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बरसात अलर्ट: दिल्ली-NCR और पड़ोसी राज्यों में भारी बारिश की संभावना

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में मौसम का मिजाज फिर बदलने वाला है। मौसम विभाग ने 6 अक्टूबर के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दिन 24 घंटे बारिश होने की संभावना है। साथ ही, तेज हवाएं चलेंगी और गरज-चमक भी होगी। इस बदलाव से तापमान में गिरावट आएगी। लोगों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिलेगी। सुबह से ही हल्की से मध्यम बारिश का दौर शुरू हो जाएगा। यह बारिश दिनभर रुक-रुक कर जारी रह सकती है। इससे पहले आज दिल्ली-एनसीआर में कुछ जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश और तूफान देखने को मिल सकता है। वहीं 7 अक्टूबर को एनसीआर में बादल छाए रहने की संभावना है। इस दिन मध्यम बारिश हो सकती है। 8 और 9 अक्टूबर से मौसम धीरे-धीरे साफ होना शुरू होगा। 8 अक्टूबर को आसमान आंशिक रूप से बदला रहेगा। 9 अक्टूबर को मुख्य रूप से साफ मौसम की संभावना जताई गई है। इन दिनों अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, आज यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान समेत उत्तर-भारत के अधिकांश हिस्सों में भी बारिश की संभावना बन रही हैं। इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती है। तमिलनाडु के 14 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट तमिलनाडु के 14 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर मौसम प्रणालियां लगातार सक्रिय हो रही हैं। नए बुलेटिन के अनुसार, 2 अक्टूबर से बंगाल की खाड़ी के मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में बना एक गहरा दबाव क्षेत्र उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया है और शाम तक दक्षिणी ओडिशा तट पर गोपालपुर के पास पहुंच गया है। शनिवार को तिरुवल्लुर, चेन्नई, चैंगलपट्टू, कांचीपुरम, विल्लुपुरम, रानीपेट, वेल्लोर, तिरुपत्तूर, तिरुवन्नामलाई, कृष्णागिरी, धर्मपुरी और रामनाथपुरम के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश की उम्मीद है। राजस्थान में भी जमकर बरस सकते हैं बादल राजस्थान में मॉनसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि रविवार, 5 अक्टूबर से बारिश और तेज हो सकती है। विभाग के अनुसार, रविवार और सोमवार को राजस्थान के सभी जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। राज्य के 21 जिलों में बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यह बारिश पिछले तीन दिनों से हो रही है और अगले तीन दिनों तक जारी रहने का अनुमान है।

5 अद्भुत AI टूल्स जो भारतियों ने विकसित किए और पूरी दुनिया में छा रहे हैं – आपके लिए कौन सा उपयोगी?

नई दिल्ली AI का दुनियाभर में डंका बज रहा है। हर कोई इसका इस्तेमाल करके अपना काम आसान कर रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर दफ्तर में काम करने वाले लोगों तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्रेज है। इसी के इस्तेमाल से घर में काम करने वाली महिलाएं भी रेट्रो साड़ी का ट्रेंड फॉलो करते हुए गूगल जेमिनी से इमेज बना रही हैं। AI से घिरी हुई इस दुनिया में कुछ टूल्स ऐसे भी हैं, जो भारत के लोगो ने बनाएं हैं। चलिए, भारतीयों द्वारा बनाए गए 5 AI टूल्स के बारे में जान लेते हैं। Sarvam AI यह टूल भारत की भाषाओं के लिए खास AI मॉडल बना रहा है। यह कंपनी हिंदी, तमिल, तेलुगु, बंगाली जैसी भाषाओं में काम करने वाले AI टूल्स बनाती है, जो बातचीत, अनुवाद और वॉयस बेस्‍ड असिस्टेंट जैसे काम करते हैं। इसका मकसद है कि जो लोग अंग्रेजी नहीं जानते, वे भी डिजिटल सेवाओं का आसानी से उपयोग कर सकें। एआई टूल क्‍या आपके करियर की दिशा बदल सकते हैं? Krutrim Krutrim भारतीयों के लिए एक ऐसा AI असिस्टेंट है जो उनकी भाषा और संस्कृति को समझता है। यह हिंदी, तमिल, तेलुगु और अंग्रेजी जैसी भाषाओं में काम करता है। यह रोजमर्रा के काम जैसे ईमेल लिखना, सवालों के जवाब देना या जर्नी को प्लान करने का काम आसान करता है। Veena Veena एक ऐसा AI है जो हिंदी और हिंग्लिश में स्वाभाविक आवाज बनाता है। यह भारतीय लहजे और भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है, ताकि आवाज रोबोट जैसी ना लगे। यह कॉल सेंटर, ऑनलाइन एजुकेशन और सरकारी सेवाओं के लिए उपयोगी है। Gan.ai Gan.ai एक AI टूल है, जो हजारों पर्सनल वीडियो बना सकता है। इसमें हर वीडियो में ग्राहक का नाम, ऑफर या लोकेशन अपने आप जुड़ जाती है। इससे बिजनेस को बार-बार वीडियो शूट करने की जरूरत नहीं पड़ती। जैसे- किसी कस्टमर का नाम रोहन है और वह कोई फूड डिलीवरी ऐप यूज करता है है, तो कंपनी उसके लिए ऐड भेज सकती है 'हाय राहुल, ये हैं आपके आसपास के आज के ऑफर।' Rephrase.ai Rephrase.ai टेक्स्ट को एक ऐसे वीडियो में बदल देता है जिसमें AI अवतार बोलता हुआ नजर आता है। इसे Adobe ने खरीद लिया है और अब यह तकनीक, बड़े क्रिएटिव टूल्स का हिस्सा है।

