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ओले और बारिश की चेतावनी: प्रदेश के मौसम ने ली करवट

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मानसून के विदा होने से पहले पूरब और पश्चिम दोनों संभागों में जोरदार बारिश देखने को मिली है। अब पश्चिमी विक्षोभ के असर से सोमवार को पश्चिमी यूपी में ओले भी गिरने वाले हैं। माैसम विभाग ने सोमवार के लिए पश्चिमी तराई के सहारनपुर, शामली, बिजनाैर समेत 15 जिलों में गरज चमक के साथ ओले गिरने की आशंका जताई है। वहीं पश्चिम के 13 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इस दाैरान 30 से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की भी चेतावनी है। लगभग 38 जिलों में मेघ गर्जन के साथ वज्रपात की भी आशंका है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से सोमवार को पश्चिमी यूपी के कई जिलों में भारी बारिश और गरज चमक के साथ ओले गिरने की चेतावनी है। बुधवार से पूर्वी और पश्चिमी यूपी में माैसम के शुष्क रहने के संकेत हैं। आज फिर बदल सकता है मौसम का मिजाज राजधानी में रविवार को दिन चढ़ने के साथ धूप खिली। पारा चढ़ने के साथ गर्मी भी बढ़ी। हवा में नमी ज्यादा होने के कारण दोपहर में तीखी धूप के साथ उमस बेकाबू होती गई। हालांकि सुबह और शाम के वक्त नमी से भरी ठंडी हवाओं के चलते ही गर्मी से थोड़ी राहत रही। रविवार को धूप की तेजी के चलते अधिकतम तापमान में करीब तीन डिग्री का उछाल दर्ज किया गया। माैसम विभाग का कहना है कि सोमवार को एक बार फिर राजधानी क्षेत्र में बादलों की सक्रियता बढ़ने के आसार हैं। इससे छिटपुट बूंदाबांदी की संभावना भी है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से सोमवार को लखनऊ में बादलों की आवाजाही के साथ बूंदाबांदी की परिस्थितियां बन सकती हैं। इससे गर्मी और उमस से राहत मिलेगी। विक्षोभी की तीव्रता ज्यादा रही तो मंगलवार को भी बादल और बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। रविवार को दिन का अधिकतम तापमान 2.9 डिग्री की उछाल के साथ 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं न्यूनतम तापमान बिना किसी बदलाव के साथ 24.2 डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड हुआ।  

गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक, रोजाना सैकड़ों लोग बन रहे शिकार

गाजियाबाद लावारिस कुत्तों के चलते लोगों में दहशत है। गलियों और पार्कों में ये लोगों को काट रहे हैं। जनपद के 80 इलाकों में सबसे अधिक लावारिस कुत्ते हैं। सरकारी अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने इन इलाकों के लोग सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं। जिले में कॉलोनी और सोसाइटी में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं। घरों से बाहर निकलते ही कुत्ते लोगों को काट रहे हैं। शहरी क्षेत्र के लोग इससे निजात दिलाने की निगम अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में रोजाना 400 मरीज कुत्ते काटने के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार जनपद में 80 इलाके ऐसे हैं जहां सबसे ज्यादा कुत्ते काटने के मामले हो रहे हैं। शहरी क्षेत्र के कैला भट्टा, नंदग्राम, लाल कुआं, बम्हेटा, अकबरपुर-बहरामपुर, गोविन्दपुरम, लोहियानगर, पंचवटी, भाटिया मोड़, जटवाड़ा, साहिबाबाद, अर्थला, शालीमार गार्डन, पसौंड़ा आदि क्षेत्र हैं। इसके अलावा मोदीनगर, लोनी, मुरादनगर, डासना आदि जगह पर भी कुत्ते काटने के मामले बढ़ रहे हैं। रोजाना 400 मरीज एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे : स्वास्थ्य केंद्रों में 90 प्रतिशत मरीज कुत्ते काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने के लिए आते हैं। इस वजह से एआरवी की सबसे ज्यादा खपत कुत्ते काटने के मामलों में ही हो रही है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना 350 से 400 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से बहुत कम मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें कुत्ते के काटने से जख्म हो जाता है। यानि कुत्ते काटने से मांस फट जाता है और उससे खून निकलने लगता है। ऐसे मरीज को एंटी रेबीज वैक्सीन के साथ सीरम लगाया जाता है। यह सुविधा अभी केवल एमएमजी अस्पताल में है। अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन के नोडल अधिकारी डॉ. नितिन प्रियादर्शी के मुताबिक रोजाना तीन से चार मरीजों को सीरम लगाया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो मई महीने में 11008, जून में 11213 और जुलाई में 11213 मरीजों को एआरवी लगाई गई। इस साल जुलाई तक 66923 मरीजों को रेबीज का कवच दिया गया। केवल शहरी क्षेत्र में टीकाकरण और नसबंदी हो रही नगर निगम के दो एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर हैं। इसमें एक दिन में लगभग 30 कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो रहा है। नसबंदी के बाद कुत्तों को तीन दिन सेंटर में रखना होता है। इसके बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ने का नियम है, जहां से उन्हें पकड़ा जाता है। नगर पालिका और नगर पंचायत में लावारिस कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण नहीं हो रहा।

