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बारिश और ठंड का दौर जारी : जयपुर भीगा, सीकर में छाई ठंडक

जयपुर राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर मंगलवार को भी जारी रहा। पूर्वी जिलों में बादल छाए रहे और कई जगह हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग ने 9 जिलों में अलर्ट जारी किया है। 8 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम साफ और सूखा रहने की संभावना है। सोमवार को जयपुर, नागौर, हनुमानगढ़, सीकर समेत कई जिलों में 4 इंच तक तेज बारिश हुई, जिससे खेतों में पानी भर गया और खरीफ की फसलें खराब हो गईं। बारिश और बादलों की वजह से तापमान में भारी गिरावट देखी गई। हनुमानगढ़ में दिन और रात के तापमान में सिर्फ 1 डिग्री का अंतर रहा। जयपुर में देर रात तक होती रही बारिश राजधानी जयपुर में सोमवार सुबह से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। मंगलवार सुबह भी करीब 3 बजे तक बारिश का दौर चला। बीते 24 घंटों के दौरान जयपुर में  92MM बरसात रिकॉर्ड की गई। जयपुर में छापरवाड़ा बांध के पास 92MM बारिश दर्ज हुई। दिल्ली रोड पर चांदवास पर 53, जालसू, दूदू, मौजमाबाद में 27-27, जोबनेर में 40, बैराठ में 52, शाहपुरा में 56, फागी में 35, चौमूं में 26, सांगानेर में 29MM बारिश हुई है। बारिश से पारा भी लुढ़का बारिश की वजह से प्रदेश में पारे में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 12 डिग्री तक गिरा। सीकर सबसे ठंडा रहा, जहां दिन का तापमान 22.5°C दर्ज हुआ। जयपुर 25.1°C, पिलानी 24.7°C, अलवर 24°C, चूरू 24.1°C, बीकानेर 29.3°C, उदयपुर 29°C और झुंझुनूं 24.9°C तक सीमित रहा। अब 8 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो सकती है।  

राष्ट्रीय जिम्नास्टिक में इंदौर की मणिकर्णिका ने मारी बाज़ी, डेब्यू में ही जीता गोल्ड

इंदौर  इंदौर में जिमनास्टिक खेल में भी नए खिलाड़ी उभर रहे है और मैडल लाकर शहर का नाम रोशन कर रहे है। इंदौर निवासी मणिकर्णिका गौड़ ने नेशनल स्कूल स्पोटर्स आर्गनाइजेशन द्वारा हैदराबाद में आयोजित नेशनल जिम्नास्ट प्रतियोगिता में भाग लिया। मणिकर्णिका के अलावा देश के अन्य शहरों से भी स्पर्धा में भाग लेने के लिए खिलाड़ी आए थे। मणिकर्णिका ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता है। वे चार दिन पहले स्पर्धा में भाग लेने के लिए हैदराबाद गई थी। स्पर्धा तीन दिन चली। मर्णिकर्णिका ने जिम्नास्ट की अलग-अलग विधा का प्रदर्शन स्पर्धा में किया। मणिकर्णिका ने चोइथराम इंटरनेशनल स्कूल की तरफ से भाग लिया था। उनके कोच भरत बाथम है, जो खुद 82 पदक जीत चुके है।इस प्रतियोगिता का ये 8 वां वर्ष है। जिसमे मणिकर्णीका ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता मे भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते मणिकर्णिका का चयन किया गया था। जिसमे पहली बार मे ही उसने ये स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। खेल नियमों अनुसार 40 में से 37 पॉइंट लाकर ये प्रतियोगिता उन्होंने जीती। मणिकर्णिका इस प्रतियोगिता के लिए काफ़ी दिनों से मेहनत कर रही थी।  

खगोलशास्त्री महर्षि वाल्मीकि, जब ‘शोक’ से ‘श्लोक’ जन्मा और विज्ञान झुका श्रद्धा से

