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शहीद की याद में सैनिकों ने निभाया कर्तव्य, फूलों से सजी छतरी लिए दुल्हन की बारात हिमाचल प्रदेश में

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सिरमौर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर का गिरी इलाका… यहां के भोज के भरली गांव में बीते दिनों एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. यहां विवाह समारोह में विदाई थी- उस बहन की, जिसका फौजी भाई अब इस दुनिया में नहीं है. गांव की यह शादी अपने अद्भुत और भावनात्मक थी. विवाह की रस्में पूरी होने के बाद जैसे ही दुल्हन की विदाई का वक्त आया, तो घर में भावुक कर देने वाला माहौल बन गया. हर बहन चाहती है कि उसके भाई विदाई के समय उसके साथ खड़े हों, उसके आंसुओं को पोंछें और उसे ससुराल तक हंसी-खुशी से विदा करें. इस दुल्हन के लिए यह पल भारी था, क्योंकि उसका एक फौजी भाई अब उसके साथ नहीं था. यह शहीद आशीष कुमार की बहन है. आशीष ने अगस्त 2024 में अरुणाचल प्रदेश में ऑपरेशन अलर्ट 2024 के दौरान देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी. आशीष का बलिदान न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे इलाके के लिए गर्व का विषय है. लेकिन बहन की विदाई के मौके पर भाई की कमी का एहसास बेहद गहरा था. जब विदाई का वक्त आया तो आशीष के साथी सैनिक और इलाके के पूर्व सैनिक सब मिलकर इस विवाह में शामिल हुए. उन्होंने न सिर्फ विवाह में शिरकत की, बल्कि बहन की विदाई भी उसी गरिमा और सम्मान के साथ की, जैसे कोई भाई करता है. यह पल इतना भावुक कर देने वाला था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं. शहीद आशीष कुमार के दो भाई हैं, जो खेती-बाड़ी करते हैं. आशीष ने आर्मी ज्वाइन की थी. बहन की शादी के मौके पर जब आशीष की कमी महसूस हुई, तो उनके साथियों ने यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई. विदाई के समय सेना के जवान दुल्हन वाले पारंपरिक लाल रंग के शादी के जोड़े में सजी बहन के ऊपर फूलों और माला से सजा हुआ छत्र (फूलों की छतरी) लेकर चल रहे थे, ठीक वैसे जैसे कोई भाई करता है.  देश की वर्दी पहनने वाले कई भाई उसके सिर पर छांव की तरह साथ चल रहे थे. लोगों ने कहा कि यह साबित करता है कि फौज सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक परिवार है. जब एक सिपाही शहीद होता है, तो उसके पीछे पूरा फौजी परिवार उसके घरवालों के साथ खड़ा हो जाता है. इस मौके पर पूरा गांव भावुक हो उठा.

वेस्टइंडीज ढेर, जडेजा की धाकड़ परफॉर्मेंस से भारत ने दर्ज की बड़ी जीत

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अहमदाबाद  शुभमन गिल की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने दो मैच की टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में वेस्टइंडीज को पारी और 140 रनों के बड़े अंतर से धूल चटाई। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने 1-0 की बढ़त बना ली है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मैच में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम को भारत ने दो सेशन के अंदर मात्र 162 पर ढेर कर दिया।  मोहम्मद सिराज ने इस दौरान 4 तो जसप्रीत बुमराह ने तीन विकेट चटकाई। इसके बाद बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया ने 5 विकेट के नुकसान पर 448 रन बोर्ड पर लगाकर पारी घोषित कर दी और 286 रनों की बढ़त हासिल की। भारत के लिए केएल राहुल, ध्रुव जुरेल और रवींद्र जडेजा ने शतक जड़े। जडेजा अंत तक नाबाद रहे, वहीं कप्तान शुभमन गिल ने अर्धशतकीय पारी खेली। तीसरे दिन का खेल शुरू होने से पहले भारत ने पारी घोषित कर दी थी जिससे उनकी मंशा साफ हो गई थी कि वह मैच को चौथे दिन तक नहीं ले जाना चाहते। गेंदबाजों ने ऐसा करके भी दिखाया। एक बार फिर वेस्टइंडीज को भारत ने दो सेशन के अंदर 146 रनों पर समेट मैच को पारी और 140 रनों से अपने नाम किया। जडेजा ने 4 तो सिराज को तीन सफलताएं मिली। कुलदीप यादव को मिली आखिरी विकेट, भारत जीता कुलदीप यादव ने वेस्टइंडीज का आखिरी विकेट गिराकर भारत की झोली में जीत डाली। रवींद्र जडेजा पंजे से चूके, हालांकि इस मैच में उनका ऑलराउंड परफॉर्मेंस काफी अच्छा रहा। कुलदीप यादव ने 2 तो सिराज ने तीन विकेट निकाले। भारत ने वेस्टइंडीज को 146 रनों पर आउट कर मैच को पारी और 140 रनों से अपने नाम किया। सील्स का तूफान 11वें नंबर पर बैटिंग करने आए सील्स निडर होकर बैटिंग कर रहे हैं। वह 9 गेंदों पर 19 के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं। भारत जीत से एक विकेट दूर है।