झांसी में मजबूरी की तस्वीर: बेटे की मौत के बाद चंदा जुटाकर किया गया अंतिम संस्कार

झांसी उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है. यहां मुंबई से गांव लौट रहे सिद्धार्थनगर जिले के रामोपुर पाठक गांव के रहने वाले अनिल अहिरवार की ट्रेन से गिरकर मौत हो गई. हादसा झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास कानपुर-झांसी रेलवे लाइन पर हुआ. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवाया, लेकिन शिनाख्त न होने के कारण चार दिनों तक शव वहीं पड़ा रहा. जब मृतक की पहचान हुई तो परिवार के सामने और भी बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई. मृतक के पिता अनिल के पास झांसी तक आने के पैसे तक नहीं थे. गांव में बेटे की मौत की खबर सुनते ही पूरा परिवार बेसुध हो गया. मुंबई में काम करता था युवक पिता ने बताया कि उनका बेटा परिवार का इकलौता सहारा था. उसके छोटे-छोटे तीन बच्चे 15 साल की मुस्कान, 9 साल का सनी और 5 साल का छोटू है. इसके अलावा बूढ़े मां-बाप और पत्नी की जिम्मेदारी भी सुनील पर ही थी. तीन महीने पहले वह रोजगार के लिए मुंबई गया था और वहीं एक कंपनी में काम करता था लेकिन तबीयत खराब होने पर वह गांव लौट रहा था. इसी दौरान झांसी में यह दर्दनाक हादसा हो गया. पिता के पास नहीं थे शव लाने के पैसे मृतक के पड़ोसी आनंद कुमार दुबे ने बताया कि परिवार की स्थिति बेहद खराब है. पिता अनिल गांव में रोते हुए घूम रहे थे और कह रहे थे कि बेटे का शव लाने के लिए पैसे भी नहीं हैं. ऐसे में गांव के लोगों ने चंदा कर 23 हजार रुपये एकत्र किए. इन्हीं पैसों से पिता अनिल और परिजन झांसी पहुंचे और बेटे का शव लेकर गांव लौट सके. पूंछ थाना प्रभारी जेपी पाल ने बताया कि शव की शिनाख्त के बाद पोस्टमार्टम करा दिया गया है. इसके बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया. इस घटना ने न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे गांव को गहरे शोक में डाल दिया है. गरीबी और लाचारी की इस हकीकत ने सबको भावुक कर दिया.

यूपी में एकजुट उत्सव की तैयारी, सभी जिलों में 7 अक्टूबर को होगी वाल्मीकि जयंती समारोह

