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Aastha Pandey

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CG MD-MS Admission 2025: काउंसलिंग की लॉस्ट डेट बढ़ी, अब 23 नवंबर तक कर सकेंगे आवेदन

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छत्तीसगढ़ में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स MD-MS में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने काउंसलिंग के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है, जिससे उन अभ्यर्थियों को अतिरिक्त समय मिल गया है जो पहले डेडलाइन मिस होने के डर से परेशान थे। पहले आवेदन की सीमा 18 नवंबर रात 11:59 बजे तक तय थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 23 नवंबर तक कर दिया गया है, जिससे कई छात्रों की उम्मीद फिर से जाग उठी है। इसके साथ ही च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग की प्रक्रिया 19 नवंबर से शुरू हो चुकी है, जो 24 नवंबर तक जारी रहेगी। इसका मतलब है कि इच्छुक उम्मीदवार अब अपनी पसंदीदा मेडिकल कॉलेजों और स्पेशलाइजेशन को अच्छी तरह सोच-समझकर चुन सकते हैं। काउंसलिंग की यह नई समय-सारिणी MCC द्वारा किए गए बदलावों के बाद जारी की गई है, ताकि सभी पात्र छात्र बिना किसी जल्दबाजी के आवेदन और अपनी पसंद लॉक कर सकें। यह कदम मेडिकल छात्रों के हित में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है। उदेश्य छत्तीसगढ़ राज्य में MD-MS 2025 प्रवेश के लिए पहली-चरण की काउंसलिंग के ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तिथि को बढ़ा दिया गया है। यह फैसला मेडिकल परामर्श समिति (MCC) की संशोधित समय-सारिणी के बाद लिया गया है। पहले आवेदन की सीमा 18 नवंबर रात 11:59 बजे तक तय की गई थी, लेकिन अब इसे 23 नवंबर 2025 रात 11:59 बजे तक बढ़ा दिया गया है। ये खबर भी पढ़े…Lekhpal Recruitment : PET रिजल्ट जारी होते ही 7,994 पदों पर होगी सीधी भर्ती काउंसलिंग प्रक्रिया: च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग आवेदन के अतिरिक्त समय के साथ, च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग की प्रक्रिया 19 नवंबर की सुबह 11 बजे से शुरू हो चुकी है। यह प्रक्रिया 24 नवंबर की रात 11:59 बजे तक जारी रहेगी। विभाग ने सभी पात्र अभ्यर्थियों से अनुरोध किया है कि वे इस अतिरिक्त समय का पूरा फायदा उठाएं और अपनी पसंद की काउंसलिंग विकल्प समय पर लॉक कर दें। ये खबर भी पढ़े…WhatsApp का सबसे बड़ा डेटा लीक: Meta की चूक ने 3.5 अरब यूज़र्स को खतरे में डाला, करें ये उपाय क्यों बढ़ाई गई है तिथि? MCC (Medical Counselling Committee) ने अपनी समय-सारिणी में बदलाव किया है और इसी के चलते छत्तीसगढ़ के DME (डायरेक्टर रे ऑफ़ मेडिकल एजुकेशन) ने आवेदन और च्वाइस फिलिंग की सीमा बढ़ाई है। यह कदम उन छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखकर उठाया गया है, जो NEET PG 2025 क्वालिफाइ कर चुके हैं और राज्य-कोटा MD-MS में दाखिले की उम्मीद लगा रहे हैं। विभाग स्पष्ट कर रहा है कि समय-सीमा के बाद कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा, इसलिए देरी न करें। पात्रता और छत्तीसगढ़ PG एडमिशन की जानकारीयह काउंसलिंग छत्तीसगढ़ राज्य कोटा के MD-MS (पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल) कोर्सों के लिए है। आवेदन और च्वाइस फिलिंग का आधिकारिक पोर्टल cgdme.admissions.nic.in है। अभ्यर्थियों को NEET PG 2025 में क्वालिफाइ करना अनिवार्य है। ये खबर भी पढ़े…RO ARO Mains Exam 2026 ने घोषित की आरओ-एआरओ मेंस परीक्षा की तारीखें उम्मीदवारों को ध्यान देने योग्य बातें आवेदन करते समय सावधानी बरतें 23 नवंबर की नई सीमा तक सभी फॉर्म भरें।च्वाइस फिलिंग को मिस न करें -अपनी MD/MS पसंदों को सोच-समझकर फिल और लॉक करें।आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें — NEET PG स्कोरकार्ड, पहचान पत्र आदि जरूरी होंगे।ऑफिशियल वेबसाइट देखें — गलत लिंक से आवेदन न करें, आधिकारिक साईट cgdme.admissions.nic.in ही भरोसेमंद है। समय का पूरा फायदा लें — नई तिथि बढ़ने का मतलब है कि आपके पास अतिरिक्त दिन हैं, इसे wisely इस्तेमाल करें। ये खबर भी पढ़े…10वीं के बाद पढ़ाई आसान, Post Matric Scholarship देगी पूरा खर्च FAQs Q1: MD-MS 2025 काउंसलिंग के लिए आवेदन की नई अंतिम तिथि क्या है?नई अंतिम तिथि 23 नवंबर 2025, रात 11:59 बजे है। Q2: क्या मैं अब भी अपनी काउंसलिंग पसंदों (choices) फ़िल और लॉक कर सकता हूँ?हाँ। च्वाइस फिलिंग और लॉकिंग प्रक्रिया 19 नवंबर सुबह 11 बजे से शुरू हो चुकी है और यह 24 नवंबर रात 11:59 बजे तक जारी रहेगी। Q3: छत्तीसगढ़ MD-MS काउंसलिंग के लिए किस वेबसाइट पर आवेदन करना चाहिए?आपको DME Chhattisgarh की आधिकारिक वेबसाइट (उदेश्य छत्तीसगढ़ राज्य में MD-MS 2025 प्रवेश के लिए पहली-चरण की काउंसलिंग के ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तिथि को बढ़ा दिया गया है। यह फैसला मेडिकल परामर्श समिति (MCC) की संशोधित समय-सारिणी के बाद लिया गया है।