भोपाल भारतभूमि की यह विशेषता रही है कि यहाँ अध्यात्म और विज्ञान कभी परस्पर विरोधी नहीं रहे, ज्ञान के हर रूप का उद्गम ऋषियों के चिंतन से हुआ। इसी परंपरा में एक ऐसा नाम अमर है, महर्षि वाल्मीकि। वे केवल आदि कवि नहीं थे, बल्कि भारत के प्रथम खगोलशास्त्री भी थे, जिन्होंने आकाश की नक्षत्रीय गतियों को साहित्य के छंदों में पिरो दिया। वाल्मीकि जयंती के इस पावन अवसर पर यह जानना रोमांचक है कि ‘रामायण’ केवल धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि खगोलीय दस्तावेज़ भी है, एक ऐसा दस्तावेज़ जिसमें हर ग्रह, नक्षत्र और तिथि वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ आज भी सत्य सिद्ध होती है। महर्षि वाल्मीकि का खगोलबोध, जब कविता बनी विज्ञान की भाषा ‘रामायण’ में श्रीराम के जन्म का वर्णन महर्षि वाल्मीकि ने जिस सटीकता से किया है, वह आधुनिक खगोलशास्त्र की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है। जब कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया, उस समय सूर्य, मंगल, शनि, बृहस्पति और शुक्र, ये पाँचों ग्रह अपने-अपने उच्च स्थानों में थे, और लग्न में चंद्रमा बृहस्पति के साथ स्थित थे। भारतीय वेदों पर वैज्ञानिक शोध संस्थान की पूर्व निदेशक सुश्री सरोज बाला ने प्लैनेटेरियम गोल्ड सॉफ्टवेयर 4.1 के माध्यम से इस गणना की पुष्टि की। उन्होंने पाया कि यदि यह आकाशीय स्थिति 27° उत्तर और 82° पूर्व (अयोध्या के अक्षांश, रेखांश) पर डाली जाए, तो यह 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व, दोपहर 12 से 2 बजे के बीच का समय बताती है, अर्थात श्रीराम का जन्मकाल! विज्ञान ने दी वाल्मीकि को पुष्टता की मुहर सरोज बाला और उनके दल ने ‘रामायण की कहानी, विज्ञान की जुबानी’ शीर्षक से 16 वर्षों के गहन शोध में यह सिद्ध किया कि वाल्मीकि के खगोलीय संदर्भ पूर्णतः प्रामाणिक हैं। उन्होंने Stellarium, Sky Guide, और Planetarium Simulation जैसे सॉफ्टवेयरों से तुलना की, परिणाम अद्भुत रहे। हर ग्रह की गति, हर नक्षत्र की स्थिति और हर खगोलीय घटना, रामायण में बताए क्रम के अनुरूप मिली। इन सॉफ्टवेयर परीक्षणों के साथ-साथ पुरातत्व, भूविज्ञान, समुद्रविज्ञान, पुरावनस्पति विज्ञान और उपग्रह चित्रों ने भी वाल्मीकि के वर्णनों की पुष्टि की। यह अपने आप में एक अनूठा संगम है, जहाँ श्रद्धा और विज्ञान एक दूसरे को प्रमाणित करते हैं। सत्य का साक्ष्य, रामायण की कालगणना और भू-साक्ष्य महर्षि वाल्मीकि ने श्रीराम के वनवास के दौरान सूर्यग्रहण, चंद्रमा की कलाएँ, और ऋतुओं का सूक्ष्म वर्णन किया है। डॉ. राम अवतार शर्मा ने इन स्थलों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया, अयोध्या से लेकर रामेश्वरम् तक। उन्होंने पाया कि हर स्थान, हर आकाशीय स्थिति, और हर ऋतु-वर्णन वास्तविक भू-परिस्थितियों से मेल खाता है। नासा द्वारा प्रकाशित पाक जलडमरूमध्य में डूबे मानव-निर्मित पुल के उपग्रह चित्र भी इस बात का समर्थन करते हैं कि रामसेतु एक वास्तविक संरचना थी, वही पुल जिसे रामायण में ‘सेतुबंध’ कहा गया है। वाल्मीकि, साहित्य से विज्ञान तक का सेतु वाल्मीकि केवल ‘रामायण’ के रचयिता नहीं थे, वे ज्ञान और सृजन के अद्वितीय संयोग थे। उन्होंने एक क्रौंच पक्षी के शोक से ‘श्लोक’ की रचना कर दी, और वहीं से काव्य का जन्म हुआ। यह वही संवेदना थी जो आकाश की गति और जीवन की गति को एक सूत्र में बाँध देती है। माता सीता उनके आश्रम में रही, लव-कुश उनके शिष्य बनकर बड़े हुए, यह दिखाता है कि समाज-व्यवस्था से परे ज्ञान का कोई जातिगत बंधन नहीं होता। शूद्र वर्ण से आने वाले इस महर्षि ने दिखा दिया कि महानता कर्म से होती है, जन्म से नहीं।  ऋषि का विज्ञान आज भी प्रासंगिक है आज जब आधुनिक विज्ञान जेम्स वेब टेलिस्कोप से ब्रह्मांड के रहस्य खोज रहा है, तब भी महर्षि वाल्मीकि का ज्ञान एक ज्योति-स्तंभ की तरह सामने आता है। वे हमें बताते हैं कि कविता केवल भावना नहीं, ब्रह्मांड की गति का अनुभव भी हो सकती है। ‘रामायण’ केवल कथा नहीं, बल्कि खगोलशास्त्र का काव्य है, जहाँ हर श्लोक में आकाश का सत्य निहित है। आदि कवि महर्षि वाल्मीकि को उनके प्राकट्य पर्व पर शत-शत नमन, जिन्होंने “शोक” को “श्लोक” में बदलकर यह दिखाया कि जब हृदय में वेदना हो और दृष्टि में ब्रह्मांड, तब कविता विज्ञान बन जाती है। आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की सादर आत्मीय शुभकामनाएं   – *डॉ विश्वास चौहान ( प्राध्यापक विधि  , शासकीय स्टेट लॉ कॉलेज भोपाल )

MP SI और सूबेदार भर्ती 2025: 500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, ईएसबी 9 जनवरी को लेगा परीक्षा

भोपाल  मध्य प्रदेश पुलिस में भर्ती का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है. मध्य प्रदेश में सब इंस्पेक्टर और सूबेदार पदों पर सीधी भर्ती के लिए ESB ने अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक कुल 500 पदों पर भर्ती होनी है, यह खबर उन युवाओं को उत्साह भर देगा, जो लगातार पुलिस में भर्ती के लिए ट्रेनिंग कर रहे हैं. सीधी भर्ती के लिए 27 अक्टूबर से शुरू होगी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ECB) की अधिसूचना के मुताबिक 500 पदों के लिए होने वाली सीधी भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन 27 अक्टूबर से शुरू होगी, जो आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2025 तक जारी रहेगी.हालांकि आवेदनकर्ताओं को आवेदन में संशोधन का मौका मिलेगा, जो 15 अक्तूबर तक कर सकेंगे.  ऑफिशियल वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर करना होगा आवेदन इच्छुक एवं योग्य अभ्यर्थी सब इंस्पेक्टर और सुबेदार पदों के लिए होने वाली सीधी भर्ती में भाग लेने के लिए तय तिथियों में ईसीबी की ऑफिशियल वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा. सब इंस्पेक्टर और सुबेदार पदों के लिए आवेदन, पात्रता, फीस इत्यादि की पूरी डिटेल आप इसी पेज से चेक कर सकते हैं. कौन कर सकता है सब-इंस्पेक्टर और सुबेदार के लिए आवेदन? एमपी एसआई एवं सूबेदार भर्ती (MP Police Bharti 2025) में आवेदन के लिए अभ्यर्थी ने किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/ संस्थान से स्नातक (ग्रेजुएशन) उत्तीर्ण होना जरूरी है.आवेदनकर्ता की अधिकतम आयु वर्ग के अनुसार 33/ 38 साल से ज्यादा न होना चाहिए. आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को वर्ग अनुसार मिलेगी उम्र में छूट  सब इंस्पेक्टर और सुबेदार की सीधी भर्ती में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को उम्र सीमा में छूट मिलेगी. उम्मीदवारों की उम्र की गणना 10 नवंबर 2025 के अनुसार होगी. आवेदनकर्ता पद के लिए शैक्षिक योग्यता व उम्र की डिटेल की नोटिफिकेशन पोर्टल पर विजिट कर देख सकते हैं. मध्य प्रदेश पुलिस की सीधी भर्ती में भाग लेने के लिए पुरुष उम्मीदवार की न्यूनतम लंबाई 167.5 सेंटीमीटर एवं महिला उम्मीदवार की न्यूनतम लंबाई 152.4 सेंटीमीटर होनी चाहिए। पुरुष उम्मीदवारों का चेस्ट बिना फुलाए 81 सेंटीमीटर और फुलाकर 86 सेंटीमीटर होना चाहिए. सब इंस्पक्टर और सुबेदार पद के लिए क्या है शारीरिक योग्यता? मध्य प्रदेश पुलिस की सीधी भर्ती में भाग लेने के लिए पुरुष उम्मीदवार की न्यूनतम लंबाई 167.5 सेंटीमीटर एवं महिला उम्मीदवार की न्यूनतम लंबाई 152.4 सेंटीमीटर होनी चाहिए। पुरुष उम्मीदवारों का चेस्ट बिना फुलाए 81 सेंटीमीटर और फुलाकर 86 सेंटीमीटर होना चाहिए.  9 जनवरी को  सब-इंस्पेक्टर और सुबेदार पद के लिए होगी परीक्षा जारी अधिसूचना के मुताबिक 500 पदों पर होने वाली सीधी भर्ती के लिए अभ्यर्थी 27 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन कर  सकेंगे, जबकि 10 नवम्बर आवेदन करने की अंतिम तारीख. आवेदनकर्ता 15 नवंबर तक आवेदन में संशोधन करने का मौका मिलेगा.जबकि  9 जनवरी को दो पालियों में सब-इंस्पेक्टर और सुबेदार पद के लिए परीक्षा कराई जाएगी.

मध्यप्रदेश में बारिश थमने को, 10 अक्टूबर तक मानसून लौटने की संभावना

भोपाल  मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ बारिशों का दौर अब थमने जा रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में तेज बारिश ने जहां गर्मी से राहत दी, वहीं अब मौसम साफ होने की ओर है। मौसम विभाग की मानें तो 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदा हो जाएगा, और इसके बाद राज्य में सुहावना और साफ मौसम लौटेगा। अगले दो दिनों तक हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन कहीं भी भारी बारिश का खतरा नहीं है। यानी अब लोगों को न जलभराव की चिंता होगी, न ही अचानक आने वाली तेज बारिश की। इन जिलों में हुई बारिश सोमवार को श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, सिवनी, बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, रतलाम, मंदसौर, धार, बड़वानी, इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, भोपाल, राजगढ़ और विदिशा जिलों में आंधी के साथ बारिश हुई थी। इनमें से भोपाल, रायसेन, गुना और हरदा भारी बारिश दर्ज की गई थी।   आज इन जिलों में बारिश का अलर्ट     भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, सिवनी, बालाघाट, पांढुर्णा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, इंदौर, देवास, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, सागर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पन्ना, दमोह, मंडला, डिंडोरी, मैहर, छिंदवाड़ा, अनूपपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर     सीहोर, राजगढ़, उज्जैन, देवास, शाजापुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर कलां में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। वर्तमान में सक्रिय है कई मौसम प्रणालियां     अगले 3-4 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की और वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। चक्रवातीय तूफान “शक्ति” वर्तमान में 19.6° उत्तरी अक्षांश और 60.5° पूर्वी देशांतर के पास केंद्रित है। यह मसीरा (ओमान) से लगभग 210 किमी दक्षिण-पूर्व, रास अल हद्द (ओमान) से 310 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, कराची (पाकिस्तान) से 900 किमी दक्षिण-पश्चिम, द्वारका से 940 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नलिया से 960 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।     इसके पूर्व- दक्षिण-पूर्व की ओर पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर पर बढ़ने और 7अक्टूबर की सुबह तक एक निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है। उत्तरी अफगानिस्तान के ऊपर चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में स्थित पश्चिमी विक्षोभ अब उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान और उससे सटे पाकिस्तान के ऊपर 3.1 से 5.8 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर स्थित है, और ऊपरी क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं में एक ट्रफ 7.6 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर देशांतर 69° पूर्व से अक्षांश 23° उत्तर तक फैली हुई है।     एक चक्रवातीय परिसंचरण उत्तर पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित है, जो समुद्र     तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। एक चक्रवातीय परिसंचरण पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के ऊपर भी स्थित है, जो समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। मध्य प्रदेश : अबतक 12 जिलों से मानसून विदा अबतक मध्य प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इसमें उज्जैन, राजगढ़,अशोकनगर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन शामिल हैं।आमतौर पर मानसून 6 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार नया वेदर सिस्टम बनने से मानसून की वापसी में देरी हो रही है। हालांकि 10-12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। 1 जून से 6 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

पूर्व मंत्री भरत सिंह का निधन, कांग्रेस शोक में; अंतिम संस्कार आज

जयपुर हाड़ौती क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री भरत सिंह का सोमवार रात जयपुर के एसएमएस अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। शुरुआत में कोटा में इलाज चला, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जयपुर रैफर किया गया था। करीब एक महीने से उनका इलाज एसएमएस अस्पताल में चल रहा था। उनके निधन की खबर से कांग्रेस में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक जताया और भरत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुद्दों पर डटे रहने वाले नेता भरत सिंह को मुद्दों पर अडिग रहने वाले नेता के रूप में जाना जाता था। उनके करीबी और कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष कुशल पाल सिंह पानाहेड़ा ने बताया कि भरत सिंह ने राजनीति में कभी लाभ-हानि की चिंता नहीं की। वे गांधीवादी विचारधारा को मानते थे और उनकी ईमानदारी की सराहना विपक्षी नेता भी किया करते थे। राजनीतिक सफर भरत सिंह का जन्म 15 अगस्त 1950 को हुआ था। उन्होंने एमएस बड़ौदा यूनिवर्सिटी (गुजरात) से स्नातक की पढ़ाई की थी। वे 1993 में पहली बार खानपुर (झालावाड़) से विधायक बने। 1998 में लोकसभा चुनाव में वसुंधरा राजे से हार गए। 2003 में दीगोद (कोटा) से विधायक बने, जहां उन्होंने भाजपा के ललित किशोर चतुर्वेदी को हराया। 2008 में सांगोद से चुनाव जीते, 2013 में हारने के बाद पंचायत चुनाव लड़ा और वार्ड पंच बने। उनकी पत्नी मीना कुमारी उस समय सरपंच रहीं। 2018 में भरत सिंह एक बार फिर सांगोद से विधायक चुने गए। नहीं लड़ा 2023 का चुनाव 2023 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने राजनीति से खुद को अलग करने का फैसला लिया। उन्होंने साफ कहा था कि वे न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही परिवार के किसी सदस्य को टिकट दिलाएंगे। इसके बाद सांगोद से कांग्रेस ने भानु प्रताप सिंह को टिकट दिया। भरत सिंह तीन बार कुंदनपुर से सरपंच और दस साल तक सांगोद पंचायत समिति के प्रधान भी रहे। अंतिम संस्कार आज भरत सिंह का अंतिम संस्कार आज  उनके पैतृक गांव कुंदनपुर में किया जाएगा। गहलोत सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने जताया दुख भरत सिंह के निधन पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने दुख प्रकट किया है। गहलोत ने बयान जारी कर कहा-  पूर्व मंत्री  भरत सिंह कुंदनपुर के निधन का समाचार मिला। मैं कल ही SMS अस्पताल जाकर उनसे कुशलक्षेम पूछकर आया था। डॉक्टरों ने उनकी तबीयत में सुधार बताया था परन्तु आज ऐसा समाचार मेरे लिए व्यथित करने वाला है। भरत सिंह कुंदनपुर राजनीति एवं जनसेवा में बेबाकी एवं ईमानदारी की मिसाल थे। वो हाड़ौती क्षेत्र के कद्दावर नेता थे। मेरे उनके परिवार से संबंध उनके पिताजी के समय से थे जब मैं उनके साथ लोकसभा सांसद बना था। भरत सिंह कुंदनपुर मेरे साथ मंत्री भी रहे। मैं ईश्वर से श्री भरत सिंह जी की आत्मा को शांति एवं उनके परिजनों को हिम्मत देने की प्रार्थना करता हूं।

विश्वविद्यालय के 69वें आधारशिला दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे भव्य कार्यक्रम में नामकरण पट्टिका का अनावरण

उज्जैन  सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय अपने 69वें आधारशिला दिवस की तैयारी कर रहा है। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को आयोजित होगा, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विश्वविद्यालय की नामकरण पट्टिका का अनावरण भी करेंगे।  इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में कार्यपरिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहेंगे। विश्वविद्यालय का नामकरण हाल ही में सम्राट विक्रमादित्य के नाम पर किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29वें दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल की उपस्थिति में यह घोषणा की थी। प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मध्य प्रदेश के राजपत्र में भी इस नामकरण का प्रकाशन हो चुका है। विश्वविद्यालय की आधारशिला 23 अक्टूबर 1956 को तत्कालीन गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने रखी थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मार्च 1957 को हुई थी।  

ATS की चार्जशीट में खुला राज: धर्मांतरण के लिए मिली विदेशी फंडिंग, छांगुर शामिल

लखनऊ  एटीएस ने अवैध धर्मांतरण के मामले में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर, उसकी करीबी नीतू समेत छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। इसमें लिखा है कि छांगुर लखनऊ से मुम्बई तक अवैध धर्मांतरण करा रहा था। विदेशी फंडिंग के जरिए नीतू उर्फ परवीन और उसके पति नवीन रोहरा के खातों में करोड़ों रुपये जमा हुए। चार्जशीट में बलरामपुर की कोर्ट में कार्यरत राजेश उपाध्याय का नाम भी शामिल है। एसटीएफ ने पिछले साल छांगुर की करतूतों की जांच कर साक्ष्य जुटाए थे। इसके बाद छांगुर, बेटे महबूब, नवीन रोहरा, नवीन की पत्नी नीतू उर्फ परवीन, सबरोज, सहाबुद्दीन समेत कई को नामजद कराया था। यह एफआईआर एटीएस ने की थी। छांगुर की गिरफ्तारी के बाद एक-एक कर कई बड़े खुलासे हुए थे। ईडी ने भी छांगुर, नीतू और नवीन की कई सम्पत्तियां चिन्हित कर जब्त कर ली थी। एटीएस ने विवेचना में कई साक्ष्य जुटाए। इसके बाद छांगुर, नवीन, नीतू, सबरोज, महबूब, सहाबुद्दीन और राजेश उपाध्याय के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कई अन्य के खिलाफ भी जल्दी चार्जशीट दाखिल होगी। तीन और आरोपियों की तलाश जारी है। धर्मांतरण के धंधेबाज छांगुर का साम्राज्य कितना बड़ा? धर्मांतरण के खुलासे के बाद देश भर में चर्चा का विषय बने जलालुद्दीन उर्फ छांगुर के गिरोह ने 300 करोड़ रुपये से अधिक की सम्पत्ति बनाई। धर्मांतरण के धंधेबाज छांगुर बाबा का साम्राज्य कितना बड़ा है? यह पता लगाने में जुटी पुलिस और प्रशासन को बाकायदा दस्तावेज मिले हैं। छांगुर गिरोह के साथ तीन हजार से अधिक लोग जुड़े होने के साक्ष्य मिले है पर इसमें करीब 400 लोग ऐसे है जो मुख्य रूप से इस गिरोह के लिए ही पिछले कई सालों से काम करते रहे। पाकिस्तान, दुबई, कनाडा, नेपाल और सऊदी अरब से छांगुर को फंडिंग की जाती रही। पांच जुलाई से 31 जुलाई के बीच एटीएस, ईडी और बलरामपुर पुलिस की जांच रिपोर्ट में ऐसे ही कई तथ्य साक्ष्यों के साथ सामने आए है। छांगुर के धर्मांतरण गिरोह को लेकर शासन बेहद गम्भीर रहा। वह रोजाना जांच एजेन्सियों से प्रगति रिपोर्ट लेता रहा। शासन ने बलरामपुर पुलिस व प्रशासन के साथ ही एटीएस व एसटीएफ को भी जांच रिपोर्ट तैयार करने को कहा था।

याचिका के बाद जयपुर राजपरिवार को हाईकोर्ट का निर्देश: ‘महाराज’ और ‘राजकुमारी’ शब्द हटाएं

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व जयपुर राजपरिवार के वंशजों को गृह कर लगाने के मामले में अपनी याचिकाओं से महाराज और राजकुमारी उपसर्ग हटाने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि 13 अक्तूबर तक सुधार नहीं किया गया तो 24 साल पुराने मामले को बिना सुनवाई के खारिज कर दिया जाएगा। जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल ने पिछले सप्ताह गृह कर लगाने से संबंधित 24 वर्ष पुराने मामले में यह आदेश जारी किया। याचिका जयपुर राजघराने के दिवंगत जगत सिंह और पृथ्वीराज सिंह के कानूनी उत्तराधिकारियों की ओर से दायर की गई है। कोर्ट ने वाद शीर्षक में शाही सम्मानसूचक शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताई तथा याचिकाकर्ताओं को संशोधित दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश दिया। इसमें कहा गया है कि यदि अगली सुनवाई से पहले आदेश का पालन नहीं किया गया तो मामला सुनवाई किए बिना खारिज कर दिया जाएगा।

बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस में बड़ा बदलाव: नए रूट और स्टॉपेज के साथ बढ़ेगी ट्रेन की पहुंच

बिलासपुर बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22843/22844) का विस्तार कर दिया गया है। अब यह ट्रेन बक्सर स्टेशन तक जाएगी। 10 अक्टूबर से बिलासपुर से रवाना होने वाली 22843 बिलासपुर-पटना सुपरफास्ट एक्सप्रेस बक्सर तक जाएगी। वहीं, 11 अक्टूबर से पटना से रवाना होने वाली 22844 पटना-बिलासपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस बक्सर रेलवे स्टेशन से चलेगी। इन स्टेशनों पर होगा स्टॉपेज पटना-बक्सर के बीच छह स्टेशनों के यात्रियों को भी इस ट्रेन का लाभ मिलेगा। रेलवे ने दानापुर, बिहटा, आरा, बिहिया, रघुनाथपुर और डुमरांव स्टेशनों पर ट्रेन को वाणिज्यक ठहराव देने का निर्णय लिया है। रेलवे ने इन स्टेशनों पर ट्रेन के आगमन और प्रस्थान का समय भी जारी कर दिया है। इसके तहत बिलासपुर से यह ट्रेन 20:30 बजे छूटेगी। पटना 13:48 बजे, दानापुर 14:11 बजे, बिहटा 14:29 बजे, आरा 14:50 बजे, बिहिया 15:09 बजे, रघुनाथपुर 15:23 बजे, डुमरांव 15:38 बजे पहुंचेगी। इसके बाद बक्सर स्टेशन पर यह ट्रेन 16:10 बजे पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन बक्सर से 21:35 बजे रवाना होगी और पटना रात 12:03 बजे पहुंचेगी।