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IAS Santosh Verma: सांसद आलोक शर्मा ने की केंद्रीय मंत्री से शिकायत, बख्शा नहीं जाएगा

MP Alok Sharma

IAS Santosh Verma MP Alok Sharma complains to Union Minister भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संतोष वर्मा द्वारा दिए विवादित बयान को लेकर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। समाज में रोष सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह को सौंपे ज्ञापन में कहा कि आईएएस संतोष वर्मा ने सार्वजनिक मंच से जाति-विशेष के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिससे समाज में रोष व्याप्त है। उनके कथन से भारतीय संविधान की मूल भावना, सामाजिक न्याय, समानता और गरिमा के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणी समुदाय विशेष के सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा पर प्रत्यक्ष आघात पहुंचाती है। विभाजन को बढ़ावा सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि संतोष वर्मा ने दिए बयान में कहा था कि “जब तक एक व्यक्ति अपने बेटे को किसी विशेष समुदाय की बेटी से संबंध या दान नहीं देता, तब तक आरक्षण छोड़ने का कोई विचार नहीं होगा।” श्री शर्मा ने कहा कि यह बयान न केवल जाति और लैंगिक आधार पर भेदभावपूर्ण है, बल्कि सामाजिक तनाव और विभाजन को बढ़ावा देने वाला भी है। ऐसे बयान महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की गई ऐसी टिप्पणी जनता के बीच अविश्वास और आक्रोश पैदा करती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत घातक है।केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मामले की गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

Political News: जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा

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Political News Jitu Patwari surrounded the government issue of safety of daughters भोपाल।  मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रायसेन जिले में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म की घिनौनी घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बच्ची पर हुआ जघन्य अपराध नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की बहनों-बेटियों की सुरक्षा पर कड़ा प्रश्नचिन्ह है। आरोपी पकड़ से बाहर पटवारी ने कहा कि रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा के ग्राम गौहरगंज क्षेत्र में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ निर्मम दुष्कर्म की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन घटना के 3 दिन बाद भी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर है। यह स्थिति स्वयं में मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रशासनिक अक्षमता और प्रदेश की कानून-व्यवस्था की भयावह हकीकत को उजागर करती है। सरकार मूकदर्शक जीतू पटवारी ने कहा कि जिस प्रदेश में रोज़ाना लगभग 22 बेटियों के साथ बलात्कार हो, रोज़ करीब 7 मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म हो और 5 साल तक की नन्ही बच्चियाँ भी दरिंदों का शिकार बन रही हों,वहां यह कहना पड़ेगा कि मध्यप्रदेश आज देश में बहनों-बेटियों पर अत्याचार का मुख्य केन्द्र बन गया है। यह शर्मनाक स्थिति है कि पूरे देश में इस तरह की घटनाएँ सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में हो रही हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश में अब कानून का डर समाप्त हो चुका है, क्योंकि कानून अपना काम ईमानदारी और गंभीरता से नहीं कर रहा अपराध रोकने तथा अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने की इच्छाशक्ति सरकार में नहीं दिखती, न्याय विभाग स्वयं मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास है, फिर भी न्याय और सुरक्षा दोनों दम तोड़ते नज़र आ रहे हैं। घटना के 3 दिन जीतू पटवारी ने कहा कि अगर किसी भी दुष्कर्म की घटना के बाद 3 दिन के भीतर अपराधी गिरफ्तार नहीं होता, तो यह प्रदेश की पुलिस व्यवस्था की नाकामी और सरकार की असंवेदनशीलता का खुला प्रमाण है। परिणामस्वरूप रोज अलग-अलग जगहों पर चक्का जाम, विरोध प्रदर्शन, और आक्रोशित जन आंदोलन देखने को मिल रहे हैं, लेकिन सरकार अब भी गहरी नींद में सोई हुई है। पटवारी ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा के मामले में मोहन यादव सरकार पूरी तरह विफल, गैर-जिम्मेदार और बेशर्म हो चुकी है। मासूम बेटियों की चीखों, उनके परिवारों के दर्द और आंसुओं का इस सरकार पर कोई असर नहीं होता। फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार से तत्काल मांग की– रायसेन जिले की 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी की जाए और उस पर सख्त से सख्त धाराओं में प्रकरण दर्ज कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो। उन्होंने कहा कि कार्रवाई की नीति की स्पष्ट घोषणा कीपीड़ित मासूम बच्ची के परिवार को उचित वित्तीय सहायता, बेहतर इलाज एवं समुचित सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाए। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव इस गंभीर मामले में भी उदासीन रवैया अपनाते रहे, अपराधी खुलेआम घूमते रहे और बेटियों की सुरक्षा पर ऐसे ही खतरा बना रहा, तो कांग्रेस पार्टी प्रदेश की जनता के साथ मिलकर तेज, उग्र और प्रदेशव्यापी जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।

