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चार दिन की तलाश के बाद मौत: बलूचिस्तान में गोलियों से छलनी शव की दिल दहला देने वाली घटना

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इस्लामाबाद  पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधन-समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान में मानवाधिकारों का संकट गहराता जा रहा है। इस सप्ताह चार लापता बलूच पुरुषों की गोली से छलनी लाशें बरामद होने के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर दौड़ गई है। परिवारों और मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों तथा सरकारी-प्रायोजित मिलिशिया पर इन हत्याओं का आरोप लगाते हुए इसे सिस्टमैटिक हिंसा का हिस्सा बताया है। ये घटनाएं बलूचिस्तान में जारी जबरन गुमशुदगी और अतिरिक्त-न्यायिक हत्याओं की एक कड़ी हैं, जो प्रांत की स्वतंत्रता आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं। स्थानीय समाचार पोर्टल द बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, तीन व्यक्तियों की पहचान कुद्दूस बलूच (पुत्र उमैद), नेक साल बलूच (पुत्र दिलवाश) और नजर अर्ज मुहम्मद (पुत्र अर्ज मुहम्मद) के रूप में हुई है। इनकी लाशें केच जिले के बुलैदा इलाके में सोराप डैम के पास मिलीं। ये तीनों पेशे से चालक थे और सीमा पार व्यापार से जुड़े हुए थे। उनके परिजनों का कहना है कि 30 सितंबर को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और तथाकथित "डेथ स्क्वॉड" नामक एक सरकारी समर्थित मिलिशिया ने उन्हें हिरासत में लिया था। अगले ही दिन, 1 अक्टूबर को, उनकी गोलियों से छलनी लाशें बरामद हुईं। समाचार पोर्टल ने इससे पहले नजर अर्ज मुहम्मद के लापता होने की रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें भी इसी मिलिशिया ने अगवा किया था। लगातार ऐसे मामलों में इन समूहों का नाम सामने आने से लोगों में यह भय गहराता जा रहा है कि राज्य ऐसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को या तो प्रोत्साहित कर रहा है या नजरअंदाज। घर से उठाकर मार दिया एक अन्य घटना में लसबेला जिले के उथल इलाके में मकरान कोस्टल हाईवे के पास लेयरी हसन होटल के समीप एक शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान जंजैब बलूच (पुत्र रोशिन) के रूप में हुई है। वह ग्वादर जिले के पसनी क्षेत्र के बाब्बर शूर इलाके का निवासी और मजदूर था। जानकारी के अनुसार, जंजैब को 28 सितंबर को उसके घर से उठा लिया गया था। बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों और उसके बाद क्षत-विक्षत शव मिलने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। मानवाधिकार संगठनों की बार-बार की अपीलों के बावजूद सरकार अब तक किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई करने या जवाबदेही तय करने में विफल रही है। पीड़ित परिवार पारदर्शी जांच और न्याय की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अधिकारी लगातार चुप्पी साधे हुए हैं। व्यापक संदर्भ: बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत होने के बावजूद सबसे गरीब है। यहां तेल, कोयला, सोना, तांबा और गैस जैसे अपार संसाधन हैं, लेकिन स्थानीय बलूच आबादी को इसका कोई लाभ नहीं मिलता। चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) परियोजना के तहत ग्वादर बंदरगाह का विकास हो रहा है, लेकिन इससे बलूच लोगों में असंतोष बढ़ा है। वे आरोप लगाते हैं कि पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियां उनके संसाधनों का दोहन कर रही हैं, जबकि स्थानीय लोगों को दबाया जा रहा है। मानवाधिकार काउंसिल ऑफ बलूचिस्तान (एचआरसीबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के पहले छह महीनों में प्रांत में 500 से अधिक जबरन गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए। जनवरी में 117, मई में 138 और जून में 84 लोग लापता हुए। इनमें से कई की लाशें बाद में 'स्टेज्ड एनकाउंटर' (फर्जी मुठभेड़) में मारी गईं बताकर बरामद की जाती हैं। एचआरसीबी ने इसे 'डर्टी वॉर' करार दिया है, जिसमें छात्र, कवि, शिक्षक और कार्यकर्ता निशाना बनाए जा रहे हैं। पिछले साल नवंबर में भी मूसा खेल जिले में चार लापता पुरुषों को काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) द्वारा 'स्टेज्ड एनकाउंटर' में मारा गया था, जिसके बाद बलूच याकज्हेती कमिटी ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। इस साल सितंबर में भी नौ लाशें चार दिनों में बरामद हुईं, जो सभी गुमशुदा व्यक्तियों की थीं।  

