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भारतीय प्रोफेशनल्स पर दोहरा संकट? H-1B वीजा में और कड़े नियम ला सकते हैं ट्रंप

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नई दिल्ली अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन फिर से H-1B वीजा के नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. ये वीजा खासतौर पर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और विद्यार्थियों के लिए बेहद अहम होते हैं, क्योंकि इसी से अमेरिका में काम करने और आगे चलकर ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता बनता है. लेकिन अब अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने ‘रिफॉर्मिंग द H-1B वीजा नॉन इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम’ नाम से एक नया प्रस्ताव जारी किया है. इसमें सिर्फ 1 लाख डॉलर की नई फीस ही नहीं, बल्कि कई सख्त बदलाव भी शामिल हैं- जैसे कौन सी कंपनी यह वीजा इस्तेमाल कर सकती है, कौन से पदों के लिए आवेदन मान्य होंगे और थर्ड पार्टी कंपनियों की निगरानी बढ़ाई जाएगी. क्या है नया प्रस्ताव? नए नियमों के तहत H-1B वीजा के चयन में अब ‘वेतन आधारित प्रणाली’ (Wage-Based Selection) लागू करने की योजना है. यानी जिन लोगों को ज्यादा वेतन मिलेगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. अब तक यह चयन पूरी तरह लॉटरी सिस्टम पर आधारित था. DHS का कहना है कि इन बदलावों का मकसद है ‘अमेरिकी मजदूरों के हितों की रक्षा करना और वीजा प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाना.’ अगर यह नियम लागू हुआ तो अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले छात्रों और कम एक्सपीरियंस वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स को एंट्री मुश्किल हो जाएगी. साथ ही, सरकार उन कंपनियों पर कड़ी नजर रखेगी जिन्होंने पहले वीजा नियमों का उल्लंघन किया है. च-1बी वीजा कैटिगरी की शुरुआत 1990 के इमिग्रेशन ऐक्ट के तहत की गई थी। इसके तहत यह प्रावधान किया गया था कि अमेरिकी कंपनियां बाहर के लोगों को ला सकें, जिनके पास जरूरी तकनीकी स्किल हो। इसी नियम के चलते बड़े पैमाने पर भारतीयों को अमेरिका में जाने का मौका मिला। खासतौर पर अमेरिकी टेक कंपनियों में भारतीय की बड़ी संख्या है। अब तक नियम था कि 65 हजार एच-1बी वीजा ही साल में जारी किए जा सकते थे। इसके अलावा 20 हजार ऐसे लोगों को भी छूट थी, जिन्होंने अमेरिका की किसी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री ली हो। इसके अलावा कई यूनिवर्सिटी और गैर-लाभकारी संस्थानों को इससे छूट रही हो। प्यू रिसर्च सेंटर की एक रिपोर्ट के अनुसार 2023 में एच-1 बी वीजा के तहत अमेरिका जाने वाले लोगों में तीन चौथाई भारतीय ही थे। 2012 से अब तक एच-1 बी वीजा हासिल करने वाले 60 फीसदी लोग कंप्यूटर से संबंधित नौकरियों में गए। इसके अलावा हेल्थ सेक्टर, बैंक, यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थानों के लिए भी एच-1 बी वीजा जारी किए गए। कब लागू होंगे नियम? अभी यह प्रस्ताव फेडरल रजिस्टर में सार्वजनिक सुझावों के लिए रखा गया है. अगर सब कुछ तय समय पर हुआ तो दिसंबर 2025 तक यह नया नियम लागू हो सकता है. H-1B वीजा 1990 के इमीग्रेशन Act के तहत शुरू हुआ था ताकि अमेरिकी कंपनियां ऐसे कुशल लोगों को ला सकें जिनकी विशेषज्ञता अमेरिका में आसानी से नहीं मिलती. यही वजह है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न जैसी कंपनियों में हजारों भारतीय इसी वीजा पर काम कर रहे हैं. अभी हर साल अमेरिका 65,000 H-1B वीजा जारी करता है, और 20,000 अतिरिक्त वीजा अमेरिकी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स या उससे ऊपर की डिग्री धारकों को मिलते हैं. 2023 में मिले सभी H-1B वीजा में से करीब 75% भारतीय नागरिकों को मिले थे. ऐसे में यह कदम भारत के लिए भी बड़ी खबर है.

इजरायली कैबिनेट मीटिंग बीच में रोक PM मोदी से बात की नेतन्याहू ने – क्या था इतना जरूरी?