लखनऊ  यूपी के सभी 75 जिले 7 अक्टूबर को एक साथ एक अद्भुत आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य भर में वाल्मीकि जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी. इस दिन पूरे प्रदेश में रामायण पाठ, भजन, कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दीप प्रज्ज्वलन जैसे आयोजन एक साथ होंगे. योगी सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्यक्रमों में न केवल सरकारी स्तर पर भागीदारी हो, बल्कि आम लोगों की सक्रिय उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि यह आयोजन समाज में समानता, सेवा और सद्भाव का संदेश लेकर आएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हर कार्यक्रम स्थल पर स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था हो. पूरे प्रदेश में एक साथ आयोजन की तैयारी सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी निर्देश के अनुसार 7 अक्टूबर को राज्य के सभी जिलों, तहसीलों और विकास खंडों में वाल्मीकि जयंती का आयोजन होगा. संस्कृति विभाग के सहयोग से देव मंदिरों और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों पर रामायण पाठ, भक्ति संगीत, भजन, कीर्तन, दीपदान और प्रवचन कराए जाएंगे. हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जो स्थानीय कलाकारों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर कार्यक्रमों का संचालन करेगी. लालापुर (चित्रकूट) बनेगा आयोजन का केंद्रबिंदु महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर (चित्रकूट) में इस दिन सबसे बड़ा और भव्य आयोजन होगा. संस्कृति विभाग ने इसे राज्य स्तरीय मुख्य समारोह का दर्जा दिया है. उप निदेशक (पर्यटन) आर.के. रावत को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 11 बजे महर्षि वाल्मीकि की मूर्ति पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से होगा. इसके बाद विराट महाराज और संस्कृत के छात्र-छात्राएं रामायण पाठ प्रस्तुत करेंगे. स्थानीय कलाकार दयाराम रैकवाड़ व उनकी टीम द्वारा भक्ति संगीत और वाल्मीकि रामायण पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी. पूजन, हवन, लव-कुश प्रसंग और प्रवचन जैसे कार्यक्रम पूरे दिन चलेंगे. कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, संस्कृति विभाग के अधिकारियों, और जनसामान्य की सक्रिय भागीदारी रहेगी. आयोजन के दौरान पूरे परिसर में स्वच्छता और प्रकाश व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं. अन्य जिलों में भी रहेगी रौनक लालापुर के अलावा अयोध्या, श्रावस्ती, प्रयागराज, कानपुर (बिठूर), राजापुर, झांसी, वाराणसी, लखनऊ और गोरखपुर समेत सभी जिलों में आयोजन होंगे. हर जगह महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन पर आधारित प्रवचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी. अयोध्या में वाल्मीकि आश्रम पर विशेष पूजन के साथ दीपदान होगा, जबकि बिठूर के वाल्मीकि आश्रम में दो दिवसीय कार्यक्रम की तैयारी चल रही है. प्रयागराज और वाराणसी में विश्वविद्यालयों के साहित्य विभागों द्वारा ‘वाल्मीकि और रामायण का सांस्कृतिक प्रभाव’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की जाएगी. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि युवाओं को भारतीय संस्कृति और महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं से जोड़ना है. जनसहभागिता पर विशेष जोर अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार ने इस आयोजन को पूरी तरह जनसहभागिता केंद्रित कार्यक्रम बनाया है. संस्कृति विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से इसका संचालन करेंगे. हर जिले में स्थानीय कलाकारों, भजन मंडलियों, कथा वाचकों और विद्यालयों को मंच प्रदान किया जा रहा है ताकि वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें. सीएम योगी ने कहा है कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में जनता की भागीदारी ही उनकी आत्मा है. महर्षि वाल्मीकि की जयंती को हम केवल एक तिथि नहीं, बल्कि लोकमंगल के पर्व के रूप में मना रहे हैं. साफ-सफाई और सुरक्षा पर सीएम की सख्त निगरानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ निर्देश दिए हैं कि सभी आयोजन स्थलों पर स्वच्छता, पेयजल, ध्वनि, प्रकाश और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि कार्यक्रमों में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो. संस्कृति विभाग को निर्देशित किया गया है कि आयोजन के दौरान सकारात्मक सामाजिक संदेश प्रसारित किए जाएं और वाल्मीकि जी के उपदेशों को आमजन तक पहुंचाया जाए. प्रत्येक स्थल पर पुलिस बल और स्थानीय स्वयंसेवकों की मौजूदगी रहेगी. लखनऊ से लेकर सोनभद्र तक प्रशासन ने रविवार रात से ही सभी प्रमुख स्थलों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. स्थानीय कलाकारों को मिलेगा आध्यात्मिक मंच योगी सरकार की एक बड़ी पहल यह भी है कि हर जिले में स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों को मंच प्रदान किया जाएगा. संस्कृति परिषद और जिला प्रशासन की ओर से कलाकारों का चयन किया जा चुका है. इस कदम का उद्देश्य ग्रामीण व कस्बाई प्रतिभाओं को पहचान दिलाना और धार्मिक आयोजनों में उनकी भागीदारी बढ़ाना है. लखनऊ में संस्कृति विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि  पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि छोटे जिलों में बहुत प्रतिभाशाली कलाकार हैं, जिन्हें मंच नहीं मिल पाता. इस आयोजन से वे अपनी कला के माध्यम से समाज को जोड़ने का अवसर पाएंगे. हर जिले में नोडल अधिकारी की तैनाती संस्कृति विभाग ने सभी 75 जिलों में नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी है. ये अधिकारी जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के साथ मिलकर कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगे. जहां बड़े आयोजन होंगे, वहां विभागीय मंत्री और सांसद/विधायक भी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. संस्कृति विभाग ने बताया कि इस आयोजन में किसी प्रकार की औपचारिकता नहीं रखी जाएगी बल्कि सभी वर्गों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी.