अमित शाह के भरोसेमंद जगदीश विश्वकर्मा बने गुजरात BJP के नए अध्यक्ष

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नई दिल्ली गुजरात BJP के नए अध्यक्ष के तौर पर गुजरात के मंत्री और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेता जगदीश विश्वकर्मा के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। उन्हें निर्विरोध इस पद के लिए चुना गया है। शुक्रवार को इस पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले वह एकमात्र उम्मीदवार रहे। विश्वकर्मा को प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की आधिकारिक घोषणा शनिवार को गांधीनगर स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय में हुई। इस दौरान राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा, मैं उनके प्रति अपार सम्मान रखता हूं और मेरा मानना ​​है कि वह एक जमीनी कार्यकर्ता हैं जो राज्य की जनता के लिए काम करते रहेंगे। उनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है और आज वह गुजरात भाजपा अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। ऐसा केवल भाजपा में ही संभव है। 52 साल के जगदीश विश्वकर्मा अहमदाबाद की निकोल सीट से तीन बार के विधायक हैं। वह वर्तमान में सहकारिता, नमक उद्योग, एमएसएमई, कुटीर, खादी और ग्रामीण उद्योग राज्य मंत्री हैं। विश्वकर्मा इससे पहले भाजपा की अहमदाबाद नगर इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी भी माने जाते हैं। विश्वकर्मा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और नवसारी से लोकसभा सदस्य सी आर पाटिल का स्थान लेंगे, जिनका तीन साल का कार्यकाल जुलाई 2023 में समाप्त हो गया था। कौन हैं जगदीश विश्वकर्मा जगदीश विश्वकर्मा का राजनीतिक सफर बूथ लेवल कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था। इसके बाद जिला स्तर पर भी कई जिम्मेदारियां निभाने के बाद वह विधायक बनें। वह 2012 से लगातार निकोल विधानसभा सीट से 3 बार विधायक चुने गए। वह ओबीसी वर्ग से आते हैं और इस समुदाय पर उनकी अच्छी पकड़ है।  

गहने और नकदी लूटने के मामले में सिंगापुर की अदालत ने दो भारतीयों को सुनाई सजा

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सिंगापुर  सिंगापुर में दो भारतीयों को 5 साल और एक महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। साथ ही, दोनों को 12 कोड़े मारने की भी सजा दी गई। इन पर होटल के कमरों में दो सेक्स वर्कर्स के साथ लूटपाट और मारपीट करने का आरोप था। 23 वर्षीय अरोकियासामी डायसन और 27 वर्षीय राजेंद्रन माइलारासन ने पीड़ितों के साथ लूटपाट की और उन्हें चोट भी पहुंचाई। अदालत को बताया गया कि अरोकियासामी और राजेंद्रन 24 अप्रैल को भारत से सिंगापुर छुट्टियां मनाने आए थे। दो दिन बाद लिटिल इंडिया इलाके में टहलते समय एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और पूछा कि क्या वे वेश्याओं को किराए पर लेना चाहेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, उस व्यक्ति ने फिर उन्हें दो महिलाओं की संपर्क करवाया और चला गया। अरोकियासामी ने राजेंद्रन से कहा कि उन्हें पैसे की जरूरत है। उसने सुझाव दिया कि वे उन महिलाओं से संपर्क करें और होटल के कमरे में उनसे लूटपाट कर लेंगे। राजेंद्रन इस पर सहमत हो गया। उन्होंने उसी दिन शाम 6 बजे के आसपास होटल के कमरे में पहली महिला से मिलने की व्यवस्था की। कमरे में जाने के बाद उन्होंने पीड़िता के हाथ-पैर कपड़ों से बांध दिए और उसे थप्पड़ मारा। उन्होंने उसके गहने, 2 हजार सिंगापुर डॉलर नकद, उसका पासपोर्ट और बैंक कार्ड लूट लिए। 800 सिंगापुर डॉलर की लूटपाट रात लगभग 11 बजे उन्होंने दूसरी महिला के साथ एक अन्य होटल में मुलाकात की। जब वह आई तो उन्होंने उसकी बाहों को कसकर पकड़ लिया। राजेंद्रन ने उसके मुंह को ढक दिया ताकि वह चिल्ला न सके। उन्होंने 800 सिंगापुर डॉलर नकद, दो मोबाइल फोन और उसका पासपोर्ट चुरा लिया। दोनों ने उसे धमकी दी कि वह तब तक कमरे से बाहर न निकले जब तक वे वापस न आएं। अरोकियासामी और राजेंद्रन के कांड का खुलासा तब हुआ जब दूसरी पीड़िता ने अगले दिन एक अन्य व्यक्ति से बात की। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया और फिर आगे की कार्रवाई हुई।

