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स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता 3 साल टली, अब उपभोक्ता 6 अक्टूबर को करेंगे विरोध प्रदर्शन

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भोपाल स्मार्ट मीटर के विरोध में 6 अक्टूबर को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन होगा। मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (एमईसीए) के बैनरतले प्रदेशभर से उपभोक्ता डॉ. अंबेडकर पार्क में जुटेंगे। वे 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने, बिजली के रेट कम करने जैसी 11 मांग भी सरकार के सामने रखेंगे। स्मार्ट मीटर के लगातार विरोध के बीच मध्य प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने स्मार्ट मीटर को अनिवार्यता का नियम तीन साल आगे बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक के लिए बढ़ा दिया है। इस एक फैसले ने स्मार्ट मीटर अभियान की रफ्तार को फिलहाल के लिए रोक दिया है। दरअसल पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्काम्स) ने आयोग से स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता की अवधि बढ़ाने की अनुमति मांगी थी। कंपनियों का तर्क था कि स्मार्ट मीटर मात्र बिजली खपत मापने का एक यंत्र नहीं है, बल्कि एक वृहद विद्युत प्रणाली है। एसोसिएशन की प्रदेश संयोजक रचना अग्रवाल और लोकेश शर्मा ने बताया, मध्यप्रदेश सहित देशभर में बिजली उपभोक्ताओं द्वारा बिजली के प्री-पेड स्मार्ट मीटर का विरोध किया जा रहा है। ये विरोध कोई औपचारिकता या कोई निहित स्वार्थ पर आधारित राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि हमारी दैनिक आय और जीवन मरण के प्रश्न से जुड़ा है। हाल ही में इसके दुष्परिणाम भी सामने आए हैं। बैठक में मुदित भटनागर, सतीश ओझा, आरती शर्मा आदि पदाधिकारी भी मौजूद थे। पदाधिकारी बोले-प्रदेश में स्मार्ट मीटर की स्थिति ठीक नहीं स्मार्ट मीटर से अत्यधिक बढ़े हुए बिजली बिलों की समस्या मध्यप्रदेश के सभी जिलों में है। भोपाल में ही उपभोक्ताओं ने बताया कि उनका बिल हर महीने भरने के बावजूद एक उपभोक्ता का 10 हजार, दूसरे का 20 हजार, तीसरे का 29 हजार रुपए आया है। ग्वालियर में उपभोक्ता जिसका एक कमरे का घर है, के बिल 5 हजार रुपए तक आ रहे हैं। ग्वालियर के 3 उपभोक्ताओं ने बताया कि महीने में दो बार बिल आ गया है। दोनों 6-6 हजार का है। गुना, सीहोर, विदिशा, सतना, इंदौर, देवास, दमोह, जबलपुर आदि जिलों में भी आम उपभोक्ता जिसके बिजली बिल 700-800 आते थे, वे हजारों में आ रहे हैं। गुना में एक किसान को 2 लाख से ज्यादा का बिजली बिल दिया गया। जहां-जहां स्मार्ट मीटर लगे हैं, उन सभी जिलों में उपभोक्ता बिजली बिलों से पीड़ित है। लोग अपने गहने और बर्तन बेचकर बिल भर रहे हैं। इसमें मीटर के साथ नेटवर्किंग, मीटर डेटा मैनेजमेंट, बिलिंग, सर्वर आदि का एकीकरण आवश्यक है। इसके लिए उनके के पास प्रशिक्षित कर्मियों की कमी है। इधर, स्मार्ट मीटर से अनाप-शनाप बिल की वजह से उपभोक्ताओं का विरोध लगातार बना हुआ था। कंपनियों ने आयोग के सामने तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन इस याचिका में उन्होंने स्वीकार कर लिया कि सर्वर का एकीकरण नहीं होने और अप्रशिक्षित कर्मियों की वजह से स्मार्ट मीटर की रीडिंग में गलतियां हो रही हैं। अब तीनों कंपनियां पहले तकनीकी कमी दूर करेंगी। इस बीच नए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भर्ती होगी। उसके बाद ही स्मार्ट मीटर लगाने के अभियान में तेजी लाई जाएगी। कंपनी ने दिए हैं ये तर्क     फिलहाल पूरे देश में स्मार्ट मीटर की कमी बनी हुई है।     आरडीएसएस योजना के तहत मीटरिंग प्रोजेक्ट में कई समस्याएं हैं।     टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है।     अलग-अलग डिस्काम्स की अपनी-अपनी समस्याएं हैं। उपभोक्ताओं को मिलेंगी ये राहत     बिजली कंपनियां शहरी क्षेत्र में नए कनेक्शन के तहत स्मार्ट मीटर न होने पर सामान्य मीटर भी लगा सकेंगी।     ग्रामीण क्षेत्र में नान-स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं।     पुराने खराब, जले, रुके हुए मीटर भी अब 31 मार्च 2028 तक बदले जा सकेंगे। फैक्ट फाइल     1.37 करोड़ स्मार्ट मीटर मप्र में लगाए जाने हैं।     38.47 लाख पहले चरण में स्वीकृत।     99.22 लाख दूसरे चरण में स्वीकृत।     12.56 लाख मीटर तीनों डिस्काम ने अब तक लगाए। इसलिए विरोध     स्मार्ट मीटर मोबाइल रीचार्ज की तरह प्री-पेड क्षमता वाले डिवाइस के साथ है। जिसे कंपनी मोबाइल फोन की तरह कभी भी प्री-पेड कर सकती है।     इसकी मानीटरिंग व कमांड भी सेंट्रल सिस्टम के तहत है। इसमें कंपनी के लिए उपभोक्ता की यूनिट्स को भी बदलना असंभव नहीं है।     मीटर टाइम आफ डे (TOD) का आकलन करने की क्षमता रखता है। दिन-रात का अलग-अलग रेट है।     मीटर में कोई खराबी आ जाने की स्थिति में मीटर को बदलने पर फिर से यह रकम चुकानी होगी। यह जबरदस्त बोझ है, जो कि आम उपभोक्ता के ऊपर डाला जा रहा है।     स्मार्ट मीटर का बिल नहीं चुका पाने की स्थिति में बिजली तुरंत काट दी जा रही है। जुड़वाने के नाम पर 350 रुपए उपभोक्ता से लिए जा रहे हैं, जबकि हमारी सिक्योरिटी राशि बिजली विभाग के पास पहले से ही जमा है।     बिजली बिल की हार्ड कॉपी नहीं दी जा रही है। जिससे अशिक्षित और तकनीकी रूप से अक्षम उपभोक्ताओं के लिए समस्या पैदा हो गई है।     हर उपभोक्ता के पास स्मार्ट फोन नहीं है। बिजली का बिल भरने के लिए ही लोगों को फिर मोबाइल खरीदना होगा।     बिजली कंपनी से हमारा अनुबंध पोस्टपेड मीटर के लिए है, न कि प्री-पेड मीटर के लिए। फिर इस प्रीपेड क्षमता वाले मीटर को क्यों लगाया गया है?