रायपुर से रिपोर्ट: खनन क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का उत्कृष्ट प्रदर्शन, देश के लिए बना उदाहरण

रायपुर खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ राज्य ने हाल के वर्षों में खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी नवाचार को केंद्र में रखकर राज्य ने खनिज प्रशासन में अनेक संरचनात्मक सुधार किए हैं, जिनके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी खनन राज्यों में सम्मिलित हो गया है। राज्य में विश्वस्तरीय लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर, बाक्साइट, टिन अयस्क सहित नवीन अन्वेषणों से क्रिटिकल, स्ट्रैटेजिक तथा रेयर अर्थ मिनरल्स की उपलब्धता प्रमाणित हुई है, जिससे राज्य की वैश्विक पहचान सुदृढ़ हुई है। छत्तीसगढ़ का खनन क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, जबकि देश के कुल खनिज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है। राज्य के खनिज राजस्व में 25 सालों में 34 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। राज्य गठन के समय जहाँ खनिज राजस्व मात्र 429 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 14,592 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। यह उपलब्धि राज्य की सुदृढ़ खनिज नीति और सतत प्रशासनिक सुधारों का परिणाम है। वर्ष 2015 में संशोधित खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के अंतर्गत गठित खनिज नीलामी नियम 2015 के तहत अब तक राज्य में 60 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है। इनमें 15 लौह अयस्क, 14 बाक्साइट, 18 चूना पत्थर तथा 13 क्रिटिकल व स्ट्रैटेजिक खनिज ब्लॉक सम्मिलित हैं। साथ ही, 05 नए ब्लॉकों (02 चूना पत्थर, 01 लौह अयस्क, 01 स्वर्ण और 01 बेस मेटल ब्लॉक) की नीलामी प्रक्रिया भी प्रारंभ की जा चुकी है। संचालनालय भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ़ ने खनन अनुसंधान एवं अन्वेषण के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के लिए आईआईटी मुंबई, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद तथा कोल इंडिया लिमिटेड के साथ एमओयू संपादित किए हैं। इस साझेदारी के माध्यम से क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की खोज को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गति प्राप्त हुई है। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के गाइडलाइन-2024 के अनुरूप राज्य में जिला खनिज संस्थान न्यास नियम, 2025 अधिसूचित किए गए हैं। राज्य में अब तक 16,119 करोड़ रूपए का अंशदान प्राप्त हुआ है, जिसके अंतर्गत 1,05,653 कार्यों को स्वीकृति दी गई, जिनमें से 74,454 कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। वित्तीय स्वीकृति, निगरानी और प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु डीएमएफ पोर्टल 2.0 को क्रियान्वित किया गया है। खनिज विभाग द्वारा विकसित खनिज ऑनलाइन 2.0 पोर्टल ने राज्य के खनिज प्रशासन को पूर्णतः डिजिटल स्वरूप प्रदान किया है। यह प्रणाली सुरक्षित, बहुआयामी और उपयोगकर्ता-मित्र है, जो पारदर्शिता और दक्षता को बढ़ावा देती है। यह पहल छत्तीसगढ़ को खनन प्रबंधन में एक राष्ट्रीय मॉडल राज्य के रूप में स्थापित कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के सिद्धांतों के अनुरूप राज्य में रेत खदानों का आबंटन अब पूर्णतः ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इस हेतु एमएसटीसी के साथ एमओयू किया गया है। नई व्यवस्था में मानव हस्तक्षेप समाप्त कर संपूर्ण प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष एवं सुरक्षित बनाई गई है। गौण खनिज नियम, 2015 के अंतर्गत लागू की गई स्टार रेटिंग प्रणाली के तहत खनन, पर्यावरण प्रबंधन, सुरक्षा उपाय और सतत विकास के मानकों पर खदानों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इस व्यवस्था के अंतर्गत 03 खदानों को 5-स्टार तथा 32 खदानों को 4-स्टार रेटिंग से सम्मानित किया गया है, जो वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार खनन की दिशा में राज्य की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।   मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय का कहना है कि खनिज संपदा केवल आर्थिक स्रोत नहीं, बल्कि राज्य के सर्वांगीण विकास का आधार है। छत्तीसगढ़ ने खनन क्षेत्र में नीतिगत सुधार, डिजिटल पारदर्शिता और सतत विकास के समन्वित प्रयासों से एक आदर्श प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत किया है। राज्य की यह प्रगति न केवल आर्थिक सुदृढ़ता का संकेत है, बल्कि यह जनहित आधारित विकास की दिशा में एक स्थायी कदम भी है।      नसीम अहमद खान, उप संचालक 

