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अहमदाबाद में टीम इंडिया का जलवा, वेस्टइंडीज पर 286 रनों की लीड के साथ बनाई पकड़

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अहमदाबाद  भारत-वेस्टइंडीज के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हो रहा है. आज (4 अक्टूबर) इस मुकाबले का तीसरा दिन है. वेस्टइंडीज की टीम अपनी दूसरी पारी में बैटिंग कर रही है. वेस्टइंडीज का स्कोर 20 रन को पार कर चुका है और उसके 2 विकेट गिरे है. मुकाबले में भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 5 विकेट पर 448 रनों के स्कोर पर घोषित कर दी. भारतीय टीम को पहली पारी के आधार पर 286 रनों की लीड मिली. वहीं वेस्टइंडीज की पहली पारी 162 रनों पर सिमट गई थी. वेस्टइंडीज की दूसरी पारी का स्कोरकार्ड बल्लेबाज विकेट रन जॉन कैम्पबेल कैच साई सुदर्शन, बोल्ड रवींद्र जडेजा 14 तेजनारायण चंद्रपॉल कैच नीतीश कुमार रेड्डी, बोल्ड मोहम्मद सिराज 8 एलिक अथानाज नाबाद   ब्रैंडन किंग नाबाद   विकेट पतन: 12-1 (तेजनारायण चंद्रपॉल, 7.2 ओवर) भारत की पहली पारी: राहुल-जुरेल-जडेजा के शतक भारत की पहली पारी में केएल राहुल, ध्रुव जुरेल और रवींद्र जडेजा ने शतकीय योगदान दिया. सलामी बल्लेबाज केएल राहुल ने 197 गेंदों का सामना करते हुए 100 रन बनाए, जिसमें 12 चौके शामिल रहे. ये राहुल का टेस्ट में 11वां शतक रहा. वहीं घर पर ये उनका दूसरा टेस्ट शतक था. ध्रुव जुरेल ने 15 चौके और तीन छक्के की मदद से 210 गेंदों पर 125 रन बनाए. जबकि जडेजा ने 6 चौके और 5 छक्के की मदद से 176 गेंदों पर नाबाद 104 रन बनाए. जुरेल के टेस्ट करियर का ये पहला और जडेजा के टेस्ट करियर छठा शतक रहा. वेस्टइंडीज की ओर से रोस्टन चेज ने दो विकेट चटकाए.

दिल्ली की टीम \’पृथ्वीराज योद्धास\’ में रणदीप हुड्डा की एंट्री, आर्चरी लीग को मिलेगा नया सितारा

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मुंबई,  बॉलीवुड स्टार रणदीप हुड्डा अपनी पत्नी एवं पूर्व राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज़ लिन लैशराम के साथ अब खेल की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। रणदीप और लिन ने दूरदर्शी लीडर डॉ. विकास गर्ग के साथ मिलकर दिल्ली की टीम 'पृथ्वीराज योद्धास' के को-ओनर्स बनने की घोषणा की है। यह टीम पहली बार आयोजित होने जा रही आर्चरी प्रीमियर लीग (एपीएल ) में हिस्सा लेगी, जो 02 अक्टूबर से 12 अक्टूबर 2025 तक यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित की जाएगी। लिन के लिए यह कदम सिर्फ एक नया बिज़नस नहीं, बल्कि उस खेल में वापसी है जिसने उनके बचपन को दिशा दी। अपने पिता से प्रेरित होकर, जो मणिपुर आर्चरी एसोसिएशन के अध्यक्ष थे, लिन ने दस साल की उम्र में तीरंदाज़ी शुरू की और अपनी पहली सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने टाटा आर्चरी अकादमी में ट्रेनिंग ली, कई मेडल जीते और 1998 में जूनियर नेशनल चैंपियन बनीं। चोट के कारण उन्होंने खेल से दूरी बना ली, लेकिन तीरंदाज़ी के प्रति उनका प्यार कभी खत्म नहीं हुआ। रणदीप हुड्डा ने कहा, तीरंदाज़ी हमेशा से लिन के जीवन का हिस्सा रही है, और अब उन्हें इस खेल में फिर से जुड़ते देखना बेहद सुखद है। हमारा मकसद इन युवा खिलाड़ियों को सपोर्ट करना और भारत में आर्चरी को और करीब लाना है। इस तरह की लीग्स से नए टैलेंट को इंटरनेशनल खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलता है, जिससे भारत का टैलेंट पूल और मज़बूत होता है और हम अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं जीत सकते हैं।" लिन लैशराम ने अपने भाव साझा करते हुए कहा, "आर्चरी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया अनुशासन, धैर्य और दृढ़ता। भले ही मुझे प्रतिस्पर्धात्मक तीरंदाज़ी छोड़नी पड़ी, लेकिन खेल के प्रति मेरा प्यार कभी खत्म नहीं हुआ। अब एक टीम ओनर के रूप में वापसी करना और युवा तीरंदाजों को प्रोत्साहित करना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। मैं चाहती हूं कि और लोग, खासकर लड़कियां, धनुष और बाण उठाएं और इस खेल का आनंद लें।"  