बिहार चुनाव ने रोका MP के बोर्ड और निगम की नियुक्तियां, पद रिक्त

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भोपाल  मध्य प्रदेश BJP की राज्य कार्यसमिति, 40 स्वतंत्र बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्तियां अब बिहार विधानसभा चुनावों के बाद ही होंगी। पार्टी सूत्रों ने बुधवार को बताया कि संगठन का पूरा ध्यान अब बिहार के महत्वपूर्ण चुनावी मुकाबले पर है। इस कारण सभी नियुक्तियों को टाल दिया गया है। पार्टी के कई बड़े नेता, जैसे शहरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व प्रदेश BJP अध्यक्ष VD शर्मा, BJP के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया और युवा मामलों के मंत्री विश्वास सारंग, बिहार में चुनाव ड्यूटी पर हैं। वे अभी वहीं तैनात हैं। 28 जिला कार्यसमितियों का ऐलान अभी बाकी एक वरिष्ठ प्रदेश BJP पदाधिकारी ने हमारे सहयोगी अखबार टीओआई को बताया, 'अब तक पार्टी ने 35 जिला कार्यसमितियों के सदस्यों के नाम घोषित किए हैं। 28 और जिला कार्यसमितियों की घोषणा बाकी है। बाकी जिला कार्यसमितियों की घोषणा हो सकती है, लेकिन बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों की घोषणा (बिहार चुनावों के बाद तक) होने की संभावना नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'राज्य कार्यसमिति के सदस्यों को भी इंतजार करना होगा।' वरिष्ठों की आपत्ति फिर पितृपक्ष से टली नियुक्ति अगस्त के आखिरी हफ्ते से बड़ी राजनीतिक हलचल शुरू हुई थी। तब BJP के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री BL संतोष ने दो दिन के लिए राज्य की राजधानी का दौरा किया था। उसी दौरान स्वतंत्र राज्य निगमों और बोर्डों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के पदों के लिए उम्मीदवारों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, सभी वरिष्ठ नेता नामों के चयन से खुश नहीं थे। इस कारण घोषणा को तब तक के लिए टाल दिया गया जब तक आम सहमति नहीं बन जाती। इस बीच, हिंदू श्राद्ध के 15 दिन शुरू होने से भी सूची की घोषणा में और देरी हुई। मंत्रिमंडल विस्तार पर भी ब्रेक वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दिल्ली गए थे। उन्होंने पार्टी आलाकमान को राज्य मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत के बारे में बताया था। लेकिन, सूत्रों का दावा है कि उसे भी इंतजार करना होगा। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को भी बिहार चुनाव खत्म होने तक टाल दिया है। प्रदेश BJP प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि BJP एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन करती है। राज्य कार्यसमिति के सदस्यों और निगमों के अध्यक्षों की घोषणा से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लिया जाएगा। हमारे कई शीर्ष नेता बिहार चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हैं। सभी नेताओं के साथ चर्चा के बाद नए पदाधिकारियों के नामों की औपचारिक घोषणा की जाएगी। विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कड़ी मेहनत करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