धन और आस्था का संगम: माता टेकरी में जमा हुए 52.92 लाख, विदेशी करेंसी और ज्वैलरी भी मिली

देवास नवरात्र में माता टेकरी पर दर्शन करने पहुंचे लगभग दस लाख भक्तों की आस्था से भरी दान पेटियां शनिवार को खोली गईं। शनिवार को बड़ी माता मां तुलजा भवानी और छोटी माता मां चामुंडा के दोनों मंदिरों की कुल 24 दान पेटियों की गिनती सुबह 11 बजे शुरू हुई और शाम करीब 6 बजे तक चलती रही। दान पेटियों से लगभग 44 लाख रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा नवरात्र में माता को एवं दान पेटियों में कई आभूषण भी भक्तों ने अर्पित किए। नवरात्र पर लाखों भक्तों ने किए दर्शन नवरात्र के दौरान माता टेकरी पर देश-विदेश के लाखों भक्त दर्शन के लिए आए और भारी मात्रा में चढ़ावा चढ़ाया। नवरात्र समाप्त होने के बाद शनिवार को माता टेकरी पर स्थित मंदिरों की दान पेटियों को खोला गया। सुबह करीब 10 बजे से टेकरी पर मंदिरों में तहसीलदारों की निगरानी में पेटियों को खोला गया और दान की संपूर्ण राशि बोरियों में भरकर देव स्थान प्रबंध समिति कार्यालय में लाई गई। दान पेटियों से निकले दान के अलावा ऑनलाइन, क्यूआर व रसीद के माध्यम से भी भक्तों ने दान किया है।   नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही बता दें कि पूरे नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। इस दौरान व्यवस्था और सुरक्षा के लिए कलेक्टर ऋतुराज सिंह, एसपी पुनीत गेहलोद सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी माता टेकरी पर मौजूद रहे। नवरात्र में करीब 800 सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे। कोटवार, पटवारी, आरआई व तीन तहसीलदार शामिल हैं। दान पेटियों से भगवान को अर्पित किए गए दानों में आभूषण और नेपाल, सिंगापुर सहित अन्य देशों के करेंसी नोट भी पाए गए। इस दौरान मंदिर समिति के सदस्य, पटवारी, कोटवार, राजस्व निरीक्षकों सहित 100 से अधिक कर्मचारी गिनती में शामिल रहे। साथ ही तहसीलदार सपना शर्मा, हरिओम ठाकुर ने भी गिनती में सहयोग के साथ निगरानी की। दान और पत्रों की संपूर्ण गिनती पारदर्शी तरीके से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की गई। 52 लाख 92 हजार 868 रुपये दान में आए इस नवरात्र में रसीद के माध्यम 3 लाख 61 हजार 280 रुपये और दान पेटियों में 43 लाख 91 हजार 588 रुपये प्राप्त हुए। बैंक बार कोड के माध्यम से 5 लाख 40 हजार रुपये नवरात्र में प्राप्त हुए। कुल 52 लाख 92 हजार 868 रुपये शारदीन नवरात्र में भक्तों ने दान दिया। इसके अलावा चांदी के 11 छत्र, एक चांदी का मुकुट, 5 जोड़ी बिछिया, 4 स्वास्तिक, 8 जोड़े पायल दान पेटियों से प्राप्त हुए। नवरात्र में कुछ दर्शनार्थियों ने माता को चांदी के हार भी चढ़ाए थे। साथ ही नवरात्र में छोटी माता जी को एक स्वर्ण मुकुट और एक जोड़े सोने के कंगन भी भक्तों ने अर्पित किए। पिछले साल 45 लाख 51 हजार रुपये प्राप्त हुए माता टेकरी प्रभारी तहसीलदार हरिओम ठाकुर ने बताया कि शनिवार को बड़ी माता मंदिर की 11 और छोटी माता मंदिर की 13 दान पेटियां खोली गईं। नवरात्र के पूर्व सभी पेटियां 19 सितंबर को खोली गई थी। सामान्यत: नवरात्र के पूर्व और नवरात्र के बाद सभी मंदिरों की दान पेटियां खोली जाती हैं। इसके अलावा तीन-चार माह के अंतर में नियमित रूप से दान पेटियां खोली जाती हैं। बता दें कि विगत वर्ष शारदीय नवरात्र में दान पेटियों से लगभग 45 लाख 51 हजार रुपये दान व आभूषण प्राप्त हुए थे।