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नई दिल्ली यरूशलम में गुरुवार रात एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे. एजेंडा बेहद गंभीर था. गाजा में सीजफायर और बंधकों की रिहाई पर बड़ा फैसला होना था. लेकिन अचानक नेतन्‍याहू ने बैठक रोक दी. वजह? भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आ गया था. जी हां, नेतन्‍याहू ने अपने सारे मंत्री और अफसर कुछ मिनटों के लिए इंतजार में छोड़ दिए, ताकि वो सीधे पीएम मोदी से बात कर सकें. दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत लगभग दस मिनट चली, लेकिन उसका असर अब दोनों देशों के रिश्तों पर साफ दिख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, प्रधानमंत्री नेतन्‍याहू ने गाजा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का फोन रिसीव किया. मोदी ने उन्हें इस समझौते पर बधाई दी और कहा कि भारत इस मानवीय प्रयास का समर्थन करता है. बयान में आगे लिखा है कि मोदी ने नेतन्‍याहू को करीबी दोस्त बताया और कहा कि भारत-इजरायल की दोस्ती हर परिस्थिति में मजबूत रहेगी. नेतन्‍याहू ने भी पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा कि वो भारत के साथ मिलकर काम जारी रखना चाहते हैं. नेतन्याहू को दी बधाई, गाज़ा समझौते का किया स्वागत पीएम मोदी ने नेतन्याहू को फोन लगाकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के गाज़ा में शांति प्लान के तहत हुई प्रगति पर इज़रायली पीएम को बधाई दी। इसके साथ ही पीएम मोदी ने बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों को मानवीय सहायता बढ़ाने पर हुए समझौते का स्वागत भी किया। पीएम मोदी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि दुनिया में कहीं भी किसी भी रूप या स्वरूप में आतंकवाद अस्वीकार्य है। मोदी बोले-आतंकवाद कहीं भी बर्दाश्त नहीं इस बातचीत के तुरंत बाद पीएम मोदी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, मैंने अपने मित्र प्रधानमंत्री नेतन्‍याहू को फोन करके गाजा शांति योजना में हुई प्रगति पर बधाई दी. हमने बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों के लिए बढ़ाई जा रही मानवीय मदद का स्वागत किया. मैंने दोहराया कि आतंकवाद किसी भी रूप में और कहीं भी स्वीकार्य नहीं है. मोदी के इस ट्वीट को कुछ ही मिनटों में लाखों व्यूज़ मिले और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे हाथों-हाथ लिया. कई विश्लेषकों ने कहा कि यह बातचीत इस बात का संकेत है कि भारत अब पश्चिम एशिया की राजनीति में एक संतुलित लेकिन प्रभावी भूमिका निभा रहा है. सोमवार तक रिहा होंगे सभी बंधक इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि गाज़ा में हामास के कब्जे में मौजूद बंधकों को सोमवार या मंगलवार को रिहा कर दिया जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि वे मिस्र में आयोजित होने वाली समझौते की हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे. ट्रंप ने व्हाइट हाउस कैबिनेट बैठक में बताया कि बुधवार को बंधकों की रिहाई और गाज़ा के पुनर्निर्माण के पहले चरण पर समझौता हुआ. हामास 72 घंटे के संघर्षविराम के बाद 20 बचे बंधकों को एक साथ रिहा करेगा. ट्रंप ने इसे खुशी का दिन बताया और कहा कि इससे क्षेत्र में “स्थायी शांति” की उम्मीद है. गाजा डील और नेतन्‍याहू की मुश्किलें इजरायल और हमास के बीच महीनों से चल रहे संघर्ष में यह सीजफायर डील बेहद अहम मानी जा रही है. इसमें सभी बंधकों की रिहाई और गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने की बात कही गई है. इजरायल के भीतर इस समझौते को लेकर मतभेद हैं. कुछ नेता मानते हैं कि यह आतंक के आगे झुकना है, तो कुछ इसे जरूरी राहत बता रहे हैं. ऐसे वक्त में नेतन्‍याहू का मोदी से बात करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि कूटनीतिक संदेश है कि भारत न सिर्फ गाजा संकट पर नज़र रखे हुए है, बल्कि शांति के हर प्रयास का समर्थन कर रहा है. पीएम मोदी ने इजरायल को बताया भारत का मित्र प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू हमेशा से भारत के घनिष्ठ मित्र रहे हैं और दोनों देशों के बीच यह मित्रता आने वाले समय में भी और मजबूत रहेगी. मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल के रिश्ते आपसी विश्वास, सहयोग और समान मूल्यों पर आधारित हैं और यह संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मोदी का इजरायल के प्रति समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया. दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि भारत और इजरायल आगे भी करीबी साझेदारी और समन्वय के साथ विभिन्न मुद्दों पर साथ काम करते रहेंगे. पीएम ने की ट्रंप से बात गुरुवार को इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की और उन्हें अमेरिका की ओर से कराए गए गाजा शांति समझौते के पहले चरण की सफलता पर बधाई दी. यह तीन हफ्तों में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दूसरी फोन कॉल थी. प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की इस ऐतिहासिक शांति योजना को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका की सराहना की. पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, मैंने मेरे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात की और ऐतिहासिक गाजा शांति योजना की सफलता पर उन्हें बधाई दी. व्यापारिक वार्ताओं में हुई अच्छी प्रगति की भी समीक्षा की. गाजा में हुआ युद्धविराम अमेरिका ने घोषणा की कि इजराइल और हमास — जो पिछले दो साल से एक-दूसरे से लड़ रहे हैं — उन्होंने गाजा शांति योजना के पहले चरण पर सहमति बना ली है. इस पहले चरण में गाजा पट्टी में युद्धविराम (सीजफायर) लागू किया जाएगा और इजराइली बंधकों और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की जाएगी. यह युद्ध उस समय शुरू हुआ जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइली पर हमला किया था. इस हमले में लगभग 1,200 लोगों की मौत हो गई थी और हमास ने 251 लोगों को बंधक बना लिया था, जिनमें से अब भी 50 से अधिक लोग उसकी कैद में हैं. इजराइल ने इस हमले के बाद गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया. फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 66,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. यह शांति समझौता उस लंबे संघर्ष में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिसने गाजा … Read more