खंडवा का दर्दनाक हादसा: PM ने घोषित किया मुआवजा, राहुल गांधी ने दी संवेदना, 11 मासूमों को खोने का मातम

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भोपाल मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के पंधाना में हुए दर्दनाक हादसे के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने भी दुख जाहिर किया है। उन्होंनें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतक के परिजनों को दो लाख और घायल कों 50 हजार देने की घोषणा की हैं। वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी शोक व्यक्त किया हैं। PMO की ओर से जारी की गई पोस्ट में लिखा है कि ‘मध्य प्रदेश के खंडवा में हुए एक हादसे में हुई जान-माल की हानि से अत्यंत दुःखी हूं। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के साथ हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे। राहुल गांधी ने भी जताया दुख वहीं राहुल गांधी ने भी दिख जताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा है कि मध्यप्रदेश में प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों की मृत्यु, जिनमें अधिकतर बच्चे हैं, अत्यंत हृदयविदारक है। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों और बच्चों के अभिभावकों के साथ हैं। हादसों में घायल लोगों की कुशलता और जल्द से जल्द स्वस्थ होने की आशा करता हूं। CM ने भी किया मुआवजे का ऐलान वहीं आपको बता दें कि सीएम मोहन यादव ने भी शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा भी की हैं। खंडवा में दर्दनाक हादसे ने नम करदीं सभी की आंखें मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में गुरुवार की खुशियों और उत्साह से भरी शोभायात्रा अब पाडलफाटा गांव के लिए असहनीय दर्द में बदल गई है। कल तक जहां गांव के बच्चे और युवा डीजे पर थिरक रहे थे, आज वही गली रोते-बिलखते परिजनों की चीखों से गूंज रही हैं। शुक्रवार सुबह प्रशासन ने 11 मृतकों के शवों को पंधाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक-एक कर एम्बुलेंस में गांव लाया। संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस का भारी बल गांव में तैनात किया गया है। एडिशनल एसपी महेंद्र तारणेकर और डीएसपी हेडक्वार्टर अनिल सिंह चौहान भी मौके पर मौजूद हैं। सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली कहानी है 8 साल की चंदा की। उसका शव सबसे आखिरी पानी से निकाला गया। उसकी दो छोटी बहनें उसी के पास खेल रही थीं, और उन्हें अभी तक पता नहीं कि उनकी बड़ी बहन अब इस दुनिया में नहीं रही। 

मध्यप्रदेश के 14 जिलों में सब्जी उत्पादन बना किसानों की उम्मीद, 3000 से अधिक किसानों को मिला लाभ

