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‘नो हैंडशेक पार्ट 4’: पाकिस्तान से टकराएंगी भारत की बेटियां, मैदान में दिखेगा दम

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नई दिल्ली भारत और पाक‍िस्तान के बीच महिला वर्ल्ड कप में 5 अक्टूबर को भ‍िड़ंत होनी है. लेकिन इस मुकाबले में दोनों ही टीमों के बीच मैदान पर माहौल कैसा रहेगा, क्या जो भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने एश‍िया कप के दौरान ऐसा किया? वही काम हरमनप्रीत कौर एंड कंपनी करती दिखेगी. इस पर कई सवाल हैं. पुरुष टीम ने 3 बार एश‍िया कप के दौरान हैंडशेक नहीं किया, ऐसे में सवाल है? क्या महिला क्रिकेट टीम नो हैंडशेक पार्ट 4 को वर्ल्ड कप के दौरान कंटीन्यू करेगी.  यह भी पढ़ें: भारत के सख्त तेवर, सूर्या ही नहीं रव‍ि शास्त्री ने भी क‍िया PAK कप्तान सलमान आगा को इग्नोर..! टॉस के बाद नहीं की बात इस बार का एशिया कप 2025 का ऐसे समय में हुआ, जब भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं. पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद दोनों टीमें पहली बार क्रिकेट के मैदान में आमने-सामने उतरी थीं. लिहाजा मैदान पर भी उस तनाव की छाया साफ नजर आई. भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत से ही यह रणनीति बना ली थी कि पाकिस्तान से किसी तरह की औपचारिकता नहीं निभाई जाएगी. मैच से पहले और बाद में भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने से परहेज किया. मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच किसी तरह की बातचीत भी नहीं हुई. क्रिकेट के जरिये भारत ने यह संदेश दिया कि वह पाकिस्तान से बेहद नाराज है और हालिया घटनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता. भारतीय खिलाड़ियों ने यह साफ कर दिया कि क्रिकेट में औपचारिकता निभाने के बावजूद वह पाकिस्तान के साथ सामान्य रिश्तों का दिखावा नहीं करेंगे. यह कदम पाकिस्तान को कड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश माना गया.  अब महिला टीम भी अपनाएगी यही रुख अब वही रवैया भारतीय महिला टीम में भी देखने को मिलेगा. महिला वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान का मुकाबला रविवार को कोलंबो के न्यूट्रल वेन्यू पर खेला जाएगा. मैच दोपहर तीन बजे शुरू होगा. इस मुकाबले में भी भारतीय महिला खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाएंगी और औपचारिकता से दूरी बनाए रखेंगी. माना जा रहा है कि यह फैसला पुरुष टीम के कदम से प्रेरित है और भारत का सामूहिक संदेश है कि पाकिस्तान के साथ सामान्य व्यवहार की कोई गुंजाइश नहीं है.  भारत की इस रणनीति को सिर्फ खेल तक सीमित नहीं माना जा रहा. यह कदम कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने वाला है. क्रिकेट हमेशा से दोनों देशों के रिश्तों का आईना माना गया है और इस बार भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि हालात सामान्य होने तक क्रिकेट के मैदान पर भी सामान्य शिष्टाचार की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. BCCI ने भारत-पाक मैच पर क्या कहा? देवजीत सैकिया ने BCCI Stumped को हैंडशेक को लेकर कहा-  मैं कुछ भी पूर्वानुमान नहीं लगा सकता, लेकिन उस देश के साथ हमारा संबंध वैसा ही है, पिछले हफ्ते में कोई बदलाव नहीं हुआ है. भारत वह मैच पाकिस्तान के खिलाफ कोलंबो में खेलेगा, और सभी क्रिकेट प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा. मैं केवल यह सुनिश्चित कर सकता हूं कि जो कुछ भी एमसीसी (MCC) के क्रिकेट नियमों में लिखा है, वह किया जाएगा. हाथ मिलाने होंगे या गले मिलने होंगे, इसके बारे में मैं इस समय कुछ भी आश्वस्त नहीं कह सकता. 