MP Politics: नायकों का अपमान भाजपा की आदत, जीतू पटवारी ने की मंत्री की निंदा

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MP Politics Insulting heroes is a habit of BJP Jitu Patwari condemns minister भोपाल।  मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन सरकार के मंत्री इंदर सिंह परमार द्वारा महान समाज-सुधारक राजा राम मोहन राय को “अंग्रेजों का दलाल” बताने वाले आपत्तिजनक बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है। पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान का सार्वजनिक अपमान, आलोचना और अवमानना करने वाली भाजपा का दुस्साहस अब इस स्तर तक पहुँच चुका है कि वह आदर्श समाज-सुधारकों और अनुकरणीय व्यक्तित्वों का भी अपमान करने से नहीं चूक रही। जागरूक जन और जागरूक मन भाजपा की इस घृणा की राजनीति को बहुत गौर और गंभीरता से देख रहा है। राष्ट्र के प्रेरक व्यक्तित्व का अपमान करने की राजनीतिक कीमत भाजपा को हर हाल में चुकानी पड़ेगी। ये भी खबर पढ़े:  http://साइबर कार्रवाई, ठगों पर लगातार प्रहार राजा राम मोहन राय जीतू पटवारी ने कहा कि राजा राम मोहन राय आधुनिक भारत के उन महानतम समाज-सुधारकों में से एक थे, जिन्होंने नारी उत्थान, सती प्रथा उन्मूलन, शिक्षा के प्रसार और सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ निरंतर संघर्ष किया। ऐसे युग-पुरुष को “अंग्रेजों का दलाल” कहना इतिहास के साथ घोर अन्याय है और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य है। नारी सम्मान और नारी सशक्तिकरण की बातें करने वाली भाजपा के मंत्री द्वारा नारी उत्थान के महानायक का इस प्रकार अपमान किया जाना भाजपा की वास्तविक सोच और मानसिकता को उजागर करता है। संविधान निर्माताओं का अपमान जीतू पटवारी ने कहा कि मोहन सरकार के मंत्री इंदर सिंह परमार का यह बयान भाजपा की उस प्रवृत्ति का प्रतीक है, जो लगातार संविधान निर्माताओं का अपमान करती रही है, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करती रही है और असहमति की हर आवाज़ को देशद्रोह की भाषा में ठुकराने की परंपरा को बढ़ावा देती रही है। जो लोग आज राजा राम मोहन राय जैसे महापुरुष को “अंग्रेजों का दलाल” कह रहे हैं, वे न केवल इतिहास से अनभिज्ञ हैं, बल्कि भारतीय समाज के संघर्षों और पीड़ाओं के प्रति भी पूरी तरह असंवेदनशील हैं। ये भी खबर पढ़े: http://सरकार में हड़बड़ी बदलाव! 50% मंत्रियों के बदलने की तैयारी, CM ने तैयार किया ब्लू प्रिंट उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव को आज ही साफ करना होगा कि क्या वे अपने मंत्री के इस आपत्तिजनक बयान से सहमत हैं। यदि नहीं, तो उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करे और सार्वजनिक रूप से दूरी बनाते हुए मंत्री इंदर सिंह परमार से राजा राम मोहन राय और देशवासियों से बिना शर्त माफी दिलवानी चाहिए, अन्यथा यह माना जाएगा कि पूरी भाजपा सरकार इस मानसिकता के साथ खड़ी है। सदन तक संघर्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्र के महान समाज-सुधारकों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और संविधान निर्माताओं की गरिमा की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी। भाजपा के नेताओं की यह भाषा और सोच न केवल लोकतंत्र और संविधान के लिए, बल्कि भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा के लिए भी खतरे की घंटी है। जीतू ने चेतावनी दी कि नफरत की राजनीति, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अनादर और राष्ट्र के प्रेरक व्यक्तित्वों के अपमान को अब जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। जागरूक भारत और जागरूक मध्य प्रदेश, भाजपा के हर अपमानजनक शब्द और हर घृणित बयान की लोकतांत्रिक कीमत उसे चुकवाकर ही दम लेगा।

