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हंगरी के लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को मिला ये सम्मान, नोबेल पुरस्कार 2025 का हुआ ऐलान

नई दिल्ली स्वीडिश एकेडमी ने गुरुवार को साहित्य के नोबेल पुरस्कार का ऐलान कर दिया। इन पुरस्कारों की घोषणा शाम 4:30 बजे की गई। इस बार साहित्य के नोबेल पुरस्कार से हंगरी के लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को सम्मानित किया गया है। यह अवॉर्ड उन लेखकों को मिलता है, जिन्होंने शानदार किताबें या कविताएं लिखकर साहित्य में खास योगदान दिया हो। 1954 में जन्मे हैं। एकेडमी ने पुरस्कार की घोषणा करते हुए बताया कि लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई को "उनकी रचनाएं बहुत प्रभावशाली और दूरदर्शी हैं। वे दुनिया में तबाही और डर के बीच भी कला की ताकत को दिखाती हैं। लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई मध्य यूरोपीय परंपरा के एक महाकाव्य लेखक हैं, जो काफ्का से थॉमस बर्नहार्ड तक फैली हुई है, और उनकी विशेषता बेलौसपन है। उनका पहला उपन्यास "सैटानटैंगो" 1985 में प्रकाशित हुआ था और हंगरी में उन्हें एक लेखक के तौर पर साबित करने में कामयाब रहा। यह उपन्यास, साम्यवाद के पतन से ठीक पहले, हंगरी के ग्रामीण इलाके में एक बंजर खेत पर रहने वाले बेसहारा निवासियों के समूह पर केंद्रित था। कमिटी ने बताया कि उनकी किताबों में दर्शन होता है। मानवता, अराजकता और आधुनिक समाज के संकटों का जिक्र बड़ी बेबाकी से किया जाता है। कुल मिलाकर लास्जलो डीप थिंकिंग वाली उदास कहानियां लिखने के लिए मशहूर हैं। उनकी किताबें 'सैटानटैंगो' और 'द मेलांकली ऑफ रेसिस्टेंस' पर फिल्में भी बन चुकी हैं। 'द मेलांकली ऑफ रेसिस्टेंस' एक छोटे से गांव और उसके लोगों की मुश्किल जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मानव स्वभाव के दोषों और गुणों को बखूबी पेश करती है। सैटानटैंगो पर तो 7 घंटे लंबी फिल्म भी बनाई गई थी, जिसकी काफी तारीफ हुई थी। विजेता को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (10.3 करोड़ रुपए), सोने का मेडल और सर्टिफिकेट मिलेगा। अगर एक से ज्यादा को मिलता है तो प्राइज मनी उनके बीच बंट जाती है। पुरस्कार 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में दिए जाएंगे। नोबेल एकेडमी ने अब तक फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन और साहित्य के लिए पुरस्कारों की घोषणा कर दी है।

PM मोदी ने बताया भारत-यूके समझौते से दोनों देशों के लिए क्या हैं फायदे

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत-यूके के बीच व्यापार समझौता दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझा विकास और समृद्धि रोडमैप है। यह मार्केट एक्सेस के साथ दोनों देशों के एमएसएमई को मजबूती देगा और लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलेगा। देश की आर्थिक राजधानी में भारत-यूके सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "आज हमारा द्विपक्षीय व्यापार लगभग 56 अरब डॉलर का है। हमने 2050 तक इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। मुझे विश्वास है कि हम इस लक्ष्य को निर्धारित समय से पहले ही हासिल कर लेंगे। भारत राजनीतिक स्थिरता और व्यापक मांग प्रदान करता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और वित्त से लेकर फार्मास्यूटिकल्स तक, यहां हर क्षेत्र में बड़े अवसर मौजूद हैं।" उन्होंने महत्वपूर्ण सेक्टर्स में भारत की बढ़ती क्षमता का जिक्र करते हुए कहा, "हमारी अर्थव्यवस्था सुधारों की राह पर है और स्थिरता एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है।" प्रधानमंत्री ने भविष्य के व्यापार और विकास के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक सेक्टर्स के रूप में रेयर अर्थ मिनरल के महत्व पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम इन क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे, क्योंकि ये हमारे औद्योगिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।" प्रधानमंत्री मोदी और अपने ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टारमर ने संयुक्त रूप से सीईओ फोरम में भाग लिया, जिसमें दोनों देशों के प्रमुख व्यापारिक और वित्तीय नेता एक साथ आए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों के उद्योग जगत के नेताओं और नीति निर्माताओं के अथक प्रयासों की बदौलत भारत और ब्रिटेन ने व्यापार और आर्थिक सहयोग की एक मजबूत नींव रखी है। प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र राजभवन में प्रधानमंत्री स्टारमर से मुलाकात के बाद कहा, "भारत और ब्रिटेन स्वाभाविक साझेदार हैं। हमारी बढ़ती साझेदारी वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।" प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत और पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता पर विचारों का आदान-प्रदान किया और बातचीत और कूटनीति के माध्यम से संघर्षरत क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए समर्थन की पुष्टि की।