BJP का नया प्लान: बिहार में लागू होगा गुजरात मॉडल, कई नेताओं की टिकट पर संकट

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पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है. दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती एंटी इनकंबेंसी से निबटना है. जनता के बीच लंबे समय से जीत रहे विधायकों और मंत्रियों को लेकर बेहद नाराजगी है. इस चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए भाजपा बिहार में गुजरात मॉडल लागू करने जा रही है. गुजरात की तरह बिहार में भी मौजूदा कई मंत्रियों और विधायकों का टिकट काटा जायेगा. ऐसे करीब 30 विधायकों की सूची तैयार की गयी है, जिन्हें पार्टी इस बार बेटिकट कर सकती है. वोटरों की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा का प्रदर्शन संतोषप्रद रहा था. नीतीश कुमार की कम सीटें आने के बाद भी बिहार में एनडीए की सरकार बनी. नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए पांचवीं बार चुनाव जीतने की उम्मीद कर रहा है. भाजपा के पास अभी 80 विधायक हैं, जिनमें 22 मंत्री हैं. कई सीटों पर इस बार स्थानीय विधायक के प्रति विरोधी लहर पहले के मुकाबले मजबूत है. भाजपा ऐसे विधायकों की जगह नये चेहरों को मौका देने पर विचार कर रही है. वैसे जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए ऐसा करना आसान नहीं है. बिहार में भाजपा एक वरीय नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि सरकार की योजनाओं के कारण जनता में पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी नहीं है, लेकिन स्थानीय विधायकों से जनता नाराज है. मौजूदा विधायकों के प्रति मतदाताओं की नाराजगी पार्टी के लिए एक बड़ी बाधा बन सकती है. गुजरात की तरह कई कद्दावर नेता होंगे बेटिकट पार्टी का जनाधार बढ़ाने और एंटी इनकंबेंसी को साधने के लिए अमित शाह लगातार बिहार की टीम के साथ विचार मंथन कर रहे हैं. उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने से पहले एक फार्मूले पर काम किया जा रहा है. पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा बिहार में भी गुजरात मॉडल लागू कर सकती है. भाजपा कोर ग्रुप की बैठक में इसपर गंभीरता से विचार-विर्मश हुआ है. भाजपा ने 2022 में गुजरात चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की सूची में बड़ा बदलाव किया था. उसी तर्ज पर बिहार में भी एक व्यापक फेरबदल किया जा सकता है. लगातार सातवीं बार गुजरात जीतने के लिए भाजपा ने पूरा मंत्रिमंडल बदल दिया था. साथ ही अपने 108 मौजूदा विधायकों में से 45 का टिकट काट दिया था, जिनमें कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल थे. बिहार में भी भाजपा इसी रास्ते सत्ता में वापसी का प्लान बना रही है.

खाद्य मंत्री राजपूत का निर्देश: हर जरूरतमंद तक पहुंचे राशन, योजना का हो प्रभावी पालन

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मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम आपका राशन-आपका अधिकार का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें : खाद्य मंत्री  राजपूत भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित पात्र हितग्राहियों की सुविधा, राशन सामग्री के प्रति जागरूक करने तथा राशन वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम "आपका राशन-आपका अधिकार" प्रारंभ किया गया है। उन्होंने योजना का बेहतर तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्देश्य 5.28 करोड़ पात्र हितग्राहियों को उनकी राशन सामग्री की मासिक हकदारी के प्रति जागरूक करना है। अन्त्योदय परिवार को 35 किलो प्रति परिवार एवं प्राथमिकता श्रेणी के परिवार को 5 किलो प्रति सदस्य खाद्यान्न निःशुल्क के साथ 1 किलोग्राम नमक 1 रूपये प्रति किलो की दर से और अन्त्योदय परिवारों को 1 किलोग्राम शक्कर 20 रूपये प्रति किलो की दर से वितरण किया जा रहा है। कार्यक्रम का क्रियान्वयन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित 130 लाख परिवारों के एक सदस्य का मोबाईल नंबर डाटाबेस में दर्ज है। इन परिवारों को प्रतिमाह विकासखण्ड स्तरीय 308 प्रदाय केंद्र से मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत 100 वाहनों से उचित मूल्य दुकानों को खाद्यान्न डिस्पेच होगा, उसी समय संबंधित उचित मूल्य दुकानों से पंजीबद्ध उपभोक्ताओं को राशन निकलने का सिस्टम जनरेटेड मेसेज रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जाएगा। विकासखण्ड स्तरीय प्रदाय केंद्र से उचित मूल्य दुकान पर जैसे ही खाद्यान्न प्राप्त होगा एवं उचित मूल्य दुकान के विक्रेता द्वारा पीओएस मशीन में राशन प्राप्ति की प्रविष्टि की जाएगी, उसी समय पंजीबद्ध पात्र परिवारों को उचित मूल्य दुकान पर राशन पहुंचने का सिस्टम जनरेटेड मेसेज मोबाइल नंबर पर जाएगा। उचित मूल्य दुकान पर लगाई गई पीओएस मशीन में पात्र परिवारों को बायोमैट्रिक सत्यापन के बाद राशन का वितरण किया जाता है। पात्र परिवार द्वारा पीओएस से राशन प्राप्त होते ही उपभोक्ता को दिए गए राशन की मात्रा संबंधी सिस्टम जनरेटेड संदेश उपभोक्ताओं के मोबाइल नम्बर पर जाएगा। प्रत्येक उचित मूल्य दुकान से वर्ष भर में वितरित किये गये खाद्यान्न की जानकारी जनसमुदाय को देने के लिए वर्ष में दो बार 26 जनवरी एवं 02 अक्टूबर को ग्राम सभाओं में विस्तृत विवरण पढ़ा जाएगा। उपभोक्ताओं में "आपका राशन-आपका अधिकार" संबंधी जागरुकता लाने के लिये समय-समय पर चरणबद्ध रूप से उपभोक्ता जागरूकता शिविरों का आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम से लाभ राशन सामग्री प्रदाय केन्द्र से उचित मूल्य दुकान तक पहुंचने पर उपभोक्ताओं द्वारा निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे परिवहन के दौरान सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। उपभोक्ताओं को उचित मूल्य दुकान पर सामग्री प्राप्त होने की सूचना मिलने से समय पर राशन सामग्री का वितरण किया जा सकेगा। उपभोक्ताओं को प्राप्त सामग्री की जानकारी सिस्टम से प्राप्त होने पर विक्रेता द्वारा दी गई सामग्री से मिलान किया जा सकेगा। इससे निर्धारित मात्रा से कम सामग्री देने पर रोक लगेगी। गाँव में पात्र परिवारों की सूची का वाचन करने से मृत तथा स्थाई रूप से प्रवासी हितग्राहियों को विलोपन किया जा सकेगा। इससे पात्र प्रतीक्षारत हितग्राहियों को जोड़ा जा सकेगा। ग्राम सभा में पात्र परिवारों को राशन वितरण की जानकारी देने से वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जनभागीदारी बढ़ेगी। मॉनीटरिंग ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय स्तर पर इसका क्रियान्वयन ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय एवं उचित मूल्य दुकान विक्रेता के द्वारा किया जाएगा। जनपद स्तर पर निगरानी SDM एवं ASO/JSO द्वारा की जाएगी। जिला स्तर पर निगरानी कलेक्टर एवं DSC/DSO द्वारा की जाएगी। राज्य स्तर पर संचालनालय खाद्य के कन्ट्रोल रूम से निगरानी की जाएगी।  

