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25 करोड़ 28 लाख लोगों ने नवीनीकृत कॉरिडोर के लोकार्पण से 30 सितंबर तक किए काशी विश्वनाथ के दर्शन

यूपी की इकोनॉमी को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने दिया सवा लाख करोड़ का बूस्टअप डोज पीएम मोदी के विजन और सीएम योगी के मिशन से काशी ने बनाया कीर्तिमान 25 करोड़ 28 लाख लोगों ने नवीनीकृत कॉरिडोर के लोकार्पण से 30 सितंबर तक किए काशी विश्वनाथ के दर्शन दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकार्पण के बाद से नित नए रिकॉर्ड स्थापित कर रहा कॉरिडोर सुरक्षा का माहौल, बेहतर सुविधाएं और शानदार रोड कनेक्टिविटी ने देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया ‘मोदी-योगी मॉडल’ से दौड़ रहा पूर्वांचल के विकास का चक्का,  मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में बुलंदियों पर उत्तर प्रदेश का धार्मिक पर्यटन देशी विदेशी पर्यटकों के उत्साह से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर लोगों को मिल रहा रोजगार प्रति व्यक्ति औसतन 04 से 05 हजार रुपए तक खर्च के हिसाब से साढ़े तीन साल में प्रदेश को सवा लाख करोड़ की सौगात मुख्यमंत्री योगी के मिशन से काशी और आसपास के लाखों लोगों के लिए रोजगार की पैदा हुईं अपार संभावनाएं लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन से श्री काशी विश्वनाथ धाम ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी के काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद से अब तक लगभग 25 करोड़ 28 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर चुके हैं। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को अनुमानित सवा लाख करोड़ रुपये का बूस्टअप डोज मिला है। व्यापारियों, दुकानदारों, नाविकों, पुजारियों और होटल कारोबारियों को बड़े पैमाने पर रोजगार श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण ने न केवल काशी की छवि को बदला है, बल्कि पूरे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों में भी अप्रत्याशित वृद्धि की है। देश के विभिन्न प्रांतों से लेकर दुनिया के तमाम देशों के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लगातार बढ़ते आगमन से स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों, नाविकों, पुजारियों, ठेले वालों और होटल कारोबारियों को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। धार्मिक पर्यटन के मॉडल ने यूपी की छवि को दी अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बेहतर हुआ है। सड़कों का चौड़ीकरण, घाटों का सौंदर्यीकरण और एयरपोर्ट से लेकर गंगा घाट तक शानदार रोड कनेक्टिविटी ने देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया है। धार्मिक पर्यटन के इस मॉडल ने यूपी की छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। सिर्फ काशी नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल के विकास की गति हो रही तेज संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के अर्थशास्त्री प्रोफेसर राजनाथ के अनुसार, काशी विश्वनाथ धाम में आने वाला पर्यटक औसतन 05 हजार रुपये से अधिक ही खर्च करता है। फिर भी न्यूनतम अनुमानित जीडीपी ग्रोथ के लिए यदि 04 हजार से 05 हजार रुपए प्रति व्यक्ति के आंकड़े से जोड़ें तो इन साढ़े तीन वर्षों में करीब सवा लाख करोड़ रुपये का आर्थिक प्रवाह प्रदेश की अर्थव्यवस्था में हुआ है। यह राशि न केवल काशी बल्कि पूरे पूर्वांचल के विकास की गति को तेज कर रही है। यूपी में रिपलिंग इफेक्ट से पूरे प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि काशी विश्वनाथ महादेव के धाम पधारने वाले 70 प्रतिशत श्रद्धालु दक्षिण भारत से तथा लगभग 15 प्रतिशत श्रद्धालु अन्य राज्यों एवं जनपदों से होते हैं। यह श्रद्धालु काशी दर्शन के पश्चात् प्रायः विंध्यवासिनी धाम, तीर्थराज प्रयाग, अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिष इत्यादि तीर्थों पर भी जाते हैं। इस प्रकार अर्थव्यवस्था में रिपलिंग इफेक्ट भी उत्पन्न होता है और पूरे प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि होती है। पूरे देश के लिए विकास का मॉडल बन गई है अपनी काशी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन से काशी और आसपास के क्षेत्रों में लाखों लोगों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरह से धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी ने विकास की नई मिसाल पेश की है, वह पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुकी है। काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्याचल का डेवलपमेंट तेज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार धार्मिक पर्यटन को राज्य के विकास का सशक्त साधन बना रही है। अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्याचल जैसे स्थलों का विकास भी तेज गति से किया जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर अब पूरे प्रदेश में धार्मिक नगरों का विकास किया जा रहा है।

