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वन प्राणी संरक्षण सप्ताह का आयोजन किया

अनूपपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 6 अक्टूबर 2025 को वन परिक्षेत्र अनूपपुर अंतर्गत शासकीय कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल अनूपपुर में वन प्राणी संरक्षण सप्ताह का आयोजन किया !जिसमें विद्यार्थियों को वन एवं वन प्राणियों का महत्व बताया गया !साथ ही चित्रकला निबंध एवं क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया! जिसमें विद्यार्थियों द्वारा बढ़ चढ़कर भाग लिया गया ! जिसमें प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को इनाम वितरण किया गया! कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य  कौशलेंद्र सिंह उपस्थित रहे साथी अनूपपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी  स्वर्ण गौरव सिंह प्रशिक्षु वन क्षेत्रपाल गौरव दुबे ,परिक्षेत्र सहायक अनूपपुर ,विजय सोनवानी अन्य स्टाफ शिक्षक उपस्थित रहेइस अवसर पर वक्ताओं ने विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व, वनाग्नि की रोकथाम, जैव विविधता संरक्षण, तथा मनुष्य द्वारा पशुओं को भोजन कराने के दुष्परिणाम आदि विषयों पर जानकारी प्रदान की।विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि वन्यजीव हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण अंग हैं और उनके संरक्षण में हम सभी की भूमिका अत्यंत आवश्यक है।

इतिहास रचेगा भारतीय क्रिकेट: 1 दिसंबर से विदेशी टी20 लीग में दिखेगा देसी जलवा

कोलंबो श्रीलंका की घरेलू टी20 फ्रेंचाइजी लीग लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) ने सोमवार को बताया कि भारतीय खिलाड़ी पहली बार इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे। इस लीग का छठा संस्करण एक दिसंबर से शुरू होगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से हालांकि, इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। एलीपीएल के आगामी सत्र में कुल 24 मैच होंगे जिसमें 20 ग्रुप चरण और चार नॉकआउट मुकाबले खेले जाएंगे। तीन स्थलों पर होंगे मैच एलपीएल के मुकाबले तीन आयोजन स्थल पर खेले जाएंगे जिसमें कोलंबो का आर प्रेमादास स्टेडियम, कैंडी का पल्लेकल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम और दांबुला का रानगिरी दांबुला इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम शामिल है। एलपीएल ने बयान जारी कर कहा, पहली बार भारतीय क्रिकेटरों के इस टूर्नामेंट में खेलने की उम्मीद है। उनके नामों की घोषणा जल्द ही की जाएगी जिससे पूरे क्षेत्र के प्रशंसकों में उत्साह का एक नया स्तर जुड़ जाएगा। इस प्रारूप के अनुसार लीग चरण के दौरान सभी पांच फ्रेंचाइजी एक-दूसरे के खिलाफ दो बार प्रतिस्पर्धा करेंगी। राउंड रॉबिन चरण के अंत में शीर्ष चार में रहने वाली टीम प्लेऑफ में जगह बनाएंगी। शीर्ष दो टीम क्वालिफायर एक में खेलेंगी जिसका विजेता सीधे फाइनल में जगह बनाएगा। तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीम एलिमिनेटर में आमने-सामने होंगी। इस मुकाबले का विजेता क्वालिफायर एक में हारने वाली टीम से क्वालिफायर दो में भिड़ेगा जिससे फाइनल में जगह बनाने वाली दूसरी टीम का फैसला होगा। विदेशी लीग में खेलने की इजाजत नहीं देता बीसीसीआई भारतीय खिलाड़ी अब तक विदेशी टी20 लीग में हिस्सा नहीं लेते हैं। अगर भारतीय खिलाड़ी एलपीएल में शामिल होंगे तो यह पहली बार होगा जब किसी विदेशी टी20 लीग में भारतीय खिलाड़ी नजर आएंगे। दरअसल, केंद्रीय अनुबंध में शामिल खिलाड़ियों और आईपीएल में खेलने वाले भारतीय खिलाड़ियों को बीसीसीआई विदेशी लीग में खेलने की इजाजत नहीं देता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास ले चुके खिलाड़ी बीसीसीआई की मंजूरी लेकर इसमें खेल सकते हैं। हाल ही में रविचंद्रन अश्विन ने आईएलटी20 लीग में खेलने के लिए पंजीकरण किया था, लेकिन उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला था। मालूम हो कि अश्विन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल से संन्यास ले चुके हैं। वहीं, दिनेश कार्तिक भी दक्षिण अफ्रीका की टी20 लीग एसएटी20 में खेलते नजर आएंगे।  

अहोई अष्टमी व्रत करते समय इन बातों का रखें ध्यान, वरना टूट जाएगा पुण्य का प्रभाव!

हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत बहुत विशेष माना जाता है. संतानवती महिलाओं के लिए इस व्रत का बहुत खास महत्व है. ये व्रत महिलाएं अपने बेटे की लंबी आयु, खुशहाल जीवन, तरक्की और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं. हालांकि बदलते समय में महिलाएं अपनी बेटियों के लिए भी ये व्रत करने लगी हैं. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कुछ इलाकों में अहोई अष्टमी का व्रत रखने का रिवाज है. अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. इसे अहोई आठें भी कहते हैं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, ये व्रत बड़ा ही पावन होता है. जहां इस व्रत को करने से संतान के जीवन में खुशहाली आती है, तो वहीं कुछ ऐसे काम भी हैं, जो अहोई अष्टमी के व्रत में महिलाओं को नहीं करने चाहिए. मान्यता है कि इन कामों को करने से महिलाओं को पुण्य नहीं, बल्कि पाप मिलता है. कब है अहोई अष्टमी का व्रत? हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 13 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12 बजकर 24 मिनट पर हो रही है. जबकि 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 11 बजकर 09 मिनट पर ये तिथि खत्म हो रही है. ऐसे में इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा. अहोई अष्टमी के दिन न करें ये काम अहोई अष्टमी का व्रत महिलाएं निर्जला रखती हैं. इसमें दिन भर कुछ खाएं नहीं और जल नहीं पीएं. व्रत के दौरान महिलाएं नुकीली और धारधार वस्तुओं का उपयोग न करें. व्रत के दिन दिन मिट्टी से जुड़ा कोई काम नहीं करें. व्रत के दौरान महिलाएं बिल्कुल न सोएं. ऐसा करना अशुभ होता है. व्रत का संकल्प लेने के बाद बीच में न तोड़ें. व्रत के दौरान झूठ बोलने और झगड़ा करने से बचें. अष्टमी तिथि के आरंभ से लेकर समापन तक ब्रह्मचर्य का पालन करें. व्रत के दौरान ज्यादा बातचीत न करके मंत्रों का जाप करें. अष्टमी तिथि के आरंभ से लेकर समापन तक बिस्तर पर न बैठें. व्रत के दिन दिन बाल धोना और काटना दोनों मना है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी का नया डिजिटल सफर, होंगे बड़े बदलाव

नई दिल्ली दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी को आधुनिक जमाने के अनुसार ढालने की तैयारी की जा रही है। लाइब्रेरी के विस्तार के बाद छात्रों के बैठने की क्षमता लगभग 3,400 हो जाएगी, जबकि वर्तमान में यहां केवल 700 सीटें उपलब्ध हैं। यह बदलाव केवल संरचनात्मक (ईंट-सीमेंट) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाइब्रेरी को डिजिटल सुविधाओं से भी लैस किया जाएगा। इसे देखते हुए डीयू में लाइब्रेरी का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जो छात्रों के अध्ययन और शोध के अनुभव को और बेहतर बनाएगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी अपने सैकड़ों साल पुराने इतिहास और विरासत को संभालकर रखती है। इसमें शामिल हैं.18वीं और 19वीं सदी की पांडुलिपियां, कई भाषाओं में लिखी दुर्लभ किताबें,दुर्लभ रत्न और ऐतिहासिक दस्तावेज, मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा जारी तीन मूल फरमान,यह लाइब्रेरी न केवल आधुनिक शिक्षा का केंद्र है, बल्कि भारतीय और वैश्विक ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभाती है। DU की सेंट्रल लाइब्रेरी का इतिहास दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1922 में हुई थी और उस समय इसकी लाइब्रेरी काफी साधारण थी। शुरुआत में इसमें केवल 1,380 उपहार में मिली किताबें और 86 पत्रिकाएं थीं और यह अस्थाई स्थानों से संचालित होती थी। साल 1933 से 1958 के बीच लाइब्रेरी वाइस रीगल लॉज के बॉलरूम में रही, और फिर 1958 में यह सेंट्रल लाइब्रेरी के वर्तमान भवन में शिफ्ट कर दी गई। शुरुआत में लाइब्रेरी में 1,500 से भी कम किताबें थीं, लेकिन आज इसका संग्रह बढ़कर 650,000 से ज्यादा किताबों तक पहुंच गया है। यह विकास लाइब्रेरी को छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आधुनिक और विशाल अध्ययन केंद्र बनाता है। क्या है DU की लाइब्रेरी की खासियत? दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी बर्मा टीक की अलमारियां हैं। ये अलमारियां 1938 से 1952 के बीच डीयू के कुलपति और भारतीय संघीय न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मौरिस ग्वायर द्वारा दान की गई थीं। इन अलमारियों में 27,000 से ज्यादा थीसिस रखी गई हैं। इनमें से पहली थीसिस 1958 में जमा की गई थी, जिसका शीर्षक था ‘भागवत पुराण का एक आलोचनात्मक अध्ययन’। यह संग्रह न केवल लाइब्रेरी के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है, बल्कि शोध और अकादमिक अध्ययन के लिए भी अमूल्य संसाधन है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी के ऊपर के फ्लोर पर स्थित दुर्लभ पुस्तक रूम विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। इस पुस्तक रूम के संग्रह में शामिल हैं: मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा जारी तीन मूल फरमान (1676 ई., एएच 1087) जॉर्ज मेरेडिथ की कविताएं (1808) एडब्ल्यू किंगलेक की ईथेन (1863) 18वीं और 19वीं शताब्दी की तिब्बती पांडुलिपियां भारत के 750 ई. के मानचित्र यह संग्रह न केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों और पांडुलिपियों का भंडार है, बल्कि शोध और अध्ययन के लिए अमूल्य संसाधन भी प्रदान करता है। अब हो रहा लाइब्रेरी का विस्तार दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी के विस्तार के लिए लंबे समय से जमीन रिजर्व रखी गई थी और अब इस योजना पर काम शुरू हो गया है। लाइब्रेरी में तीन नए विंग बनाए जा रहे हैं, जो सभी चार-मंजिला ब्लॉक होंगे। इस विस्तार से लाइब्रेरी का क्षेत्रफल 4,775 स्क्वायर मीटर से बढ़कर 18,525 स्क्वायर मीटर हो जाएगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी के विस्तार में आधुनिक तकनीक को भी शामिल किया गया है। नई योजना में बायोमेट्रिक गेट और मेटालिक चिप्स वाली किताबें शामिल हैं, जो लाइब्रेरी को डिजिटल और स्मार्ट बनाएंगी। इस पूरी योजना का बजट 110 करोड़ रुपये रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लाइब्रेरी के विस्तार का पहला चरण इस साल फरवरी में शुरू हुआ था और इसे दिसंबर के अंत तक पूरा किए जाने का अनुमान है। मुख्य बदलाव: लाइब्रेरी का क्षेत्रफल 4,775 से बढ़कर 18,525 स्क्वायर मीटर होगा। बैठने की क्षमता 700 से बढ़कर लगभग 3,400 सीटें होगी। तीन नए चार-मंजिला विंग बनेंगे। डिजिटलाइजेशन के जरिए पांडुलिपियों और दुर्लभ पुस्तकों को संरक्षित किया जाएगा। लाइब्रेरी में बायोमेट्रिक गेट और मेटालिक चिप्स वाली किताबें शामिल होंगी। डीयू ई-लाइब्रेरी पोर्टल से छात्रों को पूरे नेटवर्क के 17.5 लाख संसाधनों तक ऑनलाइन पहुंच मिलेगी। इस विस्तार और डिजिटल पहल से सेंट्रल लाइब्रेरी न केवल आधुनिक बनेगी, बल्कि शोध और अध्ययन के लिए एक सशक्त और स्मार्ट केंद्र के रूप में उभरेगी। डिजिटलाइजेशन पर दिया जा रहा जोर दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी, जो 100 साल पुरानी में ज्ञान का विशाल भंडार मौजूद है। यहां रखी किताबें और पांडुलिपियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें संरक्षित रखने के लिए डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। सेंट्रल लाइब्रेरी, डीयू के 34 लाइब्रेरी नेटवर्क का केंद्र है, जिसमें छात्रों को कुल 17.5 लाख पुस्तकें उपलब्ध हैं। अब डीयू ई-लाइब्रेरी पोर्टल के जरिए छात्रों को पूरे सिस्टम के सभी संसाधनों तक ऑनलाइन पहुंच मिलेगी, जिससे अध्ययन और शोध और अधिक सुलभ और प्रभावी हो जाएगा।