उद्योग और निवेश पर फोकस: 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में सीएम मोहन यादव का संवाद कार्यक्रम

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भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेश बढ़ाने के लिए अब उत्तर–पूर्व भारत की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। वे 5 अक्टूबर को गुवाहाटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज में उत्तर–पूर्व के उद्योगपतियों और निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। इस सत्र में फार्मास्यूटिकल, चाय, सीमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी और खाद्य प्रसंस्करण सहित कई क्षेत्रों के उद्योगपति भाग लेंगे। गुवाहाटी फार्मा उद्योग का प्रमुख केंद्र है, जहां सन फार्मा, अल्केम और अजंता जैसी कंपनियां सक्रिय हैं। इसके अलावा सीमेंट, पेट्रोकेमिकल्स, चाय उद्योग, पर्यटन, वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और कृषि–प्रसंस्करण के क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। डिब्रूगढ़ में ऑयल इंडिया का मुख्यालय और बीपीसीएल के बड़े प्रोजेक्ट हैं, तिनसुकिया चाय बागानों और लॉजिस्टिक्स का केंद्र है, जोरहाट चाय अनुसंधान का हब है, जबकि शिवसागर और नाज़िरा में ONGC की संपत्तियां हैं। नामरूप में असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड भी सक्रिय है। मध्य प्रदेश देगा बेहतर निवेश माहौल मध्यप्रदेश की निवेशक हितैषी नीतियां, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर कनेक्टिविटी इन क्षेत्रों के उद्योगपतियों को आकर्षित करने में सहायक होंगी। राज्य सरकार का मानना है कि यह साझेदारी निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलेगी। गुवाहाटी के अलावा डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, जोरहाट, शिवसागर और नामरूप से प्रतिनिधि इस सत्र में शामिल होंगे। साथ ही शिलांग, अगरतला, आइजोल, इंफाल, कोहिमा और दीमापुर जैसे राज्यों से भी उद्योगपति भाग लेंगे। नई संभावनाओं की राह इस संवाद के जरिए मध्यप्रदेश और उत्तर–पूर्व दोनों क्षेत्रों के बीच भरोसे और साझेदारी की नई नींव रखी जाएगी। फार्मा, सीमेंट, पेट्रोकेमिकल्स, पर्यटन और कृषि–प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग से नई संभावनाएं और रोजगार के अवसर सामने आएंगे। गुवाहाटी का यह इंटरैक्टिव सेशन 5 अक्टूबर को रेडिसन ब्लू होटल में होगा, जिसमें विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के प्रमुख निर्णयकर्ता और निवेशक मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री की यह पहल मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निवेश का भरोसेमंद और प्रगतिशील गंतव्य बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी। 

स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता 3 साल टली, अब उपभोक्ता 6 अक्टूबर को करेंगे विरोध प्रदर्शन

