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सिंगरौली में बच्चे की अनोखी शिकायत, कहा – कुरकुरे नहीं दिए, मां ने बांधा और पीटा

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सिंगरौली मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो सुनने में जितनी मजेदार है, उतनी ही दिल को छूने वाली भी। एक छोटे से बच्चे ने अपनी मां और बहन की शिकायत करने के लिए पुलिस की इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल कर दिया, क्योंकि उन्होंने उसे 20 रुपये के कुरकुरे मांगने पर रस्सी से बांधकर पिटाई कर दी। बच्चे की शिकायत का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। क्या है पूरा माजरा? यह मजेदार वाकया सिंगरौली के खुटार चौकी के अंतर्गत आने वाले चितरवई कला गांव का है। मासूम बच्चे ने जब अपनी मां से 20 रुपये मांगे ताकि वह अपने पसंदीदा कुरकुरे खरीद सके, तो मां और बहन को गुस्सा आ गया। गुस्से में दोनों ने बच्चे को रस्सी से बांध दिया और उसकी पिटाई कर दी। लेकिन इस छोटे से शेर ने हार नहीं मानी और सीधे पुलिस को फोन ठोक दिया। फोन पर बच्चे की शिकायत सुनकर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। बच्चा फोन पर रोने लगा, तो पुलिस ने बड़े ही प्यार से उसे ढांढस बंधाया और जल्दी पहुंचने का वादा किया। पुलिस का दिल जीतने वाला रिस्पॉन्स शिकायत मिलते ही डायल 112 के पुलिसकर्मी उमेश विश्वकर्मा तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चे और उसकी मां को बुलाकर दोनों की काउंसलिंग की। उमेश ने मां को समझाया कि बच्चे को मारना-पीटना सही नहीं है और उसे प्यार से समझाना चाहिए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। पुलिसकर्मी ने अपने दिलदार अंदाज में बच्चे के लिए कुरकुरे खरीदकर उसे दे दिए। बस, फिर क्या था, बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लौट आई और यह प्यारा सा किस्सा कैमरे में कैद होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर छाया वीडियो इस घटना का वीडियो, जिसमें बच्चा अपनी शिकायत दर्ज कराता है और पुलिसकर्मी उसे प्यार से समझाते हैं अब इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो को देखकर हंस भी रहे हैं और पुलिस की संवेदनशीलता की तारीफ भी कर रहे हैं। कोई कह रहा है, 'ये बच्चा तो बड़ा होकर कुछ बड़ा करेगा।' तो कोई पुलिस के इस प्यारे अंदाज का कायल हो गया।

अब बिना सिग्नल भी चलेगी बात! BSNL ने शुरू की वॉयस ओवर वाई-फाई (VoWiFi) सेवा

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भोपाल  अगर आप बीएसएनएल सिम का इस्तेमाल करते हैं और आपके घर या ऑफिस में नेटवर्क ठीक से काम नहीं करता तो अब आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. बीएसएनएल ने अपनी Voice over Wi-Fi यानी VoWiFi सर्विस शुरू कर दी है. इसकी शुरुआत वेस्ट और साउथ ज़ोन से की गई है. इसका मतलब है कि अब यूज़र्स को वाई-फाई के जरिए कॉल करने की सुविधा मिलेगी, फिर चाहे मोबाइल नेटवर्ट हो या ना हो. बीएसएनएल ने इस सर्विस को खासतौर पर उन यूज़र्स के लिए लॉन्च किया है, जो किसी ऐसी जगह पर रहते हैं, जहां पर बीएसएनएल के सिग्नल्स कमजोर रहते हैं और कनेक्टिविटी ठीक से नहीं हो पाती है. अब अगर आपके पास Wi-Fi है और फोन VoWiFi सपोर्ट करता है, तो कॉलिंग आराम से हो जाएगी. आपको बता दें कि Jio और Airtel जैसी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां अपने-अपने यूज़र्स को काफी पहले से ही इस फीचर की सुविधा देती है. अब बीएसएनएल ने भी इसकी शुरुआत कर दी है. सिल्बर जुबली सेलिब्रेशन पर किया लॉन्च 2 अक्टूबर को BSNL के सिल्वर जुबली सेलिब्रेशन के मौके पर DoT सेक्रेटरी Neeraj Mittal ने VoWiFi का सॉफ्ट लॉन्च किया. इसके साथ-साथ बीएसएनएल की एक और बड़ी ख़बर है कि अब ग्राहकों को भारत के 1.65 लाख पोस्ट ऑफिस से BSNL की SIM और रिचार्ज सर्विस भी मिलेगी. इस सुविधा को शुरू करने का मकसद साफ है कि कंपनी भारतीय पोस्ट सेवा की मदद से अपनी कनेक्टिविटी को देश के गांवों-कस्बों तक भी पहुंचाना चाहती है. इसके अलावा बीएसएनएल ने हाल ही में मुंबई में भी अपनी 4G Service की शुरुआत की है. इससे पहले अगस्त के महीने में कंपनी ने दिल्ली में BSNL 4G सर्विस शुरू की थी. इसके अलावा अब सरकार द्वारा समर्थित भारत की इस टेलीकॉम कंरनी ने eSIM सर्विस भी पूरे देश में रोलआउट कर दिया है. इसके लिए बीएसएनएल ने Tata Communications के साथ पार्टनरशिप की है. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ओडिशा के Jharsuguda से BSNL की पूरी तरह देसी 4G नेटवर्क का उद्घाटन किया. ये BSNL के डिजिटल इंडिया मिशन की तरफ एक बड़ा कदम है.