मौलाना तौकीर के खिलाफ 10 मामले, अदालत में सुनवाई 14 अक्टूबर को

बरेली फतेहगढ़ जेल में बंद आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां कानूनी दांवपेंच के चक्रव्यूह में फंस गया है। फिलहाल उसका जेल से निकलना मुश्किल नजर आ रहा है। कोतवाली के अलावा बवाल के दिन दर्ज नौ अन्य मुकदमों में साजिशकर्ता के रूप में तौकीर को नामजद किया गया है। इन मुकदमों के विवेचकों ने तौकीर का वारंट बी फतेहगढ़ जेल में दाखिल किया है। मौलाना की तलबी 14 अक्तूबर को की जानी है। दंगा कराने में 2010 से मौलाना तौकीर का नाम कई बार उछलता रहा है, लेकिन मौलाना पर कभी बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी। कभी सत्ताधारियों का करीबी होने का मौलाना को फायदा मिला तो कभी सरकारों ने दरगाह परिवार से जुड़ाव के मद्देनजर तौकीर को रियायत बख्श दी। इस बार 26 सितंबर को प्रदर्शन का आह्वान करके मौलाना तौकीर ने मुसीबत मोल ले ली। मौलाना फतेहगढ़ जेल में और उसके खास गुर्गे बरेली जेल में बंद हैं। पांच थानों में दर्ज हैं दस मुकदमे 26 सितंबर को शहर में हुए बवाल के बाद पुलिस ने पांच थानों में दस मुकदमे दर्ज किए थे। इनमें से कोतवाली के पांच मुकदमों समेत सात में मौलाना तौकीर का नाम शामिल था। चूंकि आयोजन तौकीर रजा के ही बुलावे पर होना था, इसलिए बाकी मामलों में भी साजिशकर्ता के तौर पर तौकीर का नाम जोड़ा गया है। इस तरह हालिया नौ मुकदमों में तौकीर को आरोपी बनाया गया है। इन नौ मामलों में बी वारंट फतेहगढ़ जेल में दाखिल किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2019 में सीएए एनआरसी मामले में निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का मामला अभी तक कोतवाली में प्रचलित था, इसके विवेचक ने भी मौलाना को अपने मामले में आरोपी बताकर बी वारंट दाखिल किया है। सोमवार को टली सुनवाई, अब 14 अक्तूबर को होगी शुरू में सात मामलों में मौलाना को तलब कराने के लिए बी वारंट दाखिल किया गया था। इसके लिए सोमवार को सुनवाई होनी थी। बताते हैं कि फतेहगढ़ जेल प्रशासन ने स्टाफ की कमी की मजबूरी जताई तो सुनवाई टल गई। अब 14 अक्तूबर की तारीख सुनवाई के लिए लगी है। तौकीर को इस दिन फतेहगढ़ जेल से लाकर बरेली कोर्ट में पेश किया जा सकता है। चूंकि जल्द ही दीपावली है, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई होने के आसार ज्यादा हैं। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि मौलाना तौकीर रजा से संबंधित सभी मुकदमों में विवेचना से लेकर गिरफ्तारी तक उच्च अधिकारियों की देखरेख में चल रही है। निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जा रही है। मौलाना को दी जा रहीं ज्ञानवर्धक पुस्तकें मौलाना तौकीर रजा 27 सितंबर से फतेहगढ़ सेंट्रल जेल की तन्हाई बैरक में बंद है। वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी शासन स्तर से की जा रही है। मौलाना की गतिविधियों से लेकर उससे मुलाकात करने वालों तक का पूरा ब्योरा अपडेट रखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जेल प्रशासन ने मौलाना को ज्ञानवर्धक पुस्तकें मुहैया कराई हैं। उसे इच्छा के मुताबिक हिंदी व उर्दू साहित्य की पुस्तकें दी जा रही हैं।  

