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Niraj mishra

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PM Modi: लेख साझा किया, बताया विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण

PM Modi

PM Modi Shares article explains vision of developed India 2047 दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह द्वारा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित भारत के राष्ट्रगीत, जो भारत की स्वतंत्रता का शाश्वत गीत है, पर लिखे एक लेख को साझा किया। मोदी ने कहा, “उन्होंने लिखा है कि वंदे मातरम एक आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और पुनरुत्थानशील विकसित भारत 2047 के हमारे दृष्टिकोण को प्रेरित करता रहा है।” प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा: <blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”en” dir=”ltr”>On the 150th anniversary of Vande Mataram, Union Minister Shri <a href=”https://twitter.com/AmitShah?ref_src=twsrc%5Etfw”>@AmitShah</a> writes about Bharat’s national song, composed by Bankim Chandra Chattopadhyay, the eternal song of India’s freedom. He reminisces how, written in the dark days of colonial rule, it became a dawn-song of… <a href=”https://t.co/TB4zPMQYNb”>https://t.co/TB4zPMQYNb</a></p>&mdash; PMO India (@PMOIndia) <a href=”https://twitter.com/PMOIndia/status/1986695340444225919?ref_src=twsrc%5Etfw”>November 7, 2025</a></blockquote> <script async src=”https://platform.twitter.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script> जागृति का प्रभात गीत “वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर, केंद्रीय मंत्री @AmitShah बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित भारत के राष्ट्रगीत, जो भारत की स्वतंत्रता का शाश्वत गीत है, के बारे में लिखते हैं। वे याद दिलाते हैं कि कैसे औपनिवेशिक शासन के अंधकारमय दिनों में लिखा गया यह गीत, सांस्कृतिक गौरव और सभ्यतागत राष्ट्रवाद का सम्मिश्रण करते हुए, जागृति का प्रभात गीत बन गया।” उन्होंने लिखा कि वंदे मातरम एक आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और पुनरुत्थानशील विकसित भारत 2047 के हमारे दृष्टिकोण को प्रेरित करता रहा है। इस लेख अवश्य पढ़ें।”

दिल्ली में टीचिंग जॉब की बाढ़! 5000 से अधिक वैकेंसी, आवेदन की तारीख घोषित

नई दिल्ली दिल्ली सरकार के स्कूलों में अरसे से चल रही शिक्षकों की कमी दूर करने के प्रयास तेज हो गए हैं। दिल्ली सरकार ने 5346 शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। इससे पहले सितंबर में 1180 शिक्षकों की भर्ती निकली जा चुकी है। ये भर्ती प्रक्रिया उस योजना का हिस्सा है जिसके तहत सरकारी स्कूल में 18,000 शिक्षकों की नियुक्ति जानी है। इस तारीख से शुरू होगी आवेदन की प्रक्रिया दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने रिक्तियों का विज्ञापन दिया है और 9 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। दिल्ली सरकार का शिक्षा निदेशालय 1075 स्कूल चलाता है, जिसमें 8,24,225 छात्र नामांकित हैं। इसके अलावा निदेशालय से सहायता प्राप्त 199 स्कूलों में 74,563 छात्र नामांकित हैं। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षकों के 18,000 से अधिक पदों में से शिक्षकों की बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में अतिथि शिक्षकों से भरा गया है।  

राजनीतिक बदलाव: दिल्ली HC ने जनसंघ उम्मीदवारों के लिए चुनाव चिह्न को किया तय

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि अखिल भारतीय जनसंघ (ABJS) को बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कॉमन चुनाव चिह्न आवंटित किया जाए। कॉमन चुनाव चिह्न मिलने पर अखिल भारतीय जनसंघ के सभी प्रत्याशियों को एक ही चुनाव चिह्न आवंटित किया जाएगा, जैसे की भाजपा, कांग्रेस या अन्य किसी राजनीतिक पार्टी के प्रत्याशियों को मिलता है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने आदेश के तहत कॉमन चुनाव चिह्न के आवंटन के लिए चुनाव आयोग में एक आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। जनसंघ ने याचिका दायर कर चुनाव आयोग को पार्टी के 25 अगस्त के आवेदन पर विचार करने और जनसंघ के बैनर तले बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एक ही चुनाव चिह्न आवंटित करने का निर्देश देने की मांग की थी। पार्टी की तरफ से तर्क दिया गया था कि जनसंघ का नाम निर्वाचन आयोग की ओर से 20 अक्टूबर 1989 के अपने पत्र के माध्यम से विधिवत पंजीकृत किया गया था। निर्वाचन आयोग ने पार्टी में आंतरिक विवाद का हवाला देते हुए बिहार चुनावों के लिए समान चुनाव चिह्ल आवंटित करने से इनकार कर दिया था।   यह भी तर्क दिया गया था कि समीर सिंह चंदेल की ओर से उठाया गया विवाद अब प्रासंगिक नहीं रहा क्योंकि उन्हें 2019 में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। ऐसे में निष्कासन के बाद पार्टी के मामलों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। यह भी कहा गया कि पार्टी की ओर से 25 मार्च को जारी एक पत्र का भी हवाला दिया, जिसमें पार्टी के नए पदाधिकारियों और कार्यकारिणी के नामों का विवरण दिया गया था। वहीं, निर्वाचन आयोग ने 2019, 2020 और 2021 में जारी विभिन्न पत्रों का हवाला देते हुए कहा था कि ये पत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने का दावा करने वाले समीर सिंह चंदेल और उनके नेतृत्व वाले उक्त गुट के कई अन्य सदस्यों से प्राप्त हुए थे। ऐसे में पार्टी के आंतरिक विवादों को देखते हुए जनसंघ को चुनाव चिह्न नहीं दिया जा सकता है। हालांकि, अदालत ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए याचिका स्वीकार कर ली कि पार्टी को चुनाव आयोग द्वारा आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई थी और इसके लिए उसे एक समान चिन्ह भी आवंटित किया गया था।  

सर्जरी की सफलता: 19 वर्षीय लड़की के पेट से विशाल ट्यूमर हटाकर मिला नया जीवन

नई दिल्ली  दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों ने 19 साल की लड़की को नई जिन्दगी दी। लड़की के पेट में पांच साल से ट्यूमर बन रहा था। पेट में पल रही गांठ ने 10 किलोग्राम का आकार ग्रहण कर लिया था, जिसे सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने एक ऐतिहासिक सर्जरी के साथ समाप्त कर दिया। डॉक्टरों ने बताया, 30 x 20 x 20 सेमी माप और 10.1 किलोग्राम वजन वाले दुर्लभ रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर ने प्रमुख अंगों और वाहिकाओं को विस्थापित कर दिया था, जिससे सर्जिकल टीम के लिए गंभीर चुनौती पैदा हो गई थी। डॉक्टरों की टीम ने बिना किसी जटिलता के ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटा दिया। इस जटिल ऑपरेशन में एनेस्थिसियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, सीटीवीएस विशेषज्ञ, ओटी और आईसीयू स्टाफ, और सहायक टीमें शामिल थीं। सभी विशेषज्ञों का एक ही लक्ष्य था कि मरीज के अंग अपनी सामान्य स्थिति में आ जाएं और ऑपरेशन के बाद शरीर सामान्य तरह से रिकवर करने लगे। डॉक्टरों ने बताया, एचडीयू वार्ड 24 में गहन देखभाल और निरंतर सहायता के बाद, मरीज को अच्छे स्वास्थ्य में छुट्टी दे दी गई। यह जटिल मामला सफदरजंग अस्पताल की विशेषज्ञता, टीमवर्क और जीवन रक्षक देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे एक युवती और उसके परिवार को भविष्य के लिए नई उम्मीद मिली है। निदेशक डॉ. संदीप बंसल, प्रिंसिपल डॉ. गीतिका खन्ना, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बांबा और एचओडी एनेस्थीसिया डॉ. कविता शर्मा के नेतृत्व में, विशेषज्ञ सर्जिकल टीम—जिसका नेतृत्व सर्जरी यूनिट एस6 की प्रोफेसर डॉ. शिवानी बी परुथी ने इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाया है।  

जेवर एयरपोर्ट से बदलेगा NCR का नक्शा, विकास की रेस में टोक्यो को देगा टक्कर

नई दिल्ली दिल्ली-NCR क्षेत्र में अब तक लगभग 3.5 करोड़ लोग रहते हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले बीस सालों में यह क्षेत्र दक्षिण में गुड़गांव और पूर्व में नोएडा की तरफ काफी फैल चुका है। इस विस्तार के चलते दिल्ली-एनसीआर टोक्यो के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शहरी इलाका बन गया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, अगले चार सालों में यह क्षेत्र टोक्यो को भी पीछे छोड़ देगा। दिल्ली-एनसीआर के तेजी से विकास में सबसे बड़ा योगदान नोएडा के जेवर में बनने वाले नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का होगा। इस एयरपोर्ट का नाम नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर से यहां से कॉमर्शियल उड़ानें शुरू होने वाली हैं। यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार और स्विस कंपनी ज्यूरिख एजी के सहयोग से विकसित किया गया है। पूर्वी क्षेत्र के लिए खुलेंगे विकास के दरवाजे मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे की तरह, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) भी क्षेत्रीय विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। जहां इंदिरा गांधी हवाई अड्डा दक्षिणी दिल्ली के विकास का कारण बना, वहीं नोएडा एयरपोर्ट पूर्वी दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों जैसे मेरठ, गाजियाबाद, मथुरा और आगरा को जोड़कर इस क्षेत्र के विकास को नई दिशा देगा। जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। शुरुआत में इस एयरपोर्ट में एक रनवे और एक टर्मिनल (T1) होगा, जो सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों को संभाल सकता है। भविष्य में इस एयरपोर्ट को बढ़ाकर सालाना 7 करोड़ यात्रियों की क्षमता तक ले जाया जाएगा। इसके साथ ही आने वाले वर्षों में यहां कार्गो हब, विमान मरम्मत केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन जाएगा। शुरुआती दौर में 10 शहरों से शुरू होंगी उड़ाने मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि शुरुआती दौर में कम से कम 10 शहरों से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NIA) के लिए सीधे उड़ानें शुरू होंगी। मंत्री ने बताया कि इससे यात्रियों को सुविधा मिलेगी और आसपास के इलाके आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। इस पहल से दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्रों के विकास को भी बल मिलेगा। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से लैस होगा। यात्री यहां स्पर्शरहित (contactless) सफर की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे, जिससे यात्रा और भी तेज और आरामदायक होगी। सुरक्षा जांच में 3डी स्कैनर और बॉडी स्कैनर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, हवाई अड्डे में दो आरामदायक लाउंज और एक खास वीआईपी टर्मिनल भी मौजूद होगा, जो यात्रियों को बेहतर सुविधा और अनुभव प्रदान करेगा। यात्रियों को खास अनुभव देने के लिए तैयार मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने बताया कि यह एयरपोर्ट स्विस दक्षता और भारतीय गर्मजोशी के मिश्रण से डिजाइन किया गया है। यह हवाई अड्डा आधुनिक वास्तुकला और क्षेत्रीय सांस्कृतिक तत्वों को जोड़कर बनाया गया है, जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान एक खास और यादगार अनुभव मिलेगा। जब इंदिरा गांधी हवाई अड्डा और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (NIA) साथ मिलकर काम करेंगे, तो दिल्ली-NCR क्षेत्र में कॉमर्शियल, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल कनेक्टिविटी की गति दोगुनी हो जाएगी। इससे न केवल इस क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा, बल्कि यहां रहने वाले लोगों की जीवनशैली भी बेहतर बनेगी। यह पहल दिल्ली-एनसीआर को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी और सुलभ बनाएगी।

दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी का नया डिजिटल सफर, होंगे बड़े बदलाव

नई दिल्ली दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी को आधुनिक जमाने के अनुसार ढालने की तैयारी की जा रही है। लाइब्रेरी के विस्तार के बाद छात्रों के बैठने की क्षमता लगभग 3,400 हो जाएगी, जबकि वर्तमान में यहां केवल 700 सीटें उपलब्ध हैं। यह बदलाव केवल संरचनात्मक (ईंट-सीमेंट) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाइब्रेरी को डिजिटल सुविधाओं से भी लैस किया जाएगा। इसे देखते हुए डीयू में लाइब्रेरी का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है, जो छात्रों के अध्ययन और शोध के अनुभव को और बेहतर बनाएगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी अपने सैकड़ों साल पुराने इतिहास और विरासत को संभालकर रखती है। इसमें शामिल हैं.18वीं और 19वीं सदी की पांडुलिपियां, कई भाषाओं में लिखी दुर्लभ किताबें,दुर्लभ रत्न और ऐतिहासिक दस्तावेज, मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा जारी तीन मूल फरमान,यह लाइब्रेरी न केवल आधुनिक शिक्षा का केंद्र है, बल्कि भारतीय और वैश्विक ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभाती है। DU की सेंट्रल लाइब्रेरी का इतिहास दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1922 में हुई थी और उस समय इसकी लाइब्रेरी काफी साधारण थी। शुरुआत में इसमें केवल 1,380 उपहार में मिली किताबें और 86 पत्रिकाएं थीं और यह अस्थाई स्थानों से संचालित होती थी। साल 1933 से 1958 के बीच लाइब्रेरी वाइस रीगल लॉज के बॉलरूम में रही, और फिर 1958 में यह सेंट्रल लाइब्रेरी के वर्तमान भवन में शिफ्ट कर दी गई। शुरुआत में लाइब्रेरी में 1,500 से भी कम किताबें थीं, लेकिन आज इसका संग्रह बढ़कर 650,000 से ज्यादा किताबों तक पहुंच गया है। यह विकास लाइब्रेरी को छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आधुनिक और विशाल अध्ययन केंद्र बनाता है। क्या है DU की लाइब्रेरी की खासियत? दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी बर्मा टीक की अलमारियां हैं। ये अलमारियां 1938 से 1952 के बीच डीयू के कुलपति और भारतीय संघीय न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मौरिस ग्वायर द्वारा दान की गई थीं। इन अलमारियों में 27,000 से ज्यादा थीसिस रखी गई हैं। इनमें से पहली थीसिस 1958 में जमा की गई थी, जिसका शीर्षक था ‘भागवत पुराण का एक आलोचनात्मक अध्ययन’। यह संग्रह न केवल लाइब्रेरी के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है, बल्कि शोध और अकादमिक अध्ययन के लिए भी अमूल्य संसाधन है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी के ऊपर के फ्लोर पर स्थित दुर्लभ पुस्तक रूम विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र है। इस पुस्तक रूम के संग्रह में शामिल हैं: मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा जारी तीन मूल फरमान (1676 ई., एएच 1087) जॉर्ज मेरेडिथ की कविताएं (1808) एडब्ल्यू किंगलेक की ईथेन (1863) 18वीं और 19वीं शताब्दी की तिब्बती पांडुलिपियां भारत के 750 ई. के मानचित्र यह संग्रह न केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों और पांडुलिपियों का भंडार है, बल्कि शोध और अध्ययन के लिए अमूल्य संसाधन भी प्रदान करता है। अब हो रहा लाइब्रेरी का विस्तार दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी के विस्तार के लिए लंबे समय से जमीन रिजर्व रखी गई थी और अब इस योजना पर काम शुरू हो गया है। लाइब्रेरी में तीन नए विंग बनाए जा रहे हैं, जो सभी चार-मंजिला ब्लॉक होंगे। इस विस्तार से लाइब्रेरी का क्षेत्रफल 4,775 स्क्वायर मीटर से बढ़कर 18,525 स्क्वायर मीटर हो जाएगा। दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी के विस्तार में आधुनिक तकनीक को भी शामिल किया गया है। नई योजना में बायोमेट्रिक गेट और मेटालिक चिप्स वाली किताबें शामिल हैं, जो लाइब्रेरी को डिजिटल और स्मार्ट बनाएंगी। इस पूरी योजना का बजट 110 करोड़ रुपये रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लाइब्रेरी के विस्तार का पहला चरण इस साल फरवरी में शुरू हुआ था और इसे दिसंबर के अंत तक पूरा किए जाने का अनुमान है। मुख्य बदलाव: लाइब्रेरी का क्षेत्रफल 4,775 से बढ़कर 18,525 स्क्वायर मीटर होगा। बैठने की क्षमता 700 से बढ़कर लगभग 3,400 सीटें होगी। तीन नए चार-मंजिला विंग बनेंगे। डिजिटलाइजेशन के जरिए पांडुलिपियों और दुर्लभ पुस्तकों को संरक्षित किया जाएगा। लाइब्रेरी में बायोमेट्रिक गेट और मेटालिक चिप्स वाली किताबें शामिल होंगी। डीयू ई-लाइब्रेरी पोर्टल से छात्रों को पूरे नेटवर्क के 17.5 लाख संसाधनों तक ऑनलाइन पहुंच मिलेगी। इस विस्तार और डिजिटल पहल से सेंट्रल लाइब्रेरी न केवल आधुनिक बनेगी, बल्कि शोध और अध्ययन के लिए एक सशक्त और स्मार्ट केंद्र के रूप में उभरेगी। डिजिटलाइजेशन पर दिया जा रहा जोर दिल्ली यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी, जो 100 साल पुरानी में ज्ञान का विशाल भंडार मौजूद है। यहां रखी किताबें और पांडुलिपियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें संरक्षित रखने के लिए डिजिटलाइजेशन किया जा रहा है। सेंट्रल लाइब्रेरी, डीयू के 34 लाइब्रेरी नेटवर्क का केंद्र है, जिसमें छात्रों को कुल 17.5 लाख पुस्तकें उपलब्ध हैं। अब डीयू ई-लाइब्रेरी पोर्टल के जरिए छात्रों को पूरे सिस्टम के सभी संसाधनों तक ऑनलाइन पहुंच मिलेगी, जिससे अध्ययन और शोध और अधिक सुलभ और प्रभावी हो जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने किया दिल्ली में मुफ्त एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए रेखा सरकार ने अहम कदम उठाया है। रविवार (5 अक्टूबर) को दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने ‘आकाश कम्युनिटी लाइफ सेवर्स (ACLS) निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा’  के तहत 10 नई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल द्वारा शुरू की गई यह पहल दिल्ली-NCR में त्वरित चिकित्सा सहायता मुहैया कराने और समय पर आपातकालीन सेवाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने एम्बुलेंस सेवा का शुभारंभ दिल्ली के द्वारका स्थित आकाश हेल्थकेयर अस्पताल में आयोजित समारोह से किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आईपीएस अधिकारी रॉबिन हिबू, आकाश हेल्थकेयर के प्रबंध निदेशक डॉ. आशीष चौधरी और स्वास्थ्य क्षेत्र की कई नामी हस्तियां मौजूद रहीं। दिल्ली-NCR में शुरू की गई 10 मुफ्त एम्बुलेंस सेवाएं अत्याधुनिक तकनीक और आवश्यक आपातकालीन उपकरणों से सुसज्जित हैं। प्रत्येक एम्बुलेंस में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हैं: कार्डियक मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर, वेंटिलेटर, सक्शन मशीन, इन्फ्यूजन पंप, ग्लूकोमीटर, पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर, व्हीलचेयर, स्कूप स्ट्रेचर और स्पाइन बोर्ड, प्रशिक्षित पैरामेडिक स्टाफ और आपातकालीन दवाएं. ये एम्बुलेंस एआई, जीपीआरएस ट्रैकिंग और सीसीटीवी से लैस हैं, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित सेवा सुनिश्चित की जा सकेगी। सेवा का लाभ लेने के लिए लोग टोल-फ्री नंबर 1800-303-8888 पर कॉल कर सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने किया एम्बुलेंस सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने सरकारी और निजी भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि जब सरकारी संस्थान निजी अस्पतालों या संस्थाओं के साथ मिलकर जनता को सेवाएं प्रदान करते हैं, तो उस राज्य की दशा और दिशा दोनों बदल जाती है। चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग के लिए हम इस एम्बुलेंस सेवा के शुभारंभ का स्वागत करते हैं।” एक कॉल पर मरीज तक पहुंचेगी एम्बुलेंस स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस नई एम्बुलेंस सेवा के शुरू होने से आदर्श प्रतिक्रिया समय 30 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट हो गया है। उन्होंने बताया कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कॉल करते ही एम्बुलेंस तुरंत मरीज तक पहुंच सके। डॉ. सिंह ने कहा कि राजधानी में कॉलर सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम चल रहा है और आकाश हॉस्पिटल समेत अन्य संस्थानों से भी उन्होंने आग्रह किया कि इस दिशा में और तेजी से सुधार करें। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह एम्बुलेंस सेवा दिल्ली के लिए बेहतर सुविधा के साथ एक प्रशंसनीय कदम है। उन्होंने सभी संस्थाओं से अपील की कि भविष्य में ऐसे ही सहयोगात्मक प्रयास किए जाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ACLS एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है और इसके लिए दिल्ली की जनता से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। मिलावटी खाद्य पदार्थों पर नजर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि त्योहारी सीजन में राजधानी दिल्ली में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्वास्थ्य विभाग और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीमें पूरी तरह सक्रिय हैं और मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। सिंह ने बताया कि राजधानी के विभिन्न स्थानों और बड़ी मंडियों में छापेमारी की कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है और आगे भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि त्योहारों के दौरान जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सकें। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने मिलावटखोरों को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संस्था जो मिलावटी या नकली खाद्य पदार्थ बेचते हुए पकड़ा जाएगा, उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। डॉ. सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और फूड सेफ्टी की टीमें पूरी तैयारी के साथ लगातार छापेमारी में जुटी हैं और राजधानी में मिलावट करने वाला कोई भी बच नहीं पाएगा।

दिवाली के जश्न में खतरा: ग्रेटर नोएडा शनिवार को देश का सबसे प्रदूषित शहर, AQI गंभीर स्तर पर

ग्रेटर नोएडा ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी और वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है, लेकिन इस बार भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तैयारी लगभग न के बराबर है। दोनों विभाग टूटी-फूटी और धूल वाली सड़कों की सफाई के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं, जबकि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान लागू करने से पहले ही वायु प्रदूषण के स्रोत समाप्त करने का निर्देश दिया है। शनिवार को ग्रेटर नोएडा देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहर के रूप में सामने आया। ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 227 मापा गया है। जैसे ही सर्दियाँ आती हैं, दिल्ली एनसीआर क्षेत्र की हवा प्रदूषित हो जाती है। हर साल यह समस्या दोहराती है, इसलिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ठंड शुरू होने से पहले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। इसमें सड़कों से धूल हटाना, टूटी हुई सड़कों की मरम्मत करना, ट्रैफिक जाम दूर करना, खुले में कचरा फैलाने और जलाने पर रोक लगाना शामिल है। हालांकि इस बार भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं है। शहर की अधिकांश सड़कें खराब हालत में हैं, जहां धूल बिखरी हुई है और वाहनों की आवागमन से हवा में धूल उठ रही है। फिर भी धूल हटाने की कोई योजना बनाई नहीं गई है। सांस लेना भी मुश्किल ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है। लोग बताते हैं कि 1 से 15 अक्टूबर के बीच वायु प्रदूषण बहुत बढ़ जाता है। इस बार दिवाली और अन्य त्योहर भी हैं, जिनमें आतिशबाजी के कारण वायु प्रदूषण और गहरा हो जाता है, जिससे सांस लेना कठिन हो जाता है। इसके बावजूद प्राधिकरण और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई तैयारी नहीं की है, जिससे लोगों को प्रदूषण सहन करना पड़ सकता है। बारिश के बाद मिली तीन दिन की राहत खत्म होते ही ग्रेटर नोएडा में वायु प्रदूषण फिर से बढ़ने लगा है। पिछले 24 घंटों में यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक 123 अंक बढ़कर ऑरेंज जोन में पहुंच गया है। जहां शुक्रवार को एक्यूआई 104 था, वहीं शनिवार को यह 227 तक पहुंच गया। यदि यही स्थिति बनी रही, तो अगले दो दिनों में एक्यूआई 300 से ऊपर चले जाएगा।

यात्रा का नया अनुभव: जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली सिर्फ 30 मिनट में!

नई दिल्ली दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा वासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक नया 30 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जो जेवर एयरपोर्ट से सीधे दिल्ली तक पहुंचेगा। यह नया एक्सप्रेसवे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के समानांतर बनाया जाएगा और यमुना नदी को पार करते हुए पुस्ता रोड के जरिए दिल्ली तक पहुंचेगा। यह सड़क नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ते हुए दिल्ली के यातायात को आसान बनाएगी। परियोजना को किसने बढ़ावा दिया? इस प्रोजेक्ट की शुरुआत गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा के प्रयासों से हुई थी। अब इस योजना को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का भी समर्थन मिल गया है। हाल ही में जेवर एयरपोर्ट के दौरे पर उन्होंने फंडिंग देने का ऐलान भी किया। यात्रा का समय घटेगा अभी जेवर से दिल्ली तक पहुंचने में करीब 2 घंटे लगते हैं। नए एक्सप्रेसवे से यह दूरी सिर्फ 30 मिनट में तय की जा सकेगी, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। 1.20 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का हिस्सा नितिन गडकरी के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-NCR में चल रहे 1.20 लाख करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है। अब तक इनमें से आधा काम पूरा हो चुका है। आने वाले समय में सरकार यहां 40 से 50 हजार करोड़ रुपये और निवेश करने को तैयार है। भीड़भाड़ होगी कम नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर रोजाना लगभग 5 लाख वाहन चलते हैं। इनमें से करीब 2 लाख वाहन डीएनडी से गुजरते हैं। चिल्ला बॉर्डर, कालिंदी कुंज और सेक्टर 15, 16, 18, 37 जैसे क्षेत्रों से भी भारी ट्रैफिक आता है। पीक ऑवर में अक्सर जाम लग जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानी होती है। नया एक्सप्रेसवे इन वाहनों को बायपास कराकर सीधे जेवर एयरपोर्ट तक ले जाएगा। जेवर एयरपोर्ट के लिए खास एक्सप्रेसवे यह एक्सप्रेसवे खासतौर पर जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है। यूपी सरकार के अनुसार, 2025 के अंत तक एयरपोर्ट का संचालन शुरू हो जाएगा, जिसके बाद इस एक्सप्रेसवे की जरूरत और बढ़ जाएगी। कौन बनाएगा एक्सप्रेसवे? नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी से फंडिंग को लेकर चर्चा की गई है। तीनों अथॉरिटीज़ का सुझाव है कि यह प्रोजेक्ट NHAI (राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को सौंपा जाए ताकि केंद्र सरकार और अन्य स्रोतों से मिलने वाली फंडिंग का सही उपयोग हो सके।  दिल्ली-NCR के लोगों को ट्रैफिक की परेशानी से राहत देने और जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली की कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए यह नया एक्सप्रेसवे एक गेमचेंजर साबित हो सकता है।  

रिटायरमेंट का सपना सच! रूस की महिला ने बताया बेंगलुरु सबसे आदर्श शहर

नई दिल्ली भारत के सिलिकॉन सिटी के नाम से जाना जाने वाला बेंगलुरु अब विदेशी लोगों की भी पहली पसंद बनता जा रहा है। इस दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें रूस की एक महिला ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू को अपना पसंदीदा शहर करार दिया है। दरअसल, यूलिया नाम की एक रूसी महिला ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होंने अपने विचार को साझा किया और बेंगलुरु को भारत में रहने के लिए सबसे बेहतरीन शहर बताया। साइबेरिया में जन्मी और पली-बढ़ी यूलिया ने कहा कि बेंगलुरु का मौसम और जीवनशैली इसे भारतीय शहरों में उनकी पहली पसंद बनाती है। इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने बेंगलुरु को धूपदार, गर्म और हरा-भरा बताया है। इसके अलावा उन्होंने भारत के अन्य महानगरों की तुलना में इस शहर को एकदम संतुलित बताया है। अपने वीडियो में उन्होंने बताया कि दिल्ली और जयपुर में सर्दियां जमने वाली लगती हैं, जबकि चेन्नई और मुंबई बहुत ज़्यादा गर्मी होती है। उन्होंने कहा कि अपने सुहावने मौसम के कारण उनको बेंगलुरू एकदम सही लगा। ट्रैफिक की समस्या का ना करें जिक्र अपने इस वीडियो संदेश में यूलिया ने शहर के संस्कृति की भी सराहना की। उन्होंने इस शहर को भारत की पब राजधानी करार दिया और रिटायरमेंट के बाद रहने के लिए स्वर्ग बताया। हालांकि, उन्होंने अपने पोस्ट में लोगों से शहर के ट्रैफिक के बारे में जिक्र ना करने की अपील की है। कई लोगों को पसंद आता है बेंगलुरु उल्लेखनीय है कि तापमान और यहां के वातावरण के कारण बेंगलुरु भारत में ही रहने वाले कई लोगों के लिए पहली पसंद है। मुंबई, चेन्नई और दिल्ली जैसे शहरों की तुलना में, बेंगलुरु में साल भर हल्का तापमान रहता है और आसपास का हरा-भरा वातावरण शहर को ठंडा रखने में मदद करता है।