सहारनपुर एनकाउंटर: पुलिस ने एक लाख के इनामी इमरान को किया ढेर

 सहारनपुर  उत्तर प्रदेश में अपराधियों पर पुलिस की सख्ती लगातार जारी है। रविवार देर रात सहारनपुर जिले के गागलहेड़ी थाना क्षेत्र में पुलिस और एक लाख के इनामी बदमाश इमरान के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस ने इमरान को मार गिराया। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब इमरान एक बाइक लूटकर फरार हो रहा था। पुलिस टीम ने जब उसे रोकने की कोशिश की तो उसने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोलियां लगने से इमरान गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मुठभेड़ के दौरान गागलहेड़ी के इंस्पेक्टर परवेश शर्मा और थानाध्यक्ष सरसावा विनोद कुमार भी घायल हुए। एसएसपी आशीष तिवारी के अनुसार, इंस्पेक्टर के हाथ में गोली लगी, जबकि थानाध्यक्ष की बुलेटप्रूफ जैकेट में गोली फंसी, जिससे उनकी जान बच गई। दोनों अधिकारियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है और हालत खतरे से बाहर बताई गई है। इमरान पर थे कई संगीन मामले मारा गया बदमाश इमरान पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधियों में से एक था। सहारनपुर, मेरठ, शामली और मुजफ्फरनगर जिलों में उसके खिलाफ लूट, डकैती, अवैध हथियारबंदी और हमले के कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। इमरान पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। एनकाउंटर स्थल से पुलिस ने दो 32 बोर की पिस्टल, 18 खोखे, 10 जिंदा कारतूस और लूटी गई बाइक बरामद की है। यूपी पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति जारी इमरान का एनकाउंटर शनिवार रात फिरोजाबाद में मारे गए बदमाश नरेश पंडित उर्फ पंकज के मारे जाने के महज छह घंटे बाद हुआ। नरेश पर भी कई गंभीर अपराधों के केस दर्ज थे। लगातार हो रही मुठभेड़ों से साफ है कि यूपी पुलिस अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल कर रही है। इमरान का साथी मेहताब पहले ही ढेर हो चुका था बताया जा रहा है कि इमरान का साथी मेहताब पहले ही तीन अक्टूबर को मुजफ्फरनगर में पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका था। उस समय मेहताब पर भी एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस ने उसे सरेंडर करने के लिए कहा था, लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी थी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोलियां लगने से उसकी मौत हो गई थी, जबकि उसी दौरान इमरान मौके से फरार हो गया था।  

