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Aastha Pandey

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आत्मविश्वास से भरा नया अध्याय :स्पष्ट विज़न के साथ

mohan yadav

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दो साल पूरा कर चुके डॉ. मोहन यादव अब पहले से कहीं ज़्यादा आत्मविश्वास और स्पष्ट विज़न के साथ आगे बढ़ते दिख रहे हैं। बीते दो वर्षों में राज्य ने नक्सलवाद से मुक्ति, रिकॉर्ड स्तर पर औद्योगिक निवेश और कई बड़े विकास प्रोजेक्ट्स की शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए हैं। उज्जैन से लेकर भोपाल तक, इंफ़्रास्ट्रक्चर से लेकर शिक्षा-स्वास्थ्य तक, और उद्योग से लेकर ग्रामीण विकास तक—हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। अब जब उनका दो वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका है, डॉ. यादव की नज़रें अगले तीन वर्षों पर हैं, जहाँ वे सड़क, बिजली, रोजगार, कृषि और तकनीकी विकास को तेज़ गति देने की तैयारी में जुटे हैं। आत्मविश्वास से लबरेज़ डॉ. मोहन यादव की नज़र अब अगले तीन वर्षों पर — मध्यप्रदेश में विकास की नई कहानी परिचय: आत्मविश्वास से भरा नया अध्याय डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी। दो साल पूरा होने पर आज वे पहले से कहीं ज़्यादा आत्मविश्वास से भरे और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ दिखते हैं। अपने भाषणों और निर्णयों में वे बार-बार कहते हैं कि उनका लक्ष्य है सबका विकास, सबके लिए अवसर और मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में लाना। यह उनके नेतृत्व की उन पहलुओं में से एक है जिसने जनता के बीच उम्मीदें और ऊर्जा दोनों बढ़ाई हैं। यह लेख इसी यात्रा को आसान शब्दों में विस्तार से समझाता है – उनके दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियां, चुनौतियाँ, योजनाएँ और आगे की दिशा। ये खबर भी पढ़े …ऑक्सफोर्ड डिबेट विवाद: पाकिस्तान झूठ बोला, भारत ने पोल खोली दो साल का सफ़र — चुनौतियों से उपलब्धियों तक डॉ. मोहन यादव का कार्यकाल शुरू हुआ जब उन्होंने लंबे समय तक सत्ता संभाले पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का स्थान लिया। यह परिवर्तन जैसा भी था, उम्मीदों के साथ चुनौतियाँ भी थी, क्योंकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना था कि नए नेतृत्व के रूप में उन्हें नीतियों और संगठन को संतुलित करना आसान नहीं होगा। लेकिन उन्होंने कम बात, ज़्यादा काम की नीति अपनाई और सरकारी कार्यों पर पूरा फोकस रखा। ये खबर भी पढ़े …IFFI Award: जापानी ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’, इफ्फी प्रेमियों ने लिया आनंद मुख्य उपलब्धियां — आंकड़ों और काम की बातें डॉ. यादव सरकार ने मध्यप्रदेश को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया है। बालाघाट और अन्य क्षेत्रों में नक्सलियों का आत्मसमर्पण हुआ है और भारी इनामी नेताओं ने हथियार डाल दिए हैं। यह उपलब्धि सुरक्षा, कानून व्यवस्था और गंभीर सरकारी रणनीति का परिणाम है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) 2025 में मध्यप्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जो राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को बड़ा धक्का देगा। इन निवेशों से लाखों नौकरियां और बड़े इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट लॉन्च होंगे। इसके अलावा टेक्नोलॉजी और उद्योग सम्मेलन में भी राज्य को करीब 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे रोजगार और तकनीकी निवेश को बल मिलेगा। इन निवेशों से केवल कंपनियों को लाभ नहीं बल्कि युवाओं को रोजगार, ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियाँ, और पेट्रोलियम, ऊर्जा तथा सेवा क्षेत्रों में विकास के नए अवसर मिलेंगे। 3. किसान, युवा और महिलाओं के लिए सपोर्ट डॉ. यादव ने नीति बनायी कि विकास योजनाएँ तभी सफल होंगी जब आम जनता तक आर्थिक मदद सीधे पहुंचे: गरीबों और किसानों के लिए योजनाओं में सहायता और बीमा दावा सुनिश्चित कराना महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं का विस्तार युवा वर्ग के लिए स्किल डेवलपमेंट और नौकरी का अवसर अधिक से अधिक सुनिश्चित करना ऐसे कदमों से आम लोगों की ज़िंदगी प्रत्यक्ष रूप से बेहतर हुई है तथा ग्रामीण और छोटे कारोबारी वर्ग को भी समर्थन मिला है। 4. शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में कदम पिछले दो सालों में– नई मेडिकल कॉलेजों और शिक्षा संस्थानों की शुरुआत की गयी स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तारित किया गया युवा वर्ग के लिए रोजगार निर्माण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान रखा गया ये कदम प्रदेश के दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर उठाये गए हैं। 5. सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को बढ़ावा डॉ. मोहन यादव ने सांस्कृतिक धरोहरों और आध्यात्मिक पर्यटन को भी प्राथमिकता दी है। उज्जैन जैसे शहरों में पारंपरिक तथा वैश्विक स्तर के आयोजन किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। अगले तीन वर्षों का विज़न — दिशा और योजनाएं अब दो साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, और मुख्यमंत्री का ध्यान अगले तीन वर्षों की योजनाओं पर केंद्रित है। उनका लक्ष्य साफ़ है-सड़क, बिजली, और बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत बनानाऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों पर काम करनाकृषि, सिंचाई और खाद्य प्रसंस्करण को अधिक सक्षम बनानायुवाओं के लिए तकनीकी और रोजगार के अवसर बढ़ाना डॉ. यादव यह मानते हैं कि अगले तीन वर्षों में राज्य को आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से नई ऊँचाइयों तक पहुंचाना है। इन योजनाओं का केंद्र बिंदु साधारण है: लोगों को रोज़गार मिले, पंचायत और गाँव मजबूत हों, और युवाओं में आत्मनिर्भरता आये। शिक्षा, कानून व्यवस्था और सुरक्षा सीएम मोहन यादव ने कहा है कि कानून व्यवस्था बेहतर रहे तभी विकास की राह सुगम होगी. इसलिए प्रदेश में पुलिस भर्ती, सुरक्षा फोर्स का विस्तार और रेफॉर्म मुख्य एजेंडा रहा है। इस नीति ने सुरक्षा में सुधार और शांति की भावना बनी रहने में मदद की है।कृषि, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचा किसानों के लिए बीज, सिंचाई, समर्थन मूल्य और फसल बीमा योजनाओं का विस्तार कृषि क्षेत्र में तकनीकी मदद और संसाधन उपलब्ध यह नीति आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। उद्योग, MSME और स्टार्टअप इकोसिस्टम मुख्यमंत्री ने MSME सेक्टर को भी बढ़ावा दिया है। विभिन्न सम्मेलनों और सम्मेलन के अवसरों पर वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल मार्केटिंग सहायता दी गयी है। इसका उद्देश्य छोटे और मझोले उद्योगों को राष्ट्रीय और ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। 2 वर्षों की समीक्षा और 3 वर्षों की तैयारियाँ यह दो-साल की यात्रा सिर्फ़ आंकड़ों का बयान नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का परिणाम है। विकास योजनाओं की गति, नक्सल मुक़्ती, बड़ा निवेश, और सामाजिक कल्याण नीतियाँ यह दिखाती हैं … Read more