शांतिपूर्ण मतदान की तैयारी: बिहार में पहुंचीं CRPF की 71 टुकड़ियाँ

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने बिहार में विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए पर्याप्त संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है। इस बार के विधानसभा चुनाव में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की फिलहाल 500 कंपनियों को तैनात किया गया है। केंद्रीय बलों की अधिकांश कंपनियां, रविवार को बिहार में पहुंच चुकी हैं। अब इन्हें लोकल पुलिस प्रशासन के साथ विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। निष्पक्ष चुनाव की गारंटी देने के लिए केंद्रीय बलों के जो 50,000 जवान बिहार पहुंचे हैं, उनमें सीआरपीएफ की वे 71 कंपनियां भी शामिल हैं, जिन्हें विशेष तौर पर जम्मू-कश्मीर से बुलाया गया है। चुनावी ड्यूटी पर मोर्चा संभालने वाले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में बीएसएफ, सीआईएसएफ, एसएसबी और आईटीबीपी भी शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, बिहार में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव को संपन्न कराने के लिए सीआरपीएफ की 118 कंपनियों को तैनात किया गया है। इनमें से 71 कंपनियां, जम्मू-कश्मीर से बुलाई गई हैं। चुनाव में किसी तरह की कोई हिंसा न हो, इसके लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। विधानसभा चुनाव के संवेदनशील बूथों पर कोई अप्रिय घटना न हो और बिना किसी भय के लोग चुनाव प्रक्रिया में भाग ले सकें, इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों को भारी संख्या में बिहार के लिए रवाना किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बिहार में निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। विधानसभा चुनाव में कोई भी आपराधिक या असामाजिक तत्व, किसी तरह की बाधा न पहुंचा सकें, इसके सीएपीएफ की 500 कंपनियों को तैनात किया गया है। आने वाले दिनों में केंद्रीय बलों की संख्या बढ़ भी सकती है। अग्रिम तैनाती के दौरान केंद्रीय बल, बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में एरिया डोमिनेशन, विश्वास निर्माण के उपाय, फ्लैग मार्च और सर्विलांस का काम करेंगे। हालांकि प्रशासन द्वारा डिटेल डेपलॉयमेंट प्लान को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। बिहार सरकार से आग्रह किया गया है कि वह केंद्रीय बलों के लोकल ट्रांसर्पोटेशन, लॉजिस्टिक, रहने की जगह और दूसरी आवश्यकताओं बाबत त्वरित निर्णय लें। चुनाव के दौरान सीएपीएफ की कंपनियों द्वारा किए गए सभी तरह के मूवमेंट की जानकारी प्रतिदिन, केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी जाएगी।  