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भोपाल स्मार्ट मीटर के विरोध में 6 अक्टूबर को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन होगा। मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (एमईसीए) के बैनरतले प्रदेशभर से उपभोक्ता डॉ. अंबेडकर पार्क में जुटेंगे। वे 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने, बिजली के रेट कम करने जैसी 11 मांग भी सरकार के सामने रखेंगे। स्मार्ट मीटर के लगातार विरोध के बीच मध्य प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर को अनिवार्यता का नियम तीन साल आगे बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस एक फैसले ने स्मार्ट मीटर अभियान की रफ्तार को फिलहाल के लिए रोक दिया है। दरअसल पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्काम्स) ने आयोग से स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता की अवधि बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। कंपनियों का तर्क था कि स्मार्ट मीटर मात्र बिजली खपत मापने का एक यंत्र नहीं है, बल्कि एक वृहद विद्युत प्रणाली है। एसोसिएशन की प्रदेश संयोजक रचना अग्रवाल और लोकेश शर्मा ने बताया, मध्यप्रदेश सहित देशभर में बिजली उपभोक्ताओं द्वारा बिजली के प्री-पेड स्मार्ट मीटर का विरोध किया जा रहा है। ये विरोध कोई औपचारिकता या कोई निहित स्वार्थ पर आधारित राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि हमारी दैनिक आय और जीवन मरण के प्रश्न से जुड़ा है। हाल ही में इसके दुष्परिणाम भी सामने आए हैं। बैठक में मुदित भटनागर, सतीश ओझा, आरती शर्मा आदि पदाधिकारी भी मौजूद थे। पदाधिकारी बोले-प्रदेश में स्मार्ट मीटर की स्थिति ठीक नहीं स्मार्ट मीटर से अत्यधिक बढ़े हुए बिजली बिलों की समस्या मध्यप्रदेश के सभी जिलों में है। भोपाल में ही उपभोक्ताओं ने बताया कि उनका बिल हर महीने भरने के बावजूद एक उपभोक्ता का 10 हजार, दूसरे का 20 हजार, तीसरे का 29 हजार रुपए आया है। ग्वालियर में उपभोक्ता जिसका एक कमरे का घर है, के बिल 5 हजार रुपए तक आ रहे हैं। ग्वालियर के 3 उपभोक्ताओं ने बताया कि महीने में दो बार बिल आ गया है। दोनों 6-6 हजार का है। गुना, सीहोर, विदिशा, सतना, इंदौर, देवास, दमोह, जबलपुर आदि जिलों में भी आम उपभोक्ता जिसके बिजली बिल 700-800 आते थे, वे हजारों में आ रहे हैं। गुना में एक किसान को 2 लाख से ज्यादा का बिजली बिल दिया गया। जहां-जहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, उन सभी जिलों में उपभोक्ता बिजली बिलों से पीड़ित है। लोग अपने गहने और बर्तन बेचकर बिल भर रहे हैं। इसमें मीटर के साथ नेटवर्किंग, मीटर डेटा मैनेजमेंट, बिलिंग, सर्वर आदि का एकीकरण आवश्यक है। इसके लिए उनके के पास प्रशिक्षित कर्मियों की कमी है। इधर, स्मार्ट मीटर से अनाप-शनाप बिल की वजह से उपभोक्ताओं का विरोध लगातार बना हुआ था। कंपनियों ने आयोग के सामने तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन इस याचिका में उन्होंने स्वीकार कर लिया कि सर्वर का एकीकरण नहीं होने और अप्रशिक्षित कर्मियों की वजह से स्मार्ट मीटर की रीडिंग में गलतियां हो रही हैं। अब तीनों कंपनियां पहले तकनीकी कमी दूर करेंगी। इस बीच नए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती होगी। उसके बाद ही स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान में तेजी लाई जाएगी। कंपनी ने दिए हैं ये तर्क     फिलहाल पूरे देश में स्मार्ट मीटर की कमी बनी हुई है।     आरडीएसएस योजना के तहत मीटरिंग प्रोजेक्ट में कई समस्याएं हैं।     टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है।     अलग-अलग डिस्काम्स की अपनी-अपनी समस्याएं हैं। उपभोक्ताओं को मिलेंगी ये राहत     बिजली कंपनियां शहरी क्षेत्र में नए कनेक्शन के तहत स्मार्ट मीटर न होने पर सामान्य मीटर भी लगा सकेंगी।     ग्रामीण क्षेत्र में नान-स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं।     पुराने खराब, जले, रुके हुए मीटर भी अब 31 मार्च 2028 तक बदले जा सकेंगे। फैक्ट फाइल     1.37 करोड़ स्मार्ट मीटर मप्र में लगाए जाने हैं।     38.47 लाख पहले चरण में स्वीकृत।     99.22 लाख दूसरे चरण में स्वीकृत।     12.56 लाख मीटर तीनों डिस्काम ने अब तक लगाए। इसलिए विरोध     स्मार्ट मीटर मोबाइल रीचार्ज की तरह प्री-पेड क्षमता वाले डिवाइस के साथ है। जिसे कंपनी मोबाइल फोन की तरह कभी भी प्री-पेड कर सकती है।     इसकी मानीटरिंग व कमांड भी सेंट्रल सिस्टम के तहत है। इसमें कंपनी के लिए उपभोक्ता की यूनिट्स को भी बदलना असंभव नहीं है।     मीटर टाइम आफ डे (TOD) का आकलन करने की क्षमता रखता है। दिन-रात का अलग-अलग रेट है।     मीटर में कोई खराबी आ जाने की स्थिति में मीटर को बदलने पर फिर से यह रकम चुकानी होगी। यह जबरदस्त बोझ है, जो कि आम उपभोक्ता के ऊपर डाला जा रहा है।     स्मार्ट मीटर का बिल नहीं चुका पाने की स्थिति में बिजली तुरंत काट दी जा रही है। जुड़वाने के नाम पर 350 रुपए उपभोक्ता से लिए जा रहे हैं, जबकि हमारी सिक्योरिटी राशि बिजली विभाग के पास पहले से ही जमा है।     बिजली बिल की हार्ड कॉपी नहीं दी जा रही है। जिससे अशिक्षित और तकनीकी रूप से अक्षम उपभोक्ताओं के लिए समस्या पैदा हो गई है।     हर उपभोक्ता के पास स्मार्ट फोन नहीं है। बिजली का बिल भरने के लिए ही लोगों को फिर मोबाइल खरीदना होगा।     बिजली कंपनी से हमारा अनुबंध पोस्टपेड मीटर के लिए है, न कि प्री-पेड मीटर के लिए। फिर इस प्रीपेड क्षमता वाले मीटर को क्यों लगाया गया है?