भारतीय रिसर्चर प्रभावित, ट्रंप सरकार की H-1B पॉलिसी के खिलाफ कई संगठनों ने खोला मोर्चा

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वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई H-1B योजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सैन फ्रांसिस्को की एक अदालत में यूनियनों, नियोक्ताओं और धार्मिक संगठनों के एक गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के आदेश को चुनौती दी है। यह मुकदमा राष्ट्रपति के उस आदेश को रद्द करने की मांग करता है, जिसमें H-1B आवेदन पर एकमुश्त 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख) की फीस लगाने का प्रावधान किया गया है। याचिका में कहा गया है कि यह कदम गैरकानूनी है और H-1B कार्यक्रम में अभूतपूर्व बदलाव है। दलील दी गई है कि राष्ट्रपति के पास स्वतंत्र रूप से राजस्व जुटाने या कर लगाने का अधिकार नहीं है और न ही वह यह तय कर सकते हैं कि इन निधियों का उपयोग कैसे होगा। मुकदमे में फीनिक्स डो नाम की एक भारतीय नागरिक का उदाहरण दिया गया है, जो उत्तरी कैलिफोर्निया में रहकर पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। उनकी संस्था ने ‘कैप-एक्ज़ेम्प्ट’ H-1B याचिका दायर की थी, लेकिन नई फीस नीति के कारण यह प्रक्रिया रोक दी गई है। याचिका के अनुसार, “फीनिक्स डो का शोध उम्र, डाइबिटीज और दुर्लभ आनुवांशिक बीमारियों से जुड़ी दृष्टि-हानि के कारणों को पहचानने और इलाज के नए तरीके विकसित करने पर केंद्रित है।” मुकदमे में कहा गया है कि डो विश्वविद्यालय की पहली पोस्टडॉक्टोरल स्कॉलर हैं, जिन पर संस्था का भविष्य का शोध और फंडिंग निर्भर करता है। लेकिन नई नीति के चलते उनका आवेदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। याचिका में आगे कहा गया, “वह अस्थिरता और तनाव से जूझ रही हैं, जिससे उनका PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) बढ़ गया है। यदि राहत नहीं मिली तो उन्हें चार महीने में अमेरिका छोड़ना पड़ेगा, जिससे उनके करियर और निजी जीवन दोनों को गंभीर नुकसान होगा।” मुकदमे में कहा गया है कि नई नीति से अमेरिका के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को झटका लगेगा। फीनिक्स डो की विदाई से उनका शोधकार्य बाधित होगा, लैब का चल रहा काम रुकेगा, भविष्य की फंडिंग प्रभावित होगी और संभवतः दृष्टि रोगों के उपचार की दिशा में हो रही प्रगति भी धीमी पड़ जाएगी। इस मामले को यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स यूनियन, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स, जस्टिस एक्शन सेंटर, डेमोक्रेसी फॉरवर्ड फाउंडेशन, ग्लोबल नर्स फोर्स और कई धार्मिक संगठनों ने मिलकर दायर किया है। इन समूहों का कहना है कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग, यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) और स्टेट डिपार्टमेंट ने यह आदेश बिना उचित प्रक्रिया के लागू किया और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विचार नहीं किया। याचिका में चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक शुल्क वसूलना नवाचार को रोक देगा और अमेरिका के वैज्ञानिक तथा शैक्षणिक क्षेत्र को नुकसान पहुंचाएगा।

बिहार चुनावी संग्राम: मोदी ने राहुल और राजद पर साधा निशाना, कहा– ‘जननायक’ का नाम मत चुराओ