गाजा में शांति की उम्मीद: हमास ने ट्रंप के प्लान को मंजूरी दी, बंधकों को छोड़ा जाएगा

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 गाजा  हमास ने ट्रंप के गाजा पीस प्लान को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है और लगभग सभी बड़ी शर्तों को मानने के लिए हामी भरी है. ​इस फिलिस्तीनी मिलिशिया संगठन ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आगे बढ़ाए गए शांति योजना के तहत सभी इजरायली बंधकों (चाहे जीवित हों या मृत) को रिहा करने के लिए तैयार है. हमास का यह फैसला गाजा में संघर्ष समाप्त करने में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. हमास ने एक बयान में कहा कि वह इस मामले (ट्रंप के गाजा प्लान) की विस्तृत चर्चा के लिए मध्यस्थों के माध्यम से तत्काल वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार है. यदि यह कदम साकार होता है, तो यह अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमले के दौरान अपहृत बंधकों की वापसी के लिए महीनों की कोशिशों में सबसे महत्वपूर्ण सफलता होगी. हमास ने यह भी दोहराया कि वह गाजा का प्रशासन 'स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की फिलिस्तीनी संस्था' को सौंपने के लिए तैयार है. हमास ने डोनाल्ड ट्रंप का जताया आभार बता दें कि हमास ही अब तक गाजा का प्रशासन चलाता था. इस समूह ने गाजा संघर्ष समाप्त कराने के प्रयासों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के लिए उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया. साथ ही अरब, इस्लामी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का आभार जताया. इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास से रविवार शाम 6 बजे तक इजरायल के साथ शांति समझौते पर पहुंचने का अल्टीमेटम था, वरना गाजा में कहर टूटने की चेतावनी दी थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया था अल्टीमेटम ट्रंप ने कहा था कि हमास को हमारे गाजा प्लान को स्वीकार करने, इजरायली बंधकों को रिहा करने और शत्रुताओं समाप्त करने का एक आखिरी मौका दिया जा रहा है. अगर वह इस पर सहमति नहीं जताता है तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. उन्होंने कहा था कि गाजा में किसी न किसी तरह शांति जरूर स्थापित होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो वर्ष से चल रहे गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए इजरायल और हमास दोनों को शांति समझौते पर सहमत करने के लिए प्रयासरत हैं. ट्रंप के 20 सूत्री गाजा प्लान में क्या-क्या है? उन्होंने इसके लिए एक 20 सूत्री प्रस्ताव का खाका तैयार किया है, जो न केवल युद्ध को तत्काल रोकने का आह्वान करता है बल्कि गाजा में शासन के लिए एक समाधान भी प्रस्तुत करता है. व्हाइट हाउस ने संघर्ष समाप्त करने और क्षेत्र के भविष्य के प्रशासन को आकार देने के लिए ट्रंप के गाजा प्लान को एक रोडमैप बताया. ट्रंप के गाजा पीस प्लान (गाजा शांति योजना) के अनुसार, हमास और इजरायल के बीच शांति समझौते के 72 घंटों के भीतर हमास को सभी जीवित और मृत इजरायली बंधकों को रिहा करना होगा, बदले में इजरायल सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को अपनी जेलों से रिहा करेगा. अब गाजा पर नहीं होगा हमास का नियंत्रण इस प्लान के मुताबिक गाजा पर हमास का नियंत्रण खत्म होगा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में एक स्वतंत्र सरकार यहां का प्रशासन चलाएगी. हमास की ओर से इस पीस प्लान पर सहमति जताने के तुरंत बाद गाजा में पूर्ण सहायता भेजी जाएगी. ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि हमास गाजा प्लान को अस्वीकार करता है, तो उसे पूरी तरह खत्म करने का काम पूरा करने के लिए इजरायल को अमेरिका का पूर्ण समर्थन मिलेगा. हमास का ट्रंप के गाजा प्लान पर सहमति जताना, मध्य पूर्व में शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