शहबाज और मुनीर की अमेरिकी दौड़ धरी रह गई, ट्रंप ने पाकिस्तान को फिर किया निराश

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वाशिंगटन पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चापलूसी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. शहबाज और मुनीर अमेरिका तक गए और उन्होंने रेयर अर्थ मिनरल का खजाना भी सौंप दिया. लेकिन इसके बावजूद अब अमेरिका ने भारत को झटका दिया है. भारत में अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को एक बयान जारी किया. अमेरिकी दूतावास ने उन मीडिया रिपोर्टों पर स्पष्टीकरण जारी किया है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका पाकिस्तान को एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल्स (AMRAAM) बेचने जा रहा है. दूतावास ने स्पष्ट कहा है कि यह जानकारी गलत व्याख्या पर आधारित है और पाकिस्तान को किसी प्रकार की नई या उन्नत मिसाइल प्रणाली नहीं दी जा रही है. अमेरिकी दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 30 सितंबर 2025 को अमेरिकी ‘डिपार्टमेंट ऑफ वार’ (जो मिलिट्री कॉन्ट्रैक्ट की सार्वजनिक सूची जारी करता है) ने कई कॉन्ट्रैक्ट्स की जानकारी साझा की थी. उसी सूची में पाकिस्तान से जुड़ा एक विदेशी मिलिट्री बिक्री कॉन्ट्रैक्ट संशोधन भी शामिल था, लेकिन उसका उद्देश्य केवल रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति था. दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है- ‘यह कॉन्ट्रैक्ट किसी नई मिसाइल डिलीवरी या पाकिस्तान की मौजूदा हवाई युद्ध क्षमता को अपग्रेड करने से जुड़ा नहीं है. सस्टेनमेंट का मतलब केवल मौजूदा सिस्टम के सपोर्ट से है, अपग्रेड से नहीं.’ नहीं मिलेंगी नई मिसाइलें बीते कुछ दिनों से कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अमेरिका पाकिस्तान को AIM-120 AMRAAM मिसाइलें उपलब्ध करा रहा है. रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि इससे पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट की क्षमता बढ़ेगी और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव आएगा. नई मिसाइल सेल की खबरों ने इस धारणा को हवा दी थी कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते फिर से गर्म हो रहे हैं. हालांकि, अमेरिकी दूतावास के बयान ने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट का उद्देश्य केवल सिस्टम का रखरखाव, उपकरण अपडेट और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति है. इसे किसी भी रूप में पाकिस्तान की हवाई शक्ति बढ़ाने के कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, जो कई देशों के साथ चलते रहते हैं. इसमें हथियार प्रणाली के रखरखाव, परीक्षण, और सप्लाई चेन के सुचारु संचालन से जुड़े तकनीकी अपडेट शामिल होते हैं. बयान में यह भी जोड़ा गया कि कुछ मीडिया संस्थानों ने ‘कॉन्ट्रैक्ट मॉडिफिकेशन’ शब्द का गलत अर्थ निकालते हुए इसे नए हथियारों की सप्लाई समझ लिया.  

हिंद-प्रशांत में नहीं चलेगी चीन की चालबाज़ी, भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच 3 बड़ी रक्षा संधियाँ