युवाओं के लिए ऐतिहासिक दिन: पीएम मोदी आज करेंगे करोड़ों की योजनाओं की शुरुआत

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नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज 62,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न युवा-केंद्रित पहलों की शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ)के मुताबिक यह युवा विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है, जिससे शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को निर्णायक बढ़ावा मिलेगा। पीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 60,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ केंद्र प्रायोजित योजना पीएम-सेतु (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार परिवर्तन) की शुरुआत करेंगे। इस योजना में 1,000 सरकारी आईटीआई को ‘हब-एंड-स्पोक' मॉडल में उन्नत करने की परिकल्पना की गई है, जिसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल हैं। ‘हब एंड स्पोक' मॉडल एक वितरण प्रणाली है जो साइकिल के पहिये की तरह काम करती है, जिसमें एक ‘हब' (केंद्र) होता है जो सभी ‘स्पोक' (छोटे, सहायक स्थानों) को आपस में जोड़ता है। प्रत्येक ‘हब' औसतन चार ‘स्पोक' से जुड़ा होगा, जिससे उन्नत बुनियादी ढांचे, आधुनिक उद्यमों, डिजिटल शिक्षण प्रणालियों और इनक्यूबेशन सुविधाओं से सुसज्जित संकुलों का निर्माण होगा। पीएमओ के मुताबिक प्रमुख उद्योग साझेदार इन संकुलों का प्रबंधन करेंगे और बाजार की मांग के अनुरूप परिणाम-आधारित कौशल सुनिश्चित करेंगे। हब में नवाचार केंद्र, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण की सुविधाएं, उत्पादन इकाइयां और प्लेसमेंट सेवाएं भी होंगी, जबकि प्रवक्ता पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इसमें कहा गया है, ‘‘सामूहिक रूप से, पीएम-सेतु भारत के आईटीआई पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से परिभाषित करेगा, इसे सरकारी स्वामित्व वाला लेकिन उद्योग-प्रबंधित बनाएगा, जिसमें विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक से वैश्विक सह-वित्तपोषण सहायता भी होगी।'' बयान के मुताबिक योजना के कार्यान्वयन के पहले चरण में बिहार के पटना और दरभंगा में आईटीआई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 400 नवोदय विद्यालयों और 200 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्थापित 1,200 व्यावसायिक कौशल प्रयोगशालाओं का भी उद्घाटन करेंगे। बयान के मुताबिक ये प्रयोगशालाएं दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों के छात्रों सहित अन्य को आईटी, ऑटोमोटिव, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे 12 उच्च मांग वाले क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पाठ्यक्रम के अनुरूप, इस परियोजना में उद्योग-प्रासंगिक शिक्षा प्रदान करने और रोजगार के लिए प्रारंभिक आधार तैयार करने के लिए 1,200 व्यावसायिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करना शामिल है। बयान में कहा गया है कि कार्यक्रम का विशेष जोर बिहार में परिवर्तनकारी परियोजनाओं पर होगा, जो राज्य की समृद्ध विरासत और युवा जनसांख्यिकी को प्रतिबिंबित करेगा। मोदी बिहार की संशोधित ‘‘मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना'' की भी शुरुआत करेंगे, जिसके तहत हर साल लगभग पांच लाख स्नातकों को दो साल तक 1,000 रुपये का मासिक भत्ता मिलेगा, साथ ही मुफ्त कौशल प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा। वह नए सिरे से तैयार की गई ‘बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड' योजना की भी शुरुआत करेंगे, जिसके तहत चार लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के तहत 3.92 लाख से अधिक छात्र पहले ही 7,880 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण प्राप्त कर चुके हैं। बयान के मुताबिक राज्य में युवा सशक्तीकरण को और मजबूत करने के लिए, मोदी द्वारा बिहार युवा आयोग का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा, जो 18 से 45 वर्ष की आयु के लोगों के लिए एक वैधानिक आयोग है। इसका उद्देश्य राज्य की युवा आबादी की क्षमता का उपयोग करना है। बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बिहार केंद्र और राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)सरकारों की कई विकास और कल्याणकारी पहलों के केंद्र में रहा है। बिहार की अन्य परियोजना जिसका प्रधानमंत्री उद्घाटन करेंगे, वह जन नायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल तैयार करने के लिए उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना है।  