गाजा विवाद में शांति का पक्षधर भारत, पीएम मोदी ने ट्रंप के पीस प्लान का समर्थन किया

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नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के पीस प्लान की घोषणा के बाद गाजा में शांति प्रयासों पर बड़ी प्रगति के संकेत मिल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की पहल की सराहना करते हुए कहा कि बंधकों की रिहाई के संकेत एक महत्वपूर्ण कदम है. पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा, 'हम राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हैं क्योंकि गाजा में शांति प्रयास निर्णायक प्रगति की ओर बढ़ रहे हैं.' सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, 'बंधकों की रिहाई के संकेत एक बड़ा कदम हैं. भारत टिकाऊ और न्यायपूर्ण शांति के सभी प्रयासों का मजबूती से समर्थन करता रहेगा.' कई अन्य वैश्विक नेता भी ट्रंप की इस पहल की सराहना कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया ने भी किया समर्थन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी ट्रंप की योजना का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रपति ट्रंप की योजना में हुई प्रगति का स्वागत करता है. हमास को तुरंत हथियार डालकर शेष सभी बंधकों को रिहा करना चाहिए. ऑस्ट्रेलिया अपने साझेदारों के साथ युद्ध खत्म करने और न्यायपूर्ण व टिकाऊ समाधान की दिशा में प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा.' ट्रंप का 'पीस प्लान' शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया कि 'हमास स्थायी शांति के लिए तैयार है.' उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से इजरायल से गाजा पर हमले तुरंत रोकने का आह्वान किया. हमास ने योजना के कुछ हिस्सों का स्वागत किया है, लेकिन कुछ प्रावधानों पर असहमति जताते हुए अतिरिक्त बातचीत की मांग रखी.  संगठन ने कहा है कि वह सभी 48 शेष बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है. योजना के मुताबिक, स्थायी युद्धविराम लागू होने के 72 घंटे के भीतर बंधकों की रिहाई होगी. इसके बदले में 2,000 से अधिक फिलिस्तीनी सुरक्षा बंदियों और मारे गए गाजावासियों के शवों को सौंपा जाएगा, साथ ही इजरायल गाजा से पहले चरण में वापसी करेगा. इजरायल ने क्या कहा? इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने भी इस योजना पर प्रतिक्रिया दी है. शनिवार देर रात जारी एक बयान में कहा गया, 'इजरायल ट्रंप की योजना के पहले चरण के तत्काल कार्यान्वयन के लिए तैयार है, जिसके तहत सभी बंधकों की रिहाई शामिल है.'

H-1B विवाद फिर अदालत में, ट्रंप के फैसले पर आपत्ति, $100,000 फीस बनी विवाद की जड़

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वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी वीजा फीस को 100,000 डॉलर करने के फैसले को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है. शुक्रवार को यूनियनों, नियोक्ताओं और धार्मिक संगठनों के एक गठबंधन ने सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत में याचिका दाखिल कर इस आदेश को रोकने की मांग की. यह मुकदमा ट्रंप के उस ऐलान को पहली बार अदालत में चुनौती देता है जिसे उन्होंने दो हफ्ते पहले जारी किया था. इसमें कहा गया था कि अमेरिका में आने वाले नए एच-1बी वीजा धारकों को तभी प्रवेश मिलेगा जब उनके नियोक्ता अतिरिक्त 100,000 डॉलर का शुल्क जमा करें. हालांकि यह आदेश उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिनके पास पहले से वीजा है या जिन्होंने 21 सितंबर से पहले आवेदन कर दिया था. याचिकाकर्ताओं में यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स यूनियन, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स, एक नर्स भर्ती एजेंसी और कई धार्मिक संगठन शामिल हैं. उन्होंने दलील दी कि ट्रंप को कानून द्वारा बनाए गए वीजा कार्यक्रम में इस तरह से बदलाव करने या नए शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है. अमेरिकी संविधान के मुताबिक कर या शुल्क लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है. वीजा फीस बढ़ाने पर क्या है ट्रंप प्रशासन का पक्ष ट्रंप प्रशासन ने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि यह "सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी वेतन स्तर को गिरने से बचाने" के लिए जरूरी है. व्हाइट हाउस प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा कि यह कदम उन कंपनियों को भी आश्वासन देता है जिन्हें वास्तव में विदेशी प्रतिभा की जरूरत है. वर्तमान में नियोक्ता एच-1बी प्रायोजन के लिए कंपनी के आकार और अन्य कारकों के आधार पर लगभग 2,000 डॉलर से 5,000 डॉलर तक का शुल्क देते हैं. ट्रंप का आदेश इस लागत को कई गुना बढ़ा देगा. एच-1बी वीजा का बड़ा लाभार्थी भारत एच-1बी कार्यक्रम के तहत हर साल 65,000 वीजा और उन्नत डिग्री धारकों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा उपलब्ध कराए जाते हैं. 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, भारत सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है और उसे कुल मंजूर वीजा का लगभग 71% मिला, जबकि चीन का हिस्सा करीब 11.7% था. याचिका में कहा गया है कि नया आदेश "पे टू प्ले" (Pay to Play) व्यवस्था बनाता है, जिसमें केवल वही कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त कर पाएंगी जो भारी शुल्क अदा कर सकेंगी. इससे न केवल इनोवेशन पर असर पड़ेगा बल्कि चयनात्मक प्रवर्तन और भ्रष्टाचार की संभावना भी बढ़ जाएगी.