किम जोंग उन ने लगाया ब्रेस्ट इम्प्लांट बैन, महिलाओं पर सख्त कार्रवाई का आदेश

फियोंगयांग उत्तर कोरिया में अब ब्रेस्ट इम्प्लांट की सर्जरी पर भी रोक लगा दी गई है. यह देश पहले से ही रोजमर्रा की चीजों पर कड़े नियमों के लिए जाना जाता है, जैसे पश्चिमी कपड़े पहनना या हेयरस्टाइल. अब ब्रेस्ट इम्प्लांट और प्लास्टिक सर्जरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है. यहां एक डॉक्टर और दो महिलाओं पर ब्रेस्ट सर्जरी कराने के आरोप में सार्वजनिक मुकदमा चल रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन की सरकार अब ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए मोहल्लों में गश्त और गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है, ताकि ऐसी महिलाओं की पहचान की जा सके जिन्होंने यह सर्जरी करवाई है. अगर किसी महिला ने किस भी तरह का कोई भी बदलाव करवाया, तो नेताओं को पुलिस में रिपोर्ट करना होगा.  गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही सरकार उत्तर कोरिया में ब्रेस्ट इम्प्लांट को गैर-समाजवादी काम (Non-socialist work) माना गया है और यह कानूनन मना है. हाल ही में एक डॉक्टर पर, जिसने छुपकर यह सर्जरी की थी, सार्वजनिक सुनवाई हुई. इसी तरह दो 20 साल की लड़कियों पर भी ब्रेस्ट सर्जरी करवाने का आरोप लगा. बताया गया कि दोनों अपने फिगर को बेहतर बनाना चाहती थीं. डॉक्टर ने अपने घर पर अवैध रूप से चीन से लाए गए सिलिकॉन का इस्तेमाल करके सर्जरी की थी. 20 साल की दोनों महिलाओं ने अपने शरीर का आकार बदलवाने के लिए यह ऑपरेशन कराया था. सरकार अब ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई कर रही है और संदिग्ध महिलाओं की पहचान करने के लिए पड़ोस में गश्त और गुप्त एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है. 20 साल की लड़कियों ने कराई ब्रेस्ट सर्जरी  एक सूत्र के मुताबिक, सितंबर के बीच में दक्षिणी उत्तरी ह्वांगहे प्रांत के एक सूत्र ने बताया कि सितंबर के बीच में सारिवॉन जिले के सांस्कृतिक हॉल में एक डॉक्टर और उन महिलाओं का सार्वजनिक मुकदमा हुआ, जिन्होंने अवैध ब्रेस्ट सर्जरी करवाई थी. डॉक्टर पर आरोप था कि उसने अपने घर पर अवैध रूप से ब्रेस्ट सर्जरी की और इसके लिए चीन से तस्करी कर लाया गया सिलिकॉन इस्तेमाल किया. मुकदमे के दौरान डॉक्टर मंच पर सिर झुकाए खड़ा रहा, जबकि 20 साल की दोनों लड़कियां शर्म के कारण अपना चेहरा नहीं उठा सकीं. 

