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राम भक्तों का अद्भुत संगम: अयोध्या में महाकुंभ, कलश यात्रा में जुटेंगे 20 हजार लोग

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अयोध्या  भगवान राम की नगरी में एक बार फिर से सनातन के महाकुंभ का जैसा नजारा होने वाला है. अयोध्या धाम में एक बड़े अनुष्ठान का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें आठ राज्यों के मुख्यमंत्री समेत देश के बड़े-बड़े साधु संत शामिल होंगे. आयोजन को लेकर राम नगरी के सभी प्रमुख मठ मंदिरों में राम भक्तों का जमावड़ा शुरू हो गया है. राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के भव्य आयोजन के बाद अयोध्या में ये दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन होने जा रहा है. कल सुबह 10 बजे करीब 20 हजार राम भक्त कलश यात्रा निकालकर इस धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ करेंगे. इसको लेकर जिला प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली है. भव्य आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनेगा अयोध्या जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री वल्लभाचार्य जी महाराज की माने तो देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक स्थान पर एक साथ 501 विद्वान 501 श्री रामार्चा महायज्ञ का अनुष्ठान करेंगे. यह पहली बार है जब भारत की धरती पर इतने विशाल स्तर पर श्री रामार्चा महायज्ञ का आयोजन होने जा रहा है. अयोध्या धाम एक ऐतिहासिक और भव्य आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है. कल से 14 अक्टूबर 2025 तक अयोध्या में श्रीरामहर्षण मैथिली सख्य पीठ धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट एवं श्रीराम हर्षणम चारुशीला मंदिर, जानकी घाट द्वारा एक भव्य राम महायज्ञ, रामार्चा पूजन एवं राम नाम जप अनुष्ठान का आयोजन किया जाने वाला है. महायज्ञ में विशेष रूप से 151 श्रीमद्भागवत महापुराण पारायण भी होगा, जिसके लिए देशभर से 151 विद्वान अयोध्या आएंगे. वृन्दावन के विख्यात संत मालूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र दास जी महाराज अपने मुखारबिंद से राम नगरी में श्रीमद्भागवत की कथा सुनाएंगे. संत समाज का दिव्य संगम होगा वहीं वृंदावन से स्वामी बिहारी दास जी महाराज भक्तमाल जी की कथा का अमृतपान कराएंगे. राम नगरी में इस दौरान संत समाज का दिव्य संगम होगा, जहां देश के महान महापुरुष अपनी वाणी से भक्तों को लाभान्वित करेंगे. योग गुरु बाबा रामदेव सहित अनेक प्रतिष्ठित संत और महापुरुष इस आयोजन में आने वाले हैं. यही नहीं देश के राजनीतिक जगत के दिग्गज राज नेताओं का भी इस अनुष्ठान में आगमन होगा. आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रण भेजा गया है. यूपी के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ 8 या 9 अक्टूबर को इस अनुष्ठान में शामिल होंगे, जिसकी पुष्टि जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री वल्लभाचार्य महाराज ने की है. वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आगमन 11 अक्टूबर को होगा. भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ से सीएम विष्णु देव सहाय भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे. हिंदू परंपरा की प्राचीन से आधुनिक यात्रा पर मंथन प्रतिदिन संत सम्मेलन (शाम 5 से 8 बजे तक) आयोजित होगा, जिसमें सनातन धर्म के विस्तार, अयोध्या धाम के विकास और हिंदू परंपरा की प्राचीन से आधुनिक यात्रा पर विशेष मंथन होगा. अयोध्या में यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म का महाकुंभ सिद्ध होगा. पहली बार भारत में इस स्तर का संत-समागम, राम भक्तों का महासंग्रह और राजनीतिक-धार्मिक महापुरुषों का संगम होने जा रहा है.

विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप: कियारा रोड्रिग्ज ने चौथी बार जीता लंबी कूद में स्वर्ण