रसिया खानपुर गांव में बुखार से संकट, जान गंवाने वालों की संख्या 7 तक पहुँची

पीलीभीत पीलीभीत के बीसलपुर तहसील के रसिया खानपुर गांव में बीते 24 घंटों में बुखार से तीन लोगों की मौत से गांव में हड़कंप मचा हुआ है। दो सौ से अधिक लोग बुखार से पीड़ित हैं, जिनका उपचार चल रहा है। लोग घरों से निकलने से कतरा रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि सिस्टम मौतों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। इसका नतीजा गांव के लोग भुगत रहे हैं। एसडीएम नागेंद्र पांडेय ने मंगलवार को दोपहर गांव रसिया खानपुर पहुंचकर स्थिति को परखा तो वहां स्वास्थ्य शिविर लगा हुआ नहीं मिला। इसपर उन्होंने नाराजगी जताई। कुछ देर बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने गांव में शिविर लगा दिया। बाढ़ की चपेट में आया था गांव पिछले दिनों जिले में हुई भारी बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद बीसलपुर तहसील क्षेत्र के कई गांवों भी बाढ़ की जद में आए थे। इसमें रसिया खानपुर गांव भी शामिल था। गांव में जलभराव की स्थिति बनी थी। बाढ़ के बाद जलभराव की स्थिति तो सामान्य हो गई, लेकिन संक्रमण तेजी के साथ पनपने लगा और बीमार फैल गई। ग्रामीणों के अनुसार पिछले 10 दिनों में सैकड़ों लोग बुखार से ग्रस्त हो गए। स्थिति गंभीर होने पर बरेली और शाहजहांपुर में ले जाकर मरीजों को भर्ती कराया गया। गांव में झोलाछापों के क्लीनिक भी मरीजों से भरने लगे। ग्रामीणों के अनुसार यही वजह रही कि पिछले 10 दिनों में सात लोगों की मौत बुखार से हुई है। निजी अस्पतालों की जांच रिपोर्ट में भी बुखार की पुष्टि हुई लेकिन पूर्व में हुई चार मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के नाम पर बुखार की बात को नकारते हुए अलग-अलग बीमारियों से मौत होने का दावा किया गया। मंगलवार को गांव के अल्लू खान की पुत्री सकीना, 60 वर्षीय पूती बेगम व रेहान हुसैन (22) पुत्र एजाज हुसैन की बुखार से मौत हो गई। मंगलवार को ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के विरोध में प्रदर्शन किया। एसडीएम को निरीक्षण में नहीं लगा मिला स्वास्थ्य शिविर गांव रसिया खानपुर में मंगलवार को तेज बुखार से तीन लोगों की मौत होने की जानकारी मिलने पर एसडीएम, कोतवाल संजीव शुक्ला के साथ गांव में पहुंचे। जहां मृतकों के घर जाकर अफसरों ने जानकारी की। घर वालों ने बताया कि उनके परिजनों की तेज बुखार से ही मौत हुई है। इसके बाद एसडीएम स्वास्थ्य शिविर की स्थिति परखने को उच्च प्राथमिक विद्यालय गए, लेकिन मौके पर शिविर लगा हुआ नहीं मिला। इसपर उन्होंने नाराजगी जाहिर की तो दोपहर बाद स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने आयुष्मान केंद्र में स्वास्थ्य शिविर लगाया। आयुष्मान केंद्र के द्वार पर ग्रामीणों ने रोष जताया। लोगों का आरोप था कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी जांच में रिपोर्ट नेगेटिव दिखा देते हैं। जबकि बरेली के निजी अस्पतालों में उन्हीं मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। प्रदर्शनकारियों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति काफी रोष दिखा। सीएमओ डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि रसिया खानपुर गांव में तीन और लोगों की मौत की सूचना मिली है। स्थलीय निरीक्षण कर जांच कराई जा रही है। स्वास्थ्य कैंप लगाकर भी लोगों के सैंपल लिए जा रहे हैं। जांच के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी। तीन हफ्ते पहले मौतों को गंभीरता से लेते तो नहीं जातीं और जानें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गांव रसिया खानपुर में तेज बुखार से पहले हुई मौतों को गंभीरता से लिया होता तो अब तीन और लोगों की जान नहीं जातीं। गांव रसिया खानपुर में करीब तीन सप्ताह पूर्व तेज बुखार फैला था। पिछले सप्ताह तेज बुखार से इस गांव में चार लोगों की मौत हो गई थी और करीब दो सौ लोग तेज बुखार की चपेट में आ गए थे। मामला जानकारी में आने पर स्वास्थ्य विभाग ने अपने स्तर से बीमारी का उपचार शुरू कर दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने पहले हुईं मौतों को हल्केपन से लिया। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने यदि पहले हुई ग्रामीणों की मौतों को गंभीरता से लिया होता और उसी हिसाब से बीमार लोगों का उपचार किया होता तो बाद वाली मौत नहीं होती। ग्रामीणों ने जताया रोष मोहम्मद हुसैल ने बताया कि गांव में आने वाली बीसलपुर के स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरी तरह से निष्क्रिय है। टीम की निष्क्रियता के कारण ही स्थिति बदतर हुई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम के लोगों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। समीम खान ने कहा कि गांव के जितने बीमार हैं उनका घर-घर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उपचार करना चाहिए। जब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर अपने बीमारी का उपचार नहीं करेगी तब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाएगा। इदरीश खान ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम बीमारों का कायदे से उपचार करने के बजाय अपना बचाव करती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लापरवाही की वजह से स्थिति खराब हुई है।  

हाईकोर्ट में आज सुनवाई: सहारा प्रबंधन ने शहर सील करने के आदेश को दी चुनौती

लखनऊ  सहारा ने नगर निगम द्वारा सहारा शहर में लीज पर दी गई जमीनों और उन पर बनी संपत्तियों में हस्तक्षेप को चुनौती दी है। याचिका 8 अक्तूबर को न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। याचिका में नगर निगम द्वारा 8 और 11 सितंबर 2025 को जारी किए गए आदेशों को रद्द करने का आग्रह किया गया है। सहारा ने याचिका में कहा है कि इस मामले में सिविल कोर्ट में पहले से ही स्थगन आदेश लागू है। इसके अलावा, आर्बिट्रेशन की कार्यवाही में भी नगर निगम को सहारा के पक्ष में लीज एग्रीमेंट बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन नगर निगम ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। कंपनी का यह भी आरोप है कि कार्रवाई करने से पहले उसे सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया। याचिका के अनुसार, नगर निगम ने 22 अक्टूबर 1994 और 23 जून 1995 को गोमती नगर में सहारा को जमीन पट्टे पर दी थी। सहारा ने इन जमीनों पर 2480 करोड़ रुपए की लागत से 87 आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां विकसित की हैं। दशकों से विवादों में है यह जगह, बन सकती है विधानसभा? सहारा शहर शुरू से ही विवादों में रहा। नगर निगम से लीज मिलने के तीन साल बाद ही कानूनी विवाद शुरू हो गया था, जो 27 साल तक चलता रहा। ऐसे में आवासीय योजना कभी परवान नहीं चढ़ सकी और करोड़ों का लीज रेंट भी नगर निगम को नहीं मिला। नगर निगम ने सहारा हाउसिंग कंपनी को 130 एकड़ जमीन आवासीय योजना और 40 एकड़ ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए 30 साल की लीज पर दी थी। यह अनुबंध महज 100 रुपये के स्टांप पेपर पर किया गया था, लेकिन तीन साल बाद लीज शर्तों के उल्लंघन पर तत्कालीन नगर आयुक्त दिवाकर त्रिपाठी ने इसे निरस्त करने का नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद मामला अदालत में चला और साल तक अटका रहा। करीब 10 साल पहले जब सहारा की स्थिति सुधरी तो लीज रजिस्टर्ड की गई और संशोधन भी हुआ। एलडीए में मानचित्र भी पास करने के लिए भेजा गया। सहारा ने 15 आवंटियों की सूची भी दी, ताकि यह साबित कर सके कि योजना पर काम चल रहा है, लेकिन वे आवंटी कभी सामने नहीं आए और उनके नाम पर लीज डीड भी नहीं हो सकी। सेबी के दखल और कानूनी उलझनों के चलते योजना ठप पड़ गई। लीज की अवधि पूरी होने के बाद नगर निगम ने जमीन पर कब्जा ले लिया है। सहारा सिटी की जमीन पर अब क्या बनेगा, इसे लेकर कई अटकलें हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार नई विधानसभा भवन के लिए करीब 200 एकड़ जमीन की तलाश लंबे समय से कर रही है। ऐसे में नगर निगम की 170 एकड़ और एलडीए की 75 एकड़ जमीन को मिलाकर करीब 245 एकड़ क्षेत्र यहां उपलब्ध है। यह जगह लोकेशन और आवागमन दोनों के लिहाज से उपयुक्त मानी जा रही है।  

विकास और पर्यावरण में संतुलन को लेकर योगी सरकार की प्रतिबद्धता का बनेगा प्रतीक

पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनेगा पीएम मित्र पार्क- मुख्यमंत्री योगी उद्योगों की स्थापना के साथ-साथ योगी सरकार का हरियाली पर भी विशेष फोकस लखनऊ में बन रहे पीएम मित्र पार्क में 11% भूमि होगी हरियाली और फलदार वृक्षारोपण को समर्पित विकास और पर्यावरण में संतुलन को लेकर योगी सरकार की प्रतिबद्धता का बनेगा प्रतीक   प्रोजेक्ट के तहत ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और वाटर रिजर्वायर से होगा प्राकृतिक संतुलन 55% भूमि पर होगी इंडस्ट्रियल यूनिट्स की स्थापना, 3 फीसदी भूमि पर बनेंगे रेसीडेंस पीएम मित्र पार्क के माध्यम से 1000 करोड़ से अधिक निवेश और एक लाख रोजगार का लक्ष्य   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार एक नए औद्योगिक युग की दिशा में कदम बढ़ा रही है। राज्य में प्रस्तावित पीएम मित्र (पीएम मित्र) पार्क न केवल उद्योगों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी एक आदर्श उदाहरण बनेगा। सरकार की नीति “विकास के साथ पर्यावरण” को साकार करने की दिशा में यह पार्क एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी औद्योगिक विकास परियोजना में हरियाली और पारिस्थितिक संतुलन से कोई समझौता नहीं होगा। यही कारण है कि लखनऊ और हरदोई जिलों में प्रस्तावित पीएम मित्र पार्क का लेआउट प्लान पर्यावरणीय दृष्टि से पूरी तरह संतुलित रखा गया है। 11 फीसदी भूमि होगी ग्रीनरी को समर्पित ड्राफ्ट लेआउट प्लान के अनुसार, 55 फीसदी भूमि पर इंडस्ट्रियल यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। वहीं, 3 फीसदी भूमि को रेसीडेंशियल उपयोग, 4 फीसदी इंस्टीट्यूशनल, 2 फीसदी ट्रांसपोर्ट हब, और 4 फीसदी यूटिलिटीज व एमेनिटीज के लिए आरक्षित किया गया है। सबसे खास बात यह है कि पूरे पार्क की 11 फीसदी भूमि ग्रीनरी और फ्रूट प्लांटेशन के लिए सुरक्षित रखी गई है, जिसमें ग्रीन एरिया, ग्रीन बेल्ट और बफर जोन विकसित किए जाएंगे। यह कदम न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि स्थानीय जैव विविधता को भी संरक्षित रखेगा। इसके अलावा, 13 फीसदी क्षेत्र में नई सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जबकि 0.1 फीसदी हिस्से में मौजूदा सड़कों को सुदृढ़ किया जाएगा। जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 2 फीसदी भूमि नाला और वाटर रिजर्वायर के लिए और 0.5 फीसदी भूमि रीक्रिएशनल उपयोग के लिए निर्धारित की गई है। प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 1680 करोड़ रुपए सरकार के प्रस्ताव के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1,680 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। यह पार्क कुल 100 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा, जिसमें एक लाख से अधिक रोजगार सृजन और 10 हजार करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है। पार्क में पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री, ऊर्जा-संवेदनशील डिजाइन, वर्षा जल संचयन, सोलर पावर और ई-वेस्ट मैनेजमेंट जैसे प्रावधान भी शामिल किए जाएंगे। इस पहल के माध्यम से उत्तर प्रदेश न सिर्फ“भारत का ग्रोथ इंजन” बनेगा, बल्कि“ग्रीन स्टेट मॉडल” के रूप में भी विकसित होगा।   