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नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों ऑस्‍ट्रेलिया के दौरे पर हैं, जहां तीन बड़े रक्षा समझौते किए गए हैं. भारत ने क्‍वाड (Quad) पर कैनबरा से अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को करारा जवाब दिया है. ट्रंप ने क्‍वाड में अमेरिकी भागीदारी पर उदासीनता को कई बार स्‍पष्‍ट रूप से जताया है. वहीं, भारत क्‍वाड के अन्‍य सदस्‍य देशों (ऑस्‍ट्रेलिया और जापान) के साथ ही इस जोन के अन्‍य महत्‍वपूर्ण देशों (जैसे दक्षिण कोरिया) के साथ अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई दे रहा है. बता दें कि हिन्‍द-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामक गत‍िविधियों पर लगाम लगाने के लिए Quad का गठन किया गया था. इसमें भारत के साथ ही अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया और जापान शामिल हैं. ट्रंड की नीतियों के चलते इसपर ग्रहण सा लगता दिख रहा था, जिसे भारत अब कूटनीतिक ईंधन देकर उसे एक सशक्‍त फोरम बनाने में जुटा है. अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप प्रशासन की Indo-Pacific नीति और Quad के प्रति घटती रुचि के बीच भारत और ऑस्‍ट्रेलिया ने गुरुवार को अपने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में तीन महत्‍वपूर्ण समझौते किए. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके ऑस्‍ट्रेलियाई समकक्ष रिचर्ड मार्ल्‍स के बीच कैनबरा में हुई प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान, पनडुब्‍बी खोज एवं बचाव सहयोग, और ज्‍वाइंट स्‍टाफ डायलॉग मेकेनिज्‍म की स्‍थापना से जुड़े तीन समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इसके अलावा दोनों देशों ने एक संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप तैयार करने और दीर्घकालिक रक्षा एवं सुरक्षा ढांचा समझौता पर भी जल्‍द हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई. यह नया ढांचा वर्ष 2009 में हुए साझा सुरक्षा घोषणा पत्र की जगह लेगा. भारत लगातार मजबूत कर रहा रिश्‍ते राजनाथ सिंह की यह यात्रा 2014 में NDA सरकार के सत्ता में आने के बाद किसी भारतीय रक्षा मंत्री की पहली ऑस्‍ट्रेलिया यात्रा है. यह ऐसे समय में हुई है, जब भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव और नीति असंतुलन के बीच जापान, ऑस्‍ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस जैसे क्षेत्रीय साझेदारों के साथ अपने रक्षा संबंधों को सशक्‍त कर रहा है. मार्ल्‍स ने पहले कहा था कि चीन भारत और ऑस्‍ट्रेलिया दोनों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा है. बैठक में दोनों मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि Indo-Pacific क्षेत्र में स्वतंत्र, खुले, स्थिर और समृद्ध माहौल को बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना जरूरी है. दोनों देशों ने समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही, उड़ान और निर्बाध व्यापार के महत्व को भी दोहराया. रणनीतिक तौर पर अहम भारत-जापान के हालिया सुरक्षा सहयोग समझौते के बाद यह बैठक Quad देशों (भारत, ऑस्‍ट्रेलिया, अमेरिका और जापान) के बीच बढ़ते रक्षा तालमेल की दिशा में एक और अहम कदम मानी जा रही है. आने वाले महीने में होने वाले मालाबार नौसैनिक अभ्यास से पहले दोनों देशों ने समुद्री निगरानी और डोमेन अवेयरनेस पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई. राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हमने भारत-ऑस्‍ट्रेलिया के रक्षा उद्योग, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की. हमने अपने व्यापक रणनीतिक साझेदारी की महत्ता को दोहराया.’ उन्‍होंने आतंकवाद पर भारत की सख्‍त नीति दोहराते हुए कहा, ‘आतंक और वार्ता साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्‍यापार साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते.’ राजनाथ सिंह ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की.

फिलीपींस में भीषण भूकंप का झटका, अधिकारियों ने जारी की सुनामी चेतावनी

मिंडानाओ फिलीपींस के मिंडानाओ इलाके में ज़ोरदार भूकंप आया है. इसकी तीव्रता 7.4 मापी गई, जो कि बहुत शक्तिशाली है. भूकंप का केंद्र करीब 20 किलोमीटर गहराई में था. इस भूकंप के बाद स्थानीय भूकंप विज्ञान एजेंसी फिवोल्क्स ने सुनामी का अलर्ट जारी किया है. समुद्र किनार रहने वाले लोगों को तुरंत ऊंची जगहों पर जाने को कहा गया है.  यह भूकंप इतना खतरनाक था कि कई देशों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है. अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने कहा है कि भूकंप के केंद्र से 300 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक लहरें आ सकती हैं. शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुक़सान या तबाही की ख़बर नहीं आई है, लेकिन इतने शक्तिशाली भूकंप की वजह से लोग घबरा कर अपने घरों से बाहर निकल आए. मृतकों या घायलों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई है. यह भूकंप मिंडानाओ और आस-पास के क्षेत्रों के लिए गंभीर चेतावनी है, क्योंकि यह इलाके भूकंप आने वाले सक्रिय क्षेत्रों में आते हैं. स्थानीय प्रशासन ने क्षतिग्रस्त इलाकों में राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया है. पहले अस्पताल, सड़कों और गंभीर रूप से प्रभावित इमारतों को प्राथमिकता दी जा रही है. फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने कहा कि सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है. शक्तिशाली भूकंप फिलीपींस के लिए ख़तरनाक  फिलीपींस भूकंपीय रूप से बहुत ज्यादा एक्टिव एरिया है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें, जैसे फिलीपींस सी प्लेट और यूरेशियन प्लेट, एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं और आपस में टकराती हैं. इन टकरावों की वजह से जमीन के अंदर बहुत तेज तनाव उत्पन्न होता है, जो अचानक मुक्त होने पर भूकंप का रूप ले लेता है. फिलीपींस के क्षेत्र में साल भर में 800 से ज्यादा भूकंप आते रहते हैं.  चूंकि इस क्षेत्र का भूकंप केंद्र अक्सर समुद्र के नीचे होता है, इसलिए इसका एक बड़ा खतरा सुनामी का भी होता है. भूकंप के कारण समुद्र तल में हलचल से बहुत बड़ी लहरें पैदा हो सकती हैं, जो तटीय इलाकों पर भारी तबाही मचा सकती हैं. तटीय क्षेत्रों में बसे कई बड़े शहर और गांव इन लहरों की चपेट में आ सकते हैं, जिससे मानवीय और आर्थिक नुकसान और भी बढ़ जाता है. फिलीपींस की घनी आबादी, कमजोर निर्माण सामग्री से बनी इमारतें, और प्रमुख शहरों का तटीय इलाकों में स्थित होना इस भूकंपीय खतरे को और भी गंभीर बना देता है. ऐसे भूकंप में न सिर्फ जनहानि होती है, बल्कि भारी आर्थिक नुकसान और पुनर्निर्माण की लंबी प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है.

सूरज की रौशनी पर संकट! भारत में घट रही धूप, वैज्ञानिकों ने जताई गहरी चिंता

नई दिल्ली प्रकृति से खिलवाड़ का असर दिखने लगा है. इससे दुनिया के हर देश और क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं. अब अपना ही देश देखिए ना. इस साल मानसून के सीजन में देश के उत्तरी हिस्से में कई जगहों पर औसत से काफी अधिक बारिश हुई. वहीं पूर्वी भारत पूरे मानसून में बारिश के लिए तरसता रहा. फिर लौटते-लौटते वहां भी मानसून ने बड़ी तबाही मचा दी. बिहार और पश्चिम बंगाल में मानसून के अंतिम दिनों में भारी बारिश हुई. मौसम में यह बदला यूं नहीं हो रहा है. इसके पीछे गहरे कारण सामने आ रहे हैं. इस बीच एक और चिंतित करने वाली स्टडी आई है. इसके मुताबिक भारत के भूभाग में सूरज की चमक फीकी पड़ने लगी है. एक तरह से भारत से सूरज रूठने लगा है. पूरे इलाके में धूप के घंटों में बड़ी कमी आई है. ऐसे में संकट की इस आहट से वैज्ञानिक बेचैन हो गए हैं. दरअसल, इस साल की लंबी मानसून और लगातार छाए बादलों से ऐसा महसूस हुआ कि मानो सूरज कहीं खो गया हो. लेकिन अब एक नई वैज्ञानिक स्टडी ने इस धारणा को डेटा से पुष्ट किया है. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू), पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) और इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) जैसे संस्थानों के वैज्ञानिकों के एक संयुक्त अध्ययन में पाया गया है कि भारत के अधिकतर हिस्सों में पिछले तीन दशकों से धूप के घंटे लगातार घट रहे हैं. इसका प्रमुख कारण मोटे बादल और बढ़ता एरोसोल प्रदूषण है. रिपोर्ट के मुताबिक यह शोध इस महीने नेचर की साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है. अध्ययन में 1988 से 2018 तक नौ क्षेत्रों के 20 मौसम स्टेशनों से धूप घंटों के डेटा का विश्लेषण किया गया. धूप घंटे वे होते हैं जब सूर्य की किरणें इतनी तेज होती हैं कि उन्हें रिकॉर्ड किया जा सके. निष्कर्षों के अनुसार सभी क्षेत्रों में सालाना धूप घंटे घटी हैं, सिवाय पूर्वोत्तर भारत के जहां मौसमी स्तर पर मामूली स्थिरता देखी गई. स्टडी में क्या कहा गया? 20 जगहों का डेटा वैज्ञानिकों ने 1988 से 2018 तक 9 इलाकों के 20 मौसम स्टेशनों के धूप-घंटे डेटा की जांच की. धूप-घंटा वो समय होता है जब सूरज की रोशनी इतनी तेज हो कि इसे रिकॉर्ड किया जा सके. नतीजा- सभी इलाकों में सालाना धूप के घंटे घटे हैं. सिर्फ पूर्वोत्तर भारत में मॉनसून के मौसम में थोड़ी स्थिरता दिखी.     BHU के वैज्ञानिक मनोज के. श्रीवास्तव ने बताया कि औसतन पश्चिम तट पर धूप के घंटे हर साल 8.6 घंटे कम हुए.     उत्तरी मैदानी इलाकों में सबसे ज्यादा गिरावट – 13.1 घंटे प्रति साल.     पूर्वी तट: 4.9 घंटे प्रति साल की कमी.     डेक्कन पठार: 3.1 घंटे प्रति साल की कमी.     मध्य अंतर्देशी इलाका: करीब 4.7 घंटे प्रति साल की कमी. स्टडी कहती है कि अक्टूबर से मई तक (सूखे महीनों में) धूप बढ़ी, लेकिन जून से सितंबर (मॉनसून में) तेज गिरावट आई. क्यों घट रही धूप? बादल और प्रदूषण के दोषी वैज्ञानिकों का मानना है कि ये 'सोलर डिमिंग' (सूरज की रोशनी कम होना) एरोसोल कणों की वजह से है. एरोसोल छोटे कण होते हैं, जो फैक्ट्रियों के धुएं, जलते बायोमास (लकड़ी-कोयला) और गाड़ियों के प्रदूषण से निकलते हैं. ये कण बादलों के लिए 'बीज' का काम करते हैं. इससे बादल के छोटे-छोटे बूंदें बनती हैं, जो लंबे समय तक आसमान में टिके रहते हैं. नतीजा- ज्यादा बादल होने से कम धूप मिल रही है.  इस साल की मॉनसून में भी भारत के ज्यादातर हिस्सों में लगातार बादल छाए रहे, खासकर पश्चिम तट, मध्य भारत और डेक्कन पठार पर. बारिश न होने पर भी आसमान ढका रहा. स्टडी 2018 तक की है, लेकिन आज भी वही धुंध, नमी और बादल पैटर्न बने हुए हैं – बल्कि पहले से ज्यादा. श्रीवास्तव ने जोड़ा कि ज्यादा एरोसोल बादलों को वातावरण में लंबे समय तक रखते हैं, जिससे जमीन तक सूरज की रोशनी कम पहुंचती है. धूप के घंटों की कमी का बड़ा असर पड़ेगा…     सोलर एनर्जी: भारत दुनिया का तेज बढ़ता सोलर मार्केट है. लेकिन कम धूप से बिजली उत्पादन घटेगा. रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर की प्लानिंग मुश्किल हो जाएगी.     खेती: फसलें सूरज पर निर्भर. कम धूप से पैदावार प्रभावित होगी, खासकर मॉनसून के बाद वाली फसलें.     मौसम मॉडलिंग: क्लाइमेट चेंज की भविष्यवाणी में गड़बड़ी. प्रदूषण और बादलों का पैटर्न बदल रहा है. वैज्ञानिक कहते हैं कि ये ट्रेंड जारी रहा, तो भारत को प्रदूषण कंट्रोल और क्लाउड मॉनिटरिंग पर ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा. ये स्टडी बताती है कि विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन कैसे बिगड़ रहा है. लंबी मॉनसून अच्छी लगती है, लेकिन ज्यादा बादल और प्रदूषण से सूरज छिप रहा है. भारत को साफ हवा, कम एरोसोल और बेहतर मौसम पूर्वानुमान पर काम तेज करना होगा.  बीएचयू के वैज्ञानिक मनोज के. श्रीवास्तव के मुताबिक औसतन, पश्चिमी तट पर धूप घंटे प्रति वर्ष 8.6 घंटे कम हुए, जबकि उत्तरी भारतीय मैदानों में सबसे तेज गिरावट 13.1 घंटे प्रति वर्ष दर्ज की गई. पूर्वी तट और डेक्कन पठार पर भी क्रमशः 4.9 और 3.1 घंटे प्रति वर्ष की कमी देखी गई. केंद्रीय अंतर्देशीय क्षेत्र में भी लगभग 4.7 घंटे प्रति वर्ष का नुकसान हुआ. अध्ययन के मुताबिक, अक्टूबर से मई सूखे महीनों में धूप में थोड़ी वृद्धि हुई, लेकिन जून से सितंबर के मानसून काल में गिरावट तेज रही. वैज्ञानिकों ने इस लंबे समय के ‘सोलर डिमिंग’ को उच्च एरोसोल सांद्रता से जोड़ा है- ये छोटे कण औद्योगिक उत्सर्जन, बायोमास जलाने और वाहनों के प्रदूषण से निकलते हैं. छाए रहते हैं बादल एक वैज्ञानिक ने कहा कि ये एरोसोल संघनन नाभिक का काम करते हैं, जिससे बादल के छोटे-छोटे कण बनते हैं जो लंबे समय तक टिके रहते हैं और आकाश को लगातार ढक लेते हैं. इस साल का मानसून भी भारत के अधिकांश हिस्सों में लगातार बादलों से भरा रहा, खासकर पश्चिमी तट, मध्य भारत और डेक्कन पठार पर. यहां बिना बारिश के दिनों में भी ओवरकास्ट स्थितियां आम रहीं. हालांकि अध्ययन 2018 तक का है, लेकिन ये रुझान आज भी प्रासंगिक हैं- हवा, नमी और बादल पैटर्न पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गए … Read more