सरकार में हड़बड़ी बदलाव! 50% मंत्रियों के बदलने की तैयारी, CM ने तैयार किया ब्लू प्रिंट

कर्नाटक  कांग्रेस शासित कर्नाटक में जल्द ही बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल के आसार हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कैबिनेट से करीब आधे मंत्रियों को हटाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा है कि सिद्धारमैया ने ने 13 अक्तूबर को सभी कैबिनेट मंत्रियों के लिए रात्रिभोज पर बुलाया है। सूत्रों ने बताया है कि मुखअयमंत्री मौजूदा मंत्रियों में से 50 प्रतिशत को हटाकर नए चेहरों को लाने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि करीब 15 नए मंत्रियों के शामिल होने से आलाकमान को तत्काल बदलना मुश्किल हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, AICC यानी ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी से साथ हुई चर्चा में सिद्धारमैया ने नवंबर में कैबिनेट फेरबदल के संकेत दिए थे। खास बात है कि नवंबर में सिद्धारमैया के सीएम के तौर पर ढाई साल पूरे हो रहे हैं। माना जा रहा है कि फेरबदल बिहार विधानसभा चुनाव के बाद हो सकता है। इधर, डिप्टी सीएम शिवकुमार ने कहा, 'मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यह काम मुख्यमंत्री का है। हम सी पार्टी के लिए काम करते हैं। मैं इसमें कोई दखल नहीं दूंगा। यह मुख्यमंत्री और पार्टी पर छोड़ा गया है। मैं सिर्फ सुझाव दे सकता हूं। किसी को भी कंफ्यूजन नहीं होना चाहिए।' दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव में सिद्धारमैया सरकार के गठन के बाद से ही कथित ढाई साल फॉर्मूले को लेकर चर्चाएं जारी थी। हालांकि, किसी भी नेता ने इसपर खुलकर बात नहीं की है। दलित नेता मिले रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इन घटनाक्रमों के बीच तीन दलित मंत्रियों की मुलाकात हुई थी। इनमें जी परमेश्वरा, सतीश जरकिहोली और महादेवप्पा का नाम शामिल है। कथित तौर पर इन नेताओं ने इस मुद्दे पर चर्चा की है कि अगर मुख्यमंत्री बदला जाता है, तो दलित नेताओं का कदम क्या होगा। कहा जा रहा है कि दलित मंत्री सीएम पद के लिए परमेश्वरा का नाम आगे बढ़ा सकते हैं।  

चिराग, मांझी, कुशवाहा की सीट तय, BJP-JDU की अगली चाल क्या होगी?

पटना  बात-मुलाकात से सीटों पर समझौता नहीं होता देख भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने सीट शेयरिंग की रणनीति बदल ली है। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दलों के नेताओं चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को मनाने का काम भाजपा को दिया है। बीजेपी और जेडीयू की अब रणनीति है कि पहले चिराग, मांझी और कुशवाहा की सीट तय कर ली जाए और फिर बची सीटों को भाजपा और जदयू आपस में बांट ले। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों दल 100 से कम सीट लड़ना चाहते हैं। तीनों नेताओं ने कुल 75 सीटें मांगी हैं, जिन्हें समझाने-मनाने में धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े, नित्यानंद राय, मंगल पांडेय और सम्राट चौधरी मिशन मोड में जुटे हैं। सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार की पार्टी ने भाजपा से कहा है कि पहले वो सहयोगी दलों के मसले सुलझा ले, फिर वो दोनों सीट बांट लेंगे। दोनों के बीच इस बात पर सहमति है कि बची हुई सीटों में दोनों आधा-आधा रख लेंगे। जदयू की चाहत है कि वो भाजपा से कम से कम एक सीट ज्यादा लड़े। चिराग, मांझी और कुशवाहा के तेवर ने नीतीश और बीजेपी को नई रणनीति बनाने के लिए मजबूर किया है। अब दोनों प्रमुख दल सहयोगियों का मामला पहले निपटा लेंगे, तब वो अपनी-अपनी देखेंगे। 20 महीने में हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देंगे, कानून बनेगा: तेजस्वी यादव का बड़ा चुनावी वादा चिराग पासवान की लोजपा-आर 40 सीट, उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को 20 सीट और जीतन राम मांझी की हम 15 सीट मांग रही है। बिहार बीजेपी प्रभारी विनोद तावड़े और चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान की इन नेताओं से पहले राउंड की बातचीत में कोई नीचे उतरने को तैयार नहीं है। तीनों नेता अपनी-अपनी सीटों की डिमांड पर अड़े हुए हैं जो नंबर 75 हो जाता है। सबकी बात मान ली जाए तो 168 सीटें बचती हैं, जिसमें जेडीयू या बीजेपी का गुजारा नहीं होगा। दोनों दलों ने 101-103 सीटें लड़ने का टारगेट बना रखा है। कोशिश है कि 38-40 सीट में तीनों सहयोगी दलों को मना लिया जाए।  

26/11 हमले को लेकर गरमाई सियासत, पीएम मोदी ने कांग्रेस से मांगा जवाब

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने  कांग्रेस से कहा कि उसे देश को बताना चाहिए कि पाकिस्तान से जुड़े 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद भारत को जवाबी सैन्य कार्रवाई करने से किसने रोका था. साथ ही उन्होंने पार्टी पर सत्ता में रहते हुए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करने का आरोप लगाया.   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार (2004-14) ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कमजोर किया, जिसके कारण देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी है. पीएम मोदी ने मुंबई में लोगों को संबोधित करते हुए कहा- ‘‘एक कांग्रेस नेता, जो केंद्रीय गृह मंत्री भी रह चुके हैं, ने कहा है कि एक देश ने 2008 में 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद भारत को जवाबी सैन्य कार्रवाई से रोका था. पार्टी को स्पष्टीकरण देना चाहिए’’.  सेना पाकिस्तान पर हमला करने के लिए तैयार थी, लेकिन कांग्रेस सरकार पीछे हट गई: पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘अगर कांग्रेस के एक शीर्ष नेता, जो केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं, की बात पर यकीन किया जाए, तो तत्कालीन UPA सरकार एक देश के दबाव में पाकिस्तान पर हमला करने से पीछे हट गई, जबकि हमारे रक्षा बल तैयार थे और देश की भावना (पड़ोसी देश पर) हमला करने की थी.’’ मोदी ने आरोप लगाया कि आतंकवाद से डटकर मुकाबला करने में कांग्रेस की कमजोरी ने आतंकवादियों के हाथ मजबूत किए. उन्होंने कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि 26/11 के हमलों के बाद भारत को जवाबी सैन्य कार्रवाई करने से किसने रोका था. पी चिदंबरम ने मुंबई हमले पर की थी टिप्पणी, पीएम मोदी ने इशारों-इशारों में किया जिक्र पीएम मोदी स्पष्ट रूप से पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम की उस टिप्पणी का जिक्र कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि वह हमलों के बाद व्यक्तिगत रूप से पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई के पक्षधर थे, लेकिन संप्रग सरकार ने विदेश मंत्रालय के विचार के अनुसार इस्लामाबाद के खिलाफ कूटनीतिक कदम उठाने का फैसला किया. चिदंबरम ने कहा था कि अमेरिका सहित वैश्विक शक्तियां चाहती थीं कि भारत पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू न करे.

