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लहर खबरों की

Aastha Pandey

Writer News & Blogger

महंगा हुआ लंबा रेल सफर: रोज़ाना यात्रियों की जेब सुरक्षित

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रेलवे ने लंबी दूरी के किराये बढ़ाए, लेकिन उपनगरीय ट्रेन और मासिक सीजन टिकट के दाम नहीं बदले। भारतीय रेलवे ने यात्रियों के किराये ढांचे में आंशिक बदलाव करने का फैसला लिया है। यह बदलाव खास तौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों पर लागू होगा। रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार नई किराया दरें 26 दिसंबर से लागू होंगी। हालांकि राहत की बात यह है कि रोजाना यात्रा करने वालों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। रेलवे ने साफ किया है कि 215 किलोमीटर से कम दूरी की यात्रा सस्ती ही रहेगी। इसके अलावा उपनगरीय ट्रेन और मासिक सीजन टिकट के किराये भी पहले जैसे ही रहेंगे। इस फैसले से महानगरों में लोकल ट्रेन से सफर करने वालों को राहत मिली है। किन यात्रियों के लिए महंगा हुआ ट्रेन सफर रेलवे के अनुसार 215 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने वाले यात्रियों को बढ़ा किराया देना होगा।साधारण श्रेणी में प्रति किलोमीटर एक पैसे की मामूली बढ़ोतरी की गई है।मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की गैर वातानुकूलित श्रेणी में दो पैसे प्रति किलोमीटर बढ़े हैं।वहीं वातानुकूलित यानी एसी श्रेणी में भी दो पैसे प्रति किलोमीटर अतिरिक्त देने होंगे। अगर कोई यात्री गैर वातानुकूलित श्रेणी में 500 किलोमीटर यात्रा करता है।तो उसे पहले के मुकाबले कुल दस रुपये ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा।रेलवे का कहना है कि यह बढ़ोतरी बेहद सीमित और संतुलित रखी गई है। ये खबर भी पढ़े …2025 में 67 पत्रकार मारे गए: RSF रिपोर्ट बताती है पत्रकारों पर बढ़ता जोखिम और खतरनाक स्थिति किन यात्रियों को नहीं पड़ेगा कोई असर रेलवे ने 215 किलोमीटर से कम दूरी के सफर पर कोई किराया नहीं बढ़ाया है।इसका सीधा फायदा रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को मिलेगा।उपनगरीय ट्रेनों के टिकट के दाम भी पूरी तरह पहले जैसे रखे गए हैं।मंथली सीजन टिकट यानी एमएसटी की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में लोकल यात्रियों को राहत मिली है।इन शहरों में लाखों लोग रोजाना काम, पढ़ाई और व्यवसाय के लिए ट्रेन इस्तेमाल करते हैं। ये खबर भी पढ़े …महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब रेलवे ने किराया क्यों बढ़ाया, जानिए कारण रेलवे सूत्रों के अनुसार किराया बढ़ाने का मुख्य कारण बढ़ती परिचालन लागत है।पिछले कुछ वर्षों में ईंधन, रखरखाव और तकनीकी खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है।इसके अलावा रेलवे देशभर में अवसंरचना विकास परियोजनाओं पर भी बड़ा निवेश कर रहा है। नए रेलवे स्टेशन, आधुनिक प्लेटफॉर्म और वंदे भारत जैसी नई ट्रेनें इसी योजना का हिस्सा हैं।रेलवे का कहना है कि यात्रियों को बेहतर सुविधा देना प्राथमिक लक्ष्य बना हुआ है। ये खबर भी पढ़े …Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी रेलवे की बढ़ती जिम्मेदारियां और खर्च रेलवे नेटवर्क और ट्रेनों की संख्या पिछले दस वर्षों में तेजी से बढ़ी है।सुरक्षा और संचालन के लिए बड़ी संख्या में नए रेलकर्मियों की भर्ती की गई है।इन कर्मचारियों के वेतन और भत्तों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। रेलवे के अनुसार कर्मचारियों पर सालाना खर्च बढ़कर लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये हो गया है।इसके अलावा पेंशन पर हर साल करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।वर्ष 2024-25 में रेलवे का कुल परिचालन खर्च 2.63 लाख करोड़ रुपये रहा है। रेलवे को कितनी अतिरिक्त आमदनी होगी रेलवे ने अनुमान लगाया है कि इस किराया संशोधन से सालाना 600 करोड़ रुपये मिलेंगे।इस अतिरिक्त राशि का उपयोग सेवाओं के सुधार और परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।रेलवे का कहना है कि बिना ज्यादा बोझ डाले संसाधन जुटाना जरूरी था। यात्रियों के लिए क्या है इस फैसले का मतलब लंबी दूरी के यात्रियों को थोड़ा ज्यादा भुगतान करना होगा।लेकिन रोजमर्रा के यात्रियों को पूरी तरह राहत दी गई है।रेलवे ने संतुलन बनाते हुए किराया नीति में बदलाव किया है। यह फैसला यात्रियों और रेलवे दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।आने वाले समय में रेलवे और बेहतर सुविधाएं देने का दावा कर रहा है।