उच्च शिक्षा की राह आसान: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री का छात्र ऋण अनुदान योजना

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रायपुर छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहाँ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और विकास का सबसे बड़ा माध्यम माना जाने लगा है। शिक्षा ही वह शक्ति है जो किसी भी व्यक्ति, समाज और राज्य को नई दिशा देती है। लेकिन उच्च शिक्षा तक पहुँचना हमेशा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक चुनौती रहा है। आर्थिक तंगी के कारण कई मेधावी छात्र अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस समस्या को गहराई से समझा और समाधान के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया — मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना। इस योजना ने हजारों छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह को आसान बना दिया है। अब छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लिए गए शिक्षा ऋण पर ब्याज की चिंता नहीं करनी पड़ती, क्योंकि सरकार वह बोझ अपने ऊपर ले रही है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद प्रभावित और पिछड़े क्षेत्रों के छात्र अक्सर आर्थिक कठिनाइयों के कारण तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते थे। उच्च शिक्षा तक पहुँचने में सबसे बड़ी रुकावट महँगी फीस और शिक्षा ऋण का बोझ था। इसी समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने यह योजना शुरू की।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि “शिक्षा में निवेश ही सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि शिक्षित युवा ही राज्य और राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं।” इसी सोच के तहत यह योजना लागू की गई। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 4 लाख रुपए तक का शिक्षा ऋण ब्याज मुक्त उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए छात्र के परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, जशपुर आदि नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को पूर्णत: ब्याज मुक्त ऋण मिलता है।अन्य जिलों के छात्रों को केवल 1% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। शेष ब्याज सरकार वहन करती है।बैंक द्वारा लगाए जाने वाले ब्याज की पूरी या आंशिक राशि सरकार देती है।इससे छात्रों पर सिर्फ मूलधन  चुकाने की ही बाध्यता रहती है। इस योजना में 35 तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। इनमें डिप्लोमा, स्नातक (ग्रेजुएशन), स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) और पेशेवर कोर्स सम्मिलित हैं।योजना के लिए पात्र छात्रों का छत्तीसगढ़ का निवासी होना आवश्यक है। उसकी वार्षिक पारिवारिक आय 2 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। छात्र को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में प्रवेश लेना अनिवार्य है। इस योजना के लिए राज्य के किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक / सहकारी बैंक में शिक्षा ऋण के लिए आवेदन किया जा सकता है। आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज़ (निवासी प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, प्रवेश पत्र, अंकसूची, आधार कार्ड आदि) जमा करना होता है। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के बाद छात्र को योजना का लाभ पाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन करना होता है। योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का योगदान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस योजना को बहुत ही कुशलता से धरातल पर उताराने का काम किया है। उनके नेतृत्व में इस योजना का विस्तार इस तरह से किया गया, जिससे नक्सल प्रभावित जिलों के छात्रों को विशेष लाभ मिला।इस योजना में ऑनलाइन प्रक्रिया को सरल बनाया गया ताकि छात्रों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।बजट में बढ़ोतरी करते हुए उच्च शिक्षा विभाग के बजट में इस योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया। इस योजना के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया गया है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि बैंक समय पर छात्रों को ऋण दें और ब्याज अनुदान में देरी न हो। योजना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव छत्तीसगढ़ के मुखिया के नेतृत्व में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना से गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्र उच्च शिक्षा तक पहुँच पा रहे हैं।नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी इस योजना के पहुँचने से काफ़ी उम्मीद बढ़ी है इससे शिक्षा से जुड़ने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है, जिससे नक्सलवाद से लड़ाई को नई ताक़त मिल रही है। तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा लेकर युवा नौकरी और स्वरोज़गार में आगे बढ़ रहे हैं और परिवारों पर ब्याज का बोझ घटने से वे बच्चों की शिक्षा के लिए और अधिक उत्साहित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की भावी योजनाएँ छत्तीसगढ़ सरकार इस योजना को और व्यापक बनाने की तैयारी में है। इस योजना में मिलने वाले ऋण सीमा को 4 लाख रुपए से बढ़ाकर 7 लाख रुपए तक करने पर विचार किया जा रहा है। इस योजना में नॉन-प्रोफेशनल कोर्स (जैसे BA, B.Sc, B.Com) को भी शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। डिजिटल पोर्टल पर पूरी तरह से ऑनलाइन आवेदन और स्वीकृति की सुविधा बनाई जा रही है। छात्रवृत्ति और ऋण अनुदान को जोड़कर “डबल बेनिफिट स्कीम” बनाने पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना छत्तीसगढ़ के युवाओं के सपनों को पंख देने वाली योजना है। यह न केवल छात्रों की आर्थिक समस्याएँ हल कर रही है बल्कि राज्य को ज्ञान और कौशल की शक्ति से सशक्त भी बना रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह कदम शिक्षा को लोकतांत्रिक और सुलभ बनाने की दिशा में ऐतिहासिक है। आज जब कोई भी छात्र यह महसूस करता है कि उसकी पढ़ाई सिर्फ पैसे की वजह से अधूरी नहीं रहेगी, तो यह योजना अपने उद्देश्य में सफल मानी जाती है।

लालबाग मैदान में अमित शाह ने ग्रामीण बस सेवा शुरू की और महतारी वंदन योजना की नई किस्त जारी की

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जगदलपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं। आज वह बस्तर दशहरा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जगदलपुर पहुंच चुके है। बस्तर दौरे की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की और इसके बाद स्थानीय लोगों से संवाद किया। इसके पश्चात उन्होंने मूरिया दरबार में पारंपरिक प्रतिनिधियों मांझी, चालकी और गायता से भेंट की। अब वे लालबाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेला पहुंचे हैं, जहां वे जनसमूह को संबोधित कर रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंच से ‘महतारी वंदन योजना’ की 20वीं किस्त के रूप में 606 करोड़ रुपये से अधिक की राशि राज्य की महिलाओं के खातों में बटन दबाकर ट्रांसफर की। उन्होंने कहा कि यह योजना छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। नई बस योजना की शुरुआत, 250 गांवों को जोड़ेगा मुख्यालय से इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना को हरी झंडी दिखाकर शुरू किया, जिसके तहत 250 गांवों को मुख्यालय से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा और विकास की रफ्तार तेज होगी। मां दंतेश्वरी मंदिर में किये दर्शन केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने इससे पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना से की। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद आमजनों से आत्मीय संवाद किया। अमित शाह ने जनता से सीधे संवाद कर यह संदेश दिया कि अब “बस्तर में भय नहीं, विश्वास है।” उन्होंने अपने संबोधन में इस विश्वास को 31 मार्च 2026 की उस डेडलाइन से जोड़ा, जब तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। माई दंतेश्वरी मंदिर में श्रद्धालुओं ने ‘मुंडा बजा’ गाकर किया स्वागत मंदिर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने बस्तर की पारंपरिक भक्ति धुन ‘मुंडा बजा’ गाकर गृह मंत्री का स्वागत किया। शाह ने मां दंतेश्वरी का विधिवत पूजन किया और बस्तर की लोक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद उन्होंने मूरिया दरबार में मांझी, चालकी और गायता जैसे पारंपरिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित किया।

धोखाधड़ी का मामला दर्ज, कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू पर 42 लाख की रकम में गड़बड़ी का आरोप

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जांजगीर चांपा  छत्तीसगढ़ की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। जैजैपुर से कांग्रेस विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि विधायक जब सहकारी समिति में प्रबंधक थे, तब उन्होंने किसान परिवार से करीब 42 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू और उनके सहयोगी पर थाना चांपा में धोखाधड़ी के इस प्रकरण से राजनीतिक गलियारो में हलचल है। साहू पर ये मामला उस समय का है जब वो सेवा सहकारी समिति बम्हनीडीह में प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। मामले के मुताबिक फरसवानी के राजकुमार शर्मा ने शिकायत की थी कि साल 2015 से 2020 के बीच बम्हनीडीह सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन प्रबंधक ने उसकी 50 एकड़ जमीन के नाम पर किसान क्रेडिट कार्ड लोन लेने की सलाह दी थी। जिसके चलते उन्होंने एचडीएफसी बैंक चांपा में खाता खुलवाया। उस समय शाखा प्रबंधक आरोपी बालेश्वर साहू और उसके साथी गौतम राठौर ने उनसे ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए थे। बैंक खाते से 24 लाख रुपए अपने और परिजनों के खातों में ट्रांसफर कर दी। पुलिस जांच में तथ्य सही पाए गए हैं  और बालेश्वर साहू और विक्रेता गौतम राठौर के खिलाफ धारा 420, 468, 467, 471 के तहत अपराध दर्ज किया है। हालांकि अभी आरोपी  गिरफ्त से बाहर हैं। वहीं इस कार्रवाई के बाद राजनीति गरमा गई है। 

जांच या जुगाड़? कफ सिरप मामले में सरकार की रिपोर्ट पर उठे सवाल कप

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जयपुर राजस्थान में कायसन फार्मा की कफ सिरप को लेकर सरकार की जांच रिपोर्ट ही सवालों में आ गई है। शुक्रवार को सरकार ने अपनी जांच रिपोर्ट में कंपनी के झुंझुनु, भरतपुर और जयपुर से उठाए सैंपल्स को क्लीन चिट दे दी। इसके बाद देर रात कंपनी की सभी 19 दवाओं के विरतण पर रोक लगा दी और दवाओं के मानक निर्धारण की प्रक्रिया को प्रभावित करने के मामले में औषधि नियंत्रक राजाराम शर्मा को निलंबित भी कर दिया। जांच रिपोर्ट में जो सैंपल चैक किए गए उनमें दवा के साल्ट तय मानकों से या तो कम थे या ज्यादा थे। जांच रिपोर्ट में क्या? जयपुर का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/148), कंपनी कायसन फार्मा:  इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल कंटेंट नहीं था(इनके होने से दवा एलकोहाल में बदल जाती है)। डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 13.11 एमजी ही पाई गई। भरतपुर का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/147), कंपनी कायसन फार्मा: इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल नहीं था। डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 12.98 एमजी ही पाई गई। झुंझुनू का सैंपल- बैच नंबर (KL-25/250), कंपनी कायसन फार्मा: इस सैंपल में प्रोपलीन ग्लायकॉल , एथेलीन ग्लायकॉल, डायथेलीन ग्लायकॉल नहीं था। इसके अलावा डेक्ट्रोमेथारफान हाईड्रोब्रोमाइड की 13.5 एमजी मात्रा होनी चाहिए थी लेकिन जांच में यह भी 13.22 एमजी ही पाई गई।  इसी तरह कई सैंपल्स में साॅल्ट की मात्रा तय मानकों से अधिक पाई गई। हालांकि इसके लिए जांच कमेटी ने स्टैंडर्ड प्रोसिजर के तहत दवा में तय मानकों से 95 से 105 प्रतिशत के सॉल्ट विरियेशन को कंज्यूमेबल माना है। विवाद बढ़ने के बाद सरकार इस मामले में बैकफुट पर आई। शाम को मंत्री ने अपने बयान में कंपनी को क्लीन चिट दी और रात होते-होते कहा कि कंपनी के सैंपल्स की फिर से जांच करवा लेंगे। सिरप को पीने से अब तक करीब 35 बच्चे गंभीर रूप से बीमार हो चुके हैं। वहीं 4 बच्चों की मौत भी हो चुकी है। जिनमें दो भरतपुर और दो बच्चे सीकर से हैं। हालांकि सरकार ने इस मामले में यह कहकर पल्ला झाड लिया कि इन बच्चों को दवा सरकारी अस्पताल से नहीं लिखी गई। बड़ी संख्या में प्रेसक्रिप्शन होती है कफ सिरप की खरीद पिछले दिनों राजस्थान में आईसीएमआर की एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि राजस्थान में बड़ी संख्या में लोग बिना चिकित्सकीय प्रेसक्रिप्शन के ही कफ सिरप खरीदते हैं। इसके लिए जयपुर में कफ सिरप खरीदने वालों का नाम पता दर्ज करने के आदेश भी औषधि नियंत्रक की तरफ से जारी किए गए थे। इसमें कफ सिरप की खरीद करने पर फोन नम्बर एड्रेस देना अनिवार्य करने की बात कही गई थी। हानिकारक दवाओं पर अंकित होगी चेतावनी ऐसी दवाएं जो बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकती हैं, उन दवाओं पर अब इस संबंध में आवश्यक जानकारी भी अंकित करवाने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही, ऐसी दवाएं जो सीओपीडी जैसी बीमारी में उपचार के लिए काम आती हैं, उनकी खरीद एवं आपूर्ति को भी नियंत्रित किया जाएगा। सामान्य परिस्थितियों में खांसी के उपचार के लिए वैकल्पिक दवाओं का उपयोग किया जाएगा।

खाली पेट पानी पीने की आदत बदल सकती है आपकी सेहत

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क्या आपको पता सुबह उठ कर खाली पेट पानी पीने से कीतने फायदें होते हैं। आईए हम आपको बताते है। अगर आप भी इस आदत का पालन करते हैं तो आपको बता दें कि सुबह खाली पेट पानी पीने से कई तरह की बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है। खाली पेट पानी पीने से शरीर की सारी गंदगी साफ हो जाती है और खून साफ होता है। वैसे तो एक शख्स को सुबह उठकर लगभग 4 से 5 गिलास पानी पीना चाहिए लेकिन आप इस आदत को डालने की सोच रहे हैं तो शुरुआत एक या दो गिलास से कर सकते हैं। -सुबह उठकर पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे खून साफ हो जाता है। खून साफ हो जाने से त्वचा पर भी चमक आती है। -सुबह उठकर पानी पीने से नई कोशिकाओं का निर्माण होता है। इसके अलावा मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं। -सुबह उठकर पानी पीने से मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। अगर आप वजन घटाना चाह रहे हैं तो जितना जल्दी हो सके सुबह उठकर खाली पेट पानी पीना शुरू कर दीजिए। -जो लोग सुबह उठकर खाली पेट पानी पीते हैं उन्हें कब्ज की शिकायत नहीं होती। सुबह पेट साफ होने की वजह से ऐसे लोग जो कुछ भी खाते हैं उसका उनके शरीर को पूरा फायदा मिलता है। कब्ज की वजह से होने वाले अन्य रोग भी नहीं होते। -सुबह उठकर पानी पीने से गले, मासिक धर्म, आंखों, पेशाब और किडनी संबंधी कई समस्याएं शरीर से दूर रहती हैं।  

अंधेरों के बाद रोशनी: रिहा चक्रबोर्ती ने पासपोर्ट पाकर लिखा नया अध्याय

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नई दिल्ली बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्टर सुशांत सिंह राजपूत मामले में हाल ही में दस्तावेज वापस करने की इजाजत देते हुए एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है. दरअसल, एक्टर के निधन के बाद जांच के चलते रिया चक्रवर्ती का पासपोर्ट जमा कर लिया था. वहीं, अब 5 साल बाद एक्ट्रेस को उनका पासपोर्ट वापस मिल गया है. जिसके बाद उन्होंने पोस्ट शेयर करते हुए एक भावुक पोस्ट लिखा है. बता दें कि रिया चक्रवर्ती ने अपने इंस्टाग्राम पर अपने कठिन वक्त और ‘अनगिनत संघर्षों’ को याद करते हुए कहा कि इस दौरान ‘धैर्य’ ही उनका एकमात्र पासपोर्ट था. एक्ट्रेस ने अपने पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा- ‘पिछले पांच वर्षों से धैर्य ही मेरा एकमात्र पासपोर्ट था. अनगिनत संघर्ष. अनंत आशा. आज, मेरे हाथ में फिर से मेरा पासपोर्ट है. अध्याय 2 के लिए तैयार!’ साल 2020 जून में एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की 14 जून, 2020 को अपने बांद्रा स्थित अपार्टमेंट में हुई मौत के बाद रिया चक्रवर्ती सुर्खियों में थीं. उनके और सुशांत के बीच अफेयर की खबरें थीं. 8 सितंबर, 2020 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने उन्हें सुशांत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में हिरासत में ले लिया था. हालांकि, उन्हें एनसीबी के पास अपना पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत मिल गई थी. वर्कफ्रंट की बात करें, तो रिया चक्रवर्ती को आखिरी बार रूमी जाफरी की फिल्म ‘चेहरे’ में नजर आई थीं. इस फिल्म में रिया चक्रवर्ती के अलावा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन , इमरान हाशमी और अन्नू कपूर जैसे एक्टर्स भी थे.

हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं नियम पर ब्रेक, इंदौर कलेक्टर ने कहा – जागरूकता से बनेगा असर

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इंदौर क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट पहनकर गाड़ियों में पेट्रोल डलवाना जरूरी नहीं है, बल्कि हेलमेट को लेकर जागरूकता ज्यादा जरूरी है. इसी तरह के एक आदेश के बाद क्लीन सिटी इंदौर में अब हेलमेट लगाना स्वैच्छिक कर दिया गया है. बीते 1 अगस्त को इंदौर जिला प्रशासन ने दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना जरूरी किया था. इस आदेश को वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने जारी रखने से इनकार कर दिया है. पूर्व कलेक्टर ने अनिवार्य किया था हेलमेट इंदौर में आए दिन होने वाले टू व्हीलर गाड़ियों के एक्सीडेंट में लोगों की सर पर चोट लगने से मौत एक बड़ी वजह है. लिहाजा पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह ने पिछले महीने एक आदेश निकालकर शहर में दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट लगाना अनिवार्य किया था. इतना ही नहीं बिना हेलमेट के पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं देने के भी आदेश दिए थे. नए कलेक्टर ने स्वैच्छिक किया हेलमेट लगाना उस दौरान इसी आदेश के उल्लंघन के कारण कई पेट्रोल पंप को सील भी किया गया था. 1 अक्टूबर को फिर इस आदेश को सुचारू रखने के लिए नया आदेश किया जाना था, लेकिन वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा ने उसे सुचारू नहीं रखते हुए शहर में हेलमेट लगाना एक बार फिर स्वैच्छिक कर दिया है. इतना ही नहीं अब बिना हेलमेट के भी वाहन चालक पेट्रोल पंपों पर अपने वाहनों में पेट्रोल डलवा पाएंगे. हालांकि नए कलेक्टर के इस फैसले से शहर के उन वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है जिन्हें ट्रैफिक पुलिस द्वारा हेलमेट के नाम पर लगातार परेशान किया जा रहा था. पेट्रोल डलवाने के लिए भी पहनना पड़ता था हेलमेट वहीं, वाहनों में पेट्रोल डलवाने के लिए भी लोगों को हेलमेट लेकर पेट्रोल पंप पर पहुंचना पड़ता था. इधर इस आदेश को सुचारू नहीं रखने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि अधिकांश वाहन चालक पेट्रोल डलवाते समय ही हेलमेट लगा रहे थे. जबकि वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने वाले लोगों की संख्या में कोई खास वृद्धि नहीं हुई थी. इधर इस आदेश का स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी विरोध किया था. मध्य प्रदेश में सड़क हादसों में इंदौर अव्वल लोगों को हेलमेट न लगाना पड़े इसको लेकर एक जनहित याचिका भी कोर्ट में प्रस्तुत की थी, लेकिन कोर्ट से भी हेलमेट लगाने संबंधी फैसले पर लोगों को राहत नहीं मिल पाई थी. अब जबकि खुद जिला प्रशासन ने ही अपने आदेश को सुचारू नहीं रखा तो पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट के पेट्रोल दिए जाने की पुरानी व्यवस्था फिर शुरू हो गई है. एक्सीडेंट के मामले में इंदौर पहले नंबर पर है, जहां पिछले साल ही करीब 6075 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं जो तुलनात्मक रूप से भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर से सर्वाधिक थी. इन दुर्घटनाओं में अधिकांश वाहन चालक टू व्हीलर थे, जो हेलमेट नहीं लगाए थे.  