युवाओं के लिए ऐतिहासिक दिन: पीएम मोदी आज करेंगे करोड़ों की योजनाओं की शुरुआत

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नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज 62,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न युवा-केंद्रित पहलों की शुरुआत करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ)के मुताबिक यह युवा विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है, जिससे शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को निर्णायक बढ़ावा मिलेगा। पीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी 60,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ केंद्र प्रायोजित योजना पीएम-सेतु (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार परिवर्तन) की शुरुआत करेंगे। इस योजना में 1,000 सरकारी आईटीआई को ‘हब-एंड-स्पोक' मॉडल में उन्नत करने की परिकल्पना की गई है, जिसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल हैं। ‘हब एंड स्पोक' मॉडल एक वितरण प्रणाली है जो साइकिल के पहिये की तरह काम करती है, जिसमें एक ‘हब' (केंद्र) होता है जो सभी ‘स्पोक' (छोटे, सहायक स्थानों) को आपस में जोड़ता है। प्रत्येक ‘हब' औसतन चार ‘स्पोक' से जुड़ा होगा, जिससे उन्नत बुनियादी ढांचे, आधुनिक उद्यमों, डिजिटल शिक्षण प्रणालियों और इनक्यूबेशन सुविधाओं से सुसज्जित संकुलों का निर्माण होगा। पीएमओ के मुताबिक प्रमुख उद्योग साझेदार इन संकुलों का प्रबंधन करेंगे और बाजार की मांग के अनुरूप परिणाम-आधारित कौशल सुनिश्चित करेंगे। हब में नवाचार केंद्र, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण की सुविधाएं, उत्पादन इकाइयां और प्लेसमेंट सेवाएं भी होंगी, जबकि प्रवक्ता पहुंच बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इसमें कहा गया है, ‘‘सामूहिक रूप से, पीएम-सेतु भारत के आईटीआई पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से परिभाषित करेगा, इसे सरकारी स्वामित्व वाला लेकिन उद्योग-प्रबंधित बनाएगा, जिसमें विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक से वैश्विक सह-वित्तपोषण सहायता भी होगी।'' बयान के मुताबिक योजना के कार्यान्वयन के पहले चरण में बिहार के पटना और दरभंगा में आईटीआई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पीएमओ ने बताया कि प्रधानमंत्री 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 400 नवोदय विद्यालयों और 200 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में स्थापित 1,200 व्यावसायिक कौशल प्रयोगशालाओं का भी उद्घाटन करेंगे। बयान के मुताबिक ये प्रयोगशालाएं दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों के छात्रों सहित अन्य को आईटी, ऑटोमोटिव, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन जैसे 12 उच्च मांग वाले क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पाठ्यक्रम के अनुरूप, इस परियोजना में उद्योग-प्रासंगिक शिक्षा प्रदान करने और रोजगार के लिए प्रारंभिक आधार तैयार करने के लिए 1,200 व्यावसायिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करना शामिल है। बयान में कहा गया है कि कार्यक्रम का विशेष जोर बिहार में परिवर्तनकारी परियोजनाओं पर होगा, जो राज्य की समृद्ध विरासत और युवा जनसांख्यिकी को प्रतिबिंबित करेगा। मोदी बिहार की संशोधित ‘‘मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना'' की भी शुरुआत करेंगे, जिसके तहत हर साल लगभग पांच लाख स्नातकों को दो साल तक 1,000 रुपये का मासिक भत्ता मिलेगा, साथ ही मुफ्त कौशल प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा। वह नए सिरे से तैयार की गई ‘बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड' योजना की भी शुरुआत करेंगे, जिसके तहत चार लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना के तहत 3.92 लाख से अधिक छात्र पहले ही 7,880 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण प्राप्त कर चुके हैं। बयान के मुताबिक राज्य में युवा सशक्तीकरण को और मजबूत करने के लिए, मोदी द्वारा बिहार युवा आयोग का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा, जो 18 से 45 वर्ष की आयु के लोगों के लिए एक वैधानिक आयोग है। इसका उद्देश्य राज्य की युवा आबादी की क्षमता का उपयोग करना है। बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बिहार केंद्र और राज्य की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)सरकारों की कई विकास और कल्याणकारी पहलों के केंद्र में रहा है। बिहार की अन्य परियोजना जिसका प्रधानमंत्री उद्घाटन करेंगे, वह जन नायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल तैयार करने के लिए उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम और व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना है।  

