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पन्ना में घूसकांड: छुट्टी के एवज में मांगी रिश्वत, लोकायुक्त ने लिपिक को किया गिरफ्तार

पन्ना  मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से बड़ी खबर सामने आई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय में पदस्थ लिपिक विमल खरे को सागर लोकायुक्त की टीम ने 2500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद से सीएमएचओ कार्यालय में हड़कंप की स्थिति बन गई। जानकारी के अनुसार, विमल खरे ने अपने ही साथी कर्मचारी दिलीप डामोर से 25 दिन के अर्जित अवकाश स्वीकृत करने के एवज में 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कुल 2500 रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने पर लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की। निरीक्षक रोशनी जैन के नेतृत्व में सागर लोकायुक्त की टीम ने ट्रैप की योजना बनाई और जैसे ही विमल खरे ने रिश्वत की रकम ली, टीम ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया। लोकायुक्त ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

मध्य प्रदेश में मौसम ने बदली चाल: भारी बारिश खत्म, अब दक्षिणी हिस्सों में हल्की फुहारें

भोपाल  कोई मजबूत मौसम प्रणाली के सक्रिय ना होने और मानसून के कमजोर होने से मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर थम गया है, जिससे मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि दक्षिणी जिलों में अगले तीन दिन तक हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे तक सिवनी में 73.4, शिवपुरी में 11, टीकमगढ़ में पांच, गुना में दो, दतिया में 1.3 मिमी वर्षा हुई।अबतक 12 जिलों से दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई हो चुकी है और अगले 72 घंटे के बाद प्रदेश के कई जिलों से मानसून विदा होने लगेगा। मध्य प्रदेश मौसम विभाग ताजा पूर्वानुमान     दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी रेखा अभी भी 20° उत्तर / 69° पूर्व, वेरावल, भरूच, उज्जैन, झांसी,  शाहजहांपुर और 30° उत्तर / 81° पूर्व से होकर गुजर रही है। गुजरात के शेष भागों, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और भागों तथा महाराष्ट्र के कुछ भागों से आगामी 3-4 दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं।     पश्चिम-मध्य और इससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर के ऊपर स्थित गहरा दबाव (चक्रवाती तूफान “शक्ति” का अवशेष) कमजोर होकर एक दबाव में परिवर्तित हो गया है और यह अक्षांश 19.0° उत्तर और देशांतर 60.5° पूर्व के पास निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में केंद्रित है। जो कि मसिराह (ओमान) से लगभग 250 किमी दक्षिण-पूर्व, रास अल हद्द (ओमान) से 370 किमी दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम, अल-गैदाह (यमन) से 950 किमी पूर्व-उत्तर-पूर्व, कराची (पाकिस्तान) से 950 किमी दक्षिण- पश्चिम, द्वारका से 970 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नलिया से 990 किमी पश्चिम-दक्षिण- पश्चिम में स्थित है। इसके पश्चिम-मध्य और इससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर के ऊपर धीरे-धीरे दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ने और एक चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र में परिवर्तित होनेकी संभावना है।     पश्चिमी विक्षोभ, उत्तर राजस्थान और उससे सटे हरियाणा के ऊपर एक प्रेरित निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। इससे संबंधित ऊपरी वायुमंडलीय चक्रवातीय परिसंचरण समुद्र तल से 9.6 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है और ऊँचाई के साथ उत्तर-पश्चिम की ओर झुका हुआ है।उत्तर-पश्चिम राजस्थान और उससे सटे दक्षिण पंजाब के ऊपर समुद्र तल से 3.1 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ चक्रवातीय परिसंचरण अब उपरोक्त चक्रवाती परिसंचरण में विलीन हो गया है।एक ट्रफ रेखा, उत्तर तटीय ओडिशा से पूर्वी तेलंगाना तक (आंतरिक ओडिशा, दक्षिण छत्तीसगढ़ होते हुए) समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई पर बनी हुई है। मध्य प्रदेश : अबतक 12 जिलों से मानसून विदा अबतक मध्य प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इसमें उज्जैन, राजगढ़,अशोकनगर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन शामिल हैं।आमतौर पर मानसून 6 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार नए वेदर एक्टिव होने से मानसून की वापसी में देरी हो रही थी और अब मानसून वापसी की परिस्थितियां अनुकूल है, ऐसे में 10-12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। गुना में सबसे ज्यादा बारिश, शाजापुर सबसे सूखा जिला इस मानसून सीजन में गुना जिले में सबसे अधिक 65.6 इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला और रायसेन में भी 62 इंच से ज्यादा वर्षा हुई। वहीं श्योपुर और अशोकनगर में 56 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई। दूसरी ओर, शाजापुर (28.9 इंच), खरगोन (29.6 इंच), खंडवा (32 इंच), बड़वानी (33.5 इंच) और धार (33.6 इंच) प्रदेश के सबसे कम बारिश वाले जिले रहे।  1 जून से 6 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

