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अच्छी आदतों से रह सकते हैं फिट

  सेहत और खान-पान की आदतों का चोली दामन का साथ है। अगर हम सही और पौष्टिक खाते हैं तो फिट रहते हैं। जहां हमने सही और पौष्टिक आहार पर अपनी पकड़ ढीली की, वहीं नतीजा सामने आ जाता है। कई लोग वैसे संतुलित चलते हैं पर अपनी पसन्द के खाद्य पदार्थों को देखते ही अपना संतुलन खो बैठते हैं। माह में एक दो बार तो ठीक है पर अक्सर ऐसा होता रहे तो नतीजा खराब होगा ही। अगर खाने में कोई गलत आदतें डल गयी हैं तो समय रहते बदलें उन आदतों को। अपनी आदतों के प्रति सजग रहना बहुत जरूरी है ताकि आप और आपका परिवार सेहतमंद बना रह सके। ज्यादा देर तक भूखा रहना भी ठीक नहीं:- कई लोग प्रातः का नाश्ता नहीं करते कि सुबह भूख नहीं लगती या किसी पार्टी में जाना है तो दिनभर भूखे रहते हैं और खाना सामने आते ही उस पर टूट पड़ते हैं। भूख अधिक लगे रहने के कारण खाया भी ज्यादा जाता है और उस समय कैलरीज की तरफ ध्यान भी नहीं जाता। इसी प्रकार रात के खाने के बाद अगर आप सीधे लंच करेंगे तो अंतराल अधिक हो जायेगा और भूख लगेगी तो जरूरत से ज्यादा खाना खाया जाता है। ऐसा करना सेहत के साथ नाइंसाफी है। इन आदतों से सेहत तो खराब होती है है, गैस भी बनती है, पेट पर भी अत्याचार होता है। उसे कितनी मेहनत करनी पड़ती है भोजन पचाने में। ऐसी आदत से छुटकारा पाना ही ठीक है ताकि सेहत और पेट दुरूस्त रह सकें। लंच, डिनर में आर्डर अपने हिसाब से करें:- आज के युवा, युवतियां अक्सर लंच, डिनर का प्रोग्राम सप्ताहांत पर बनाते रहते हैं और दोस्तों के अनुसार ही खाते हैं जो आपकी सेहत पर कुप्रभाव डालते हैं। दोस्तों के साथ बाहर खाना तो नहीं छोड़ सकते पर इतना कर सकते हैं अपना आर्डर अपने हिसाब से दें। कुछ बीच का रास्ता निकालें। जैसे सूप प्लेन (बिना क्रीम वाला) मंगवा सकते हैं, उसी प्रकार बटर नान, परांठे के स्थान पर सादी तंदूरी रोटी मंगवा सकते हैं। सलाद मंगवा सकते हैं। सब्जियों में दाल मक्खनी या नानवेज के स्थान पर मिक्स वैजिटेबल और तंदूरी चिकन मंगवा सकते हैं। मिक्स सब्जी में आपको रेशा भी भरपूर मिलेगा भी नहीं होगा। कोल्ड ड्रिंक्स के स्थान पर सादा पानी या नींबू पानी लें। अंत में डेजर्ट भी हल्का सा लें। शुगर फ्री चीजों के आदी न बनें:- बहुत से लोग वैसे तो मीठा अवायड करते हैं पर शुगर फ्री मिठाई, आइसीम से परहेज नहीं करते बल्कि ज्यादा खा लेते हैं। सेहत को नुकसान पहुंचता है अधिक शुगर फ्री चीजों के सेवन से। न्यूट्रीशनिस्ट के अनुसार दिन भर में शुगर फ्री की गोलियां 2-3 से ज्यादा न लें। प्रयास कर दूध से बनी खाद्य सामग्री में इसका प्रयोग न करें और स्वयं भी इनका सेवन कम करें। नमक ज्यादा खाना भी खतरनाक:- बहुत से लोगों को खाने के साथ अचार, पापड़, सलाद पर नमक डालकर खाने की आदत होती है। उन्हें खाना इनके बिना स्वाद ही नहीं लगता। कभी-कभी अचार, पापड़ खाना ठीक है पर सलाद पर नमक का सेवन भी कम करें। सब्जी में नमक कम डालें, बिना स्वाद चखे सब्जी में नमक और न डालें। चिप्स व अन्य सनैक्स में नमक का प्रयोग प्रिजर्व करने के चक्कर में अधिक होता है। इनमें मौजूद सोडियम हमारे हृदय को बीमार बनाता है। दिन भर में 5 ग्राम से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। हृदय के अतिरिक्त सोडियम किडनी को भी नुकसान पहुंचाता है। स्नैक्स को दोस्त न बनाएं:- अक्सर भूख लगने पर, फ्रिज में रखे रहने पर, घर में रखे रहने पर हम रेडिमेड सनैक्स को भूख मिटाने का सहारा बनाते हैं। ये आदतें बिल्कुल गलत है। आपात स्थिति में कहीं आप बाहर हैं, सफर कर रहे हैं तो ठीक है। घर पर रहने पर इनसे दूरी बनाएं। टीवी देखते समय, पिक्चर देखते समय चिप्स, फ्रेंच फ्राइज, बटर वाले पॉपकार्न न खाएं। न ही कोल्ड ड्रिंक लें। अगर लस्सी, नींबू पानी (नमकीन) आप्शन है तो वही लें।  