साइबर अपराध पर आधारित फिल्म ‘कंट्रोल’ 10 अक्टूबर को सिनेमाघरों में होगी रिलीज

  पटना,  अभय सिन्हा और धवल गड़ा निर्मित साइबर अपराध पर आधारित फिल्म ‘कंट्रोल’ 10 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। डॉ. जयंतिलाल गड़ा की पेन स्टूडियोज़ और यशी स्टूडियोज़ निर्मित फिल्म 'कंट्रोल’ 10 अक्टूबर को पूरे देश के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।, इस फिल्म का निर्देशन सफदर अब्बास ने किया है, जबकि निर्माण अभय सिन्हा और धवल गड़ा ने किया है। निर्माता अभय सिन्हा ने आज यहां आयोजित संवाददाता सम्मलेन में बताया कि फिल्म कंट्रोल सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि आज की डिजिटल दुनिया में इंसान की असली कमजोरी को उजागर करने वाली एक सामाजिक चेतावनी है। अभय सिन्हा ने कहा, “आज हर व्यक्ति अपने डिजिटल उपकरणों से बंधा हुआ है। हमारा डेटा, हमारी पहचान और हमारी निजी जानकारी ही सबसे बड़ा संसाधन बन चुकी है। ‘कंट्रोल’ इसी सच्चाई को पर्दे पर उतारती है।यह सवाल उठाती है कि क्या हम सच में अपने डिजिटल जीवन पर नियंत्रण रखते हैं या कोई और हमें नियंत्रित कर रहा है। यह फिल्म तकनीकी यथार्थ, भावनात्मक गहराई और मनोरंजन का एक सशक्त संगम है।” अभय सिन्हा ने बताया कि फिल्म का टैगलाइन "आपका डेटा, उनकी ताकत है" सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। उन्होंने कहा, “हम इस फिल्म के जरिए दर्शकों को न सिर्फ मनोरंजन, बल्कि जागरूकता देना चाहते हैं। आज हर व्यक्ति का डेटा किसी और की शक्ति बन चुका है। यह फिल्म उस अदृश्य खतरे पर रोशनी डालती है, जो हमारी रोजमर्रा की स्क्रीन के पीछे छिपा हुआ है।” वहीं, फिल्म के मुख्य अभिनेता ठाकुर अनुप सिंह ने अपने किरदार को लेकर कहा कि “मेजर अभिमन्यु शास्त्री की भूमिका निभाना एक चुनौतीपूर्ण अनुभव था। वह एक ईमानदार, साहसी सेना अधिकारी हैं जो देश की रक्षा करते-करते खुद एक साइबर साजिश के जाल में फंस जाते हैं। यह किरदार सिर्फ एक सैनिक का नहीं, बल्कि उस हर व्यक्ति का प्रतीक है जो सच और छल के बीच जूझ रहा है।” बॉलीवुड अभिनेता रोहित रॉय ने फिल्म कंट्रोल में नकारात्मक किरदार निभाया है। उन्होंने कहा, “आज के डिजिटल युग में असली ताकत हथियार या पैसा नहीं, बल्कि सूचना और डेटा है। मेरा किरदार एक ऐसा मास्टरमाइंड है जो लोगों की पहचान और तकनीक का इस्तेमाल हथियार की तरह करता है। यह किरदार जितना खतरनाक है, उतना ही यथार्थ से जुड़ा हुआ भी है।” रोहित रॉय ने कहा, कंट्रोल’ एक चेतावनी है, एक दर्पण है और एक प्रश्न भी, क्या हम अपने जीवन पर वास्तव में नियंत्रण रखते हैं? 10 अक्टूबर को जब यह फिल्म सिनेमाघरों में उतरेगी, तो यह सिर्फ एक थ्रिलर नहीं, बल्कि डिजिटल युग की सबसे बड़ी सच्चाई से रूबरू कराने वाली फिल्म साबित होगी। फिल्म कंट्रोल में प्रिया आनंद, राजेश शर्मा, यशपाल शर्मा, डेनज़िल स्मिथ, सिद्धार्थ बनर्जी, करण सिंह छाबड़ा, रोहन जोशी, रुद्रशीष मजूमदार और पलाक जैसवाल जैसे प्रतिभाशाली कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।  

नमो भारत ट्रेन के लिए बनेगा नया स्टेशन, 5 एकड़ में तैयार होगी अत्याधुनिक सुविधा!

नई दिल्ली नमो भारत का नया स्टेशन धारूहेड़ा में लगभग पांच एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा। इस संबंध में एनसीआरटीसी ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। यह स्टेशन निर्माण परियोजना क्षेत्र की परिवहन क्षमता और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। एनसीआरटीसी की योजना के तहत, दिल्ली-जयपुर हाईवे पर दोनों तरफ स्टेशन तक पहुंचने के लिए प्रवेश और निकासी की व्यवस्था बनाई जाएगी। जयपुर से दिल्ली की तरफ, अरावली के समीप नमो भारत का स्टेशन स्थित होगा। जहां स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है, उस क्षेत्र की भूमि विवरण इस प्रकार है. तीन एकड़ जमीन: औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के अधीन दो एकड़ जमीन: हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अधीन स्टेशन के पूर्व प्लान के मुताबिक हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की आधा एकड़ जमीन की जरूरत थी, लेकिन नए प्लान के अनुसार अधिक जमीन की आवश्यकता पड़ी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) की योजना के तहत, गुरुग्राम से फरीदाबाद होते हुए ग्रेटर नोएडा तक प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन के लिए भू-तकनीकी सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। इस कॉरिडोर की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने के लिए एक कंपनी का चयन किया गया है और उसे कार्य सौंपा जा चुका है। प्रस्तावित कॉरिडोर की लंबाई: लगभग 65 किलोमीटर मुख्य स्टेशन: पहला स्टेशन: दिल्ली-जयपुर हाईवे के पास, इफ्को चौक के समीप दूसरा स्टेशन: गुरुग्राम, गोल्फ कोर्स रोड, सेक्टर-54 (मेट्रो स्टेशन के पास) इस योजना से दिल्ली-एनसीआर में यात्री परिवहन और कनेक्टिविटी में सुधार होगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। स्टेशन के समीप दमकल केंद्र भी बनाया जाएगा नमो भारत स्टेशन के समीप एक दमकल केंद्र का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए स्टेशन और दमकल केंद्र के बीच नौ मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी। पहले इस स्टेशन के लिए एनसीआरटीसी को लगभग चार एकड़ जमीन की जरूरत थी। अब, स्टेशन को मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन के आधार पर तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए एक एकड़ अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता पड़ी है। स्टेशन की योजना को दोबारा तैयार करके, दोनों विभागों से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है, ताकि परियोजना को समय पर और सुचारू रूप से पूरा किया जा सके। नमो भारत ट्रेन के लिए विभिन्न स्टेशनों और सुविधाओं के निर्माण हेतु NCRTC को जमीन की आवश्यकता इस प्रकार है: इफ्को चौक स्टेशन: लगभग 8 एकड़ जमीन मुख्य स्टेशन: 7 एकड़ जमीन प्रवेश और निकासी मार्ग (दूसरी तरफ): 1 एकड़ जमीन झाड़सा: 1.5 एकड़ जमीन सेक्टर-33: 0.5 एकड़ जमीन हीरो होंडा चौक के समीप: लगभग 2 एकड़ जमीन धारूहेड़ा: डिपो निर्माण के लिए अतिरिक्त जमीन का आग्रह इस विस्तृत भूमि आवंटन से नमो भारत परियोजना का निर्माण सुचारू और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकेगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। दमकल सेंटर बनेगा नमो भारत स्टेशन के पास एक दमकल सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए स्टेशन और दमकल सेंटर के बीच 9 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जाएगी। पहले इस स्टेशन के लिए NCRTC को लगभग 4 एकड़ जमीन की आवश्यकता थी। अब स्टेशन को मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन के आधार पर तैयार किया जाएगा। स्टेशन की योजना को दोबारा तैयार किया गया है और दोनों संबंधित विभागों से जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है, ताकि परियोजना सुचारू रूप से और समय पर पूरी की जा सके।

खराब लाइफस्टाइल से इंदौर में स्वास्थ्य संकट, 30% को हाई बीपी-शुगर और 40% को कोलेस्ट्रॉल—एक्सपर्ट की चेतावनी

इंदौर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में 18 से 30 साल की उम्र वाले 50 हजार से ज्यादा युवाओं के स्वास्थ्य को लेकर किए गए एक अध्ययन ( Youth Health Survey) में परेशान करने वाली जानकारियां सामने आई हैं। अध्ययन के निष्कर्षों में 30 फीसदी प्रतिभागी युवकों (30  percent participating youth) का बीपी (BP) असामान्य पाया गया है। अध्ययन में शामिल करीब 90 फीसदी युवाओं (90 percent youth) की खान-पान की आदतें गड़बड़ (Eating habits are messed up) पाई गई हैं। अब जानिए, क्या कहते हैं हार्ट एक्सपर्ट्स अमेरिका से आए कार्डियोलॉजिस्ट प्रो. डॉ. प्रकाश डिडवानिया (यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयार्क, सेन फ्रांसिसको) ने बताया कि भारत में जिस प्रकार दिल की बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं, यह बहुत चिंताजनक है। इंदौर की स्थिति चौंकाने वाली है। यहां के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पतालों से जुड़े हार्ट क्लब के डॉक्टरों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में डेटा प्रेजेंटेशन दिया तो हम सभी चौंक गए। प्रिवेंशन संभव, लेकिन लोग गंभीर नहीं डॉ. प्रकाश डिडवानिया ने कहा कि बच्चे, जवान, बुजुर्गों सहित सभी लोगों में रिस्क फैक्टर्स बढ़ रहे हैं। आए दिन अचानक किसी की हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट से मौत का कारण खराब लाइफ स्टाइल और मोटापा है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रोल, मोटापा ये सभी खराब लाइफ स्टाइल के फैक्टर्स हैं। इन्हें प्रिवेंट किया जा सकता है लेकिन लोग गंभीर नहीं हैं। कॉन्फ्रेंस का पूरा सार यही निकला है कि बढ़ती हार्ट डिसीज को नियंत्रण करने के लिए प्रिवेंशन ही सबसे बेहतर उपाय है। सबसे पहले जरूरत है कि हायपरटेंशन, डायबिटीज को बचपन से ही प्रिवेंट कर लें। डॉ ने बताया कि हार्ट के लिए जोखिम के बहुत सारे फैक्टर्स हैं। इनमें से एक खास फैक्टर मोटापा है। पेट की गोलाई यानी तोंद पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। दिल्ली से आए प्रो. मनचंदा ने बताया कि हार्ट की बीमारियों के इलाज में लाखों खर्च की तुलना में प्रिवेंशन बहुत सस्ता है। जब लोगों को पता रहता है कि हार्ट की बीमारियां क्यों होती है तो उन्हें इसे रोकने के उपाय करने चाहिए। चार रिस्क फैक्टर्स पर काबू पा लिया जाए तो बेहतर नतीजे मिलेंगे। मोटापा कंट्रोल करने के लिए अब एडवांस इंजेक्शन भी कॉन्फ्रेंस के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. एके पंचोलिया ने योग को रोजमर्रा की आदत में शामिल करने की सलाह दी, क्योंकि यह तनाव घटाता है। शरीर और मन को स्वस्थ रखता है और मोटापा कम करने में मदद करता है। उन्होंने नए इंजेक्शन के बारे में भी जानकारी दी, जो शरीर के फैट को कम करने में मददगार है। उन्होंने कहा कि इनका असर तभी स्थायी रहेगा जब जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम भी जारी रहें। उन्होंने प्रदूषण को भी हृदय रोग का एक कारण बताया और सरकार से उचित कदम उठाने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देश में बढ़ते हृदय रोगों को लेकर चिंतित हैं। मोटापा और एयर पॉल्युशन हमारे स्वास्थ्य के सबसे बड़े दुश्मन हैं। अगर हमने अभी से इनसे लड़ाई नहीं लड़ी, तो आने वाले समय में हर घर में हृदय रोगी होगा। शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाता है फैट वहीं, कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. विद्युत जैन ने बताया कि मोटापा हार्ट डिसीज का प्रमुख कारण है। शरीर में जमा फैट धीरे-धीरे हार्ट और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचाता है। बढ़ते फैट पर काबू पाने के लिए लोग घर का खाना खाएं। प्रोटीनयुक्त आहार जैसे दाल और टोफू को रोजाना की डाइट में शामिल करें। हल्की-फुलकी एक्सरसाइज, साइकिलिंग या वॉक को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करना चाहिए। ज्यादा नमक, शुगर और तली चीजें खतरनाक कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राकेश जैन ने बताया कि हमारे पूर्वज सौ सालों से यह खाना खाते आए हैं लेकिन उस समय उनका जीवन पूरी तरह अलग था। वे रोजाना पैदल चलते थे, साइकिल चलाते थे, खेतों में मेहनत करते थे। आज के समय में लोग छोटी-सी मॉर्निंग वॉक भी छोड़ देते हैं। उन्होंने चेताया कि ज्यादा नमक, शुगर और तली-भुनी चीजें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। बाजार में उपलब्ध जूस और पैकेज्ड फूड को हेल्दी समझ कर पीना भी खतरनाक हो सकता है क्योंकि इनमें छुपी शुगर और फैट से हार्ट को काफी जोखिम रहता है। दिमाग जानता है, लेकिन दिल मानता नहीं डॉ. जैन ने कहा- हमारा दिमाग जानता है कि क्या सही है, लेकिन दिल मानता नहीं। इतने बड़े शरीर में 250 ग्राम के दिल को नजाकत से संभालो। जब दिल नहीं बचेगा तो कुछ भी नहीं बचेगा। भारत में लोग जूस या एनर्जी ड्रिंक को हेल्दी मानते हैं, जबकि उनमें भी शुगर की मात्रा बहुत अधिक होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को पैकेज्ड फूड पर बड़े अक्षरों में कैलोरी, शुगर और फैट की मात्रा लिखना अनिवार्य करना चाहिए ताकि लोग जागरूक हो सकें। सही खान-पान, व्यायाम हेल्दी हार्ट के लिए जरूरी कॉन्फ्रेंस की शुरुआत सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के ऑडिटोरियम में आयोजित सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रम से हुई। एक्सपर्ट्स ने बताया कि हृदय रोग केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं है, बल्कि अब यह युवाओं और बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने सही खान-पान, नियमित व्यायाम और तनाव कम करने को हेल्दी हार्ट के लिए बेहद जरूरी बताया। इसके अलावा डिबेट और सवाल-जवाब सत्र में हृदय स्वास्थ्य, जीवनशैली सुधार और बचाव के उपायों पर विचार साझा किए गए। एक स्पेशल सेशन ‘सॉल्ट सत्याग्रह’ पर हुआ। इसमें बताया कि अधिक नमक का सेवन हमारे दिल के लिए कितना नुकसानदायक है।

ईरान में करेंसी सुधार, 0000 हटाने वाला ऐतिहासिक कदम, जानिए सरकार की मंशा

तेहरान ईरान की संसद ने एक ऐत‍िहास‍िक बिल पास क‍िया है. और अब उनकी करेंसी रियाल में चार शून्य हट जाएंगे. मतलब, 10,000 पुराने रियाल बराबर अब एक नया रियाल होगा. ये सिर्फ नंबरों का खेल लगता है, लेकिन इसके पीछे महंगाई, पाबंद‍ियां, और इकॉनमी की बदहाली की कहानी है. तो ईरान ऐसा कर क्‍यों रहा है? इससे क्‍या फायदा होगा? और क्‍या इससे पहले क‍िसी और देश ने ऐसा क‍िया है? अगर क‍िया है तो क्‍या उसकी अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार आया? सबसे पहले, समझें कि ईरान की करेंसी की हालत इन द‍िनों खराब है. रियाल 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ही जूझ रहा है, यह अब कागज से भी सस्ता हो गया. आप इसे ऐसे समझ‍िए क‍ि एक अमेरिकी डॉलर अगर आपको खरीदना तो 11,50,000 रियाल चाहिए. मतलब, एक रोटी खरीदने के लिए लाखों के नोट गिनने पड़ते हैं. दूसरी बात, महंगाई पिछले कई सालों से 35% से ऊपर है. कभी यह 40%, कभी 50% तक भी पहुंच जाती है. 2022 में इंटरनेशनल मॉन‍िटरी फंड की एक रिपोर्ट आई, जिससे ईरान की खस्‍ता हालत को बयां क‍िया. ईरान तेल निर्यात पर निर्भर है, लेकिन अमेरिका की पाबंदियों की वजह से चीन को छोड़कर कोई उससे तेल नहीं खरीदता. वर्ल्‍ड बैंक कहता है क‍ि तेल एक्‍सपोर्ट न होने से उसके खजाने पर भारी असर पड़ा. नतीजा महंगाई चार साल तक 40% से ऊपर रही. महंगाई चरम पर पीछे मुड़कर देखें तो ये नई बात नहीं. 1979 के बाद से ईरान में महंगाई दर 10 फीसदी से ज्‍यादा ही रही है. इस्‍लामिक क्रांत‍ि के बाद बाहर से मंगाई गई चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं. इंपोर्ट ज्‍यादा है और एक्‍सपोर्ट कम है, इसकी वजह से करेंसी का मूल्‍य ग‍िरता जा रहा है. 2023 में तो रियाल का पतन इस कदर हुआ क‍ि महंगाई ने इतना बुरा था कि मुद्रास्फीति ने मुद्रा अवमूल्यन को पछाड़ दिया. पाबंद‍ियों की वजह से विदेशी मुद्रा आई नहीं, दुन‍िया से संबंध तनावपूर्ण हो गए. राजनीत‍िक अलगाव ने अर्थव्‍यवस्‍था का दम घोट द‍िया. जीरो घटाने से होगा क्‍या? अब सवाल ये कि शून्य हटाने से क्या होगा? ईरान की सरकारी मीडिया IRNA ने बताया क‍ि रियाल वही रहेगा, सिर्फ करेंसी से चार शून्य हटाए जाएंगे. केंद्रीय बैंक को तैयारी के ल‍िए दो साल मिलेंगे. फिर तीन साल का बदलाव दौर होगा, जहां पुराने और नए दोनों नोट चलेंगे. 10,000 पुराना रियाल अब 1 नया रियाल बन जाएगा. इससे लेनदेन आसान हो जाएगा. बिल जमा करने में ग‍िनती में मुश्क‍िल होती थी, वो द‍िक्‍कत खत्‍म हो जाएगी. इसे ऐसे समझें क‍ि पहले रोटी के ल‍िए जहां 10000 रियाल देने पड़ते थे, अब एक रियाल देना होगा. लाखों की बजाय अब सैकड़ों ग‍िनना होगा. दूसरे देशों ने क्या किया     वेनेजुएला: महंगाई चरम पर हुई तो 2018 में 5 शून्य हटाए, फ‍िर 2021 में भी ऐसा क‍िया. लेकिन महंगाई अभी भी ऊंची.     जिम्बाब्वे: 2000 के दशक में ऐसा क‍िया. 10 खरब डॉलर के नोट से जीरो हटाए. लेकिन व्‍यवस्‍था नहीं सुधरी.     तुर्की: सफल कहानी. 2005 में तुर्की ने 6 शून्य हटाए, नया लिरा लाया. विश्वसनीयता लौटी, मुद्रास्फीति नियंत्रण में आई.     ब्राजील: 1994 में रियाल योजना से महंगाई रोकी. नतीजा काफी बदलाव हुआ और ब्राजील कंपटीशन कर रहा है.     घाना: 2007 में सिस्टी हटाई, लेकिन विदेशी निवेश पर मिला-जुला असर रहा. सोशल मीडिया में उड़ा मजाक सोशल मीडिया में लोग इसका मजाक उड़ा रहे हैं. एक शख्‍स ने लिखा, ईरानी रियाल कागज से भी सस्ता है. 1 मिलियन रियाल प्रति डॉलर. सेंट्रल बैंक जीरो हटाने की योजना बना रहा. दूसरे ने तंज कसा, रियाल को बदल दो ‘ईरानी धुंध’ से. जनता का मूड कैसे बदलोगे? यह हताशा है, क्योंकि 80% लोग अब जरूरी चीजों पर ज्‍यादा खर्च कर रहे हैं. उनकी खरीदने की क्षमता कम हो गई है.

Flipkart विवाद: प्री-बुकिंग में 5000 लिए, यूजर्स बोले—फोन भी नहीं मिला, पैसे भी गए

मुंबई  अमेरिकी कंपनी Wallmart की स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Flipkart पर यूजर्स आरोप लगा रहे हैं. कंपनी पर आरोप है कि सेल के दौरान Pre Researve पास 5,000 रुपये में बेचा गया. कंपनी ने दावा किया कि 5000 रुपये का पास खरीदने वाले को iPhone 16 Pro सस्ते में मिलेगा.  दरअसल Big Billion Days सेल से कुछ ही दिन पहले Flipkart ने iPhone 16 Pro के लिए Pre Pass बेचना शुरू कर दिया था. अच्छी बात ये है कि कई लोगों ने ये पास खरीदा और उन्हें लगभग 70 हजार रुपये में iPhone 16 Pro मिला भी. लेकिन जिन्हें iPhone 16 Pro नहीं मिल पाया उन्हें कंपनी पैसे वापस नहीं कर रही है.  जाहिर है कंपनी ने iPhone 16 Pro के लिमिटेड युनिट्स ही कम क़ीमत पर बेचे हैं. इसलिए उन सभी लोगों को iPhone 16 Pro नहीं मिल पाया जिन्होंने 5000 रुपये का पास खरीदा था.  इतना ही नहीं, कुछ यूजर्स ने iPhone 16 Pro बुक भी कर लिया था, लेकिन बाद में फ्लिपकार्ट ने ख़ुद ही उसे कैंसिल कर दिया. यहां तक कि कुछ यूजर्स ने फ्लिपकार्ट पर ये भी आरोप लगाए हैं कि उनका ऑर्डर उनके नजदीकी हब तक पहुंचने के बाद कंपनी ने उसे कैंसिल कर दिया है.  अभिषेक यादव नाम के एक X यूजर ने एक पोस्ट में लिखा है कि जिन लोगों को iPhone 16 Pro नहीं मिल पाया उनका 5000 रुपये का नुक़सान हो गया. क्योंकि कंपनी के टर्म्स में साफ़ लिखा है कि ये 5000 रुपये का प्री पास नॉन रिफंडेबल है.  चूंकि Flipkart ने अपने टर्म्स एंड कंडीशन में पहले ही साफ़ कर दिया था कि 5000 रुपये का ये पास नॉन कैंसिलेबल और नॉन रिफंडेबल है. अगर पहले 48 घंटों के अंदर कस्टम iPhone 16 Pro (128GB) खरीदने में असमर्थ रहता है तो पास कैंसिल हो जाएगा और पैसे वापस नहीं मिलेंगे.  अब सोचिए, लाखों यूजर्स ने 5000 रुपये का पास लिया होगा, लेकिन iPhone 16 Pro कितने यूजर्स को मिला ये साफ़ नहीं है. हालांकि X पर ज़्यादातर पोस्ट ऐसे ही मिलेंगे जिनमे ये दावा किया जा रहा है कि 5000 रुपये का पास खरीदने के बावजूद उन्हें iPhone 16 Pro डिस्काउंटेड रेट में नहीं मिला. ऐसे में कंपनी ने यूजर्स के 5000-5000 रुपये ले कर काफी पैसा बनाया.  बेहतर प्रैक्टिस ये होता कि 5,000 में प्री पास अगर कंपनी बेच रही है और iPhone 16 Pro डिस्काउंटेड रेट में यूजर को नहीं मिला. ऐसे में  कस्टमर्स को 5000 रुपये या तो रिफंड कर दिए जाने चाहिए थे या किसी दूसरे प्रोडक्ट को खरीदने पर एडजस्ट हो जाने चाहिए था. लेकिन कंपनी ने दूसरा रूख अपनाना बेहतर समझा. कुल मिला कर ये कि जिन्हें किसी भी रीजन से iPhone 16 Pro 128GB नहीं मिल पाया उनके 5,000 रुपये डूब गए.  X पर कई यूजर्स Flipkart के ख़िलाफ़ कंज्यूमर कोर्ट में मुकदमा करने की भी बात कह रहे हैं. उनका दावा है कि ऐसे हजारों यूजर्स हैं जिनके 5,000 रुपये डूबे हैं और इससे Flipkart ने अनफेयर तरीके से पैसे बना रही है.