UP Scholarship Update: दिवाली तक मिल सकती है छात्रवृत्ति, तारीख और प्रक्रिया यहाँ देखें

लखनऊ समाज कल्याण विभाग ने वर्ष 2024-25 की दशमोत्तर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की नई समय-सारिणी जारी की है। जिन छात्रों को पिछली बार छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई थी, उन्हें अब 27 से 31 अक्टूबर तक दोबारा आवेदन का मौका मिलेगा। पात्र छात्रों के बैंक खातों में 28 नवंबर को छात्रवृत्ति की राशि भेजी जाएगी। समय सारिणी के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों को 10 से 14 अक्टूबर तक मास्टर डाटा लाक करना होगा। इसके बाद 15 से 18 अक्टूबर के बीच विश्वविद्यालय या संबंध संस्था द्वारा मास्टर डाटा का सत्यापन किया जाएगा। 26 अक्टूबर तक जिला समाज कल्याण अधिकारी सीटों और शुल्क की जांच कर लाकिंग प्रक्रिया पूरी करेंगे। छात्र 27 से 31 अक्टूबर तक आनलाइन आवेदन और रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। आवेदन पत्र का प्रिंट निकालकर संस्थान में एक नवंबर तक जमा करना अनिवार्य होगा। संस्थान द्वारा आनलाइन सत्यापन दो नवंबर तक किया जाएगा, जबकि विश्वविद्यालय या एजेंसी तीन से छह नवंबर तक डाटा की जांच करेगी। जिन छात्रों के आवेदन में कोई गलती रह जाएगी, उन्हें आठ से 11 नवंबर तक संशोधन का अवसर मिलेगा। संशोधित आवेदन 12 नवंबर तक संस्थान द्वारा अग्रसारित किए जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर तक जिला स्तर पर डेटा सत्यापन और विभागीय अधिकारियों द्वारा डिजिटल सिग्नेचर लाकिंग की जाएगी। विभाग ने सभी शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और छात्रों से निर्धारित तिथियों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है ताकि कोई भी पात्र छात्र छात्रवृत्ति से वंचित न रह जाए।

उत्तर प्रदेश के इस इलाके में कल भारी बारिश व ओले, जानें किन राज्यों पर असर

लखनऊ  दिवाली का त्योहार करीब आ रहा है और मॉनसून की भी वापसी हो चुकी है। इसके बाद भी राज्यों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने बताया है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से यूपी समेत कई राज्यों में आने वाले दिनों में भारी बारिश देखने को मिलेगी। छह अक्टूबर यानी कि कल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में भारी बारिश व ओले गिरने वाले हैं। इसके अलावा, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मेघालय में आज पांच अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश की संभावना है। एक तीव्र वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण उत्तर पश्चिम भारत में पांच और छह अक्टूबर को बहुत भारी बारिश व ओले गिरने वाले हैं। पूर्वी भारत की बात करें तो उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में पांच अक्टूबर को एकल स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की संभावना है। बिहार में पांच अक्टूबर को एकल स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश और गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में पांच अक्टूबर को भारी बारिश, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में छह अक्टूबर को भारी बारिश होगी। अगले तीन से चार दिनों के दौरान पूर्वी भारत में अधिकांश जगहों पर मध्यम बारिश और कई जगहों पर भारी बारिश होने वाली है। इसके अलावा, उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो पांच से सात अक्टूबर के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में काफी व्यापाक बारिश, तूफान, बिजली और तेज हवाएं चलने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पश्चिमी राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में पांच और छह अक्टूकर को, उत्तराखंड में छह और सात अक्टूबर, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान में छह अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना है। जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ में छह अक्टूबर को बहुत भारी बारिश होगी। हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर में पांच अक्टूबर, पंजाब में पांच व छह अक्टूबर, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान में छह अक्टूबर को ओलावृष्टि होगी। आठ अक्टूबर से अगले दो दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान चार से पांच डिग्री सेल्सियस तक गिरने की संभावना है। उत्तर पूर्वी भारत की बात करें तो अरुणाचल प्रदेश में पांच, छह और 10 अक्टूबर को, असम, मेघालय में पांच से 10 अक्टूबर तक, नगालैंड में छह से 11 अक्टूबर तक, मणिपुर में आठ और 9 अक्टूबर को, मिजोरम में आठ अक्टूबर को कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश में पांच अक्टूबर को बहुत भारी बारिश होगी, मेघालय में पांच अक्टूबर को अत्यंत भारी बारिश होने वाली है।  

