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Morena Police: सनसनीखेज डकैती का 6 दिन में खुलासा, 7 आरोपी गिरफ्तार

Morena Police

Morena Police Sensational robbery solved in 6 days, 7 accused arrested मुरैना। थाना स्टेशन रोड क्षेत्र के मुडियाखेड़ा बायपास, अम्बाह रोड निवासी एक मावा व्यवसायी के घर में हुई सनसनीखेज डकैती का 6 दिन के अंदर मुरैना पुलिस ने खुलासा किया है। इस प्रकरण में पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर सोने व चांदी के आभूषण, चार पहिया वाहन एवं अवैध हथियार जब्त किए हैं। घटना के बाद पुलिस महानिरीक्षक पुलिस महानिरीक्षक चंबल जोन श्री सचिन कुमार अतुलकर ने मौके का निरीक्षण कर तत्काल पुलिस टीम का गठन कर आरोपियों पर 30-30 हजार रुपए का ईनाम घोषित कर उन्हें पकड़ने के निर्देश जारी किए थे। आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की विभिन्‍न टीमें बनाई गईं। पुलिस अधीक्षक श्री समीर सौरभ द्वारा प्रकरण की लगातार समीक्षा की गई। वहीं पुलिस उपमहानिरीक्षक, चंबल रेंज मुरैना सुनील कुमार जैन द्वारा भी घटना स्थल का जायजा लेकर आवश्यक निर्देश दिए थे। 12 लाख रुपये की लूट राजाखेड़ा से गिरफ्तार मुखबिर सूचना पर थाना स्टेशन रोड की घटना में शामिल पांच आरोपियों को राजाखेड़ा, जिला धौलपुर (राजस्थान) से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उन्होंने अपने साथी अजय सविता पुत्र रामबाबू निवासी उदयपुर खालसा, जिला आगरा एवं अन्य साथियों के साथ मिलकर मावा व्यापारी नवल किशोर गुप्ता के घर डकैती की घटना करना स्वीकार किया। इसके उपरांत दो और आरोपियों को भी राजाखेड़ा से गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार पुलिस ने कुल 07 आरोपियों को गिरफ्तार किया। मोबाइल फोन जब्त आरोपियों के पास से 05 तोला सोने के आभूषण, 750 ग्राम चांदी, ₹4,53,750 नगद, घटना में प्रयुक्त हुंडई औरा कार (कीमत लगभग ₹8 लाख), 315 बोर के 02 देशी कट्टे, 04 जिंदा राउंड एवं 05 मोबाइल फोन जब्त किए गए। कुल बरामद मशरूका की कीमत लगभग ₹20 लाख है। प्रकरण में धारा 25, 27 आर्म्स एक्ट का इजाफा किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के अतिरिक्त शेष तीन अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु प्रयास जारी हैं। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से अपराधियों में भय एवं आमजन में विश्वास की भावना उत्पन्न हुई है।

अटल प्रगति पथ फिर अधर में: नाम बदला, सर्वे बदला, लेकिन काम अब भी ठप

atal pragati path once

Atal Pragati Path once again in limbo: Name changed, survey changed, but work still stalled मुरैना। Atal Pragati Path once चंबल अंचल के मुरैना, भिंड और श्योपुर जिलों को उत्तर प्रदेश और राजस्थान से जोड़ने वाला अटल प्रगति पथ (पूर्व में चंबल एक्सप्रेस-वे) अब तक सरकारी असमंजस में उलझा हुआ है। 2018 से लेकर 2025 तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना का न तो कोई ठोस स्वरूप तय हो पाया है और न ही निर्माण का काम धरातल पर उतरा है। अब तक इस परियोजना का पाँच बार नाम और तीन बार अलाइनमेंट बदला जा चुका है। सर्वे भी बदला, समाधान नहीं मिला Atal Pragati Path onceमार्च 2023 तक तीसरे चरण का भूमि अधिग्रहण सर्वे लगभग पूरा हो चुका था, लेकिन किसानों के विरोध के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मौखिक रूप से सर्वे रद्द करने के निर्देश दे दिए। चौंकाने वाली बात यह है कि आज तक उस सर्वे को लिखित रूप से रद्द नहीं किया गया, जिससे कई कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं। नया सर्वे भी अधर मेंचौथे सर्वे के आदेश 2022 के अंत में दिए गए थे, लेकिन वह कभी शुरू ही नहीं हो पाया। 03 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पहले बजट में इस परियोजना की नए सिरे से घोषणा की थी और इसे 299 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित किया गया। जबकि पूर्व प्रस्तावित लंबाई 404 किलोमीटर थी। किसानों की ज़मीन अधर में Atal Pragati Path onceमार्च 2023 के रिकार्ड के अनुसार, 214 गांवों के 26448 किसानों की लगभग 1965 हेक्टेयर भूमि इस प्रोजेक्ट के लिए चिह्नित की गई थी। लेकिन सर्वे के निरस्त होने और लिखित आदेश न आने के चलते किसान न तो ज़मीन का नामांतरण करा पा रहे हैं और न ही बिक्री-रजिस्ट्री हो पा रही है। घड़ियाल सेंक्चुरी बनी बड़ी बाधाएक्सप्रेस-वे का पहला अलाइनमेंट चंबल घड़ियाल सेंक्चुरी से होकर गुजरता था, जिस कारण वन विभाग और पर्यावरण मंत्रालय ने आपत्ति जताई। दूसरा और तीसरा अलाइनमेंट भी बीहड़ों और निजी खेतों से होकर गुजरता था, जिसे लेकर भारी विरोध हुआ। चौथा सर्वे अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है। प्रशासन ने दी स्थिति स्पष्टता\”मार्च 2023 में शासन से निर्देश मिलने के बाद से कोई नई दिशा नहीं आई है। परियोजना की स्थिति पूर्ववत है। जैसे ही आदेश मिलेगा, आगे की कार्रवाई की जाएगी।\”— सीबी प्रसाद, अपर कलेक्टर, मुरैना Atal Pragati Path once , जिसे कभी चंबल एक्सप्रेस-वे के नाम से शुरू किया गया था, अब तक सिर्फ कागजों और घोषणाओं का प्रोजेक्ट बनकर रह गया है। ज़मीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंज़ूरी और प्रशासनिक अस्पष्टता इसकी सबसे बड़ी बाधाएँ हैं। यदि मोहन सरकार इसे गंभीरता से नहीं लेती, तो यह प्रोजेक्ट भी एक अधूरी योजना बनकर इतिहास में दर्ज हो जाएगा।