Public Sootr

लहर खबरों की

Public Sootr

Writer News & Blogger

करवा चौथ व्रत में अक्सर होने वाली गलतियाँ, जो संकल्प को कर सकती हैं टूट!

भारत में सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है. यह व्रत पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है. पंचांग के अनुसार, करवा चौथ का व्रत इस बार शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025 को रखा जाएगा. यह व्रत सूर्योदय से पहले सरगी खाकर शुरू होता है और चांद को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है. इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं, इसलिए इस व्रत के नियमों का पालन बहुत ही सावधानी से करना चाहिए. जाने-अनजाने में की गई कुछ गलतियां आपके व्रत का संकल्प तोड़ सकती हैं और पूजा का फल कम कर सकती हैं. आइए जानते हैं वो कौन से काम हैं जिन्हें आपको करवा चौथ के दिन भूलकर भी नहीं करना चाहिए. करवा चौथ के व्रत में करें इन नियमों का पालन! अन्न और जल का सेवन न करें करवा चौथ का व्रत निर्जला रखा जाता है, जिसका अर्थ है पूरे दिन बिना पानी और भोजन के रहना. सबसे बड़ी गलती: सूर्योदय के बाद और चंद्रोदय से पहले गलती से भी पानी की एक बूंद या अन्न का एक दाना ग्रहण न करें. यदि अनजाने में ऐसा हो जाए, तो व्रत खंडित माना जाता है. उपाय: अगर गलती से व्रत टूट जाए, तो तुरंत स्नान करके साफ कपड़े पहनें. भगवान शिव-पार्वती, गणेश जी और करवा माता से क्षमा-याचना करें और चंद्रोदय होने तक व्रत जारी रखने का संकल्प लें. धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाओं को कैंची, चाकू, सुई या किसी भी धारदार वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए. कारण: शास्त्रों में माना जाता है कि इन वस्तुओं का प्रयोग करने से व्रत का फल कम होता है और यह अशुभ भी माना जाता है. इसलिए इस दिन सिलाई-कढ़ाई जैसे काम से बचना चाहिए. सलाह: सब्जियों को काटने या अन्य काम के लिए किसी और से मदद ले सकते हैं. सफेद और काले रंग के कपड़े न पहनें पूजा-पाठ और शुभ अवसरों पर काले और सफेद रंग को अशुभ माना जाता है. कारण: काला रंग नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है, जबकि सफेद रंग विधवापन का प्रतीक है. क्या पहनें: करवा चौथ के दिन लाल, गुलाबी, पीला, नारंगी या हरा जैसे चमकीले और शुभ रंग के कपड़े पहनें.यह सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली का प्रतीक माना जाता है. बुजुर्गों या किसी का अनादर न करें उपवास के दौरान महिलाओं को शांत, संयमित और विनम्र रहना चाहिए. क्या न करें: किसी भी व्यक्ति, विशेषकर बुजुर्गों, सास-ससुर या पति का अनादर न करें. किसी से झगड़ा या अपशब्द न बोलें. कारण: माना जाता है कि व्रत के दिन क्रोध करना, झगड़ा करना या किसी को बुरा-भला कहना व्रत के फल को समाप्त कर देता है. सोने से बचें और शारीरिक श्रम न करें पूरे दिन निर्जला व्रत रखने से थकान महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन कुछ धार्मिक नियम हैं. क्या करें: दिन में ज़्यादा सोने से बचें.संभव हो तो पूरा दिन जागकर भगवान का स्मरण करें या करवा चौथ की कथा सुनें. क्या न करें: व्रत के दिन भारी शारीरिक श्रम या थका देने वाले काम करने से बचना चाहिए. इससे प्यास अधिक लग सकती है और व्रत खंडित होने की संभावना बढ़ जाती है. किसी को सुहाग की सामग्री दान न करें करवा चौथ पर अपने सुहाग की वस्तुएं किसी और को देने से बचें. सुहाग सामग्री: अपनी मेहंदी, सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी या श्रृंगार की कोई भी वस्तु किसी अन्य महिला को दान न करें या न दें. यह आपके सौभाग्य को कम कर सकता है. क्या करें: यदि दान करना ही है तो नई सुहाग सामग्री खरीदकर दान करें.

करवा चौथ कब मनाएं? जानिए सही दिन, शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का वक्त

करवा चौथ का व्रत कार्तिक संकष्टी चतुर्थी को रखते हैं. उस दिन कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि होती है. इस बार चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर और 10 अक्टूबर दो दिन है, इस वजह से करवा चौथ की तारीख पर लोगों में कन्फ्यूजन की स्थिति है. करवा चौथ का व्रत 9 अक्टूबर को रखा जाएगा या​ फिर 10 अक्टूबर को? इस सवाल ने सुहागन महिलाओं को परेशान कर ​रखा है. आइए जानते हैं कि करवा चौथ की सही तारीख क्या है? करवा चौथ का व्रत किस दिन रखना सही है? करवा चौथ पर चांद कब निकलेगा? करवा चौथ की सही तारीख पंचांग से देखा जाए तो करवा चौथ की कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर को रात 10:54 बजे से शुरू हो रही है, जो 10 अक्टूबर को शाम 7:38 बजे तक है. करवा चौथ के व्रत के लिए चतुर्थी तिथि में चंद्रमा का उदित होना यानि चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी महत्वपूर्ण है. इस आधार पर देखा जाए तो 9 अक्टूबर को चतुर्थी तिथि में चंद्रमा पहले से ही उदित है. उस दिन चंद्रोदय शाम को 07:22 पी एम पर तृतीया तिथि में हो रहा है. वहीं 10 अक्टूबर को चंद्रोदय चतुर्थी तिथि के बाद हो रहा है. देखा जाए तो चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर को देर रात शुरू हो रही है और चतुर्थी में चंद्रोदय नहीं, जबकि 10 अक्टूबर को उदयातिथि के अनुसार चतुर्थी तिथि सूर्योदय के साथ ही प्राप्त हो रही है, लेकिन चंद्रोदय चतुर्थी तिथि में नहीं हो रहा है. इस दिन भी चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी तिथि प्राप्त नहीं हो रही है. ऐसी स्थिति में उदयातिथि को मानते हुए करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर शुक्रवार को रखा जाएगा. उस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में होगा. करवा चौथ पूजा मुहूर्त करवा चौथ के दिन व्रती महिलाएं प्रदोष काल में माता गौरी, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा करती हैं. इस साल 10 अक्टूबर को करवा चौथ की पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 57 मिनट से शाम 7 बजकर 11 मिनट तक है. करवा चौथ की रात लाभ-उन्नति मुहूर्त 09:02 पी एम से 10:35 पी एम तक है. करवा चौथ पर चंद्रोदय समय इस साल करवा चौथ पर चांद रात में 08 बजकर 13 मिनट पर निकलेगा. इस समय से महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देंगी और पारण करके व्रत को पूरा करेंगी. चंद्रमा को अर्घ्य देने का मंत्र चंद्रमा को अर्घ्य देते समय आपको नीचे दिए गए मंत्र का उच्चारण करना चाहिए. गगनार्णवमाणिक्य चन्द्र दाक्षायणीपते। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं गणेशप्रतिरूपक॥ करवा चौथ व्रत के नियम करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. निर्जला व्रत के शुरू करने से पहले सरगी ग्रहण करते हैं, फिर सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक बिना अन्न और जल के व्रत रखती हैं. शाम की पूजा और चंद्र अर्घ्य के बाद पारण किया जाता है. इस बार महिलाओं को करीब 14 घंटे का निर्जला व्रत रखना होगा.  

शरद पूर्णिमा पर बरसेगी लक्ष्मी कृपा, मुख्य दरवाजे पर करना न भूलें ये जरूरी कार्य

 6 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा. मान्यता है कि इस रात चंद्रमा धरती के सबसे निकट होता है. शरद पूर्णिमा के व्रत की भी विशेष महिमा बताई गई है. कहते हैं कि इसी दिन धन की देवी मां लक्ष्मी का अवतरण हुआ था. ऐसा विश्वास है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है. नारद पुराण के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं. इसलिए इस दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है. कहा जाता है कि इस दिन लक्ष्मी जी अपने श्रद्धालुओं को धन, वैभव, यश और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं. इसलिए घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाकर देवी का स्वागत करना चाहिए. शरद पूर्णिमा की रात होती है बेहद खास शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात ही भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में राधा और गोपियों संग अद्भुत महारास का आयोजन किया था. कहा जाता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों संग नृत्य करने के लिए अनेक रूप प्रकट किए थे. यह दिव्य रासलीला केवल नृत्य नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद का अद्वितीय प्रतीक भी मानी जाती है. मां लक्ष्मी का अवतरण शरद पूर्णिमा की रात ही समुद्र मंथन के समय माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं. यही कारण है कि शरद पूर्णिमा का दिन लक्ष्मी पूजन के लिए बेहद खास माना जाता है. कई जगहों पर इस दिन कुंवारी कन्याएं सूर्य और चंद्र देव की पूजा करती हैं. और उनसे आशीर्वाद लेती हैं. क्यों खुले आसमान के नीचे रखी जाती है खीर? शरद पूर्णिमा के दिन आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा है. कहते हैं कि इस रात चंद्रमा की रोशनी से अमृत वर्षा होती है. इस खीर को खाने से अच्छी सेहत का वरदान और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है. इसलिए लोग शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की छाया में खीर रखते हैं और फिर उसे अगले दिन सुबह खाते हैं. कहते हैं कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में रखी खीर खाने से इंसान का भाग्योदय होता है और परिवार को रोग-बीमारियों से मुक्ति मिलती है.

वाल्मीकि जयंती कभी? 6 या 7 अक्टूबर — असली दिन की जानकारी

आश्विन मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इस दिन शरद पूर्णिमा के साथ-साथ महर्षि वाल्मीकि की जयंती भी मनाई जाएगी. वाल्मीकि जी ने हिंदू धर्म के सबसे अहम महाकाव्यों में से एक रामायण की रचना की थी. महर्षि वाल्मीकि को ही संसार का पहला कवि माना जाता है. चलिए जानते हैं इस साल वाल्मीकि जयंती किस तारीख को मनाई जाएगी.  कब है वाल्मीकि जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार आश्विन पूर्णिमा तिथि सोमवार, 6 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 24 से शुरू होगी और मंगलवार, 7 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 17 मिनट पर तिथि का समापन होगा. इस तरह 6 और 7 अक्टूबर, दोनों ही दिन आश्विन मास की पूर्णिमा का संयोग बन रहा है. लेकिन पूर्णिमा तिथि का व्रत 6 अक्टूबर को किया जाएगा. और 7 अक्टूबर को वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी. महर्षि वाल्मीकि कौन थे? रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. लेकिन उन्होंने बहुच छोटी उम्र में ही घर छोड़कर वैराग्य जीवन अपना लिया था. लोक कथाओं के अनुसार उनका नाम रत्नाकर था. एक दिन वे महर्षि नारद से मिले. नारदजी ने उन्हें आत्मज्ञान और सत्य का मार्ग दिखाया. नारदजी ने उन्हें "राम-राम" नाम का जाप कराया. और तब से ही उनका जीवन बदल गया. महर्षि वाल्मीकि की रचनाएं वाल्मीकि जी ने भगवान श्रीराम के जीवन, संघर्ष, आदर्श और धर्म की स्थापना की कथा को महाकाव्य रामायण के रूप में लिखा. आगे चलकर जब माता सीता को वनवास मिला, तब वाल्मीकि जी ने ही उन्हें अपने आश्रम में आश्रय दिया था. उनके दोनों पुत्रों लव और कुश का जन्म भी इसी आश्रम में हुआ और उन्होंने ही वाल्मीकि जी से रामायण का ज्ञान प्राप्त किया. रामायण में लगभग 24,000 श्लोक हैं. यह संस्कृत के सबसे प्राचीन महाकाव्यों में से एक हैं. उन्हें आदिकवि भी कहा जाता है.

5 अक्टूबर 2025 राशिफल: मेष से मीन तक सभी राशियों के लिए दिनभर की भविष्यवाणी

मेष राशि- मेष राशि वालों को दोस्तों का साथ मिलेगा। निवेश के अच्छे अवसरों की प्राप्ति होगी। घरेलू जीवन सुख-शांति रहेगी। परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। जीवनसाथी के साथ बाहर घूमने जाने का प्लान बन सकता है। धन की स्थिति में सुधार होगा। कारोबार में विस्तार के योग हैं। वृषभ राशि– आज ऑफिस में काम का प्रेशर हो सकता है। धन लाभ के संकेत हैं। जीवनसाथी का साथ मिलेगा, जिससे वैवाहिक जीवन सुखद होगा। बिना किसी से सलाह लिए आज आपको अपना पैसा निवेश नहीं करना चाहिए। खर्च की अधिकता मन को परेशान कर सकती है। सेहत का ध्यान रखें। मिथुन राशि- आज आपको किसी दोस्त की मदद से आर्थिक लाभ हो सकता है। संतान पक्ष से अच्छे समाचार की प्राप्ति हो सकती है। आज करीबी लोगों के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। सेहत पहले से बेहतर होगी। व्यापारिक रूप से अच्छे अवसरों की प्राप्ति होगी। कर्क राशि– आज का दिन धन संबंधी मामलों को सुलझाने के लिए अच्छा है। व्यापार करने वालों को बिजनेस में मुनाफा हो सकता है। बच्चों की सेहत पर नजर रखें। लव लाइफ अच्छी रहेगी। आपका जीवनसाथी आज आपको खुश करने की भरपूर कोशिश करेगा। पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। सिंह राशि- आज आपको मामलों को सुलझाते समय पॉजिटिव नजरिया बनाए रखना चाहिए। लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत है। धन की आवश्यकता कभी भी पड़ सकती है, इसलिए अपने वित्त की प्लानिंग बनाएं। धन लाभ के संकेत हैं। व्यावसायिक स्थिति सुदृढ़ होगी। घर में मेहमानों का आगमन हो सकता है। कन्या राशि- आज आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। लेकिन आपको ज्यादा गुस्सा करने से बचना चाहिए। घर पर किसी मित्र का आना हो सकता है। परिवार में धार्मिक कार्य हो सकते हैं। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। धन की स्थिति में सुधार होगा। व्यापार करने वालों के लिए दिन अच्छा है। तुला राशि– आज आपको काम के कारण तनाव हो सकता है लेकिन शाम तक चीजें सामान्य होती जाएंगी। पारिवारिक जिम्मेदारियां अच्छे से निभाएंगे। वाहन प्रयोग में सावधानी बरतें। आकस्मिक धन लाभ होगा जिससे आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। सेहत अच्छी रहेगी। वृश्चिक राशि- आज आपका आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। वाणी में मधुरता रहेगी। सेहत का ध्यान रखें। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। कारोबार में लाभ के अवसर मिलेंगे। किसी प्रॉपर्टी में निवेश करना आपके लिए नुकसान भरा हो सकता है। जहां तक ​​संभव हो ऐसे निर्णय लेने से बचें। यह आपके लव लाइफ में एक अद्भुत दिन होने वाला है। धनु राशि- आज धन लाभ आपकी उम्मीद के मुताबिक नहीं होगा, जिससे मन परेशान हो सकता है। आपका अपने जीवनसाथी के साथ तनावपूर्ण संबंध रहेगा। परिवार का कोई सदस्य आज आपसे अपनी परेशानी शेयर कर सकता है। निवेश से पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह लेना जरूरी है। व्यापारिक स्थिति उतार-चढ़ाव भरी रहने वाली है। मकर राशि- आज किसी दोस्त की मदद से धन लाभ हो सकता है। कोई रिश्तेदार अपनी पर्सनल परेशानियों को सुलझाने के लिए आपसे सलाह ले सकता है। आज का दिन वैवाहिक जीवन के लिए खास है। ऑफिस में प्रमोशन के मौके मिलेंगे, जिसके लिए आपको अपनी आंखें खोलकर रखने की जरूरत है। कुंभ राशि- आज आपके मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे, लेकिन धैर्य से काम लें। किसी नए कारोबार की शुरुआत हो सकती है। पिता से आर्थिक सहयोग मिल सकता है। करियर में नई जिम्मेदारी या भूमिका निभाने का मौका मिल सकता है। यात्रा के योग हैं। मीन राशि- आज आपको अपनी बुद्धि के बल पर धन कमाने का मौका मिलेगा। जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। निवेश आपके लिए लाभकारी रहने वाला है। परिवार में वाद-विवाद होने की आशंका है। लव लाइफ अच्छी रहेगी। धन आपके पक्ष में रहेगा। व्यापार में विस्तार के मौके मिलेंगे।

4 अक्टूबर 2025: मेष से मीन तक सभी राशियों के लिए दिनभर की राशिफल रिपोर्ट

rashifal 1 5.jpg

मेष राशि- अवसाद की स्थिति रहेगी। बच्चों की सेहत पर ध्यान दें। प्रेम में तू-तू, मैं-मैं से बचें। आय में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। मानसिक स्थिति थोड़ी उथल-पुथल वाली रहेगी। व्यापार लगभग ठीक रहेगा। काली वस्तु का दान करें। वृषभ राशि- कोर्ट-कचहरी से बचें। पैतृक संपत्ति की स्थिति थोड़ा विवादस्पद हो सकती है। व्यापारिक स्थिति मध्यम दिख रही है। सीने में विकार संभव है। प्रेम, संतान भी मध्यम है। डिस्टर्बिंग टाइम कहा जाएगा इसको। काली जी को प्रणाम करते रहें। मिथुन राशि- भाग्य में भरोसा करके कोई काम मत करिएगा। यात्रा कष्टप्रद हो सकती है। मान-सम्मान पर ठेस पहुंच सकती है। प्रेम, संतान भी मध्यम है। मध्यम समय। काली जी को प्रणाम करते रहें। कर्क राशि- चोट-चपेट लग सकती है। किसी परेशानी में पड़ सकते हैं। परिस्थितियां प्रतिकूल हैं। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। प्रेम, संतान अच्छा है। व्यापार भी अच्छा है। काली वस्तु का दान करें। सिंह राशि- स्वंय के स्वास्थ्य पर और जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। उदर रोग से परेशान हो सकते हैं। प्रेम, संतान की स्थिति ठीक है। व्यापार भी ठीक रहेगा। काली वस्तु का दान करें। कन्या राशि- शत्रुओं पर दबदबा कायम रहेगा। गुण ज्ञान की प्राप्ति होगी। बुजुर्गों का आर्शीवाद बना रहेगा लेकिन डिस्टर्बिंग रहेगा स्वास्थ्य और हर तरीके से। व्यापार सही। नीली वस्तु पास रखें। तुला राशि- बच्चों की सेहत पर ध्यान दें। प्रेमी-प्रेमिका तू-तू, मैं-मैं से बचें। मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित दिख रहा है। प्रेम, संतान भी मध्यम है। व्यापार अच्छा है। शनिदेव को प्रणाम करते रहें। वृश्चिक राशि- घरेलू सुख बाधित रहेगा। गृह कलह के संकेत हैं। स्वास्थ्य प्रभावित है। प्रेम, संतान की स्थिति मध्यम है। व्यापार अच्छा है। पीली वस्तु पास रखें। धनु राशि- नाक, कान, गला की परेशानी संभव है। व्यापारिक स्थिति थोड़ी उथल-पुथल रहेगी। अपनों के स्वास्थ्य पर और स्वंय के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। प्रेम,संतान अच्छा है। व्यापार मध्यम है। काली वस्तु का दान करें। मकर राशि- धन हानि के संकेत हैं। निवेश न करें। मुख रोग के शिकार हो सकते हैं। जुआ, सट्टा, लॅाटरी में पैसा न लगाएं। स्वास्थ्य, प्रेम, व्यापार मध्यम है। काली जी को प्रणाम करते रहें। कुंभ राशि- घबराहट, बेचैनी बनी रहेगी। सर दर्द, नेत्र पीड़ा, अज्ञात भय। एक नेगेटिविटी बनी रहेगी। प्रेम, संतान बहुत बढ़िया। व्यापार भी अच्छा है। हरी वस्तु पास रखें। मीन राशि- बच्चों से दूरी। प्रेम में एक नकारात्मक स्थिति। सर दर्द, नेत्र पीड़ा, अज्ञात भय। पार्टनरशिप में प्रॅाब्लम। थोड़ा सा समय खराब दिख रहा है। स्वास्थ्य, प्रेम, व्यापार सब पर ध्यान दीजिए। काली वस्तु का दान करें। शुभ होगा।

5-6 अक्टूबर 2025 की शरद पूर्णिमा: जानें चांदनी रात में खीर बनाने की परंपरा और विज्ञान

2 78.jpg

हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। इसके अलावा आपने देखा होगा कि इस दिन चांदनी रात में खीर रखी जाती है लेकिन क्या आपने सोचा है कि इसके पीछे की वजह क्या है? वहीं इस साल लोगों में बड़ा सवाल है कि शरद पूर्णिमा 2025 कब है 5 अक्टूबर या 6 अक्टूबर कब है? क्योंकि आपने देखा कि नवरात्रि में भी व्रत पूरे 10 दिन रखे गए थे और 11वें दिन विजयदशमी मनाई गई थी। इसलिए शरद पूर्णिमा को लेकर भी कंफ्यूजन है। शास्त्रों के अनुसार तिथि और नक्षत्र मिलान से सही मुहूर्त का निर्धारण किया जाता है। इस दिन व्रत, जागरण और लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है। आइए जान लेते हैं कि इस बार शरद पूर्णिमा कब है और चांदनी रात में खीर रखने का धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है? कब है शरद पूर्णिमा? इस बार शरद पूर्णिमा कब है ये जान लेते हैं। हिंदू पंचाग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 6 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से शुरू होगी जो 7 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। शरद पूर्णिमा के दिन रात की पूजा का महत्व होता है और चंद्र देवता की पूजा होती है तो इस वजह से शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर 2025, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। चांदनी रात में खीर रखने का धार्मिक कारण मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व बरसता है और उसी वजह से खीर को रातभर चांदनी में रखने की परंपरा है। कहा जाता है कि चांदनी से युक्त खीर को मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का प्रसाद माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन चांद की पूजा की जाती है जिन्हें शीतलता और शांति का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में रखी खीर में औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसे खाने से स्किन संबंधी बीमारी दूर होती है और कई तरह के रोगों से छुटकारा मिलता है। ये माना जाता है कि शास्त्रों में वर्णन है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अमृत वर्षा करता है। उस अमृत से युक्त खीर का सेवन करने से तन-मन शुद्ध और रोगमुक्त होता है। माना जाता है कि यह खीर धन, सुख और मोक्ष प्रदान करती है। ये खीर शरीर को शुद्ध करती है और मन को शांत करती है। बता दें कि इस खीर को उसी रात नहीं बल्कि अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में खाना चाहिए। चांदनी रात में रखी खीर खाने का वैज्ञानिक कारण आपने शरद पूर्णिमा के दिन चांदनी रात में रखी खीर खाने का धार्मिक कारण तो जान लिया है अब वैज्ञानिक कारण भी जान लेते हैं। बता दें कि इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के बहुत निकट होता है और उसकी अल्ट्रावायलेट किरणे सीधे धरती पर पड़ती हैं। वो किरणें खीर में पड़ती है तो वो पौष्टिक और सेहत के लिए बहुत लाभकारी बन जाती है। ऐसा कहा जाता है कि रात भर चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर को खाने से पाचन तंत्र ठीक रहता है और शरीर को ठंडक मिलती है। इसके अलावा ये खीर सुपाच्य होती है जो पित्त दोष और मानसिक तनाव से राहत देती है। कम लोगों को पता होगा कि चंद्रमा की रोशनी कैल्शियम को सक्रिय करती है, जिससे यह खीर और अधिक पौष्टिक बनती है।

धनतेरस 2025 की उलझन खत्म! जानें किस दिन मनाएं और क्या है पूजन मुहूर्त

3a 98.jpg

दशहरा का त्योहार निकल चुका है और अब जल्द ही 5 दिवसीय दीपावली पर्व की शुरुआत हो जाएगी। दीपावली का त्योहार धनतेरस से शुरू होता है और 5 दिनों तक चलता है। धनतेरस के दिन लोग भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजन करते हैं। इस दिन सोना चांदी और नए बर्तन की खरीदी करना भी शुभ माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अगर हम खरीदी करके घर में लाते हैं तो घर में सुख समृद्धि धन और बरकत बनी रहती है। चलिए जान लेते हैं कि 18 या 19 अक्टूबर धनतेरस कब मनाई जाने वाली है और मुहूर्त क्या है। कब मनाई जाएगी धनतेरस  पंचांग के मुताबिक कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को दोपहर 12:18 पर होगी। यह 19 अक्टूबर को दोपहर 1:51 पर समाप्त हो जाएगी। उदया तिथि के मुताबिक ये पर्व 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूजन के शुभ मुहूर्त की बात करें तो अगर प्रदोष काल में पूजन करना है तो 7:16 से लेकर 8:20 तक का समय शुभ है। इस समय आप भगवान धन्वंतरि माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजन अर्चन कर सकते हैं। कैसे करें पूजन?     अगर आप धनतेरस पर पूजा करना चाहते हैं तो इसकी विधि बहुत ही सरल है।     सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।     आप को घर के मंदिर की अच्छी तरह से साफ सफाई करनी है।     एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा स्थापित करें।     अब घी का दीपक जलाएं और भगवान धनवंतरी को चंदन का तिलक लगाएं।     सबसे पहले आपको भगवान गणेश की पूजन करनी है उसके बाद सभी देवी देवताओं की पूजन करें।     कुबेर जी के मंत्र और धन्वंतरि स्त्रोत का पाठ करें।     अब आपको भगवान की सच्ची श्रद्धा के साथ आरती करनी है।     सभी देवी देवताओं को मिठाई और फल का भोग लगाएं।     इस भोग को सभी में प्रसाद के रूप में वितरित जरूर करें।     पूजन के पश्चात दान देना ना भूलें। अपने सामर्थ्य के मुताबिक दान देने का प्रतिफल आपको जरूर मिलेगा। कब करें खरीदारी अगर आप धनतेरस पर खरीदारी करना चाहते हैं तो दोपहर 12:01 से 12:48 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। लाभ और उन्नति का चौघड़िया दोपहर 1:51 से 3:18 तक है। प्रदोष कल शाम 6:11 से रात 8:41 तक है। इस दौरान आप आसानी से खरीदारी कर सकते हैं। धनतेरस का महत्व क्या है? धनतेरस पर भगवान धनवंतरी माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजन का विशेष महत्व है। यह तीनों ही सुख समृद्धि धन और बरकत के देवता है। किसी के साथ इस दिन की गई खरीदारी धन में 13 गुना वृद्धि करती है। भगवान धन्वंतरि के आशीर्वाद से आरोग्य और स्वास्थ्य मिलता है। माता लक्ष्मी की पूजन करने से धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

शनि प्रदोष व्रत 2025: अक्टूबर में दो अवसर, शुभ तिथियां और विधि

2 63.jpg

साल 2025 का अक्टूबर महीना महादेव के भक्तों और शनिदेव की कृपा चाहने वालों के लिए बेहद खास है. प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित होता है और जब यह शनिवार के दिन पड़ता है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं, जिसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. शनिवार का दिन होने के कारण इस व्रत में भगवान शिव के साथ-साथ कर्मफल दाता शनिदेव की पूजा का भी विधान है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से शनि के अशुभ प्रभाव, साढ़े साती और ढैय्या से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस साल अक्टूबर 2025 में दुर्लभ संयोग बन रहा है, क्योंकि एक ही महीने में दो बार शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा. आइए जानते हैं इनकी तिथि, महत्व और पूजा विधि. शनि प्रदोष व्रत 2025: अक्टूबर की शुभ तिथियां     पंचांग के अनुसार, अक्टूबर 2025 में दो बार त्रयोदशी तिथि शनिवार को पड़ रही है, जिससे यह दुर्लभ संयोग बन रहा है.     पहला शनि प्रदोष व्रत 4 अक्टूबर 2025 शनिवार आश्विन, शुक्ल पक्ष     दूसरा शनि प्रदोष व्रत 18 अक्टूबर 2025 शनिवार कार्तिक, कृष्ण पक्ष इस बार दूसरा शनि प्रदोष व्रत धनतेरस के शुभ दिन पर पड़ रहा है, जो इसकी महत्ता को और अधिक बढ़ा रहा है. शनि प्रदोष व्रत की संपूर्ण पूजा विधि व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. गंगाजल से पूजा स्थल को शुद्ध करें. हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प करें. पूरे दिन केवल फलाहार या जल ग्रहण करें और सात्विक नियमों का पालन करें. शाम को प्रदोष काल से पहले फिर से स्नान करें. एक चौकी पर शिव-परिवार (शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय) की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें. शिवलिंग का अभिषेक करें. अभिषेक के लिए जल, गाय का दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गन्ने का रस आदि का प्रयोग करें. शिवलिंग पर बेलपत्र, आक के फूल, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, काले तिल, चंदन और अक्षत (चावल) अर्पित करें. माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं. भगवान शिव को खीर, हलवा या अन्य सात्विक भोग लगाएं. ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें. शनिदेव की कृपा के लिए इस दिन शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करें. शनि प्रदोष व्रत की कथा सुनें. और फिर आखिर में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें. विशेष संयोग का फल अक्टूबर 2025 में शनि प्रदोष व्रत का दो बार आना भक्तों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दौरान किया गया व्रत अखंड पुण्यफल देने वाला होता है. खासकर जो लोग शनि से पीड़ित हैं, उनके लिए यह अवसर वरदान साबित होगा.

दीपावली पर बनाएं घर को वास्तु संगत, धन की देवी का मिलेगा आशीर्वाद

3 34.jpg

वैदिक पंचांग के अनुसार, दीपावली का पर्व हर साल कार्तिक अमावस्या पर मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। ऐसे में आप दीवाली से पहले अपने घर में कुछ बदलाव करके लाभ देख सकते हैं। इससे आपको वास्तु दोष का सामना नहीं करना पड़ता। साथ ही इन उपायों को करने से घर में सकारात्मकता का भी वास बना रहता है। होगा धन लाभ वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को विशेष महत्व दिया गया है। आप इस दिशा में तिजोरी, जेवर या जरूरी कागजात आदि रखते हैं। ऐसा करने से आपके ऊपर कुबेर देव और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। साथ ही आप इस दिशा में कुबेर यंत्र, माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करना भी काफी शुभ माना गया है। ऐसा करने से जातक के लिए धन लाभ के योग बनने लगते हैं। लेकिन घर की उत्तर दिशा में भूलकर भी जूते-चप्पल या कूड़ेदान आदि नहीं रखना चाहिए। इससे आपको धन संबधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ठीक करें ये गलतियां वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में इसकी साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। अगर आपका मुख्य द्वार जर्जर या अव्यवस्थित हालत में है, तो ऐसे में आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है। इसी के साथ आपके घर में टपकता हुए नल बिल्कुल नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह आपके लिए धन हानि का कारण बन सकता है। वहीं आप दीवाली से पहले बंद या खराब घड़ी, टूटा शीशा, टूटे बर्तन या टूटे-फूटे व खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान को भी बाहर कर दें। क्योंकि यह सभी चीजें नकारात्मकता को बढ़ावा देती हैं, जिससे धन हानि हो सकती है। इन दिशाओं का भी रखें ध्यान वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर को साफ-सुथरा और हवादार रखना चाहिए। घर के कोनों में रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही सकारात्मक ऊर्जा के लिए आप घर में तुलसी का पौधा भी लगा सकते हैं। इसे हमेशा उत्तर, उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या फिर पूर्व दिशा में रखना चाहिए। इसके साथ ही घर की दक्षिण दिशा में भारी सामान जैसे मशीनें, आदि रख सकते हैं। वास्तु शास्त्र में माना गया है कि यह दिशा जितनी ढकी हो, उतना अच्छा है।