2047 तक कैसे साकार होगा विकसित यूपी का संकल्प, दृढ़ता से अपनी राय रख रहे यूपी के ग्रामीण युवा

– शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर युवाओं का फोकस, ग्रामीण क्षेत्रों से मिले करीब 21 लाख सुझाव – तकनीकी खेती, कोल्ड स्टोरेज, समर्थन मूल्य और डिजिटल किसान मंडियों के मिल रहे सुझाव – सुझाव देने के मामले में शहरियों के मुकाबले बहुत आगे हैं यूपी के ग्रामीण युवा  – शहरी क्षेत्रों से अबतक 6 लाख, ग्रामीण क्षेत्रों से मिले करीब 21 लाख सुझाव लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को साकार करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को 'विकसित यूपी' बनाने का जो अभियान शुरू किया है, वह अब एक जन आंदोलन बनता जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान में ग्रामीण युवाओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाया है। पहली बार गांवों से इतनी बड़ी संख्या में युवा प्रदेश के विकास के हर पहलू पर अपनी राय दे रहे हैं। सरकार के पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक करीब 27 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं। इनमें से लगभग 21 लाख सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों से और करीब 6 लाख शहरी क्षेत्रों से आए हैं। यानी, शहरों से कहीं अधिक सक्रिय हैं यूपी के गांवों के युवा, जो अपने सुझावों से ‘विकसित यूपी’ के ब्लूप्रिंट को आकार दे रहे हैं। गांवों से उठी विकास की नई आवाज़ गांवों के युवाओं का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विकास की गति तेज हुई है और वे इस परिवर्तन का हिस्सा बनना चाहते हैं। हरदोई के सौरभ सिंह कहते हैं कि अब गांवों में भी खेल, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हर पंचायत में खेल मैदान और डिजिटल लाइब्रेरी जरूरी हैं। सीतापुर के योगेश कुमार का कहना है कि हर गांव तक इंटरनेट और अच्छी शिक्षा पहुंचे। तभी गांवों का युवा शहरों से मुकाबला कर सकेगा। जौनपुर की पूजा त्रिपाठी का कहना है कि गांवों में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा और सुरक्षा के इंतजाम बेहतर हों। योगी सरकार ने जो शुरुआत की है, उसे आगे बढ़ाना चाहिए। महराजगंज के किसान युवक अमन चौधरी कहते हैं कि खेती में तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है। हर ब्लॉक में कोल्ड स्टोरेज और डिजिटल मंडी बने ताकि फसल का सही दाम मिले। वाराणसी के प्रवीण सिंह का सुझाव है कि युवाओं को स्टार्टअप्स के लिए आसान लोन और तकनीकी मार्गदर्शन मिले। अब गांवों में भी इनोवेशन की लहर है। शिक्षा और कृषि सबसे आगे, ग्रामीण युवाओं की प्राथमिकता साफ अभियान के तहत अब तक मिले 7.8 लाख सुझाव शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। ग्रामीण युवाओं ने स्कूलों में गुणवत्ता, डिजिटल सुविधाओं और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। आगरा के राकेश कुमार सोनी ने कहा है कि अगर अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं तो व्यवस्था खुद सुधर जाएगी। सरकारी स्कूलों को सबके लिए अनिवार्य किया जाए। कृषि क्षेत्र से 6 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनमें तकनीकी खेती, AI आधारित फसल प्रबंधन, ड्रिप इरिगेशन, कोल्ड स्टोरेज और किसान ड्रोन जैसे विषय प्रमुख हैं। अयोध्या के युवा किसान मनोज तिवारी का कहना है कि कृषि को स्मार्ट बनाना ही विकसित यूपी की असली पहचान होगी। खेल, स्वास्थ्य और इंटरनेट पर भी जोर कन्नौज के विवेक मिश्रा ने कहा है कि हर गांव में जिम और खेल प्रशिक्षण केंद्र बनें। ग्रामीण प्रतिभाओं को जिला स्तर तक प्लेटफॉर्म मिले। बस्ती के आकाश यादव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुझाव दिया कि हर गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को डिजिटल हेल्थ नेटवर्क से जोड़ा जाए। गोंडा की ममता वर्मा ने कहा है कि  महिलाओं के लिए रोजगार और शिक्षा के अवसर बढ़ें, तभी गांवों में आत्मनिर्भरता आएगी। युवाओं को योगी आदित्यनाथ में दिख रही नई आशा ग्रामीण युवाओं का विश्वास साफ झलकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में जो पारदर्शिता, सुशासन और विकास की गति दी है, वह उन्हें अपनी बात खुलकर रखने की हिम्मत देती है। लंदन में हाल ही में 'विकसित यूपी 2047' का लोगो लॉन्च हुआ, जहां एनआरआई समुदाय ने भी योगी के विज़न की सराहना की। यूके, दुबई और अमेरिका के प्रवासी भारतीयों ने भी इस अभियान में सुझाव भेजे हैं, जिससे ये पहल अब वैश्विक स्वरूप ले चुकी है। युवाओं के सुझाव, सरकार के लिए दिशा सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के युवाओं से मिले इन सुझावों का अध्ययन कर सरकार उन्हें भविष्य की विकास नीतियों में शामिल करेगी। यह पहली बार है जब उत्तर प्रदेश का ग्रामीण युवा सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि 'नीति निर्माता' की भूमिका में नजर आ रहा है। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनभागीदारी आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को ‘विकसित भारत’ के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करेगी। आज का ग्रामीण युवा सिर्फ रोज़गार नहीं, 'सार्थक विकास' चाहता है। उसे योगी आदित्यनाथ में वह नेतृत्व दिख रहा है जो उसकी आकांक्षाओं को दिशा दे सके। गांव से निकली यह आवाज़ अब केवल सुझाव नहीं, बल्कि नए उत्तर प्रदेश की नींव का पत्थर बन चुकी है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए यूपी में कफ सिरप की बिक्री बंद, एमपी घटना के बाद सख्ती