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भारतीय एथलीट निमिशा चौथे स्थान पर रहीं नई दिल्ली कियारा रोड्रिग्ज ने शनिवार को यहां जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में जारी विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में लगातार चौथी बार महिलाओं की लंबी कूद टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक और चैंपियनशिप रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।  कियारा रोड्रिग्ज ने अपने पहले प्रयास में 6.29 मीटर और दूसरे प्रयास में कोई अंक नहीं हासिल करने के बाद चार छलांगें पार कर लीं। हंगरी की पेट्रा लुटेरान ने 5.98 मीटर के साथ रजत और डेनमार्क की ब्योर्क नोएरेमार्क ने अपने पांचवें प्रयास में 5.84 मीटर की छलांग लगाते हुए कांस्य पदक हासिल किया। भारत की निमिशा सुरेश चक्कुंगलपरम्बिल चौथे स्थान पर रहीं, जिन्होंने तीसरे दौर में 5.74 मीटर की छलांग के साथ एशियाई रिकॉर्ड बनाया था।  निमिषा को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के दो मौके मिले, लेकिन वह फ़ाउल और 5.45 मीटर के प्रयास में हार गईं। दुर्भाग्य से, भारतीय खिलाड़ी पोडियम से बाहर हो गईं क्योंकि वह अपने आखिरी दो प्रयासों में बेहतर छलांग नहीं लगा पाईं। निमिषा, दयावंती (महिला डिस्कस थ्रो एफ64) के अलावा सात पुरुष एथलीट – दिलीप महादु गावित (400 मीटर टी47), हैनी (डिस्कस थ्रो F37), सागर थायत (डिस्कस थ्रो एफ44), राहुल (ऊंची कूद टी63), पुष्पेंद्र सिंह (भाला फेंक एफ44), अजीत सिंह यादव (भाला फेंक एफ46) और सचिन सरजेराव खिलियारी (गोला फेंक एफ46) एक स्थान से पोडियम से चूक गए। सोमवार को 100 मीटर टी-47 में स्वर्ण पदक जीतने वाली कियारा रोड्रिग्ज यहां तिहरा पदक जीतने की कोशिश में हैं। उन्होंने शुक्रवार शाम को हीट में 13 साल पुराना 200 मीटर टी-47 विश्व रिकॉर्ड तोड़ा और चार जंप भी पार कर लीं। अब उन्हें रविवार को सेमीफाइनल और फाइनल में भाग लेना है। निमिषा खुश हैं कि उन्होंने घरेलू मैदान पर प्रतिस्पर्धा करते हुए एशियाई रिकॉर्ड फिर से बनाया। शनिवार को दो और चैंपियनशिप रिकॉर्ड फिर से बने। माइकल ब्रैनिगन (अमेरिका) ने पुरुषों की 1500 मीटर टी-20 और ईरान के अली बाज़ियारशूरिजेह ने पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही नई दिल्ली 2025 में 27 विश्व रिकॉर्ड बनने के साथ ही नए मीट रिकॉर्ड की संख्या 87 हो गई। पदक तालिका में शीर्ष पर कोई बदलाव नहीं हुआ। ब्राजील 12 स्वर्ण, 18 रजत और 7 कांस्य पदकों के साथ शीर्ष पर बना हुआ है। चीन (9 स्वर्ण, 18 रजत, 13 कांस्य) दूसरे पर है। भारत (6-5-4), पोलैंड (8-2-5) के बाद चौथे स्थान पर है।  

‘शक्ति’ का कहर: तेज रफ्तार 100 KM/H, इन राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा

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नई दिल्ली  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अरब सागर में बने चक्रवात ‘शक्ति’ (Cyclone Shakhti) को लेकर महाराष्ट्र और गुजरात में भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में उथल-पुथल की चेतावनी जारी की है। यह इस वर्ष के मॉनसून के बाद के मौसम का पहला चक्रवात होगा, जिसकी रफ्तार फिलहाल 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच चुकी है और यह तेजी से पश्चिम-दक्षिण पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। IMD की चेतावनी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने आपदा प्रबंधन दलों को सक्रिय कर दिया है। समुद्री तटवर्ती जिलों में संभावित निकासी और राहत व्यवस्था की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी है। चक्रवात ‘शक्ति’ की मौजूदा स्थिति IMD के अनुसार, ‘शक्ति’ अब गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) में बदल चुका है। शनिवार दोपहर 12 बजे तक यह गुजरात के द्वारका से लगभग 420 किलोमीटर दूर अरब सागर में केंद्रित था। तूफान 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। सुबह 8:30 बजे तक यह तूफान 22.0° उत्तर अक्षांश और 64.5° पूर्व देशांतर पर दर्ज किया गया, जो द्वारका से 470 किमी पश्चिम में, नलिया से 470 किमी पश्चिम-दक्षिणपश्चिम में, पाकिस्तान के कराची से 420 किमी दक्षिणपश्चिम में और ओमान के मसीरा द्वीप से 600 किमी पूर्वोत्तर में स्थित था। IMD के मुताबिक, यह प्रणाली 5 अक्टूबर तक अरब सागर के उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य हिस्से में पहुंच जाएगी और 6 अक्टूबर से दिशा बदलकर पूर्वोत्तर की ओर मुड़ेगी, जिसके बाद इसके धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है। मछुआरों के लिए चेतावनी IMD ने गुजरात और उत्तर महाराष्ट्र के तटीय इलाकों के साथ-साथ पाकिस्तान के समुद्री तटों पर रविवार तक समुद्र की स्थिति बहुत उथल-पुथल भरी रहने की चेतावनी दी है। मछुआरों को मंगलवार (8 अक्टूबर) तक उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और मध्य अरब सागर के किसी भी हिस्से में न जाने की सख्त सलाह दी गई है। अरब सागर में चक्रवातों का इतिहास हाल के वर्षों में अरब सागर में बने कुछ प्रमुख तूफानों में ‘ताउते’ (2021) और ‘बिपरजॉय’ (2023) शामिल हैं। आमतौर पर अरब सागर में बंगाल की खाड़ी की तुलना में कम चक्रवात बनते हैं, लेकिन समुद्र के बढ़ते तापमान के चलते इनकी संख्या में हाल के वर्षों में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही है। क्यों रखा गया नाम शक्ति? ‘शक्ति’ नाम का चयन क्षेत्रीय चक्रवात नामकरण प्रणाली (Regional Cyclone Naming System) के तहत हुआ है। इस प्रणाली में 13 देश शामिल हैं, जिनमें भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, ओमान, मालदीव, म्यांमार और थाईलैंड प्रमुख हैं। इन देशों की सूची में नाम क्रमवार उपयोग किए जाते हैं। ‘Shakhti’ नाम श्रीलंका द्वारा सुझाया गया था।  

सीएम योगी की मॉनीटरिंग से प्रदेश में मामले के निस्तारण में आया खासा सुधार

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सबसे अधिक राजस्व मामले निस्तारित कर लखनऊ अव्वल, जनपदीय न्यायालयों में जौनपुर ने मारी बाजी      राजस्व वादों के मामलों के तेजी से निस्तारण के सीएम योगी के निर्देशों का दिख रहा असर      सीएम योगी की मॉनीटरिंग से प्रदेश में मामले के निस्तारण में आया खासा सुधार     – कुल राजस्व मामले के निस्तारण में प्रयागराज दूसरे, शाहजहांपुर तीसरे और जाैनपुर चौथे स्थान पर     – जनपद स्तरीय न्यायालयाें में राजस्व मामलों के निस्तारण में जौनपुर पहले, लखीमपुर खीरी दूसरे और बस्ती तीसरे स्थान पर      – पिछले एक साल से जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व वादों के निस्तारण में जौनपुर टॉप फाइव में     लखनऊ प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग का असर साफ नजर आ रहा है। सीएम योगी खुद हर माह जिलावार मामलों की समीक्षा भी करते रहते हैं। योगी सरकार की विशेष पहल के तहत तेजी से मामलों के निपटारे की रणनीति को अपनाया गया, जिससे राजस्व विवादों के मामलों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश भर में राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी देखी गयी है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) द्वारा सितंबर माह की जारी रिपोर्ट में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक राजधानी में मामलों को निस्तारित किया गया है जबकि जनपद स्तरीय न्यायालय में राजस्व के मामले निपटाने में एक बार फिर जौनपुर ने बाजी मारी है। बता दें कि जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व वादों के निस्तारण में पिछले एक साल से जौनपुर टॉप फाइल जिलों में बना हुआ है।    राजधानी में सबसे अधिक कुल 21,296 मामले निस्तारित किये गये  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व विवादों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उनकी इस पहल का उद्देश्य न केवल जनता को त्वरित न्याय दिलाना है, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा देना है। इसी के तहत प्रदेश के जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी पूरी तत्परता से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। राजस्व परिषद की आरसीसीएमएस की सितंबर माह की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में पूरे प्रदेश में कुल 3,88,145 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। लखनऊ जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में 21,296 मामले निस्तारित किये गये, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। इसके बाद प्रयागराज में कुल 11,396 मामलों को निस्तारित कर पूरे प्रदेश में दूसरा, शाहजहांपुर 9,075 मामलों को निस्तारित कर तीसरे स्थान पर है। इसी तरह जाैनपुर ने 8,856 मामले निस्तारित कर चौथा और गोरखपुर ने 8,448 मामलों का निस्तारण कर पांचवां स्थान प्राप्त किया है।     जनपद स्तरीय न्यायालयाें में जौनपुर ने मारी बाजी, सबसे अधिक 704 मामले किये निस्तारित  जौनपुर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार राजस्व मामलों को निस्तारित किया जा रहा है। बोर्ड ऑफ रेवन्यू की सितंबर माह की राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक निस्तारण से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के प्रति माह निस्तारण के मानक 250 के सापेक्ष 704 मामलों का निस्तारण किया है। इसका रेश्यो 281.60 प्रतिशत है। इसी के साथ जनपदीय न्यायायल में राजस्व मामलों के निस्तारण में प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है जबकि मानक 300 के सापेक्ष 415 मामलों का निस्तारण कर दूसरे स्थान पर लखीमपुर खीरी और मानक 300 के सापेक्ष 412 मामले निस्तारित कर तीसरे स्थान पर बस्ती है। इसी तरह सितंबर में फतेहपुर के जिलाधिकारी न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के मुकाबले 79 मामलों का निस्तारण कर 263.33 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की, जो की प्रदेश भर में सबसे अधिक है और फतेहपुर प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। वहीं जौनपुर के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 77 मामले निस्तारित किये गये। वहीं कुशीनगर के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 67 मामले निस्तारित किये गये। इसी तरह जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये मामलों में जाैनपुर दूसरे और कुशीनगर तीसरे स्थान पर है।     भू राजस्व संबंधित मामलों के निस्तारण में भी जौनपुर अव्वल  इसी प्रकार अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व जौनपुर निर्धारित मानक 50 के सापेक्ष कुल 251 वादों का निस्तारण कर प्रदेश में प्रथम स्थान पर हैं। वहीं अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व गाजीपुर कुल 30 वादों का निस्तारण कर दूसरे स्थान पर हैं तथा अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व मीरजापुर कुल 24 वादों का निस्तारण कर तीसरे स्थान पर हैं। इसके साथ ही अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ने 50 के मानक के मुकाबले 21 मामलों का निस्तारण कर तीसरे स्थान पर है।    