जनसहयोग से जल संचयन को मिलेगा बढ़ावा, भविष्य होगा सुरक्षित : सीएम साय

रायपुर : जनभागीदारी से जल संचयन कर सुरक्षित होगा हमारा भविष्य : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय सुजलाम भारत’ के तहत जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री  साय रायपुर “जल है तो कल है, और जल से ही कल संवरेगा। जल संरक्षण के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा, तभी हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख पाएंगे।” मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने ‘सुजलाम भारत’ के अंतर्गत राजधानी रायपुर स्थित ओमाया गार्डन में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने जल कलश पर जल अर्पित कर जल संचयन का संदेश दिया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने अनेक अवसरों पर जल संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। जल संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता की कमी इस संकट को और गहरा कर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में लोग अपने-अपने ढंग से जल संचयन के लिए प्रयास कर रहे हैं, और ऐसे मंचों के माध्यम से सभी अपने अनुभव साझा कर पाएंगे, जो अंततः नीति निर्माण में भी निर्णायक सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री  साय ने अपने राजनांदगांव प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि एक महिला सरपंच ने स्वप्रेरणा से सूख चुके हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उनके इस अभिनव प्रयास की सराहना केंद्र सरकार द्वारा भी की गई और इस पुनीत पहल को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरण हमें प्रेरित करते हैं। हम सभी को मिलकर जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से प्राप्त होने वाले सुझाव और इनपुट आगामी कार्ययोजनाओं के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने केलो नदी का जल अर्पित कर धरती को सिंचित करने का दिया संदेश कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने पृथ्वी के प्रतीक स्वरूप स्थापित कलश में केलो नदी का पवित्र जल अर्पित किया और जल संरक्षण एवं संचयन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” और हमारी पावन नदियाँ धरती को सींचकर जीवनदायिनी बनाती हैं। इन्हीं नदियों से हमारी संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व की पहचान जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियाँ — महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, केलो और अन्य — प्रदेश की जीवनरेखाएँ हैं। ये नदियाँ न केवल धरती को उर्वर बनाती हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और जीवन के हर क्षेत्र को संजीवनी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी रूपी कलश में केलो नदी का जल अर्पण इस बात का प्रतीक है कि हमें जल की हर बूंद का सम्मान करना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सहेजकर रखना चाहिए। मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण के इस संकल्प को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि छत्तीसगढ़ की धरती सदैव हरियाली और समृद्धि से लहलहाती रहे। जल संसाधन विभाग के सचिव  राजेश सुकुमार टोप्पो ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम की संकल्पना की गई है। विभिन्न विभागों को एक-एक थीम पर संगोष्ठी आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल संचयन विषय पर इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज लगभग 300 से अधिक लोगों ने, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं, अपना पंजीयन कराया है। जल संरक्षण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। पिछले एक वर्ष में जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों ने जल संचयन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अब तक साढ़े तीन लाख संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कार्यक्रम में पद्म मती फूलबासन बाई यादव, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में हर क्षेत्र का संतुलित विकास हमारी प्राथमिकता : सीएम विष्णु देव साय