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प्रदेश में वाटरशेड मिशन का नवाचार मध्यप्रदेश में कलस्टर आधारित सब्जी उत्पादन से संवर रही किसानों की तकदीर 14 जिलों के 3000 किसान उठा रहे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ भोपाल परंपरागत खेती से आय में बढ़ोतरी की राह तलाश रहे किसानों के लिए वाटरशेड विकास घटक के तहत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 14 जिलों के 3000 किसान अब कलस्टर आधारित सब्जी उत्पादन से जुड़कर ₹40 से 50 हजार तक की आय अर्जित कर रहे हैं। यह पहल न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सशक्त बना रही है, बल्कि गांवों में ग्रामीण आजीविका को भी नई दिशा दे रही है। रतलाम जिले के नौगांवाकला निवासी तेजपाल जैसे किसान जो पहले सिर्फ खाने लायक सब्जी उगाते थे, अब आधा एकड़ में टमाटर और मिर्च की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। यह बदलाव संभव हुआ है वाटरशेड विकास घटक की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के नवाचार से जिसने पहली बार जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ा है। 100 से 150 किसानों का चयन किया गया योजना के तहत प्रत्येक परियोजना में सिंचाई की सुविधा वाले 100 से 150 किसानों का चयन किया गया। इन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देने के लिए 835 लीड वेजिटेबल फार्मर चिन्हित किए गए और उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाकर गांवों में सब्जी उत्पादन की वैज्ञानिक पद्धति सिखाई गई। 30 हजार रुपये प्रति किसान दिया जा रहा अनुदान सरकार किसानों को प्रति किसान ₹30 हजार तक का अनुदान भी दे रही है, जिससे वे खाद, दवाइयों और अन्य संसाधनों की खरीद कर सकें। इतना ही नहीं 50 से 60 किसानों के बीच गांव में ही शेड नेट नर्सरी तैयार की जा रही है, जिससे उन्नत किस्म की पौध समय पर उपलब्ध हो सके। इन नर्सरियों के लिए ₹1.30 लाख तक की सहायता भी दी जा रही है। आगामी सीजन में 9000 और किसान होंगे लाभान्वित इस योजना की सफलता को देखते हुए रबी सीजन में 36 जिलों की 85 परियोजनाओं में विस्तार किया जा रहा है, जिससे लगभग 9000 और किसान लाभान्वित होंगे। वर्तमान में धार, रतलाम, खरगोन, बड़वानी, सागर, गुना, इंदौर, श्योपुर सहित 14 जिलों में इसका सफल संचालन हो रहा है। तकनीक और योजना पर आधारित खेती से समृद्धि की ओर बढ़ रहे किसान संचालक वाटरशेड  अवि प्रसाद के अनुसार यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की इस पहल से साफ है कि अब किसान सिर्फ मौसम पर नहीं बल्कि तकनीक और योजना पर आधारित खेती से समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं।  