JNU दुर्गा पूजा विवाद: ABVP संगठित होकर निकाली हिंदू स्वाभिमान नारी शक्ति रैली

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नई दिल्ली  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छात्रों द्वारा हिंदू स्वाभिमान नारी शक्ति यात्रा निकाली गई. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र-छात्राओं को बराक ढाबा से गंगा ढाबा तक यह स्वाभिमान यात्रा निकालनी थी, लेकिन उन्होंने जेएनयू कैंपस के मुख्य द्वार तक यह यात्रा निकाली. एबीवीपी के छात्र-छात्राओं का कहना है कि जब तक वामपंथी छात्र-छात्राओं, जिन्होंने दो अक्टूबर को मां दुर्गा की पूजा के बाद निकाली गई शोभायात्रा में चप्पल दिखाई थी, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती तब तक प्रदर्शन करेंगे. साथ ही छात्र कैंपस बंद करने की भी मांग कर रहे हैं. गौरतलब है कि JNU में ABVP ने दो अक्टूबर को दुर्गा विसर्जन शोभयात्रा निकाली थी. ABVP ने आरोप लगाया कि इस दौरान वामपंथी छात्रों ने उन पर पथराव किया और चप्पल दिखाए हैं. ABVP ने आरोप लगाया इस दौरान कई छात्र घायल भी हो गए थे. इस मामले को लेकर छात्र-छात्राओं ने जमकर नारेबाजी की. दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा एबीवीपी ने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र समूहों ने जेएनयू में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा पर हमला किया, जबकि वामपंथी संगठनों ने एबीवीपी पर राजनीतिक प्रचार के लिए रावण दहन कार्यक्रम के जरिए धर्म का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. इस मुद्दे पर जेएनयू प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. एबीवीपी ने एक बयान में कहा कि आइसा, एसएफआई और डीएसएफ समेत वामपंथी समूहों ने शाम करीब सात बजे साबरमती टी-पॉइंट के पास विसर्जन शोभायात्रा पर हमला किया. एबीवीपी ने दावा किया कि पथराव और दुर्व्यवहार में कई छात्र और छात्राएं घायल हो गए. धार्मिक आयोजन पर हमला एबीवीपी जेएनयू अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन पर हमला नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की उत्सव परंपरा और छात्रों की आस्था पर सीधा हमला है. एबीवीपी किसी भी कीमत पर इस तरह की आक्रामकता को बर्दाश्त नहीं करेगी. एबीवीपी के जेएनयू मंत्री प्रवीण पीयूष ने आरोप लगाया कि दुर्गा विसर्जन जैसे पवित्र अनुष्ठान के दौरान पथराव और यहां तक कि छात्राओं पर हमला करना निंदनीय और शर्मनाक है. उन्होंने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की. आइसा ने आरोपों को किया खारिज हालांकि, वाम दलों से संबद्ध ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और एबीवीपी पर राजनीतिक प्रचार के लिए धर्म का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. आइसा ने एक बयान में कहा कि एबीवीपी रावण दहन का आयोजन कर रही थी, जिसमें जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम को रावण के रूप में चित्रित किया गया था. दोनों पर सीएए विरोधी प्रदर्शनों और दिल्ली दंगों की कथित साजिश के संबंध में मुकदमा चल रहा है. इस्लामोफोबिया का प्रदर्शन आइसा ने कहा कि यह इस्लामोफोबिया का एक नृशंस प्रदर्शन है, जिसमें राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण किया जा रहा है. आइसा ने एबीवीपी से पूछा कि उसने नाथूराम गोडसे, गुरमीत राम रहीम या 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोपी नेताओं को (रावण के रूप में चित्रित करने के लिए) क्यों नहीं चुना.