ड्रैगन के वॉटर बम का इलाज — इंडिया का मेगा-डैम, सुरक्षा व जलप्रबंधन दोनों का समाधान

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नई दिल्ली हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों के बीच, जहां नदियां जीवन का आधार हैं, वहां एक नया विवाद खड़ा हो गया है. भारत सरकार एक विशालकाय डैम बनाने की योजना बना रही है, जो चीन के पानी के हथियार से बचाव के लिए है. लेकिन अरुणाचल प्रदेश के आदिवासी लोग इसे अपनी मौत का पैगाम मान रहे हैं. ऊंचे पहाड़ों से घिरे एक फुटबॉल मैदान पर आदिवासियों ने जोरदार भाषण दिए और विरोध जताया. यह डैम भारत-चीन के पानी पर चल रहे झगड़े का नया मोड़ है. हिमालय दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला है, जहां से ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदियां निकलती हैं. ये नदियां भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को पानी, बिजली और खेती के लिए जीवन रेखा हैं. चीन तिब्बत में ऊपरी हिस्से में एक रिकॉर्ड तोड़ने वाला डैम बना रहा है. भारत को डर है कि चीन इस डैम को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है. यानी, अचानक बहुत सारा पानी छोड़कर बाढ़ ला सकता है, जिसे वाटर बम कहा जा रहा है. इस वजह से भारत अब जवाबी कदम उठा रहा है.  चीन इस समय एक बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट बांध से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट पर 167 अरब डॉलर खर्च होंगे। यह बांध तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर बन रहा है। इस नदी को भारत में सियांग कहते हैं। चीन का कहना है कि इस बांध के बनने से चीन में बिजली की समस्या काफी बेहतर होगी। वहीं इस बांध के कई खतरे भी सामने आए हैं। इससे बड़ा खतरा भारत को भी है। इसे 'वॉटर बम' भी कहा जा रहा है क्योंकि यहां से छोड़ा गया पानी भारत के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। लेकिन अब भारत ने भी चीन के इस बांध का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है। भारत भी एक बहुत बड़ा बांध बनाने की योजना बना रहा है। यह बांध चीन के 'वॉटर बम' का जवाब देने के लिए है। यह बांध भारत और चीन के बीच हिमालय के पानी को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा में भारत का नया कदम है। भारत का कहना है कि यह नया बांध चीन के एक बड़े बांध का मुकाबला कर सकता है। भारत ने चुनी कौन सी जगह? प्रस्तावित नक्शों से पता चलता है कि भारत अरुणाचल प्रदेश में एक विशाल जलाशय बनाने पर विचार कर रहा है। यह जलाशय चार मिलियन ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल जितना बड़ा होगा। यह जलाशय 280 मीटर (918 फुट) ऊंचे बांध के पीछे बनेगा। क्या है भारत का प्लान? भारत का बांध 9.2 बिलियन क्यूबिक मीटर का एक विशाल जलाशय बनाएगा। इससे 11,200 से 11,600 मेगावाट पनबिजली पैदा की जा सकती है। यह इसे देश का सबसे शक्तिशाली बांध बना देगा। इससे भारत के कोयले पर निर्भर बिजली ग्रिड से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी। लेकिन, नेशनल हाइड्रोपावर कॉर्पोरेशन (NHPC) के एक वरिष्ठ इंजीनियर के मुताबिक भारत की प्राथमिकता बिजली पैदा करना नहीं है। NHPC वह केंद्रीय एजेंसी है जिसे बांध बनाने का काम मिला है। इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर चीन अपने बांध को हथियार बनाना चाहता है और इसे वॉटर बम की तरह इस्तेमाल करना चाहता है तो भारत का यह बांध जल सुरक्षा और बाढ़ नियंत्रण का काम करेगा। चीन के प्रोजेक्ट का भारत में विरोध चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता है। भारत इस दावे को पूरी तरह से खारिज करता है। बीजिंग का कहना है कि इस परियोजना का नीचे की ओर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। नीचे की ओर से मतलब है कि वहां रहने वाले लोगों पर इसका कोई असर नहीं होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इन इलाकों में रहने वाले कुछ लोग चीन के इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। यह इलाका भारत में आता है। चीन की योजना में 5 पनबिजली स्टेशन शामिल हैं। ये स्टेशन चीन के विशाल थ्री गॉर्जेस बांध से तीन गुना ज्यादा बिजली पैदा कर सकते हैं। थ्री गॉर्जेस बांध दुनिया का सबसे बड़ा बिजली घर है। क्यों कहा जा रहा 'वॉटर बम'? चीन जिस नदी पर बांध बना रहा है, वह ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी है। भारतीय अधिकारियों को डर है कि चीन अपने बांध का इस्तेमाल कर पानी पर कंट्रोल कर सकता है। इससे चीन खास तौर से भारतीय इलाके में घातक सूखा पैदा कर सकता है या नीचे भारत की ओर ढेर सारा पानी छोड़ सकता है। पानी का यह बहाव का असर किसी बम की तरह होगा। इस कारण इसे 'वॉटर बम' कहा जा रहा है। हालांकि चीन इस बात को खारिज करता है। चीन का कहना है कि याक्सिया पनबिजली परियोजना को 'वॉटर बम' बताने वाली बातें बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण हैं।  

सीमाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया: लद्दाख‑तवांग कॉरिडोर में तोप‑टैंक एयरलिफ्टिंग योजना

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नई दिल्ली  मान लीजिए लेह-लद्दाख या अरुणाचल प्रदेश के तवांग या फिर कश्‍मीर घाटी में दुश्‍मनों के साथ जंग चल रही हो और गोला-बारूद या फिर अन्‍य साजो-सामान की कमी होने लगे तो ऐसे हालात में सशस्‍त्र बलों के जवान क्‍या करेंगे? भारत सरकार अब इस गैप को खत्‍म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. रक्षा मंत्रालय ठंडे बस्‍ते में चली रही मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) की खरीद प्रक्रिया को अब रफ्तार देने जा रहा है. इस बाबत जारी होने वाले टेंडर को अंतिम रूप दिया जा रहा है. MTA की कॉस्टिंग यानी कीमत और स्पेसिफिकेशन काफी महत्‍वपूर्ण हैं, ताकि वे भारतीय हालात के अनुरूप उपयोगी हो सकें. बता दें कि भारत ने कुछ सप्‍ताह पहले ही देसी 5th जेनरेशन फाइटर जेट को लेकर 15000 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है. इसमें डिफेंस सेक्‍टर से जुड़ी कई कंपनियों ने इंट्रेस्‍ट भी दिखाया है. DRDO ने रेल बेस्‍ड अग्नि प्राइम मिसाइल का परीक्षण किया है, जिसकी रेंज 2000 किलोमीटर है. इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज के जखीरे में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल पहले से ही मौजूद है. अब MTA की खरीद से इंडियन एयरफोर्स गोला-बारूद या अन्‍य साजो-सामान झट से मौके पर पहुंचा सकेगी, ताकि दुश्‍मनों को उसकी मांद में ही तबाही का मंजर दिखाया जा सके. जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने लंबे समय से अटकी MTA प्रोजेक्‍ट को गति देने की तैयारी शुरू कर दी है. रक्षा मंत्रालय जल्‍द ही इसके लिए टेंडर जारी करने वाला है. यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब भारतीय वायुसेना (IAF) अपने परिवहन बेड़े (Transport Fleet) में गंभीर कमी से जूझ रही है और दूसरी ओर 114 मल्‍टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीद तथा रूस से Su-35 विमानों पर बातचीत जैसी महत्‍वपूर्ण योजनाओं को भी आगे बढ़ा रही है. वायुसेना की मध्‍यम-वर्ग परिवहन क्षमता अब नाजुक स्थिति में पहुंच चुकी है. कभी 200 से अधिक विमान वाला एएन-32 बेड़ा अब घटकर 100 से कम रह गया है. इनमें से भी ज्‍यादातर अपनी सेवा अवधि समाप्ति तक पहुंच रहे हैं. साल 1980 के दशक में शामिल किए गए IL-76 विमानों की सेवा क्षमता घट रही है और इनके रखरखाव की लागत तेजी से बढ़ रही है. छोटे एवरो और डॉर्नियर विमानों के रिटायर होने के बाद IAF का परिवहन बेड़ा असंतुलित हो गया है. फिलहाल C-17 ग्‍लोबमास्‍टर भारी सामरिक परिवहन (80 टन तक) करता है और C-295 हल्‍के मिशन (5-10 टन) संभालते हैं. मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की भारी कमी है. सामरिक असर 20-30 टन भार वहन करने वाले विमान की कमी केवल लॉजिस्टिक असुविधा नहीं है, बल्कि यह भारत की सामरिक तत्‍परता पर भी सीधा असर डाल रही है. चाहे लद्दाख और अरुणाचल जैसे