सिंदूर के घावों का इलाज नहीं, मुरीदके एयरबेस और ऑपरेशन सिंदूर की छुपी हुई सच्चाई

इस्लामाबाद  मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के मुरीदके एयरबेस पर किए गए हमलों के निशान आज भी साफ दिख रहे हैं. गूगल अर्थ की नई तस्वीरों से पता चलता है कि सितंबर 2025 तक हमले वाली दोनों जगहें अभी भी ढकी हुई हैं. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अब भी मरम्मत कर रहा है. यह खुलासा भारत की सैन्य ताकत और पाकिस्तान की कमजोरी को दिखाता है. ऑपरेशन सिंदूर: मई 2025 का बड़ा हमला 7 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया. यह पाकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम था. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस पर सटीक हमले किए. इनमें मुरीदके एयरबेस भी शामिल था, जो पाकिस्तान का महत्वपूर्ण हवाई अड्डा है. मई के अंत में जारी सैटेलाइट तस्वीरों से साफ दिखा कि हमले ने भारी नुकसान पहुंचाया. मुरीदके एयरबेस पर हमले का मुख्य निशान एक बड़ा गड्ढा था. यह गड्ढा करीब तीन मीटर चौड़ा था और एयरबेस सुविधा से सिर्फ 30 मीटर दूर था. यह सुविधा पाक वायुसेना के लिए बहुत गोपनीय मानी जाती है. हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों से पुष्टि हुई कि भारत ने सटीक निशाना साधा. हमले से एयरबेस की संरचना को गहरा नुकसान हुआ, जिसमें छतें उड़ गईं और इमारतें टूट गईं. सितंबर 2025 की गूगल अर्थ तस्वीरें: मरम्मत के संकेत अब सितंबर 2025 की गूगल अर्थ तस्वीरों से नया खुलासा हुआ है. हमले वाली दोनों जगहें – गड्ढा और क्षतिग्रस्त हिस्से – अभी भी ढकी हुई दिख रही हैं. ऐसा लगता है कि पाकिस्तान ने तिरपाल या अन्य सामग्री से इन्हें छिपाया है, ताकि मरम्मत जारी रख सके. अन्य पाकिस्तानी एयरबेस जैसे सरगोधा में जून 2025 तक रनवे की मरम्मत हो चुकी थी, लेकिन मुरीदके में काम धीमा चल रहा है. यह ढकाव नुकसान की गहराई दिखाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अंडरग्राउंड सुविधा को ठीक करने में महीनों लग सकते हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मई के हमलों से पाकिस्तानी सुविधाओं को सीमित लेकिन साफ नुकसान हुआ. पाकिस्तान की हवाई ताकत पर सवाल ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की हवाई ताकत को कमजोर कर दिया. मुरीदके एयरबेस पर हमला न सिर्फ बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया, बल्कि पाकिस्तान के आत्मविश्वास को भी झकझोर दिया. भारत ने न्यूनतम नुकसान के साथ सटीक हमले किए, जो वायुसेना की क्षमता दिखाता है. पाकिस्तान ने शुरुआत में नुकसान को कम बताया, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों ने सच्चाई उजागर कर दी. नूर खान और सरगोधा जैसे अन्य बेस भी प्रभावित हुए. मुरीदके पर फोकस इसलिए, क्योंकि यह अंडरग्राउंड हथियार भंडारण का केंद्र था. भारत की सतर्कता बरकरार यह तस्वीरें दिखाती हैं कि मई के हमले का असर आज भी है. पाकिस्तान मरम्मत में जुटा है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लगेगा. भारत के लिए यह चेतावनी है कि सीमा पर सतर्कता जरूरी है. ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएगा. विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी तस्वीरें निगरानी के लिए महत्वपूर्ण हैं. गूगल अर्थ जैसी तकनीक से दुनिया को सच्चाई पता चलती है.

धार के बाग में जिओपार्क मान्यता प्रस्ताव को मिल सकती है सकारात्मक अनुशंसा

 धार  यूनेस्को के वैश्विक जिओपार्क के कार्यकारी विज्ञानी डॉ. अलीरेजा (ईरान) एवं लखनऊ के विज्ञानी डॉ. सतीश त्रिपाठी और खोजेमा नजमी (भू-गर्भशास्त्र विशेषज्ञ) ने बाग क्षेत्र स्थित डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का गुरुवार को निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने उद्यान में संरक्षित किए गए डायनासोर के जीवाश्म, विभिन्न प्रकार की चट्टानों, समुद्री जीवों के जीवाश्म और वानस्पतिक जीवाश्मों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। डॉ. अलीरेजा ने जीवाश्म की प्रचुर मात्रा को देख आश्चर्य व्यक्त किया एवं वनमंडल धार द्वारा जीवाश्म संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को सराहा। डॉ. अलीरेजा ने डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को वैश्विक जिओपार्क की मान्यता के लिए प्रस्तावित करने की अनुशंसा की बात कही। बाग गुफाओं का सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन करने पर विशेष जोर दिया गया है। जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन डॉ. त्रिपाठी ने सभी जीवाश्मों की विशेषता बताई एवं शोध व संरक्षण की भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। वनमंडलाधिकारी धार विजयनंथम टीआर ने बताया कि डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को आधुनिक जिओपार्क बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समस्त जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन भी किया जाएगा, जो इसे वैश्विक पहचान देगा। उपवनमंडलाधिकारी संतोष कुमार रनशोरे द्वारा बाग के आसपास स्थित समस्त जीवाश्म स्थलों एवं बाग की गुफाओं की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों के दल के साथ वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सोलंकी एवं सुनील बघेल व वेस्ता मंडलोई उपस्थित रहे। संपूर्ण डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण कराया गया एवं आज दिवस तक किए गए प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई।

भोपाल में इको-फ्रेंडली स्प्रे की शुरुआत, देवी को अर्पित नींबुओं से होगा जलस्रोतों का शुद्धिकरण

भोपाल  नवरात्रि के दौरान शहर में 5000 दुर्गा पंडाल बनाए गए थे। इन पंडालों में दुर्गा प्रतिमाओं पर नींबू चढ़ाए गए थे। अब ये नींबू बेकार नहीं जाएंगे। नगर निगम ने अनूठा कदम उठाते हुए इन नींबुओं का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए किया है। इन नींबूओं को इकट्ठा कर बायो एंजाइम तैयार किया जाएगा। यह तालाब और कुंडों की सफाई में इस्तेमाल होगा। दरअसल, शहर में 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी बेकार चीजों से पैसे कमाने की दिशा में भोपाल में नवाचार किया जा रहा है। इसके लिए दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं को चढ़ाए गए नीबूओं को इकट्ठा किया गया है। इसमें अन्य सामग्री मिलाकर एक स्प्रे तैयार होगा। दुर्गा पंडालों से इकट्ठा हुए 2 टन नींबू नगर निगम के अफसरों का अनुमान है कि इस नवरात्रि में भोपाल में अलग-अलग दुर्गा जी की प्रतिमाओं से 2 टन से ज्यादा नींबू इकट्‌ठा हुए हैं। इन नीबूओं के उपयोग से 10 हजार लीटर स्प्रे तैयार किया जाना है। इस स्प्रे में संतरे के छिलके और सड़े गुड़ को भी मिलाया जाएगा। इसके बाद तालाब-कुंड में डाला जाएगा। इस एंजाइम से पानी साफ और स्वच्छ होगा। गणेशोत्सव से शुरू हुआ था प्रयोग गौरतलब है कि पिछले दिनों हुए गणेश उत्सव के दौरान भी बायो एंजाइम बनाने का प्रयोग किया गया था, जो कि सफल रहा था। हालांकि उस समय इतनी अधिक मात्रा में नींबू इकट्‌ठा नहीं हुए थे। लेकिन अब नवरात्रि के 9 दिनों में करीब 5 हजार पंडाल में निगम की निर्माल्य सामग्री इकट्ठा किया। इनमें से नींबू को अलग कर बायो इंजाइम बनाने की प्रक्रिया शुरू की। शुरूआती 6 दिनों में 2 टन नींबू जमा हुए, लेकिन आखिरी 3 दिन में ही नींबूओं की मात्रा 8 टन से ज्यादा हो गई। ऐसे बनता है बायो एंजाइम दुर्गा पंडालों में पूजन सामग्री में से नीबू को अलग इकट्ठा किया जाता है। नीबू को मशीन में डालकर रस निकाला जाता है। इसे केन के अंदर भरा जाता है। यह नींबू, संतरे के छिलकों, सड़े ‎गुड़ और पानी को मिलाकर बनाया‎ जाता है। 10 से 15 दिन में यह तैयार हो जाता है। यह है फायदा जिस जल में प्रदूषण के ‎कारण ऑक्सीजन की मात्रा‎ कम हो जाती है। वहां पर बायो एंजाइम को मिलाया जाता है। यह पानी ‎को प्राकृतिक तरीके से साफ करता ‎है। बायो इंजाइम एक प्राकृतिक, ‎गैर-विषैले और पर्यावरण के अनुकूल ‎क्लीनर का काम करता है। इसका ‎उपयोग कपड़े धोने के साथ बर्तन ‎और हाथ धोने के लिए भी किया जा ‎सकता है।

