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67वां कालिदास समारोह: तैयारियों को लेकर राज्य मंत्री लोधी ने की उच्च स्तरीय बैठक

भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने मंत्रालय में आगामी 67वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह की तैयारियों के संबंध में समीक्षा बैठक ली। यह प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन आगामी 01 से 07 नवम्बर 2025 तक उज्जैन में आयोजित किया जाएगा। राज्य मंत्री  लोधी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस वर्ष के समारोह में देशभर के साथ-साथ प्रदेश के प्रमुख साहित्यकारों, कलाकारों एवं संस्कृत विद्वानों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में हिन्दी और संस्कृत साहित्य के क्षेत्र में कार्य कर रहे पाश्चात्य विद्वानों को भी समारोह में आमंत्रित किया जाए, जिससे कार्यक्रम का स्तर और अधिक व्यापक और अंतर्राष्ट्रीय हो। राज्य मंत्री  लोधी ने कार्यक्रम के प्रभावी प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनसामान्य की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि समारोह के आयोजन में सांस्कृतिक गौरव, साहित्यिक गरिमा और परंपरा की गहराई को समाहित किया जाए। बैठक में संचालक संस्कृति  एन.पी. नामदेव और निदेशक, कालिदास संस्कृत अकादमी, उज्जैन डॉ. गोविन्द गन्धे, सहित सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहें।  

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट की ओर मध्यप्रदेश की उड़ान: मुंबई में हुआ विशेष राजनयिक आयोजन

मुंबई में मध्यप्रदेश का विशेष राजनयिक संवाद – Heart of India बनेगा ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब भोपाल मध्यप्रदेश सरकार ने आज मुंबई के द ट्राइडेंट, नरीमन प्वाइंट में एक विशेष राजनयिक संवाद (Diplomatic Roundtable) का आयोजन किया। इस संवाद में रूस, जर्मनी, सिंगापुर, इटली, तुर्किये, न्यूज़ीलैंड, पोलैंड, मलेशिया, थाईलैंड, उज्बेकिस्तान, केन्या, जिबूती और यूनाइटेड किंगडम समेत कई देशों के काउंसल जनरल और राजनयिक प्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य को निवेश और औद्योगिक विकास का नया केंद्र बताते हुए कहा –“मध्यप्रदेश सिर्फ भारत का भौगोलिक हृदय नहीं, बल्कि अवसरों का हृदय है। यहाँ की उद्योग-अनुकूल नीतियाँ, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और समृद्ध संसाधन वैश्विक निवेशकों के लिए बेमिसाल संभावनाएँ प्रस्तुत करते हैं।” मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश ने हाल के वर्षों में Ease of Doing Business, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रदेश आज भारत का अग्रणी नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र बन चुका है—रीवा सौर ऊर्जा परियोजना और ओंकारेश्वर जलविद्युत परियोजना इसकी मिसाल हैं। वहीं पीथमपुर ऑटोमोबाइल हब और इंदौर IT Hub ने राज्य को नई औद्योगिक पहचान दिलाई है। उन्होंने विदेशी प्रतिनिधियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि वे मध्यप्रदेश आकर PM MITRA Textile Park (धार), पीथमपुर ऑटोमोबाइल हब, BEML Rail Hub (भोपाल), IT Parks (इंदौर-भोपाल) और Food Processing Clusters का प्रत्यक्ष अनुभव लें। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश ने वर्ष 2025 को ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ घोषित किया है, जहाँ लक्ष्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर भी सृजित करना है। संवाद के दौरान विभिन्न देशों के काउंसल जनरल्स ने निवेश, द्विपक्षीय व्यापार, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सांस्कृतिक सहयोग जैसे विषयों पर सक्रिय चर्चा की और मध्यप्रदेश की संभावनाओं में गहरी रुचि व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश न केवल भारत का, बल्कि दुनिया का ‘Global Investment Hub’ बनेगा और भारत व साझेदार देशों के बीच आर्थिक व सांस्कृतिक रिश्ते नई ऊँचाइयों पर पहुँचेंगे।  