सोना: शास्त्रों में पवित्र, आज के दौर में मिडिल क्लास की आर्थिक ढाल

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मुंबई  हर सुबह आंख खुलने के साथ, आप बिजनेस की खबरों में रुचि रखते हों या न रखते हों, लेकिन एक चीज पर आपकी निगाहें ज़रूर टिकती होंगी, वो है सोने का भाव- आंखें नचाते हुए आप ये जरूर कहते होंगे- अरे यार! सोना फिर इतना महंगा हो गया? चांदी भी कहां रुकने का नाम ले रही है. वाकई सोने-चांदी के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी ने मिडिल क्लास लोगों की नींद उड़ा दी है. बच्चों की शादी, सेविंग्स, इन्वेस्टमेंट, गहनों का शौक और कुछ शोशेबाजी… इन सारी जरूरतों को पूरा करता है सोना. कुल मिलाकर मिडिल क्लास फैमिली को अपने लेवल से कुछ ऊंचा उठाकर एलीट वाली लॉबी में एंट्री कर जाने की फीलिंग कराता है सोना. बीते कुछ सालों में सोने के भाव में बढ़ोतरी ने ख़रीदारों को बड़ा झटका दिया है. आज सोने की कीमत लगभग सवा लाख रुपये प्रति दस ग्राम (24 कैरेट) है. लिहाजा आगे आने वाले हैं करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार जो सोने की खरीदारी के खास दिन माने जाते हैं. वहीं लगन का समय भी शुरू होने वाला है, जो जूलरी की खरीदारी का सबसे डिमांडिंग टाइम है.  साल 2024 में धनतेरस पर खरीदारी इन सबके बावजूद कोई चौंकने वाली बात नहीं होगी कि महंगाई के इस बड़े आंकड़ों के बाद भी सोने की खरीदारी फेस्टिवल टाइम में कोई रिकॉर्ड बना जाए. साल 2024 के धनतेरस पर नजर डालें तो उस दौरान करीब 25 टन सोने की बिक्री हुई थी, जिसका मूल्य करीब 20 हजार करोड़ रुपये आंका गया था. इसी तरह देशभर में 250 टन चांदी भी बिकी थी. इसकी अनुमानित कीमत 2,500 करोड़ रुपये रही.  ये आंकड़ा तब है, जब साल 2024 में ही सोने में 30 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई थी. वहीं साल 2023 में धनतरेस के मौके पर सोने का भाव 60 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था, जो 2024 में बढ़कर 80 हजार रुपये हो गया है. वहीं चांदी का भाव साल 2023 में 70 हजार रुपये किलो था, जो 2024 में  1 लाख रुपये के करीब पहुंच गया था. ये आंकड़े बताते हैं कि सोने-चांदी की कीमतों में इतनी भयानक तेजी होने के बाद भी लोगों में इसकी खरीदारी में कमी नहीं आती है और खास मौकों पर लोग सुनार के पास जुटते हैं.  सोने से मोह की क्या है वजह? सवाल उठता है कि आखिर इसकी वजह क्या है? सवाल ये भी है कि सोने-चांदी को ही ये तवज्जो क्यों मिलती है? जबकि हीरा, पन्ना, माणिक्य, मोती जैसे रत्न और प्लेटिनम जैसी सोने से भी कीमती धातु होने के बाद भी लोग आभूषण और सेविंग्स-इन्वेस्टमेंट के तौर पर सोना या चांदी को ही तरजीह देते हैं.  सोने के साथ लोगों का भावुकता से भरा जुड़ाव होने का पहला कारण तो धार्मिकता है. सोने को सनातन परंपरा में सबसे शुद्ध धातु बताया गया है. यह भी कहा गया है सोना इतना पवित्र है कि यह धारण करने वाले को हमेशा पवित्र बनाए रखता है. सोने की मौजूदगी होने के मातलब है कि आप के पास किसी न किसी रूप में लक्ष्मीदेवी की कृपा है. पुराणों में सोने को स्वर्ण कहा गया है और स्वर्ण को लक्ष्मी का स्वरूप बताया गया है. देवी लक्ष्मी की कृपा अगर किसी व्यक्ति पर होती है तो वह आसानी से सोने की संपदा का मालिक बन जाता है. उनकी कृपा को सोने के तौर पर ही दिखाया जाता है.  चारों वेदों में सोने का महत्व सोने के महत्व को समझने के लिए बीते युग में चलें तो इसका संदर्भ ऋग्वेद में भी मिलता है. ऋग्वेद के दशम मंडल में स्वर्ण के लिए हिरण्य शब्द आया है और इसके जरिए सूर्य को परिभाषित किया गया है. यानी पुराणों में जिस सूर्य का पहला नाम आदित्य (अदिति के पुत्र होने के कारण) है, वेदों में उसी सूर्य का पहला नाम हिरण्य है. जिसका अर्थ सुनहरा लिया जाता है. इस तरह सोना (हिरण्य) भारतीय संस्कृति में केवल भौतिक धातु नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और दैवीय शक्ति का प्रतीक माना गया है. वेदों में इसे कई जगहों पर प्रकाश, तेज, समृद्धि और अमरत्व से जोड़ा गया है. ऋग्वेद में सूर्य को "हिरण्यगर्भ" (स्वर्णगर्भ) कहा गया है. दशम मंडल में सूक्ति है 'हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्.'(ऋग्वेद 10.121.1) यहां सूर्य को सारी सृष्टि का स्वर्णगर्भ माना गया है. सूर्य का यह स्वर्णिम तेज ही लाइफ सोर्स और सपोर्टिंग सिस्टम है. इसी वेद में अग्नि, इन्द्र और मरुतों की आभा को 'हिरण्य' कहा गया है. इसका उदाहरण भी एक प्रमुख ऋग्वैदिक सूक्ति में मिलता है.  हिरण्ययैः सविता रश्मिभिर्व्याख्यात्.'(ऋग्वेद 1.35.2) इसका अर्थ है कि, सूर्य अपनी स्वर्णिम किरणों से आकाश और पृथ्वी को प्रकाशित करता है. इसी तरह यजुर्वेद में यज्ञ के साथ ही सोने का महत्व है. “हिरण्यपात्रं गृह्णामि ते ज्योतिरस्मि, ये सूक्ति कहती है कि हिरण्यपात्र (सोने का पात्र) यज्ञ में शुद्धि और तेज का प्रतीक है. यजुर्वेद (31.18) में "हिरण्ययूप" का भी उल्लेख मिलता है, जिसका अर्थ है स्वर्ण से निर्मित यज्ञ-स्तंभ. यह देवताओं को समर्पण की उच्चतम भावना का प्रतीक है. वहीं अथर्ववेद में सोने को स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगनिवारण का साधन माना गया है. इस बात को अथर्ववेद की एक सूक्ति साबित करती है, जो कहती है 'हिरण्यं भेषजं भवतु.' (अथर्ववेद 2.4.5) यानी सोना औषधि स्वरूप हो, जो जीवन में बल, ओज और आरोग्य प्रदान करे. सामवेद, जो कि देवताओं यज्ञ की ऋचाओं के गायन का संकलित ग्रंथ है, उसमें देवताओं कि पवित्रता को सोने की उपमा दी गई है. सूक्ति 'हिरण्यपाणिः सविता देवो अस्तु.' (सामवेद 1.3.1) में सूर्य को स्वर्ण करधनी और स्वर्णिम हाथों वाला देवता बताया गया है. यह स्वर्णिम प्रतीक देवत्व और दिव्यता का बोध कराता है. वेदों में सोना केवल भौतिक धातु नहीं, बल्कि सूर्य के तेज, देवताओं की आभा, यज्ञ की पवित्रता और औषधीय शक्ति का प्रतीक है. "हिरण्य" शब्द वेदों में बार-बार आता है, जो यह दर्शाता है कि स्वर्ण यानी सोने को मनुष्य के भौतिक और आध्यात्मिक जीवन दोनों में बहुत महत्व रहा है.  नीतिशतक जैसे ग्रंथों में सोने का महत्व सोने का महत्व अलग-अलग समय पर पौराणिक आख्यानों में, नीतिग्रंथों और यहां तक मनुस्मृति और पंचतंत्र तक में बताया गया है.  नीति शतक में एक सूक्ति आती है, जिसमें … Read more

बिहार चुनाव ने रोका MP के बोर्ड और निगम की नियुक्तियां, पद रिक्त

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भोपाल  मध्य प्रदेश BJP की राज्य कार्यसमिति, 40 स्वतंत्र बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्तियां अब बिहार विधानसभा चुनावों के बाद ही होंगी। पार्टी सूत्रों ने बुधवार को बताया कि संगठन का पूरा ध्यान अब बिहार के महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले पर है। इस कारण सभी नियुक्तियों को टाल दिया गया है। पार्टी के कई बड़े नेता, जैसे शहरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व प्रदेश BJP अध्यक्ष VD शर्मा, BJP के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया और युवा मामलों के मंत्री विश्वास सारंग, बिहार में चुनाव ड्यूटी पर हैं। वे अभी वहीं तैनात हैं। 28 जिला कार्यसमितियों का ऐलान अभी बाकी एक वरिष्ठ प्रदेश BJP पदाधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार टीओआई को बताया, 'अब तक पार्टी ने 35 जिला कार्यसमितियों के सदस्यों के नाम घोषित किए हैं। 28 और जिला कार्यसमितियों की घोषणा बाकी है। बाकी जिला कार्यसमितियों की घोषणा हो सकती है, लेकिन बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों की घोषणा (बिहार चुनावों के बाद तक) होने की संभावना नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'राज्य कार्यसमिति के सदस्यों को भी इंतजार करना होगा।' वरिष्ठों की आपत्ति फिर पितृपक्ष से टली नियुक्ति अगस्त के आखिरी हफ्ते से बड़ी राजनीतिक हलचल शुरू हुई थी। तब BJP के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री BL संतोष ने दो दिन के लिए राज्य की राजधानी का दौरा किया था। उसी दौरान स्वतंत्र राज्य निगमों और बोर्डों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के पदों के लिए उम्मीदवारों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, सभी वरिष्ठ नेता नामों के चयन से खुश नहीं थे। इस कारण घोषणा को तब तक के लिए टाल दिया गया जब तक आम सहमति नहीं बन जाती। इस बीच, हिंदू श्राद्ध के 15 दिन शुरू होने से भी सूची की घोषणा में और देरी हुई। मंत्रिमंडल विस्तार पर भी ब्रेक वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली गए थे। उन्होंने पार्टी आलाकमान को राज्य मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत के बारे में बताया था। लेकिन, सूत्रों का दावा है कि उसे भी इंतजार करना होगा। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को भी बिहार चुनाव खत्म होने तक टाल दिया है। प्रदेश BJP प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि BJP एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन करती है। राज्य कार्यसमिति के सदस्यों और निगमों के अध्यक्षों की घोषणा से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लिया जाएगा। हमारे कई शीर्ष नेता बिहार चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं। सभी नेताओं के साथ चर्चा के बाद नए पदाधिकारियों के नामों की औपचारिक घोषणा की जाएगी। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कड़ी मेहनत करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

PM आवास योजना 2025: कौन कर सकता है अब आवेदन और कैसे मिलेगा फायदा

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चंदौली आयुक्त, ग्राम्य विकास की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत चल रहे आवास प्लस सर्वेक्षण-2024 में नए लाभार्थियों का डाटा कैप्चर करने के लिए समय-सीमा 14 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। यदि पात्र लाभार्थी किसी कारण से सर्वे में आने से छूट गए हो या सर्वे के समय घर पर उपलब्ध नहीं थे और वर्तमान में घर आ गए हो तो ऐसे लाभार्थियों का सर्वेक्षण कार्य (डाटा कैप्चर) 14 अक्टूबर तक सभी ग्राम पंचायतों में अनिवार्य रूप से पूर्ण किया जाएगा। आवास प्लस सर्वेक्षण-2024 के लिए पोर्टल खोल दिया गया है। खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ग्राम पंचायतों के सर्वेयर के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग /बैठक कर छूटे हुए पात्र लाभार्थियों के सर्वेक्षण (डाटा कैप्चर) का कार्य आरंभ कराएं।

Apple Watch ने स्कूबा डाइविंग के दौरान युवक की जान बचाकर दिखाई कमाल

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नई दिल्ली मुंबई के एक स्कूबा डाइवर क्षितिज जोडेप की एप्पल वॉच ने जान बाचा ली। दरअसल 26 साल के क्षितिज ई कॉमर्स कॉमर्स  कंपनी में काम करते हैं। वे इस साल गर्मियों के महीने में पुडुचेरी के पास स्कूबा डाइविंग कर रहे थे। समुद्र में गहराई में जाने के साथ क्षितिज के साथ जो हुआ और कैसे उनकी जान बची आइये जानते हैं। क्षितिज साल 2020 से समुद्र में गोताखोरी करते आ रहे हैं। इस दौरान कई बार उन्होंने खतरनाक परिस्थितियों का भी सामना किया। अपनी एक घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया कि, 'स्कूबा डाइविंग के दौरान वो करीब 36 मीटर तक गहराई में चले गए थे। इसी दौरान उनका बेल्ट अचानक ढीला हो गया। जिससे वे तेजी से समुद्र की सतह की ओर बढ़ने लगे। कैसे बची क्षितिज की जान? इसी दौरान उनकी कलाई पर बंधी एप्पल वॉच अल्ट्रा अचानक एक्टिव हो गई। वॉच ने लगातार सायरन बजाना शुरू किया और रास्ते में आने वाले खतरों से क्षितिज को अवगत कराती रही। इस दौरान वॉच की स्क्रीन पर लगातार अलर्ट नोटिफिकेशन आता रहा, जिससे उन्हें धीमी गति से चलने के लिए अलर्ट किया क्योंकि तेज चढ़ाई से फेफड़ों को गंभीर चोट लग सकती थी। हालांकि क्षितिज अपनी बेकाबू चढ़ाई को रोक नहीं पाए. इसी दौरान उनके प्रशिक्षक ने सायरन की आवाजे सुन ली और तुरंत क्षितिज की मदद करके लिए आ गए। इस तरह क्षितिज की जान बची। एप्पल के सीईओ टिम कुक को कहा शुक्रिया क्षितिज ने बाद में एप्पल के सीईओ टिम कुक को अपनी कहानी शेयर करने के लिए लेटर लिखा था। उन्हें आश्चर्य हुआ जब कुक ने उन्हें जवाब देते हुए लिखा: "मुझे बहुत खुशी है कि आपके ट्रेनर ने अलार्म सुना और तुरंत आपकी सहायता की। अपनी कहानी हमारे साथ शेयर करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। साल 2022 में एप्पल वॉच अल्ट्रा को लॉन्च किया गया था। इस वाच को मुख्य रूप से एडवेंचर और इमरजेंसी स्थितियों के लिए बनाया गया है। कंपनी के मुताबिक वॉच पूरी तरीके से वाटरप्रूफ है और पानी के अंदर भी काम करती है। सायरन से दो ऊंचे स्तर वाली आवाज निकलती है, जिसे 180 मीटर तक की दूर से सुना जा सकता है।  

सीमाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया: लद्दाख‑तवांग कॉरिडोर में तोप‑टैंक एयरलिफ्टिंग योजना