रायपुर में साहसिक सराफा लूट, व्यापारी के हाथ-पैर बांधकर 86 किलो चांदी चोरी

रायपुर राजधानी में अपराधियों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए सराफा व्यापारी से करीब 86 किलो चांदी के आभूषण लूट लिए। घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के सदर बाजार इलाके की है। बदमाशों ने व्यापारी को गन प्वॉइंट पर बंधक बनाया, उसके हाथ-पैर बांध दिए और बेहोश करने के लिए संदिग्ध वस्तु सुंघा दी। इसके बाद ज्वेलरी शॉप से भारी मात्रा में चांदी लूटकर फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित व्यापारी का नाम राहुल गोयल है और उनकी दुकान शिवा ट्रेडर्स ज्वेलर्स के नाम से संचालित होती है। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 4 बजे अज्ञात बदमाश दुकान पर पहुंचे और हथियार के बल पर गेट खुलवाया। इसके बाद व्यापारी को बेहोश कर डकैती को अंजाम दिया। CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस वारदात की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के इलाकों में लगे CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जल्द गिरफ्तारी का दावा किया है।

चार दिन की तलाश के बाद मौत: बलूचिस्तान में गोलियों से छलनी शव की दिल दहला देने वाली घटना

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इस्लामाबाद  पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधन-समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का संकट गहराता जा रहा है। इस सप्ताह चार लापता बलूच पुरुषों की गोली से छलनी लाशें बरामद होने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। परिवारों और मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों तथा सरकारी-प्रायोजित मिलिशिया पर इन हत्याओं का आरोप लगाते हुए इसे सिस्टमैटिक हिंसा का हिस्सा बताया है। ये घटनाएं बलूचिस्तान में जारी जबरन गुमशुदगी और अतिरिक्त-न्यायिक हत्याओं की एक कड़ी हैं, जो प्रांत की स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं। स्थानीय समाचार पोर्टल द बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, तीन व्यक्तियों की पहचान कुद्दूस बलूच (पुत्र उमैद), नेक साल बलूच (पुत्र दिलवाश) और नजर अर्ज मुहम्मद (पुत्र अर्ज मुहम्मद) के रूप में हुई है। इनकी लाशें केच जिले के बुलैदा इलाके में सोराप डैम के पास मिलीं। ये तीनों पेशे से चालक थे और सीमा पार व्यापार से जुड़े हुए थे। उनके परिजनों का कहना है कि 30 सितंबर को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और तथाकथित "डेथ स्क्वॉड" नामक एक सरकारी समर्थित मिलिशिया ने उन्हें हिरासत में लिया था। अगले ही दिन, 1 अक्टूबर को, उनकी गोलियों से छलनी लाशें बरामद हुईं। समाचार पोर्टल ने इससे पहले नजर अर्ज मुहम्मद के लापता होने की रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें भी इसी मिलिशिया ने अगवा किया था। लगातार ऐसे मामलों में इन समूहों का नाम सामने आने से लोगों में यह भय गहराता जा रहा है कि राज्य ऐसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को या तो प्रोत्साहित कर रहा है या नजरअंदाज। घर से उठाकर मार दिया एक अन्य घटना में लसबेला जिले के उथल इलाके में मकरान कोस्टल हाईवे के पास लेयरी हसन होटल के समीप एक शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान जंजैब बलूच (पुत्र रोशिन) के रूप में हुई है। वह ग्वादर जिले के पसनी क्षेत्र के बाब्बर शूर इलाके का निवासी और मजदूर था। जानकारी के अनुसार, जंजैब को 28 सितंबर को उसके घर से उठा लिया गया था। बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों और उसके बाद क्षत-विक्षत शव मिलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। मानवाधिकार संगठनों की बार-बार की अपीलों के बावजूद सरकार अब तक किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई करने या जवाबदेही तय करने में विफल रही है। पीड़ित परिवार पारदर्शी जांच और न्याय की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अधिकारी लगातार चुप्पी साधे हुए हैं। व्यापक संदर्भ: बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत होने के बावजूद सबसे गरीब है। यहां तेल, कोयला, सोना, तांबा और गैस जैसे अपार संसाधन हैं, लेकिन स्थानीय बलूच आबादी को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) परियोजना के तहत ग्वादर बंदरगाह का विकास हो रहा है, लेकिन इससे बलूच लोगों में असंतोष बढ़ा है। वे आरोप लगाते हैं कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियां उनके संसाधनों का दोहन कर रही हैं, जबकि स्थानीय लोगों को दबाया जा रहा है। मानवाधिकार काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के पहले छह महीनों में प्रांत में 500 से अधिक जबरन गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए। जनवरी में 117, मई में 138 और जून में 84 लोग लापता हुए। इनमें से कई की लाशें बाद में 'स्टेज्ड एनकाउंटर' (फर्जी मुठभेड़) में मारी गईं बताकर बरामद की जाती हैं। एचआरसीबी ने इसे 'डर्टी वॉर' करार दिया है, जिसमें छात्र, कवि, शिक्षक और कार्यकर्ता निशाना बनाए जा रहे हैं। पिछले साल नवंबर में भी मूसा खेल जिले में चार लापता पुरुषों को काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) द्वारा 'स्टेज्ड एनकाउंटर' में मारा गया था, जिसके बाद बलूच याकज्हेती कमिटी ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। इस साल सितंबर में भी नौ लाशें चार दिनों में बरामद हुईं, जो सभी गुमशुदा व्यक्तियों की थीं।  

मिशन शक्ति- 5.0: स्कूल से गांव तक पहुंचा सुरक्षा संदेश, आत्मरक्षा से मिली आत्मविश्वास की सीख