गिट्टी से भरा ओबर लोडिग डंपर को खनिज विभाग ने किया जप्त

गिट्टी से भरा ओबर लोडिग डंपर को खनिज विभाग ने किया जप्त बमीठा थाना में डंपर रखने के बाद कानूनी प्रक्रिया जारी छतरपुर  काफी समय से ओवरलोडिंग बाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं और शासन प्रशासन के साथ वाहन मालिक आंख  मिचोली का खेल खेल रहे हैं और शासन प्रशासन को खुलेआम चूना लगाया जा रहा है इतना ही नहीं उन ओवरलोडिंग वाहनों पर कानूनी कार्यवाही नहीं की जाती है जिस बाहन मालिक से खनिज विभाग का मंथली लेनदेन बना रहता और जिस बाहन मालिक से लेन देन नहीं होता है उस बाहन पर कार्यवाही की जाती है ऐसा ही एक मामला छतरपुर जिले के हाईवे रोड 39 पर आया है जहां पर ओवरलोडिंग गिट्टी से भरा डंपर खनिज विभाग ने पकड़ लिया है और बमीठा थाने में रख कर कार्यवाही प्रक्रिया शुरू कर दी गई है जब खबर के संबंध में खनिज विभाग इंस्पेक्टर से मोबाइल पर बात हुई तो उन्होंने कहा है की ओवरलोडिंग गिट्टी होने के कारण डंपर को जप्त किया गया और बमीठा थाने में रखकर कानून प्रक्रिया चालू कर दी है यह डंपर बिना न्यायालय की नही छूटेगा चौंकाने वाली बात तो यह है कि गिट्टी से भरे डंपर में कहीं कोई डंपर का नंबर नहीं है न जाने ऐसे सैकड़ों बाहन सड़कों पर आए दिन दौड़ रहे हैं और शासन प्रशासन की आंखों में धूल खौप रहे हैं जो शासन प्रशासन के लिए चुनौती का विषय बना हुआ है किंतु अब देखना यह है कि खनिज विभाग ऐसे कितने वाहनों पर कार्यवाही कर पाएंगे जो सड़कों पर बेधड़क घूम रहे हैं

हत्या के मामले मे बमीठा पुलिस ने 6 लोगो को किया गिरफ्तार

हत्या के मामले मे बमीठा पुलिस ने 6 लोगो को किया गिरफ्तार 2 दिन पूर्व कामता आदिवासी की गयी थी हत्या छतरपुर  2 दिन पूर्व बमीठा थाना अंतर्गत ग्राम झमटुली मे जादू टोना के शक मे एक 55 वर्षीय वृद्ध की हाथ पैर बांध कर पीट पीट कर हत्या का मामला सामने आया था जिसमे बमीठा पुलिस ने कुल 6 लोगो पर हत्या का मामला दर्ज किया था जिसमे बमीठा पुलिस ने सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यालय भेज दिया है

खाकी सख्त, हेलमेट अनदेखा करना भारी पड़ेगा – तीसरी बार चालान होने पर जुर्माना दोगुना!

भोपाल सड़कों पर लोगों के चालान काट खुद नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले पुलिसकर्मियों को यातायात सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब बहुत भारी पड़ेगी। पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (पीटीआरआई) ने पुलिसकर्मियों को दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य किया है। नए निर्देशों में कहा गया है कि दो बार से अधिक बिना हेलमेट किसी पुलिसकर्मी का चालान हुआ तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। बात यहीं तक नहीं है। नये आदेशों में यह भी है कि इस कार्रवाई के बाद भी पुलिसकर्मी यातायात सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने से बाज नहीं आए तो उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी। यानी इस मनमानी से उनकी नौकरी पर भी आंच आ सकती है। पीटीआरआई के इस निर्देश के बाद पूरे प्रदेश की पुलिस में हलचल मच गई है। भोपाल में ही अब तक 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के चालान बनाए जा चुके हैं। इनमें अधिकतर ऐसे हैं जो बिना हेलमेट ड्यूटी पर या निजी काम से दोपहिया वाहन लेकर निकले थे। कई मामलों में तो पुलिसकर्मी खुद ट्रैफिक सिग्नल तोड़ते या मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाते हुए पकड़े गए।   पीटीआरआई ने सभी जिला पुलिस के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर नियमित निगरानी रखें और यदि कोई नियमों की अनदेखी करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। यह भी कहा गया है कि सड़क पर पुलिसकर्मी आम जनता के सामने अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक होते हैं, ऐसे में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे खुद ट्रैफिक नियमों का पालन कर उदाहरण प्रस्तुत करें। अधिकारियों का कहना है कि इस सख्ती का मकसद केवल अनुशासन बनाना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति पुलिसकर्मियों में जागरूकता बढ़ाना भी है। अगर पुलिस ही नियमों को तोड़ेगी तो जनता से पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है? इस तरह पकड़ में आएगी खाकी की बदमाशी चालानी कार्रवाई के दौरान पुलिस नाम और मोबाइल नंबर का ब्यौरा लेती है। जिस-जिस व्यक्ति का चालान बनता है, उसका रिकॉर्ड जिला पुलिस के पास दर्ज होता है। एक निश्चित समय के बाद जिला पुलिस देखेगी कि कितने पुलिसकर्मियों पर लगातार हेलमेट नहीं पहनने को लेकर कार्रवाई हुई है। उनका डाटा तैयार किया जाएगा और फिर दो बार से अधिक उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव तैयार होगा। पुलिस को समाज के आदर्श के रूप में देखा जाता है। नए आदेश के जरिए पुलिसकर्मियों में हेलमेट के प्रति अनुशासन बढ़ाने का प्रयास है। यदि वे लगातार उल्लंघन करते पाए जाते हैं तो कार्रवाई होगी। शाहिद अवसार, एआईजी, पीटीआरआई।