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के चहुंमुखी विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय बेमेतरा जिले को 140.96 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात सिंघोरा में 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र, अमोरा में शिवनाथ नदी पर बैराज निर्माण और बसनी में मिडिल स्कूल की घोषणा रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बेमेतरा जिले के लिए कुल ₹140.96 करोड़ के 47 विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें 27 कार्यों का भूमिपूजन और 20 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जनता के विश्वास पर खरा उतरते हुए, राज्य सरकार चहुंमुखी और समावेशी विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शासन का लक्ष्य प्रदेश में विकास कार्यों को तेजी और पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सरकार पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संकल्पबद्धता के साथ प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और नगरीय सुविधाओं के क्षेत्र में तीव्र गति से कार्य किए जा रहे हैं, जिनसे जनता को सीधा लाभ मिल रहा है। इस अवसर पर उन्होंने ग्राम अमोरा में शिवनाथ नदी पर बैराज निर्माण, सिंघोरा में 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र की स्थापना, तथा ग्राम बसनी में मिडिल स्कूल प्रारंभ करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को सशक्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, “हमने यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी की अधिकांश गारंटियों को अल्प समय में ही पूरा कर दिखाया है।” मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है और 18 लाख आवासहीन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रति माह ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहकों से ₹5500 प्रति मानक बोरा की दर से खरीदी की जा रही है। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार गांव, गरीब, किसान और महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर कार्य कर रही है। खाद्य मंत्री  दयाल दास बघेल ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का संचालन कर रही है, जिससे कोई भी परिवार भूखा न रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। सांसद  विजय बघेल ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता से किए गए वादों को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि बेमेतरा जैसे ग्रामीण जिलों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं, जिनसे आमजन को राहत और बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। कार्यक्रम को विधायक  दीपेश साहू ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर खाद्य मंत्री  दयाल दास बघेल, सांस्कृतिक मंत्री  राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, प्रहलाद रजक, विधायक  ईश्वर साहू और मती भावना बोहरा, अवधेश चंदेल,  लाभचंद बाफना, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष  जितेंद्र साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

रायपुर में जनदर्शन के दौरान मंत्री राजवाड़े ने सुनी जनता की आवाज़, समस्याओं के तत्काल निपटान के निर्देश