ईडी का मेगा ऑपरेशन: जानलेवा कफ सिरप कांड में 3 राज्यों के 25 ठिकानों पर छापेमारी

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जानलेवा कोडिन कफ सिरप कांड में ईडी का अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन सामने आया है। सूत्रों के अनुसार करीब 1000 करोड़ रुपये के अवैध नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके बाद यूपी सरकार ने मामले की गंभीरता देखते हुए एसआईटी गठित कर दी। शुक्रवार सुबह सात बजे झारखंड, उत्तर प्रदेश और गुजरात में 25 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की गई। अब तक 32 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 18 अक्टूबर को सोनभद्र से एक ट्रक भी पकड़ा गया था। मुख्य आरोपी शुभम जयसवाल फरार बताया जा रहा है, उसके पिता गिरफ्तार हैं। रांची स्थित शैली ट्रेडर्स और तुपुदाना गोदाम से महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। ईडी को आगे और बड़े खुलासों की उम्मीद है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश भर में फैल चुके अवैध कफ सिरप (illegal cough syrup) रैकेट पर बड़ा दावा किया है। एजेंसी ने शुक्रवार की सुबह करीब 7:30 बजे उत्तर प्रदेश, झारखंड और गुजरात में 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की जा रही है और इसे जांच का सबसे बड़ा चरण माना जा रहा है। यह अंतर-राज्यीय नेटवर्क नकली या बिना लाइसेंस वाले कोडीन युक्त कफ सिरप (codeine cough syrup) को बड़ी मात्रा में खरीदकर, बैंकों और फर्जी कागजी रसीदों के जरिए अवैध रूप से बेच रहा था। इसके बदले करोड़ों रुपये की कमाई की गई — जिसकी राशि करीब ₹1000 करोड़ आंकी जा रही है। कैसे हुआ खुलासा इस मामले की शुरुआत अलग-अलग जिलों में दर्ज 30 से अधिक FIRs और पुलिस, FSDA तथा अन्य एजेंसियों के छापों के बाद हुई। इन एफआईआरों में यह सामने आया कि कोडीन आधारित दवाओं को बिना लाइसेंस, नकली रसीदों और फर्जी ढांचे का उपयोग कर अवैध रूप से स्टोर, ट्रांसपोर्ट और बेच दिया जा रहा था। ईडी ने इन सभी सबूतों के आधार पर ECIR दर्ज कर दी और मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की। ये खबर पढ़े …Kashi Tamil Sangamam: प्रधानमंत्री मोदी की पहल,  प्रदर्शनी का उद्घाटन  कहां-कहां छापेमारी हुई ईडी की टीम ने निम्न प्रमुख जिलों और शहरों में छापा मारा: लखनऊ, वाराणसी, जौनपुर, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) इन स्थलों पर व्यापारिक गोदामों, ऑफिसों और चार्टर्ड अकाउंटेंट विष्णु अग्रवाल के परिसरों में दस्तावेज, मोबाइल और डिजिटल सामग्री जब्त की गई है, जो अवैध कारोबार के वित्तीय लेन-देन को उजागर कर सकते हैं। ये खबर पढ़े …Ditwa Cyclone: दूरसंचार विभाग की तैयारी, सुरक्षा के बने नियंत्रण कक्ष आरोपी और गिरफ्तारीें अब तक 32 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें व्यापारी, एजेंट और नेटवर्क के अन्य सदस्य शामिल हैं। सबसे बड़ा आरोपी शुभम जायसवाल अभी फरार है और उसे पकड़ने के लिए इनाम घोषित किया गया है। उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं। पुलिस की जांच के मुताबिक, नेटवर्क कोडीन सिरप को बड़े पैमाने पर बांग्लादेश और नेपाल तक भी तस्करी कर रहा था, जिससे स्वास्थ्य और सामाजिक स्तर पर बहुत बड़ी समस्या खड़ी हुई है।क्या है कोडीन वाला कफ सिरप कोडीन एक नियंत्रित दवा होती है, जिसका डाक्टरी उपयोग दर्द कम करने या खांसी को शांत करने में होता है; लेकिन उसे नैक्रोटिक (नशीला) रूप में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। नशीले रूप में यह लत और स्वास्थ्य जोखिम बन सकता है, जिस कारण यह प्रतिबंधित दवाओं की श्रेणी में आता है। आगे क्या हो सकता है ईडी ने कहा है कि यह जांच अभी भी चल रही है। बैंक रिकॉर्ड, GST विवरण, लेन-देन दस्तावेज और रसीदों की जांच जारी है। इससे नेटवर्क की वित्तीय जड़ें और रूट सामने आएंगे और और भी आरोपियों को तलब किया जा सकता है। FAQs – कफ सिरप कांड एक अवैध नेटवर्क है जिसमें कोडीन युक्त कफ सिरप को लाइसेंस और रिकॉर्ड के बिना खरीदा-बेचा, ट्रांसपोर्ट और नेटवर्क के जरिए फैलाया गया। इसके खिलाफ पुलिस और ईडी ने व्यापक छापेमारी और आरोपियों पर मामले दर्ज किए हैं। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच शुरू की, क्योंकि यह अवैध कारोबार बड़ी वित्तीय कमाई और हवाला/फर्जी रसीदों से जुड़ा हुआ पाया गया। इसी वजह से 3 राज्यों में 25 स्थानों पर छापेमारी की गई। मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल अभी फरार है और उस पर पुलिस इनाम भी घोषित कर चुकी है। उसके पिता भोला प्रसाद जायसवाल और अन्य कई सदस्य पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। जांच अभी जारी है।

Kashi Tamil Sangamam: प्रधानमंत्री मोदी की पहल,  प्रदर्शनी का उद्घाटन 

Kashi Tamil Sangamam

Kashi Tamil Sangamam Initiative of Prime Minister Modi inauguration of exhibition नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय मामलों के राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन  ने 02 दिसंबर से  वाराणसी के नमो घाट पर शुरू हो रहे ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ में “काशी एवं तमिल की संस्कृति, महान व्यक्तित्वों एवं केंद्र सरकार के जनकल्याणकारी नीतियों” विषय पर केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इकाई केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन  ने  कहा कि  ‘काशी तमिल संगमम्’  का आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वपूर्ण पहल है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इससे जहां एक ओर काशी और तमिल की संस्कृति को  आपस में  जानने का अवसर मिलता है वहीं दूसरी ओर इससे हमारे राष्ट्र की एकता और अखंडता को और अधिक मजबूती मिलती है। डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि ‘काशी तमिल संगमम्’ प्रत्येक वर्ष अलग – अलग विषयों पर आयोजित किया जाता है, यह काशी तमिल संगमम् का चतुर्थ संस्करण है तथा इसका विषय है ‘तमिल करकलाम’ जिसका अर्थ है आइए तमिल सीखें। केंद्रीय मंत्री ने कहा इस प्रकार के आयोजन से काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों से स्थापित सांस्कृतिक संबंध और भी मजबूत होंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किये गये जी.एस.टी. सुधार एवं श्रम कानून सुधारों से देश की आम जनता को अत्यधिक फायदा हो रहा है।  काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने वाले ‘काशी तमिल संगमम्’ के इस चतुर्थ संस्करण में केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगायी गयी चित्र प्रदर्शनी में तमिलनाडु एवं काशी की महान विभूतियों के राष्ट्र निर्माण में योगदान एवं उनकी उपलब्धियां को दर्शाया गया है। चित्र प्रदर्शनी में तमिलनाडु की महान विभूतियों जैसे ऋषि अगस्त्य, तमिल महिला कवि संत अव्वैयार, तमिल कवि संत तिरुवल्लुवर, कवयित्री और संत कारैकल अम्माइयार, भक्ति आंदोलन की कवि एवं संत अंडाल (कोधाई), थिरूनावुक्कारसर, तमिल कवि और समाज सुधारक श्री रामलिंग स्वामी (वल्लालर), तमिल विद्वान यू. वी. स्वामीनाथ अय्यर,  अग्रणी समाज सुधारक, चिकित्सक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ब्रिटिश भारत में पहली महिला विधायक डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी, गणितज्ञ श्री निवास रामानुजन, अविष्कारक और उद्योगपति जी.डी. नायडू, खगोलशास्त्री सुब्रमण्यम चंद्रशेखर, भारत में हरित क्रांति के जनक डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन, भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, नोवेल पुरस्कार विजेता वेंकटरामन रामकृष्णन, स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, नोबेल पुरस्कार विजेता एवं महान वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रमन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सुप्रसिद्ध राजनेता एवं भारत रत्न के. कामराज, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं सुप्रसिद्ध राजनेता चिदंबरम सुब्रमण्यम, महान अभिनेता एवं राजनेता एम. जी. रामचंद्रन इत्यादि के जीवन दर्शन को चित्रों एवं शब्दों में दर्शाया गया है।  इसी प्रकार काशी की महान विभूतियां जैसे संत कबीरदास, संत रविदास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं शिक्षाविद पंडित मदन मोहन मालवीय, सुप्रसिद्ध शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान, विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार पंडित रविशंकर, महान साहित्यकार जयशंकर प्रसाद इत्यादि के जीवन दर्शन को चित्रों शब्दों के माध्यम से दर्शाया गया है।  चित्र प्रदर्शनी में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किये जा रहे सरकार के जन कल्याणकारी नीतियों, प्रयासों एवं योजनाओं को भी दर्शाया गया है। जिसमें केंद्र सरकार द्वारा हाल में श्रम सुधार के लिए बनाये गये कानूनों, विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी के दरों को कम करने के लिये किए गये प्रयासों की जानकारी दर्शकों और जनसामान्य के लिए प्रदर्शित की गई है। यह प्रदर्शनी जनता के दर्शन के लिये 15 दिसंबर तक निरंतर रहेगी। https://platform.twitter.com/embed/Tweet.html?dnt=false&embedId=twitter-widget-0&features=eyJ0ZndfdGltZWxpbmVfbGlzdCI6eyJidWNrZXQiOltdLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X2ZvbGxvd2VyX2NvdW50X3N1bnNldCI6eyJidWNrZXQiOnRydWUsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdHdlZXRfZWRpdF9iYWNrZW5kIjp7ImJ1Y2tldCI6Im9uIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH0sInRmd19yZWZzcmNfc2Vzc2lvbiI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfZm9zbnJfc29mdF9pbnRlcnZlbnRpb25zX2VuYWJsZWQiOnsiYnVja2V0Ijoib24iLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X21peGVkX21lZGlhXzE1ODk3Ijp7ImJ1Y2tldCI6InRyZWF0bWVudCIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfZXhwZXJpbWVudHNfY29va2llX2V4cGlyYXRpb24iOnsiYnVja2V0IjoxMjA5NjAwLCJ2ZXJzaW9uIjpudWxsfSwidGZ3X3Nob3dfYmlyZHdhdGNoX3Bpdm90c19lbmFibGVkIjp7ImJ1Y2tldCI6Im9uIiwidmVyc2lvbiI6bnVsbH0sInRmd19kdXBsaWNhdGVfc2NyaWJlc190b19zZXR0aW5ncyI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdXNlX3Byb2ZpbGVfaW1hZ2Vfc2hhcGVfZW5hYmxlZCI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdmlkZW9faGxzX2R5bmFtaWNfbWFuaWZlc3RzXzE1MDgyIjp7ImJ1Y2tldCI6InRydWVfYml0cmF0ZSIsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfbGVnYWN5X3RpbWVsaW5lX3N1bnNldCI6eyJidWNrZXQiOnRydWUsInZlcnNpb24iOm51bGx9LCJ0ZndfdHdlZXRfZWRpdF9mcm9udGVuZCI6eyJidWNrZXQiOiJvbiIsInZlcnNpb24iOm51bGx9fQ%3D%3D&frame=false&hideCard=false&hideThread=false&id=1995823681273278662&lang=en&origin=https%3A%2F%2Fwww.pib.gov.in%2FPressReleasePage.aspx%3FPRID%3D2197699%26reg%3D3%26lang%3D2&sessionId=908a61c9c7fba83a0e7875e14ba55efd124323e3&theme=light&widgetsVersion=2615f7e52b7e0%3A1702314776716&width=550px

Ditwa Cyclone: दूरसंचार विभाग की तैयारी, सुरक्षा के बने नियंत्रण कक्ष

Ditwa Cyclone

Ditwa Cyclone ​​Telecom Department prepared control room set up for security नई दिल्ली।  दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने बंगाल की खाड़ी में आने वाले चक्रवात दित्वा के मद्देनजर दूरसंचार नेटवर्क की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारी की हैं। इस चक्रवात से तटीय आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु पर असर पड़ने की आशंका है। टीमों की तैनाती दूरसंचार विभाग ने चक्रवात दित्वा के खतरे को देखते हुए दूरसंचार कनेक्टिविटी की सुरक्षा, सेवा प्रदाताओं के साथ तालमेल और जिला प्रशासन तथा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक 24×7 नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) को निर्बाध नेटवर्क संचालन, पर्याप्त ईंधन भंडार, आपातकालीन बिजली बैकअप की तैयारी और संवेदनशील जिलों में फील्ड रिस्पांस टीमों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षण पूरा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी-2020) के अनुसार, दूरसंचार विभाग ने निर्बाध संचार बनाए रखने और आपात स्थितियों में पूर्व चेतावनी देने के लिए सभी नेटवर्कों पर इंट्रा सर्कल रोमिंग (आईसीआर) और सेल ब्रॉडकास्ट (सीबी) परीक्षण पूरा कर लिया है। चक्रवात दित्वा के मद्देनजर दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार नेटवर्क की सुदृढ़ता सुनिश्चित की है। चक्रवात के दौरान और उसके बाद निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए दूरसंचार विभाग अपने नियंत्रण कक्ष और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से नियमित अपडेट के जरिए स्थिति पर लगातार नज़र रख रहा है। अधिक जानकारी के लिए DoT हैंडल्स को फॉलो करें: – एक्स – https://x.com/DoT_India इंस्टा https://www.instagram.com/department_of_telecom?igsh=MXUxbHFjd3llZTU0YQ == फेसबुक – https://www.facebook.com/DoTIndia यूट्यूब: https://www.youtube.com/@departmentoftelecom