‘धर्म और राजनीति का घालमेल’: कुरान पाठ के बाद कांग्रेस झंडा लहराने पर मचा बवाल

नई दिल्ली कर्नाटक के हुबली में 5 अक्टूबर को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कुरान पढ़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा ने इस मामले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे सरकारी मंच का दरुपयोग करार देते हुए कांग्रेस की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों ने इस कार्यक्रम को एक पार्टी शो में बदल दिया। दरअसल, 05 अक्टूबर को हुबली में हुए कार्यक्रम के कुरान पाठ का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कहा यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। वहीं, कांग्रेस ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। साथ ही यह भी दावा किया है कि यह एक सरकारी कार्यक्रम था। सरकारी कार्यक्रम में कांग्रेस के झंडे इस घटना को लेकर भाजपा विधायक अरविंद बेलाड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स किए एक पोस्ट में बताया, "यह एक सरकारी समारोह था। वे किसी इमाम को बुलाकर कुरान कैसे पढ़वा सकते हैं. एक सरकारी कार्यक्रम में कांग्रेस के झंडे लहरा रहे थे और मौजूद अधिकारी पार्टी कार्यकर्ताओं की तरह व्यवहार कर रहे थे।" उन्होंने आगे लिखा कि हुबली-धारवाड़ नगर आयुक्त रुद्रेश घाली और जिला पंचायत के सीईओ भुवनेश पाटिल ने सरकारी प्रोटोकॉल का पालन करने के बजाय पार्टी के मेहमानों की तरह भाग लिया। यह प्रशासनिक नैतिकता का गंभीर उल्लंघन और करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग है। मैंने मुख्य सचिव @shalinirajnish को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है, तो आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। कांग्रेस के झंडे फहराने में कुछ भी गलत नहीं वहीं, इसको लेकर राज्य मंत्री संतोष लाड ने कहा यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं था। कार्यक्रम से केवल यह विशेष वीडियो लिया है और इसे दिखा रहे हैं। इसमें कुरान का पाठ था। लेकिन हिंदू देवी-देवताओं के लिए अन्य पाठ भी थे… हिंदू धर्म से संबंधित बहुत सारे पाठ थे। इसलिए उन्हें आपत्ति क्यों है, मुझे नहीं पता। लाड ने कहा कि यह कांग्रेस के पार्षदों द्वारा आयोजित किया गया था। ऐसे आयोजन में कांग्रेस के झंडे फहराने में कुछ भी गलत नहीं है।  

भारत के ‘आधार’ की तर्ज पर ब्रिटेन लाएगा नया ID कार्ड सिस्टम, क्या है पीएम स्टारमर का प्लान?

नई दिल्ली ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर बुधवार को मुंबई पहुंचे। भारत पहुंचाते ही सबसे पहले उन्होंने इंफोसिस के सह-संस्थापक और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि से मुलाकात की। दरअसल कीर आधार कि तर्ज पर ही ब्रिटेन में डिजिटल पहचान प्रणाली कि योजना पर विचार कर रहे हैं। स्टार्मर के प्रवक्ता ने बताया कि नीलेकणी के साथ उनकी बैठक इंफोसिस के साथ किसी वाणिज्यिक समझौते के बारे में नहीं थी, बल्कि ब्रिटेन सरकार का लक्ष्य आधार योजना कि तर्ज पर अपना डिजिटल संस्करण तैयार करना है। क्या चाहते हैं पीएम स्टारमर ? ब्रिटिश पीएम स्टारमर ने अपनी मंशा जाहिर की है कि वे अपने देश में भी आधार की तर्ज पर स्मार्टफोन आधारित डिजिटल पहचान आईडी शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। ब्रिटेन में ये शुरुआत पूरी तरीके से भारतीय तकनीक पर आधारित होगी। इस पहचान आईडी को बनाने का मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन में गैरकानूनी रूप से आने वाले अप्रवासियों पर बंदिश लगाना है। स्टारमर के प्रवक्ता ने बताया इसलिए वो भारत जैसे देशों से बात कर रहे हैं जो पहले से इस तरह की डिजिटल आईडी सेवा को शुरू कर चुके हैं। बता दें भारत में 2009 में आधार सेवा शुरू की गई थी।   ब्रिटेन में हो रहा जमकर विरोध जहां एक ओर ब्रिटिश पीएम स्टारमर भारत में आधार सेवा पर चर्चा कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन में डिजिटल पहचान पत्र के प्रति समर्थन में भारी गिरावट आ रही है। विपक्षी दलों ने कहा है कि वे इस योजना का विरोध करेंगे। हालांकि, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री अपनी योजना को लेकर बेहद उत्साहित हैं। मुंबई रवाना होने से पहले उन्होंने मीडिया से कहा, "हम भारत जा रहे हैं, जहां पहले से ही पहचान पत्र जारी किया जा रहा है जहां उसे भारी सफलता मिली है। इसलिए मेरी एक बैठक पहचान पत्र से संबंधित होगी।"  

महिलाओं के लिए राहत भरी खबर, कर्नाटक में अब हर महीने मिलेगा ‘मासिक धर्म अवकाश’

बेंगलुरु  कर्नाटक में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने गुरुवार को सभी क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं को हर महीने पेड पीरियड लीव देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट बैठक के बाद बेंगलुरु स्थित विधान सौध में मीडिया से बात करते हुए, विधि एवं संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने इसका ऐलान किया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। मंत्री पाटिल ने बताया कि मासिक धर्म अवकाश राज्य भर के सरकारी कार्यालयों, कारखानों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी), आईटी फर्मों और निजी औद्योगिक क्षेत्रों में लागू होगा। चार राज्यों में अपनाई जा रही इस नीति के बारे में पूछे जाने पर, मंत्री पाटिल ने कहा कि सरकार द्वारा कोई अध्ययन नहीं किया गया है। चूंकि यह नीति अन्य राज्यों में उपयोगी और सफल रही है, इसलिए इसे कर्नाटक में भी अपनाया गया है। राज्य के श्रम मंत्री संतोष लाड ने कहा, "हम पिछले एक साल से मासिक धर्म अवकाश देने का नियम लागू करने के लिए काम कर रहे हैं। महिलाओं पर कई जिम्मेदारियां होती हैं। घर के काम के साथ-साथ वे बच्चों की देखभाल भी करती हैं। मासिक धर्म के दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का तनाव होता है। इसलिए, हमने मासिक धर्म अवकाश देने पर विचार-विमर्श के लिए एक समिति बनाई। समिति ने सालाना छह दिन की छुट्टी की सिफारिश की थी। सरकार ने अब सालाना 12 दिन की छुट्टी देने का फैसला किया है।" श्रम मंत्री ने आगे कहा, "हमें नहीं पता कि इसे दूसरे राज्यों में कैसे लागू किया गया, लेकिन कर्नाटक में हम इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सरकारी और निजी, सभी क्षेत्रों में लागू होगा।" मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उर्वरक भंडारण के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित करने पर भी सहमति व्यक्त की। राज्य सरकार ने बताया कि 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पुलों के पुनर्निर्माण और नवीनीकरण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। कर्नाटक भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों के लिए दूसरे चरण में 405.55 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 11 श्रमिक आवासीय विद्यालय स्थापित करने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

ड्रोन-विरोधी क्रांति: ‘सक्षम’ से बदलने वाली है युद्धभूमि की ताकत

नई दिल्ली राष्ट्रीय सुरक्षा और बदलते हवाई खतरों से निपटने की दिशा में सेना ने एक अहम कदम उठाया है। भारतीय सेना ने स्वदेशी रूप से विकसित 'सक्षम' काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (यूएएस) ग्रिड सिस्टम के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह अत्याधुनिक प्रणाली वास्तविक समय में दुश्मन ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम की पहचान, ट्रैकिंग और उसे निष्प्रभावी करने में सक्षम होगी। इस परियोजना को फास्ट ट्रैक प्रोक्योरमेंट मार्ग के तहत मंजूरी दी गई है ताकि इसे अगले एक वर्ष के भीतर सभी फील्ड फॉर्मेशन में लागू किया जा सके। इससे टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस की हवाई सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। यह टैक्टिकल बैटलफील्ड अब जमीनी क्षेत्र से लेकर 3,000 मीटर (10,000 फीट) ऊंचाई तक के एयर लिटोरल को शामिल करता है। ‘सक्षम’ प्रणाली की आवश्यकता 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान स्पष्ट रूप से महसूस की गई। इसके बाद भारतीय सेना ने अपने पारंपरिक टैक्टिकल बैटल एरिया की अवधारणा को बदलकर टैक्टिकल बैटलफील्ड स्पेस के रूप में विस्तारित किया है, जिसमें जमीन के ऊपर का हवाई क्षेत्र भी शामिल किया गया है। सेना के मुताबिक इस नए दृष्टिकोण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जमीन से 3,000 मीटर की ऊंचाई तक का हवाई क्षेत्र थलसेना के नियंत्रण में रहे। इस क्षेत्र को एयर लिटोरल कहा जाता है। यह क्षेत्र सेना के नियंत्रण में होने से मित्रवत हवाई संपत्तियां स्वतंत्र रूप से संचालित हो सकेंगी और दुश्मन ड्रोन की शीघ्र पहचान एवं उसकी निष्क्रियता संभव हो सकेगी। ‘सक्षम’ एक उच्च तकनीकी, मॉड्यूलर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम है। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड गाजियाबाद के सहयोग से विकसित किया गया है। यह प्रणाली आर्मी डेटा नेटवर्क पर काम करती है और वास्तविक समय में संपूर्ण हवाई क्षेत्र की समेकित जानकारी सभी सेना को प्रदान करती है। प्रणाली के प्रमुख उद्देश्य की बात की जाए तो यह काउंटर-यूएएस प्रबंधन के लिए एकीकृत जानकारी प्रदान करती है। अपने और दुश्मन दोनों के यूएएस डेटा, सेंसर और हथियार प्रणालियों को एक सामान्य जीआईएस-आधारित प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करती है। फील्ड कमांडरों के लिए रियल टाइम विजुअलाइजेशन उपलब्ध कराती है। विकसित हो रहे यूएएस खतरों के अनुसार लचीली, स्केलेबल और मॉड्यूलर संरचना प्रदान करने में सहायक है। इसके अलावा, यह प्रणाली 'अकाशीर सिस्टम' से भी इनपुट प्राप्त करेगी, जिससे युद्धक्षेत्र के भीतर सभी हवाई गतिविधियों की रियल टाइम मैपिंग संभव होगी। यह प्रणाली सेंसर और हथियार प्रणालियों के समन्वित उपयोग द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया देती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खतरों का विश्लेषण और त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है। युद्धक्षेत्र का सटीक दृश्य देती है। निशाना साधने में अधिक सटीकता आती है। इससे भारतीय सेना की अन्य परिचालन और हवाई प्रबंधन प्रणालियों के साथ संपूर्ण इंटरऑपरेबिलिटी भी संभव होती है। 'सक्षम' पूरी तरह से स्वदेशी रक्षा प्रणाली है, जो सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल को सशक्त बनाती है। बीईएल द्वारा विकसित यह प्रणाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा फ्यूजन तकनीक का उपयोग करती है, जिससे इसे भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप अपग्रेड किया जा सकेगा। प्रणाली के पूरी तरह संचालन में आने के बाद 'सक्षम' भारतीय सेना के काउंटर-यूएएस नेटवर्क की रीढ़ बनेगी। यह ग्राउंड और हवाई दोनों खतरों की एकीकृत तस्वीर कमांडरों को प्रदान करेगी। इससे निर्णय लेने की गति बढ़ेगी। त्वरित कार्रवाई संभव होगी और एयर लिटोरल क्षेत्र में नियंत्रण सुनिश्चित रहेगा। यह पहल भारतीय सेना के 'डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन (2023–2032)' के तहत डिजिटली सक्षम, तकनीक-आधारित युद्धक्षेत्र की दिशा में एक निर्णायक कदम है।