MP में महिला कांग्रेस के संगठन को मिलेगी मजबूती, नवंबर तक होंगे पदाधिकारियों के चयन

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस की तरह ही मध्य प्रदेश में महिला कांग्रेस में भी संगठन सृजन अभियान के माध्यम से जिला अध्यक्ष की नियुक्ति होगी। नवंबर तक सभी जिला इकाइयों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी जाएगी। यह निर्णय मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय भवन में आयोजित महिला कांग्रेस की कार्यकारिणी में लिया गया। मध्य प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल के मुताबिक, बैठक में तय किया गया कि अखिल भारतीय महिला कांग्रेस और मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस मिलकर पर्यवेक्षक नियुक्त करेंगे, जो पूरे प्रदेश के जिलों का दौरा करेंगे। ये पर्यवेक्षक जिला स्तर पर महिला कांग्रेस की वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद करके उनकी राय के आधार पर जिला अध्यक्ष पद के लिए पैनल तैयार करेंगे। जन आंदोलन शुरू करेगी इसमें से सक्रिय और नेतृत्व क्षमता वाली महिला को जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाएगा। यह प्रक्रिया अक्टूबर अंत तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि नवंबर के पहले सप्ताह में नए जिला अध्यक्षों की घोषणा की जाएगी। इसके बाद महिला कांग्रेस राज्यभर में भाजपा सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली के विरोध में राज्यव्यापी जन आंदोलन शुरू करेगी। इसमें महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, महिला अपराध, महिलाओं का लापता होना, महंगाई, लाड़ली बहनों के साथ तीन रुपये प्रतिमाह देने के नाम पर वादा खिलाफी और स्वास्थ्य, शिक्षा सेवाओं में गिरावट जैसे मुद्दे रहेंगे। नेतृत्व विकास को लेकर होगा प्रशिक्षण- महिला कांग्रेस एक संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इसमें नई जिला अध्यक्षों और प्रदेश पदाधिकारियों को संगठन प्रबंधन, नेतृत्व विकास और जनसंपर्क कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कांग्रेस का ग्राउंड गेम तेज: ज्यादा वोट वाले घरों में पहुंचेगा BLA, BJP के पन्ना प्रमुखों से सीधी टक्कर

भोपाल  एमपी के चुनावों में लगातार हार के बाद कांग्रेस अब वोटर लिस्ट सुधार को लेकर तेजी से काम कर रही है। बीजेपी के पन्ना प्रमुखों के मुकाबले कांग्रेस अब हर बूथ पर बीएलए तैनात कर रही है। 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने प्रदेशभर में मतदाता सूची की करेगी जाँच।  ऐसे में कांग्रेस अब ज्यादा नंबर वाले वोटर्स के घर जाएगी, जो भी नए नाम जुड़ेंगे-कटेंगे उन तक भी पहुंचेगी। कांग्रेस अब केवल प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि मतदाता सूची के हर पन्ने और हर नाम पर अपनी निगरानी रखने पर तेजी से काम करेगी। नाम जुड़वाने, कटवाने की ट्रेनिंग देंगे कांग्रेस सभी बीएलए को निर्वाचन आयोग की प्रक्रियाओं जैसे फॉर्म-6 (नाम जोड़ना), फॉर्म-7 (नाम हटाना), फॉर्म-8 (सुधार) और फॉर्म-8A (स्थानांतरण) की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी। BLO के सीधे संपर्क में होंगे कांग्रेस के BLA कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट (BLA) सीधे बूथ लेवल ऑफिसर (BLO)के संपर्क में रहेंगे। आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार बीएलओ घर-घर जाकर एनेक्सचर-C भरवाएंगे, जो मतदाता की पात्रता प्रमाणित करने का दस्तावेज होगा। कांग्रेस ने अपने बीएलए को यह जिम्मेदारी दी है कि वे इस सर्वे में शामिल होकर हर वोटर का विवरण सही तरीके से दर्ज करवाएं। हर विधानसभा में बनेगा कांग्रेस कंट्रोल रूम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में ‘मतदाता सूची नियंत्रण कक्ष’ बनाएगी। जो निर्वाचन आयोग की वेबसाइट और ऑफलाइन मतदाता सूची दोनों से डेटा एकत्र करेगा। इस कंट्रोल रूम से वोटर लिस्ट में छूटे नामों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। कंट्रोल रूम पार्टी के हर बीएलए से फीडबैक लेगा। और स्थानीय स्तर पर शिकायतों का समाधान कराने पार्टी स्तर पर सूचित करेगा। कांग्रेस के समर्थक वोटर्स के काटे गए थे नाम कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पिछले चुनावों में बड़ी संख्या में समर्थक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे पाए गए थे। इस बार कांग्रेस ने उस गलती को न दोहराने का संकल्प लिया है। SIR को लेकर कांग्रेस की तैयारी     हर मतदान केंद्र पर कम से कम एक प्रशिक्षित बीएलए की नियुक्ति।     मतदाता सूची के संशोधन और दावे-आपत्ति अवधि में सक्रिय भागीदारी।     पात्र युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों को पंजीकृत कराने का अभियान।     मृत मतदाताओं या स्थानांतरित व्यक्तियों के नाम हटवाने के लिए साक्ष्य आधारित आपत्तियाँ।     महिला मतदाताओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम। एमपी के 5 करोड लोगों के हस्ताक्षर कराने चलेगा अभियान वोट चोर-गद्दी छोड़ कार्यक्रम के तहत एमपी में 5 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर कराने एक अभियान चलाया जाएगा। इस हस्ताक्षर अभियान के लिए पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने एमपी की सभी 230 विधानसभाओं के प्रभारी नियुक्त किए हैं।