उत्तर-दक्षिण संस्कृति का संगम बनेगी अयोध्या, योगी सरकार ने संवार दिया बृहस्पति कुंड परिसर

अयोध्या में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भव्य स्वागत  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बृहस्पति कुंड में दक्षिण भारत के तीन महान संगीतज्ञों की मूर्तियों का करेंगी अनावरण  उत्तर-दक्षिण संस्कृति का संगम बनेगी अयोध्या, योगी सरकार ने संवार दिया बृहस्पति कुंड परिसर अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या बुधवार को एक बार फिर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षण की साक्षी बनी, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपनी दो दिवसीय यात्रा पर यहां पहुंचीं। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने केंद्रीय मंत्री का गरिमामय स्वागत किया। स्वागत के दौरान वाद्ययंत्रों की पारंपरिक धुनों ने अयोध्या की सांस्कृतिक आत्मा को स्पंदित कर दिया। एयरपोर्ट से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच केंद्रीय मंत्री का काफिला सिविल लाइन्स स्थित होटल रेडिशन पहुंचा, जहां कुछ देर विश्राम के बाद वह अपने निर्धारित कार्यक्रमों के लिए रवाना हुईं। बृहस्पति कुंड में होगा सांस्कृतिक आयोजन निर्मला सीतारमण का यह दौरा टेढ़ी बाजार स्थित बृहस्पति कुंड में आयोजित एक विशेष सांस्कृतिक आयोजन के लिए है। इस अवसर पर वह प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संयुक्त रूप से दक्षिण भारत के तीन महान संगीतज्ञों संत त्यागराज स्वामीगल, पुरंदर दास और अरुणाचल कवि की मूर्तियों का अनावरण करेंगी। संगीत और भक्ति का संगम बनेगा बृहस्पति कुंड बृहस्पति कुंड परिसर में स्थापित की गई ये मूर्तियां भारतीय संगीत, भक्ति और कला परंपरा का जीवंत प्रतीक हैं। इन संत संगीतज्ञों ने भक्ति संगीत को भारतीय संस्कृति का आत्मस्वर बनाया। अब उनकी मूर्तियों का अयोध्या की पावन भूमि पर स्थापित होना उत्तर-दक्षिण सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण है।

अखिलेश यादव पहुंचे आजम खां के घर, मुलाकात के दौरान सुरक्षा कड़ी — प्रेस को रोका बाहर

मुरादाबाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव बुधवार दोपहर बाद रामपुर पहुंचे। उनका हेलीकॉप्टर जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में उतरा। इसके बाद वह सीधे आजम खां के घर पहुंचे। लगभग तीन साल बाद अखिलेश यादव की आजम खां से आमने-सामने मुलाकात हो रही है। उनके पहुंचते ही यूनिवर्सिटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई। पुलिस ने मीडिया कर्मियों को आजम के घर के बाहर ही रोक दिया है। अखिलेश यादव का काफिला जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचा तो सपा कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखने को मिला। कार्यकर्ताओं की भीड़ नारे लगाती रही। जिले के सपा जिलाध्यक्ष समेत तमाम वरिष्ठ नेता पहले से ही यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद थे। पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन मंगलवार से ही सतर्क था। जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खां के घर के आसपास कई थानों की पुलिस तैनात की गई है। पुलिस के आला अधिकारी लगातार मौके पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। खुफिया विभाग ने भी इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, अखिलेश यादव और आजम खां के बीच यह मुलाकात करीब एक घंटे तक चलेगी। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे गिले-शिकवे दूर करने और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही अखिलेश यादव आजम खां की सेहत का हालचाल भी जानेंगे। प्रशासन ने अखिलेश यादव की सुरक्षा के लिए तीन मजिस्ट्रेट और सीओ स्तर के अधिकारी तैनात किए हैं। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। आजम खां के मोहल्ले की ओर जाने वाले कई रास्तों और दुकानों को बंद करा दिया गया है। सपा कार्यकर्ताओं में अखिलेश यादव के दौरे को लेकर जबरदस्त उत्साह है। रामपुर में अखिलेश से मिलेंगे सपाई, दफ्तर प्रकरण पर होगी चर्चा समाजवादी पार्टी के पदाधिकारी बुधवार को रामपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर जिला कार्यालय विवाद पर उनके साथ चर्चा करेंगे। सपा को कार्यालय खाली करने के लिए प्रशासन ने चार दिनों की मोहलत दी ही हुई है जिसे लेकर सपाइयों में गहरा अंसतोष है। जिलाध्यक्ष जयवीर यादव के अनुसार पार्टी कार्यालय विवाद को लेकर कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। उन्होंने कहा कि बुधवार को रामपुर में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से पूरी जानकारी साझा की जाएगी और उनके निर्देशों के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। रामपुर में जिलाध्यक्ष जयवीर यादव के अलावा जिला महासचिव, कोषाध्यक्ष, महिला सभा की अध्यक्ष और युवा प्रकोष्ठ के कई पदाधिकारी भी जाएंगे जो सपा प्रमुख अखिलेश यादव को सीधा रिपोर्ट करेंगे।

इस बार अयोध्या का दीपोत्सव रहेगा ऐतिहासिक, राम की पैड़ी पर जलेंगे 6 विशालकाय दीप

अयोध्या  भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और धार्मिक भव्यता की मिसाल बनने जा रही है. दीपावली से पूर्व आयोजित होने वाले दीपोत्सव को इस बार और भी दिव्य और अद्भुत स्वरूप देने की तैयारी जोरों पर है. विशेष आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं राम की पैड़ी पर बन रहे छह विशालकाय दीपक, जो इस आयोजन को एक नई पहचान देंगे.  बिहार के कुशल शिल्पकारों द्वारा इन पत्थर के दीपों का निर्माण किया जा रहा है. ये दीपक बिजली से प्रज्वलित करने की तकनीक से भी लैस होंगे. निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है और इन्हें 10 अक्टूबर तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई है, जिससे दीपोत्सव में ये आकर्षण का केंद्र बन सकें.  इन दीपों को विशेष रूप से इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि ये अयोध्या में होने वाले भव्य दीपोत्सव का स्थायी प्रतीक बन जाएं. हालांकि, बिजली से जलाने के लिए आवश्यक प्रोजेक्टरों की स्थापना फिलहाल समय की कमी के चलते संभव नहीं दिख रही है, इसलिए उच्चस्तरीय चर्चा के बाद इन्हें फिलहाल तेल से प्रज्वलित किए जाने की योजना बनाई जा रही है.  राम की पैड़ी का हो रहा भव्य सौंदर्यीकरण इन दीपों के निर्माण के साथ-साथ राम की पैड़ी का भी भव्य सौंदर्यीकरण किया जा रहा है. यूपीपीसीएल द्वारा करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से सीढ़ियों, घाटों और आसपास की संरचनाओं को सजाया जा रहा है. यह क्षेत्र न केवल धार्मिक महत्त्व रखता है, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आभार का केंद्र भी है.  इस बार पैड़ी के किनारे ऐसी सीढ़ियां बनाई जा रही हैं जिन्हें ओपन थियेटर के रूप में भी उपयोग किया जा सकेगा. इससे भविष्य में सांस्कृतिक और धार्मिक प्रस्तुतियों के लिए स्थायी मंच उपलब्ध होगा. हालांकि, कुछ निर्माण कार्य जैसे छत्री, राम-लक्ष्मण-सीता के स्तंभ दीपोत्सव से पूर्व पूर्ण नहीं हो पाएंगे, लेकिन इन्हें उत्सव के बाद पूरा किया जाएगा.  ये है खास प्लान  इस बार का दीपोत्सव 2025 नए विश्व रिकॉर्ड बनाएगा. क्योंकि, दीपोत्सव में 26 लाख से ज्यादा मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे. 2,100 श्रद्धालुओं द्वारा भव्य आरती की जाएगी. साथ ही साथ 1,100 ड्रोन से हवाई प्रदर्शन भी होगा. पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि दीपोत्सव 2025 अब तक का सबसे भव्य उत्सव बने.   विशेष राम परिक्रमा यात्रा दीपोत्सव से पूर्व 12 अक्टूबर को एक विशेष राम परिक्रमा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है जिसकी अगुवाई राम जन्मभूमि ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास करेंगे. यह आयोजन निर्मोही अखाड़ा द्वारा किया जा रहा है जिसमें देशभर से डेढ़ हजार से अधिक संत भाग लेंगे.  रामकोट बैरियर से शुरू होकर यह परिक्रमा पूरे अयोध्या क्षेत्र में भ्रमण करेगी, जिसमें आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे. इस परिक्रमा का उद्देश्य अयोध्या को फिर से रामराज्य की भावना से जोड़ना और दीपोत्सव के आध्यात्मिक पक्ष को मजबूत करना है.  महंत राम दिनेश आचार्य ने दीपोत्सव के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जब भगवान श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे थे, तो नगरवासियों ने उनके स्वागत में घर-घर दीप जलाकर नगर को आलोकित किया. तभी से यह परंपरा दीपावली के रूप में मनाई जाती है.  दीप जलाना केवल रोशनी करना नहीं बल्कि अंधकार पर प्रकाश की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की जीत, और भक्ति की अभिव्यक्ति है. सनातन धर्म में दीपक जलाकर पूजा आरंभ करने की परंपरा इसका प्रमाण है. अयोध्या में इस वर्ष का दीपोत्सव न केवल भक्ति और आस्था का प्रतीक होगा बल्कि यह भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक चेतना का उत्सव भी बनेगा. राम की पैड़ी पर बन रहे विशाल दीप भव्य परिक्रमा और रामनगरी की चमक यह दर्शाते हैं कि अयोध्या केवल एक स्थान नहीं बल्कि आस्था ऊर्जा और परंपरा की जीवंत प्रतीक है. 