बार काउंसिल चुनाव का महंगा सफर: MP में अब 1.25 लाख फीस जमा करना होगी, रिफंड नहीं

जबलपुर मध्य प्रदेश के सवा लाख से अधिक वकीलों का पंजीयन करने वाली सर्वोच्च संस्था एमपी स्टेट बार काउंसिल का चुनाव लड़ना अब आसान नहीं रहा। देश के वकीलों की सर्वोच्च संस्था बार काउंसिल आफ इंडिया ने एक आदेश के जरिए चुनाव नामांकन शुल्क में सीधे पांच गुना बढ़ोत्तरी कर दी है, जो कि वापस नहीं होगा। इससे प्रत्याशियों में खासा रोष है। इसको लेकर विरोध के स्वर भी उठ रहे है। पहले एसबीसी का चुनाव लड़ने के लिये नामांकन फीस महज 25 हजार रुपये थी, जिसे बढ़ाकर एक लाख पच्चीस हजार रुपये कर दिया गया है। राशि की वापसी न होने का भी विरोध हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को एक आदेश जारी करके स्टेट बार काउंसिल के चुनावों के लिए सात सदस्यीय चुनाव समितियां गठित करके 31 जनवरी, 2026 तक सभी चुनाव कराने के निर्देश बीसीआई को दिए थे। इसी आदेश के बाद बीसीआई द्वारा स्टेट बार काउंसिल को एक पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि लॉ ग्रेजुएट्स के नामांकन के लिए पहले फीस 16 हजार रुपये थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने घटाकर 600 रुपये कर दिया। स्टेट बार काउंसिल की आय घटने के कारण अब स्टेट बार काउंसिल के पास चुनावी खर्च के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं बच रही। इसके लिए जरूरी है कि नामांकन की फीस 25 हजार से बढ़ाकर एक लाख 25 हजार रुपये की जाए। मप्र स्टेट बार काउंसिल की मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल अगले माह पूरा होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में जनवरी 2026 तक नई कार्यकारिणी के चुनाव कराए जाने हैं। वेकेशन में प्रत्याशियों ने शुरू किया जनसंपर्क आगामी कार्यकारिणी को लेकर चुनाव की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों ने जहां नामांकन शुल्क बढ़ाये जाने पर रोष व्यक्त किया है तो वहीं अपनी जोर आजमाइश भी शुरू कर दी है। दशहरा पर्व पर पड़ी छुट्टियों पर अपना भाग्य आजमा रहे प्रत्याशियों ने वकीलों के घरों में पहुंचकर जन संपर्क करना शुरू कर दिया है। वहीं सोशल मीडिया पर भी मतदाताओं से अपने पक्ष में मत का प्रयोग करने की अपील की जा रहीं है। शुल्क बढ़ाया जाना अनुचित : सैनी एसबीसी के वाइस चेयरमेन आरके सिंह सैनी ने कहा है कि चुनाव में नामांकन शुल्क सीधे पांच गुना बढ़ाया जाना अनुचित है। इसकों लेकर एसबीसी ने बीसीआई को पत्र भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज करायी है। जल्द ही बीसीआई की सामान्य सभा की बैठक होने वाली है, जिसमें संभवत: शुल्क घटाने पर विचार विमर्श होगा।

पश्चिम बंगाल में बाढ़ जैसी स्थिति: लगातार बारिश से दार्जिलिंग में पुल टूटा, कई मौतें

 दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में भारी बारिश की वजह से भूस्खलन में कम से कम 6 लोगों की जान चली गई। जानकारी के मुताबिक भूस्खलन की वजह से एक लोहे का पुल ढह गया। मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की वजह से कई गांवों से संपर्क टूट गया है। राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंची हैं और मलबा हटा रही हैं। जानकारी के मुताबिक यह लोहे का पुल जिसे धूदिया आयरन ब्रिज के नाम से जानते हैं, मिरिक और कुरसियोंग को जोड़ता है। भारी बारिश के चलते यहां हाल यह है कि सड़कें मलबे और कीचड़ से पट गई हैं। मौसम विभाग ने दार्जिलिंग, कूच बेहार, कालिंपोंग, जलपाइगुड़ी और अलीपुरद्वार में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिम बंगाल में उप-हिमालयी क्षेत्रों में सोमवार तक भारी बारिश जारी रहेगी। भारी बारिश के चलते जलपाइगुड़ी का मालबाजार पानी में ही डूब गया। तीस्ता, माल और अन्य पहाड़ी नदियां उफान पर हैं। मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिम झारखंड के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र पूर्व-पश्चिम यानी बिहार की ओर बढ़ सकता है। कालिम्पोंग जिले में भी भारी बारिश की वजह से स्थिति गंभीर है। यहां पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। सिलीगुड़ी और सिक्किम को जोड़ने वाला वैकल्पिक मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग 717ई पर भूस्खलन की वजह से मलबा जमा हो गया है और यातायात रुक गयाहै। पेडोंग और ऋषिखोला के बीच भू्स्खलन की वजह से यातायात ठप है।  

स्वास्थ्य और स्टाइल का मेल: स्मार्टवॉच में बीपी मॉनिटर, जानें कीमत और फीचर्स

नई दिल्ली Huawei ने शुक्रवार को भारत में अपनी नई स्मार्टवॉच Watch D2 लॉन्च कर दी है। यह एक खास हेल्थ-फोकस्ड स्मार्टवॉच है जिसमें 1.82 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। इस स्मार्टवॉच की सबसे बड़ी खासियत है कि यह ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग कर सकती है। यह एक ऐसा अनोखा फीचर है, जो कि आमतौर पर स्मार्टवॉच में नहीं मिलता। बता दें कि इस वॉच में ब्लूटूथ कॉलिंग सपोर्ट भी मिलता है। Huawei Watch D2 में ECG, स्किन टेम्प्रेचर सेंसर भी दिए गए हैं। इसके अलावा इस वॉच में SpO2 यानी ब्लड ऑक्सीजन लेवल और हार्ट रेट सेंसर भी दिए गए हैं। यही वजह है कि यह वॉच फिटनेस के शौकीनों लोगों के लिए बेहद खास है। यह स्मार्टवॉच 80 से ज्यादा वर्कआउट मोड सपोर्ट करती है। कीमत और उपलब्धता भारत में Huawei Watch D2 की कीमत 34,499 रुपये रखी गई है। आप इसे आज से ही Amazon, Flipkart और Rtcindia.net वेबसाइट से खरीद सकते हैं। 5 अक्टूबर तक इस स्मार्टवॉच को इंट्रोडक्टरी ऑफर के साथ 33,499 रुपये में खरीदा जा सकता है। यह स्मार्टवॉच ब्लैक और गोल्ड दो कलर ऑप्शन में खरीदी जा सकती है। डिस्प्ले और डिजाइन Huawei Watch D2 में 1.82 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। इसकी पीक ब्राइटनेस 1,500 निट्स है। इस वजह से इसे तेज धूप में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इस वॉच में Always-on Display (AOD) मोड मिलता है, जिससे आप हमेशा समय और जरूरी जानकारी देख सकते हैं। बता दें कि बीपी मापने के लिए इस वॉच में 26mm का मैकेनिकल एयरबैग फीचर भी दिया गया है जो ब्लड प्रेशर मापने में मदद करता है। यह स्मार्टवॉच एल्युमिनियम एलॉय से बनी है जो इसे मजबूत और हल्का दोनों बनाती है। Huawei Watch D2 में Ambulatory Blood Pressure Monitorin (ABPM) फीचर है। इसे यूरोप में CE-MDR मेडिकल डिवाइस सर्टिफिकेशन और चीन के National Product Administration से भी सर्टिफिकेशन मिला हुआ है। यानी यह एक मेडिकली सर्टिफाइड डिवाइस है। हेल्थ और फिटनेस फीचर्स ब्लड प्रेशर ट्रैकिंग के अलावा, Huawei Watch D2 रियल-टाइम सिंगल-लीड ECG डेटा भी देती है। यह आपको इर्रेगुलर हार्ट रिदम और संभावित आपातकाल का पता लगाने में मदद करती है। इसमें और भी कई हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स दिए गए हैं जैसे कि हार्ट रेट मॉनिटरिंग, SpO₂, नींद की निगरानी, स्ट्रेस मॉनिटरिंग। यह वॉच आपकी हेल्थ मेट्रिक्स के आधार पर पर्सनलाइज्ड रिमाइंडर और हेल्थ रिपोर्ट भी देती है। Huawei Watch D2 IP68 रेटिंग के साथ आती है। यह Android और iOS दोनों डिवाइस के साथ काम करती है और Huawei Health ऐप के जरिए पेयर की जा सकती है। आप इस स्मार्टवॉच से सीधे कॉल उठा सकते हैं, रिजेक्ट कर सकते हैं और कॉल लॉग देख सकते हैं। इसमें नोटिफिकेशन, कॉल अलर्ट और मौसम की जानकारी भी दिखाई देती है। फिटनेस के शौकीनों के लिए इसमें 80 से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड हैं। आप पेयर किए गए ऐप के जरिए वॉच फेस को भी कस्टमाइज कर सकते हैं। बैटरी लाइफ की बात करें तो कंपनी का दावा है कि नॉर्मल इस्तेमाल में यह 7 दिनों तक चल सकती है। इसमें फास्ट चार्जिंग भी मिलती है।

प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों पर मान्यता संकट, छात्रों के लिए बड़ी चुनौती