करवा चौथ कब मनाएं? जानिए सही दिन, शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का वक्त

करवा चौथ का व्रत कार्तिक संकष्टी चतुर्थी को रखते हैं. उस दिन कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि होती है. इस बार चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर और 10 अक्टूबर दो दिन है, इस वजह से करवा चौथ की तारीख पर लोगों में कन्फ्यूजन की स्थिति है. करवा चौथ का व्रत 9 अक्टूबर को रखा जाएगा या​ फिर 10 अक्टूबर को? इस सवाल ने सुहागन महिलाओं को परेशान कर ​रखा है. आइए जानते हैं कि करवा चौथ की सही तारीख क्या है? करवा चौथ का व्रत किस दिन रखना सही है? करवा चौथ पर चांद कब निकलेगा? करवा चौथ की सही तारीख पंचांग से देखा जाए तो करवा चौथ की कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर को रात 10:54 बजे से शुरू हो रही है, जो 10 अक्टूबर को शाम 7:38 बजे तक है. करवा चौथ के व्रत के लिए चतुर्थी तिथि में चंद्रमा का उदित होना यानि चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी महत्वपूर्ण है. इस आधार पर देखा जाए तो 9 अक्टूबर को चतुर्थी तिथि में चंद्रमा पहले से ही उदित है. उस दिन चंद्रोदय शाम को 07:22 पी एम पर तृतीया तिथि में हो रहा है. वहीं 10 अक्टूबर को चंद्रोदय चतुर्थी तिथि के बाद हो रहा है. देखा जाए तो चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर को देर रात शुरू हो रही है और चतुर्थी में चंद्रोदय नहीं, जबकि 10 अक्टूबर को उदयातिथि के अनुसार चतुर्थी तिथि सूर्योदय के साथ ही प्राप्त हो रही है, लेकिन चंद्रोदय चतुर्थी तिथि में नहीं हो रहा है. इस दिन भी चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी तिथि प्राप्त नहीं हो रही है. ऐसी स्थिति में उदयातिथि को मानते हुए करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर शुक्रवार को रखा जाएगा. उस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में होगा. करवा चौथ पूजा मुहूर्त करवा चौथ के दिन व्रती महिलाएं प्रदोष काल में माता गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा करती हैं. इस साल 10 अक्टूबर को करवा चौथ की पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 57 मिनट से शाम 7 बजकर 11 मिनट तक है. करवा चौथ की रात लाभ-उन्नति मुहूर्त 09:02 पी एम से 10:35 पी एम तक है. करवा चौथ पर चंद्रोदय समय इस साल करवा चौथ पर चांद रात में 08 बजकर 13 मिनट पर निकलेगा. इस समय से महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देंगी और पारण करके व्रत को पूरा करेंगी. चंद्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र चंद्रमा को अर्घ्य देते समय आपको नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करना चाहिए. गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥ करवा चौथ व्रत के नियम करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. निर्जला व्रत के शुरू करने से पहले सरगी ग्रहण करते हैं, फिर सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक बिना अन्न और जल के व्रत रखती हैं. शाम की पूजा और चंद्र अर्घ्य के बाद पारण किया जाता है. इस बार महिलाओं को करीब 14 घंटे का निर्जला व्रत रखना होगा.  