इंदौर मेट्रो अपडेट: ट्रायल रन के बाद अब रेडिसन चौराहा तक कमर्शियल संचालन की तैयारीइंदौर मेट्रो अपडेट: ट्रायल रन के बाद अब रेडिसन चौराहा तक कमर्शियल संचालन की तैयारी

इंदौर  इंदौर में मेट्रो ट्रेन का 17 किलोमीटर का ट्रायल रन गुरुवार को पूरा हुआ। अब गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का ट्रायल रन की राह आसान हो गई है। पहली बार मेट्रो ट्रेन सुखलिया ग्राम, विजय नगर और मालवीय नगर क्षेत्र के लोगों ने ट्रेक पर चलते हुए देखी। पहले दिन मेट्रो ट्रेन ने यह सफर एक घंटे में पूरा किया। पहली बार मेट्रो ट्रेन की स्पीड काफी कम रखी गई थी। अब धीरे-धीरे रफ्तार के साथ रेडिसन चौराहा तक मेट्रो का ट्रायल रन होगा। अगले साल तक 17 किलोमीटर तक मेट्रो का संचालन शुरू हो जाएगा। मेट्रो ट्रेन गांधी नगर स्टेशन से निकली। सात किलोमीटर तक स्पीड तेज रखी गई, लेकिन चंद्रगुप्त मोर्य प्रतिमा चौराहे के पास कम स्पीड में ट्रायल रन लिया गया। पहली बार मेट्रो को देख शहरवासी रुक गए और हाथ हिलाकरअभिवादन करने लगे। हार्न बजाते हुए मेट्रो धीरे-धीरे रेडिसन चौराहा तक पहुंची, फिर गांधी नगर डिपो की तरफ रवाना हुई।   तीन स्टेशन तैयार नहीं अभी मेट्रो के तीन स्टेशन पूरी तरह तैयार नहीं हुए है। इस कारण रेडिसन चौराह तक मेट्रो की सवारी शहरवासी टिकट लेकर नहीं कर सकते है। चार माह के भीतर तीनों स्टेशन तैयार हो जाएंगे। इसके बाद फिर मेट्रो कार्पोरेशन कमर्शियल रन की अनुमति लेगी। दो साल पहले मेट्रो का सात किलोमीटर का ट्रायल रन हुआ था। दो माह में 13 किलोमीटर तक का ट्रायल रन हुआ। अब गुरुवार को 17 किलोमीटर तक मेट्रो ट्रेन चली, लेकिन इससे आगे के ट्रायल में अब लंबा समय लगेगा, क्योकि खजराना चौराहा तक मेट्रो के ट्रेक भी अभी तक नहीं बन पाए है।    

घुसपैठ पर सख्ती: CM मोहन यादव ने पुलिस को दिए निर्देश – \’जेल भेजो बांग्लादेशी घुसपैठियों को\’

भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कलेक्टर-कमिश्नर और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य में किसी भी तरह बांग्लादेश घुसपैठियों को रहने की इजाजत नहीं है। इन्हें ढूंढकर जेल में भेजो। यह लोग प्रदेश में आकर छिपकर रहने लगते हैं। इन पर नजर रखी जाए। सीएम ने बढ़ते महिला अपराधों पर नाराजगी व्यक्त की सीएम डॉ मोहन यादव ने महिला अपराधों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब ऑनलाइन समाधान बैठक होती है तो शाम को ही गुमशुदा महिला मिल जाती है। वर्ना दो-दो महीनों तक उनका कोई पता नहीं रहता है। ऐसे बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाना होगा। प्रदेश में ड्रग माफिया, जमीन माफिया और दूसरे अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। एसपी ध्यान रखें कि सिर्फ बेसिक पुलिसिंग से काम नहीं चलने वाला। नई रणनीतियां तैयार करके अपराधियों को जेल में डालना होगा। बस्तियों में पनप रहा नेटवर्क राज्य में देखा गया है कि संकरी गलियों या बस्तियों में अपराधियों का नेटवर्क ऑपरेट होता है। जहां पर कई बार पुलिस जाने से भी कतरती है। इस मामले पर सीएम ने कहा कि संकरी गलियों वाली बस्ती या मोहल्ले को चिन्हित करें। यहां पर अपराधी अपना गढ़ बनाकर काम कर रहे हैं। 

मासूमों की मौत पर न्याय की उम्मीद: कफ सिरप मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई

भोपाल  बीते कुछ समय से देश के कई राज्यों में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। इन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस संबंध में वकील विशाल तिवारी द्वारा एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज  यानी शुक्रवार, 10 अक्टूबर को सुनवाई का भरोसा दिया है। दर्ज याचिका में मांग की गई है कि इस संवेदनशील मामले की गहन जांच राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या सीबीआई के माध्यम से विशेषज्ञों की समिति बनाकर कराई जाए। यह जनहित याचिका गंभीर स्वास्थ्य संकट और दवा सुरक्षा पर तत्काल ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को उजागर करती है। विषैले रसायनों की बिक्री पर सख्त नियम बनाने की मांग याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज द्वारा किए जाने की मांग की है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने याचिका में उन रसायनों के उपयोग पर सख्त नियम बनाने की मांग की गई है, जिनके कारण बच्चों की मौतें हुई हैं। बता दें कि इन रसायनों में डाई इथीलीन ग्लाइकॉल और एथलीन ग्लाइकॉल शामिल है। विषैले सिरप बनाने कंपनी के लाइसेंस को रद्द करने की मांग याचिका में कफ सिरप के नाम पर "विषैले सिरप" बनाने वाली इन कंपनियों के लाइसेंस तुरंत रद्द की मांग की गई है। कहा गया है कि इन कंपनियों को फौरन बंद किया जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, बाजारों में उतरे कंपनियों के प्रोडक्ट को वापस मंगाया जाए, ताकि अन्य लोगों को बचाया जा सके। साथ ही एक प्रभावी ड्रग्स रिकॉल पॉलिसी बनाने की आवश्यकता के बारे में याचिका में मांग की गई है। पीड़ितों के लिए मुआवजा की मांग सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी की गई है, ताकि इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को कुछ हद तक राहत मिल सके। वकील विशाल तिवारी ने मांग की है कि बच्चों की मौत के संबंध में विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को एक ही जगह ट्रांसफर किया जाए, ताकि जांच में तेजी लाई जा सके। इससे जांच सही तरीके से हो पाएगी और दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सकेगी।  Coldrif पर 2 साल पहले ही लग चुकी थी रोक, WHO ने भी मांगा स्पष्टीकरण यह कफ सिरप जिस फॉर्मूले से बनाई गई थी, उसे सरकार दो साल पहले ही 4 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रतिबंधित कर चुकी थी। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने 18 दिसंबर 2023 को राज्यों को आदेश में कहा था कि क्लोरफेनिरामाइन मेलिएट आईपी 2 मिलीग्राम और फेनाइलफ्राइन एचसीएल आईपी 5 मिलीग्राम कॉम्बिनेशन को चार साल तक के बच्चों को नहीं दिया जाए। यह आदेश फाइल 04-01/2022- डीसी के तहत जारी किया गया। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. राजीव ङ्क्षसह रघुवंशी की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि इस कॉम्बिनेशन वाले सिरप के लेबल और प्रचार सामग्री पर चेतावनी भी छापी जाए। इसके बाद भी पालन नहीं हुआ। तमिलनाडु सरकार ने की कंपनी सील बता दें कि तमिलनाडु सरकार ने कांचीपुरम स्थित एक फार्मास्युटिकल फैक्ट्री को सील कर दिया है। कार्रवाई कोल्ड्रिफ कफ सिरप के कारण हुई। तमिलनाडु के खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने 4 अक्टूबर को सिरप के नमूनों को मिलावटी घोषित किया था।  तमिलनाडु ने झाड़ा पल्ला तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोलर और वहां की सरकार ने श्रीसन को बंद कराने के बाद पल्ला झाड़ लिया है। मप्रस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वहां के ड्रग कंट्रोलर बताने को तैयार नहीं कि कोल्ड्रिफ में अवैध रूप से उपयोग किया जाने वाला जहरीला सॉल्वेंट बनाने वाली कंपनी ने कितनी मात्रा में निर्माण किया। श्रीसन को कब से बेच रही थी। किन राज्यों को सप्लाई किया। केंद्र को बताया तमिलनाडु की कंपनियों (Coldrif) व अफसरों की अनदेखी के कारण जहरीले कारोबार को मप्र समेत कई राज्यों में जगह मिली। मप्र सरकार की ओर से बुधवार को विस्तृत जानकारी केंद्र को दी गई। 1470 कंपनियों के पास प्रमाण पत्र नहीं केंद्र ने दवा कंपनियों के लिए डब्ल्यूएचओ प्रमाणपत्र अनिवार्य किया था। 5308 में 1470 कंपनियों ने आवेदन तक नहीं किया। डब्ल्यूएचओ सक्रिय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 'Coldrif' के निर्यात के संबंध में भारतीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। स्वास्थ्य एजेंसी ने भारतीय अधिकारियों से पूछा है कि यह सिरप विदेश भेजा गया है या नहीं। ताकि जरूरत पड़ने पर अलर्ट जारी किया जा सके।

पीएम स्वनिधि योजना का असर: 13.46 लाख लोगों को मिला आसान ऋण, ₹2,078 करोड़ बांटे गए

पीएम स्वनिधि योजना में 13.46 लाख हितग्राहियों को दिया गया 2 हजार 78 करोड़ का ऋण ऋण राशि को भी बढ़ाया गया शहरी पथ-विक्रेताओं को जोड़ा जा रहा है अन्य योजनाओं से भी भोपाल प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में शहरी पथ-विक्रेताओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिये पीएम स्वनिधि योजना में अब तक 13 लाख 46 हजार प्रकरणों में 2 हजार 78 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से हितग्राहियों को ब्याज सब्सिडी के रूप में 30 करोड़ रुपये की राशि भी दी गई है। पीएम स्वनिधि में देश में पहले स्थान पर केन्द्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना का पुनर्गठन कर इसकी अवधि 31 मार्च, 2030 तक बढ़ा दी है। पथ-विक्रेताओं को योजना का लाभ देने के मामले में मध्यप्रदेश पहले स्थान पर है। प्रदेश के 3 नगरीय निकायों उज्जैन, खरगोन और सारणी को सर्वाधिक ऋण वितरण के लिये पुरस्कृत भी किया जा चुका है। पीएम स्वनिधि योजना में 42 अन्य नगरीय निकायों एवं बैंक शाखाओें का चयन उल्लेखनीय कार्य के लिये राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है। हितग्राहियों को प्रशिक्षण राज्य में पथ-विक्रेता योजना में सफलतापूर्वक काम कर सकें, इसके लिये नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नगरीय निकायों के माध्यम से क्षमता निर्माण के लिये प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की है। हितग्राहियों को वित्तीय और डिजिटल साक्षरता, ई-कॉमर्स, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता का भी प्रशिक्षण दिलाया गया है। ऋण सीमा में वृद्धि योजना में चयनित हितग्राहियों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि में भी वृद्धि की गयी है। योजना में पूर्व में 10 हजार के स्थान पर 15 हजार और 20 हजार के स्थान पर 25 हजार रुपये और अंतिम किश्त के रूप में 50 हजार रूपये की ऋण राशि दी जा रही है। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिये हितग्राही को फुटकर लेन-देन पर 1200 रुपये और थोक व्यापार लेन-देन के लिये प्रतिवर्ष अधिकतम 400 रुपये तक कैश बेक की सुविधा दी जा रही है। पथ विक्रेता सुरक्षित रूप से व्यापार कर सके, इसके लिये नगरीय निकायों द्वारा आईडी प्रमाण-पत्र भी जारी किये गये हैं। पथ-विक्रेताओं और उनके परिवार को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिये जन-धन, पीएम सुरक्षा बीमा, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति और पीएम श्रम योगी मानधन योजना, वन नेशन वन राशन कार्ड, जननी सुरक्षा, श्रमिक कल्याण और पीएम मातृ वंदना योजना से भी जोड़ा गया है। योजना में जो हितग्राही समय पर किश्त जमा कर रहे हैं, उन्हें क्रेडिट कार्ड की भी सुविधा भी दी जा रही है।  

व्यापार में तेजी: MP में 20 लाख से ज्यादा MSME दर्ज, सरकार का 25 लाख का लक्ष्य तय

मध्यप्रदेश में एमएसएमई की संख्या 20 लाख के पार : मंत्री  काश्यप देश के शीर्ष छह राज्यों में शामिल हुआ मध्यप्रदेश मार्च 26 तक 25 लाख एमएसएमई के रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य भोपाल  एमएसएमई मंत्री  चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के पंजीयन (MSME) के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। भारत सरकार के उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अब तक 20 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाईयां पंजीकृत हो चुकी हैं। उद्यम सहायता पोर्टल के अनुसार प्रदेश में अब तक लगभग 23 लाख इकाईयां (IMEs) स्थापित हुई हैं। मंत्री  काश्यप ने बताया कि वर्तमान में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इकाइयों की कुल संख्या 43 लाख 32 हजार से अधिक हो गयी है। जिससे मध्यप्रदेश का स्थान देश के शीर्ष छह राज्यों की सूची में दर्ज हो चुका है। उल्लेखनीय है कि फरवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित की गई नवीन एमएसएमई नीति के बाद से बड़े पैमाने पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग स्थापित हुए है। उद्यम रजिस्ट्रेशन पोर्टल     सूक्ष्म     2,026,790                                     लघु            19,524                                    मध्यम         1,174 उद्यम सहायता पोर्टल     अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यम     2,284,810 मंत्री  काश्यप ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार नवीन एमएसएमई विकास नीति 2025, स्टार्ट-अप नीति-2025 ईज ऑफ इइंग बिजनेस जैसी पहल ने उद्यमियों का भरोसा बढ़ाया है। राज्य में उद्यम स्थापना की प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक आसान और पारदर्शी हो गई है जिससे औद्योगीकरण की प्रक्रिया में तेजी आई है। मंत्री  काश्यप ने कहा है कि इस वृद्धि से रोजगार, स्थानीय निवेश और आत्मनिर्भरता तीनों को एक साथ गति मिली है। महिला उद्यमिता में 15 फीसदी की बढ़ोतरी एमएसएमई मंत्री  चेतन्य कुमार काश्यप ने बताया महिला उद्यमिता में भी पिछले दो वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 की अपेक्षा 2024-25 में पंजीकृत इकाईयों की संख्या में 124279 की वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य अब 2026 तक 25 लाख एमएसएमई इकाइयों का आंकड़ा पार करने का है, जिससे 5 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। एमएसएमई मंत्री  काश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में "यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिले में बढ़ती औद्योगिक आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता का दर्पण है। जहाँ 'मेक इन इंडिया', वोकल फॉर लोकल', 'विकसित भारत 2047' और 'एक जिला, एक उत्पाद' जैसी राष्ट्रीय पहलो को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है वहाँ राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नवीन एमएसएमई विकास नीति-2025 और स्टार्टअप नीतिः 2025 ने उद्योगों को नई दिशा और गति दी है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई विभाग इन प्रयासों को उच्चतम स्तर तक ने जाने के लिए सतत रूप से कार्यरत रहेगा, ताकि प्रदेश के उद्योग क्षेत्र में निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन को और अधिक प्रोत्साहन मिले।"