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नई दिल्ली  पीएम सेतू योजना की लॉचिंग और आईटीआई दीक्षांत समारोह के मौके पर आयोजित युवा संवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के विज्ञान भवन से राहुल गांधी और बिहार की लालू-राबड़ी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के जननायक पद की चोरी की कवायद की जा रही है। बिहार के लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। पिछले दिनों वोटर अधिकार यात्रा से समय कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी को तो पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव को जननायक बताया था। कांग्रेस के ट्विटर हैंडल पर राहुल गांधी को जननायक बताकर पोस्ट किया गया था। युवा संवाद को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि कौशल दीक्षांत समारोह में बिहार को नई स्किल यूनिवर्सिटी मिली है। नीतीश जी की सरकार ने इस यूनिवर्सिटी का नाम भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के नाम पर रखा है। मैं बिहार के लोगों को कहूंगा चौकन्ने रहिए। यह जननायक पद कर्पूरी ठाकुर से ही शोभाएमान है। बिहार की जनता ने उनकी कृति को देखते हुए यह सम्मान दिया। आजकल कुछ लोग जननायक की भी चोरी करने में लग गए हैं। इसलिए बिहार के लोगों से जागृत रहने का आग्रह करता हूं। हमारे कर्पूरी ठाकुर साहब को जनता के द्वारा दिया गया सम्मान कोई चोरी न कर ले। पीएम ने कहा कि भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर जी ने अपना पूरा जीवन समाज की सेवा और शिक्षा विस्तार के लिए लगा दिया। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि समाज का सबसे कमजोर व्यक्ति भी आगे बढ़े। उनके नाम पर बनने वाले इसके लिए यूनिवर्सिटी इस सपने को आगे बढ़ने का माध्यम है। बिहार के हजारों युवा हमारे साथ जुड़े हैं। दो-ढाई दशक पहले बिहार में शिक्षा व्यवस्था कैसी थी, इसका अंदाजा उन्हें नहीं होगा। एक भी ढंग के संस्थान नहीं थे। ईमानदारी से स्कूल नहीं खुलते थे। कोई भर्ती नहीं होती थी। मजबूरी में लाखों बच्चों को बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में पढ़ने जाना पड़ता था। असली पलायन यहीं से शुरू होता था। पीएम ने कहा कि जिस पेड़ की जड़ों में कीड़ा लग जाता हैउसे फिर से जीवित करना बहुत बड़ा पराक्रम होता है। राजद के कुशासन में बिहार की हालत उसी पेड़ की तरह हो गई थी। सौभाग्य से बिहार के लोगों ने नीतीश जी को मौका दिया और एनडीए की पूरी टीम मिलकर बेपटरी बिहार को फिर पटरी पर ले आया। आज यहां इस कार्यक्रम में भी इसकी झलक दिख रही है।  

रूस-यूक्रेन संघर्ष तेज़, पैसेंजर ट्रेन और स्टेशन पर बमबारी से 30 से ज्यादा घायल

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कीव  यूक्रेन के उत्तरी क्षेत्र सुमी (Sumy) में रूस ने हवाई हमला किया है. रूसी हमलों में एक पैसेंजर ट्रेन को निशाना बनाया गया है. क्षेत्रीय गवर्नर ओलेह ह्रीहोरोव ने बताया कि रूसी हमले में रेलवे स्टेशन और कीव जा रही ट्रेन को टारगेट किया गया. ट्रेन को काफी नुकसान पहुंचा है.  समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक गवर्नर ओलेह ने कहा कि इस हमले में 30 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं, ह्रिहोरोव ने एक जलती हुई ट्रेन के डिब्बे की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की और कहा कि राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं.  लगातार बढ़ रहे हैं रूसी हमले यह हमला रूस की उस एयरस्ट्राइक मुहिम का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें बीते 2 महीनों से यूक्रेन के रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. रूस लगभग हर दिन यूक्रेनी परिवहन नेटवर्क पर हमले कर रहा है. सिर्फ एक दिन पहले ही रूस ने यूक्रेन की राज्य गैस और तेल कंपनी नाफ्टोगैज़ के ठिकानों पर 35 मिसाइलें और 60 ड्रोन दागे थे. ये हमले खारकीव और पोल्टावा क्षेत्रों में हुए थे. नाफ्टोगैज़ के सीईओ सर्जी कोरेत्स्की के अनुसार यह अब तक की सबसे बड़ी बमबारी थी जिससे गैस उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ. इस हमले में करीब 8000 उपभोक्ताओं की बिजली कट गई. उन्होंने कहा कि हमारे कई प्लांट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, कुछ जगहों पर नुकसान बहुत गंभीर है. इस हमले का कोई सैन्य औचित्य नहीं है.  एनर्जी स्ट्रक्चर पर बढ़े हमले रूसी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसकी सेनाओं ने यूक्रेन के गैस और ऊर्जा ढांचे पर बड़े पैमाने पर रातभर हमले किए. रूस ने दावा किया कि उसने सैन्य-औद्योगिक स्थलों को भी निशाना बनाया है. सर्दियों के करीब आते ही रूस ने यूक्रेन के एनर्जी स्ट्रक्चर पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसके कारण कई क्षेत्रों में लंबे ब्लैकआउट हो रहे हैं. यूक्रेन का पलटवार यूक्रेन ने भी जवाबी कार्रवाई तेज की है. हाल के महीनों में कीव की सेना ने रूस के भीतर स्थित तेल रिफाइनरियों पर हमले बढ़ा दिए हैं. इससे रूस के कई इलाकों में ईंधन की कमी हो गई है. सिर्फ सितंबर में ही यूक्रेन ने रूस और उसके कब्जे वाले इलाकों में 19 तेल ठिकानों पर ड्रोन हमले किए.