भोपाल मध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेज आज भी मान्यता से वंचित हैं। एनएसयूआई का कहना है कि इन कालेजों में शैक्षणिक ढांचे की भारी कमी, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं। राज्य सरकार की गाइडलाइन के बावजूद इन कालेजों ने न तो फैकल्टी नियुक्त की और न ही जरूरी सुविधाएं पूरी कीं। एनएसयूआई ने अगस्त 2025 में इन कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को लेकर शिकायत की थी, लेकिन विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मंत्री और नेताओं के जिलों में ही कॉलेजों की खराब स्थिति     रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 12 कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली उनमें रायसेन, मंदसौर, नरसिंहपुर, जबलपुर, सागर, खंडवा, अमरकंटक, भोपाल, झाबुआ, सीधी, राजगढ़ और दतिया के कॉलेज शामिल हैं।     एनएसयूआई का आरोप है कि इनमें से कई कॉलेज कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं।राज्य सरकार के 13 मंत्रियों और भाजपा नेताओं के गृह जिलों में हैं, लेकिन वे भी अपने जिलों के कॉलेजों की स्थिति सुधार नहीं पाए।   कई कॉलेजों में प्राचार्य और उप प्राचार्य तक नहीं हैं, जबकि कुछ संस्थान केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं। एनएसयूआई ने कहा कि कुछ कॉलेजों ने इतनी खामियों के बावजूद एम.एससी. नर्सिंग की 35 सीटों के लिए आवेदन तक कर दिया है, जो नर्सिंग शिक्षा के साथ खिलवाड़ है। गरीब छात्राओं का भविष्य संकट में     एनएसयूआई ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी लापरवाही के कारण हजारों छात्राओं का भविष्य अधर में है। जो छात्राएं निजी कालेजों की ऊंची फीस भरने में सक्षम नहीं हैं, वे अब प्रवेश से वंचित रह जाएंगी।     एनएसयूआई का कहना है कि यह स्थिति कहीं न कहीं प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है।     विभाग के कुछ अधिकारी निजी संस्थानों से मिलीभगत कर रहे हैं, जिससे सरकारी कॉलेजों की मान्यता रुकी हुई है। इन कॉलेजों में करीब 1000 से ज्यादा सीटें हैं, जो अब खाली रह जाने का खतरा है।

सांसद अनुराग शर्मा की भागीदारी से भारत की उपस्थिति मजबूत होगी, 68वां राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन

झांसी झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद एवं राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) के अंतरराष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अनुराग शर्मा कैरिबियन द्वीप राष्ट्र बारबाडोस की राजधानी ब्रिजटाउन में होने वाले 68वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (सीपीसी) में भाग लेंगे। यह सम्मेलन5 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2025 तक होगा। कैरिबियन द्वीप राष्ट्र बारबाडोस की राजधानी ब्रिजटाउन में होने वाले 68वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में 5 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2025 तक होगा। इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों के 56 सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि एकजुट होंगे। इस सम्मेलन में संसदीय लोकतंत्र को सुदृढ़ करने, सुशासन, समावेशी विकास और 21वीं सदी की उभरती वैश्विक चुनौतियों के समाधान के मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा है। इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय 'द कॉमन वेल्थ व ग्लोबल पार्टनर है। सांसद अनुराग शर्मा का यह प्रतिनिधित्व ऐसे महत्वपूर्ण समय में हो रहा है जब वह सीपीए के कोषाध्यक्ष के रूप में अपने तीन वर्षों के ऐतिहासिक और अत्यंत सफल कार्यकाल का समापन करने जा रहे हैं। उनका यह कार्यकाल संगठन के लिए एक नए युग का सूत्रपात करने वाला रहा है और इसे सीपीए के इतिहास में सर्वाधिक परिवर्तनकारी दौरों में से एक माना जा रहा है। विगत तीन वर्षों में, सीपीए के कोषाध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व में संगठन में अभूतपूर्व संरचनात्मक और प्रशासनिक क्रांतियाँ आई हैं। सांसद शर्मा के अथक प्रयासों का परिणाम है कि सीपीए को ब्रिटेन में केवल एक ब्रिटिश चैरिटी के रूप में काम करने की पुरानी, सीमित व्यवस्था से बाहर निकालकर, एक विशाल, स्थायी और अंतरराष्ट्रीय संगठन (इंटरनल बॉडी) के रूप में कानूनी मान्यता दिलाई गई है।  

करवा चौथ व्रत में अक्सर होने वाली गलतियाँ, जो संकल्प को कर सकती हैं टूट!

भारत में सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है. यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है. पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत इस बार शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा. यह व्रत सूर्योदय से पहले सरगी खाकर शुरू होता है और चांद को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है. इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, इसलिए इस व्रत के नियमों का पालन बहुत ही सावधानी से करना चाहिए. जाने-अनजाने में की गई कुछ गलतियां आपके व्रत का संकल्प तोड़ सकती हैं और पूजा का फल कम कर सकती हैं. आइए जानते हैं वो कौन से काम हैं जिन्हें आपको करवा चौथ के दिन भूलकर भी नहीं करना चाहिए. करवा चौथ के व्रत में करें इन नियमों का पालन! अन्न और जल का सेवन न करें करवा चौथ का व्रत निर्जला रखा जाता है, जिसका अर्थ है पूरे दिन बिना पानी और भोजन के रहना. सबसे बड़ी गलती: सूर्योदय के बाद और चंद्रोदय से पहले गलती से भी पानी की एक बूंद या अन्न का एक दाना ग्रहण न करें. यदि अनजाने में ऐसा हो जाए, तो व्रत खंडित माना जाता है. उपाय: अगर गलती से व्रत टूट जाए, तो तुरंत स्नान करके साफ कपड़े पहनें. भगवान शिव-पार्वती, गणेश जी और करवा माता से क्षमा-याचना करें और चंद्रोदय होने तक व्रत जारी रखने का संकल्प लें. धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाओं को कैंची, चाकू, सुई या किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए. कारण: शास्त्रों में माना जाता है कि इन वस्तुओं का प्रयोग करने से व्रत का फल कम होता है और यह अशुभ भी माना जाता है. इसलिए इस दिन सिलाई-कढ़ाई जैसे काम से बचना चाहिए. सलाह: सब्जियों को काटने या अन्य काम के लिए किसी और से मदद ले सकते हैं. सफेद और काले रंग के कपड़े न पहनें पूजा-पाठ और शुभ अवसरों पर काले और सफेद रंग को अशुभ माना जाता है. कारण: काला रंग नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, जबकि सफेद रंग विधवापन का प्रतीक है. क्या पहनें: करवा चौथ के दिन लाल, गुलाबी, पीला, नारंगी या हरा जैसे चमकीले और शुभ रंग के कपड़े पहनें.यह सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. बुजुर्गों या किसी का अनादर न करें उपवास के दौरान महिलाओं को शांत, संयमित और विनम्र रहना चाहिए. क्या न करें: किसी भी व्यक्ति, विशेषकर बुजुर्गों, सास-ससुर या पति का अनादर न करें. किसी से झगड़ा या अपशब्द न बोलें. कारण: माना जाता है कि व्रत के दिन क्रोध करना, झगड़ा करना या किसी को बुरा-भला कहना व्रत के फल को समाप्त कर देता है. सोने से बचें और शारीरिक श्रम न करें पूरे दिन निर्जला व्रत रखने से थकान महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन कुछ धार्मिक नियम हैं. क्या करें: दिन में ज़्यादा सोने से बचें.संभव हो तो पूरा दिन जागकर भगवान का स्मरण करें या करवा चौथ की कथा सुनें. क्या न करें: व्रत के दिन भारी शारीरिक श्रम या थका देने वाले काम करने से बचना चाहिए. इससे प्यास अधिक लग सकती है और व्रत खंडित होने की संभावना बढ़ जाती है. किसी को सुहाग की सामग्री दान न करें करवा चौथ पर अपने सुहाग की वस्तुएं किसी और को देने से बचें. सुहाग सामग्री: अपनी मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी या श्रृंगार की कोई भी वस्तु किसी अन्य महिला को दान न करें या न दें. यह आपके सौभाग्य को कम कर सकता है. क्या करें: यदि दान करना ही है तो नई सुहाग सामग्री खरीदकर दान करें.

फास्टैग नहीं होने पर दोगुनी पेनल्टी से मिली बड़ी राहत, यूपीआई से पेमेंट करने की मिलेगी सुविधा

नई दिल्ली केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दीवाली से पहले आम लोगों को बड़ी राहत दी है। गाड़ी में फास्टैग न होने की दशा में मालिकों को दोगुनी कीमत चुकानी होती थी। लेकिन अब इस नियम में बदलाव होने जा रहा है। नए नियम के तहत अब फास्टैग न होने पर दोगुना नहीं, बल्कि 1.25 गुना टोल शुल्क देना होगा। बड़ी बात यह है कि वाहनों में फास्टैग न होने पर भुगतान अब यूपीआई से भी किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि फास्टैग ने टोल प्लाजा पर लंबी कतारों को कम किया है। 2022 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, टोल प्लाजा पर औसत वेटिंग समय अब ​​केवल 47 सेकंड है। देश में लगभग 98% राजमार्ग यूजर्स फास्टैग का उपयोग करते हैं। यह प्रणाली न केवल समय बचाती है, बल्कि टोल कलेक्शन को भी पारदर्शी बनाती है। हालांकि, कुछ लोग अभी भी फास्टैग का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे नकद भुगतान को प्राथमिकता देते हैं। इससे टोल वसूली में अनियमितता का खतरा बढ़ जाता है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने जून 2024 में सैटेलाइट आधारित टोल कलेक्शन प्रणाली के शुभारंभ के दौरान कहा था कि नकद भुगतान से सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। फैसले से टोल वसूली में आएगी पारदर्शिता नए नियम से नकद भुगतान में कमी आएगी। यूपीआई के इस्तेमाल में बढ़ोतरी से टोल वसूली और पारदर्शी होगी। इससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। इस कदम से उन लोगों को भी राहत मिलेगी जो किसी कारण से फास्टैग नहीं ले पाते थे। मंत्रालय का मानना ​​है कि इससे टोल प्लाजा पर आवाजाही और तेज होगी।

द्वितीय विश्व युद्ध का रहस्य: AI के जरिए क्रैक हुआ दुश्मनों का सीक्रेट कोड

आजकल AI की जरूरत हर किसी को पड़ने लगी है। कुछ लोग तो दिनभर में जितना सर्च इंजन नहीं खोलते, उससे अधिक बार AI यूज करने लगे हैं। जब लोग स्मार्टफोन पर चैटबॉट से बात करते हैं या AI से तस्वीरें बनवाते हैं, तो लगता है कि यह तकनीक नई है। लेकिन क्या आप जानते हैं, AI की जड़ें दूसरे विश्व युद्ध तक जाती हैं? यह कहानी उस समय की है, जब एक जटिल कोड ने दुनिया को हिला दिया था और एक शख्स ने उस कोड को तोड़कर AI की नींव रखी। कहानी एनिग्मा कोड और एलन ट्यूरिंग की, जिन्‍होंने आज के AI को जन्म दिया। सीक्रेट कोड नहीं टूटा ​गार्जियन की रिपोर्ट बताती है कि दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी ने एनिग्मा नाम की मशीन बनाई थी। यह दिखने में टाइपराइटर जैसी थी। जब कोई अक्षर दबाया जाता, यह मशीन उसे अलग-अलग कोड में बदल देती थी। हर 24 घंटे में इसकी सेटिंग बदल दी जाती थी। इतने सारे कोड थे कि इन्हें समझ पाना बाकी लोगों के लिए नामुमकिन था। जर्मन सेना इसका इस्तेमाल सीक्रेट मैसेज भेजने के लिए करती थी, दुश्मन को इसका मतलब समझने में सालों लग जाते। एलन ट्यूरिंग ने तोड़ दिखाया कोड तब बात उठी कि एलन ट्यूरिंग इसके कोड ब्रेक कर सकते हैं। ट्यूरिंग के महान गणितज्ञ और कोडब्रेकर थे। ट्यूरिंग ने 'बम' नाम की मशीन बनाई, जो एक तरह का शुरुआती कंप्यूटर था। यह मशीन लाखों कोड की जांच करती थी। 1943 तक यह हर मिनट दो मैसेज को डिकोड करने लगी। ट्यूरिंग ने एनिग्मा की कमजोरियों का फायदा उठाया। उनकी इस मेहनत ने दूसरे वर्ल्ड वॉर को दो साल पहले खत्म किया। इस वाकये से पहले मशीन सिर्फ काम करती थी, पहली बार मशीन ने सोचने का काम शुरू किया। इसके बाद साल 1956 में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान इसे 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' यानी 'AI' नाम दिया गया। इंटरनेट के आने के बाद AI तेजी से आगे बढ़ा, फिर जो तकनीक सोचने का काम करती थी, उसे AI कहा जाने लगा। ट्यूरिंग न होते तो AI भी नहीं होता एनिग्मा को तोड़ना उस समय एक चमत्कार था। मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के डॉ. मुस्तफा कहते हैं कि युद्ध के दौरान इसे तोड़ना आसान नहीं था। ट्यूरिंग और उनकी टीम ने महीनों की मेहनत से असंभव को संभव किया। उनकी बनाई मशीनें और तकनीकें आज के AI की बुनियाद हैं। अगर एनिग्मा न टूटा होता, तो शायद युद्ध का नतीजा कुछ और होता। शायद AI की शुरुआत भी ना होती। अब तो मिनटों में टूट सकता है सीक्रेट कोड आज की तकनीक के सामने एनिग्मा कोड मिनटों में टूट जाता। ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर माइकल वूल्ड्रिज बताते हैं कि आज के कंप्यूटर और AI इतने तेज हैं कि वे बम मशीन की तुलना में हजारों गुना तेजी से कोड तोड़ सकते हैं। मसलन, चैटजीपीटी जैसा AI आसानी से 'बम' मशीन की तरह काम कर सकता है। आधुनिक डेटा सेंटर की ताकत इतनी है कि ट्यूरिंग भी हैरान रह जाते।