उच्‍च हिमालयी मोर्चे हों या सेना के भावी ज़ोरावर हल्‍के टैंकों की तेजी से तैनाती, मौजूदा हालात गंभीर बाधा बनते जा रहे हैं. इंडिया डिफेंस न्‍यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह कमी दो दशक से बनी हुई है और अब भी एएन-32 जैसे वृद्ध विमानों पर निर्भरता जोखिम भरी है. भारत ने मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की जरूरत को 2000 के दशक में ही पहचाना था. रूस के साथ HAL-इल्यूशिन की संयुक्त परियोजना MTA इसी दिशा में थी, लेकिन लगातार देरी और फाइनेंशियल सपोर्ट पर सहमति न बनने के कारण 2015 में इसे रद्द कर दिया गया. इसके बाद भारत ने C-130J सुपर हरक्यूलिस और सीमित संख्‍या में सी-17 जैसे स्‍टॉपगैप हल अपनाए, लेकिन अब ये भी या तो महंगे हो रहे हैं या बंद हो चुके हैं. ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट से आर्म्‍ड फोर्सेज की ताकत में भी इजाफा होगा. ग्‍लोबल कंटेंडर नए टेंडर में कई इंटरनेशनल प्‍लेयर्स दस्‍तक दे रहे हैं :     IL-276 (रूस-HAL) : रूस का नया डिजाइन, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद सप्‍लाई चेन और वित्‍तीय अनिश्चितताओं पर सवाल.     C-130J (लॉकहीड मार्टिन-टाटा) : पहले से IAF में परिचित, लेकिन पुरानी तकनीक और सीमित इंडस्ट्रियल सपोर्ट.     A400M Atlas (एयरबस) : 37 टन तक ले जाने वाला आधुनिक और बहुपयोगी विमान, लेकिन कीमत और परिचालन लागत ऊंची.     KC-390 Millennium (एम्‍ब्राएर-महिंद्रा) : 18-30 टन भार क्षमता के साथ भारत की जरूरतों के अनुरूप, आधुनिक एवियोनिक्स और जेट-संचालित दक्षता.  सबसे अहम, ब्राजील ने गहरी औद्योगिक साझेदारी और भारत में उत्‍पादन की पेशकश की है. कूटनीतिक और औद्योगिक अवसर विशेषज्ञों के अनुसार, KC-390 भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्‍त माना जा रहा है. एयर मार्शल मथेस्‍वरन का कहना है कि इसके जेट इंजन इसे बेहतर दक्षता देते हैं और ब्राजील का तकनीकी सहयोग भारत के लिए लंबे समय तक लाभकारी साबित हो सकता है. वहीं A400M अपनी क्षमता से प्रभावित करता है लेकिन महंगा है. रूस का IL-276 अभी शुरुआती चरण में है और C-130J अब पुराना पड़ता जा रहा है. भविष्‍य की चुनौती करीब 80 विमानों की संभावित खरीद के साथ यह परियोजना न केवल अरबों डॉलर की होगी, बल्कि भारत की दीर्घकालिक रक्षा व विमानन साझेदारियों की दिशा भी तय करेगी. इसमें निजी कंपनियों टाटा, महिंद्रा और L&T के साथ HAL की भागीदारी अनिवार्य मानी जा रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परियोजना भारत की दीर्घकालिक नागरिक विमान निर्माण आकांक्षाओं को भी आधार दे सकती है. वायुसेना के लिए यह निर्णय सिर्फ विमान चुनने तक सीमित नहीं है. यह दो दशक से बनी क्षमता खाई को भरने, बेड़े का संतुलन सुनिश्चित करने और हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक त्वरित गतिशीलता बनाए रखने का सवाल है. Airbus, Embraer, Lockheed और रूस के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा में भारत को अब तय करना होगा कि वह किसे प्राथमिकता देता है.