रायपुर : जनसेवा ही हमारा संकल्प – मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने जनदर्शन में सुनी जनता की समस्याएँ, त्वरित निराकरण के दिए निर्देश खनिज न्यास की योजनाओं से होगा जनजीवन में सुधार – सूरजपुर में शासी परिषद की बैठक संपन्न रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री और भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि जनसेवा ही हमारा संकल्प है, जनता की प्रत्येक समस्या का समाधान सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने आज अपने निवास बीरपुर जिला सूरजपुर में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुँचे नागरिकों की समस्याएँ और सुझाव सुनी। उन्होंने अधिकारियों को हर आवेदन पर आवश्यक और त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनदर्शन कार्यक्रम के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का निराकरण स्थल पर ही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से जनता तक पहुँच सके। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने जनदर्शन में सुनी जनता की समस्याएँ, त्वरित निराकरण के दिए निर्देश       मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की अध्यक्षता में आज जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) सूरजपुर की शासी परिषद की बैठक भी जिला पंचायत कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में सांसद श्री चिंतामणि महराज, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती कुसुमलता राजवाड़े, कलेक्टर सहित जिले के जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने जनदर्शन में सुनी जनता की समस्याएँ, त्वरित निराकरण के दिए निर्देश       बैठक में खनिज न्यास निधि से संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई और विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने निर्देश दिए कि खनिज न्यास निधि से संचालित सभी योजनाएँ जनजीवन के उत्थान में सार्थक योगदान दें, तथा उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि खनिज क्षेत्र से प्राप्त संसाधनों का अधिकतम लाभ स्थानीय जनता को मिले और इन योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पोषण, सड़क एवं रोजगार के क्षेत्र में स्थायी सुधार हो।

नक्सल क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेगा विकास, सतत प्रयास कर रही है सरकार – मुख्यमंत्री साय

रायपुर  बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी। नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।  

मुख्यमंत्री साय : जनभागीदारी से जल संचयन कर सुरक्षित होगा हमारा भविष्य

रायपुर, “जल है तो कल है, और जल से ही कल संवरेगा। जल संरक्षण के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा, तभी हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख पाएंगे।” मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘सुजलाम भारत’ के अंतर्गत राजधानी रायपुर स्थित ओमाया गार्डन में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने जल कलश पर जल अर्पित कर जल संचयन का संदेश दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अनेक अवसरों पर जल संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। जल संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता की कमी इस संकट को और गहरा कर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में लोग अपने-अपने ढंग से जल संचयन के लिए प्रयास कर रहे हैं, और ऐसे मंचों के माध्यम से सभी अपने अनुभव साझा कर पाएंगे, जो अंततः नीति निर्माण में भी निर्णायक सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने राजनांदगांव प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि एक महिला सरपंच ने स्वप्रेरणा से सूख चुके हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उनके इस अभिनव प्रयास की सराहना केंद्र सरकार द्वारा भी की गई और इस पुनीत पहल को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरण हमें प्रेरित करते हैं। हम सभी को मिलकर जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से प्राप्त होने वाले सुझाव और इनपुट आगामी कार्ययोजनाओं के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री ने केलो नदी का जल अर्पित कर धरती को सिंचित करने का दिया संदेश कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पृथ्वी के प्रतीक स्वरूप स्थापित कलश में केलो नदी का पवित्र जल अर्पित किया और जल संरक्षण एवं संचयन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” और हमारी पावन नदियाँ धरती को सींचकर जीवनदायिनी बनाती हैं। इन्हीं नदियों से हमारी संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व की पहचान जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियाँ — महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, केलो और अन्य — प्रदेश की जीवनरेखाएँ हैं। ये नदियाँ न केवल धरती को उर्वर बनाती हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और जीवन के हर क्षेत्र को संजीवनी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी रूपी कलश में केलो नदी का जल अर्पण इस बात का प्रतीक है कि हमें जल की हर बूंद का सम्मान करना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सहेजकर रखना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण के इस संकल्प को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि छत्तीसगढ़ की धरती सदैव हरियाली और समृद्धि से लहलहाती रहे। जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम की संकल्पना की गई है। विभिन्न विभागों को एक-एक थीम पर संगोष्ठी आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल संचयन विषय पर इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज लगभग 300 से अधिक लोगों ने, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं, अपना पंजीयन कराया है। जल संरक्षण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। पिछले एक वर्ष में जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों ने जल संचयन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अब तक साढ़े तीन लाख संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कार्यक्रम में पद्मश्री श्रीमती फूलबासन बाई यादव, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

शिक्षा में डिजिटल क्रांति- 1100 विद्यालयों को मिलेगी स्मार्ट टीवी की सौगात

  बिल्हा के 25 स्कूलों में स्मार्ट टीवी वितरण, डिजिटल एवं ई-क्लास को मिलेगा बढ़ावा    रायपुर, शासकीय विद्यालयों में विशेष कर प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा को बढ़ावा देने एवं उसे रुचि कर बनानें के उद्देश्य से जन सहयोग के माध्यम से जिले के लगभग 1100 विद्यालयों में स्मार्ट टी०व्ही उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा में डिजिटल क्रांति के तहत बिलासपुर जिले के विकासखण्ड बिल्हा के 25 स्कूलों में स्मार्ट टीवी वितरण किया गया, जिससे बच्चे मनोरंजक ढंग से शिक्षा प्राप्त कर सकेगें।            बिल्हा विकासखण्ड में 50 स्मार्ट टी०व्ही श्री नरेश अग्रवाल प्रबंधक मंगल पावर एवं इस्पात बिल्हा के द्वारा प्रदान किया गया है, जिसके प्रथम चरण में आज 25 स्मार्ट टी०व्ही विद्यालयों को प्रदान किया गया है। इस प्रकार शेष विद्यालयों को शीघ्र ही स्मार्ट टी०व्ही० उपलब्ध कराया जायेगा। शिक्षा को बढ़ावा देने एवं उसे बच्चों में रुचि कर बनानें के उद्देश्य से जन सहयोग के माध्यम से जिले  मार्ट टी०व्ही सेट उपलब्ध्ण कराया जा रहा है। बच्चों को डिजिटल एवं ई-क्लास के माध्यम से रुचिकर कर शिक्षा प्रदान की जायेगी, जिससे बच्चों का विद्यालय ओर अध्ययन के प्रति रुचि बढ़ेगी।           सम्पर्क फॉउडेशन नई दिल्ली द्वारा लगभग 1100 विद्यालयों को निःशुल्क सम्पर्क टी०व्ही डिवाईस भी उपलब्ध कराया जा रहा हैं, जिसके माध्यम से बच्चे मनोरंजक ढंग से शिक्षा प्राप्त कर सकेगें। इस कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत बिलासपुर,  कमिश्नर नगर निगम बिलासपुर प्रबंधक मंगल पावर एवं इस्पात बिल्हा, डी०एम०सी० समग्र शिक्षा बिलासपुर सहित अधिकारी उपस्थित रहे ।            ज्ञातव्य है कि इसके पूर्व 7 अक्टूबर को प्रथम चरण में नगर पालिक निगम बिलासपुर द्वारा शहरी क्षेत्र के 31 शासकीय प्राथमिक शालाओं को स्मार्ट टी०व्ही० का वितरण किया गया।  कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल की पहल से जन सहयोग द्वारा विद्यालयों को लगातार स्मार्ट टी० व्ही० उपलब्ध लगातार कराया जा रहा है। बच्चों को डिजिटल एवं ई-क्लास के माध्यम से रुचिकर कर शिक्षा प्रदान की जायेगी जिससे बच्चों का विद्यालय के प्रति रुचि बढ़ेगी।

लोगों की मदद कर मिलती है खुशी- बैंक सखी बालेश्वरी, आर्थिक सशक्तिकरण के साथ मिली अलग पहचान