जापान में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल, साने ताकाइची बनेंगी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री

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टोक्यो  Aजापान की सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने शनिवार को अपने नए अध्यक्ष के रूप में पूर्व आर्थिक सुरक्षा मंत्री साने ताकाइची को चुना। ताकाइची ने कृषि मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी को कड़े मुकाबले में हराया। इस जीत के साथ ताकाइची के देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। संसद में अगले हफ्ते होने वाले मतदान में एलडीपी-कोमेइतो गठबंधन के बहुमत के कारण उनकी नियुक्ति तय मानी जा रही है। पहले दौर के मतदान में ताकाइची को 183 और कोइज़ुमी को 164 वोट मिले। लेकिन किसी को भी पूर्ण बहुमत नहीं मिलने पर तुरंत दूसरे दौर का रनऑफ आयोजित किया गया, जिसमें ताकाइची ने जीत दर्ज की। यह फैसला एलडीपी सांसदों और लगभग दस लाख पंजीकृत सदस्यों के वोटों से हुआ। एलडीपी के इस चुनाव में कुल पांच उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें दो वर्तमान मंत्री और तीन पूर्व मंत्री शामिल थे। शुरुआती दौर में प्रमुख दावेदारों में ताकाइची, कोइज़ुमी और मुख्य कैबिनेट सचिव योशिमासा हायाशी का नाम सबसे आगे माना जा रहा था। ताकाइची पार्टी की अल्ट्रा-रूढ़िवादी धड़े से आती हैं। अगर वह संसद के मध्य-अक्टूबर में होने वाले मतदान में भी बहुमत हासिल कर लेती हैं तो वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बन जाएंगी। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी कोइज़ुमी चुने जाने पर एक सदी से भी अधिक समय में जापान के सबसे युवा प्रधानमंत्री होते। वर्तमान प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने सितंबर में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने जुलाई के संसदीय चुनावों में पार्टी की ऐतिहासिक हार की जिम्मेदारी लेते हुए कदम उठाया। इशिबा ने अक्टूबर 2024 में पदभार संभाला था, लेकिन ऊपरी और निचले सदनों में गठबंधन की बहुमत खोने के बाद पार्टी में बढ़ते असंतोष के कारण उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। एलडीपी ने हाल के दिनों में लगातार चुनावी हार झेली है और संसद के दोनों सदनों में अल्पमत में पहुंच गई है। पार्टी अब ऐसे नेता को सामने लाना चाहती है जो जनता का विश्वास वापस जीत सके और विपक्ष के सहयोग से नीतियों को लागू कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि सभी उम्मीदवारों ने जानबूझकर विभाजनकारी सामाजिक मुद्दों जैसे लैंगिक समानता, यौन विविधता और ऐतिहासिक विवादों पर खुलकर बात करने से परहेज किया। इसके बजाय उन्होंने महंगाई पर काबू, वेतन वृद्धि, रक्षा और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने तथा विदेशी श्रमिकों पर सख्त नियंत्रण जैसे मुद्दों पर अभियान चलाया। नए प्रधानमंत्री के सामने तात्कालिक चुनौती अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संभावित शिखर वार्ता होगी, जिसमें रक्षा खर्च बढ़ाने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। यह बैठक अक्टूबर के अंत में दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन से पहले होने की संभावना है।  

चक्रवात \’शक्ति\’ की तेजी से बढ़ती रफ्तार, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना, अलर्ट जारी