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नई दिल्ली  मान लीजिए लेह-लद्दाख या अरुणाचल प्रदेश के तवांग या फिर कश्‍मीर घाटी में दुश्‍मनों के साथ जंग चल रही हो और गोला-बारूद या फिर अन्‍य साजो-सामान की कमी होने लगे तो ऐसे हालात में सशस्‍त्र बलों के जवान क्‍या करेंगे? भारत सरकार अब इस गैप को खत्‍म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. रक्षा मंत्रालय ठंडे बस्‍ते में चली रही मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) की खरीद प्रक्रिया को अब रफ्तार देने जा रहा है. इस बाबत जारी होने वाले टेंडर को अंतिम रूप दिया जा रहा है. MTA की कॉस्टिंग यानी कीमत और स्पेसिफिकेशन काफी महत्‍वपूर्ण हैं, ताकि वे भारतीय हालात के अनुरूप उपयोगी हो सकें. बता दें कि भारत ने कुछ सप्‍ताह पहले ही देसी 5th जेनरेशन फाइटर जेट को लेकर 15000 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है. इसमें डिफेंस सेक्‍टर से जुड़ी कई कंपनियों ने इंट्रेस्‍ट भी दिखाया है. DRDO ने रेल बेस्‍ड अग्नि प्राइम मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसकी रेंज 2000 किलोमीटर है. इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज के जखीरे में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल पहले से ही मौजूद है. अब MTA की खरीद से इंडियन एयरफोर्स गोला-बारूद या अन्‍य साजो-सामान झट से मौके पर पहुंचा सकेगी, ताकि दुश्‍मनों को उसकी मांद में ही तबाही का मंजर दिखाया जा सके. जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने लंबे समय से अटकी MTA प्रोजेक्‍ट को गति देने की तैयारी शुरू कर दी है. रक्षा मंत्रालय जल्‍द ही इसके लिए टेंडर जारी करने वाला है. यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब भारतीय वायुसेना (IAF) अपने परिवहन बेड़े (Transport Fleet) में गंभीर कमी से जूझ रही है और दूसरी ओर 114 मल्‍टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीद तथा रूस से Su-35 विमानों पर बातचीत जैसी महत्‍वपूर्ण योजनाओं को भी आगे बढ़ा रही है. वायुसेना की मध्‍यम-वर्ग परिवहन क्षमता अब नाजुक स्थिति में पहुंच चुकी है. कभी 200 से अधिक विमान वाला एएन-32 बेड़ा अब घटकर 100 से कम रह गया है. इनमें से भी ज्‍यादातर अपनी सेवा अवधि समाप्ति तक पहुंच रहे हैं. साल 1980 के दशक में शामिल किए गए IL-76 विमानों की सेवा क्षमता घट रही है और इनके रखरखाव की लागत तेजी से बढ़ रही है. छोटे एवरो और डॉर्नियर विमानों के रिटायर होने के बाद IAF का परिवहन बेड़ा असंतुलित हो गया है. फिलहाल C-17 ग्‍लोबमास्‍टर भारी सामरिक परिवहन (80 टन तक) करता है और C-295 हल्‍के मिशन (5-10 टन) संभालते हैं. मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की भारी कमी है. सामरिक असर 20-30 टन भार वहन करने वाले विमान की कमी केवल लॉजिस्टिक असुविधा नहीं है, बल्कि यह भारत की सामरिक तत्‍परता पर भी सीधा असर डाल रही है. चाहे लद्दाख और अरुणाचल जैसे उच्‍च हिमालयी मोर्चे हों या सेना के भावी ज़ोरावर हल्‍के टैंकों की तेजी से तैनाती, मौजूदा हालात गंभीर बाधा बनते जा रहे हैं. इंडिया डिफेंस न्‍यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह कमी दो दशक से बनी हुई है और अब भी एएन-32 जैसे वृद्ध विमानों पर निर्भरता जोखिम भरी है. भारत ने मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की जरूरत को 2000 के दशक में ही पहचाना था. रूस के साथ HAL-इल्यूशिन की संयुक्त परियोजना MTA इसी दिशा में थी, लेकिन लगातार देरी और फाइनेंशियल सपोर्ट पर सहमति न बनने के कारण 2015 में इसे रद्द कर दिया गया. इसके बाद भारत ने C-130J सुपर हरक्यूलिस और सीमित संख्‍या में सी-17 जैसे स्‍टॉपगैप हल अपनाए, लेकिन अब ये भी या तो महंगे हो रहे हैं या बंद हो चुके हैं. ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से आर्म्‍ड फोर्सेज की ताकत में भी इजाफा होगा. ग्‍लोबल कंटेंडर नए टेंडर में कई इंटरनेशनल प्‍लेयर्स दस्‍तक दे रहे हैं :     IL-276 (रूस-HAL) : रूस का नया डिजाइन, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद सप्‍लाई चेन और वित्‍तीय अनिश्चितताओं पर सवाल.     C-130J (लॉकहीड मार्टिन-टाटा) : पहले से IAF में परिचित, लेकिन पुरानी तकनीक और सीमित इंडस्ट्रियल सपोर्ट.     A400M Atlas (एयरबस) : 37 टन तक ले जाने वाला आधुनिक और बहुपयोगी विमान, लेकिन कीमत और परिचालन लागत ऊंची.     KC-390 Millennium (एम्‍ब्राएर-महिंद्रा) : 18-30 टन भार क्षमता के साथ भारत की जरूरतों के अनुरूप, आधुनिक एवियोनिक्स और जेट-संचालित दक्षता.  सबसे अहम, ब्राजील ने गहरी औद्योगिक साझेदारी और भारत में उत्‍पादन की पेशकश की है. कूटनीतिक और औद्योगिक अवसर विशेषज्ञों के अनुसार, KC-390 भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्‍त माना जा रहा है. एयर मार्शल मथेस्‍वरन का कहना है कि इसके जेट इंजन इसे बेहतर दक्षता देते हैं और ब्राजील का तकनीकी सहयोग भारत के लिए लंबे समय तक लाभकारी साबित हो सकता है. वहीं A400M अपनी क्षमता से प्रभावित करता है लेकिन महंगा है. रूस का IL-276 अभी शुरुआती चरण में है और C-130J अब पुराना पड़ता जा रहा है. भविष्‍य की चुनौती करीब 80 विमानों की संभावित खरीद के साथ यह परियोजना न केवल अरबों डॉलर की होगी, बल्कि भारत की दीर्घकालिक रक्षा व विमानन साझेदारियों की दिशा भी तय करेगी. इसमें निजी कंपनियों टाटा, महिंद्रा और L&T के साथ HAL की भागीदारी अनिवार्य मानी जा रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परियोजना भारत की दीर्घकालिक नागरिक विमान निर्माण आकांक्षाओं को भी आधार दे सकती है. वायुसेना के लिए यह निर्णय सिर्फ विमान चुनने तक सीमित नहीं है. यह दो दशक से बनी क्षमता खाई को भरने, बेड़े का संतुलन सुनिश्चित करने और हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक त्वरित गतिशीलता बनाए रखने का सवाल है. Airbus, Embraer, Lockheed और रूस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा में भारत को अब तय करना होगा कि वह किसे प्राथमिकता देता है.