मिशन शक्ति- 5.0: खतरनाक स्थिति में चुप न रहें, उठाएँ सुरक्षा के ठोस कदम मिशन शक्ति-5.0 के तहत अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह में बालिकाओं और महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू हुआ विशेष अभियान मिशन शक्ति- 5.0: स्कूल से गांव तक पहुंचा सुरक्षा संदेश, आत्मरक्षा से मिली आत्मविश्वास की सीख  योगी सरकार ने बालिकाओं को बताया, कैसे करें सरकारी और सामाजिक सहायता का सही इस्तेमाल  योगी सरकार का संकल्प, नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से ही बनेगा सुरक्षित समाज – मिशन शक्ति से मजबूत हुई महिलाओं की आवाज, सुरक्षा और स्वाभिमान बना जनआंदोलन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में मिशन शक्ति 5.0 अभियान नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को नई दिशा दे रही है। 90 दिवसीय विशेष अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग ने अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह (3-11 अक्टूबर 2025) के अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में "सेल्फ डिफेंस वर्कशॉप" का भव्य आयोजन किया। इसमें बताया गया कि यदि कोई बालिका या महिला किसी प्रतिकूल स्थिति का सामना करे, तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए और सरकारी व सामाजिक सहायता तंत्र का उपयोग करना चाहिए। प्रदेश के सभी जिला, ब्लॉक और गांव स्तर पर आयोजित कार्यशालाओं और समूह सत्रों में बालिकाओं और महिलाओं को उनकी सुरक्षा से जुड़े अधिकारों और तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। स्कूलों में आयोजित विशेष सत्रों में विशेषज्ञों ने छात्राओं को सिखाया कि विभिन्न सामाजिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों में अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें। इसके माध्यम से योगी सरकार का उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं को उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा, अधिकारों और कानूनी प्रावधानों से जोड़ना है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सुरक्षित जीवन जी सकें। योगी सरकार की इस पहल ने नारी सशक्तिकरण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। इन सत्रों में आत्मरक्षा के व्यावहारिक प्रशिक्षण, संकट की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के तरीके, हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आयोजित इन कार्यक्रमों में बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी जिज्ञासाएं साझा की। अपने अधिकारों और आत्मरक्षा की जानकारी पाकर उत्साहित छात्राओं ने कहा कि यह प्रशिक्षण उन्हें आत्मविश्वास दिया है और परिवार व समाज में सुरक्षा के प्रति सकारात्मक सोच विकसित किया है।  योगी सरकार इन कार्यक्रमों का संचालन विषय विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशिक्षकों की मौजूदगी में कर रही है। इसमें बताया गया कि यदि कोई बालिका या महिला किसी प्रतिकूल स्थिति का सामना करे, तो उसे चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए और सरकारी व सामाजिक सहायता तंत्र का उपयोग करना चाहिए। यह अभियान नारी सम्मान को मजबूत करते हुए महिलाओं को आत्मरक्षा और जागरूकता की ताकत दे रहा है, जो योगी सरकार के मिशन शक्ति 5.0 का मूल आधार है। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने कहा कि  अंतरराष्ट्रीय बालिका सप्ताह के तहत यह अभियान बालिकाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है। सेल्फ डिफेंस वर्कशॉप से जुड़ी जानकारी हर लड़की के लिए उतनी ही जरूरी है, जितनी शिक्षा। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल बालिकाओं की व्यक्तिगत सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि पूरे प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित और समावेशी माहौल के निर्माण को गति देगी।

धूमधाम से मनाया गया पोषण माह, गोविंदपुरा के पुरुषों ने हासिल किया पोषण चैंपियन का खिताब

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गोविंदपुरा में धूमधाम से मना पोषण माह, पुरुष बने पोषण चैंपियन अन्नप्राशन, जन्मदिन का जश्न और क्विज़ प्रतियोगिता ने बढ़ाया उत्साह भोपाल गोविंदपुरा परियोजना के इंद्रपुरी सेक्टर के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 549 में सोमवार को 8वें पोषण माह की गतिविधियों का रंगारंग आयोजन किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम की थीम रही – “बच्चों की पोषण देखभाल करने वाले पुरुषों को पोषण चैंपियन से सम्मानित करना और उनकी कहानियां साझा करना।” कार्यक्रम का शुभारंभ परियोजना अधिकारी श्रीमती शुभा श्रीवास्तव ने दीप प्रज्वलन और सरस्वती पूजन से किया। इसके बाद माहौल और भी जीवंत हुआ जब सामाजिक संस्थाओं से जुड़ीं श्रीमती किरण शर्मा (सकारात्मक सोच संस्था), श्रीमती रेणु (आरंभ संस्था) और श्रीमती रेखा श्रीधर (मीत संस्था) ने मंच से महिलाओं और पुरुषों को संबोधित किया। उन्होंने परिवार और समाज में पोषण संबंधी जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि “पोषण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं, पुरुष भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाएं।” सेक्टर सुपरवाइजर श्रीमती अनामिका पटेल ने उपस्थित लोगों को पोषण माह की रूपरेखा और उद्देश्य समझाए। वहीं श्रीमती नीति सक्सेना ने पुरुष प्रतिभागियों के लिए क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया। सवालों के जवाब देने में पुरुषों का उत्साह देखते ही बनता था। थीम के अनुरूप कार्यक्रम में अन्नप्राशन और जन्मदिन समारोह भी रखा गया। खास बात यह रही कि बच्चों के जन्मदिन का केक टीएचआर (टेक होम राशन) से तैयार किया गया था, जिसे काटकर पूरे उल्लास के साथ बच्चों का जन्मदिन मनाया गया। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पोषण व्यंजन प्रदर्शनी भी सजाई। प्रतिभागियों ने इन पौष्टिक व्यंजनों का स्वाद लिया और उनकी महत्ता समझी। अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत स्वल्पाहार के साथ किया गया। पूरे कार्यक्रम में माहौल उत्साह और जागरूकता से सराबोर रहा।