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मुंबई  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अरब सागर में बने चक्रवात ‘शक्ति’ (Cyclone Shakhti) को लेकर महाराष्ट्र और गुजरात में भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में उथल-पुथल की चेतावनी जारी की है। यह इस वर्ष के मॉनसून के बाद के मौसम का पहला चक्रवात होगा, जिसकी रफ्तार फिलहाल 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच चुकी है और यह तेजी से पश्चिम-दक्षिण पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। IMD की चेतावनी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने आपदा प्रबंधन दलों को सक्रिय कर दिया है। समुद्री तटवर्ती जिलों में संभावित निकासी और राहत व्यवस्था की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी है। चक्रवात ‘शक्ति’ की मौजूदा स्थिति IMD के अनुसार, ‘शक्ति’ अब गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) में बदल चुका है। शनिवार दोपहर 12 बजे तक यह गुजरात के द्वारका से लगभग 420 किलोमीटर दूर अरब सागर में केंद्रित था। तूफान 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। सुबह 8:30 बजे तक यह तूफान 22.0° उत्तर अक्षांश और 64.5° पूर्व देशांतर पर दर्ज किया गया, जो द्वारका से 470 किमी पश्चिम में, नलिया से 470 किमी पश्चिम-दक्षिणपश्चिम में, पाकिस्तान के कराची से 420 किमी दक्षिणपश्चिम में और ओमान के मसीरा द्वीप से 600 किमी पूर्वोत्तर में स्थित था। IMD के मुताबिक, यह प्रणाली 5 अक्टूबर तक अरब सागर के उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य हिस्से में पहुंच जाएगी और 6 अक्टूबर से दिशा बदलकर पूर्वोत्तर की ओर मुड़ेगी, जिसके बाद इसके धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है। मछुआरों के लिए चेतावनी IMD ने गुजरात और उत्तर महाराष्ट्र के तटीय इलाकों के साथ-साथ पाकिस्तान के समुद्री तटों पर रविवार तक समुद्र की स्थिति बहुत उथल-पुथल भरी रहने की चेतावनी दी है। मछुआरों को मंगलवार (8 अक्टूबर) तक उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और मध्य अरब सागर के किसी भी हिस्से में न जाने की सख्त सलाह दी गई है। अरब सागर में चक्रवातों का इतिहास हाल के वर्षों में अरब सागर में बने कुछ प्रमुख तूफानों में ‘ताउते’ (2021) और ‘बिपरजॉय’ (2023) शामिल हैं। आमतौर पर अरब सागर में बंगाल की खाड़ी की तुलना में कम चक्रवात बनते हैं, लेकिन समुद्र के बढ़ते तापमान के चलते इनकी संख्या में हाल के वर्षों में धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही है। क्यों रखा गया नाम शक्ति? ‘शक्ति’ नाम का चयन क्षेत्रीय चक्रवात नामकरण प्रणाली (Regional Cyclone Naming System) के तहत हुआ है। इस प्रणाली में 13 देश शामिल हैं, जिनमें भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, ओमान, मालदीव, म्यांमार और थाईलैंड प्रमुख हैं। इन देशों की सूची में नाम क्रमवार उपयोग किए जाते हैं। ‘Shakhti’ नाम श्रीलंका द्वारा सुझाया गया था।  