नारी स्वावलंबन को मिली मजबूती, सीएम योगी ने 15 सेवा शक्ति केंद्रों का किया शुभारंभ

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पूर्व विधायक स्वर्गीय डी.पी. बोरा की 85वीं जयंती के अवसर पर मिशन शक्ति 5.0 के अंतर्गत मातृशक्ति वंदन और 15 सेवा शक्ति केंद्रों (सिलाई प्रशिक्षण केंद्र) का शुभारंभ किया। इसी दौरान उन्होंने स्व. डी.पी. बोरा की प्रतिमा का वर्चुअल अनावरण किया और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली मातृशक्तियों का सम्मान भी किया। सीएम योगी ने नारी सशक्तीकरण और सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए स्वर्गीय डी.पी. बोरा के संघर्षों और समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हिए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महर्षि वाल्मीकि और परम कृष्ण भक्त मीराबाई की जयंती का दिन भी है। उन्होंने कहा कि आज का दिन उत्तर प्रदेश के लिए विशेष महत्व रखता है। यह शरद पूर्णिमा का पावन पर्व है, जो महर्षि वाल्मीकि की जयंती और मीराबाई के जन्मदिन के साथ-साथ स्वर्गीय डी.पी. बोरा की जयंती के रूप में भी मनाया जा रहा है। मैं इस अवसर पर महर्षि वाल्मीकि और मीराबाई को नमन करता हूं और स्वर्गीय डी.पी. बोरा को प्रदेश सरकार और प्रदेशवासियों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। सीएम योगी ने किया मातृ शक्ति का सम्मान व सेवा शक्ति केंद्रों का उद्घाटन कार्यक्रम में सीएम योगी ने मिशन शक्ति 5.0 के तहत 15 सेवा शक्ति केंद्रों का उद्घाटन किया गया, जो महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन केंद्रों का संचालन डी.पी. बोरा स्मृति समिति के सहयोग से किया जा रहा है। सीएम योगी ने इन केंद्रों को नारी स्वावलंबन का प्रतीक बताते हुए कहा कि ये केंद्र महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही, समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली मातृ शक्तियों को सम्मानित किया गया। इनमें पद्मश्री हिन्दी साहित्यकार प्रो. विद्या बिन्दु सिंह, शास्त्रीय संगीतज्ञ सुनीता झींगरन, शीला मिश्रा, शालू सिंह और डॉ. चंद्रावती जैसी विभूतियां शामिल रहीं। इन महिलाओं ने शिक्षा, साहित्य, संगीत, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी मेहनत और समर्पण से समाज को नई दिशा दी है। सीएम ने सम्मानित महिलाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन मातृ शक्तियों ने अपने कार्यों से समाज को प्रेरित किया है। इनका सम्मान हम सभी के लिए गर्व का विषय है। एक संघर्षशील नेता के साथ साथ समाज के वंचित, दलित और शोषित वर्गों की आवाज थे स्वर्गीय डी.पी. बोरा मुख्यमंत्री ने स्वर्गीय डी.पी. बोरा को एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि डी.पी. बोरा जी ने लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में और बाद में विधायक के रूप में समाज के वंचित, दलित और शोषित वर्गों की आवाज को बुलंद किया। उस समय लखनऊ में गैंगवार और अराजकता का माहौल था, लेकिन डी.पी. बोरा जी ने अपने संघर्षों से न केवल गरीबों और व्यापारियों के हितों की रक्षा की, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी प्रदान की। उनकी मूर्ति का अनावरण और सेवा शक्ति केंद्रों का शुभारंभ उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम में प्रख्यात कवि सर्वेश अस्थाना ने अपनी कविता के माध्यम से सामाजिक संवेदनाओं को जागृत किया। उनकी कविता में नारी गरिमा, सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के साथ-साथ दहेज जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता का संदेश था। सीएम योगी ने उनकी लेखनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक कवि की लेखनी समाज की विसंगतियों पर प्रहार करती है और उसे नई दिशा देती है। सर्वेश अस्थाना अपनी कविता के माध्यम से भगवान राम के चरित्र और सामाजिक मूल्यों को उजागर किया, जो समाज के लिए प्रेरणादायी है। रामायण एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक है- सीएम योगी सीएम योगी ने महर्षि वाल्मीकि की रामायण को सामाजिक, धार्मिक और भौगोलिक दृष्टिकोण से अद्वितीय बताते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि रामायण में भगवान राम का चरित्र धर्म का मूर्त रूप है। महर्षि वाल्मीकि ने समाज को एक आदर्श चरित्र प्रदान किया, जो आज भी प्रासंगिक है। सीएम योगी ने श्री राम जन्मभूमि आंदोलन और अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि रामराज्य की स्थापना की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि  रामायण काल की वनस्पतियों और पर्यावरण को पुनर्जनन करने का कार्य भी चल रहा है। यह हमारी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने का प्रयास है। इसी तरह, मीराबाई की भक्ति और सामाजिक समरसता को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मीराबाई ने अपने गुरु रविदास जी के सान्निध्य में कृष्ण भक्ति के माध्यम से समाज में आस्था और समरसता का संदेश दिया। मिशन शक्ति अभियान नारी सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण- सीएम  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनथ ने मिशन शक्ति अभियान को प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए कहा कि यह अभियान महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, और आर्थिक स्वावलंबन के क्षेत्र में सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति के तहत हम महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहे हैं, बल्कि उनकी सुरक्षा और सम्मान को भी सुनिश्चित कर रहे हैं। डी.पी. बोरा स्मृति समिति के माध्यम से संचालित सौ से अधिक सेवा शक्ति केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

यूपी के चंदौली में बाढ़ का संकट, घरों को नुकसान और फसलें पूरी तरह बर्बाद

चंदौली उत्तर प्रदेश के चंदौली और आसपास के इलाकों में पिछले तीन-चार दिनों से हो रही भारी बारिश और डैम से छोड़े गए पानी ने 'जल प्रलय' जैसे हालात पैदा कर दिए हैं. जिले की सड़कें डूब गई हैं, कच्चे मकान धराशाई हो रहे हैं और 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले चंदौली में सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई है. लोग त्राहिमाम कर रहे हैं.  सड़कें जलमग्न, खेतों में डूबी धान की फसल चंदौली में लगातार बारिश से मिर्जापुर के जलाशय लबालब भर गए, जिससे उनका पानी रिलीज किया गया. यह पानी पहाड़ी नदियों के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में पहुंच गया. पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर से चकिया जाने वाली स्टेट हाईवे पर शिवनाथपुर गांव के पास डेढ़ से 2 फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को जोखिम उठाकर सड़क पार करनी पड़ रही है. ग्रामीणों ने बताया कि डैम से अचानक पानी छोड़े जाने से हजारों बीघा धान की फसल डूब गई है और यदि पानी जल्द नहीं निकला तो फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी.  नियमताबाद में कच्चे मकान धराशाई लगातार बारिश और डैम के पानी से केवल खेत और सड़कें ही नहीं डूबी हैं, बल्कि आबादी के इलाके भी प्रभावित हुए हैं. नियमितबाद ब्लॉक के चंदाईत गांव में जलजमाव की वजह से कच्चे मकान धराशाई हो रहे हैं. गोपाल मौर्य का कच्चा मकान रात में अचानक भरभराकर गिर गया. राहत की बात रही कि परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए, लेकिन एक कमरे में बंधी दो गायें गंभीर रूप से घायल हो गईं. गोपाल मौर्य के भाई ओमप्रकाश ने बताया कि उनका खाने-पीने का सामान भी बर्बाद हो गया है. देखें ग्राउंड के हालात-  स्कूल-पंचायत भवन में भी भरा पानी चंदौली के हालात इतने गंभीर हैं कि गांव के सरकारी भवन भी सुरक्षित नहीं हैं. चंदाईत गांव में प्राइमरी स्कूल हो या पंचायत भवन, हर जगह पानी ही पानी भरा है. सुनील कुमार मौर्य ने बताया कि गांव के स्कूल में भी पानी भर गया है, जिसके चलते बच्चों के पठन-पाठन में भी समस्या आ रही है. स्थानीय निवासी रब्बु खान के मुताबिक, बारिश और पानी की वजह से गांव के 8 से 10 घर गिर गए हैं. प्रभावित ग्रामीण त्राहिमाम कर रहे हैं.