ऑक्सफोर्ड डिबेट विवाद: पाकिस्तान झूठ बोला, भारत ने पोल खोली

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भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव भले ही नया नहीं है, लेकिन ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनियन डिबेट में जो हुआ, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया। यह बहस भारत-पाक नीति पर होने वाली थी, जिसमें दोनों देशों के वक्ताओं को अपने पक्ष रखने थे। भारत से एडवोकेट जे साई दीपक, एक्टिविस्ट मनु खजूरिया और पंडित सतीश के शर्मा शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही जानकारी मिली कि पाकिस्तानी पक्ष बहस में आने से पीछे हट गया है। 🇮🇳 क्या हुआ — असली मामला एक बहुप्रतीक्षित डिबेट थी — ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन में, जिस विषय पर बहस होनी थी: “This House Believes India’s Policy Towards Pakistan Is a Populist Strategy Sold as Security Policy”पाकिस्तान की तरफ से वक्ता रहने वाले थे: पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर, पूर्व सेना जनरल ज़ुबैर महमूद हयात और ब्रिटेन में पाकिस्तान के राजदूत मोहम्मद फैसल — ये पहले ही लंदन पहुंचे हुए थे। भारत की ओर से मूल वक्ता थे: पूर्व सेना प्रमुख M.M. Naravane (सेवानिवृत्त), पूर्व कानून मंत्री व सांसद सुब्रमनियन स्वामी, और पूर्व राज्य मंत्री व नेता सचिन पायलट — लेकिन ये तीनों आखिरी समय पर उपलब्ध नहीं रहे। भारत-पक्ष की ओर से J Sai Deepak थे, जिनके अनुसार उन्होंने पहले से तैयारियों की पुष्टि कर रखी थी। बाद में, नियत वक्ताओं के न होने पर उन्होंने ब्रिटेन में रह रहे अन्य व्यक्तियों — Manu Khajuria व Satish K Sharma — को विकल्प के रूप में शामिल कराया। ये खबर भी पढ़े…UIDAI: 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर बंद, पोर्टल पर दी गई यह सुविधा भी 🛑 विवाद कैसे शुरू हुआ डिबेट से ठीक कुछ घंटे पहले ही आयोजकों यानी Oxford Union के अध्यक्ष Moosa Harraj (जो पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन मंत्री के बेटे बताए गए हैं) ने J Sai Deepak को कह दिया कि पाकिस्तान की टीम लंदन नहीं पहुंची है — इसलिए डिबेट रद्द करनी पड़ी। लेकिन इसके ठीक बाद यह जानकारी मिली कि पाकिस्तान की टीम असल में लंदन में थी और होटल में रुकी थी — यानी उनकी अनुपस्थिति के दावे में गड़बड़ी थी। भारत की ओर से यह वादा था कि अगर समय रहते स्पीकर उपलब्ध न हो सके, तो दूसरा पैनल भेजा जाएगा — लेकिन आयोजकों ने वो प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। इस वजह से British-based भारतीय नागरिक (Manu Khajuria, Satish K Sharma) की अनुमति देने में भी आनाकानी हुई ये खबर भी पढ़े…IFFI Award: जापानी ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’, इफ्फी प्रेमियों ने लिया आनंद 🇵🇰 पाकिस्तान का दावा और भारत की प्रतिक्रिया पाकिस्तान हायर कमीशन लंदन ने सार्वजनिक रूप से कहा कि “भारतीय वक्ताओं ने आखिरी समय पर बहस से पीछे हटने का फैसला किया”। इस दावे ने पाकिस्तान को वॉकओवर जीत का हवाला दिया। इसके जवाब में J Sai Deepak ने कहा कि भारत की टीम तैयार थी, और बहस रद्द होना असल में पाकिस्तान की टीम की अनुपस्थिति व आयोजन प्रबंधन की असफलता का परिणाम था। उन्होंने ईमेल और कॉल-लॉग्स सार्वजनिक कर दिए। Deepak ने कहा: “अगर पाकिस्तान वालों में हिम्मत है, तो अब वे सीधे भाजपा, मीडिया या सोशल-मीडिया के मंच की बजाय वही मंच चुनें जहाँ मुद्दे पर खुलकर बहस हो सके।” कुछ दक्षिण एशियाई और ब्रिटिश मीडिया तथा आकलनकर्ता भी इस पूरे नाटक को “स्टंट” या “ड्रामा” कह रहे हैं — उनका कहना है कि शुरुआत से ही यह बहस एक असली बहस नहीं थी, बल्कि एक प्रचार-प्रयोग था। ये खबर भी पढ़े…Assam Anti Polygamy Bill 2025: बहुविवाह पर सख़्त रोक: असम में बिल को मंजूरी 🎯 इस घटना का मतलब क्या है यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, जहाँ अकादमिक मंचों और डिबेट सोसायटीज़ की प्रतिष्ठा होती है, वे भी राजनीतिक एजेंडा, दावे और प्रचार के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच अब सिर्फ बॉर्डर या नीति का विवाद नहीं है; बहस की तक़ाज़ा, सार्वजनिक बाहस और छवि-प्रबंधन की जंग भी अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँच गई है। जो देश या पक्ष खुलकर बहस से भागता दिखे — उसकी विश्वसनीयता सवालों के घेरे में आती है। इस मामले में, पाकिस्तान की ओर से पहले दावे, फिर उनके असत्य साबित होने से, बहस के महत्व और तर्क-वाद की जगह प्रचार की प्राथमिकता उजागर हुई। FAQs Q1: यह डिबेट आखिर किन राज्यों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच तय थी?इस डिबेट में पाकिस्तान की ओर थे पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर, पूर्व जनरल जुबैर महमूद हयात और यूके में पाकिस्तानी राजदूत मोहम्मद फैसल। वहीं भारत की ओर मूल वक्ता थे पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे, पूर्व मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी और सचिन पायलट। बाद में जब ये तीनों उपलब्ध नहीं हुए, तो भारत-पक्ष ने अन्य वक्ताओं (Manu Khajuria, Satish K Sharma) को प्रस्तावित किया। Q2: डिबेट रद्द क्यों हुई — पाकिस्तान के न पहुँचने की वजह से या भारत के हटने की वजह से?भारत-पक्ष का कहना है कि डिबेट रद्द इसलिए हुई क्योंकि पाकिस्तान की टीम आखिरी समय में उपस्थित नहीं हुई; आयोजक द्वारा सूचना दी गई थी कि पाकिस्तानी वक्ता लंदन में नहीं पहुँचे। वहीं पाकिस्तान हाई कमीशन का दावा था कि भारत के वक्ता पीछे हट गए। लेकिन J Sai Deepak ने दोनों दावों को असत्य साबित किया — उन्होंने कॉल-लॉग्स व ईमेल सबूत दिखाए। Q3: क्या इस घटना का मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अब विश्वसनीय बहस नहीं होती?हां — यह घटना एक उदाहरण है कि कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल सच्ची बहस की बजाय पब्लिक ट्रंपेटिंग व प्रचार के लिए किया जाता है। जहाँ पर तैयारी, भरोसा, और तर्क-वाद की बजाय, आखिरी समय की रणनीतियाँ, बदलाव और कथित ‘वॉकओवर’ की चाल होती है। इस तरह के मामलों में विश्वसनीयता और निष्पक्षता हमेशा नहीं रहती।

IFFI Award: जापानी ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’, इफ्फी प्रेमियों ने लिया आनंद

IFFI Awards

IFFI Awards Japanese A Pale View of Hills enjoys IFFI fans गोवा। जापानी फिल्म निर्देशक कएई इशिकावा आज अपनी दूसरी फिल्म ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में मीडिया से रू-ब-रू हुए। इस फिल्म को इस वर्ष 56वें ​​भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई – इफ्फी), गोवा में ‘कंट्री फोकस: जापान’ के एक हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया गया। आईएफएफआई में आने वाले दर्शकों को समकालीन जापानी सिनेमा के विस्तृत परिदृश्य से परिचय कराने के लिए इसका प्रदर्शन किया गया। ‘कंट्री फोकस जापान की सिनेमाई विरासत को आकार देने वाले उभरते स्वरों और प्रसिद्ध फिल्मकारों, दोनों की रचनात्मक जीवंतता का जश्न मनाते हुए, ‘कंट्री फोकस: जापान’ शैलियों की एक असाधारण श्रृंखला को समेटे हुए है। इसमें स्मृति, पहचान और अपनेपन की खोज करने वाले अंतरंग नाटकों से लेकर ऐतिहासिक महाकाव्य, मनोवैज्ञानिक थ्रिलर, बच्चों की कहानियां और अमूर्त, गैर-रेखीय प्रयोग शामिल हैं, जो सिनेमाई रूप की सीमाओं को तोड़ते हुए उनका विस्तार करते हैं। निर्देशक इशिकावा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा, “यह मेरी पहली भारत यात्रा है और मैंने इस अनुभव का भरपूर आनंद लिया है। यह फिल्म नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक काज़ुओ इशिगुरो के 1982 में प्रकाशित इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। इस वर्ष, जापान में कई फिल्में इसी विषय पर बनी हैं, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुए 80 वर्ष हो रहे हैं। मैं भी हमेशा से इस विषय पर बोलना चाहता था, लेकिन मुझे सही भाषा ढूंढ़ने में दिक्कत हुई, क्योंकि मैंने उस दौर का प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया था। जब मुझे यह उपन्यास मिला, तो यह विषय मेरे लिए और भी सुलभ हो गया और इसने मुझे इस कहानी को कहने का आत्मविश्वास दिया।” लेखिका पर आधारित इस फिल्म की कहानी एक युवा महत्वाकांक्षी जापानी-ब्रिटिश लेखिका पर आधारित है, जो अपनी माँ एत्सुको के नागासाकी में युद्ध के बाद के अनुभवों पर आधारित एक किताब लिखने का निश्चय करती है। अपनी बड़ी बेटी की आत्महत्या से अब भी त्रस्त, एत्सुको 1952 की यादें ताज़ा करना शुरू करती है, उस वक्त वो एक युवा गर्भवती माँ थी। उसकी यादें सचिको से उसकी मुलाकात पर केंद्रित हैं, जो अपनी बेटी मारिको के साथ विदेश में एक नया जीवन शुरू करने के लिए दृढ़ थी। मारिको कभी-कभी एक भयानक महिला से जुड़ी परेशान करने वाली यादों का ज़िक्र करती है। जैसे-जैसे लेखिका अपनी माँ के नागासाकी में बिताए वर्षों के अंशों और स्मृति चिन्हों को एक साथ जोड़ती है, उसे एत्सुको द्वारा साझा की गई यादों और उनके द्वारा प्रस्तुत वास्तविकता के बीच परेशान करने वाली विसंगतियां नज़र आने लगती हैं। महिलाओं के बारे निर्देशक इशिकावा ने बताया कि वो इस कहानी की ओर आकर्षित इसलिए हुए कि यह सिर्फ़ परमाणु बम के बारे में ही नहीं, बल्कि विभिन्न युगों की महिलाओं के बारे में भी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने ख़ुद पटकथा लिखी और फ़िल्म का संपादन भी किया, क्योंकि वे संपादन को लेखन प्रक्रिया का अंतिम चरण मानते हैं। उन्होंने आगे बताया कि टीम को फिल्म के लिए सबसे उपयुक्त अंत तय करते समय तीन देशों – जापान, ब्रिटेन और पोलैंड – के दृष्टिकोणों में संतुलन बनाना था। हर एक ने एक अलग संवेदनशीलता पैदा की: ब्रिटिश निर्माता एक स्पष्ट और अधिक परिभाषित निष्कर्ष को प्राथमिकता देते थे; जबकि पोलिश निर्माताओं का मानना ​​था कि बहुत अधिक व्याख्या से फिल्म का प्रभाव कम हो जाएगा। जापानी दृष्टिकोण इन दोनों के कहीं बीच में था। उन्होंने बताया कि उन्हें इस सहयोगात्मक प्रक्रिया और व्यापक चर्चाओं का सचमुच आनंद आया, जिसने अंततः फिल्म को सही अंत तक पहुंचाया।https://www.youtube.com/embed/IM3wArsfda0 आईएफएफआई के बारे मेंhttps://www.youtube.com/embed/CspDNSAOrpw 1952 में स्थापित भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) दक्षिण एशिया में सिनेमा का सबसे पुराना और सबसे बड़ा उत्सव है। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी),  सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवा (ईएसजी), गोवा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह महोत्सव एक वैश्विक सिनेमाई महाशक्ति के रूप में विकसित हुआ है—जहां पुनर्स्थापित क्लासिक फिल्में साहसिक प्रयोगों से मिलती हैं, और दिग्गज कलाकार नए कलाकारों के साथ मंच साझा करते हैं। आईएफएफआई को वास्तव में शानदार बनाने वाला इसका विद्युत मिश्रण अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक दर्शन, मास्टरक्लास, श्रद्धांजलि और ऊर्जावान वेव्‍स फिल्म बाजार हैं जहां विचार, सौदे और सहयोग उड़ान भरते हैं। 20 से 28 नवंबर तक गोवा की शानदार तटीय वातावरण में आयोजित 56वें आईएफएफआई में भाषाओं, शैलियों, नवाचारों और आवाज़ों की एक चमकदार श्रृंखला का संयोजन देखने को मिला।

महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब

SC

सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स में महिलाओं की निजता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर केंद्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा, दिशानिर्देश बनाने पर हो सकती है बड़ी पहल।सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की गरिमा और अधिकारों को केंद्र में रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर पहल की है। हरियाणा के एमडीयू में महिलाओं की कथित ‘पीरियड चेकिंग’ की खबर ने देश को झकझोर दिया, और इसी के बाद अदालत ने केंद्र और हरियाणा सरकार से तत्काल जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि पीरियड्स एक प्राकृतिक और निजी प्रक्रिया है, जिसे किसी भी महिला के सम्मान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। अब अदालत ऐसे अपमानजनक मामलों को रोकने के लिए पूरे देश में समान और सख्त दिशानिर्देश बनाने पर विचार कर रही है। यह फैसला महिलाओं की निजता, स्वास्थ्य और सम्मान की सुरक्षा में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। पीरियड्स कोई शर्म की बात नहीं –सुप्रीम कोर्ट ये खबर भी पढ़े…एआईसीटीई की नई मंजूरी प्रक्रिया: 2026–27 में खुलेंगे नए इंजीनियरिंग कॉलेज नयी दिल्ली की सर्द सुबह में जब सुप्रीम कोर्ट की एक महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स के दौरान महिलाओं की निजता और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार दोनों को नोटिस जारी किया। यह मामला तभी उठा जब हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में महिला सफाई कर्मचारियों की कथित तौर पर फिजिकल चेकिंग किए जाने की खबरें सामने आईं। यह चेकिंग इस लिए की गई कि यह पता लगाया जाए कि कौन सी महिला “पीरियड में है और कौन नहीं’। यह खबर चौंकाने वाली थी, और इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने एक जनहित याचिका दायर की ताकि पूरे देश में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट और मजबूत दिशानिर्देश तैयार किए जा सकें। ये खबर भी पढ़े…NEET PG में नया सीट चार्ट – हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बदला हुआ फैसला “महिलाओं की इज्जत पर कोई समझौता नहीं”-सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान पीठ की अगुआई कर रहीं जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला पीरियड्स की वजह से भारी काम नहीं कर पा रही है, तो नियोक्ता का कर्तव्य है कि: उसे हल्का काम दिया जाए, या किसी और को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाए।उन्होंने साफ कहा— “पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, कोई जांच का विषय नहीं।” जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि समाज में कुछ लोगों की सोच अब भी महिलाओं के प्रति भेदभाव से भरी है, और एमडीयू की घटना इसी मानसिकता को दिखाती है। ये खबर भी पढ़े…डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर? “देश भर में ऐसी घटनाएं हो रही हैं” SCBA के अध्यक्ष विकाश सिंह ने अदालत को बताया कि हरियाणा ही नहीं, देश के दूसरे राज्यों से भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां महिलाओं से पीरियड्स के बारे में अनैतिक और अपमानजनक तरीके से सवाल या जांच की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें: महिलाओं की निजता का उल्लंघन करती हैं, संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 का सीधा हनन करती हैं और महिलाओं को मानसिक व भावनात्मक रूप से अपमानित करती हैं। इस पर पीठ ने गंभीर टिप्पणी की— “इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” हरियाणा सरकार की रिपोर्ट— हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि:- प्रशासन ने इस मामले में सहायक रजिस्ट्रार समेत दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। ठेके पर रखे गए दो सुपरवाइजर्स को बर्खास्त करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, यदि किसी महिला के साथ जातीय या सामाजिक भेदभाव हुआ है, तो SC/ST (अत्याचार रोकथाम) कानून भी लगाया गया है। अदालत ने इस अपडेट को गंभीरता से लिया और कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। पूरे देश के लिए दिशानिर्देश बनेंगे? सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अदालत सोच रही है कि क्या पूरे देश के लिए: स्पष्ट दिशानिर्देश- और सख्त नियम बनाए जाएं- ताकि कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में कोई भी महिला अपमानजनक जांच या भेदभाव का शिकार न हो। जस्टिस नागरत्ना ने कहा— “यह एक गंभीर मुद्दा है, और इस पर बात करने की जरूरत है।” उन्होंने कर्नाटक में “मंथली पीरियड लीव” नीति के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा:“अगर छुट्टी का प्रावधान बने, तो क्या महिलाओं से यह साबित करने के लिए कहा जाएगा कि वे पीरियड्स में हैं?” यह टिप्पणी अदालत की चिंता को साफ दर्शाती है।अगली सुनवाई अगले सप्ताह—महिलाओं के अधिकारों पर हो सकता है बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा दोनों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड प्रज्ञा बघेल ने दायर की थी। याचिका में कई पुराने मामलों और घटनाओं का उल्लेख भी है, जहां महिलाओं के साथ मासिक धर्म के नाम पर अत्याचार किया गया था। यह मामला आगे चलकर पूरे देश में महिलाओं की निजता की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, सुरक्षा, और सम्मान से जुड़े कानूनों को नए रूप देने का आधार बन सकता है। FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल हाँ, ऐसी जांच महिलाओं की निजता का उल्लंघन है और संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट भी इसी मुद्दे पर दिशानिर्देश बनाने की सोच रहा है। क्योंकि हरियाणा के एमडीयू में महिलाओं की पीरियड्स जांच का मामला सामने आया था। अदालत चाहती है कि देशभर में ऐसी घटनाएं न हों और इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।

Assam Anti Polygamy Bill 2025: बहुविवाह पर सख़्त रोक: असम में बिल को मंजूरी

Assam

असम विधानसभा ने 2025 में Polygamy-Ban Bill पास कर एक बड़ा सामाजिक बदलाव शुरू किया है। इस बिल के बाद अब राज्य में एक से ज्यादा शादी करना पूरी तरह गैरकानूनी माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाना, विवाह में समानता लाना और समाज में न्याय को मजबूत करना है। आसान शब्दों में समझें तो अब असम में कोई भी व्यक्ति पहली शादी होते हुए दूसरी शादी नहीं कर सकता, और अगर वह ऐसा करता है तो इसे अपराध माना जाएगा। इस नए कानून के तहत दोषी को 7 से 10 साल तक की जेल हो सकती है, और साथ ही पीड़ित महिला को मुआवज़ा भी दिया जाएगा। सरकार मानती है कि इस कानून से उन महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें बहुविवाह की वजह से आर्थिक और मानसिक तकलीफ झेलनी पड़ती थी। यह बिल समाज में एक संदेश देता है कि हर महिला को सम्मान, सुरक्षा और बराबरी का अधिकार है, और किसी भी तरह की धोखाधड़ी या छुपाई गई शादी अब कड़ी सजा के दायरे में आएगी। 🛑 असम में क्या हुआ — एक नई शुरुआत Assam Prohibition of Polygamy Bill, 2025 (असम बहुविवाह निषेध विधेयक 2025) को 27 नवंबर 2025 को राज्य विधानसभा में पास कर दिया गया है। इस बिल का मकसद असम में बहुविवाह (polygamy) यानी एक ही व्यक्ति का एक से अधिक विवाह: पूरी तरह रोकना है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने संसद में कहा कि ये कानून हर धर्म, हर समुदाय के लिए है — 🛑 इसका उद्देश्य महिलाओं कीक्या-क्या प्रावधान हैं – यदि कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा है और उसकी पहली शादी वैध है — फिर भी दूसरी शादी करता है — तो यह अपराध होगा। यदि दूसरी शादी करते समय पहले विवाह की जानकारी छिपाई गई — यानी पहली शादी होने का पता नहीं दिया — तो सजा और भी कड़ी: 10 साल तक जेल हो सकती है। 🛑 किन क्षेत्रों / समुदायों पर लागू नहीं होगा इस बिल का दायरा उन लोगों तक नहीं है जो Sixth Schedule (छठी अनुसूचित अनुचर्‍चा) वाले इलाकों में रहते हैं — जैसे Bodoland Territorial Region, इसी तरह, उन लोगों को भी बिल की पाबंदी से अलग रखा गया है जो अनुसूचित जनजाति (ST) से आते हैं। 👥 विवाह कराने वालों और दान-पोषक / अभिभावकों पर भी सजा अगर कोई धर्मगुरु / काजी / पंडित / गांव प्रमुख जानबूझकर या फरेब से ऐसी शादी कराता है — तो उसे जेल ( upto 2 साल) या जुर्माना (कुछ लाख ₹) हो सकता है। माता-पिता, अभिभावक, गांव प्रमुख या कोई भी ऐसा दान-पोषक जिसने पहले विवाह छुपा कर दूसरी शादी कराने में मदद की — वो भी कानून के दायरे में आएँगे। 💵 मुआवजा और सामाजिक सुरक्षा जो महिलाएं इस तरह की गैरकानूनी बहुविवाह की शिकार होंगी — उन्हें मुआवजा (compensation) देने का प्रावधान है। सरकार एक अधिकृत प्राधिकरण बनाएगी जो हर मामले की समीक्षा कर मुआवजा तय करेगा। अपराध साबित होने पर दोषी व्यक्ति चुनाव लड़ने, सरकारी नौकरी लेने या किसी भी सरकारी योजना में लाभ लेने के लिए योग्य नहीं होगा। क्यों लाया गया ये कानून — उद्देश्य और सामाजिक असर बहुविवाह में अक्सर महिलाओं को आत्म-गौरव, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा से वंचित होना पड़ता था; इस बिल का उद्देश्य उन्हें न्याय दिलाना है। राज्य सरकार की मंशा है कि निजी विवाह कानूनों में समान नागरिक अधिकार लागू हों। इस बिल को उन पहले कदमों में से एक माना जा रहा है। हालांकि यह कानून सभी पर लागू नहीं होगा — एसटी समुदाय व छठी अनुसूची क्षेत्र के लोगों को बहुविवाह की अपनी परंपराएं बनाए रखने की आजादी दी संभावित बहसें और चुनौतियाँ कुछ लोग इस बिल को धार्मिक आज़ादी या सांस्कृतिक आज़ादी की सीमाओं में हस्तक्षेप कह सकते हैं — विशेषत: वे समुदाय जो पारंपरिक रूप से बहुविवाह करते रहे हैं। छठी अनुसूची क्षेत्र और एसटी लोगों को छूट देना — कुछ लोगों के लिए ये असमान लग सकता है। ऐसे में “क्यों और किसके लिए” यह छूट होगी, इस पर बहस हो सकती है। मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया — कैसे तय होगा कि कौन पीड़ित महिला है, प्रमाण कैसे होंगे, अधिकारी कितने निष्पक्ष होंगे — इन सवालों के जवाब समय के साथ ही मिलेंगे। अब आगे क्या हो सकता है?राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि अगर फिर से सरकार बनी — तो वे Uniform Civil Code (UCC) लाने की तैयारी कर रहे हैं — और यह बिल, UCC की दिशा में पहला कदम है। लागू कानूनों की निगरानी और सही क्रियान्वयन — जैसे शिकायत, जांच, मुआवजा — यह देखना होगा कि नया कानून समाज में उतनी ही असरदार साबित हो जितना उसकी मंशा है। सामाजिक जागरूकता — केवल क़ानून पर्याप्त नहीं; लोगों में जागरूकता, समझदारी और महिलाओं के अधिकारों का सम्मान बढ़ना चाहिए। FAQs Q1. क्या असम में हर धर्म वाले लोग इस बिल से प्रभावित होंगे?हाँ — बिल धर्म, जात-पंथ, समुदाय देखे बिना लागू होगा। हिन्दू, मुस्लिम, ईसाई या अन्य — सभी पर polygamy रोक है। Q2. अगर कोई पहले विवाह को छुपा कर शादी करता है — सज़ा कितनी होगी?ऐसा करने पर 10 साल तक की जेल + जुर्माना हो सकती है। Q3. क्या एसटी समुदाय या छठी अनुसूची क्षेत्र के लोग इस कानून के दायरे में आएँगे?नहीं। एसटी समुदाय और छठी अनुसूची वाले इलाकों के लोग — इस बिल की पाबंदी से फिलहाल बाहर रखे गए हैं। Q4. क्या धर्मगुरु या पंडित अगर शादी कराएंगे तो उन्हें भी सज़ा होगी?हाँ। अगर वो जानबूझ कर या धोखे से ऐसी शादी कराते हैं — उन्हें 2 साल की जेल या जुर्माने का प्रावधान है। Q5. क्या महिलाएं मुआवजा भी पा सकती हैं?हाँ। इस बिल में ‘पीड़ित महिला’ को मुआवजा देने की व्यवस्था है — जिस पर सरकार एक प्राधिकरण बनाएगी।

UIDAI: 2 करोड़ से अधिक आधार नंबर बंद, पोर्टल पर दी गई यह सुविधा भी

UIDAI

UIDAI Over 2 crore Aadhaar numbers blocked facility on portal नई दिल्ली। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार डेटाबेस की निरंतर सटीकता बनाए रखने के लिए राष्ट्रव्यापी सफाई अभियान के तहत मृत व्यक्तियों के 2 करोड़ से अधिक आधार नंबरों को निष्क्रिय कर दिया है। व्यक्तियों का डेटा यूआईडीएआई ने भारत के महापंजीयक (आरजीआई), राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम आदि से मृतक व्यक्तियों का डेटा प्राप्त किया है। वह मृतक व्यक्तियों का डेटा प्राप्त करने के लिए वित्तीय संस्थानों और अन्य संस्थाओं के साथ सहयोग करने पर भी विचार कर रहा है। पुनः आवंटित नहीं किसी भी व्यक्ति को आधार संख्या कभी भी पुनः आवंटित नहीं की जाती। किसी व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति में संभावित पहचान धोखाधड़ी या कल्याणकारी लाभ प्राप्त करने के लिए आधार संख्या के अनधिकृत उपयोग को रोकने के लिए उसका आधार नंबर निष्क्रिय करना आवश्यक है। पंजीकरण प्रणाली यूआईडीएआई ने इस वर्ष की शुरुआत में एक सुविधा भी शुरू की है – परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु की सूचना देना – जो वर्तमान में नागरिक पंजीकरण प्रणाली का उपयोग करने वाले 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पंजीकृत मृत्यु के लिए मायआधार पोर्टल पर उपलब्ध है। शेष राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए पोर्टल के साथ एकीकरण की प्रक्रिया अभी चल रही है। आगे की कार्रवाई परिवार के सदस्य को स्वयं को प्रमाणित करने के बाद पोर्टल पर मृतक व्यक्ति का आधार नंबर और मृत्यु पंजीकरण संख्या के साथ-साथ अन्य जनसांख्यिकीय विवरण भी प्रदान करना आवश्यक है। परिवार के सदस्य द्वारा प्रस्तुत जानकारी के सत्यापन की उचित प्रक्रिया के बाद मृतक व्यक्ति के आधार नंबर को निष्क्रिय करने या अन्यथा आगे की कार्रवाई की जाती है। यूआईडीएआई आधार संख्या धारकों को मृत्यु पंजीकरण प्राधिकारियों से मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद मायआधार पोर्टल पर अपने परिवार के सदस्यों की मृत्यु की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

IFFI Award: मूक फिल्म ‘मुरलीवाला’ की विशेष स्क्रीनिंग, जीवंत संगीत का अनुभव

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IFFI Awards Special screening of silent film Murliwala गोवा। आईएफएफआई के चौथे दिन सिने प्रेमियों के लिए समय-यात्रा अदभूत अनुभव रहा, जब बहाल की गई क्लासिक फिल्म  ‘मुरलीवाला’  का विशेष प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) और राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (एनएफएआई) ने राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (एनएफएचएम) के तहत 18 क्लासिक फिल्मों को नया जीवन दिया है और इन्हें इस वर्ष के आईएफएफआई के लिए इंडियन पैनोरमा विशेष पैकेज के रूप में संजोया है। इस पैकेज में हिंदी, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला और मराठी की क्लासिक कृतियों को शामिल किया गया है, जो विविध  कलात्मक अभिव्यक्तियों को दर्शाती हैं। इन्हें सख्त अभिलेखीय मानकों के अनुसार  संरक्षित किया गया है और प्रत्येक फिल्म की मौलिक रचनात्मक दृष्टि को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा गया है। मुक युग का पुनर्सृजन एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदुम ने इस स्क्रीनिंग के उद्देश्य के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ” विचार यह है कि आज की पीढ़ी के लिए मूक फिल्मों के अनुभव को पुनर्जीवित किया जाए, जहां संगीतकार अग्रिम पंक्ति में बैठकर दर्शकों के लिए लाइव संगीत प्रस्तुत करते थे। और प्रतिभाशाली राहुल जी के नेतृत्व में  मुझे यकीन है कि यह क्षण को उसी भावना और भव्यता के साथ जीवंत हो उठेगा जिसका यह हकदार है।” संगीतकार राहुल रानाडे ने कहा, “98 साल पहले बनी एक फिल्म का संगीत फिर से तैयार करना और उसका लाइव प्रदर्शन करना मेरे और मेरी पूरी टीम के लिए एक बड़े सम्मान और चुनौती की बात थी। आप बाबूराव जी द्वारा 1927 में बनाई गई फिल्म और उनके द्वारा रचे गए विशेष प्रभाव का अनुभव करने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि मैं और मेरी टीम इसके साथ न्याय कर पाएंगे।” गौरतलब है कि दिवंगत फिल्म निर्माता और कलाकार बाबूराव पेंटर द्वारा बनाई गई “मुरलीवाला” (1927),  जो भारत की बहुत कम बची हुई मूक फिल्मों में से एक है और एनएफएचएम की  सबसे दुर्लभ खजानो में से एक है। यह प्रदर्शन 1920 के दशक के फिल्म प्रस्तुती अनुभवों को पुनः जीवंत करता है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस स्क्रीनिंग में बाबूराव पेंटर की दोनों बेटियां भी शामिल हुईं। एक औपचारिक उत्सव वर्ष इस वर्ष का चयन (क्यूरेशन) गहरा ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह वी. शांताराम की 125 वर्षों की विरासत का सम्मान करता है और साथ ही गुरुदत्त, राज खोसला, ऋत्विक घटक, भूपेन हज़ारिका, पी. भानुमति, सलिल चौधरी और के. वैकुंठ की पथप्रदर्शक प्रतिभाओं को शताब्दी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। यह महोत्सव एनएफडीसी के 50 वर्षों का भी जश्न मना रहा है, जो आधुनिक भारतीय सिनेमा के परिदृश्य को आकार देने में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका को मान्यता देता है। श्याम बेनेगल की  ‘सुसमन’ को दी गई विशेष श्रद्धांजलि  भारतीय कहानी कहने की कला पर इस दूरदर्शी फ़िल्म निर्माता के  अमिट प्रभाव को रेखांकित करती है। राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन नवंबर 2016 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया  राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन भारत के सबसे महत्वकांक्षी  और महत्वपूर्ण उपक्रमों में से एक है। इसका उद्देश्य भारत की सिनेमाई विरासत की रक्षा करना है— जिसमें कैमरा नेगेटिव और रिलीज़ प्रिंट से लेकर दुर्लभ अभिलेखीय खज़ानों तक, जो  अधिकार-धारकों, संग्रहकर्ताओं और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से प्राप्त किए गए है, उनका संरक्षण, संवर्धन , डिजिटलीकरण और पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना शामिल हैं। आईएफएफआई 2025 के लिए पुनर्स्थापित भारतीय फिल्में इस सावधानीपूर्वक प्रयास का प्रमाण हैं, जहां प्रत्येक फ्रेम को बड़ी मेहनत से पुनर्स्थापित किया गया है और सटीकता के साथ कलर-ग्रेड किया गया है, अक्सर फिल्म निर्माताओं, छायाकारों या उनके करीबी सहयोगियों के मार्गदर्शन में। महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण ऋत्विक घटक द्वारा पुनर्स्थापित ‘सुबर्णरेखा’ है, जिसे एनएफडीसी-एनएफएआई संग्रह में 35 मिमी मास्टर पॉजिटिव से  नया जीवन प्रदान किया गया है, जिसमें अंतिम कलर ग्रेडिंग छायाकार अविक मुखोपाध्याय की देखरेख में की गई है। मुजफ्फर अली की ‘उमराव जान’, जिसे  मूल निगेटिव के अपरिवर्तनीय रूप से खराब होने के बाद एक  संरक्षित 35 मिमी रिलीज प्रिंट से पुनर्स्थापित किया गया है, की ग्रेडिंग प्रक्रिया में अली का व्यक्तिगत प्रयावेक्षण शामिल रहा है,  यह सुनिश्चित करते हुए कि फिल्म की विशिष्ट रंगीन सुंदरता को ईमानदारी से बरकरार रखा जाए। इन पुनर्स्थापनों से भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकारों की विरासत को सम्मान मिलता है और यह सुनिश्चित होता है कि नई पीढ़ीया इन कृतियों में निहित  सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और कलात्मक आख्यानों से जुड़ी रहें। भारतीय पैनोरमा विशेष पैकेज के लिए चयनित पुनर्स्थापित फिल्मों की सूची अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें: आईएफएफआई वेबसाइट: https://www.iffigoa.org/ पीआईबी की आईएफएफआई माइक्रोसाइट: https://www.pib.gov.in/iffi/56/ पीआईबी आईएफएफआईवुड प्रसारण चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VaEiBaML2AU6gnzWOm3F X पोस्ट लिंक: https://x.com/PIB_Panaji/status/1991438887512850647?s=20 X हैंडल: @IFFIGoa, @PIB_India, @PIB_Panaji