भारतीयों की दरियादिली: अमेरिकी विश्वविद्यालयों को मिले 3 अरब डॉलर, ट्रंप भड़के

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वाशिंगटन  अमेरीका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार प्रवासियों को लेकर बेहद सख्त है। यहां तक कि अमेरिकी सरकार ने अमेरिका में एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क लागू कर दिया है। इसके खिलाफ स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, धार्मिक समूहों, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और अन्य लोगों के एक समूह ने शुक्रवार को एक संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया। दूसरी तरफ भारतीय अमेरिकी विश्वविद्यालयों को दान करने में किसी मामले में पीछे नहीं हैं। भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों ने 2008 से अब तक अमेरिका के विश्वविद्यालयों को तीन अरब डॉलर से अधिक का दान दिया है। एक अध्ययन में यह जानकारी सामने आई। यह अध्ययन अमेरिका में अनुसंधान, नवाचार और उच्च शिक्षा तक पहुंच को मजबूत करने की दिशा में प्रवासी समुदाय के योगदान के प्रभावों को रेखांकित करता है। एक नए अध्ययन में अग्रणी गैर-लाभकारी संगठन इंडियास्पोरा ने गुरुवार को कहा कि भारतीय-अमेरिकी, जिनमें से कई अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर अनुभवों को अपनी व्यावसायिक सफलता का आधार मानते हैं, परिवर्तनकारी तरीकों से योगदान दे रहे हैं। इंडियास्पोरा ने कहा, ‘देश भर के उच्च शिक्षा संस्थानों को ऐतिहासिक दान देकर, भारतीय-अमेरिकी समुदाय न केवल उन संस्थानों का सम्मान कर रहा है जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि भावी पीढ़ियों को सीखने, नवाचार और नेतृत्व विकास के समान अवसर प्राप्त हों। बता दें कि अमेरिका में ट्रंप की सरकार बनते ही वह प्रवासियों पर टूट पड़े। सैकड़ों भारतीयों को हथकड़ियां लगाकर भारत वापस भेजा गया और अब H-1B वीजा पर एकमुश्त भारी-भरकम शुल्क लगा दिया है। सैन फ्रांसिस्को स्थित ‘यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट’ में दायर मुकदमे में कहा गया है कि एच-1बी कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवा कर्मियों और शिक्षकों की नियुक्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। मुकदमे में कहा गया है कि यह अमेरिका में नवोन्मेष एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है और नियोक्ताओं को विशिष्ट क्षेत्रों में रिक्तियां भरने का अवसर प्रदान करता है। ‘डेमोक्रेसी फॉरवर्ड फाउंडेशन’ और ‘जस्टिस एक्शन सेंटर’ ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘इस मामले में कोई राहत नहीं मिलने पर अस्पतालों को चिकित्सा कर्मचारियों, गिरजाघरों को पादरियों एवं कक्षाओं को शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ेगा और देश भर के उद्योगों के ऊपर प्रमुख नवोन्मेषकों को खोने का खतरा है।’ इसमें बताया गया कि मुकदमे में अदालत से इस आदेश पर तुरंत रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।  

‘आई लव मुहम्मद’ के नारे से भड़की भीड़, बेलगावी में उर्स जुलूस पर पथराव

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बेलगावी  कर्नाटक में बेलगावी के खड़क गली में स्थित महबूब सुब्हानी दरगाह के उर्स जुलूस के दौरान बवाल हो गया। नारों को लेकर हुए विवाद के बाद पथराव हुआ, जिससे इलाके में तनाव फैल गया है। पुलिस सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार रात जुलूस में शामिल कुछ युवकों ने 'आई लव मुहम्मद' का नारा लगाया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। फिलहाल शांति बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। खड़क गली से आमतौर पर जुलूस नहीं गुजरता। वहां के निवासियों ने नारे पर आपत्ति जताई और सवाल किया कि जुलूस का मार्ग क्यों बदला गया। नारे पर आपत्ति जताए जाने के बाद तनाव बढ़ गया और पथराव की खबरें आने लगीं। पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को काबू किया। सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमने तुरंत हस्तक्षेप किया और मामला गंभीर होने से पहले ही समूहों को तितर-बितर कर दिया। स्थिति अब नियंत्रण में है।' 'आई लव मोहम्मद' को लेकर गहराता विवाद 'आई लव मोहम्मद' को लेकर विवाद पिछले कुछ दिनों से जारी है। यूपी में मेरठ के मवाना कस्बे में लगे एक पोस्टर को लेकर हंगामा मच गया। इसके बाद पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, कस्बे के मुख्य चौराहों पर शुक्रवार देर रात पोस्टर लगाया गया था, जिस पर अंग्रेजी में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा हुआ था। शनिवार सुबह स्थानीय लोगों ने इसे देख आपत्ति जताई और विरोध दर्ज कराया। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासन और पुलिस सक्रिय हुई। मवाना की थाना प्रभारी पूनम ने बताया कि पोस्टर लगाने के आरोप में चौकी प्रभारी मनोज शर्मा की तहरीर पर 5 लोगों इदरीस, तस्लीम, रिहान, गुलफाम और हारून के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