सोनाक्षी का नया चैलेंज – फिल्म ‘जटाधारा’ में निभाएंगी विलेन का किरदार

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मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा फिल्म 'जटाधारा' में खलनायिका का किरदार निभाती नजर आयेंगी। सोनाक्षी सिन्हा अपने आगामी द्विभाषी (हिंदी-तेलुगु) प्रोजेक्ट 'जटाधारा' से दर्शकों को चौंकाने वाली हैं।ज़ी स्टूडियोज़ और प्रेरणा अरोड़ा की इस बहुप्रतीक्षित पौराणिक स्पेक्टेकल फिल्म से तेलुगु सिनेमा में कदम रखने जा रहीं सोनाक्षी सिन्हा बड़े पर्दे पर पहली बार खलनायिका के रूप में नज़र आनेवाली हैं। हालांकि 'धन पिशाचिनी' के रूप में उनका यह किरदार सिर्फ नकारात्मक ही नहीं, बल्कि बेहद शक्तिशाली और दमदार भी है। गौरतलब है कि जहां अधिकतर कलाकार अपने सकारात्मक किरदार को लेकर काफी सजग रहते हैं, वहीं सोनाक्षी का यह कदम न सिर्फ साहसिक है, बल्कि उन्हें नए मुकाम पर ले जाने की काबिलियत को भी दर्शाता है। सोनाक्षी सिन्हा ने जिस तरफ अपना कदम बढ़ाया है, वो बॉलीवुड में उनकी बहुमुखी प्रतिभा को और निखारने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। गौरतलब है कि 'जटाधारा' की कहानी काले जादू की रहस्यमयी दुनिया की झांकी पेश करती है, जहाँ तंत्र-मंत्र, गुप्त अनुष्ठान और प्राचीन श्राप आस्था और भय की सीमाओं को दर्शाया गया है। हाल ही में दुर्गा पूजा पर रिलीज़ हुआ सोनाक्षी का गाना “धना पिशाची” (हिंदी और तेलुगु में) पहले ही फिल्म के रहस्य और रोमांच को और बढ़ा चुका है। इस फिल्म में सोनाक्षी के अपोज़िट सुधीर बाबू नज़र आएंगे।फिल्म 'जटाधारा' 07 नवंबर को हिंदी और तेलुगु, दोनों भाषाओं में सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।  

