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लहर खबरों की

Aastha Pandey

Writer News & Blogger

आत्मविश्वास से भरा नया अध्याय :स्पष्ट विज़न के साथ

mohan yadav

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दो साल पूरा कर चुके डॉ. मोहन यादव अब पहले से कहीं ज़्यादा आत्मविश्वास और स्पष्ट विज़न के साथ आगे बढ़ते दिख रहे हैं। बीते दो वर्षों में राज्य ने नक्सलवाद से मुक्ति, रिकॉर्ड स्तर पर औद्योगिक निवेश और कई बड़े विकास प्रोजेक्ट्स की शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए हैं। उज्जैन से लेकर भोपाल तक, इंफ़्रास्ट्रक्चर से लेकर शिक्षा-स्वास्थ्य तक, और उद्योग से लेकर ग्रामीण विकास तक—हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। अब जब उनका दो वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका है, डॉ. यादव की नज़रें अगले तीन वर्षों पर हैं, जहाँ वे सड़क, बिजली, रोजगार, कृषि और तकनीकी विकास को तेज़ गति देने की तैयारी में जुटे हैं। आत्मविश्वास से लबरेज़ डॉ. मोहन यादव की नज़र अब अगले तीन वर्षों पर — मध्यप्रदेश में विकास की नई कहानी परिचय: आत्मविश्वास से भरा नया अध्याय डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी। दो साल पूरा होने पर आज वे पहले से कहीं ज़्यादा आत्मविश्वास से भरे और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ दिखते हैं। अपने भाषणों और निर्णयों में वे बार-बार कहते हैं कि उनका लक्ष्य है सबका विकास, सबके लिए अवसर और मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में लाना। यह उनके नेतृत्व की उन पहलुओं में से एक है जिसने जनता के बीच उम्मीदें और ऊर्जा दोनों बढ़ाई हैं। यह लेख इसी यात्रा को आसान शब्दों में विस्तार से समझाता है – उनके दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियां, चुनौतियाँ, योजनाएँ और आगे की दिशा। ये खबर भी पढ़े …ऑक्सफोर्ड डिबेट विवाद: पाकिस्तान झूठ बोला, भारत ने पोल खोली दो साल का सफ़र — चुनौतियों से उपलब्धियों तक डॉ. मोहन यादव का कार्यकाल शुरू हुआ जब उन्होंने लंबे समय तक सत्ता संभाले पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का स्थान लिया। यह परिवर्तन जैसा भी था, उम्मीदों के साथ चुनौतियाँ भी थी, क्योंकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना था कि नए नेतृत्व के रूप में उन्हें नीतियों और संगठन को संतुलित करना आसान नहीं होगा। लेकिन उन्होंने कम बात, ज़्यादा काम की नीति अपनाई और सरकारी कार्यों पर पूरा फोकस रखा। ये खबर भी पढ़े …IFFI Award: जापानी ‘ए पेल व्यू ऑफ हिल्स’, इफ्फी प्रेमियों ने लिया आनंद मुख्य उपलब्धियां — आंकड़ों और काम की बातें डॉ. यादव सरकार ने मध्यप्रदेश को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से पूरी तरह मुक्त घोषित कर दिया है। बालाघाट और अन्य क्षेत्रों में नक्सलियों का आत्मसमर्पण हुआ है और भारी इनामी नेताओं ने हथियार डाल दिए हैं। यह उपलब्धि सुरक्षा, कानून व्यवस्था और गंभीर सरकारी रणनीति का परिणाम है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) 2025 में मध्यप्रदेश को 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले, जो राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को बड़ा धक्का देगा। इन निवेशों से लाखों नौकरियां और बड़े इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट लॉन्च होंगे। इसके अलावा टेक्नोलॉजी और उद्योग सम्मेलन में भी राज्य को करीब 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिससे रोजगार और तकनीकी निवेश को बल मिलेगा। इन निवेशों से केवल कंपनियों को लाभ नहीं बल्कि युवाओं को रोजगार, ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियाँ, और पेट्रोलियम, ऊर्जा तथा सेवा क्षेत्रों में विकास के नए अवसर मिलेंगे। 3. किसान, युवा और महिलाओं के लिए सपोर्ट डॉ. यादव ने नीति बनायी कि विकास योजनाएँ तभी सफल होंगी जब आम जनता तक आर्थिक मदद सीधे पहुंचे: गरीबों और किसानों के लिए योजनाओं में सहायता और बीमा दावा सुनिश्चित कराना महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं का विस्तार युवा वर्ग के लिए स्किल डेवलपमेंट और नौकरी का अवसर अधिक से अधिक सुनिश्चित करना ऐसे कदमों से आम लोगों की ज़िंदगी प्रत्यक्ष रूप से बेहतर हुई है तथा ग्रामीण और छोटे कारोबारी वर्ग को भी समर्थन मिला है। 4. शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में कदम पिछले दो सालों में– नई मेडिकल कॉलेजों और शिक्षा संस्थानों की शुरुआत की गयी स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तारित किया गया युवा वर्ग के लिए रोजगार निर्माण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान रखा गया ये कदम प्रदेश के दीर्घकालिक सामाजिक और आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर उठाये गए हैं। 5. सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को बढ़ावा डॉ. मोहन यादव ने सांस्कृतिक धरोहरों और आध्यात्मिक पर्यटन को भी प्राथमिकता दी है। उज्जैन जैसे शहरों में पारंपरिक तथा वैश्विक स्तर के आयोजन किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। अगले तीन वर्षों का विज़न — दिशा और योजनाएं अब दो साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, और मुख्यमंत्री का ध्यान अगले तीन वर्षों की योजनाओं पर केंद्रित है। उनका लक्ष्य साफ़ है-सड़क, बिजली, और बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत बनानाऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों पर काम करनाकृषि, सिंचाई और खाद्य प्रसंस्करण को अधिक सक्षम बनानायुवाओं के लिए तकनीकी और रोजगार के अवसर बढ़ाना डॉ. यादव यह मानते हैं कि अगले तीन वर्षों में राज्य को आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से नई ऊँचाइयों तक पहुंचाना है। इन योजनाओं का केंद्र बिंदु साधारण है: लोगों को रोज़गार मिले, पंचायत और गाँव मजबूत हों, और युवाओं में आत्मनिर्भरता आये। शिक्षा, कानून व्यवस्था और सुरक्षा सीएम मोहन यादव ने कहा है कि कानून व्यवस्था बेहतर रहे तभी विकास की राह सुगम होगी. इसलिए प्रदेश में पुलिस भर्ती, सुरक्षा फोर्स का विस्तार और रेफॉर्म मुख्य एजेंडा रहा है। इस नीति ने सुरक्षा में सुधार और शांति की भावना बनी रहने में मदद की है।कृषि, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचा किसानों के लिए बीज, सिंचाई, समर्थन मूल्य और फसल बीमा योजनाओं का विस्तार कृषि क्षेत्र में तकनीकी मदद और संसाधन उपलब्ध यह नीति आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है। उद्योग, MSME और स्टार्टअप इकोसिस्टम मुख्यमंत्री ने MSME सेक्टर को भी बढ़ावा दिया है। विभिन्न सम्मेलनों और सम्मेलन के अवसरों पर वित्तीय सहायता, कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल मार्केटिंग सहायता दी गयी है। इसका उद्देश्य छोटे और मझोले उद्योगों को राष्ट्रीय और ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। 2 वर्षों की समीक्षा और 3 वर्षों की तैयारियाँ यह दो-साल की यात्रा सिर्फ़ आंकड़ों का बयान नहीं है, बल्कि यह लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का परिणाम है। विकास योजनाओं की गति, नक्सल मुक़्ती, बड़ा निवेश, और सामाजिक कल्याण नीतियाँ यह दिखाती हैं … Read more

MCU Bhopal: कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमोस्ट्रेशन

MCU Bhopal

MCU Bhopal Cartoon Shows Exhibitions and Live Demonstrations भोपाल। अखबार का धड़कता हुआ दिल पन्नों पर दिखने वाली छोटी सी काठी नहीं, बल्कि वह तेज़, तीक्ष्ण और कभी-कभी दर्दनाक दृष्टि है जो हँसी के बहाने समाज को आईने में दिखाती है। राजधानी के इस अनूठे कार्टून कार्यक्रम में पेंसिलों ने शब्दों से भी ज़्यादा कुछ कह दिया। लाइव स्केचिंग, प्रदर्शनी और चर्चाओं ने यह प्रमाणित किया कि कार्टून केवल चुटकला नहीं, सोचने का माध्यम भी है। मंच पर हर रेखा में सवाल थे और हर हँसी के पीछे एक गहरी सीख नजर आ रही थी। यह नज़ारा था शुक्रवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमॉन्सट्रेशन का। सोचने पर मजबूर हम रेखाओं से दिमाग की तरह की नसों पर हल्का सा खरोंच करते हैं हँसी आती है तो सोच भी जग जाती है। अखबार का दिल तब और जोर से धड़कता है जब कार्टून उसकी सूनी राहों में परोक्ष सच फेंक देते हैं। और मंच से देशभर के नामी कार्टूनिस्टों ने भी कुछ ऐसे ही तीखे-मीठे बयान दिए जो मीडिया के विद्यार्थियों को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर कर रहे थे। अभिन्न अंग है शब्द और शीर्षक अखबार का ढांचा खड़ा करते हैं, कार्टून किसी अखबार का धड़कता हुआ दिल है।” यह उद्गार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने उद्घाटन सत्र में कहे। उन्होंने कहा कि कार्टूनिंग अखबार का एक अभिन्न अंग है और मीडिया के पाठ्यक्रमों में कार्टूनिंग जैसे विषयों को शामिल करना चाहिए। उनका मानना था कि कार्टून की कला तब तक रहेगी जब तक मानव जीवन रहेगा, क्योंकि शब्दों की सीमाओं के बाहर भी चित्र और रेखाएँ बहुत कुछ बोल जाती हैं। कार्यक्रम में प्रदर्शनी, लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन तथा कार्टून एप्रिशिएशन कार्यशाला से यह साबित हुआ कि कार्टून कला न केवल जीवित है, बल्कि बदलते मीडिया परिदृश्य और सोशल मीडिया की चुनौतियों के बीच नए आकार ले रही है। छात्रों के सवालों और कलाकारों के जवाबों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह विधा अभी भी उस क्षमता से भरी है जो समाज को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर कर दे। विज्ञापन हावी कार्टून की कला के बारे में कहा जाता है कि यह सिमटती जा रही है। हर तरह के मीडिया में कार्टून के लिए जगह सिमटती जा रही है, इस विषय पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट डा. देवेंद्र शर्मा ने कहा कि मौजूदा वक्त में मीडिया में बहुत बदलाव आ गए हैं। कार्टून की कला में बहुत कमी आ रही है ऐसा पूरी तरह से सही नहीं है, दरअसल कार्टून को लोग अब भी देखना चाहते हैं। आज मीडिया में विचार कम दिखते हैं, विज्ञापन हावी है और बाजार के अन्य कारकों का दबाव भी है, लेकिन इसके बावजूद कार्टून की कला लगातार अपनी जगह बनाए हुए है और नए आकार ले रही है। इसी बात पर सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी ने कहा कि कार्टून में ह्यूमर और व्यंग्य दोनों ही होते हैं। आज कार्टून सोशल मीडिया पर भी पसंद किए जा रहे हैं और बहुत बड़ी तादाद में लोग उन्हें फालो करते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह के रिएक्शन आते हैं उससे हार्ड विषयों पर कार्टून बनाना मुश्किल भी होता जा रहा है। लेकिन कार्टून के कलाकार लगातार व्यंग्य और हास्य के साथ कार्टून बना रहे हैं। कार्टूनिंग की कला वरिष्ठ कार्टूनविद त्र्यम्बक शर्मा ने कहा कि आज सोशल मीडिया जैसे नए माध्यमों में ह्यूमर का स्वरूप बदल गया है। हमारी सोच भी बदलती जा रही है। हमारे जीवन में एआई का दखल बढ़ रहा है। इन सब का असर स्वाभाविक तौर पर कार्टूनिंग की कला पर पड़ रहा है। पत्रकारिता और मीडिया में कार्टून के विषयों पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट हरिमोहन ने कहा कि कार्टून जर्नलिज्म का शुद्धतम रूप है। इस विधा में ज्यादातर राजनैतिक विषयों पर ही कार्टून बनते हैं। कार्टूनिस्ट शिरीष श्रीवास्तव ने कहा कि ज्यादातर कार्टूनिस्टों के लिए राजनीति एक सदाबहार विषय होता है लेकिन समसामयिक आधार पर विषयों का चयन बदलता रहता है। गुणों का होना जरूरी मुंबई से इस अवसर पर आए वरिष्ठ कार्टून विशेषज्ञ प्रशांत कुलकर्णी ने कहा कि कार्टूनिस्ट के नजरिये से हमें हर चीज ह्यूमर लगती है। चुनावी वक्त भी कार्टून निमार्ण के विषयों के लिहाज से बहुत अच्छा होता है। प्रसिद्ध कार्टूनिस्टर इस्माइल लहरी ने कहा कि कार्टून के कलाकार की दृष्टि अलग होती है। उसका नजरिया जरा हटकर होता है। वह चीजों को एक अलग तरह से देखता है। और उसमें इन गुणों का होना जरूरी है। तभी कार्टून अच्छे और प्रभावशाली बन पाते हैं। उन्होंने कहा कि कार्टून केवल चुटकला नहीं है। यह एक गंभीर विधा है। वरिष्ठ कार्टूनिस्ट गोविंद लाहोटी ने कहा कि कार्टूनिस्ट के भीतर विचार हमेशा कौंधते रहते हैं। यह सतत चलने वाली एक प्रक्रिया है। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्टूनविद माधव जोशी ने कहा कि दरअसल कोई भी कलाकार दुनिया को अपनी कला से कुछ न कुछ देता है। कार्टून बनाने वाले हास्य और व्यंग्य के साथ आम जन को मीडिया के जरिये एक विषय देते हैं जिस पर वे सोच सकते हैं।सभी विशेषज्ञों ने कहा कि कार्टून कलाकार निर्जीव चीजों में भी प्राण डाल देते हैं। यह हंसने की नहीं सोचने की चीज है। हम सभी में एक कार्टूनिस्ट होता है। वे उन्हें सजीव बनाने का सार्मथ्य रखते हैं। लाइव स्केचिंग पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आयोजित हुए इस अनूठे कार्टून शो एवं लाइव स्केचिंग में देश के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट देवेंद्र शर्मा, त्रयंबक शर्मा, प्रशांत कुलकर्णी, माधव जोशी, हरिमोहन वाजपेयी, चंद्रशेखर हाडा और अभिषेक तिवारी , इस्माइल लहरी और कुमार, हरिओम और शिरीष शामिल हुए। वरिष्ठ पत्रकार शिफाली पांडे ने इस पहले सत्र का संचालन किया। दूसरे सत्र में सभी विशेषज्ञों ने दोपहर दो बजे तक्षशिला और विक्रमशिला परिसर में दो ज्वलंत विषयों शहरी विकास यात्रा और भ्रष्टाचार पर लाइव स्केचिंग भी की। अपनी तरह के अनूठे कार्टून शो के इस पहले सीजन में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने अलग_अलग विषयों पर लाइव स्केच बनते हुए देखे तथा कलाकारों से संवाद भी किया। विस्तार से चर्चा कार्यक्रम के अंतिम सत्र में कार्टून एप्रिशिएसन कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें वरिष्ठ कार्टून कलाकार प्रशांत कुलकर्णी ने सोशल कार्टूनिंग … Read more

Bhopal News: डिवीजनल आईटीआई कैंपस प्लेसमेंट – टर्नर ट्रेड में 29 का चयन

Campus Placement

Divisional ITI Campus Placement – 29 selected in Turner trade भोपाल। सरकारी डिवीजनल आईटीआई गोविंदपुरा,भोपाल ने एक बार फिर उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल की है। प्रतिष्ठित कंपनी मॉथरसन ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजीज़ एंड इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव में संस्थान के कुल 36 प्रशिक्षुओं का चयन किया गया। इनमें टर्नर ट्रेड के सर्वाधिक 29, फिटर के 3 तथा मशीनिस्ट के 2 प्रशिक्षु शामिल हैं। उद्योग से रोजगार उल्लेखनीय है कि सभी चयनित प्रशिक्षु अभी अपने अंतिम वर्ष में ही अध्ययनरत हैं, इसके बावजूद उन्हें उद्योग से रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था, बेहतर तकनीकी शिक्षा तथा उद्योग- संबंधी कौशलों को दर्शाती है। कौशल विकास मिशन टर्नर ट्रेड के उत्कृष्ट परिणाम के लिए प्रशिक्षण अधिकारी संदीप चौकसे के मार्गदर्शन और सतत प्रयासों की विशेष सराहना की गई है, जिन्होंने छात्रों को कौशल आधारित प्रशिक्षण और उद्योग-उन्मुख तैयारी प्रदान की। डिवीजनल आईटीआई,भोपाल की यह सफलता न केवल संस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि प्रदेश के कौशल विकास मिशन को भी नई दिशा प्रदान करती है।

Bhopal News: किसान भाई फार्मर आईडी बनवाएं, कलेक्टर सिंह ने की अपील

Collector bhopal

Collector Singh appeals to farmers to get their Farmer IDs made भोपाल । कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने जिले के सभी किसान भाइयों से अपील है कि सभी अपनी फार्मर आईडी बनवाएं जिससे शासन की कल्याणकारी योजनाओं का निरंतर लाभ प्राप्त हो सके। सुविधाजनक विपणन कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने उन्होंने बताया कि समस्त भू-धारियों को एक यूनिक फार्मर आई.डी. प्रदान की जाएगी, जिसके माध्यम से शासन की योजनाओं का नियोजन, लाभार्थियों का सत्यापन एवं कृषि उत्पादों का सुविधाजनक विपणन हो सकेगा। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुगम एवं पारदर्शी तरीके से प्रदान करने हेतु लक्ष्य निर्धारण एवं पहचान हो सकेगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद फार्मर आईडी से फसल बीमा योजना का लाभ प्राप्त करने एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद में कृषकों के पंजीयन में सुगमता होगी। फार्मर आईडी से किसानों के लिए कृषि ऋण एवं अन्य सेवा प्रदाताओं के लिए कृषि सेवाओं की सुगमता। फार्मर आईडी से विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने हेतु बार-बार सत्यापन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

MPRDC: 8 दिसंबर तक हर पुल की पूरी रिपोर्ट जमा करने के निर्देश, एमडी ने ली बैठक

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MPRDC Instructions to submit complete report of every bridge MD held a meeting भोपाल। प्रबंध संचालक एमपीआरडीसी भरत यादव द्वारा निगम के अधीन संधारित सभी पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। प्रबंध संचालक यादव ने बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अधिकारी 08 दिसंबर तक निगम अंतर्गत संधारित प्रत्येक पुल का निरीक्षण कर जारी किये गए प्रमुख तकनीकी व सुरक्षा मानको के अनरूप जानकारी पूर्ण कर निर्धारित प्रारूप में स्थल के जियो-टैग फोटोग्राफ्स सहित अनिवार्य रूप से प्रेषित करें, ताकि पुलों की सुरक्षा और संरचनात्मक स्थिति का समय पर मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके। प्रमुख तकनीकी व सुरक्षा निर्देश • मौजूदा पुलों की सीमेंट कांक्रीट वियरिंग कोट पर किसी भी स्थिति में B.T. ओवरले नहीं किया जाए; IRC:SP:59-2019 के अनुसार DPR में मैस्टिक ऐस्फाल्ट लेयर शामिल की जाए। • निर्माण एवं मरम्मत कार्य में IRC:SP:55-2014 के अनुरूप Work-Zone Safety सहित सभी सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन किया जाए। • ब्रिज रेस्टोरेशन की कार्य-विधि मुख्यालय के CE एवं ब्रिज सलाहकार से अनुमोदित कराई जाए। • अत्यधिक क्षतिग्रस्त/असुरक्षित पुलों पर जिला कलेक्टर से अनुमति लेकर वैकल्पिक मार्ग बनाकर आवागमन पूर्णत: रोका जाए। • मरम्मत/सुधार कार्य हेतु केवल अनुभवी एजेंसी का चयन किया जाए तथा RFP में विशेष शर्तें जोड़ी जाएं। • जोनल एजेंसी के माध्यम से किसी भी स्थिति में मरम्मत कार्य न कराया जाए, जैसा कि बरेली ब्रिज मामले में त्रुटियाँ मिली थीं। • सभी GM/CE अपने औचक निरीक्षण में Very poor एवं poor कैटेगरी के पुलों के निरीक्षण को अनिवार्य रूप से सम्मिलित करें। • प्रत्येक पुल की मरम्मत ब्रिज विशेषज्ञ/एडवाइजर की निगरानी में कराई जाए। • पुल संधारण/पुनर्निर्माण हेतु नुक़सान के आंकलन व अनुशंसा के लिए विशेषज्ञ नियुक्त किया जाएगा जो कार्य पूर्ण होने पर तकनीकी प्रमाणन करेगा। • नए एवं अच्छी स्थिति वाले पुलों पर Protective Coatings (Anti-carbonation, Steel Painting) सुनिश्चित किए जाएं। • नए पुल चालू होने के बाद पुराने क्षतिग्रस्त पुलों पर आवागमन रोका जाए। • Very poor एवं poor ब्रिज पर चेतावनी साइनबोर्ड (धीमे चलें/गति-सीमा) तथा दोनों ओर स्पीड ब्रेकर अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। • जो पुल MPRDC के नहीं हैं, लेकिन Very poor/poor सूची में हैं, उनके संबंध में संबंधित विभाग को पत्र/ई-मेल द्वारा तत्काल सूचित कर मुख्यालय को भी जानकारी भेजी जाए। • सभी संभागीय प्रबंधक अपने अधीनस्थ AGM/Manager के बीच उचित कार्य-विभाजन कर इसकी सूचना मुख्यालय को दें।• मैस्टिक ऐस्फाल्ट/बिटुमिनस वियरिंग कोट बिछाते समय Expansion Joints किसी भी स्थिति में ब्लॉक/ओवरले न हों; नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए। • साधारण संधारण जैसे रंगाई-पुताई, साइनज फिक्सिंग, रैलिंग/क्रैश बैरियर/सुरक्षा उपकरणों की मरम्मत जोनल एजेंसी से कराई जाए। • Deck एवं Approach Drainage System का नियमित रखरखाव आवश्यक है। • River/Nalla Training व वेजिटेशन क्लियरेंस समय-समय पर की जाए; पुलों के नीचे/आसपास प्राकृतिक बहाव बाधामुक्त रखा जाए। • High Flood Level (HFL) की सतत मॉनिटरिंग एवं वार्षिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। • सभी पुलियों की Barrel Cleaning एवं Wingwall/Headwall का नियमित रखरखाव किया जाए। • आवश्यकतानुसार IRC गाइडलाइन अनुसार Load Carrying Capacity व Structural Adequacy का परीक्षण कराया जाए। • Very poor/poor कैटेगरी एवं हस्तांतरित पुलों का UPV, Core Test, Carbonation, Chloride Test एवं IRC:6/IRC:78 अनुसार Seismic/Structural Vulnerability Test कराया जाए; Geo-tag आधारित फोटो दस्तावेज़ भी अनिवार्य। • Utility Lines/Pipelines हेतु संबंधित विभागों से समन्वय कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए; नुकसान पाए जाने पर वैकल्पिक उपाय सुनिश्चित कराए जाएं; MORTH व IRC:98-2013 के निर्देशों का पालन किया जाए। अतिरिक्त तकनीकी निर्देश • Strip Seal/Rubber Cascade Joints का नियमित रखरखाव, EPDM/Rubber Element की तिमाही जांच एवं आवश्यकता अनुसार परिवर्तन। • स्कॉरिंग व Structural Exposure की नियमित जांच व मरम्मत। • Bearings की Functional Condition व Substructure Defects (Crack, Honeycombing, Seepage) की जांच और सुधार। • Superstructure Underside/Girder Soffit का नियमित निरीक्षण व सुधार। • Bridge Approach, Settlement & Transition Slab का सतत निरीक्षण व सुधार। • सुधार कार्य पूर्ण होने के बाद पालन प्रतिवेदन मुख्यालय को अनिवार्य रूप से भेजा जाए। निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाये।

Bhopal News: ऑरीगेमी कार्यशाला, मानसिकमंद- बौद्धिक दिव्यांग विद्यार्थियों का कार्यक्रम

Origami Workshop

Origami Workshop Special Programme for Mentally Retarded – Intellectually Disabled Students भोपाल। क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय भोपाल (राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, नई दिल्ली का क्षेत्रीय केंद्र) द्वारा मानसिकमंद/बौद्धिक दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए “ऑरीगेमी कार्यशाला एवं प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मीरियम स्कूल फॉर द मेंटली हैंडीकैप्ड, भोपाल और उमंग गौरवदीप वेल्फेयर सोसाइटी के कुल 20 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण दिया कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें प्राणी-जगत की विविधता और उसके महत्व से परिचित कराना था। कार्यक्रम की शुरुआत में संग्रहालय की कार्यालय अध्यक्ष एवं वैज्ञानिक-डी, डॉ. बीनिश रफ़त ने ऑरीगेमी विशेषज्ञ विनय सप्रे (सेवानिवृत्त वरिष्ठ अनुदेशक, जवाहर बाल भवन, भोपाल) तथा उपस्थित शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यशाला के दौरान श्री सप्रे ने विद्यार्थियों को ऑरीगेमी कला के माध्यम से विभिन्न प्राणियों जैसे—सारस और बतख—बनाने का प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न आकृतियाँ तैयार कीं। प्रतियोगिता में: विजेता घोषित किए गए। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन संग्रहालय के वैज्ञानिक-सी एवं कार्यक्रम समन्वयक श्री मानिक लाल गुप्ता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

MCU Bhopal: ‘भारत की भारतीय अवधारणा’ पर युवा संवाद, सनातन संस्कृति पर चर्चा

MCU Bhopal

MCU Bhopal Youth dialogue on ‘Indian concept of India भोपाल। सुपरिचित चिंतक डॉ. मनमोहन वैद्य ने भारत की भारतीय अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा है कि राष्ट्र का अर्थ नेशन नहीं है। भारत में एक राजा और एक भाषा नहीं थी किंतु उत्तर से दक्षिण तक समाज अध्यात्म और संस्कृति के मूल्यों से एकरूप रहा है। इसने ही सनातन राष्ट्र का निर्माण किया। यह समाज राज्याश्रित नहीं था और स्वदेशी समाज था। हम और यह विश्व डॉ. वैद्य माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय में आयोजित युवा संवाद को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन विद्यार्थियों के अध्ययन मंडल व पत्रकारिता विभाग ने संयुक्त रूप से किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने की। डॉ. वैद्य की इस सिलसिले में हाल में एक पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ प्रकाशित हुई थी जिसका पिछले दिनों ही राजधानी में लोकार्पण हुआ था। डॉ.वैद्य ने कहा कि भारतीय समाज पूरी तरह आत्मनिर्भर था और यह आयात नहीं, निर्यात करता था। विश्व के व्यापार में हमारी लगभग दो तिहाई भागीदारी थी जितनी ब्रिटेन व अमेरिका की मिलाकर भी नहीं थी। राष्ट्र के घर-घर में उद्यम होता था। वैद्य ने कहा उद्योग में मातृशक्ति का अद्भुद योगदान होता था। हमारे घर संपदा निर्माण के केन्द्र थे। इसी वजह से गृहिणी को गृहलक्ष्मी कहा गया है। आपने कहा कि उत्पादन में प्रचुरता, वितरण में समानता और उपभोग में संयम-यही भारत का विचार है। डॉ. वैद्य ने कहा कि भारत में सांस्कृतिक विविधता नहीं थी अपितु एक ही संस्कृति विविध रूपों में प्रकट होती है। आध्यात्मिकता ने भारत के विचार को गढ़ा है। हमने विश्व कल्याण की बात की है। उन्होंने पराभूत मानसिकता को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि 2014 के बाद से भारत की बात को फिर से दुनिया में सुना जा रहा है। धर्म का व्यापक अर्थ द संडे गार्जियन ने अपने संपादकीय में लिखा था कि भारत फिर से स्वाधीन हुआ है। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि धर्म भारतीय अवधारणा है जिसका कोई अंग्रेजी पर्याय नहीं है। भारत में धर्म का व्यापक अर्थ रहा है। समाज के उपकार के लिए उसको लौटाना धर्म माना गया। भारत धर्म पर चला। लोकसभा से लेकर हमारी तमाम बड़ी संस्थाओं के बोधवाक्य को धर्म से लिया गया। तिरंगे के बीच अशोक चक्र वास्तव में धर्मचक्र है जिसका प्रवर्तन राजा अशोक ने किया। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता भारतीय शब्द नहीं है। यह शब्द ईसाईयत के सत्ता में हस्तक्षेप के बाद सरकारों का चरित्र तय करने के लिए पश्चिम का गढ़ा गया शब्द है। 1976 में बिना किसी बहस के इसे भारतीय संविधान में शामिल कर लिया गया। उन्होंने कहा कि राज्य को धर्म से ऊपर उठकर काम करना चाहिए, व्यक्ति धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता। कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि भारत क्या है और इसे समझने के लिए हमारी दृष्टि क्या होनी चाहिए, यह डॉ. मनमोहन वैद्य के चिंतन व लेखन से स्पष्ट होता है। पत्रकारिता दुनिया को 360 डिग्री से देखने की कला है। यह दृष्टिकोण पत्रकारिता विश्वविद्यालय देता है। उन्होंने हम और यह विश्व की चर्चा करते हुए कहा कि इसमें अल्लामा इकबाल के हम बुलबुले हैं इसको लेकर सर्वथा नया दृष्टिकोण दिया गया है। डॉ. वैद्य ने इसे आगे बढ़ाते हुए कहा कि बुलबुले बाग में संकट आने पर उड़ जाती हैं, पौधे जल जाते हैं किंतु बाग से डिगते नहीं हैं। हम सब इस बाग के पौधे हैं। कार्यक्रम का संचालन छात्र राजवर्धन सिंह ने किया। नाटक का मंचन आज भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय में 3 दिसंबर बुधवार को नाटक ‘फिल्म स्टार पाटोल बाबू’ का मंचन किया जाएगा। सृजन श्रृंखला की द्वितीय कड़ी के रूप में रंग माध्यम नाट्य संस्था की यह प्रस्तुति गणेश शंकर विद्यार्थी सभागार में दोपहर 3ः00 बजे होगी। नाटक का निर्देशन दिनेश नायर ने किया है।

IAS Santosh Verma: सांसद आलोक शर्मा ने की केंद्रीय मंत्री से शिकायत, बख्शा नहीं जाएगा

MP Alok Sharma

IAS Santosh Verma MP Alok Sharma complains to Union Minister भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा दिए विवादित बयान को लेकर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। समाज में रोष सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह को सौंपे ज्ञापन में कहा कि आईएएस संतोष वर्मा ने सार्वजनिक मंच से जाति-विशेष के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे समाज में रोष व्याप्त है। उनके कथन से भारतीय संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय, समानता और गरिमा के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणी समुदाय विशेष के सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा पर प्रत्यक्ष आघात पहुंचाती है। विभाजन को बढ़ावा सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि संतोष वर्मा ने दिए बयान में कहा था कि “जब तक एक व्यक्ति अपने बेटे को किसी विशेष समुदाय की बेटी से संबंध या दान नहीं देता, तब तक आरक्षण छोड़ने का कोई विचार नहीं होगा।” श्री शर्मा ने कहा कि यह बयान न केवल जाति और लैंगिक आधार पर भेदभावपूर्ण है, बल्कि सामाजिक तनाव और विभाजन को बढ़ावा देने वाला भी है। ऐसे बयान महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की गई ऐसी टिप्पणी जनता के बीच अविश्वास और आक्रोश पैदा करती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत घातक है।केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मामले की गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

Police QR: अब कोड से थानों की ‘हकीकत’ बताएगी जनता, बढ़ेगी जवाबदेही

Police QR

Police QR codes will now tell the public the reality of police stations भोपाल। राजधानी भोपाल में पुलिस व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। भोपाल पुलिस कमिश्नर हरि नारायणचारि मिश्रा ने घोषणा की है कि शहर के सभी थानों में अब विशेष क्यूआर (QR) कोड लगाए जाएंगे। यह पहल नागरिकों को सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक अपनी शिकायतें और फीडबैक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम प्रदान करेगी, जिससे ‘जनता बताएगी थानों की हकीकत’ का सिद्धांत धरातल पर उतरेगा। कमिश्नर की प्रेस वार्ता और नई पहल पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारि मिश्रा ने बताया कि इस क्यूआर कोड का मुख्य उद्देश्य पुलिस थानों की कार्यप्रणाली पर नागरिकों की सीधी निगरानी (Citizen Surveillance) स्थापित करना है। जो भी व्यक्ति अपनी समस्या या शिकायत लेकर थाने आएगा, वह थाने के अंदर लगे इस क्यूआर कोड को स्कैन करके अपनी शिकायत के निराकरण की स्थिति, पुलिसकर्मियों के व्यवहार और दी गई सेवा की गुणवत्ता पर अपना फीडबैक (Field Back) दे सकेगा। सफलता बनी आधार कमिश्नर मिश्रा ने बताया कि यह पहल यूं ही शुरू नहीं की गई है, बल्कि इसे सफलता के ट्रैक रिकॉर्ड के बाद अपनाया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भोपाल की यातायात पुलिस द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर इसी तरह के क्यूआर कोड लगाए गए थे। यातायात पुलिस की इस पहल को जनता का अभूतपूर्व सहयोग मिला था, जिसके चलते यातायात पुलिस की कार्यशैली में सुधार आया और शिकायत निवारण बेहतर हुआ। यातायात पुलिस की इसी सफलता और जनता के सकारात्मक सहयोग को देखते हुए, अब पुलिस कमिश्नर ने इस प्रणाली को पूरे पुलिस थानों की व्यवस्था में लागू करने का निर्णय लिया है। थानों की निगरानी इस क्यूआर कोड व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यह थानों की सीधी निगरानी सुनिश्चित करेगी। प्राप्त फीडबैक सीधे पुलिस कमिश्नर के कार्यालय को प्राप्त होंगे, जिससे थानों के प्रदर्शन का मूल्यांकन अधिक निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ तरीके से किया जा सकेगा। यदि किसी नागरिक को थाने में सहयोग नहीं मिल रहा है या शिकायत दर्ज करने में परेशानी आ रही है, तो वह तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचा सकेगा। कमिश्नर ने विशेष रूप से यह भी जोड़ा कि इस प्रणाली के माध्यम से जनता के छोटे-छोटे मामलों की शिकायतें भी दर्ज हो सकेंगी। अक्सर नागरिक छोटे-मोटे विवादों या समस्याओं के लिए थाने जाने से कतराते हैं, लेकिन यह डिजिटल माध्यम उन्हें आसानी से अपनी बात रिकॉर्ड कराने की सुविधा देगा। सूचना देने पर पूर्ण गोपनीयता पारदर्शिता और भागीदारी के साथ-साथ, पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा है। कमिश्नर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यदि कोई नागरिक अवैध व्यापार या अन्य आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के बारे में जानकारी देने के लिए इस क्यूआर कोड का उपयोग करता है, तो सूचना देने वाले सूत्र की पहचान को पूरी तरह से गोपनीय (Confidential) रखा जाएगा। यह प्रावधान नागरिकों को निडर होकर समाज विरोधी तत्वों के बारे में जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जो अपराध नियंत्रण में एक महत्वपूर्ण कदम है। भोपाल पुलिस की यह नई डिजिटल पहल पुलिस-जनता साझेदारी को मजबूत करने और पुलिस थानों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है।

NSUI Bhopal: फार्मेसी काउंसिल अध्यक्ष हटाने की मांग, मुख्यमंत्री से शिकायत

NSUI

NSUI Bhopal Demand for removal of Pharmacy Council President complaint to Chief Minister भोपाल। मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष संजय जैन द्वारा शुक्रवार को छात्र तुषार के साथ की गई मारपीट और धमकी की घटना ने प्रदेशभर में रोष पैदा कर दिया है। इस गंभीर प्रकरण को लेकर एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव को शिकायत कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, एवं प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा को विस्तृत शिकायत पत्र प्रेषित कर संजय जैन को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने तथा उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। रवि परमार ने पत्र में उल्लेख किया गया है कि दिनांक 28 नवंबर 2025 को छात्र तुषार रजिस्ट्रेशन संबंधी शिकायत लेकर फार्मेसी काउंसिल कार्यालय पहुंचे थे, जहां अध्यक्ष संजय जैन, कर्मचारियों और गार्डों द्वारा उन्हें घसीटकर अंदर ले जाकर बंधक बनाया गया, कमरे में बंद किया गया तथा बेरहमी से मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई यह न केवल संवैधानिक पद की मर्यादा का उल्लंघन है बल्कि कानूनन गंभीर अपराध भी है। एनएसयूआई की प्रमुख मांगें पत्र में एनएसयूआई की चेतावनी जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि यदि सरकार इस गंभीर घटना पर तुरंत कार्रवाई नहीं करती है, तो एनएसयूआई प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक करेगी छात्रों पर अत्याचार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। संजय जैन को पद से हटाना और उनके खिलाफ अपराध दर्ज करना अनिवार्य है।” तोमर ने कहा है कि यह मामला केवल एक छात्र की सुरक्षा का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी परिषदों की विश्वसनीयता का प्रश्न है। इसलिए सरकार को तुरंत कड़ा निर्णय लेना चाहिए।