गाजा विवाद: ट्रंप की शर्तों से इनकार, हमास-ट्रंप टकराव से शांति अधर में

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गाजा  लगभग दो साल से जारी गाजा युद्ध में एक अहम मोड़ आया है। इस्लामी संगठन हमास ने शुक्रवार को संकेत दिए कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना के कुछ प्रमुख तत्वों को स्वीकार करने को तैयार है। इनमें सभी शेष इजरायली बंधकों की रिहाई और गाजा प्रशासन को एक टेक्नोक्रेटिक फिलिस्तीनी निकाय को सौंपना शामिल है। हालांकि, इन दोनों प्रस्तावों के साथ शर्तें जुड़ी हुई हैं और संगठन ने पूरी योजना को स्वीकार नहीं किया है। यह बयान उस समय आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार तक की समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी थी कि अगर हमास ने समझौते को ठुकराया तो ऐसा नरक टूट पड़ेगा जैसा दुनिया ने कभी नहीं देखा है। ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर यह समझौता नहीं हुआ तो हमास पर अभूतपूर्व तबाही टूट पड़ेगी। किसी भी सूरत में मध्य पूर्व में शांति होगी।” हमास ने क्या स्वीकार किया, क्या नहीं संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, कतर और मिस्र जैसे प्रमुख मध्यस्थों ने हमास की इस आंशिक स्वीकृति का स्वागत किया है, लेकिन योजना के कई अहम मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। जैसे कि हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण, विदेशी निगरानी में संक्रमणकालीन प्रशासन और बंधकों की रिहाई की समय-सीमा। निरस्त्रीकरण पर चुप्पी ट्रंप की योजना का सबसे विवादित पहलू है कि हमास अपने सभी हथियार पूरी तरह जमा करे। योजना के अनुसार, गाजा का “स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में निरस्त्रीकरण” होना चाहिए। लेकिन हमास की आधिकारिक प्रतिक्रिया में इस पर कोई उल्लेख नहीं किया गया। हमास के वरिष्ठ नेता मूसा अबू मरजूक ने अल जजीरा को बताया, “हम हथियार किसी भविष्य के फिलिस्तीनी निकाय को सौंपने पर विचार कर सकते हैं, जो गाजा का संचालन करे। लेकिन यह फैसला फिलिस्तीनियों के बीच आम सहमति से होगा, बाहर से थोपा नहीं जाएगा।” राजनयिकों का कहना है कि यह चुप्पी रणनीतिक है। लिखित रूप में प्रतिबद्धता से पहले हमास गारंटी चाहता है। गाजा की सत्ता कौन संभालेगा? हमास ने कहा है कि वह गाजा का प्रशासन एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी निकाय को सौंपने को तैयार है, बशर्ते वह राष्ट्रीय सहमति से बने और अरब व इस्लामी देशों का समर्थन प्राप्त हो। लेकिन ट्रंप की योजना के मुताबिक, भविष्य में गाजा पर हमास का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं रहेगा। योजना में एक “बोर्ड ऑफ पीस” बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी सह-अध्यक्षता ट्रंप और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर करेंगे। हमास ने इस विदेशी दखल को पूरी तरह अस्वीकार किया है। मरजूक ने कहा, “हम कभी भी किसी गैर-फिलिस्तीनी को फिलिस्तीनियों पर नियंत्रण की अनुमति नहीं देंगे। टोनी ब्लेयर की भूमिका विशेष रूप से अस्वीकार्य है।” बंधकों की रिहाई पर मतभेद ट्रंप की योजना में कहा गया है कि हमास को सभी 48 बंधकों (जीवित या मृत) को 72 घंटे में रिहा करना होगा। हमास ने बंधक विनिमय की अवधारणा तो स्वीकार की है, लेकिन समयसीमा पर आपत्ति जताई है। मरजूक ने कहा कि कुछ शवों को ढूंढने में कई हफ्ते लग सकते हैं, इसलिए 72 घंटे की समयसीमा अव्यावहारिक है। ट्रंप की योजना में गाजा में एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा बल की भी बात है, जो अस्थायी रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करे। हमास ने इस बिंदु पर कोई स्पष्ट रुख नहीं दिया। न स्वीकार किया, न अस्वीकार। हमास क्या पुनर्विचार चाहता है हमास का कहना है कि गाजा के भविष्य और फिलिस्तीनी अधिकारों पर कोई भी निर्णय बाहरी रूप से नहीं थोपा जा सकता है। संगठन चाहता है कि बातचीत में सभी फिलिस्तीनी गुट शामिल हों और समझौता राष्ट्रीय सहमति पर आधारित हो। हमास की इस आंशिक स्वीकृति के बाद अब ध्यान इस बात पर है कि क्या यह समझौता जमीन पर अमल तक पहुंच पाएगा। इजरायल ने कहा है कि वह पहले चरण में बंधकों की रिहाई के लिए तैयार है, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया कि कोई भी समझौता इजरायल की सुरक्षा सीमाओं से समझौता नहीं करेगा। ट्रंप ने स्वर नरम करते हुए कहा कि वे स्थायी शांति के लिए तैयार हैं और इजरायल से आग्रह किया कि बंधकों की सुरक्षित रिहाई तक बमबारी रोकी जाए।  