शरद पूर्णिमा पर बरसेगी लक्ष्मी कृपा, मुख्य दरवाजे पर करना न भूलें ये जरूरी कार्य

 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस रात चंद्रमा धरती के सबसे निकट होता है. शरद पूर्णिमा के व्रत की भी विशेष महिमा बताई गई है. कहते हैं कि इसी दिन धन की देवी मां लक्ष्मी का अवतरण हुआ था. ऐसा विश्वास है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है. नारद पुराण के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं. इसलिए इस दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है. कहा जाता है कि इस दिन लक्ष्मी जी अपने श्रद्धालुओं को धन, वैभव, यश और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इसलिए घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाकर देवी का स्वागत करना चाहिए. शरद पूर्णिमा की रात होती है बेहद खास शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में राधा और गोपियों संग अद्भुत महारास का आयोजन किया था. कहा जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों संग नृत्य करने के लिए अनेक रूप प्रकट किए थे. यह दिव्य रासलीला केवल नृत्य नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद का अद्वितीय प्रतीक भी मानी जाती है. मां लक्ष्मी का अवतरण शरद पूर्णिमा की रात ही समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं. यही कारण है कि शरद पूर्णिमा का दिन लक्ष्मी पूजन के लिए बेहद खास माना जाता है. कई जगहों पर इस दिन कुंवारी कन्याएं सूर्य और चंद्र देव की पूजा करती हैं. और उनसे आशीर्वाद लेती हैं. क्यों खुले आसमान के नीचे रखी जाती है खीर? शरद पूर्णिमा के दिन आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा है. कहते हैं कि इस रात चंद्रमा की रोशनी से अमृत वर्षा होती है. इस खीर को खाने से अच्छी सेहत का वरदान और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है. इसलिए लोग शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की छाया में खीर रखते हैं और फिर उसे अगले दिन सुबह खाते हैं. कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में रखी खीर खाने से इंसान का भाग्योदय होता है और परिवार को रोग-बीमारियों से मुक्ति मिलती है.

वाल्मीकि जयंती कभी? 6 या 7 अक्टूबर — असली दिन की जानकारी

आश्विन मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इस दिन शरद पूर्णिमा के साथ-साथ महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी मनाई जाएगी. वाल्मीकि जी ने हिंदू धर्म के सबसे अहम महाकाव्यों में से एक रामायण की रचना की थी. महर्षि वाल्मीकि को ही संसार का पहला कवि माना जाता है. चलिए जानते हैं इस साल वाल्मीकि जयंती किस तारीख को मनाई जाएगी.  कब है वाल्मीकि जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार आश्विन पूर्णिमा तिथि सोमवार, 6 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 24 से शुरू होगी और मंगलवार, 7 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 17 मिनट पर तिथि का समापन होगा. इस तरह 6 और 7 अक्टूबर, दोनों ही दिन आश्विन मास की पूर्णिमा का संयोग बन रहा है. लेकिन पूर्णिमा तिथि का व्रत 6 अक्टूबर को किया जाएगा. और 7 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी. महर्षि वाल्मीकि कौन थे? रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. लेकिन उन्होंने बहुच छोटी उम्र में ही घर छोड़कर वैराग्य जीवन अपना लिया था. लोक कथाओं के अनुसार उनका नाम रत्नाकर था. एक दिन वे महर्षि नारद से मिले. नारदजी ने उन्हें आत्मज्ञान और सत्य का मार्ग दिखाया. नारदजी ने उन्हें "राम-राम" नाम का जाप कराया. और तब से ही उनका जीवन बदल गया. महर्षि वाल्मीकि की रचनाएं वाल्मीकि जी ने भगवान श्रीराम के जीवन, संघर्ष, आदर्श और धर्म की स्थापना की कथा को महाकाव्य रामायण के रूप में लिखा. आगे चलकर जब माता सीता को वनवास मिला, तब वाल्मीकि जी ने ही उन्हें अपने आश्रम में आश्रय दिया था. उनके दोनों पुत्रों लव और कुश का जन्म भी इसी आश्रम में हुआ और उन्होंने ही वाल्मीकि जी से रामायण का ज्ञान प्राप्त किया. रामायण में लगभग 24,000 श्लोक हैं. यह संस्कृत के सबसे प्राचीन महाकाव्यों में से एक हैं. उन्हें आदिकवि भी कहा जाता है.