धार्मिक आस्था की मिसाल: 245 किमी की पदयात्रा कर मैहर में जुटे 5000 श्रद्धालु, आज होगा मुर्ति विसर्जन

मैहर  भक्ति, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला जब कोतमा से माँ दुर्गा की ऐतिहासिक पदयात्रा मंगलवार को मैहर पहुँची। 245 किलोमीटर की कठिन यात्रा और 5000 से अधिक श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा के साथ यह भव्य यात्रा माँ शारदा के दरबार में समर्पित हुई। जैसे ही माँ दुर्गा की प्रतिमा का रथ डेल्हा मोड़ पहुँचा, 'जय माँ शारदा' के जयकारों से पूरा नगर गूंज उठा। डमरू, ढोल और शंखध्वनि से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस पावन अवसर पर मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, डेल्हा सरपंच अभिषेक जायसवाल, समाजसेवी आदिनारायण शुक्ला समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीणों ने माँ के जयकारों के साथ यात्रा का स्वागत किया। विधायक चतुर्वेदी ने माँ दुर्गा की प्रतिमा का पूजन-अर्चन कर पुष्पवर्षा की और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। माँ के चरणों में सबकी आस्था, सबकी भक्ति, यही है कोतमा से मैहर यात्रा की शक्ति।' यह यात्रा न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि आस्था, अनुशासन और एकता का जीवंत प्रतीक भी है। माँ के जयकारों से गूंजता मैहर आज इस दिव्य यात्रा का साक्षी बन गौरवान्वित हो उठा है। तीन दशकों की अविरल परंपरा, 1987 में हुई थी शुरुआत यात्रा संयोजक हनुमान गर्ग ने बताया कि इस धार्मिक परंपरा की शुरुआत सन् 1987 में महज 100 श्रद्धालुओं के जत्थे से हुई थी। तब से निरंतर यह कोतमा से माँ शारदा धाम, मैहर तक पैदल यात्रा का रूप ले चुकी है। इस वर्ष यह यात्रा 2 अक्टूबर को कोतमा बस स्टैंड परिसर से आरंभ होकर फुनगा, अनूपपुर, बुढ़ार, शहडोल, घुनघुटी, पाली, उमरिया, चंदिया और बरही होते हुए मैहर पहुँची। पाली नगर में माँ की यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। नगरवासियों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया और श्रद्धालुओं के लिए चाय, नाश्ता और पेय पदार्थों की सेवा की। वहीं माँ बिरासिनी मंदिर में दर्शन कर श्रद्धालुओं ने माँ से आशीर्वाद प्राप्त किया। माँ काली के रूप में सजे श्रद्धालु बने आकर्षण का केंद्र यात्रा के दौरान 8 से 10 श्रद्धालु माँ काली के रूप में सजे नृत्य करते हुए चल रहे थे। उनके भावनात्मक प्रदर्शन से यात्रा की भव्यता और भी बढ़ गई। ढोल-नगाड़ों और जयकारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा। यात्रा मार्ग में जगह-जगह भक्तों के लिए भोजन, जल, विश्राम और चिकित्सा व्यवस्था की गई थी। स्थानीय नगरवासियों की सेवा भावना इस यात्रा की विशेष पहचान बनी। आज होगा विसर्जन, माँ शारदा के दरबार में सामूहिक भंडारा माँ की प्रतिमा का विसर्जन आल्हा-ऊदल के ऐतिहासिक तलैया में किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु माँ शारदा देवी मंदिर में दर्शन-पूजन कर सामूहिक भंडारा में सम्मिलित होंगे। इसके साथ ही इस वर्ष की भव्य पदयात्रा का विधिवत समापन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भारतीय वायुसेना दिवस पर शुभकामनाएं दी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारत के गौरव, आकाश के अभेद प्रहरी भारतीय वायुसेना के सभी जवानों और उनके परिजनों को 'भारतीय वायु सेना दिवस' की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'नभः स्पृशं दीप्तम्' मंत्र के साथ चाहे सीमाओं की सुरक्षा हो या आपदा के समय लोगों को राहत पहुंचाना, देश के वायु वीरों ने हमेशा अपने शौर्य, साहस और त्याग के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उल्लेखनीय है कि भारतीय वायुसेवा की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। इस वर्ष भारतीय वायुसेना अपना 93वां स्थापना दिवस मना रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरु रामदास के प्रकाश पर्व पर किया नमन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिख पंथ के चतुर्थ गुरु रामदास जी के प्रकाश पर्व पर उनके पावन चरणों में नमन किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सेवा, प्रेम और त्याग के प्रतीक गुरु रामदास का सम्पूर्ण जीवन सभी के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। उनकी दिव्य शिक्षाओं के आलोक से मानवता के कल्याण के लिए करुणा, सेवा और समरसता के मार्ग सदैव प्रकाशमान रहेंगे।

खाद नहीं होगी टेंशन! MP में अफसर ने बनाया ऐसा ऐप, जो बताएगा हर किसान की ‘कुंडली’

ग्वालियर   मध्य प्रदेश में किसान खाद की किल्लत से परेशान हैं. कई जिलों में रात रात भर किसान लाइन में लगकर खाद लेने के लिए परेशान होते रहते हैं, तो कहीं किसान बार बार लाइन में लगकर खाद खरीदते दिखाई देते हैं, इस तरह के हालात प्रदेश में खाद संकट पैदा करते हैं. अब इस खाद की समस्या का भी हल ढूंढ लिया गया है. इसका हल ढूंढने वाला कोई आईएएस स्तर का अफसर या नेता नहीं, बल्कि प्रदेश के एक ब्लॉक में पदस्थ एक सरकारी कर्मचारी है. उसने ये करनामा अपनी पढ़ाई और ट्रेनिंग के बलबूते पर कर दिखाया है. किसानों को मिल सकेगा जरूरत के अनुसार खाद असल में खाद को लेकर होने वाली समस्याओं को देखते हुए कृषि विभाग के एक युवा कृषि विस्तार अधिकारी ने एक ऐसा सिस्टम डेवलप किया, जिससे हर किसान को उसकी असल जरूरत के अनुसार पर्याप्त खाद मिल सकेगी. साथ ही खाद की कालाबाजारी भी रुकेगी. ये एक तरह का वेब आधारित एप्लिकेशन है, जिसे ग्वालियर के विशाल यादव ने तैयार किया है.  कृषि विभाग का नया प्रयोग विशाल यादव ग्वालियर के डबरा ब्लॉक में कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं. उन्होंने खुद से कोडिंग कर एक वेब ऐप बनाया है. जिसे नाम दिया गया है फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन डेटाबेस. ये एक ऐसा ऐप है जिसे ऑनलाइन ही उपयोग किया जा सकता है और इसका एक्सेस सिर्फ कृषि विभाग के पास है. और यह सिस्टम ग्वालियर के डबरा और भितरवार ब्लॉक में लागू भी कर दिया गया है.  कैसे आया खाद वितरण के लिए सिस्टम बनाने का आईडिया? विशाल यादव ने बताया कि, "हम हर साल खाद की किल्लत और परेशान होते किसानों को देखते थे. कई बार कुछ किसान तो खाद ले ही नहीं पाते थे, तो कई किसान बार बार लाइन में लगकर 4 से 5 बार खाद इशू करा लेते थे. इस तरह की स्थिति ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि हम क्या ऐसा कर सकते हैं, जिससे जरूरतमंद किसानों को खाद मिल सके. इसके लिए हमने इस बारे में डबरा एसडीएम से बात की और उनके सहयोग से ये वेब ऐप तैयार किया."  