प्रकृति प्रेमी हैं तो इन क्षेत्रों में बना सकते हैं करियर…

कुछ लोगों के लिए ऑफिस में एसी में बैठकर काम नहीं कर सकते। ये जॉब जैसे कि उनके लिए बने ही नहीं हैं। अगर आप इस तरह के व्येक्ति हैं कि कम्यूूसर टर के सामने आठ घंटे नहीं बैठ सकते तो हो सकता है ये काम आपने लिए हो जहां आपको प्रकृति के करीब रहने का मौका मिलें। जी हां, अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं… लैंडस्केप आर्किटेक्ट:- लैंडस्केप आर्किटेक्ट पार्क, घर, कैम्पेस, रिक्रिएशनल सेंटर और अन्य  ओपन स्पेसेस के लिए लैंड एरिया प्लान और डिजाइन करते हैं। वे साइट प्लान, स्पेसिकेशन और कॉस्ट् एस्टिमेट्स तैयार करते हैं। अगर आप क्रिएटिव हैं और आउटडोर काम करना पसंद करते हैं तो यह जॉब आपके लिए परफेक्ट है। पार्क नैचरलिस्ट:- पार्क नैचरलिस्ट लोगों को उनके स्थानीय इकोसिस्टम और एनिमल्स के बारे में शिक्षित करते हैं और अपना अधिकांश समय बाहर बिताते हैं। वे पार्क विजिटर्स को असिस्ट करते हैं। उनके जॉब में वॉटर सप्लाई से लेकर हाइकिंग रूट और रेस्यू ऑपरेशंस तक सभी जानकारियां देने का जिम्मा होता है। अगर आप डेस्क जॉब पसंद नहीं करते हैं और हर दिन कुछ नया चाहते हैं तो आप पार्क नैचरलिस्ट बन सकते हैं। फोटोग्राफर:- फोटोग्राफी एक क्रिएटिव जॉब है। भले ही आप लोगों की, प्रकृति या जानवरों की तस्वीरें ले रहें हो, इसमें क्रिएटिविटी चाहिए। फोटोग्राफर्स का अधिकांश समय आउटडोर सेटिंग्स में ही जाता है क्योंकि नैचरल लाइट बेस्ट होती है। आप इसमें वाइल्ड लाइफ, एन्वायरनमेंटल या आर्किटेक्चरल फोटोग्राफी का स्पेशिलाइजेशन भी कर सकत हैं। वाइल्डकलाइफ बायोलॉजिस्टि:- वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट वाइल्ड एनिमल्स के बारे में अध्ययन करता है और वाइल्ड लाइफ को कंजर्व और प्रोटेक्ट करने के प्रयासों में मदद करता है। अगर आपको जानवरों से प्यार हैं तो आप एक वाइल्ड लाइफ बायोलॉजिस्ट बन सकते हैं।