MP भाजपा कार्यकारिणी में 60% फेरबदल, दिल्ली की मंजूरी के बाद होगी अंतिम घोषणा

भोपाल  मध्यप्रदेश बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा का काम अब लगभग पूरा हो चुका है। अब जल्द टीम का ऐलान होगा। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मिलकर प्रदेश पदाधिकारियों के नामों पर चर्चा की और लिस्ट तैयार की। अब यह लिस्ट केंद्रीय नेतृत्व से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि जल्द इस लिस्ट पर केंद्रीय नेतृत्व की ओर से फाइनल मुहर लग जाएगी।  हेमंत खंडेलवाल को प्रदेश अध्यक्ष बने लगभग 100 दिन पूरे होने वाले हैं। उन्हें 2 जुलाई को अध्यक्ष बनाया गया था और तब से वे पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा की टीम के साथ काम कर रहे हैं। पिछले तीन महीनों से वे लगातार कार्यकर्ताओं से मिलकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी दिवाली से पहले घोषित हो सकती है। इसके बाद एमपी बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी बैठक होगी।  हेमंत खंडेलवाल की टीम में होंगे 60 फीसदी नए चेहरे वीडी शर्मा मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे और उन्होंने 5 साल 4 महीने 17 दिन तक इस पद पर काम किया। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना के कारण उनका कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया गया था, फिर संगठन चुनाव में देरी के कारण उनका कार्यकाल बढ़ता गया। वीडी शर्मा की टीम में रहे 8 पदाधिकारी अब सांसद बन चुके हैं, जबकि 8 अन्य विधायक बन चुके हैं।  वीडी की टीम में रहे 60% चेहरे बाहर होंगे वीडी शर्मा मध्य प्रदेश भाजपा के 5 साल 4 महीने 17 दिन तक प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्हें 15 फरवरी 2020 को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। कोरोना संकट के चलते उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया गया था। फिर संगठन चुनाव में हुई देरी के कारण उनका कार्यकाल अघोषित रूप से बढ़ता गया। वीडी शर्मा के साथ प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल रहे 8 पदाधिकारी सांसद और 8 पदाधिकारी विधायक बन चुके हैं। किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा, महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी सांसद और मंत्री बन गए हैं। नई कार्यकारिणी में टीम वीडी में शामिल रहे पदाधिकारियों में से 60% चेहरे बदले जाएंगे। पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी संभव सितंबर 2021 में बीजेपी ने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। बीजेपी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को संभागीय संगठन मंत्री पद से हटाकर प्रदेश कार्यसमिति में सदस्य बनाया था। इन संगठन मंत्रियों में केशव भदौरिया को छोड़कर 5 नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में एडजस्ट किया था। अब बीजेपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी में इन पुराने संगठन मंत्रियों की वापसी हो सकती है। इस बार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम में करीब 60% नए चेहरे होंगे। इसके अलावा किसान मोर्चा, ओबीसी मोर्चा और महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी अब सांसद और मंत्री बन गए हैं। सितंबर 2021 में बीजेपी ने अपने संभागीय संगठन मंत्रियों को हटा दिया था। उस समय बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने शैलेंद्र बरुआ (जबलपुर और होशंगाबाद), आशुतोष तिवारी (भोपाल और ग्वालियर), जितेंद्र लिटोरिया (उज्जैन), श्याम महाजन (रीवा और शहडोल), जयपाल चावड़ा (इंदौर) और केशव सिंह भदौरिया (सागर और चंबल) को हटाकर उन्हें प्रदेश कार्यसमिति का सदस्य बना दिया था। इनमें से पांच नेताओं को राज्य सरकार ने मंत्री का दर्जा देकर निगम मंडलों में जगह दी थी, लेकिन केशव भदौरिया को इसमें शामिल नहीं किया गया था। अब बीजेपी की नई टीम में इन पुराने मंत्रियों की फिर से वापसी हो सकती है। मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी में इतने नेता मध्यप्रदेश बीजेपी की मौजूदा प्रदेश कार्यकारिणी के प्रदेश उपाध्यक्ष में एक मंत्री, तीन सांसद और दो विधायक हैं। वहीं, प्रदेश महामंत्री में दो विधायक और एक सांसद हैं। साथ ही, प्रदेश मंत्री में दो सांसद और एक विधायक है। वहीं, संयुक्त कोषाध्यक्ष में अनिल जैन कालूहेड़ा से विधायक हैं।    पद (Post) नाम (Name) पद/कार्यक्षेत्र (Designation/Field) प्रदेश उपाध्यक्ष (State Vice President) नागर सिंह चौहान कैबिनेट मंत्री   आलोक शर्मा सांसद (भोपाल)   संध्या राय सांसद (भिंड)   सुमित्रा वाल्मीकि राज्यसभा सांसद   ललिता यादव विधायक   चिंतामणि मालवीय विधायक   चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी पूर्व विधायक (मेहगांव)   कांत देव सिंह     सीमा सिंह जादौन     जीतू जिराती पूर्व विधायक   बहादुर सिंह चौहान पूर्व विधायक   पंकज जोशी     श्याम महाजन     बृजराज सिंह चौहान पूर्व विधायक — — — प्रदेश महामंत्री (State General Secretary) कविता पाटीदार राज्यसभा सांसद   भगवानदास सबनानी विधायक   हरिशंकर खटीक विधायक   शरलेन्दु तिवारी पूर्व विधायक   रणवीर सिंह रावत पूर्व विधायक — — — प्रदेश मंत्री (State Secretary) लता वानखेड़े सांसद (सागर)   आशीष दुबे सांसद (जबलपुर)   मनीषा सिंह विधायक   रजनीश अग्रवाल     प्रभुदयाल कुशवाहा     राजेश पांडेय     नंदिनी मरावी पूर्व विधायक   राहुल कोठारी     संगीता सोनी     जयदीप पटेल     केशव सिंह भदौरिया     क्षितिज भट्ट     योगेश पाराशर   — — — कोषाध्यक्ष (Treasurer) अखिलेश जैन CA संयुक्त कोषाध्यक्ष (Joint Treasurer) अनिल जैन कालूहेड़ा विधायक प्रदेश कार्यालय मंत्री (State Office Secretary) राघवेन्द्र शर्मा   कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चों के भी बदलेंगे अध्यक्ष  बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी में जगह पाने के लिए नेताओं ने बड़े नेताओं से सिफारिशें करवाई हैं। सबसे ज्यादा कोशिश प्रदेश महामंत्री बनने के लिए की गई है। इसके अलावा, प्रदेश कार्यालय प्रभारी और कार्यालय मंत्री के लिए भी नेताओं ने नए प्रदेश अध्यक्ष से कई बार मुलाकात की है। बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी के साथ-साथ मोर्चों के अध्यक्ष भी बदलेंगे। ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नारायण सिंह कुशवाह अब मध्यप्रदेश सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री बन गए हैं। किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी दर्शन सिंह होशंगाबाद से सांसद बन गए हैं। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष माया नारोलिया राज्यसभा सांसद बन चुकी हैं। इन बदलावों के साथ-साथ युवा मोर्चा, एससी मोर्चा और एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जाएंगे।      