किसानों को पहली बार मिला सोयाबीन में पीला मोजेक से हुए नुकसान का मुआवजा

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किसानों के चेहरों की मुस्कान ही हमारी असली दीवाली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 जिलों के किसानों को 653.34 करोड़ रुपये की राहत राशि सिंगल क्लिक से खातों में की अंतरित किसानों को पहली बार मिला सोयाबीन में पीला मोजेक से हुए नुकसान का मुआवजा मुख्यमंत्री को किसानों ने दिया धन्यवाद और किया अभिनंदन मुख्यमंत्री से किसानों ने कहा – आपने दीपावली से पहले ही हमारी दीपावली मनवा दी बाढ़ प्रभावित 3.90 लाख किसानों को मिली 371 करोड़ की राहत राशि पीला मोजैक से प्रभावित सोयाबीन फसल के मुआवजे के रूप में किसानों को मिली 282 करोड़ रूपए से अधिक की मदद मुआवजा राशि मिलने से किसानों का खाद-बीज खरीदना हुआ आसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव 6 अक्टूबर को बड़वानी में नशामुक्ति सम्मेलन में होंगे शामिल मुख्यमंत्री 10 अक्टूबर को रतलाम में भावांतर योजना रैली में करेंगे सहभागिता भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की सेवा ही भगवान की सेवा है। बाढ़ हो, आपदा हो, ओलावृष्टि हो या कीट प्रकोप हो, किसान भाई हर विपदा से लड़ते और जूझते हैं। किसान पर कोई भी विपदा या आपदा आए सरकार संकट की हर घड़ी में साथी बनकर किसानों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से कहा कि आप अकेले नहीं हैं, पूरा परिवार बनकर हम आपके साथ हैं। आपकी खुशी में ही प्रदेश की खुशी है। उन्होंने कहा कि हर प्रकार की आपदा और कीट प्रकोप से फसलों को हुई क्षति की राहत राशि किसानों को दी जाएगी। ये राहत राशि किसानों को बड़ा संबल देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब तक आखिरी पीड़ित किसान को सहायता राशि नहीं मिल जाती, हमारी सरकार चैन से नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि किसानों के चेहरों की मुस्कान ही हमारी असली दीपावली जैसी है। किसानों की मेहनत और जज्‍बा फिर से उनके खेतों को जीवन और समृद्धि से भर देगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में किसानों को प्राकृतिक आपदा और कीट प्रकोप से हुई फसल क्षति की राहत राशि वितरण कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में बीते माहों में हुई अतिवृष्टि-बाढ़ और सोयाबीन में पीला मोजेक रोग से हुए फसल नुकसान के लिए 13 प्रभावित जिलों के 8 लाख 84 हजार 772 किसानों को 653.34 करोड़ की राहत राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इसमें अतिवृष्टि/बाढ़ से हुई फसल क्षति से प्रभावित 3 लाख 90 हजार 167 किसानों को 331.34 करोड़ रूपये एवं पीला मोजेक/कीट व्याधि से हुई फसल क्षति से प्रभावित 4 लाख 94 हजार 605 किसानों को 322 करोड़ रुपये की राहत राशि शामिल है। खोई मुस्कान लौटाना हमारी पहली प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी पीड़ित किसान भाईयों को राहत राशि देने और फसल सर्वे के कार्य में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। किसानों के चेहरे की खोई मुस्कान लौटाना हमारी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 4 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से 6 लाख 69 हजार से अधिक धान उत्पादक किसानों के खाते में 337 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का अंतरण किया है। सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भी भावान्तर योजना शुरू की गई है। फसल के विक्रय मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अन्तर की राशि सरकार सीधे किसानों को देगी। हम किसानों का कोई नुकसान नहीं होने देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों भाईयों के दुख-दर्द में हम आपके सेवक बनकर खड़े हैं। किसानों के माथे का पसीना बेकार नहीं जाएगा, आपकी मेहनत फिर से हरियाली का रूप लेकर प्रदेश को समृद्ध करेगी, हम सदैव आपके साथ हैं। राज्य सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है और उनके सुख-दु:ख में सहभागी है। हम प्रदेश के किसी भी किसान को आपदा में अकेला नहीं छोड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 में अब तक विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को विभिन्न मदों में कुल 229 करोड़ 45 लाख रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है। गत माह 6 सितंबर को ही फसल क्षति के लिए 11 जिलों के 17 हजार से अधिक किसानों को 20 करोड़ से अधिक की राहत राशि दी थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार राज्य सरकार द्वारा सोयाबीन में पीले मोजेक रोग से फसल प्रभावित किसानों को राहत राशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने किया किसानों से संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राहत राशि वितरण के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीड़ित किसानों से आत्मीय संवाद भी किया। संवाद के दौरान किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दशहरा एवं भव्य शस्त्र पूजन के आयोजनों एवं सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना लागू करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए अभिनंदन किया। किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने दीपावली से पहले ही हमारी दीपावली मनवा दी। हमें यह महसूस हो रहा है कि सरकार हमारे साथ है। पीला मोजेक की राहत राशि हमें पहली बार मिली। यह सच्चे अर्थों में किसान हितैषी सरकार है। उत्साहित किसानों ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से राहत राशि मिलने से दशहरे पर ही किसानों की दीपावली हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुरहानपुर जिले के किसानों से चर्चा करते हुए कहा कि केला आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राहत राशि मिलने पर सभी किसानों को बधाई देते हुए कहा कि आज से ही सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए भावांतर योजना के तहत पंजीयन प्रारंभ हो गया है। अब किसानों को अपनी फसल बेचने में किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सोयाबीन मंडी में बेचें, यदि एमएसपी से कम राशि में फसल बिकती है, तो बेची गई फसल की कीमत और एमएसपी के अंतर की राशि यानि भावांतर की राशि अगले 15 दिनों में सीधे किसानों के बैंक खाते में भेज दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए किसानों को इस साल सोयाबीन का अत्यधिक भाव मिलेगा। इस बार सोयाबीन की एमएसपी 500 रुपए से अधिक बढ़कर 5328 रुपए हो गई है। … Read more

मध्यप्रदेश में झूठी शिकायतों पर नकेल, कलेक्टरों को मिला निर्देश — होगी कड़ी कार्रवाई

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ग्वालियर  सीएम हेल्पलाइन में बार-बार और झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ताओं को ग्वालियर में भी चिह्नित किया जा रहा है। ऐसे कुछ आदतन शिकायत करने वालों के कुछ नाम मिल भी गए हैं जो जन सुनवाई से लेकर सीएम हेल्पलाइन में लगातार अलग-अलग शिकायतों से लेकर एक ही शिकायत बार-बार कर रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन के लेवल वन स्तर पर आने वाली शिकायतों को डील करने वाले अधिकारियों से जानकारी मांगी गई है, शासन ने सभी जिलों से ऐसे लोगों के नाम व पूरी जानकारी कलेक्टरों से मांगी है। इसी क्रम में ग्वालियर के अधिकारी भी जानकारी तैयार कर रहे हैं। प्रदेश के सभी कलेक्टरों को भेजा पत्र बता दें कि शासन की ओर से कुछ दिनों पहले ही प्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र भेजा गया है। इसमें लिखा गया कि सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के तहत झूठी व आदतन शिकायतकर्ता के संबंध में जानकारी प्रदान करने व उक्त शिकायतकर्ताओं पर कार्रवाई किए जाने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके अतिरिक्त जन प्रतिनिधियों एवं विभागों द्वारा भी समय-समय पर इस संबंध में कार्रवाई का आग्रह किया गया है। सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर ऐसे शिकायतकर्ताओं के बारे में जानकारी व टीप दर्ज करने की सुविधा अधिकारियों की लाग इन आईडी में उपलब्ध है। ऐसे शिकायतकर्ताओं की पूरी जानकारी के साथ अधिकारियों से रिमार्क भी मांगा गया है। ब्लैकमेलिंग का जरिया बन रही सीएम हेल्पलाइन हकीकत में सीएम हेल्पलाइन का प्रभाव वर्तमान में कम हो गया है, हजारों शिकायतें हर माह आती हैं जिनमें बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें मिलती हैं जो बार-बार या ब्लैकमेल करने की नीयत से लगाई गई है। वहीं यह भी सच ही है कि अधिकारी अब सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को लेकर उतने संवेदनशील नहीं है जितने पहले थे।

कार्तिकेयसिंह चौहान का विधायक कार्यालय पर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर के नेतृत्व में किया भव्य स्वागत और सम्मान

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भगवान श्री राम की प्रतिमा स्मृति चिन्ह के रूप में की भेंट आष्टा विजयदशमी (दशहरा) उत्सव में मुख्यातिथि के रूप में शामिल होने आष्टा पधारे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान के बड़े सुपुत्र कार्तिकेयसिंह चौहान दशहरा उत्सव में भाग लेने आष्टा पहुंचे । कार्तिकेयसिंह चौहान के आष्टा पहुचने पर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर के नेतृत्व में आष्टा नगर की सीमा किलेरामा पर श्री कार्तिकेयसिंह चौहान की भव्य अगवानी की गई । विधायक के नेतृत्व में वाहनों के काफिले के साथ कार्तिकेयसिंह चौहान को विधायक कार्यालय लाया गया । विधायक कार्यालय आगमन पर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर के नेतृत्व में कार्तिकेयसिंह चौहान का भव्य स्वागत और सम्मान किया गया । विधायक कार्यालय पर उपस्तिथ भाजपा के समस्त पदाधिकारियों,जनप्रतिनिधियों,कार्यकर्ताओ ने कार्तिकेयसिंह जी का स्वागत किया । अपने कार्यालय पर प्रथम आगमन पर कार्तिकेयसिंह चौहान का विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर ने राजस्थानी साफा बंधवा कर रामनामी दुपट्टा डाल कर गुलदस्ता भेंट किया एवं आष्टा विधानसभा क्षेत्र की ओर से विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्तिकेयसिंह चौहान को जन जन की आस्था के केंद्र भगवान श्रीराम जी की प्रतिमा स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की । इस अवसर पर सीहोर जिला भारतीय जनता पार्टी के  अध्यक्ष नरेश मेवाडा का भी स्वागत सम्मान किया गया । स्वागत सम्मान कार्यक्रम में रायसिंह मेवाडा,सोनू गुणवान,महेन्द्र इंजीनियर, सुशील संचेती,अतुल शर्मा, हरेन्द्र ठाकुर,योगेंद्रसिंह ठाकुर,राकेश प्रजापति,ऋतु आनन्द जैन,अंजली विशाल चौरसिया,गिरजा माखन कुशवाह,तारा कटारिया,संध्या  देवांग,मानकुंवर मेवाडा,कृष्णा गोपालसिंह इंजीनियर,नीलिमा मनोहर बैरागी, ऋषि विश्वकर्मा,उत्थान धारवा,मोहित सोनी,सौरभ शीतल,सुरेश परमार,मनोहर भोजवानी,अनिल श्रीवास्तव, राकेश कुशवाह, यशवंत ठाकुर, कल्लु मुकाती,राजेश घेंघट,अनन्त साहू,भूपेंद्र राणा,नीलेश शर्मा,राजेश पचलासिया,भगवत मेवाडा,आकाश सुरणा,राजेन्द्रसिंह ठाकुर,संयम जैन,सुनील केलिया,महेन्द्र ठाकुर सहित बड़ी संख्या में भाजपा के कार्यकर्ता उपस्तिथ थे ।

आउटसोर्स कर्मचारी के परिवार को मिला आर्थिक संबल, मंत्री तोमर ने दी जानकारी

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आउटसोर्स कर्मी की मृत्यु पर परिजन को मिला ईएसआईसी और पीएफ का लाभ : ऊर्जा मंत्री  तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि प्रदेश में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अब समय पर पात्र व्यक्तियों तक पहुँच रहा है। ऊर्जा विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों को भविष्य निधि एवं कर्मचारी राज्य बीमा जैसी योजनाओं से सुरक्षा दी जा रही है। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) ने एक दिवंगत आउटसोर्स कर्मी के परिवार को राहत पहुँचाने के लिये संवेदनशील पहल की। उज्जैन स्थित 220 के.वी. उपकेन्द्र पर ड्यूटी के दौरान सुरक्षा कर्मी  शेखर राठौर को हृदयाघात हुआ और अस्पताल मे इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। वे मेसर्स डेक्कन सिक्योरिटी सर्विसेस, इंदौर के माध्यम से पदस्थ थे। आश्रितों को मिला हितलाभ एम पी ट्रांसको की पहल से उनकी पत्नी मती पूजा राठौर को कर्मचारी राज्य बीमा निगम के अंतर्गत प्रतिदिन 173.16 रूपये की दर से आश्रित हितलाभ प्रदान किया जा रहा है। साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा 3,05,283 रूपये की बीमा राशि भी परिजनों के खाते में जमा की गई है। आश्रितों के लिए प्रतिमाह पेंशन की सुविधा भी स्वीकृत की गई है।  

कफ सिरप से बच्चों की मौत का मामला गंभीर, एनसीडीसी ने जांच के लिए लिए नमूने

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छिंदवाड़ा  सर्दी खांसी के चलते दूषित कप सिरप पीने से छिंदवाड़ा जिले में किडनी फेल होने से पिछले 20 दिनों में सात बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर बच्चों ने नागपुर के निजी अस्पतालों में दम तोड़ा। कलेक्टर शीलेंद्र सिंह ने कहा है कि आरंभिक जांच रिपोर्ट में दूषित कप सीरप से बच्चों की किडनियां फेल होने से मौतें हुई हैं। संबंधित कप सिरप को जिले में प्रतिबंधित कर दिया गया है। मामले में आगे जांच जारी है। हालांकि, सवाल यह है कि जिले में कफ सिरप पर पाबंदी लगा दी गई है, लेकिन इस दूषित दवा को बेचने वाले और बनाने वालों को कौन सजा देगा? उन्हें सरकारी कार्रवाई की खुराक कब मिलेगी? छिंदवाड़ा के सीएमएचओ डॉ. नरेश गुन्नाडे ने बताया कि पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था। 4 सितंबर से 26 सितंबर के बीच परासिया क्षेत्र में 6 मासूमों की मौत हुई है। 5 बच्चे अभी भी छिंदवाड़ा और नागपुर के अस्पतालों में भर्ती हैं। 27 सितंबर को बच्चों के सैंपल पुणे लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही असली वजह सामने आ सकेगी। छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन नांदुलकर ने बताया कि जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें से कई की किडनी बायोप्सी जांच कराई गई। इसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कफ सिरप में मिला डायएथिलीन ग्लायकॉल दूषित पाया गया है। यही सिरप इन बच्चों को दिया गया था, जिससे उनकी किडनी फेल हुई। छिंदवाड़ा में बच्चों की मौतों के मामले में नागपुर लैब से आई किडनी बायोप्सी रिपोर्ट में टॉक्सिन मीडिएटेड इंजरी की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित रूप से डाय एथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) से सिरप में कंटेमिनेशन हुआ हो सकता है, जिससे बच्चों की किडनी पर घातक असर पड़ा।  दोनों राज्यों को मिलाकर अब तक कुल 11 मौतें हुई हैं. छिंदवाड़ा में परासिया के अनुविखीभागीय दंडाधिकारी शुभम यादव ने बताया कि कल देर रात तक छिंदवाड़ा में नौ बच्चों की मौत हो चुकी है. उन्होंने बताया कि एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं. 1 अक्टूबर तक छह मौतें दर्ज की गई थीं. रोग निगरानी के लिए सरकार की नोडल एजेंसी, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के अस्पतालों और अन्य स्थलों से पानी और कीटविज्ञान संबंधी दवाओं के नमूने कलेक्ट किए हैं, जहां कथित रूप से दूषित कफ सिरप के सेवन के कारण गुर्दे की विफलता से कई बच्चों की मौत हो गई थी. राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर ने बच्चों की मौत पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि माताओं द्वारा दी गई दवाइयां सरकारी सिफारिश या अस्पताल के प्रिस्क्रिप्शन से नहीं थीं. उन्होंने कहा कि ऐसे हादसे होने पर विभाग की कोई भूमिका नहीं होती है, क्योंकि यह उनके दायरे से बाहर है. 'स्वास्थ्य विभाग का कोई रोल नहीं…' गजेंद्र सिंह खीमसर ने बच्चों की मौत के मामले पर बयान दिया है. मंत्री ने कहा, "इस हादसे में स्वास्थ्य विभाग का कोई रोल नहीं है. यह उनके डिपार्टमेंट के दायरे से बाहर है. यह हादसा उन दवाइयों से हुआ है, जो माताओं ने बच्चों को दीं. ये दवाइयां सरकारी अस्पताल के प्रिस्क्रिप्शन या सिफारिश से नहीं थीं." दायरे से बाहर, फिर भी करेंगे जांच… मंत्री खीमसर ने इस पूरे मामले को विभाग के दायरे से बाहर बताया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि फिर भी वह जब जयपुर जाएंगे तो इसकी और जांच करेंगे. उन्होंने साफ किया कि माता-पिता द्वारा बिना सरकारी सिफारिश के दवा देने से हुए इस हादसे की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की नहीं है. पीटीआई के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि परीक्षण के नतीजे आने के बाद, उन्हें राज्य औषधि अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा. सूत्रों ने पीटीआई को बताया, "राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम (आरएमएससीएल) ने सिरप के 19 बैचों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है और स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों, डॉक्टरों और दवा संचालकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है."

इंदौर में भ्रष्टाचार का खुलासा, सहायक राजस्व अधिकारी और बिल कलेक्टर रिश्वत लेते पकड़े गए

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 इंदौर  मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं EOW और लोकायुक्त रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के इंदौर जिले का है जहां सहायक राजस्व अधिकारी को 40 हजार रूपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है। इस मामले में प्रभारी बिल कलेक्टर को भी आरोपी बनाया गया है। सील गोदाम को दोबारा खोलने के बदले मांगी रिश्वत शिकायतकर्ता संतोष सिलावट निवासी गीता नगर इंदौर ने 01 अक्टूबर को ईओडब्लयू कार्यालय इंदौर में शिकायत की थी कि उसके गोदाम को निगम के राजस्व अधिकारी द्वारा नोटिस चस्पा कर सील कर दिया गया है और अब सील गोदाम को खोलने हेतु पुनीत अग्रवाल सहायक राजस्व अधिकारी नगर पालिका निगम झोन-19 एवं रोहित साबले, प्रभारी बिल कलेक्टर, राजस्व विभाग, नगर पालिका निगम, झोन क्रमांक 19 उससे 40 हजार रूपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं। EOW ने रिश्वत लेते पकड़ा फरियादी संतोष पटेल की शिकायत की जांच के बाद EOW ने रिश्वतखोर अधिकारियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। 3 अक्टूबर को फरियादी संतोष सिलावट को रिश्वत के 40 हजार रूपये देने के लिए सहायक राजस्व निरीक्षक पुनीत अग्रवाल के पास भेजा गया। सहायक राजस्व अधिकारी पुनीत अग्रवाल ने नगर पालिका निगम जोन-19 के दफ्तर में रिश्वत देने के लिए फरियादी को बुलाया और जैसे ही वहां उसने व प्रभारी बिल कलेक्टर रोहित साबले ने रिश्वत की रकम की तो EOW की टीम ने दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया।