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धन और आस्था का संगम: माता टेकरी में जमा हुए 52.92 लाख, विदेशी करेंसी और ज्वैलरी भी मिली

देवास नवरात्र में माता टेकरी पर दर्शन करने पहुंचे लगभग दस लाख भक्तों की आस्था से भरी दान पेटियां शनिवार को खोली गईं। शनिवार को बड़ी माता मां तुलजा भवानी और छोटी माता मां चामुंडा के दोनों मंदिरों की कुल 24 दान पेटियों की गिनती सुबह 11 बजे शुरू हुई और शाम करीब 6 बजे तक चलती रही। दान पेटियों से लगभग 44 लाख रुपये प्राप्त हुए। इसके अलावा नवरात्र में माता को एवं दान पेटियों में कई आभूषण भी भक्तों ने अर्पित किए। नवरात्र पर लाखों भक्तों ने किए दर्शन नवरात्र के दौरान माता टेकरी पर देश-विदेश के लाखों भक्त दर्शन के लिए आए और भारी मात्रा में चढ़ावा चढ़ाया। नवरात्र समाप्त होने के बाद शनिवार को माता टेकरी पर स्थित मंदिरों की दान पेटियों को खोला गया। सुबह करीब 10 बजे से टेकरी पर मंदिरों में तहसीलदारों की निगरानी में पेटियों को खोला गया और दान की संपूर्ण राशि बोरियों में भरकर देव स्थान प्रबंध समिति कार्यालय में लाई गई। दान पेटियों से निकले दान के अलावा ऑनलाइन, क्यूआर व रसीद के माध्यम से भी भक्तों ने दान किया है।   नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही बता दें कि पूरे नवरात्र के दौरान टेकरी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। इस दौरान व्यवस्था और सुरक्षा के लिए कलेक्टर ऋतुराज सिंह, एसपी पुनीत गेहलोद सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी माता टेकरी पर मौजूद रहे। नवरात्र में करीब 800 सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात थे। कोटवार, पटवारी, आरआई व तीन तहसीलदार शामिल हैं। दान पेटियों से भगवान को अर्पित किए गए दानों में आभूषण और नेपाल, सिंगापुर सहित अन्य देशों के करेंसी नोट भी पाए गए। इस दौरान मंदिर समिति के सदस्य, पटवारी, कोटवार, राजस्व निरीक्षकों सहित 100 से अधिक कर्मचारी गिनती में शामिल रहे। साथ ही तहसीलदार सपना शर्मा, हरिओम ठाकुर ने भी गिनती में सहयोग के साथ निगरानी की। दान और पत्रों की संपूर्ण गिनती पारदर्शी तरीके से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में की गई। 52 लाख 92 हजार 868 रुपये दान में आए इस नवरात्र में रसीद के माध्यम 3 लाख 61 हजार 280 रुपये और दान पेटियों में 43 लाख 91 हजार 588 रुपये प्राप्त हुए। बैंक बार कोड के माध्यम से 5 लाख 40 हजार रुपये नवरात्र में प्राप्त हुए। कुल 52 लाख 92 हजार 868 रुपये शारदीन नवरात्र में भक्तों ने दान दिया। इसके अलावा चांदी के 11 छत्र, एक चांदी का मुकुट, 5 जोड़ी बिछिया, 4 स्वास्तिक, 8 जोड़े पायल दान पेटियों से प्राप्त हुए। नवरात्र में कुछ दर्शनार्थियों ने माता को चांदी के हार भी चढ़ाए थे। साथ ही नवरात्र में छोटी माता जी को एक स्वर्ण मुकुट और एक जोड़े सोने के कंगन भी भक्तों ने अर्पित किए। पिछले साल 45 लाख 51 हजार रुपये प्राप्त हुए माता टेकरी प्रभारी तहसीलदार हरिओम ठाकुर ने बताया कि शनिवार को बड़ी माता मंदिर की 11 और छोटी माता मंदिर की 13 दान पेटियां खोली गईं। नवरात्र के पूर्व सभी पेटियां 19 सितंबर को खोली गई थी। सामान्यत: नवरात्र के पूर्व और नवरात्र के बाद सभी मंदिरों की दान पेटियां खोली जाती हैं। इसके अलावा तीन-चार माह के अंतर में नियमित रूप से दान पेटियां खोली जाती हैं। बता दें कि विगत वर्ष शारदीय नवरात्र में दान पेटियों से लगभग 45 लाख 51 हजार रुपये दान व आभूषण प्राप्त हुए थे।

धार के बाग में जिओपार्क मान्यता प्रस्ताव को मिल सकती है सकारात्मक अनुशंसा

 धार  यूनेस्को के वैश्विक जिओपार्क के कार्यकारी विज्ञानी डॉ. अलीरेजा (ईरान) एवं लखनऊ के विज्ञानी डॉ. सतीश त्रिपाठी और खोजेमा नजमी (भू-गर्भशास्त्र विशेषज्ञ) ने बाग क्षेत्र स्थित डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का गुरुवार को निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने उद्यान में संरक्षित किए गए डायनासोर के जीवाश्म, विभिन्न प्रकार की चट्टानों, समुद्री जीवों के जीवाश्म और वानस्पतिक जीवाश्मों का सूक्ष्मता से अवलोकन किया। डॉ. अलीरेजा ने जीवाश्म की प्रचुर मात्रा को देख आश्चर्य व्यक्त किया एवं वनमंडल धार द्वारा जीवाश्म संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को सराहा। डॉ. अलीरेजा ने डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को वैश्विक जिओपार्क की मान्यता के लिए प्रस्तावित करने की अनुशंसा की बात कही। बाग गुफाओं का सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक स्तर पर अध्ययन करने पर विशेष जोर दिया गया है। जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन डॉ. त्रिपाठी ने सभी जीवाश्मों की विशेषता बताई एवं शोध व संरक्षण की भविष्य की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। वनमंडलाधिकारी धार विजयनंथम टीआर ने बताया कि डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान को आधुनिक जिओपार्क बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। समस्त जीवाश्मों का डिजिटल डाक्यूमेंटेशन भी किया जाएगा, जो इसे वैश्विक पहचान देगा। उपवनमंडलाधिकारी संतोष कुमार रनशोरे द्वारा बाग के आसपास स्थित समस्त जीवाश्म स्थलों एवं बाग की गुफाओं की जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों के दल के साथ वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. शैलेंद्र सोलंकी एवं सुनील बघेल व वेस्ता मंडलोई उपस्थित रहे। संपूर्ण डायनासोर राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण कराया गया एवं आज दिवस तक किए गए प्रयासों के बारे में जानकारी दी गई।

भोपाल में इको-फ्रेंडली स्प्रे की शुरुआत, देवी को अर्पित नींबुओं से होगा जलस्रोतों का शुद्धिकरण

भोपाल  नवरात्रि के दौरान शहर में 5000 दुर्गा पंडाल बनाए गए थे। इन पंडालों में दुर्गा प्रतिमाओं पर नींबू चढ़ाए गए थे। अब ये नींबू बेकार नहीं जाएंगे। नगर निगम ने अनूठा कदम उठाते हुए इन नींबुओं का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए किया है। इन नींबूओं को इकट्ठा कर बायो एंजाइम तैयार किया जाएगा। यह तालाब और कुंडों की सफाई में इस्तेमाल होगा। दरअसल, शहर में 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी बेकार चीजों से पैसे कमाने की दिशा में भोपाल में नवाचार किया जा रहा है। इसके लिए दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं को चढ़ाए गए नीबूओं को इकट्ठा किया गया है। इसमें अन्य सामग्री मिलाकर एक स्प्रे तैयार होगा। दुर्गा पंडालों से इकट्ठा हुए 2 टन नींबू नगर निगम के अफसरों का अनुमान है कि इस नवरात्रि में भोपाल में अलग-अलग दुर्गा जी की प्रतिमाओं से 2 टन से ज्यादा नींबू इकट्‌ठा हुए हैं। इन नीबूओं के उपयोग से 10 हजार लीटर स्प्रे तैयार किया जाना है। इस स्प्रे में संतरे के छिलके और सड़े गुड़ को भी मिलाया जाएगा। इसके बाद तालाब-कुंड में डाला जाएगा। इस एंजाइम से पानी साफ और स्वच्छ होगा। गणेशोत्सव से शुरू हुआ था प्रयोग गौरतलब है कि पिछले दिनों हुए गणेश उत्सव के दौरान भी बायो एंजाइम बनाने का प्रयोग किया गया था, जो कि सफल रहा था। हालांकि उस समय इतनी अधिक मात्रा में नींबू इकट्‌ठा नहीं हुए थे। लेकिन अब नवरात्रि के 9 दिनों में करीब 5 हजार पंडाल में निगम की निर्माल्य सामग्री इकट्ठा किया। इनमें से नींबू को अलग कर बायो इंजाइम बनाने की प्रक्रिया शुरू की। शुरूआती 6 दिनों में 2 टन नींबू जमा हुए, लेकिन आखिरी 3 दिन में ही नींबूओं की मात्रा 8 टन से ज्यादा हो गई। ऐसे बनता है बायो एंजाइम दुर्गा पंडालों में पूजन सामग्री में से नीबू को अलग इकट्ठा किया जाता है। नीबू को मशीन में डालकर रस निकाला जाता है। इसे केन के अंदर भरा जाता है। यह नींबू, संतरे के छिलकों, सड़े ‎गुड़ और पानी को मिलाकर बनाया‎ जाता है। 10 से 15 दिन में यह तैयार हो जाता है। यह है फायदा जिस जल में प्रदूषण के ‎कारण ऑक्सीजन की मात्रा‎ कम हो जाती है। वहां पर बायो एंजाइम को मिलाया जाता है। यह पानी ‎को प्राकृतिक तरीके से साफ करता ‎है। बायो इंजाइम एक प्राकृतिक, ‎गैर-विषैले और पर्यावरण के अनुकूल ‎क्लीनर का काम करता है। इसका ‎उपयोग कपड़े धोने के साथ बर्तन ‎और हाथ धोने के लिए भी किया जा ‎सकता है।

5 अक्टूबर को असम में निवेशकों से वन-टू-वन मुलाकात, मध्य प्रदेश में निवेश के बेहतर अवसरों पर चर्चा

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, आज रविवार 5 अक्टूबर को असम के गुवाहटी में पूर्वोत्तर राज्यों के निवेशकों सहित भूटान के प्रतिनिधियों से वन टू वन चर्चा करेंगे। सेशन को रॉयल भूटान काउन्सलेट के काउंसिल जनरल  जिग्मे थिनायल नामग्याल भी संबोधित करेंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश के निवेश के प्रमुख सेक्टर और उद्योग-अनुकूल नीतियों की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संकल्पबद्धता और राज्य की मजबूत नीतियां निवेशकों को भरोसा देती हैं कि उनके व्यवसाय के लिए प्रदेश में हर तरह के संसाधन और अवसर उपलब्ध हैं। यह अवसर पूर्वोत्तर और मध्यप्रदेश के उद्योगों के लिए साझी संभावनाओं का नया मार्ग खोलेगा।  मध्यप्रदेश की केन्द्रीय भौगोलिक स्थिति, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा और बाजार तक आसान पहुंच इसे निवेशकों के लिए सर्वाधिक अनुकूल और एक अनूठा केंद्र बनाती है। मध्यप्रदेश ने उद्योग-अनुकूल नीतियां और क्लस्टर आधारित विकास मॉडल तैयार किए हैं, जिससे निवेशक अपनी नए उद्योग की योजना को तेजी से क्रियान्वित कर सकते हैं। राज्य के एग्रो और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेशकों को कृषि उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमताओं का लाभ मिलता है। टेक्सटाइल्स और अपैरल सेक्टर राज्य की परंपरागत और आधुनिक क्षमता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे निर्यात और रोजगार दोनों में वृद्धि संभव होती है। फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में मध्यप्रदेश की ताकत निवेशकों को कच्चे माल, अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन के अवसर प्रदान करती है। सीमेंट, मिनरल्स और इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल्स और केमिकल्स, टूरिज्म और वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी इक्विपमेंट तथा प्लास्टिक्स और पॉलिमर्स जैसे सेक्टर राज्य को निवेश के लिए बहुआयामी विकल्प प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से इन क्षेत्र में निवेश केवल व्यवसाय ही नहीं बल्कि आर्थिक विकास और स्थायी अवसरों का रास्ता बन रहा है। मध्यप्रदेश पूर्वोत्तर के उद्योगपतियों के लिए निवेश का आदर्श स्थल है। असम और अन्य राज्यों में फैले फार्मा हब, सीमेंट यूनिट्स, टी-रिसर्च और प्लांटेशन, लॉजिस्टिक केंद्र और पेट्रोकेमिकल्स जैसी सुविधाओं के साथ मध्यप्रदेश निवेशकों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक और भरोसेमंद वातावरण प्रदान करता है।  

महू-खंडवा रेल कॉरिडोर में 20 किमी सुरंगों का निर्माण, पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान

इंदौर  महू-खंडवा रेलवे प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को भोपाल में रीजनल इंपावरमेंट कमेटी (आरईसी) की बैठक में प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें जंगल में बिछाई जाने वाली पटरी और निर्माण कार्यों पर सहमति बन चुकी है। गेज परिवर्तन के तहत इंदौर-बड़वाह वनमंडल की 454 हेक्टेयर वनभूमि आएगी, जिसमें एक लाख 52 हजार पेड़ चिह्नित किए गए हैं। हालांकि 17 हजार पेड़ों को बचाया जा सकेगा, क्योंकि इस पूरे रेल मार्ग पर 20 किमी लंबी 16 सुरंगें बनाई जाएंगी। इस कारण इन पेड़ों को काटा नहीं जाएगा। साथ ही रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया कि मार्ग में जगह-जगह अंडरपास बनाए जाएंगे, जिससे पेड़ों को बचा सकेंगे। हालांकि महीनेभर में प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद रेलवे को राशि जमा करनी होगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा। महू-खंडवा प्रोजेक्ट में इंदौर वनमंडल की 410 हेक्टेयर और बड़वाह वनमंडल की 44 हेक्टेयर वनभूमि इस्तेमाल की जाएगी। इंदौर के 410 हेक्टेयर क्षेत्र में एक लाख 30 हजार और 44 हेक्टेयर में 22 हजार पेड़ों को चिह्नित किया गया है। हालांकि सुरंग बनने से इनमें 17 हजार पेड़ बचाए जाएंगे। बड़िया से बेका के बीच 4.1, चोरल से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच 2.2 और राजपुर में 1.6 किमी लंबी सुरंग रहेगी। शेष 12.1 किमी की 13 सुरंग बनाई जाएंगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सुरंग के अलावा अंडरपास बनाए जाएंगे। ये सभी 30-30 मीटर होंगे। इससे भी काफी संख्या में पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा। धार-झाबुआ में लगेंगे पौधे इंदौर-बड़वाह के जंगलों से कटने वाले पेड़ों की भरपाई की जाएगी, मगर इसके लिए इंदौर वनमंडल में वनक्षेत्र नहीं है। इसके चलते धार और झाबुआ में एक हजार हेक्टेयर में पौधे रोपे जाएंगे। वन अफसरों ने वनभूमि चिह्नित कर ली है। फिलहाल रेलवे भी इसके लिए राजी है। दक्षिण से बढ़ेगी कनेक्टिविटी महू-खंडवा प्रोजेक्ट से इंदौर को काफी फायदा होगा। गेज परिवर्तन होने से दक्षिण की ओर जाने वाली ट्रेन भी इंदौर होकर गुजरेगी। अभी दक्षिण से चलने वाली ट्रेन उज्जैन और खंडवा से डायवर्ट हो जाती है। 150 करोड़ रुपये वन विभाग को रेलवे देगा वनभूमि के एवज में रेलवे वन विभाग को 40 करोड़ रुपये देगा। साथ ही पौधों की नेट प्रेजेंट वैल्यू भी निकाली गई है। उसके लिए भी 40 करोड़ रुपये देने होंगे। जबकि 1000 हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे। इसका खर्च भी रेलवे ही उठाएगा। यह राशि लगभग 50 करोड़ रुपये आएगी। वहीं पेड़ों को काटने और परिवहन का खर्च भी वन विभाग रेलवे से वसूलेगा, जो चार से पांच करोड़ होगा। वन विभाग के मुताबिक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे को राशि जमा करनी होगी। उसके बाद रेलवे को काम करने की अनुमति दी जाएगी। अगले कुछ दिनों में मिलेगी अनुमति     वन व पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी ने महू-खंडवा प्रोजेक्ट को लेकर बैठक ली थी, जिसमें वन विभाग ने कुछ आपत्तियां लगाई थीं। इसे लेकर रेलवे ने जवाब दिया है। अगले कुछ दिनों के भीतर कमेटी हरी झंडी देगी। इसके बाद रेलवे को आगे की प्रक्रिया करनी होगी। –प्रदीप मिश्रा, डीएफओ, इंदौर वनमंडल  

हाईकोर्ट का आदेश: सरकारी आवास में पालतू जानवर नहीं रह सकते, केवल परिवार को अनुमति

जबलपुर  पालतू कुत्ते और बिल्लियां अब सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रह गई हैं, बल्कि कभी-कभी पड़ोसियों और परिवार के लिए कानूनी मुद्दा बन रही हैं। जबलपुर (Jabalpur) के व्हीकल फैक्ट्री में तैनात जूनियर वर्क्स मैनेजर (JWM) सैफ उल हक सिद्दीकी ने भी इसी कारण हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। मामला इस बात का है कि फैक्ट्री प्रशासन ने पड़ोसियों की शिकायत पर JWM को सरकारी क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी क्वार्टर परिवार के लिए है, और यदि डॉग पालने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पर है, तो वह किराए के मकान में रहकर पालतू डॉग का पालन कर सकता है। पालतू डॉग्स और पड़ोसियों के बीच विवाद का कारण हाल ही में देखा गया है कि पालतू डॉग और बिल्लियां न केवल पति-पत्नी के बीच मतभेद का कारण बन रही हैं, बल्कि पड़ोसियों के साथ भी संबंधों को प्रभावित कर रही हैं। पड़ोसियों ने शिकायत की थी कि JWM के घर में कई पालतू कुत्ते और बिल्लियां रहने के कारण शोर और गंदगी बढ़ रही है। इस शिकायत के बाद फैक्ट्री प्रशासन ने सरकारी क्वार्टर खाली करने का आदेश जारी किया। JWM ने इसे अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्वार्टर आवंटन केवल परिवार के लिए होता है, और किसी भी पालतू जानवर को वहां रखने की जिम्मेदारी परिवार के अधिकार में नहीं आती। हाईकोर्ट का आदेश और तर्क जस्टिस विवेक जैन की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि फैक्ट्री प्रशासन का आदेश सही है। सरकारी क्वार्टर परिवार के रहने के लिए है, न कि पालतू जानवरों के लिए। पड़ोसियों की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और शांति बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि याचिकाकर्ता पालतू डॉग पालना चाहते हैं, तो वह किराए का मकान लेकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। याचिकाकर्ता क्वार्टर का मालिक नहीं है, बल्कि इसे फैक्ट्री प्रशासन ने आवंटित किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पालतू जानवरों के कारण उत्पन्न परेशानियों को प्रशासन और कानूनी तौर पर हल किया जा सकता है। देश-विदेश में पालतू जानवरों से जुड़े विवाद पालतू डॉग्स और बिल्लियों से जुड़े विवाद अब सिर्फ जबलपुर या किसी एक शहर तक सीमित नहीं रह गए हैं। यहां तक कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी 2023 में अपने पालतू डॉग की वजह से सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन चुके हैं। भारत में भी कई परिवारों में पालतू जानवरों ने घर की शांति को चुनौती दी है, कभी पति-पत्नी के बीच तलाक की नौबत आई, तो कभी पड़ोसियों के साथ मतभेद और कानूनी याचिकाओं की झड़ी लग गई। इसलिए पालतू जानवर सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रहे, बल्कि वे अब सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारियों का भी हिस्सा बन गए हैं, जिनका पालन हर मालिक को सोच-समझकर करना पड़ता है। मिडिया और समाज पर प्रभाव इस मामले ने समाज में पालतू जानवरों और पड़ोसियों के अधिकार के बीच संतुलन की चर्चा शुरू कर दी है। मीडिया ने इसे बड़े पैमाने पर कवर किया, और सोशल मीडिया पर भी जब इस तरह के विषय उजागर होते हैं, तो लोग अपनी तरह-तरह की राय देने में पीछे नहीं रहते। अदालत के आदेश ने साफ कर दिया कि सरकारी आवास का उपयोग निजी जिम्मेदारी और पालतू जानवरों के लिए नहीं किया जा सकता। पड़ोसियों और मालिकों के बीच उत्पन्न विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से नियंत्रित किया जा सकता है।

अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ : ऊर्जा मंत्री तोमर

जनसुनवाई में ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने किया जनसमस्याओं का निराकरण भोपाल सरकार की मंशा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह बात शनिवार को अपने ग्वालियर रेसकोर्स रोड स्थित सरकारी कार्यालय पर जनसुनवाई करते हुए कही। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने आमजन की समस्याओं को सुनते हुए सम्बन्धित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने हिदायत दी कि किसी भी समस्या का निदान निर्धारित समय-सीमा में किया जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने जनसुनवाई में आई महिलाओं को तत्काल राशन दिलाने, वृद्धजनों की वृद्धावस्था पेंशन और मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड बनवाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि आपका यह सेवक किसी भी परिवार के साथ अन्याय नहीं होने देगा। आपकी सेवा के लिए आपका यह सेवक सदैव तत्पर रहा है और आगे भी आपके हर सुख-दु:ख में हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के हर स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए हैं।  

रोशनी के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा पॉवर हाउस सारनी

भोपाल बैतूल जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा सारनी स्थित है। वर्ष 1965 के आसपास वहां सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की स्थापना हुई थी। वर्ष 2007 तक सतपुड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा पॉवर प्लांट था लेकिन कुछ पुरानी यूनिट बंद होने के बाद वर्ष 2019 से यह मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी का मध्यप्रदेश का तीसरा बड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन बन गया। वर्ष 2014 से 250-250 मेगावॉट की दो यूनिट यहां बिजली का उत्पादन कर रही हैं। सारनी के आसपास सुरम्य वन क्षेत्र है। यहां भरपूर वन संपदा उपलब्ध है। वनों में स्थित सागौन, साल, पलास तथा अन्य वृक्ष यहां की हरी-भरी घाटियों को बेहद सुंदर बनाते हैं। इस क्षेत्र की आबादी करीब 86 हजार के आसपास है। सारनी पॉवर हाउस अस्पताल आसपास के क्षेत्र में संजीवनी साबित हो रहा दरअसल बात हो रही है सारनी पॉवर हाउस के अस्पताल की जहां कंपनी कार्मिकों के अलावा अन्य समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल बेहतर तरीके से की जा रही है। सारनी पॉवर हाउस में करीब 580 से ज्यादा अभियंता व कार्मिक कार्यरत हैं। यह कार्मिक सुविधाजनक आवासीय परिसर में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सारनी कस्बे में बच्चों की पढ़ाई के लिए केन्द्रीय विद्यालय है, बाजार है और बुनियादी जरूरत की सारी सुविधाएं यहां पर उपलब्ध हैं। 55 वर्ष पुराना अस्पताल पूर्णत: सुसज्जित सारनी स्थित यह अस्पताल 1971 में स्थापित हुआ। इस अस्पताल के पहले चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार थे जो बाद में मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियुक्त हुए। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी के मुख्य अभियंता वी. के. कैथवार ने बताया कि यह अस्पताल सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाओं से युक्त है तथा पॉवर हाउस के कार्मिकों के साथ अन्य समुदाय के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। सुदूर अंचल में स्थापित होने के बावजूद यहां अस्पताल में 30 बिस्तरों की व्यवस्था है। अस्पताल में पूर्णकालिक चिकित्सक तथा अनुबंध के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी चिकित्सा सेवाएं देते हैं। अस्पताल में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय रघुवंशी ने बताया कि अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व वार्ड बॉय सभी मिलकर बिजली अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ आसपास के लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं में जुटे हुए हैं।  दूरदराज के लोगों का सहारा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं, इनमें महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, वर्न यूनिट, एक्स-रे रूम, पैथोलॉजी लैब, ऑपरेशन थिएटर के साथ दवाई वितरण की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर इलाज के लिए प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या की बात करें तो औसतन 70 से 75 मरीजों की ओपीडी रहती है। इनमें कंपनी कार्मिकों एव उनके परिजनों के अलावा आसपास के गांव के लोग भी अपने परिवार सहित आकर स्वास्थ्य की सुविधाओं का लाभ लेते हैं। यह अस्पताल दूरदराज के समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य की भी देखभाल करने में सक्षम है।  दो एम्बुलेंस से तत्काल इलाज की सुविधा मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह बताते हैं कि यह अस्पताल सारनी और इसके आसपास के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां पर दो एम्बुलेंस भी मरीज की सेवा में तत्पर रहती हैं जो दूर दराज के मरीजों को लाने तथा जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल बैतूल या नर्मदापुरम पहुंचाने का कार्य करती हैं।  

मध्यप्रदेश एवं गुजरात के अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक

सरदार सरोवर प्रोजेक्ट पर हुई चर्चा भोपाल  मध्यप्रदेश और गुजरात राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच शनिवार को उच्चस्तरीय बैठक सम्पन्न हुई, जिसमें सरदार सरोवर प्रोजेक्ट संबंधी महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य सरदार सरोवर प्रोजेक्ट से संबंधित मुद्दों का आपसी समन्वय से निराकरण करना था। बैठक की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन तथा गुजरात के मुख्य सचिव श्री पंकज जोशी ने संयुक्त रूप से की। बैठक में नर्मदा घाटी विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, सचिव श्री जॉन किंग्सली, सी.एम.डी., एस.एस.एन.एन.एल श्री मुकेश पुरी तथा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट को लेकर बनी सहमति बैठक में दोनों राज्यों के बीच सरदार सरोवर प्रोजेक्ट में गुजरात के गरुड़ेश्वर वियर के माध्यम से पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट को लेकर सहमति बनी। मध्यप्रदेश सरकार इसमें सशर्त सम्मिलित होगी, इससे मध्यप्रदेश सरकार को उत्पन्न बिजली में 57% की भागीदारी मिलेगी। साथ ही सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र में आने वाली शासकीय राजस्व, आबादी एवं वन भूमि की प्रतिपूर्ति राशि को लेकर सिद्धांत तय किये गए। बैठक में दोनों राज्यों की लेनदारी एवं देनदारी के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा में यह तय किया गया कि दोनों राज्यों की वित्तीय टीम आपस में विचार कर अगले कुछ दिनों में वित्तीय समायोजन पर निराकरण करेगी। बैठक अत्यंत सकारात्मक एवं सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।  

वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण विषय पर हुई युवा संसद

वन्यजीव सप्ताह में विद्यार्थियों ने पक्षियों और वन्य जीवों के बारे में प्राप्त की जानकारी भोपाल वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में राज्य स्तरीय वन्यजीव सप्ताह-2025 के अंतर्गत शनिवार 4 अक्टूबर को चौथे दिन सुबह 6:00 बजे से दिव्यांग बच्चों के लिये पक्षी अवलोकन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में आयाम इंक्लूजन स्कूल भोपाल के 57 छात्र/छात्राओं ने पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के दर्शन किये। इनमें मैगपाई रॉबिन, इंडियन रॉबिन, ग्रीन बी ईटर, ग्रे फ्रैंकोलिन, कॉमन किंग फिशर, वाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर को देखकर बच्चे उत्साहित हो उठे। पक्षी अवलोकन शिविर में सम्मिलित बच्चों को वन्यप्राणियों के मॉडल दिखाये गये एवं उनके बारे में विषय विशेषज्ञों द्वारा जानकारी प्रदान की गई, जिसे जानकर बच्चे बहुत ही रोमांचित हुये। महाविद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिये सुबह 6:30 बजे से "वन विहार" विषय पर फोटोग्राफी प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें 40 बच्चों ने भाग लेकर वन विहार के वन्यजीवों की फोटोग्राफी की एवं तीन-तीन फोटोग्राफ्स, साफ्ट कॉपी के रूप में कार्यालय में जमा किये। रंगोली प्रतियोगिता वन एवं वन्यजीव विषय पर कक्षा 5 से 8 तक वर्ग के लिये आयोजित की गई। "पौराणिक कथाओं में वन्यजीव" विषय पर प्रतियोगिता कक्षा 9वीं के लिये सुबह 9:00 बजे से आयोजित की गई। इसमें 126 प्रतिभागियों ने भाग लेकर विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों पर आधारित बहुत सुंदर रंगोली बनाई। विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन छात्र/छात्राओं के लिये "युवा संसद" प्रतियोगिता सुबह 11.00 बजे से आयोजित की गई। इसमें 4 ग्रुप में 53 प्रतिभागियों ने भाग लेकर "वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण" विषयों पर पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार व्यक्त किये। स्रोत व्यक्ति के रूप में डॉ. सुदेश वाघमारे, डॉ. संगीता राजगीर एवं मो. खालिक तथा अन्य अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान श्री विजय कुमार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक संचालक वन विहार डॉ. रूही हक ने किया। पक्षी अवलोकन शिविर के दौरान वन विहार भ्रमण पर आये विभिन्न विद्यालयों के लगभग 300 छात्र/छात्राओं ने भी पक्षियों एवं वन्यजीवों के सम्बंध में जानकारी प्राप्त कर ज्ञानवर्धन किया। 5 अक्टूबर के कार्यक्रम वन्य जीव सप्ताह में 5 अक्टूबर को सुबह 7:00 बजे से वन्यजीव संरक्षण के लिये 'रन फॉर वाईल्ड लाईफ" दौड़ होगी। इसका रिपोर्टिंग समय सुबह 6:00 बजे रहेगा। दौड़ वन विहार गेट क्र.-2 से डिपो चौराहा, पॉलीटेक्निक चौराहा, श्यामला हिल्स होते हुए बोट क्लब की ओर वन विहार के गेट क्र.-1 पर पूरी होगी। साथ ही सुबह 10:30 बजे से "वनों में पर्यटन वन्यजीवों के संरक्षण में सहायक है" विषय पर शिक्षक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा।