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‘आई लव मुहम्मद’ के नारे से भड़की भीड़, बेलगावी में उर्स जुलूस पर पथराव

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बेलगावी  कर्नाटक में बेलगावी के खड़क गली में स्थित महबूब सुब्हानी दरगाह के उर्स जुलूस के दौरान बवाल हो गया। नारों को लेकर हुए विवाद के बाद पथराव हुआ, जिससे इलाके में तनाव फैल गया है। पुलिस सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार रात जुलूस में शामिल कुछ युवकों ने 'आई लव मुहम्मद' का नारा लगाया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। फिलहाल शांति बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। खड़क गली से आमतौर पर जुलूस नहीं गुजरता। वहां के निवासियों ने नारे पर आपत्ति जताई और सवाल किया कि जुलूस का मार्ग क्यों बदला गया। नारे पर आपत्ति जताए जाने के बाद तनाव बढ़ गया और पथराव की खबरें आने लगीं। पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति को काबू किया। सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमने तुरंत हस्तक्षेप किया और मामला गंभीर होने से पहले ही समूहों को तितर-बितर कर दिया। स्थिति अब नियंत्रण में है।' 'आई लव मोहम्मद' को लेकर गहराता विवाद 'आई लव मोहम्मद' को लेकर विवाद पिछले कुछ दिनों से जारी है। यूपी में मेरठ के मवाना कस्बे में लगे एक पोस्टर को लेकर हंगामा मच गया। इसके बाद पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, कस्बे के मुख्य चौराहों पर शुक्रवार देर रात पोस्टर लगाया गया था, जिस पर अंग्रेजी में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा हुआ था। शनिवार सुबह स्थानीय लोगों ने इसे देख आपत्ति जताई और विरोध दर्ज कराया। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासन और पुलिस सक्रिय हुई। मवाना की थाना प्रभारी पूनम ने बताया कि पोस्टर लगाने के आरोप में चौकी प्रभारी मनोज शर्मा की तहरीर पर 5 लोगों इदरीस, तस्लीम, रिहान, गुलफाम और हारून के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

गाजा विवाद: ट्रंप की शर्तों से इनकार, हमास-ट्रंप टकराव से शांति अधर में

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गाजा  लगभग दो साल से जारी गाजा युद्ध में एक अहम मोड़ आया है। इस्लामी संगठन हमास ने शुक्रवार को संकेत दिए कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना के कुछ प्रमुख तत्वों को स्वीकार करने को तैयार है। इनमें सभी शेष इजरायली बंधकों की रिहाई और गाजा प्रशासन को एक टेक्नोक्रेटिक फिलिस्तीनी निकाय को सौंपना शामिल है। हालांकि, इन दोनों प्रस्तावों के साथ शर्तें जुड़ी हुई हैं और संगठन ने पूरी योजना को स्वीकार नहीं किया है। यह बयान उस समय आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार तक की समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी थी कि अगर हमास ने समझौते को ठुकराया तो ऐसा नरक टूट पड़ेगा जैसा दुनिया ने कभी नहीं देखा है। ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर यह समझौता नहीं हुआ तो हमास पर अभूतपूर्व तबाही टूट पड़ेगी। किसी भी सूरत में मध्य पूर्व में शांति होगी।” हमास ने क्या स्वीकार किया, क्या नहीं संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, कतर और मिस्र जैसे प्रमुख मध्यस्थों ने हमास की इस आंशिक स्वीकृति का स्वागत किया है, लेकिन योजना के कई अहम मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। जैसे कि हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण, विदेशी निगरानी में संक्रमणकालीन प्रशासन और बंधकों की रिहाई की समय-सीमा। निरस्त्रीकरण पर चुप्पी ट्रंप की योजना का सबसे विवादित पहलू है कि हमास अपने सभी हथियार पूरी तरह जमा करे। योजना के अनुसार, गाजा का “स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में निरस्त्रीकरण” होना चाहिए। लेकिन हमास की आधिकारिक प्रतिक्रिया में इस पर कोई उल्लेख नहीं किया गया। हमास के वरिष्ठ नेता मूसा अबू मरजूक ने अल जजीरा को बताया, “हम हथियार किसी भविष्य के फिलिस्तीनी निकाय को सौंपने पर विचार कर सकते हैं, जो गाजा का संचालन करे। लेकिन यह फैसला फिलिस्तीनियों के बीच आम सहमति से होगा, बाहर से थोपा नहीं जाएगा।” राजनयिकों का कहना है कि यह चुप्पी रणनीतिक है। लिखित रूप में प्रतिबद्धता से पहले हमास गारंटी चाहता है। गाजा की सत्ता कौन संभालेगा? हमास ने कहा है कि वह गाजा का प्रशासन एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी निकाय को सौंपने को तैयार है, बशर्ते वह राष्ट्रीय सहमति से बने और अरब व इस्लामी देशों का समर्थन प्राप्त हो। लेकिन ट्रंप की योजना के मुताबिक, भविष्य में गाजा पर हमास का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं रहेगा। योजना में एक “बोर्ड ऑफ पीस” बनाने का प्रस्ताव है, जिसकी सह-अध्यक्षता ट्रंप और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर करेंगे। हमास ने इस विदेशी दखल को पूरी तरह अस्वीकार किया है। मरजूक ने कहा, “हम कभी भी किसी गैर-फिलिस्तीनी को फिलिस्तीनियों पर नियंत्रण की अनुमति नहीं देंगे। टोनी ब्लेयर की भूमिका विशेष रूप से अस्वीकार्य है।” बंधकों की रिहाई पर मतभेद ट्रंप की योजना में कहा गया है कि हमास को सभी 48 बंधकों (जीवित या मृत) को 72 घंटे में रिहा करना होगा। हमास ने बंधक विनिमय की अवधारणा तो स्वीकार की है, लेकिन समयसीमा पर आपत्ति जताई है। मरजूक ने कहा कि कुछ शवों को ढूंढने में कई हफ्ते लग सकते हैं, इसलिए 72 घंटे की समयसीमा अव्यावहारिक है। ट्रंप की योजना में गाजा में एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा बल की भी बात है, जो अस्थायी रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करे। हमास ने इस बिंदु पर कोई स्पष्ट रुख नहीं दिया। न स्वीकार किया, न अस्वीकार। हमास क्या पुनर्विचार चाहता है हमास का कहना है कि गाजा के भविष्य और फिलिस्तीनी अधिकारों पर कोई भी निर्णय बाहरी रूप से नहीं थोपा जा सकता है। संगठन चाहता है कि बातचीत में सभी फिलिस्तीनी गुट शामिल हों और समझौता राष्ट्रीय सहमति पर आधारित हो। हमास की इस आंशिक स्वीकृति के बाद अब ध्यान इस बात पर है कि क्या यह समझौता जमीन पर अमल तक पहुंच पाएगा। इजरायल ने कहा है कि वह पहले चरण में बंधकों की रिहाई के लिए तैयार है, लेकिन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया कि कोई भी समझौता इजरायल की सुरक्षा सीमाओं से समझौता नहीं करेगा। ट्रंप ने स्वर नरम करते हुए कहा कि वे स्थायी शांति के लिए तैयार हैं और इजरायल से आग्रह किया कि बंधकों की सुरक्षित रिहाई तक बमबारी रोकी जाए।  

कफ सिरप कांड ने मचाई सनसनी: 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु में बिक्री पर रोक, राजस्थान में बड़ा एक्शन

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जयपुर  कफ सिरप विवाद ने पूरे देश को हिला दिया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने विवादित सिरप 'कोल्ड्रिफ' की बिक्री पर रोक लगा दी है. वहीं, राजस्थान सरकार ने राज्य ड्रग कंट्रोलर को सस्पेंड कर दिया और संबंधित कंपनी की दवाओं का वितरण रोक दिया है. केंद्र सरकार ने भी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न लिखी जाएं. राजस्थान में बड़ा एक्शन… राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया और राज्य के ड्रग कंट्रोलर को निलंबित कर दिया है. साथ ही जयपुर की Kaysons Pharma कंपनी की दवाओं के वितरण पर भी रोक लगा दी गई है. इससे पहले विवादित सिरप बच्चों को देने के आरोप में डॉक्टर पलक कुलवाल और फार्मासिस्ट पप्पू कुमार सोनी को भी निलंबित किया गया था. तमिलनाडु में 'कोल्ड्रिफ' सिरप पर बैन तमिलनाडु सरकार ने 1 अक्टूबर से 'कोल्ड्रिफ' कफ सिरप की बिक्री और स्टॉकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह फैसला मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई बच्चों की मौतों के बाद लिया गया. स्वास्थ्य विभाग ने कंपनी के कांचीपुरम स्थित प्लांट का निरीक्षण कर सैंपल लिए हैं. इन्हें सरकारी लैब में टेस्ट के लिए भेजा गया है ताकि 'डाईएथिलीन ग्लाइकोल' जैसे खतरनाक केमिकल की मौजूदगी की जांच हो सके. '2 साल से कम बच्चों को ना दें कफ सिरप' केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवा ना लिखी जाए. DGHS की इस गाइडलाइन का मकसद संदिग्ध सिरप से बच्चों की जान बचाना है. राजस्थान में घर-घर अभियान राजस्थान सरकार ने शनिवार से पूरे प्रदेश में घर-घर सर्वे अभियान शुरू करने का फैसला किया है. आशा, एएनएम और सीएचओ आमजन को जागरूक करेंगे कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के खांसी-जुकाम की दवा ना लें. बच्चों की पहुंच से दवाएं दूर रखने और दुष्प्रभाव पर तुरंत कदम उठाने की हिदायत दी जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में बिना प्रोटोकॉल दवा लिखने या वितरित करने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. अमित यादव ने कहा कि 4 साल से कम उम्र के बच्चों को डेक्सट्रोमोरफन युक्त दवा नहीं दी जाए. आमजन को समझाया जाए कि वे घर में रखी दवाओं का बिना चिकित्सकीय परामर्श के सेवन नहीं करें. दवा के सेवन के बाद किसी भी तरह का दुष्प्रभाव अथवा सांस लेने में कठिनाई, सुस्ती, बेहोशी, उल्टी, दौरे जैसे लक्षण नजर आएं तो नजदीकी अस्पताल या हेल्पलाइन नंबर 104/108 या राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम नंबर 0141-2225624 पर संपर्क किया जा सकता है. राजस्थान का सिरप सुरक्षित इस बीच राजस्थान सरकार ने लैब टेस्ट कराए हैं जिनमें यह पाया गया है कि विवादित सिरप के सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं. स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह ने कहा कि दवा में कोई गड़बड़ी नहीं मिली, हालांकि जांच जारी रहेगी. महाराष्ट्र में कोडीन सिरप और ड्रग्स नष्ट ठाणे, पालघर और एमबीवीवी पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर 26,935 लीटर कोडीन-आधारित कफ सिरप समेत 147 करोड़ रुपये की नशीली दवाओं और ड्रग्स को नष्ट किया है. यह कार्रवाई महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी से की गई.

शहीद की याद में सैनिकों ने निभाया कर्तव्य, फूलों से सजी छतरी लिए दुल्हन की बारात हिमाचल प्रदेश में

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सिरमौर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर का गिरी इलाका… यहां के भोज के भरली गांव में बीते दिनों एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. यहां विवाह समारोह में विदाई थी- उस बहन की, जिसका फौजी भाई अब इस दुनिया में नहीं है. गांव की यह शादी अपने अद्भुत और भावनात्मक थी. विवाह की रस्में पूरी होने के बाद जैसे ही दुल्हन की विदाई का वक्त आया, तो घर में भावुक कर देने वाला माहौल बन गया. हर बहन चाहती है कि उसके भाई विदाई के समय उसके साथ खड़े हों, उसके आंसुओं को पोंछें और उसे ससुराल तक हंसी-खुशी से विदा करें. इस दुल्हन के लिए यह पल भारी था, क्योंकि उसका एक फौजी भाई अब उसके साथ नहीं था. यह शहीद आशीष कुमार की बहन है. आशीष ने अगस्त 2024 में अरुणाचल प्रदेश में ऑपरेशन अलर्ट 2024 के दौरान देश की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी. आशीष का बलिदान न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे इलाके के लिए गर्व का विषय है. लेकिन बहन की विदाई के मौके पर भाई की कमी का एहसास बेहद गहरा था. जब विदाई का वक्त आया तो आशीष के साथी सैनिक और इलाके के पूर्व सैनिक सब मिलकर इस विवाह में शामिल हुए. उन्होंने न सिर्फ विवाह में शिरकत की, बल्कि बहन की विदाई भी उसी गरिमा और सम्मान के साथ की, जैसे कोई भाई करता है. यह पल इतना भावुक कर देने वाला था कि वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं. शहीद आशीष कुमार के दो भाई हैं, जो खेती-बाड़ी करते हैं. आशीष ने आर्मी ज्वाइन की थी. बहन की शादी के मौके पर जब आशीष की कमी महसूस हुई, तो उनके साथियों ने यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई. विदाई के समय सेना के जवान दुल्हन वाले पारंपरिक लाल रंग के शादी के जोड़े में सजी बहन के ऊपर फूलों और माला से सजा हुआ छत्र (फूलों की छतरी) लेकर चल रहे थे, ठीक वैसे जैसे कोई भाई करता है.  देश की वर्दी पहनने वाले कई भाई उसके सिर पर छांव की तरह साथ चल रहे थे. लोगों ने कहा कि यह साबित करता है कि फौज सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक परिवार है. जब एक सिपाही शहीद होता है, तो उसके पीछे पूरा फौजी परिवार उसके घरवालों के साथ खड़ा हो जाता है. इस मौके पर पूरा गांव भावुक हो उठा.

वेस्टइंडीज ढेर, जडेजा की धाकड़ परफॉर्मेंस से भारत ने दर्ज की बड़ी जीत

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अहमदाबाद  शुभमन गिल की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने दो मैच की टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में वेस्टइंडीज को पारी और 140 रनों के बड़े अंतर से धूल चटाई। इस जीत के साथ टीम इंडिया ने 1-0 की बढ़त बना ली है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए इस मैच में टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम को भारत ने दो सेशन के अंदर मात्र 162 पर ढेर कर दिया।  मोहम्मद सिराज ने इस दौरान 4 तो जसप्रीत बुमराह ने तीन विकेट चटकाई। इसके बाद बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया ने 5 विकेट के नुकसान पर 448 रन बोर्ड पर लगाकर पारी घोषित कर दी और 286 रनों की बढ़त हासिल की। भारत के लिए केएल राहुल, ध्रुव जुरेल और रवींद्र जडेजा ने शतक जड़े। जडेजा अंत तक नाबाद रहे, वहीं कप्तान शुभमन गिल ने अर्धशतकीय पारी खेली। तीसरे दिन का खेल शुरू होने से पहले भारत ने पारी घोषित कर दी थी जिससे उनकी मंशा साफ हो गई थी कि वह मैच को चौथे दिन तक नहीं ले जाना चाहते। गेंदबाजों ने ऐसा करके भी दिखाया। एक बार फिर वेस्टइंडीज को भारत ने दो सेशन के अंदर 146 रनों पर समेट मैच को पारी और 140 रनों से अपने नाम किया। जडेजा ने 4 तो सिराज को तीन सफलताएं मिली। कुलदीप यादव को मिली आखिरी विकेट, भारत जीता कुलदीप यादव ने वेस्टइंडीज का आखिरी विकेट गिराकर भारत की झोली में जीत डाली। रवींद्र जडेजा पंजे से चूके, हालांकि इस मैच में उनका ऑलराउंड परफॉर्मेंस काफी अच्छा रहा। कुलदीप यादव ने 2 तो सिराज ने तीन विकेट निकाले। भारत ने वेस्टइंडीज को 146 रनों पर आउट कर मैच को पारी और 140 रनों से अपने नाम किया। सील्स का तूफान 11वें नंबर पर बैटिंग करने आए सील्स निडर होकर बैटिंग कर रहे हैं। वह 9 गेंदों पर 19 के निजी स्कोर पर पहुंच गए हैं। भारत जीत से एक विकेट दूर है।

अमित शाह के भरोसेमंद जगदीश विश्वकर्मा बने गुजरात BJP के नए अध्यक्ष

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नई दिल्ली गुजरात BJP के नए अध्यक्ष के तौर पर गुजरात के मंत्री और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के नेता जगदीश विश्वकर्मा के नाम का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। उन्हें निर्विरोध इस पद के लिए चुना गया है। शुक्रवार को इस पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने वाले वह एकमात्र उम्मीदवार रहे। विश्वकर्मा को प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने की आधिकारिक घोषणा शनिवार को गांधीनगर स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय में हुई। इस दौरान राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने कहा, मैं उनके प्रति अपार सम्मान रखता हूं और मेरा मानना ​​है कि वह एक जमीनी कार्यकर्ता हैं जो राज्य की जनता के लिए काम करते रहेंगे। उनकी कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं है और आज वह गुजरात भाजपा अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। ऐसा केवल भाजपा में ही संभव है। 52 साल के जगदीश विश्वकर्मा अहमदाबाद की निकोल सीट से तीन बार के विधायक हैं। वह वर्तमान में सहकारिता, नमक उद्योग, एमएसएमई, कुटीर, खादी और ग्रामीण उद्योग राज्य मंत्री हैं। विश्वकर्मा इससे पहले भाजपा की अहमदाबाद नगर इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी भी माने जाते हैं। विश्वकर्मा केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और नवसारी से लोकसभा सदस्य सी आर पाटिल का स्थान लेंगे, जिनका तीन साल का कार्यकाल जुलाई 2023 में समाप्त हो गया था। कौन हैं जगदीश विश्वकर्मा जगदीश विश्वकर्मा का राजनीतिक सफर बूथ लेवल कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था। इसके बाद जिला स्तर पर भी कई जिम्मेदारियां निभाने के बाद वह विधायक बनें। वह 2012 से लगातार निकोल विधानसभा सीट से 3 बार विधायक चुने गए। वह ओबीसी वर्ग से आते हैं और इस समुदाय पर उनकी अच्छी पकड़ है।  

गहने और नकदी लूटने के मामले में सिंगापुर की अदालत ने दो भारतीयों को सुनाई सजा

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सिंगापुर  सिंगापुर में दो भारतीयों को 5 साल और एक महीने की जेल की सजा सुनाई गई है। साथ ही, दोनों को 12 कोड़े मारने की भी सजा दी गई। इन पर होटल के कमरों में दो सेक्स वर्कर्स के साथ लूटपाट और मारपीट करने का आरोप था। 23 वर्षीय अरोकियासामी डायसन और 27 वर्षीय राजेंद्रन माइलारासन ने पीड़ितों के साथ लूटपाट की और उन्हें चोट भी पहुंचाई। अदालत को बताया गया कि अरोकियासामी और राजेंद्रन 24 अप्रैल को भारत से सिंगापुर छुट्टियां मनाने आए थे। दो दिन बाद लिटिल इंडिया इलाके में टहलते समय एक अज्ञात व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और पूछा कि क्या वे वेश्याओं को किराए पर लेना चाहेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, उस व्यक्ति ने फिर उन्हें दो महिलाओं की संपर्क करवाया और चला गया। अरोकियासामी ने राजेंद्रन से कहा कि उन्हें पैसे की जरूरत है। उसने सुझाव दिया कि वे उन महिलाओं से संपर्क करें और होटल के कमरे में उनसे लूटपाट कर लेंगे। राजेंद्रन इस पर सहमत हो गया। उन्होंने उसी दिन शाम 6 बजे के आसपास होटल के कमरे में पहली महिला से मिलने की व्यवस्था की। कमरे में जाने के बाद उन्होंने पीड़िता के हाथ-पैर कपड़ों से बांध दिए और उसे थप्पड़ मारा। उन्होंने उसके गहने, 2 हजार सिंगापुर डॉलर नकद, उसका पासपोर्ट और बैंक कार्ड लूट लिए। 800 सिंगापुर डॉलर की लूटपाट रात लगभग 11 बजे उन्होंने दूसरी महिला के साथ एक अन्य होटल में मुलाकात की। जब वह आई तो उन्होंने उसकी बाहों को कसकर पकड़ लिया। राजेंद्रन ने उसके मुंह को ढक दिया ताकि वह चिल्ला न सके। उन्होंने 800 सिंगापुर डॉलर नकद, दो मोबाइल फोन और उसका पासपोर्ट चुरा लिया। दोनों ने उसे धमकी दी कि वह तब तक कमरे से बाहर न निकले जब तक वे वापस न आएं। अरोकियासामी और राजेंद्रन के कांड का खुलासा तब हुआ जब दूसरी पीड़िता ने अगले दिन एक अन्य व्यक्ति से बात की। इसके बाद पुलिस को बुलाया गया और फिर आगे की कार्रवाई हुई।

गाजा में शांति की उम्मीद: हमास ने ट्रंप के प्लान को मंजूरी दी, बंधकों को छोड़ा जाएगा

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 गाजा  हमास ने ट्रंप के गाजा पीस प्लान को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है और लगभग सभी बड़ी शर्तों को मानने के लिए हामी भरी है. ​इस फिलिस्तीनी मिलिशिया संगठन ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आगे बढ़ाए गए शांति योजना के तहत सभी इजरायली बंधकों (चाहे जीवित हों या मृत) को रिहा करने के लिए तैयार है. हमास का यह फैसला गाजा में संघर्ष समाप्त करने में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा. हमास ने एक बयान में कहा कि वह इस मामले (ट्रंप के गाजा प्लान) की विस्तृत चर्चा के लिए मध्यस्थों के माध्यम से तत्काल वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार है. यदि यह कदम साकार होता है, तो यह अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमले के दौरान अपहृत बंधकों की वापसी के लिए महीनों की कोशिशों में सबसे महत्वपूर्ण सफलता होगी. हमास ने यह भी दोहराया कि वह गाजा का प्रशासन 'स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की फिलिस्तीनी संस्था' को सौंपने के लिए तैयार है. हमास ने डोनाल्ड ट्रंप का जताया आभार बता दें कि हमास ही अब तक गाजा का प्रशासन चलाता था. इस समूह ने गाजा संघर्ष समाप्त कराने के प्रयासों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका के लिए उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया. साथ ही अरब, इस्लामी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों का आभार जताया. इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास से रविवार शाम 6 बजे तक इजरायल के साथ शांति समझौते पर पहुंचने का अल्टीमेटम था, वरना गाजा में कहर टूटने की चेतावनी दी थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिया था अल्टीमेटम ट्रंप ने कहा था कि हमास को हमारे गाजा प्लान को स्वीकार करने, इजरायली बंधकों को रिहा करने और शत्रुताओं समाप्त करने का एक आखिरी मौका दिया जा रहा है. अगर वह इस पर सहमति नहीं जताता है तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. उन्होंने कहा था कि गाजा में किसी न किसी तरह शांति जरूर स्थापित होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो वर्ष से चल रहे गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए इजरायल और हमास दोनों को शांति समझौते पर सहमत करने के लिए प्रयासरत हैं. ट्रंप के 20 सूत्री गाजा प्लान में क्या-क्या है? उन्होंने इसके लिए एक 20 सूत्री प्रस्ताव का खाका तैयार किया है, जो न केवल युद्ध को तत्काल रोकने का आह्वान करता है बल्कि गाजा में शासन के लिए एक समाधान भी प्रस्तुत करता है. व्हाइट हाउस ने संघर्ष समाप्त करने और क्षेत्र के भविष्य के प्रशासन को आकार देने के लिए ट्रंप के गाजा प्लान को एक रोडमैप बताया. ट्रंप के गाजा पीस प्लान (गाजा शांति योजना) के अनुसार, हमास और इजरायल के बीच शांति समझौते के 72 घंटों के भीतर हमास को सभी जीवित और मृत इजरायली बंधकों को रिहा करना होगा, बदले में इजरायल सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदियों को अपनी जेलों से रिहा करेगा. अब गाजा पर नहीं होगा हमास का नियंत्रण इस प्लान के मुताबिक गाजा पर हमास का नियंत्रण खत्म होगा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में एक स्वतंत्र सरकार यहां का प्रशासन चलाएगी. हमास की ओर से इस पीस प्लान पर सहमति जताने के तुरंत बाद गाजा में पूर्ण सहायता भेजी जाएगी. ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि हमास गाजा प्लान को अस्वीकार करता है, तो उसे पूरी तरह खत्म करने का काम पूरा करने के लिए इजरायल को अमेरिका का पूर्ण समर्थन मिलेगा. हमास का ट्रंप के गाजा प्लान पर सहमति जताना, मध्य पूर्व में शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.

गाजा विवाद में शांति का पक्षधर भारत, पीएम मोदी ने ट्रंप के पीस प्लान का समर्थन किया

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नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप के पीस प्लान की घोषणा के बाद गाजा में शांति प्रयासों पर बड़ी प्रगति के संकेत मिल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप की पहल की सराहना करते हुए कहा कि बंधकों की रिहाई के संकेत एक महत्वपूर्ण कदम है. पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा, 'हम राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व का स्वागत करते हैं क्योंकि गाजा में शांति प्रयास निर्णायक प्रगति की ओर बढ़ रहे हैं.' सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, 'बंधकों की रिहाई के संकेत एक बड़ा कदम हैं. भारत टिकाऊ और न्यायपूर्ण शांति के सभी प्रयासों का मजबूती से समर्थन करता रहेगा.' कई अन्य वैश्विक नेता भी ट्रंप की इस पहल की सराहना कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया ने भी किया समर्थन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी ट्रंप की योजना का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रपति ट्रंप की योजना में हुई प्रगति का स्वागत करता है. हमास को तुरंत हथियार डालकर शेष सभी बंधकों को रिहा करना चाहिए. ऑस्ट्रेलिया अपने साझेदारों के साथ युद्ध खत्म करने और न्यायपूर्ण व टिकाऊ समाधान की दिशा में प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा.' ट्रंप का 'पीस प्लान' शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया कि 'हमास स्थायी शांति के लिए तैयार है.' उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से इजरायल से गाजा पर हमले तुरंत रोकने का आह्वान किया. हमास ने योजना के कुछ हिस्सों का स्वागत किया है, लेकिन कुछ प्रावधानों पर असहमति जताते हुए अतिरिक्त बातचीत की मांग रखी.  संगठन ने कहा है कि वह सभी 48 शेष बंधकों को रिहा करने के लिए तैयार है. योजना के मुताबिक, स्थायी युद्धविराम लागू होने के 72 घंटे के भीतर बंधकों की रिहाई होगी. इसके बदले में 2,000 से अधिक फिलिस्तीनी सुरक्षा बंदियों और मारे गए गाजावासियों के शवों को सौंपा जाएगा, साथ ही इजरायल गाजा से पहले चरण में वापसी करेगा. इजरायल ने क्या कहा? इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने भी इस योजना पर प्रतिक्रिया दी है. शनिवार देर रात जारी एक बयान में कहा गया, 'इजरायल ट्रंप की योजना के पहले चरण के तत्काल कार्यान्वयन के लिए तैयार है, जिसके तहत सभी बंधकों की रिहाई शामिल है.'

H-1B विवाद फिर अदालत में, ट्रंप के फैसले पर आपत्ति, $100,000 फीस बनी विवाद की जड़

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वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच-1बी वीजा फीस को 100,000 डॉलर करने के फैसले को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है. शुक्रवार को यूनियनों, नियोक्ताओं और धार्मिक संगठनों के एक गठबंधन ने सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत में याचिका दाखिल कर इस आदेश को रोकने की मांग की. यह मुकदमा ट्रंप के उस ऐलान को पहली बार अदालत में चुनौती देता है जिसे उन्होंने दो हफ्ते पहले जारी किया था. इसमें कहा गया था कि अमेरिका में आने वाले नए एच-1बी वीजा धारकों को तभी प्रवेश मिलेगा जब उनके नियोक्ता अतिरिक्त 100,000 डॉलर का शुल्क जमा करें. हालांकि यह आदेश उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिनके पास पहले से वीजा है या जिन्होंने 21 सितंबर से पहले आवेदन कर दिया था. याचिकाकर्ताओं में यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स यूनियन, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स, एक नर्स भर्ती एजेंसी और कई धार्मिक संगठन शामिल हैं. उन्होंने दलील दी कि ट्रंप को कानून द्वारा बनाए गए वीजा कार्यक्रम में इस तरह से बदलाव करने या नए शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है. अमेरिकी संविधान के मुताबिक कर या शुल्क लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है. वीजा फीस बढ़ाने पर क्या है ट्रंप प्रशासन का पक्ष ट्रंप प्रशासन ने इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि यह "सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी वेतन स्तर को गिरने से बचाने" के लिए जरूरी है. व्हाइट हाउस प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने कहा कि यह कदम उन कंपनियों को भी आश्वासन देता है जिन्हें वास्तव में विदेशी प्रतिभा की जरूरत है. वर्तमान में नियोक्ता एच-1बी प्रायोजन के लिए कंपनी के आकार और अन्य कारकों के आधार पर लगभग 2,000 डॉलर से 5,000 डॉलर तक का शुल्क देते हैं. ट्रंप का आदेश इस लागत को कई गुना बढ़ा देगा. एच-1बी वीजा का बड़ा लाभार्थी भारत एच-1बी कार्यक्रम के तहत हर साल 65,000 वीजा और उन्नत डिग्री धारकों के लिए अतिरिक्त 20,000 वीजा उपलब्ध कराए जाते हैं. 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, भारत सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है और उसे कुल मंजूर वीजा का लगभग 71% मिला, जबकि चीन का हिस्सा करीब 11.7% था. याचिका में कहा गया है कि नया आदेश "पे टू प्ले" (Pay to Play) व्यवस्था बनाता है, जिसमें केवल वही कंपनियां विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त कर पाएंगी जो भारी शुल्क अदा कर सकेंगी. इससे न केवल इनोवेशन पर असर पड़ेगा बल्कि चयनात्मक प्रवर्तन और भ्रष्टाचार की संभावना भी बढ़ जाएगी.