कफ सिरप कांड ने मचाई सनसनी: 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु में बिक्री पर रोक, राजस्थान में बड़ा एक्शन

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जयपुर  कफ सिरप विवाद ने पूरे देश को हिला दिया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने विवादित सिरप 'कोल्ड्रिफ' की बिक्री पर रोक लगा दी है. वहीं, राजस्थान सरकार ने राज्य ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया और संबंधित कंपनी की दवाओं का वितरण रोक दिया है. केंद्र सरकार ने भी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न लिखी जाएं. राजस्थान में बड़ा एक्शन… राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया और राज्य के ड्रग कंट्रोलर को निलंबित कर दिया है. साथ ही जयपुर की Kaysons Pharma कंपनी की दवाओं के वितरण पर भी रोक लगा दी गई है. इससे पहले विवादित सिरप बच्चों को देने के आरोप में डॉक्टर पलक कुलवाल और फार्मासिस्ट पप्पू कुमार सोनी को भी निलंबित किया गया था. तमिलनाडु में 'कोल्ड्रिफ' सिरप पर बैन तमिलनाडु सरकार ने 1 अक्टूबर से 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप की बिक्री और स्टॉकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह फैसला मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई बच्चों की मौतों के बाद लिया गया. स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी के कांचीपुरम स्थित प्लांट का निरीक्षण कर सैंपल लिए हैं. इन्हें सरकारी लैब में टेस्ट के लिए भेजा गया है ताकि 'डाईएथिलीन ग्लाइकोल' जैसे खतरनाक केमिकल की मौजूदगी की जांच हो सके. '2 साल से कम बच्चों को ना दें कफ सिरप' केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवा ना लिखी जाए. DGHS की इस गाइडलाइन का मकसद संदिग्ध सिरप से बच्चों की जान बचाना है. राजस्थान में घर-घर अभियान राजस्थान सरकार ने शनिवार से पूरे प्रदेश में घर-घर सर्वे अभियान शुरू करने का फैसला किया है. आशा, एएनएम और सीएचओ आमजन को जागरूक करेंगे कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी-जुकाम की दवा ना लें. बच्चों की पहुंच से दवाएं दूर रखने और दुष्प्रभाव पर तुरंत कदम उठाने की हिदायत दी जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में बिना प्रोटोकॉल दवा लिखने या वितरित करने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने कहा कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों को डेक्सट्रोमोरफन युक्त दवा नहीं दी जाए. आमजन को समझाया जाए कि वे घर में रखी दवाओं का बिना चिकित्सकीय परामर्श के सेवन नहीं करें. दवा के सेवन के बाद किसी भी तरह का दुष्प्रभाव अथवा सांस लेने में कठिनाई, सुस्ती, बेहोशी, उल्टी, दौरे जैसे लक्षण नजर आएं तो नजदीकी अस्पताल या हेल्पलाइन नंबर 104/108 या राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 0141-2225624 पर संपर्क किया जा सकता है. राजस्थान का सिरप सुरक्षित इस बीच राजस्थान सरकार ने लैब टेस्ट कराए हैं जिनमें यह पाया गया है कि विवादित सिरप के सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं. स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि दवा में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, हालांकि जांच जारी रहेगी. महाराष्ट्र में कोडीन सिरप और ड्रग्स नष्ट ठाणे, पालघर और एमबीवीवी पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 26,935 लीटर कोडीन-आधारित कफ सिरप समेत 147 करोड़ रुपये की नशीली दवाओं और ड्रग्स को नष्ट किया है. यह कार्रवाई महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी से की गई.