक हो सकती है. यह दाम अलग-अलग शहरों और बाजारों में थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन तकरीबन यही मूल्य देखा गया है. 2050 तक सोने की कीमत एक साधारण गणना के आधार पर देखा जाए तो यदि सोने की कीमतों में वर्तमान दर से औसतन 8% वार्षिक बढ़ोतरी होती है, तो 2050 तक सोने की कीमत में लगभग 25 गुना वृद्धि हो सकती है. इसका मतलब है कि 2050 में एक किलो सोने की कीमत लगभग 30-35 करोड़ तक पहुंच सकती है. लेकिन अगर सोने की कीमतें 10% वार्षिक दर से बढ़े तो यह 45-50 करोड़ रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है. यह अनुमान केवल ट्रेंड और औसत वृद्धि दर पर आधारित है. भविष्य में इसमें कमी या बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. नफा-नुकसान का आंकलन पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो भविष्य में भी जारी रहने की संभावना है. सोना इन्वेस्टमेंट के लिहाज से सुरक्षित विकल्प माना जाता है, खासकर आर्थिक अनिश्चितताओं के समय में सुरक्षित होता है. सोने की कीमतें आमतौर पर इन्फ्लेशन के साथ बढ़ती हैं, जिससे यह इन्फ्लेशन से सुरक्षा देता है. क्या हो सकता है नुकसान? एक किलो सोने को सुरक्षित रखने के लिए उचित स्टोरेज और सुरक्षा की जरूरत होती है, जो इसके लिए एक्स्ट्रा खर्च का कारण बन सकता है. सोने को तुरंत नकदी में परिवर्तित करना कभी-कभी मुश्किल हो सकता है, खासकर बड़े दाम में. ऐसे में इसके फायदे के साथ-साथ कुछ नुकसान भी हो सकते हैं. 

पिन का जमाना हुआ पुराना! 8 अक्टूबर से UPI में फेस और फिंगरप्रिंट से करें भुगतान

नई दिल्ली भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. करोड़ों भारतीयों द्वारा हर दिन इस्तेमाल किए जाने वाले यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI से भुगतान करने का तरीका हमेशा के लिए बदलने वाला है. अब आपको पेमेंट करते समय 4 या 6 अंकों का पिन याद रखने और उसे डालने की जरूरत नहीं होगी. इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8 अक्टूबर से उपयोगकर्ता अपने चेहरे (फेशियल रिकग्निशन) और फिंगरप्रिंट के जरिए UPI पेमेंट को मंजूरी दे सकेंगे. यह कदम न केवल भुगतान प्रक्रिया को तेज और आसान बनाएगा, बल्कि इसे पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित भी बना सकता है. जानकारों का कहना है कि यह भारत के डिजिटल सफर में एक मील का पत्थर साबित होगा, जहां आपकी पहचान ही आपका पासवर्ड बन जाएगी. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI), जो UPI नेटवर्क का संचालन करता है, इस अत्याधुनिक सुविधा को मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल में प्रदर्शित करने की योजना बना रहा है. हालांकि, NPCI ने अभी इसपर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इस नई तकनीक को लागू करने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. क्या है डिटेल NPCI (जो UPI का संचालन करती है) इस फीचर को ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल, मुंबई में प्रदर्शित करने जा रही है। इससे डिजिटल पेमेंट्स और तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेंगे। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नई सुविधा में पेमेंट की ऑथेंटिकेशन (वेरिफिकेशन) भारत सरकार की आधार प्रणाली में दर्ज बायोमेट्रिक डेटा के माध्यम से की जाएगी। यानी, यूजर्स का चेहरा या फिंगरप्रिंट उनके आधार डेटा से मैच किया जाएगा, जिससे पेमेंट की अनुमति मिल जाएगी। RBI के नए दिशानिर्देशों बता दें कि यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जिसमें डिजिटल ट्रांजैक्शनों के लिए वैकल्पिक ऑथेंटिकेशन तरीकों की अनुमति दी गई थी। इससे डिजिटल पेमेंट्स में सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव — दोनों को बेहतर बनाने की उम्मीद है। UPI अनुभव होगा और आसान वर्तमान में, हर UPI ट्रांजैक्शन के लिए यूजर्स को 4 या 6 अंकों का PIN दर्ज करना होता है। नई सुविधा लागू होने के बाद, फेस स्कैन या फिंगरप्रिंट सेंसर के जरिए पेमेंट तुरंत ऑथेंटिकेट हो जाएगा। इससे ट्रांजैक्शन समय घटेगा, सुरक्षा बढ़ेगी, और यूजर अनुभव और सहज होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से धोखाधड़ी की संभावना कम होगी, क्योंकि चेहरा या फिंगरप्रिंट किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कॉपी करना मुश्किल है। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए NPCI और UIDAI के बीच मजबूत तकनीकी प्रोटोकॉल अपनाए जाएंगे। कैसे काम करेगी यह नई तकनीक? यह नई बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली पूरी तरह से भारत सरकार की विशिष्ट पहचान प्रणाली ‘आधार’ पर आधारित होगी. सूत्रों में से एक ने स्पष्ट किया कि जब कोई उपयोगकर्ता भुगतान के लिए अपने चेहरे या फिंगरप्रिंट का उपयोग करेगा, तो उसका सत्यापन आधार के साथ संग्रहीत बायोमेट्रिक डेटा से किया जाएगा. इसका मतलब है कि केवल वही व्यक्ति भुगतान को मंजूरी दे पाएगा, जिसका बैंक खाता और UPI आईडी उसके आधार कार्ड से जुड़ा हुआ है. यह प्रक्रिया बेहद सरल होगी. भुगतान करते समय, उपयोगकर्ता को पिन डालने के बजाय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का विकल्प चुनना होगा. इसके बाद फोन का कैमरा या फिंगरप्रिंट स्कैनर सक्रिय हो जाएगा. एक सफल स्कैन के बाद, डेटा को सुरक्षित रूप से आधार सर्वर से मिलान के लिए भेजा जाएगा और मिलान होते ही भुगतान तुरंत सफल हो जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया कुछ ही सेकंड में पूरी हो जाएगी, जिससे भुगतान का अनुभव सहज और बाधा रहित हो जाएगा. यह कदम उन लोगों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगा जिन्हें अपना पिन याद रखने में कठिनाई होती है या जो सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहते हैं. क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? UPI में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को शामिल करने का यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है. यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सीधा परिणाम है. RBI ने भुगतान प्रणालियों में सुरक्षा और नवीनता को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणीकरण के वैकल्पिक तरीकों की अनुमति दी थी. केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और सुरक्षित बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे अपना सकें. मौजूदा पिन-आधारित प्रणाली, हालांकि काफी हद तक सुरक्षित है, फिर भी इसमें कुछ कमजोरियां हैं, जैसे कि कोई आपका पिन देख सकता है या फिशिंग के जरिए उसे चुरा सकता है. बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण इन जोखिमों को लगभग समाप्त कर देता है, क्योंकि हर व्यक्ति का फिंगरप्रिंट और चेहरा अलग होता है.  

MP भाजपा कार्यकारिणी में 60% फेरबदल, दिल्ली की मंजूरी के बाद होगी अंतिम घोषणा

भोपाल  मध्यप्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा का काम अब लगभग पूरा हो चुका है। अब जल्द टीम का ऐलान होगा। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मिलकर प्रदेश पदाधिकारियों के नामों पर चर्चा की और लिस्ट तैयार की। अब यह लिस्ट केंद्रीय नेतृत्व से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि जल्द इस लिस्ट पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से फाइनल मुहर लग जाएगी।  हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बने लगभग 100 दिन पूरे होने वाले हैं। उन्हें 2 जुलाई को अध्यक्ष बनाया गया था और तब से वे पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा की टीम के साथ काम कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों से वे लगातार कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी दिवाली से पहले घोषित हो सकती है। इसके बाद एमपी बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी बैठक होगी।  हेमंत खंडेलवाल की टीम में होंगे 60 फीसदी नए चेहरे वीडी शर्मा मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और उन्होंने 5 साल 4 महीने 17 दिन तक इस पद पर काम किया। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना के कारण उनका कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया गया था, फिर संगठन चुनाव में देरी के कारण उनका कार्यकाल बढ़ता गया। वीडी शर्मा की टीम में रहे 8 पदाधिकारी अब सांसद बन चुके हैं, जबकि 8 अन्य विधायक बन चुके हैं।  वीडी की टीम में रहे 60% चेहरे बाहर होंगे वीडी शर्मा मध्य प्रदेश भाजपा के 5 साल 4 महीने 17 दिन तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना संकट के चलते उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था। फिर संगठन चुनाव में हुई देरी के कारण उनका कार्यकाल अघोषित रूप से बढ़ता गया। वीडी शर्मा के साथ प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल रहे 8 पदाधिकारी सांसद और 8 पदाधिकारी विधायक बन चुके हैं। किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी सांसद और मंत्री बन गए हैं। नई कार्यकारिणी में टीम वीडी में शामिल रहे पदाधिकारियों में से 60% चेहरे बदले जाएंगे। पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी संभव सितंबर 2021 में बीजेपी ने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को संभागीय संगठन मंत्री पद से हटाकर प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य बनाया था। इन संगठन मंत्रियों में केशव भदौरिया को छोड़कर 5 नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में एडजस्ट किया था। अब बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी में इन पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी हो सकती है। इस बार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम में करीब 60% नए चेहरे होंगे। इसके अलावा किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा और महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी अब सांसद और मंत्री बन गए हैं। सितंबर 2021 में बीजेपी ने अपने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। उस समय बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को हटाकर उन्हें प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बना दिया था। इनमें से पांच नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में जगह दी थी, लेकिन केशव भदौरिया को इसमें शामिल नहीं किया गया था। अब बीजेपी की नई टीम में इन पुराने मंत्रियों की फिर से वापसी हो सकती है। मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी में इतने नेता मध्यप्रदेश बीजेपी की मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी के प्रदेश उपाध्यक्ष में एक मंत्री, तीन सांसद और दो विधायक हैं। वहीं, प्रदेश महामंत्री में दो विधायक और एक सांसद हैं। साथ ही, प्रदेश मंत्री में दो सांसद और एक विधायक है। वहीं, संयुक्त कोषाध्यक्ष में अनिल जैन कालूहेड़ा से विधायक हैं।    पद (Post) नाम (Name) पद/कार्यक्षेत्र (Designation/Field) प्रदेश उपाध्यक्ष (State Vice President) नागर सिंह चौहान कैबिनेट मंत्री   आलोक शर्मा सांसद (भोपाल)   संध्या राय सांसद (भिंड)   सुमित्रा वाल्मीकि राज्यसभा सांसद   ललिता यादव विधायक   चिंतामणि मालवीय विधायक   चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी पूर्व विधायक (मेहगांव)   कांत देव सिंह     सीमा सिंह जादौन     जीतू जिराती पूर्व विधायक   बहादुर सिंह चौहान पूर्व विधायक   पंकज जोशी     श्याम महाजन     बृजराज सिंह चौहान पूर्व विधायक — — — प्रदेश महामंत्री (State General Secretary) कविता पाटीदार राज्यसभा सांसद   भगवानदास सबनानी विधायक   हरिशंकर खटीक विधायक   शरलेन्दु तिवारी पूर्व विधायक   रणवीर सिंह रावत पूर्व विधायक — — — प्रदेश मंत्री (State Secretary) लता वानखेड़े सांसद (सागर)   आशीष दुबे सांसद (जबलपुर)   मनीषा सिंह विधायक   रजनीश अग्रवाल     प्रभुदयाल कुशवाहा     राजेश पांडेय     नंदिनी मरावी पूर्व विधायक   राहुल कोठारी     संगीता सोनी     जयदीप पटेल     केशव सिंह भदौरिया     क्षितिज भट्ट     योगेश पाराशर   — — — कोषाध्यक्ष (Treasurer) अखिलेश जैन CA संयुक्त कोषाध्यक्ष (Joint Treasurer) अनिल जैन कालूहेड़ा विधायक प्रदेश कार्यालय मंत्री (State Office Secretary) राघवेन्द्र शर्मा   कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चों के भी बदलेंगे अध्यक्ष  बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी में जगह पाने के लिए नेताओं ने बड़े नेताओं से सिफारिशें करवाई हैं। सबसे ज्यादा कोशिश प्रदेश महामंत्री बनने के लिए की गई है। इसके अलावा, प्रदेश कार्यालय प्रभारी और कार्यालय मंत्री के लिए भी नेताओं ने नए प्रदेश अध्यक्ष से कई बार मुलाकात की है। बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चों के अध्यक्ष भी बदलेंगे। ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह कुशवाह अब मध्यप्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री बन गए हैं। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दर्शन सिंह होशंगाबाद से सांसद बन गए हैं। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष माया नारोलिया राज्यसभा सांसद बन चुकी हैं। इन बदलावों के साथ-साथ युवा मोर्चा, एससी मोर्चा और एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जाएंगे।