गिरिराज सिंह से मिलीं अक्षरा सिंह, क्या लड़ेंगी विधानसभा चुनाव? अटकलों को मिली हवा

पटना  बिहार में जैसे-जैसे चुनावी माहौल गर्म हो रहा है, वैसे-वैसे सियासी गलियारों में नए चेहरे सुर्खियों में आ रहे हैं. अब भोजपुरी फिल्मों की मशहूर एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने भी राजनीति में कदम रखने के संकेत दे दिए हैं. दरअसल, अक्षरा सिंह ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की है.  इस मुलाकात की तस्वीर उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर शेयर की और लिखा- 'गिरिराज सिंह जी से आशीर्वाद मिला.' इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है कि क्या अक्षरा सिंह भी इस बार बिहार के चुनावी रण में उतरने की तैयारी कर रही हैं?  विनोद तावड़े से मिलीं मैथिली ठाकुर बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कई नाम राजनीति में एंट्री कर चुके हैं. एक दिन पहले ही लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने विनोद तावड़े और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की थी.   मैथिली ने कहा कि उनकी बातचीत बेहद सकारात्मक रही और वह एनडीए के समर्थन में हैं. उन्होंने कहा कि मेरी आत्मा बिहार से जुड़ी है और मैं बिहार में रहकर लोगों की सेवा करना चाहती हूं. कई बड़े चेहरों की राजनीति में एंट्री   इससे पहले भोजपुरी फिल्मों के एक्टर पवन सिंह की भी बीजेपी में वापसी हो चुकी है. गायक और अभिनेता रितेश पांडे भी प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज जॉइन कर चुके हैं. चर्चा है कि मशहूर गायक राधेश्याम रसिया भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.  इस लिस्ट में एक नाम भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव का भी है जिन्होंने पिछले दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की थी. हालांकि उनके राजनीति में आने या चुनाव लड़ने को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.