रायपुर, बैंक सखी ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बैंकिंग सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह की एक प्रशिक्षित महिला सदस्य होती है, जो सखी के रूप में काम करती है, वह बैंक के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करती है । सरगुजा जिले के विकासखण्ड लखनपुर के ग्राम पंचायत लोसंगी की रहने वाली बालेश्वरी यादव बैंक सखी के रूप में कार्य कर रहीं हैं। उनके द्वारा पांच पंचायतों लोसंगी, लोसगा, रेमहला, लब्जी, कटिन्दा में लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाई जा रहीं हैं,  ग्रामीण उन्हें बैंक वाली दीदी कहते हैं। क्योंकि बैकिंग सम्बन्धी जिन कार्यों के लिए लोगों को पहले बैंक तक जाना पड़ता था, वो काम अब उनके गांव में ही हो जाते हैं। बैंक वाली दीदी गांव में आती हैं और लोगों के बैंकिंग लेन-देन के कार्य करके जाती हैं।           बालेश्वरी यादव ने बताया कि वे वृद्धा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, मनरेगा मजदूरी भुगतान, स्व- सहायता समूह की राशि का लेनदेन सहित अन्य बैंकिंग कार्य कर रहीं हैं। विगत पांच वर्षों में उन्होंने लगभग 11 करोड़ रुपए से अधिक की राशि का लेनदेन किया है। बालेश्वरी बताती हैं कि वे अपने पुत्र के साथ लोसंगी में रहती हैं, इससे पहले उनकी आय का जरिया मेहनत मजदूरी था, मजदूरी से प्राप्त पैसों से ही गुजर-बसर करना पड़ता था।         उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में  जब गांव में स्व-सहायता समूह का गठन हुआ, तो मुझे भी उसमें सदस्य बनने की इच्छा हुई और मुझे रानी लक्ष्मी बाई स्व-सहायता समूह का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद मैंने ग्राम संगठन एवं क्लस्टर संगठन में भी अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके बाद सक्रिय महिला एवं आरवीके बुक कीपर का काम करने का भी मौका मिला। इसके बाद मुझे एनआरएलएम के द्वारा  बैंक सखी के बारे में बताया गया, इस कार्य के लिए मुझे काफी उत्सुकता हुई। हमें आरसेटी के द्वारा बैंक सखी का प्रशिक्षण दिया गया।         वर्ष 2021 से मैंने बैंक सखी का काम करना शुरू किया, उन्होंने कहा कि इस कार्य से मुझे प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपए तक कमीशन मिल जाता है। बैंक सखी के कार्य से आर्थिक सशक्तिकरण के साथ मुझे समाज में अलग पहचान मिली है, वहीं लोगों की मदद करके बहुत खुशी मिलती है। लोगों को जब जरूरत होती है, तो वे स्वयं मुझे बुलाते हैं। वहीं बुजुर्गों, दिव्यांगजनों एवं जरूरतमंदों के घर पर भी मैं बैंकिंग सेवा प्रदान करती हूं।  उन्होंने बताया कि कियोस्क के माध्यम से अब तक लभगभ 513 ग्रामीणों के जनधन खाते खोले हैं। वहीं बीमा योजनाओं से भी हितग्राहियों को जोड़ा है, जिसमें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना 713, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना 556, अटल पेंशन योजना 600 हुए हैं।

कांकेर पहुँची केन्द्र सरकार की अतिरिक्त सचिव : मावा मोदोल व श्रवण बाधित विद्यालय का निरीक्षण

रायपुर, भारत सरकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव सुश्री कैरेलिन खोंगवार देशमुख आज आकांक्षी जिला कांकेर पहुंची। उन्होंने यहां शुरू किए गए मावा मोदोल कोचिंग संस्थान और सेंट्रल लाइब्रेरी का अवलोकन किया। तदुपरांत वे ग्राम कोदाभाट स्थित शासकीय श्रवण बाधितार्थ विशेष विद्यालय पहुंची जहां उन्होंने निःशक्त, मुक-बधिर बच्चों से बातचीत की। भारत सरकार की अतिरिक्त सचिव सुश्री देशमुख ने कांकेर की सेंट्रल लाइब्रेरी का अवलोकन किया और वहां आने वाले विद्यार्थियों से बातचीत की। कांकेर में स्थानीय युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनुकूल वातावरण एवं स्टडी मटेरियल उपलब्ध कराने के उद्देश्य को लेकर यह सेंट्रल लाइब्रेरी बनाई गई है। इस लाइब्रेरी में प्रतिदिन महाविद्यालयीन छात्र-छात्राएं विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकों का अध्ययन करते हैं। अतिरिक्त सचिव ने राज्य सरकार की इस पहल की सराहना की। उन्होंने लाइब्रेरी के विजिटर्स रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर भी किए। अतिरिक्त सचिव सुश्री देशमुख मावा मोदोल कोचिंग संस्थान भी गई। यहां उन्होंने  अध्ययन कक्ष में जाकर विद्यार्थियों से चर्चा की। सुदूर आदिवासी अंचल के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर ढंग से तैयारी करने व कैरियर गाइडेंस देने के लिए इस कोचिंग संस्थान को शुरू किया गया है। कोचिंग संस्थान में कांकेर जिले के प्रतिभाशाली युवाओं को सीजी पीएससी, एसएससी, व्यापम सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। अतिरिक्त सचिव सुश्री देशमुख ने इसकी भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यूपीएससी, राज्य पीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पढ़ने की सुविधा देना जिले की प्रतिभाओं को गढ़ने का अच्छा प्रयास है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कांकेर के विद्यार्थियों का न सिर्फ प्रदेश की लोक सेवाओं में चयन हो, बल्कि वे अपनी मेहनत और संस्थान के मार्गदर्शन में देश और विदेशों में भी सेवाओं के जरिए अपनी पहचान स्थापित करें। सुश्री देशमुख ने विभिन्न कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से उनके भविष्य की रणनीति के बारे में जानकारी लेते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं दीं।   अतिरिक्त सचिव ने मूक-बधिर विद्यार्थियों के बीच गुजारा समय कांकेर प्रवास के दौरान भारत सरकार की अतिरिक्त सचिव सुश्री देशमुख ग्राम कोदाभाट स्थित शासकीय श्रवण एवं दृष्टि बाधितार्थ विशेष विद्यालय भी पहुंचीं। यहां विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग विद्यार्थियों ने साइन लैंग्वेज से उनका स्वागत किया। इस दौरान दिव्यांग बच्चों ने स्वागत गीत गाया तथा खुद के द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स उन्हें भेंट की। यह विशेष विद्यालय 50 सीटर है। विद्यालय में बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित हैं तथा कुल 45 छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें 33 श्रवण बाधित और 12 दृष्टिबाधित बच्चे सम्मिलित हैं। विशेष विद्यालय परिसर में सभी छात्रों के लिए निःशुल्क आवासीय एवं भोजन सुविधा उपलब्ध है। इस विद्यालय में निकट भविष्य में स्मार्ट क्लासेस शुरू करने की भी योजना है। अतिरिक्त सचिव सुश्री देशमुख ने यहां उपलब्ध साधनों एवं संसाधनों की सराहना करते हुए शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की रूचि के अनुरूप विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण देने की बात भी कही, ताकि निः शक्त और दृष्टि तथा श्रवण बाधित बच्चे बड़े होकर आत्मनिर्भर बन सकें।

जनसेवा ही हमारा संकल्प: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जनदर्शन में किया समस्याओं का त्वरित निराकरण

खनिज न्यास की योजनाओं से होगा जनजीवन में सुधार – सूरजपुर में शासी परिषद की बैठक संपन्न रायपुर, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री और भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि जनसेवा ही हमारा संकल्प है, जनता की प्रत्येक समस्या का समाधान सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने आज अपने निवास बीरपुर जिला सूरजपुर में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुँचे नागरिकों की समस्याएँ और सुझाव सुनी। उन्होंने अधिकारियों को हर आवेदन पर आवश्यक और त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनदर्शन कार्यक्रम के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का निराकरण स्थल पर ही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से जनता तक पहुँच सके।       मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की अध्यक्षता में आज जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) सूरजपुर की शासी परिषद की बैठक भी जिला पंचायत कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में सांसद श्री चिंतामणि महराज, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती चंद्रमणि पैकरा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती कुसुमलता राजवाड़े, कलेक्टर सहित जिले के जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।       बैठक में खनिज न्यास निधि से संचालित योजनाओं की समीक्षा की गई और विकास कार्यों की प्रगति पर चर्चा हुई। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने निर्देश दिए कि खनिज न्यास निधि से संचालित सभी योजनाएँ जनजीवन के उत्थान में सार्थक योगदान दें, तथा उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि खनिज क्षेत्र से प्राप्त संसाधनों का अधिकतम लाभ स्थानीय जनता को मिले और इन योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, पोषण, सड़क एवं रोजगार के क्षेत्र में स्थायी सुधार हो।