मंत्री जेपीएस राठौर बोले – किसी को भी बरेली का माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी

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बरेली में अब अमन-चैन, विपक्षी नेता सिर्फ माहौल बिगाड़ना चाहते हैंः जेपीएस राठौर  विपक्षी सांसदों और नेताओं के बरेली दौरे को लेकर योगी सरकार के मंत्री जेपीएस राठौर का बड़ा बयान मंत्री जेपीएस राठौर बोले – किसी को भी बरेली का माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी बरेली जाकर माहौल खराब कर राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं विपक्षी सांसद और नेताः राठौर   कहाः ‘सर तन से जुदा’ के नारे और हिंसा के बाद पुलिस ने लिया उचित एक्शन  पुलिस ने ससमय कार्रवाई कर उपद्रव फैलाने की साजिश नाकाम कीः मंत्री   लखनऊ योगी सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जेपीएस राठौर ने कहा है कि बरेली में अब पूरी तरह अमन और चैन है, पुलिस ने जिस तरह से ससमय कार्रवाई की, उसने उपद्रव फैलाने की हर साजिश को विफल कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जो भी विपक्षी सांसद या नेता बरेली जाने की बात कर रहे हैं, वे सिर्फ माहौल खराब करने की साजिश के तहत ऐसा कर रहे हैं। सरकार किसी को भी बरेली का अमन चैन बिगाड़ने की इजाजत नहीं देगी। उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के सांसद और नेता अब बरेली जाकर उन्हीं उपद्रवियों के लिए आंसू बहाने की तैयारी में हैं, जिन्होंने पुलिस और निर्दोष लोगों की जान लेने की कोशिश की। उन्होंने सवाल किया कि वे किसके लिए बरेली जा रहे हैं, उन लोगों के लिए जिन्होंने कानून तोड़ा, पत्थर फेंके और पुलिस पर हमला किया? उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी निर्दोष को नुकसान नहीं हुआ, केवल कानून तोड़ने वालों को जेल भेजा गया है।  कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा राठौर ने कहा कि विपक्षी दलों को लगा था कि बरेली आग में झुलसेगा और उन्हें राजनीतिक फायदा मिलेगा, लेकिन प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों की लाशों पर राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं, अब जनता उन्हें अच्छी तरह पहचान चुकी है। जो पहले संविधान की दुहाई देते थे, वही आज संविधान तोड़ने और हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीति साफ है,“कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और शांति भंग करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।” उन्होंने कहा कि बरेली के लोग शांति और सद्भाव के साथ अपने घरों में अमन चैन से हैं और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी बाहरी ताकत उस माहौल को खराब न कर सके। वर्तमान में बरेली में स्थिति पूरी तरह सामान्य है। बाजार खुले हैं, यातायात सामान्य है और पुलिस सतर्कता के साथ निगरानी कर रही है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में पूरा माहौल पूर्णतः शांत हो जाएगा। पुलिस ने ससमय और संयमित एक्शन लिया राज्य मंत्री राठौर ने बताया कि जिस तरह से कुछ लोगों ने रातों-रात माहौल को भड़काने की कोशिश की, उसमें मुख्य रूप से तौकीर रजा और उनके समर्थकों का नाम सामने आया है। उन्होंने कहा कि लगातार प्रशासन उनसे बातचीत करता रहा, लेकिन रात करीब 11 बजे एक लेटर वायरल किया गया, जिसमें कहा गया कि आंदोलन नहीं होगा, जुलूस नहीं निकलेगा। फिर देर रात डेढ़ बजे दावा किया गया कि पत्र फर्जी है। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आ गए और ‘आई लव मुहम्मद’ के साथ ‘सर तन से जुदा’ जैसे भड़काऊ नारे लगाने लगे। राठौर ने कहा कि इसके बाद उपद्रवियों ने ईंट-पत्थर और पेट्रोल बम चलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए स्थिति को तुरंत नियंत्रण में ले लिया। पुलिस ने ससमय और संयमित एक्शन लिया, जिससे किसी निर्दोष को नुकसान नहीं हुआ। अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो हालात और बिगड़ सकते थे। पुलिस ने उपद्रवियों को रोका, निर्दोषों की जान बचाई उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों में ऐसे ही अराजक तत्व शहरों को जलाने का काम करते थे। 2010 में बरेली में महीनों कर्फ्यू जलता रहा था, लेकिन आज हमारी सरकार में ऐसी अराजकता को सहन नहीं किया जाएगा। जो ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। योगी सरकार में शांति और कानून सर्वोपरि है। जेपीएस राठौर ने बताया कि उपद्रवियों के पास से पेट्रोल बम, असलहा और विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह सब उन्होंने पहले से घरों में जमा कर रखा था, ताकि पुलिस और निर्दोष लोगों पर हमला किया जा सके, लेकिन पुलिस ने न केवल उपद्रवियों को रोका बल्कि आम नागरिकों की जान भी बचाई।