ग्वालियर में किया लागू, प्रदेश की तैयारी इस वेब ऐप के डेवलप होने के बाद शासन ने ग्वालियर अंचल में इसे लागू भी कर दिया गया है. डबरा और भितरवार क्षेत्र में इसी सिस्टम के जरिए किसानों को खाद का वितरण भी किया जा रहा है. अगर यह ऐप इस क्षेत्र में सही से काम किया तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में इसे अपनाया जा सकता है.  कैसे काम करता है खाद वाला 'वेब ऐप' विशाल यादव से बातचीत में इस वेब ऐप के काम करने का तरीका भी पता चला. उन्होंने बताया कि, "ये ऐप कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम करता है. इसे किसी भी कंप्यूटर बेस्ड सिस्टम से एक्सेस किया जा सकता है. इसका सर्वर भी गूगल शीट पर आधारित है, जहां सारा डेटा सेव होता है. इस ऐप के जरिए किसानों की पहचान उनके समग्र आईडी और आधार कार्ड से की जाती है. साथ ही उसकी जमीन का रकबा भी दर्ज कर दिया जाता है, उसी के आधार पर उसकी पात्रता निर्धारित की जाती है. 2 बीघा जमीन पर किसान को एक बैग डीएपी दी जाती है और एक बीघा जमीन पर एक बैग यूरिया के हिसाब से पात्रता दर्ज होती है.  कैसे तय होगा रकबा, कितना खाद ले सकेंगे किसान? अब सवाल आता है कि "इस वेब ऐप सिस्टम में किसान का रकबा कैसे निर्धारित होगा, तो आपको बता दें कि जब खाद वितरण केंद्र पर किसान अपनी किताब लेकर पहुंचता है. उसी समय उसकी किताब में लिखा जमीन का रकबा सिस्टम में मैनुअली एंट्री कर अपलोड कर दिया जाता है. ऐसे में उसकी जमीन का जितना रकबा है. उसके हिसाब से खाद की मात्रा भी निर्धारित कर एंट्री कर दी जाती है. किसान जितनी खाद लेता है, उसकी तय पात्रता खाद पात्रता में सिस्टम घटा देता है और वह तब तक खाद ले सकता है जब तक उसका खाद कोटा पूरा नहीं होता. एक बार उसने पात्रता के हिसाब से खाद कोटा पूरा कर दिया तो फिर आगे उसे खाद नहीं दिया जाएगा.  कैसे कृषि अधिकारी बना वेब डेवलपर? एक कृषि विस्तार अधिकारी आखिर एक वेब डेवलपर का काम कैसे कर सका? तो इसका जवाब यह है कि, विशाल यादव ने मूल रूप से एग्रीकल्चर में बीएससी स्नातक किया था. इसी बीच उन्होंने केंद्र सरकार के प्रोग्राम के तहत जावा (JAVA) लैंग्वेज, जो एक तरह की सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लैंग्वेज है. वो भी सीखी थी और खाद समस्या को दूर करने में उनका यह कौशल कारगर सिद्ध हुआ है. 

बुंदेलखंड का दिवाली गिफ्ट: वंदे भारत एक्सप्रेस से खजुराहो-बनारस सफर होगा आसान, पर्यटन को नया जोश

 खजुराहो  मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड अंचल को इस दिवाली एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। केंद्र सरकार ने खजुराहो से बनारस के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाने की मंजूरी दे दी है। यह घोषणा खजुराहो के सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा (वी.डी. शर्मा) की रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से हुई फोन पर बातचीत के बाद हुई। सांसद शर्मा ने इस निर्णय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा बुंदेलखंड को दिया गया “दीवाली गिफ्ट” बताया है। सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने बताया कि खजुराहो से बनारस के बीच वंदे भारत ट्रेन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने कुछ माह पूर्व रेल मंत्री से दिल्ली में मुलाकात कर इस विषय पर पत्र सौंपा था। शर्मा के आग्रह पर रेल मंत्री ने सकारात्मक पहल करते हुए इस मार्ग पर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की सहमति दी थी। मंगलवार को फोन पर हुई चर्चा के दौरान रेल मंत्री ने उन्हें जानकारी दी कि ट्रेन शुरू करने के आदेश एक-दो दिन में जारी कर दिए जाएंगे। सांसद शर्मा ने कहा कि यह ट्रेन बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए विकास और समृद्धि की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगी। उन्होंने कहा कि बाबा मतंगेश्वर की नगरी खजुराहो से बाबा काशी विश्वनाथ की नगरी बनारस को जोड़ने वाली यह वंदे भारत एक्सप्रेस न केवल धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देगी, बल्कि रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ाएगी। उन्होंने आगे कहा कि खजुराहो विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। अब वंदे भारत ट्रेन के शुरू होने से भारतीय यात्रियों के लिए भी खजुराहो की यात्रा अधिक सुगम और सुलभ हो जाएगी। इससे बुंदेलखंड के आर्थिक विकास में तेजी आएगी और स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इस घोषणा पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेन शुरू होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और मध्यप्रदेश का गौरवशाली पर्यटन नक्शे पर और अधिक चमकेगा। सांसद वी.डी. शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री के “विकसित भारत” के संकल्प को साकार करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के विकास की नई रफ्तार है।    

भोपाल के कोलार में भयानक वारदात, खाली प्लाट में मिले मानव अंग, पुलिस जांच में जुटी

भोपाल राजधानी भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर बाद एक खाली पड़े प्लाट में मानव अंग मिलने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। जिस खाली प्लाट में भरे पानी के अंदर मानव अंग मिले हैं, उससे 100 मीटर की दूरी पर ही पूरी कॉलोनी बसी हुई है। लाश किसकी है, किसने और कब हत्या की, इसका खुलासा नहीं हो सका है। कोलार पुलिस के अनुसार डी मार्ट के पास पुलिस हाउसिंग की कॉलोनी के पास एक खाली प्लाट में पानी के अंदर एक पैर दिखा। लोगों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो पैर निकाला तो किसी मनुष्य का निकला। इसके बाद तलाशी शुरू हुई तो एक बोरी के अंदर कुछ और मानव अंग मिले हैं। लेकिन सिर और धड़ देर रात तक नहीं मिला था। प्लॉट का पानी खाली करा रही पुलिस कोलार पुलिस के अनुसार प्लॉट में पानी अधिक होने के कारण तलाशी अभियान नहीं चलाया जा सका था। इसलिए मोटर लगाकर पानी बाहर फेंका जा रहा है। पानी निकालने के बाद बुधवार सुबह से प्लॉट के अंदर मानव अंगों की तलाश शुरू की जाएगी। फिलहाल पुलिस इतना ही बता पा रही है कि किसी व्यक्ति की हत्या करने के बाद उसकी लाश को बोर में भरकर पानी के अंदर करीब 25 से दिन पहले फेंका गया होगा। क्योंकि शव पूरी तरह से डिकंपोज हो चुका है। सिर्फ हड्डियां बची हैं, जो नहीं गल सकी थीं। पुलिस का मानना है कि हत्या को किसी दूसरे स्थान पर अंजाम देने के बाद शव को यहां छिपाया गया होगा। क्योंकि जिस क्षेत्र में घटना हुई है वहां से कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं है। हालांकि घटना स्थल के आसपास करीब दो किलोमीटर के अंदर बड़ी संख्या में बाहरी मजदूर भी रहते हैं। पुलिस उन मजदूरों से भी पूछताछ कर जानकारी जुटाने में लगी है कि कोई व्यक्ति उनका परिचित लापता तो नहीं है।

भोपाल हाईकोर्ट ने मछली परिवार के बैंक खातों की डीफ्रीजिंग पर लगाई मुहर, कलेक्टर और डीसीपी को दिए निर्देश

भोपाल  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने गैंगस्टर यासीन अहमद उर्फ मछली के परिजनों के बैंक खाते डिफ्रीज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि भोपाल कलेक्टर और डीसीपी (क्राइम) ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्वीकार किया है कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, इसलिए उनके बैंक खाते डिफ्रीज किए जाएं। साथ ही अदालत ने कहा कि राशि का उपयोग आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जा सकेगा। गौरतलब है कि यासीन अहमद के परिजनों ने मकान तोड़ने और बैंक खाते फ्रीज करने की कार्रवाई को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि प्रशासन ने केवल उनकी संपत्ति ध्वस्त की, जबकि सरकारी भूमि पर बने अन्य मकानों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं है, फिर भी खाते फ्रीज, शस्त्र लाइसेंस निलंबित और ईमेल आईडी ब्लॉक कर दी गई, जिससे व्यावसायिक गतिविधियाँ ठप हो गईं। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने तर्क दिया कि एक याचिकाकर्ता के खाते से बड़ी राशि मुख्य अभियुक्त के खाते में ट्रांसफर हुई थी। इसलिए सीआरपीसी की धारा 102 के तहत जांच के लिए खाते फ्रीज किए गए। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि संबंधित लेनदेन पर टीडीएस का भुगतान किया गया था, और वे उस फर्म के साझेदार हैं, इसलिए रकम का लेनदेन वैध था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि फिलहाल बैंक खाते डिफ्रीज किए जाएं, लेकिन यदि आगे जांच में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री मिलती है, तो कानून अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

एकलव्य आवासीय विद्यालय के शिक्षकों को राहत, MP हाईकोर्ट ने ट्रांसफर आदेश पर लगाई रोक

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने जबलपुर सहित राज्य के अन्य जिलों के एकलव्य आवासीय विद्यालयों में पदस्थ 200 शिक्षकों को सामूहिक रूप से खंडवा स्थानांतरित करने के आदेश को अनुचित पाया। इसी के साथ आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। कोर्ट ने शिक्षकों को वर्तमान एकलव्य विद्यालय में पदस्थ रखने की व्यवस्था दी है। याचिकाकर्ता एकलव्य आवासीय विद्यालय, रामपुर छापर में पदस्थ उपमा शांडिल्य की ओर से अधिवक्ता सुधा गौतम ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि 23 सितंबर, 2025 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता सहित जबलपुर सहित राज्य के अन्य जिलों के विभिन्न एकलव्य आवासीय विद्यालयों में पदस्थ 200 शिक्षकों को सामूहिक रूप से खंडवा स्थानांतरित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता 2024 में उच्च पद प्रभार पर रामपुर छापर के एकलव्य आवासीय विद्यालय में पदस्थ हुई थी। दरअसल, 11 नवंबर, 2024 को संभागायुक्त, जबलपुर ने एक पत्र जारी किया था, जिसके जरिये साफ किया गया था कि एकलव्य विद्यालयों में स्थान नहीं है, इसलिए शिक्षक स्थानांतरण के विकल्प पेश करें। जिसके बाद याचिकाकर्ता ने एकलव्य विद्यालय, रामपुर छापर, रांझी व सदर के विकल्प भरे थे। इसके बावजूद इन विकल्पों को दरकिनार कर खंडवा भेजने का आदेश जारी कर दिया गया। इसी लिए हाई कोर्ट की शरण ली गई। हाई कोर्ट ने सुनवाई के बाद 23 सितंबर, 2025 के आदेश को अनुचित पाकर स्थानांतरण पर रोक लगा दी।