अगर ईरान के पास होते हथियार… ट्रंप का गाजा पर बड़ा बयान

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो गाजा में शांति समझौता असंभव होता। दरअसल, इस वर्ष की शुरुआत में ट्रंप ने ईरान की परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की योजना का जिक्र किया था, क्योंकि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कगार पर था। उनका मानना था कि ऐसा होने पर गाजा शांति प्रक्रिया पूरी तरह विफल हो जाती। ट्रप ने उक्त बातें फॉक्स न्यूज से बात करते हुए कही। ट्रंप ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने से महज एक या दो महीने दूर था। अगर मैंने इसे होने दिया होता, तो यह समझौता संभव न होता या फिर इसमें भारी संकट आ जाता। उन्होंने कहा कि आपके पास एक ऐसा देश होता जो परमाणु शक्ति संपन्न हो, जो स्पष्ट रूप से बहुत मित्रवत नहीं है। परमाणु हथियारों की ताकत ऐसी चीज है जिस पर हमें चर्चा भी नहीं करनी चाहिए। इसलिए आज का ईरान पूरी तरह अलग है। ट्रंप ने आगे जोर देकर कहा कि शांति प्रयासों ने वैश्विक एकजुटता पैदा की है, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार मिलने पर शांति की राह में काले बादल मंडराने लगते। वाइट हाउस ने गुरुवार को एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ट्रंप गाजा में बंधकों के परिवारों से मिलते हुए शांति समझौते के लिए उनका आभार व्यक्त कर रहे थे। इससे पूर्व, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने गुरुवार को घोषणा की कि गाजा युद्धविराम समझौते के पहले चरण के सभी प्रावधानों और अमल तंत्रों पर सहमति हो गई है। अंसारी के अनुसार, इस समझौते में इजरायली बंधकों और फिलिस्तीनी कैदियों की अदला-बदली भी शामिल है। ट्रंप के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी गुटों और इजरायल ने शांति योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, हमास ने अपना पहला सार्वजनिक बयान जारी किया। अल जजीरा के मुताबिक, टेलीग्राम पर पोस्ट किए गए संदेश में हमास ने गाजा युद्ध समाप्ति, कब्जे वाले इलाके से इजरायली सेना की वापसी, मानवीय सहायता शुरू करने और कैदियों की अदला-बदली वाले समझौते पर हस्ताक्षर की पुष्टि की।  