भारतीय रिसर्चर प्रभावित, ट्रंप सरकार की H-1B पॉलिसी के खिलाफ कई संगठनों ने खोला मोर्चा

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वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई H-1B योजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सैन फ्रांसिस्को की एक अदालत में यूनियनों, नियोक्ताओं और धार्मिक संगठनों के एक गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के आदेश को चुनौती दी है। यह मुकदमा राष्ट्रपति के उस आदेश को रद्द करने की मांग करता है, जिसमें H-1B आवेदन पर एकमुश्त 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख) की फीस लगाने का प्रावधान किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह कदम गैरकानूनी है और H-1B कार्यक्रम में अभूतपूर्व बदलाव है। दलील दी गई है कि राष्ट्रपति के पास स्वतंत्र रूप से राजस्व जुटाने या कर लगाने का अधिकार नहीं है और न ही वह यह तय कर सकते हैं कि इन निधियों का उपयोग कैसे होगा। मुकदमे में फीनिक्स डो नाम की एक भारतीय नागरिक का उदाहरण दिया गया है, जो उत्तरी कैलिफोर्निया में रहकर पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। उनकी संस्था ने ‘कैप-एक्ज़ेम्प्ट’ H-1B याचिका दायर की थी, लेकिन नई फीस नीति के कारण यह प्रक्रिया रोक दी गई है। याचिका के अनुसार, “फीनिक्स डो का शोध उम्र, डाइबिटीज और दुर्लभ आनुवांशिक बीमारियों से जुड़ी दृष्टि-हानि के कारणों को पहचानने और इलाज के नए तरीके विकसित करने पर केंद्रित है।” मुकदमे में कहा गया है कि डो विश्वविद्यालय की पहली पोस्टडॉक्टोरल स्कॉलर हैं, जिन पर संस्था का भविष्य का शोध और फंडिंग निर्भर करता है। लेकिन नई नीति के चलते उनका आवेदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। याचिका में आगे कहा गया, “वह अस्थिरता और तनाव से जूझ रही हैं, जिससे उनका PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) बढ़ गया है। यदि राहत नहीं मिली तो उन्हें चार महीने में अमेरिका छोड़ना पड़ेगा, जिससे उनके करियर और निजी जीवन दोनों को गंभीर नुकसान होगा।” मुकदमे में कहा गया है कि नई नीति से अमेरिका के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को झटका लगेगा। फीनिक्स डो की विदाई से उनका शोधकार्य बाधित होगा, लैब का चल रहा काम रुकेगा, भविष्य की फंडिंग प्रभावित होगी और संभवतः दृष्टि रोगों के उपचार की दिशा में हो रही प्रगति भी धीमी पड़ जाएगी। इस मामले को यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स यूनियन, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स, जस्टिस एक्शन सेंटर, डेमोक्रेसी फॉरवर्ड फाउंडेशन, ग्लोबल नर्स फोर्स और कई धार्मिक संगठनों ने मिलकर दायर किया है। इन समूहों का कहना है कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग, यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) और स्टेट डिपार्टमेंट ने यह आदेश बिना उचित प्रक्रिया के लागू किया और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विचार नहीं किया। याचिका में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक शुल्क वसूलना नवाचार को रोक देगा और अमेरिका के वैज्ञानिक तथा शैक्षणिक क्षेत्र को नुकसान पहुंचाएगा।