लखनऊ  मध्य प्रदेश समेत देश के कुछ राज्यों में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत की खबरों के बाद उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। सहायक आयुक्त औषधि दिनेश कुमार तिवारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों को चेतावनी जारी की है। जारी आदेश में सभी औषधि निरीक्षकों को सम्बंधित बैच की बिक्री रोकने के साथ ही उनके नमूने राज्य औषधि प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ योगी सरकार ने भी सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए और रिपोर्ट आने तक उक्त कफ सिरप का प्रयोग पूर्णतः बंद रखा जाए। रविवार को सहायक औषधि आयुक्त के स्तर से जारी आदेश में कहा गया है कि मेसर्स स्रेशन फार्मक्यूटिकल द्वारा खास बैच के कोल्ड आरआईएफ़ सिरप में डाईएथिलीन ग्लाइकाल और एथेलिन ग्लाइकाल जैसे विषैले रसायनों की मौजूदगी की आशंका है। ये दोनों रसायन शरीर के लिए बेहद खतरनाक हैं और इनका सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। तिवारी ने अपने आदेश में सभी औषधि विक्रेताओं, सरकारी और गैर-सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिए हैं कि उक्त बैच के कफ सिरप की बिक्री, वितरण और उपयोग तत्काल रोका जाए। साथ ही दुकानों व अस्पतालों में उपलब्ध स्टॉक का नमूना जांच हेतु लखनऊ स्थित राज्य औषधि प्रयोगशाला में तत्काल भेजा जाए। उन्होंने औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि सभी स्थानों पर औषधि की उपलब्धता की जांच करें और नमूने एकत्र कर ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करें। निर्माण प्रयोगशालाओं को भी कफ सिरप में प्रयुक्त प्रोपलीन ग्लाइकाल के नमूनों की जांच करने को कहा गया है। अपने आदेश में तिवारी ने कहा कि लखनऊ प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोषी उत्पादकों और वितरकों पर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।