परफ्यूम लगाने के ये स्पॉट्स, जो रखेंगे आपकी खुशबू लंबे समय तक

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असल राज यह है कि आप परफ्यूम कहां लगाते हैं। शरीर के कुछ ऐसे हिस्से होते हैं जो ज्यादा गर्म रहते हैं या जिनमें ब्लड सर्कुलेशन ज्यादा होता है। इन हिस्सों से निकलने वाली गर्मी परफ्यूम की खुशबू को लंबे समय तक टिकाए रखती है। तो आइए जानते हैं कि शरीर के कौन-कौन से हिस्से पर परफ्यूम लगाने से आप पूरे दिन महकते रह सकते हैं। कॉलर बोन कॉलर बोन यानी गले और कंधे का हिस्सा परफ्यूम लगाने के लिए सबसे बेहतरीन जगह मानी जाती है। यहां परफ्यूम को फैलने और सैटल होने के लिए ज्यादा जगह मिलती है। खासकर तब जब आप स्ट्रैपी टॉप या डीप नेकलाइन वाले कपड़े पहनती हैं। हवा के लगातार संपर्क में रहने की वजह से खुशबू ज्यादा देर तक टिकी रहती है। बाल बाल खुशबू फैलाने का सबसे असरदार जरिया हैं। अगर आप चाहें तो थोड़ा-सा परफ्यूम सीधे बालों पर छिड़क सकती हैं या फिर अपने हेयर ब्रश पर परफ्यूम स्प्रे करके उससे बालों को संवार सकती हैं। इस तरह जब भी बाल हवा में लहराएंगे, आपकी खुशबू हर तरफ फैलेगी और लंबे समय तक बनी रहेगी। कानों के पीछे की नसें कानों के पीछे की जगह परफ्यूम लगाने का पुराना और कारगर तरीका है। यहां की नसें त्वचा के काफी करीब होती हैं और गर्मी जल्दी फैलाती हैं। यही वजह है कि यहां परफ्यूम लगाने से इसकी खुशबू देर तक बनी रहती है। यही कारण है कि कई महिलाएं पार्टी या इवेंट से पहले कानों के पीछे परफ्यूम लगाना पसंद करती हैं। कोहनी के अंदर क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कोहनी के अंदर पसीना जल्दी आता है? यही गर्माहट आपके परफ्यूम को असरदार बनाती है। जब आप इस हिस्से पर परफ्यूम लगाती हैं तो खुशबू पूरे दिन धीरे-धीरे फैलती रहती है। घुटनों के पीछे बिलकुल कोहनी की तरह घुटनों का पिछला हिस्सा भी परफ्यूम के लिए सही जगह माना जाता है। यहां से शरीर की गर्मी बाहर निकलती रहती है, जिससे खुशबू टिके रहने में मदद मिलती है। खासकर अगर आप स्कर्ट या ड्रेसेस पहनती हैं तो यह तरीका बेहद कारगर साबित होता है। गले के पास गले के पास परफ्यूम लगाना भी एक स्मार्ट ट्रिक है। अगर आप बाहर कहीं लंबे समय के लिए जा रही हैं और परफ्यूम की बोतल कैरी नहीं कर सकतीं, तो कॉटन बड पर परफ्यूम छिड़ककर साथ रख लें। जरूरत पड़ने पर हल्का-सा टचअप गले के पास करें और फिर से महक उठें। कलाई कलाई पर परफ्यूम लगाने का सबसे आम तरीका है। लेकिन ध्यान रखें, परफ्यूम स्प्रे करने के बाद कलाईयों को आपस में न रगड़ें। ऐसा करने से खुशबू जल्दी उड़ जाती है। बस हल्का स्प्रे करें और उसे सूखने दें। नाभि नाभि भी शरीर का गर्म हिस्सा है और यहां परफ्यूम लगाने से खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है। कई मॉडल्स और अभिनेत्रियां इस ट्रिक का इस्तेमाल करती हैं। खासकर गर्मियों में यह तरीका बहुत फायदेमंद है।  

5-6 अक्टूबर 2025 की शरद पूर्णिमा: जानें चांदनी रात में खीर बनाने की परंपरा और विज्ञान

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हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। इसके अलावा आपने देखा होगा कि इस दिन चांदनी रात में खीर रखी जाती है लेकिन क्या आपने सोचा है कि इसके पीछे की वजह क्या है? वहीं इस साल लोगों में बड़ा सवाल है कि शरद पूर्णिमा 2025 कब है 5 अक्टूबर या 6 अक्टूबर कब है? क्योंकि आपने देखा कि नवरात्रि में भी व्रत पूरे 10 दिन रखे गए थे और 11वें दिन विजयदशमी मनाई गई थी। इसलिए शरद पूर्णिमा को लेकर भी कंफ्यूजन है। शास्त्रों के अनुसार तिथि और नक्षत्र मिलान से सही मुहूर्त का निर्धारण किया जाता है। इस दिन व्रत, जागरण और लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। आइए जान लेते हैं कि इस बार शरद पूर्णिमा कब है और चांदनी रात में खीर रखने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है? कब है शरद पूर्णिमा? इस बार शरद पूर्णिमा कब है ये जान लेते हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी जो 7 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। शरद पूर्णिमा के दिन रात की पूजा का महत्व होता है और चंद्र देवता की पूजा होती है तो इस वजह से शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर 2025, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। चांदनी रात में खीर रखने का धार्मिक कारण मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व बरसता है और उसी वजह से खीर को रातभर चांदनी में रखने की परंपरा है। कहा जाता है कि चांदनी से युक्त खीर को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का प्रसाद माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चांद की पूजा की जाती है जिन्हें शीतलता और शांति का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में रखी खीर में औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसे खाने से स्किन संबंधी बीमारी दूर होती है और कई तरह के रोगों से छुटकारा मिलता है। ये माना जाता है कि शास्त्रों में वर्णन है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अमृत वर्षा करता है। उस अमृत से युक्त खीर का सेवन करने से तन-मन शुद्ध और रोगमुक्त होता है। माना जाता है कि यह खीर धन, सुख और मोक्ष प्रदान करती है। ये खीर शरीर को शुद्ध करती है और मन को शांत करती है। बता दें कि इस खीर को उसी रात नहीं बल्कि अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। चांदनी रात में रखी खीर खाने का वैज्ञानिक कारण आपने शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में रखी खीर खाने का धार्मिक कारण तो जान लिया है अब वैज्ञानिक कारण भी जान लेते हैं। बता दें कि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत निकट होता है और उसकी अल्ट्रावायलेट किरणे सीधे धरती पर पड़ती हैं। वो किरणें खीर में पड़ती है तो वो पौष्टिक और सेहत के लिए बहुत लाभकारी बन जाती है। ऐसा कहा जाता है कि रात भर चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को खाने से पाचन तंत्र ठीक रहता है और शरीर को ठंडक मिलती है। इसके अलावा ये खीर सुपाच्य होती है जो पित्त दोष और मानसिक तनाव से राहत देती है। कम लोगों को पता होगा कि चंद्रमा की रोशनी कैल्शियम को सक्रिय करती है, जिससे यह खीर और अधिक पौष्टिक बनती है।

ड्रैगन के वॉटर बम का इलाज — इंडिया का मेगा-डैम, सुरक्षा व जलप्रबंधन दोनों का समाधान

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नई दिल्ली हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों के बीच, जहां नदियां जीवन का आधार हैं, वहां एक नया विवाद खड़ा हो गया है. भारत सरकार एक विशालकाय डैम बनाने की योजना बना रही है, जो चीन के पानी के हथियार से बचाव के लिए है. लेकिन अरुणाचल प्रदेश के आदिवासी लोग इसे अपनी मौत का पैगाम मान रहे हैं. ऊंचे पहाड़ों से घिरे एक फुटबॉल मैदान पर आदिवासियों ने जोरदार भाषण दिए और विरोध जताया. यह डैम भारत-चीन के पानी पर चल रहे झगड़े का नया मोड़ है. हिमालय दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला है, जहां से ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदियां निकलती हैं. ये नदियां भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को पानी, बिजली और खेती के लिए जीवन रेखा हैं. चीन तिब्बत में ऊपरी हिस्से में एक रिकॉर्ड तोड़ने वाला डैम बना रहा है. भारत को डर है कि चीन इस डैम को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है. यानी, अचानक बहुत सारा पानी छोड़कर बाढ़ ला सकता है, जिसे वाटर बम कहा जा रहा है. इस वजह से भारत अब जवाबी कदम उठा रहा है.  चीन इस समय एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट बांध से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट पर 167 अरब डॉलर खर्च होंगे। यह बांध तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर बन रहा है। इस नदी को भारत में सियांग कहते हैं। चीन का कहना है कि इस बांध के बनने से चीन में बिजली की समस्या काफी बेहतर होगी। वहीं इस बांध के कई खतरे भी सामने आए हैं। इससे बड़ा खतरा भारत को भी है। इसे 'वॉटर बम' भी कहा जा रहा है क्योंकि यहां से छोड़ा गया पानी भारत के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। लेकिन अब भारत ने भी चीन के इस बांध का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। भारत भी एक बहुत बड़ा बांध बनाने की योजना बना रहा है। यह बांध चीन के 'वॉटर बम' का जवाब देने के लिए है। यह बांध भारत और चीन के बीच हिमालय के पानी को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा में भारत का नया कदम है। भारत का कहना है कि यह नया बांध चीन के एक बड़े बांध का मुकाबला कर सकता है। भारत ने चुनी कौन सी जगह? प्रस्तावित नक्शों से पता चलता है कि भारत अरुणाचल प्रदेश में एक विशाल जलाशय बनाने पर विचार कर रहा है। यह जलाशय चार मिलियन ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल जितना बड़ा होगा। यह जलाशय 280 मीटर (918 फुट) ऊंचे बांध के पीछे बनेगा। क्या है भारत का प्लान? भारत का बांध 9.2 बिलियन क्यूबिक मीटर का एक विशाल जलाशय बनाएगा। इससे 11,200 से 11,600 मेगावाट पनबिजली पैदा की जा सकती है। यह इसे देश का सबसे शक्तिशाली बांध बना देगा। इससे भारत के कोयले पर निर्भर बिजली ग्रिड से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। लेकिन, नेशनल हाइड्रोपावर कॉर्पोरेशन (NHPC) के एक वरिष्ठ इंजीनियर के मुताबिक भारत की प्राथमिकता बिजली पैदा करना नहीं है। NHPC वह केंद्रीय एजेंसी है जिसे बांध बनाने का काम मिला है। इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर चीन अपने बांध को हथियार बनाना चाहता है और इसे वॉटर बम की तरह इस्तेमाल करना चाहता है तो भारत का यह बांध जल सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण का काम करेगा। चीन के प्रोजेक्ट का भारत में विरोध चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। भारत इस दावे को पूरी तरह से खारिज करता है। बीजिंग का कहना है कि इस परियोजना का नीचे की ओर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। नीचे की ओर से मतलब है कि वहां रहने वाले लोगों पर इसका कोई असर नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इन इलाकों में रहने वाले कुछ लोग चीन के इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। यह इलाका भारत में आता है। चीन की योजना में 5 पनबिजली स्टेशन शामिल हैं। ये स्टेशन चीन के विशाल थ्री गॉर्जेस बांध से तीन गुना ज्यादा बिजली पैदा कर सकते हैं। थ्री गॉर्जेस बांध दुनिया का सबसे बड़ा बिजली घर है। क्यों कहा जा रहा 'वॉटर बम'? चीन जिस नदी पर बांध बना रहा है, वह ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी है। भारतीय अधिकारियों को डर है कि चीन अपने बांध का इस्तेमाल कर पानी पर कंट्रोल कर सकता है। इससे चीन खास तौर से भारतीय इलाके में घातक सूखा पैदा कर सकता है या नीचे भारत की ओर ढेर सारा पानी छोड़ सकता है। पानी का यह बहाव का असर किसी बम की तरह होगा। इस कारण इसे 'वॉटर बम' कहा जा रहा है। हालांकि चीन इस बात को खारिज करता है। चीन का कहना है कि याक्सिया पनबिजली परियोजना को 'वॉटर बम' बताने वाली बातें बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण हैं।  

धनतेरस 2025 की उलझन खत्म! जानें किस दिन मनाएं और क्या है पूजन मुहूर्त

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दशहरा का त्योहार निकल चुका है और अब जल्द ही 5 दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत हो जाएगी। दीपावली का त्योहार धनतेरस से शुरू होता है और 5 दिनों तक चलता है। धनतेरस के दिन लोग भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजन करते हैं। इस दिन सोना चांदी और नए बर्तन की खरीदी करना भी शुभ माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अगर हम खरीदी करके घर में लाते हैं तो घर में सुख समृद्धि धन और बरकत बनी रहती है। चलिए जान लेते हैं कि 18 या 19 अक्टूबर धनतेरस कब मनाई जाने वाली है और मुहूर्त क्या है। कब मनाई जाएगी धनतेरस  पंचांग के मुताबिक कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 पर होगी। यह 19 अक्टूबर को दोपहर 1:51 पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के मुताबिक ये पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूजन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो अगर प्रदोष काल में पूजन करना है तो 7:16 से लेकर 8:20 तक का समय शुभ है। इस समय आप भगवान धन्वंतरि माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजन अर्चन कर सकते हैं। कैसे करें पूजन?     अगर आप धनतेरस पर पूजा करना चाहते हैं तो इसकी विधि बहुत ही सरल है।     सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।     आप को घर के मंदिर की अच्छी तरह से साफ सफाई करनी है।     एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा स्थापित करें।     अब घी का दीपक जलाएं और भगवान धनवंतरी को चंदन का तिलक लगाएं।     सबसे पहले आपको भगवान गणेश की पूजन करनी है उसके बाद सभी देवी देवताओं की पूजन करें।     कुबेर जी के मंत्र और धन्वंतरि स्त्रोत का पाठ करें।     अब आपको भगवान की सच्ची श्रद्धा के साथ आरती करनी है।     सभी देवी देवताओं को मिठाई और फल का भोग लगाएं।     इस भोग को सभी में प्रसाद के रूप में वितरित जरूर करें।     पूजन के पश्चात दान देना ना भूलें। अपने सामर्थ्य के मुताबिक दान देने का प्रतिफल आपको जरूर मिलेगा। कब करें खरीदारी अगर आप धनतेरस पर खरीदारी करना चाहते हैं तो दोपहर 12:01 से 12:48 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। लाभ और उन्नति का चौघड़िया दोपहर 1:51 से 3:18 तक है। प्रदोष कल शाम 6:11 से रात 8:41 तक है। इस दौरान आप आसानी से खरीदारी कर सकते हैं। धनतेरस का महत्व क्या है? धनतेरस पर भगवान धनवंतरी माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजन का विशेष महत्व है। यह तीनों ही सुख समृद्धि धन और बरकत के देवता है। किसी के साथ इस दिन की गई खरीदारी धन में 13 गुना वृद्धि करती है। भगवान धन्वंतरि के आशीर्वाद से आरोग्य और स्वास्थ्य मिलता है। माता लक्ष्मी की पूजन करने से धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

नवरात्र पर इंदौरवासियों की धूम, 9 दिनों में 9 हजार से ज्यादा वाहनों की खरीद

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 इंदौर  नवरात्र के नौ दिनों में वाहन बाजार ने नई गति पकड़ी। प्रदेश भर में जहां कुल 67,507 वाहन बिके, वहीं अकेले इंदौर में 9,344 वाहनों की बिक्री दर्ज हुई। यह आंकड़ा प्रदेश की कुल बिक्री का करीब 14 प्रतिशत है, जो बताता है कि इंदौर वाहन खरीददारों का सबसे बड़ा केंद्र रहा। प्रदेश में बिके वाहनों का हर सातवां वाहन इंदौर में बिका। नौ दिनों में इंदौर में बिक गए 9344 वाहन नवरात्र के पहले दिन ही जीएसटी दरों में कटौती ने खरीददारों को बड़ी बचत दी। इसलिए नवरात्र में वाहनों की बिक्री खूब हुई। वाहन बिक्री में दोपहिया का दबदबा सबसे ज्यादा रहा। प्रदेश में 50,894 दोपहिया वाहन बिके, जिनमें से 6,025 इंदौर में खरीदे गए। इसी तरह प्रदेश में 12,097 कारों की बिक्री हुई, जिनमें से 2,562 कारें इंदौरवासियों ने खरीदीं। नवरात्र में ईवी वाहनों का क्रेज भी इस बार साफ दिखाई दिया। नवरात्र के दौरान पूरे प्रदेश में 6,806 इलेक्ट्रिक वाहन बिके, जबकि अकेले इंदौर में 1,023 ईवी की बिक्री हुई। इंदौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर में उल्लास छाया रहा वाहन विक्रेताओं का कहना है कि नवरात्र के पहले दिन यानी 21 सितंबर से जीएसटी दरों में मिली छूट ने ग्राहकों की खरीदारी को और बढ़ावा दिया। शो रूम पर सुबह से रात तक ग्राहकों की भीड़ लगी रही और बुकिंग में रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिला। दशहरा पर 700 कार बिकने का अनुमान नवरात्र के बाद दशहरा पर इंदौर में ऑटोमोबाइल सेक्टर में उल्लास छाया रहा। सुबह से लेकर देर रात तक शुभ मुहूर्त वाहनों की खरीदी होती रही। अनुमान के अनुसार दशहरे पर 700 कार और तीन हजार करीब दो पहिया वाहन बिकने का अनुमान है।

‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा: टाटा कर्नाटक में बनाएगा एयरबस का आधुनिक H125 हेलिकॉप्टर

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नई दिल्ली एयरबस हेलीकॉप्टर्स और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने मिलकर भारत का पहला निजी हेलीकॉप्टर असेंबली प्लांट लगाने का ऐलान किया है. यह प्लांट कर्नाटक के वेमागल में बनेगा. यहां मेड इन इंडिया H125 हेलीकॉप्टर बनेंगे. पहला हेलीकॉप्टर 2027 की शुरुआत में तैयार हो जाएगा. यह न सिर्फ भारत के लिए बल्कि दक्षिण एशिया के देशों के लिए निर्यात भी होगा. यह कदम भारत की हवाई यात्रा और रक्षा को मजबूत बनाएगा. H125: बहुमुखी हेलीकॉप्टर, हिमालय के लिए भी तैयार H125 दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर है. यह एयरबस की इक्यूरुइल फैमिली का हिस्सा है, जिसने दुनिया भर में 4 करोड़ घंटे से ज्यादा उड़ान भरी है. यह हेलीकॉप्टर ऊंचाई और गर्मी वाले इलाकों में आसानी से काम करता है. इसे कई कामों के लिए बदला जा सकता है, जैसे आग बुझाना, कानून व्यवस्था, बचाव, एयर एम्बुलेंस, पैसेंजर ट्रांसपोर्ट और हवाई सर्वे. यह हेलीकॉप्टर माउंट एवरेस्ट पर उतर चुका है, जो दिखाता है कि यह ऊंचे पहाड़ों पर कितना कुशल है. भारत के हिमालयी इलाकों के लिए यह परफेक्ट है, जहां सैनिकों को लाइट मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर की जरूरत है. सिविल और पैरा-पब्लिक क्षेत्रों में भी यह नई संभावनाएं खोलेगा, जैसे इमरजेंसी मेडिकल फ्लाइट्स, आपदा राहत, पर्यटन और कानून प्रवर्तन. सैन्य संस्करण H125M: आत्मनिर्भर भारत का सपना इस प्लांट से सिविल के साथ-साथ सैन्य संस्करण H125M भी बनेगा. इसमें भारतीय कंपोनेंट्स और टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल होगा. यह चीता और चेतक हेलीकॉप्टर्स का बेहतरीन उत्तराधिकारी होगा, जो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ एयरबस की 60 साल पुरानी साझेदारी से बने थे. ये हेलीकॉप्टर भारतीय सेना ने गर्व से इस्तेमाल किए हैं. H125M से आत्मनिर्भर भारत योजना को बल मिलेगा. यह रक्षा क्षेत्र में हेलीकॉप्टर बनाने की क्षमता बढ़ाएगा और मौजूदा सिस्टम को मजबूत करेगा. पहली निजी कंपनी बनेगी हेलीकॉप्टर बनाने वाली टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) भारत की पहली निजी कंपनी होगी जो हेलीकॉप्टर बनाएगी. कंपनी H125 के मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, असेंबली, इंटीग्रेशन और फाइनल फ्लाइट टेस्ट करेगी. इसमें स्ट्रक्चरल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स और कंपोनेंट्स को जोड़ना शामिल है. TASL के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर सुकर्ण सिंह ने कहा कि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को भारत की पहली निजी कंपनी बनने पर गर्व है जो हेलीकॉप्टर बनाएगी. यह सिविल और रक्षा दोनों जरूरतों को पूरा करेगा. यह एयरबस के साथ हमारी दूसरी FAL है, जो भारत के लिए हमारी साझेदारी को मजबूत करती है. टाटा एयरोस्पेस सेक्टर में मजबूत है और फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट के साथ-साथ हेलीकॉप्टर भी बना सकता है. यह प्लांट गुजरात के वडोदरा में C295 मिलिट्री एयरक्राफ्ट प्लांट के बाद एयरबस का भारत में दूसरा असेंबली प्लांट है. इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, मेंटेनेंस, डिजाइन, डिजिटल और ह्यूमन कैपिटल डेवलपमेंट का पूरा इकोसिस्टम बनेगा. एयरबस-टाटा साझेदारी: भारत के लिए नया अध्याय एयरबस इंडिया और साउथ एशिया के प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर जर्गेन वेस्टरमीयर ने कहा कि भारत हेलीकॉप्टरों के लिए आदर्श देश है. मेड इन इंडिया हेलीकॉप्टर इस बाजार को बढ़ाएगा और राष्ट्र निर्माण का जरूरी टूल बनेगा. हमारे भरोसेमंद पार्टनर टाटा के साथ यह नया अध्याय जोड़कर हमें खुशी हो रही है. एयरबस भारत से हर साल 1.4 अरब डॉलर से ज्यादा के कंपोनेंट्स और सर्विसेज लेता है, जैसे एयरक्राफ्ट डोर, फ्लैप-ट्रैक बीम और हेलीकॉप्टर कैबिन स्ट्रक्चर्स. यह साझेदारी दक्षिण एशिया के रोटरक्राफ्ट मार्केट की पूरी क्षमता खोलेगी. भारत की एविएशन इंडस्ट्री को फायदा यह प्रोजेक्ट भारत की एविएशन इंडस्ट्री को तेजी से बढ़ाएगा. सिविल और रक्षा दोनों क्षेत्रों में नौकरियां बढ़ेंगी. H125 हेलीकॉप्टर आपदा राहत, पर्यटन और कानून प्रवर्तन जैसे महत्वपूर्ण कामों में मदद करेंगे. H125M से सैन्य क्षमता मजबूत होगी. यह कदम दिखाता है कि भारत अब हेलीकॉप्टर बनाने में आत्मनिर्भर बन रहा है.