बच्चों की सुरक्षा पर सवाल: WHO रिपोर्ट में सामने आया कफ सिरप का deadly असर

नई दिल्ली   भारत में कफ सिरप पीने के कारण 5 साल से कम उम्र के 17 बच्चों की मौत के मामले पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विस्तृत जानकारी जारी की है। WHO ने मौतों का कारण सिरप में खतरनाक रूप से अधिक मात्रा में मौजूद टॉक्सिक केमिकल को बताया है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि भारत में दवा टेस्टिंग और उत्पादन में गंभीर चूकें पाई गई हैं। मौत का कारण: 500 गुना ज्यादा ज़हर बच्चों की मौत का मुख्य कारण कफ सिरप में मौजूद ज़हरीला केमिकल डाइएथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol – DEG) था। खतरे का स्तर: यह ज़हरीला केमिकल सिरप में मानक सीमा से लगभग 500 गुना ज्यादा पाया गया था। नुकसान: स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि DEG एक गंभीर जहर है, जो बच्चों में किडनी फेल्योर, न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम्स (तंत्रिका संबंधी समस्याएँ) और अंततः मौत का कारण बन सकता है। सबसे पहले Coldrif सिरप में यह ज़हरीला केमिकल मिला था, जिसके बाद इसे बैन कर दिया गया। अब, Respifresh और RELIFE सिरप में भी यही ज़हरीला केमिकल पाया गया है। क्यों हुई भारत में कफ सिरप से मौतें? WHO ने अपनी रिपोर्ट में भारत में दवा उत्पादन प्रक्रिया में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन को मौतों का बड़ा कारण बताया है।  टेस्टिंग में कमी: WHO ने कहा कि भारत में दवा के लिए ज़रूरी टेस्ट में कमी है। कानूनी चूक: कानून के मुताबिक, दवा के हर बैच का टेस्ट करना ज़रूरी है, लेकिन हाल ही में फैक्ट्री चेक में यह नियम अनदेखा पाया गया। Sresan Pharmaceutical (Coldrif सिरप) की फैक्ट्री बंद कर दी गई है और पुलिस मैनस्लॉटर (गैर इरादतन हत्या) की जाँच कर रही है। Shape Pharma और Rednex Pharmaceuticals की भी सिरप में मानक कमी पाई गई है और उन्हें उत्पादन तथा बिक्री रोकने का आदेश दिया गया है। वैश्विक स्तर पर चिंता WHO ने स्पष्ट किया है कि ये तीनों सिरप मुख्य रूप से केवल भारत में बेचे गए, और अभी तक इनका कोई आधिकारिक निर्यात (Export) नहीं हुआ है। हालांकि, WHO ने चेतावनी दी है कि कुछ सिरप अनौपचारिक रूप से (illegally) विदेशों में भी जा सकते हैं। यह घटना भारत के दवा उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है। भारत दुनिया में दवा बनाने में तीसरे नंबर पर है और अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली 40% जेनरिक दवाइयाँ और कई अफ्रीकी देशों की 90% दवा भारत से आती है। इस घटना ने देश और दुनिया में दवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।  

भारत का सख्त इशारा! राजनाथ और आर्मी चीफ मुनीर के बयान से पाकिस्तान की सेना हो गई चौकस

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में 8 अक्टूबर 2025 को सुरक्षा घेरे  के बीच रावलपिंडी के जनरल हेडक्वार्टर में 272वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अपनी सेना को हर वक्त तैयार रहने, फिटनेस बनाए रखने और किसी भी हमले का “त्वरित और आक्रामक” जवाब देने का आदेश दिया। पाकिस्तानी मीडिया समा टीवी के अनुसार, यह बैठक भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी द्वारा दशहरे पर दी गई सख्त चेतावनी के बाद हुई। आसिम मुनीर ने कहा कि पाकिस्तानी सेना हर स्थिति के लिए सक्षम है और कश्मीर और गाजा मुद्दों पर पाकिस्तान की समर्थन नीति को दोहराया। भारत की चेतावनी  2 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के भुज में कहा कि सर क्रीक पर पाकिस्तान के किसी भी दुस्साहस का जवाब निर्णायक और इतना कड़ा होगा कि यह पाकिस्तान का इतिहास और भूगोल बदल सकता है। इसके बाद 3 अक्टूबर को सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी पाकिस्तान को चेताया कि अगर आतंकवाद को पोसा-पाला गया तो उसका नामो-निशान मिट सकता है।   पाकिस्तानी रुख और तैयारी  आसिम मुनीर ने कॉन्फ्रेंस में फौज को अनुशासन बनाए रखने, शारीरिक फिटनेस पर ध्यान देने और हर समय तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने पाकिस्तानी सेना की क्षमता को भी दोहराया और कश्मीर के साथ-साथ गाजा में मानवीय सहायता की भी बात की। बैठक में पाक-सऊदी डिफेंस डील की सराहना भी की गई। भारत की कड़ी चेतावनी और पाकिस्तानी सेना की तैयारी से क्षेत्रीय सुरक्षा तनाव बढ़ा है। दोनों देशों की सैन्य सतर्कता अब चरम पर है, जिससे किसी भी छोटे विवाद का बड़ा सैन्य मोड़ लेने का खतरा बना हुआ है।

भारत में ऊर्जा क्रांति! पीएम मोदी ने प्राइवेट सेक्टर को परमाणु क्षेत्र में प्रवेश का दिया संकेत

मुंबई  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ऐलान किया कि भारत अपना परमाणु ऊर्जा क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खोल रहा है, और इसे भारत-यूके संबंधों को मजबूत करने का एक स्वर्णिम मौका बताया। मुंबई में आयोजित भारत-ब्रिटेन सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे बेहद प्रसन्नता हो रही है कि हम परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए खोल रहे हैं। इससे भारत-ब्रिटेन के सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के कई अवसर सृजित होंगे। मैं आपको भारत की इस विकास यात्रा में भागीदार बनने के लिए निमंत्रित करता हूं। बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। हम अगली पीढ़ी के आधुनिक भौतिक बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रहे हैं। 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में हम तेज कदम उठा रहे हैं। पीएम मोदी ने आगे कहा कि आइये, भारत और ब्रिटेन मिलकर वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट मानक स्थापित करें। अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलावों पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने बुनियादी ढांचे व सुधारों पर केंद्रित नीतियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार हो रहे हैं। अनुपालन बोझ कम करने और व्यापार करने की आसानी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विकास को गति देने वाले हालिया टैक्स सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ताजा जीएसटी सुधारों से मध्यम वर्ग और एमएसएमई क्षेत्र की प्रगति को नई रफ्तार मिलेगी, साथ ही सभी के लिए अवसरों का दायरा विस्तृत होगा। पीएम मोदी ने आगे कहा कि सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों और सौर ऊर्जा उपकरणों पर करों में कटौती कर आम जनता को बड़ी राहत प्रदान की है। एयर कंडीशनर, टेलीविजन व डिशवॉशर जैसे सामानों पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह, मॉनिटर व प्रोजेक्टर पर भी जीएसटी को 18 प्रतिशत पर संशोधित किया गया। इन बदलावों से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन को प्रोत्साहन प्राप्त होगा और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई मजबूती मिलेगी। इसके अलावा सौर पैनल व फोटोवोल्टिक सेल जैसे नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों पर कर को 12 प्रतिशत से घटाकर मात्र 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इस छूट से आवासीय व औद्योगिक उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए स्थापना खर्च में कमी आएगी, जिससे सतत व किफायती ऊर्जा विकल्पों तक पहुंच आसान हो जाएगी।  

प्यार या प्रोफेशन? अमेरिकी राजनयिक का चीनी महिला के साथ अफेयर बना कारण बर्खास्तगी

वाशिंगटन  अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने देश के एक राजनयिक को एक चीनी महिला से कथित रोमांटिक संबंध रखने के कारण बर्खास्त कर दिया है। महिला पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध होने का आरोप है। इस मामले को हाल में लागू किए गए उस प्रतिबंध के तहत पहली कार्रवाई माना जा रहा है, जिसमें अमेरिकी कर्मियों के चीनी नागरिकों से ऐसे व्यक्तिगत संबंध पर रोक लगाई गई थी। ‘एसोसिएटेड प्रेस' की पहले की एक रिपोर्ट के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइड्न के कार्यकाल के अंतिम दिनों में यह प्रतिबंध लगाया गया था। इसके तहत चीन में तैनात अमेरिकी सरकारी कर्मियों, उनके परिजनों और सुरक्षा मंजूरी प्राप्त संविदा कर्मचारियों को किसी भी चीनी नागरिक के साथ रोमांटिक या यौन संबंध रखने से मना किया गया था।   विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया कि संबंधित राजनयिक को बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा मामले की समीक्षा के बाद यह कार्रवाई की गई। पिगॉट ने कहा, ‘‘विदेश मंत्री रुबियो के नेतृत्व में हम उन कर्मचारियों के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति बनाए रखेंगे, जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करते हुए पाए जाएंगे।'' बयान में संबंधित राजनयिक का नाम उजागर नहीं किया गया, लेकिन एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता जेम्स ओ'कीफ द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए गुप्त वीडियो में राजनयिक और उसकी चीनी महिला मित्र नजर आए।    

विशेष अनुमति के बाद भारत पहुंचे तालिबानी विदेश मंत्री: आमिर मुत्तकी की 4 साल बाद की पहली यात्रा

अफगानिस्तान अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी गुरुवार को छह दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। यह यात्रा खास इसलिए है क्योंकि तालिबान शासन के चार साल बाद किसी वरिष्ठ अफगान मंत्री की भारत में यह पहली उच्चस्तरीय आधिकारिक यात्रा है। पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के सत्ता से हटने और तालिबान द्वारा शासन संभालने के बाद से अब तक भारत और तालिबान के बीच सीधा संवाद सीमित था। मुत्तकी की यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक नया कूटनीतिक अध्याय जोड़ सकती है।   जयशंकर और  डोभाल से  वार्ता तय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुत्तकी की व्यापक वार्ता तय है। बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद विरोधी कदमों पर चर्चा होने की संभावना है।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर कहा- “अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्तकी का नयी दिल्ली आगमन पर हार्दिक स्वागत है। हम द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनके साथ चर्चा को लेकर उत्सुक हैं।” सूत्रों के अनुसार, मुत्तकी के कार्यक्रमों में दारुल उलूम देवबंद की यात्रा और आगरा में ताजमहल का दौरा भी शामिल है। यह कदम भारत और अफगानिस्तान के सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंधों को नए सिरे से उजागर करने का संकेत माना जा रहा है।   संयुक्त राष्ट्र से लेनी पड़ी विशेष अनुमति  मुत्तकी की यह यात्रा पहले सितंबर में तय थी, लेकिन यूएनएससी के यात्रा प्रतिबंधों के कारण रद्द करनी पड़ी थी। अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति ने 30 सितंबर को 9 से 16 अक्टूबर तक के लिए अस्थायी छूट दी, जिससे उनका भारत दौरा संभव हो सका। यूएन ने तालिबान के सभी वरिष्ठ नेताओं पर यात्रा और आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिनके लिए विदेश यात्राओं हेतु विशेष अनुमति आवश्यक होती है। भारत ने अब तक तालिबान शासन को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन व्यावहारिक संवाद जारी रखा है।15 मई को विदेश मंत्री जयशंकर और मुत्तकी के बीच फोन पर पहली बातचीत हुई थी जो तालिबान शासन के बाद भारत-अफगानिस्तान के बीच सबसे उच्च स्तर का संपर्क माना गया। भारत का पक्ष भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि: अफगानिस्तान की भूमि का उपयोग किसी भी देश के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए और काबुल में एक समावेशी सरकार का गठन होना चाहिए, जो सभी जातीय और धार्मिक समूहों को प्रतिनिधित्व दे। अफगान विदेश मंत्री मुत्तकी ने जनवरी में भारत को “एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और आर्थिक शक्ति”बताते हुए सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई थी। काबुल की सरकार अब भारत के साथ शिक्षा, व्यापार और मानवतावादी परियोजनाओं पर सहयोग चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत और तालिबान के बीच सावधानीपूर्वक लेकिन सकारात्मक संवाद की शुरुआत है।भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देते हुए अफगानिस्तान में स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम बढ़ा रहा है।  

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बोले: देश की तरक्की के लिए जरूरी है ‘एक देश, एक चुनाव’ और स्वदेशी को बढ़ावा

नई दिल्ली  राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित पीएचडीसीसीआई (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) के 120वें वार्षिक सत्र में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत की वैश्विक भूमिका, कृषि क्षेत्र की मजबूती और चुनावी प्रणाली में बदलाव को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने भारत के 'विश्वसनीय वैश्विक भागीदार' के रूप में उभरने पर चर्चा करते हुए 'एक देश, एक चुनाव' की आवश्यकता का जिक्र किया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत को एक बार फिर से विश्वगुरु बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है, और इसके लिए संसाधनों का बेहतर प्रबंधन जरूरी है।  उन्होंने चुनाव सुधारों पर जोर देते हुए कहा, 'एक देश, एक चुनाव' होना चाहिए। पूरे देश में हर पांच साल में एक ही बार चुनाव हो। सांसद और विधायक दोनों के चुनाव एक साथ हों, और मतदाता एक ही वोटिंग मशीन पर दोनों को वोट दे सकें।" उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों से समय और संसाधनों की बर्बादी होती है। शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा, "जनता का पैसा और समय दोनों बर्बाद होते हैं। अगर एक बार में चुनाव होंगे तो देश को फायदा होगा।" उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा, "जो भारत में बना है, उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। स्वदेशी को सभी को अपनाना चाहिए। जब हम स्वदेशी की बात करते हैं, तो गुणवत्ता की बात आती है। हम चाहते हैं कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।" अपने संबोधन में उन्होंने कृषि उत्पादन और खाद्य प्रसंस्करण पर भी फोकस किया। उन्होंने कहा कि भारत गेहूं और चावल के उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन दालों के उत्पादन में अभी भी पीछे है। हमें दाल और ऑयल सीड्स के उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए हाइब्रिड बीजों पर काम हो रहा है और इसमें सफलता भी मिल रही है। उन्होंने बताया कि उत्पादन को बढ़ाना है, लेकिन लागत को घटाना है। साथ ही, फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना हमारा लक्ष्य है। उन्होंने खासतौर पर सोयाबीन और दलहन मिशन पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। अंत में, शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज का भारत वह नहीं है, जहां एक समय पर प्रधानमंत्री लोगों से व्रत रखने की अपील करते थे, बल्कि आज करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। यह भारत की बदली हुई तस्वीर है। कार्यक्रम में उद्योग जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

चीन ने Rare Earths को हथियार बनाया, अमेरिका के लिए जोखिम बढ़ा – जानें पूरा हाल!

बेजिंग  चीन ने गुरुवार को रेयर अर्थ्स (दुर्लभ खनिज तत्वों) और उनसे जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लागू करने की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब इस महीने के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब विदेशी कंपनियों को उन वस्तुओं के निर्यात के लिए विशेष अनुमति लेनी होगी, जिनमें चीन से प्राप्त रेयर अर्थ तत्वों की थोड़ी भी मात्रा शामिल है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि रेयर अर्थ्स की माइनिंग (खनन), स्मेल्टिंग (गलन), रीसाइक्लिंग और मैग्नेट निर्माण से जुड़ी तकनीकों के निर्यात पर भी परमिट प्रणाली लागू की जाएगी। दुनिया में रेयर अर्थ्स के उत्पादन में चीन का दबदबा है। यह वैश्विक रेयर अर्थ्स खनन का लगभग 70 प्रतिशत और प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करता है। ये खनिज जेट इंजन, रडार सिस्टम, इलेक्ट्रिक वाहनों, कंप्यूटरों और मोबाइल फोन जैसे उत्पादों के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। रेयर अर्थ्स को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। जैसे-जैसे अमेरिका ने चीन से आने वाले कई उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाए हैं, बीजिंग ने भी इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खनिजों पर नियंत्रण को और सख्त कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि नए नियंत्रण “राष्ट्रीय सुरक्षा की बेहतर रक्षा” के लिए लगाए जा रहे हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कि चीन से प्राप्त रेयर अर्थ्स या तकनीक का इस्तेमाल “संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों” में न हो।   मंत्रालय ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी कंपनियां और व्यक्ति चीन से रेयर अर्थ्स तकनीक को सैन्य या अन्य संवेदनशील उपयोगों के लिए बाहर भेज रहे हैं, जिससे “राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर नुकसान” पहुंचा है।रेयर अर्थ्स की आपूर्ति पर चीन की सख्ती से अमेरिका और अन्य देशों में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को झटका लग सकता है। इन खनिजों के बिना इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, गाड़ियों और रक्षा उपकरणों का निर्माण प्रभावित हो सकता है। एशिया ग्रुप के विशेषज्ञ जॉर्ज चेन के अनुसार, “रेयर अर्थ्स आने वाले महीनों में अमेरिका और चीन के बीच वार्ता का अहम हिस्सा बने रहेंगे। दोनों देश स्थिरता चाहते हैं, लेकिन असली सौदा अगले साल ही हो पाएगा।” यह कदम उस समय उठाया गया है जब ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात अक्टूबर के अंत में दक्षिण कोरिया में होने वाले एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) फोरम के दौरान तय है। माना जा रहा है कि चीन का यह फैसला वार्ता से पहले दबाव की रणनीति का हिस्सा है।इससे पहले अप्रैल में चीन ने सात रेयर अर्थ तत्वों के निर्यात पर नियंत्रण लगाया था, जब ट्रम्प प्रशासन ने चीन सहित कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी।हालांकि, जून में बीजिंग ने कुछ निर्यात परमिट जारी किए और प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया था।विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक रूप से भी अहम है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए आपूर्ति संकट गहरा सकता है और वैश्विक तकनीकी उद्योग पर असर पड़ सकता है।