2025 में 67 पत्रकार मारे गए: RSF रिपोर्ट बताती है पत्रकारों पर बढ़ता जोखिम और खतरनाक स्थिति

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दुनिया भर में सच लिखने और लोगों तक हकीकत पहुँचाने की कीमत कई बार जान देकर चुकानी पड़ती है—और यही बात 2025 की आरएसएफ रिपोर्ट एक बार फिर दर्दनाक तरीके से याद दिलाती है। पेरिस से जारी इस ताज़ा रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले एक साल में 67 पत्रकार अपने काम को निभाते-निभाते मारे गए, जिनमें से ज्यादातर को युद्ध, हिंसा और संगठित अपराध ने निशाना बनाया। आरएसएफ का बयान दिल दहला देने वाला है—“पत्रकार सिर्फ़ मरते नहीं, उन्हें मारा जाता है।” यह वाक्य साफ दिखाता है कि ये मौतें किसी हादसे का परिणाम नहीं बल्कि सच बोलने और सच दिखाने की सज़ा हैं। रिपोर्ट बताती है कि 67 में से 53 पत्रकारों की हत्या युद्ध क्षेत्रों या आपराधिक गिरोहों द्वारा की गई, जो यह साबित करती है कि पत्रकारों के लिए दुनिया पहले से कहीं अधिक खतरनाक हो चुकी है। RSF रिपोर्ट 2025: 67 पत्रकार मारे गए और प्रेस फ़्रीडम ख़तरे में Reporters Without Borders (आरएसएफ) एक अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र संस्थान है जो प्रेस फ़्रीडम, यानी समाचार के आज़ाद काम, की रक्षा करता है। इसने 2025 के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि पिछले 12 महीनों में संपूर्ण दुनिया में 67 पत्रकार काम के दौरान मारे गए हैं। ये आंकड़े इस बात को उजागर करते हैं कि पत्रकारों की सुरक्षा आज भी बहुत बड़े खतरे में है और उन्हें सिर्फ़ दुर्घटना में नहीं बल्कि जानबूझकर अपना काम करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। पत्रकारों की हत्या सिर्फ़ एक आक़ड़े की बात नहीं है, बल्कि यह उस मिशन पर हमला भी है जिसके लिए वे जनता को सच बताते हैं। इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु नीचे सरल, आसान और तथ्य-आधारित भाषा में विस्तार से दिए गए हैं: 🔹मुख्य आंकड़े और तथ्य🔹67 पत्रकार मारे गए पिछले एक साल में सभी दुनियाभर में 67 पत्रकारों को उनके काम के कारण मारा गया है। इनमें से अधिकांश पत्रकारों की मौत हिंसा, युद्ध या क्रिमिनल गिरोहों की गतिविधियों के कारण हुई है, न कि किसी सामान्य दुर्घटना से। लगभग 79% हत्याएं सशस्त्र समूहों या संगठित अपराध कारण हुईं।लगभग 43% पत्रकारों को गाज़ा में मौत का सामना करना पड़ा, वहां के संघर्ष के कारण।🔹 सबसे अधिक खतरनाक क्षेत्र और देश🔹 गाज़ा / इज़राइलगाज़ा संघर्ष क्षेत्र दुनिया में सबसे खतरनाक स्थान है, जहाँ 29 से अधिक पत्रकारों की मौत हुई, जो कुल मौतों का लगभग आधा हिस्सा है। ये खबर भी पढ़े….सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी में सामाजिक एकता का संदेश 🔹 मैक्सिकोदुनिया में पत्रकारों के लिए दूसरा सबसे खतरनाक देश मैक्सिको है, जहाँ 9 पत्रकारों को संगठित अपराधों ने मारा। 🔹 सूडान और यूक्रेन में संघर्षसूडान और यूक्रेन जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भी पत्रकारों की जानें चली गईं। सूडान में चार और यूक्रेन में कुछ पत्रकार संघर्ष की घटनाओं के कारण मारे गए। 🔹 स्थानीय पत्रकारों को ज्यादा खतरा रिपोर्ट यह भी बताती है कि जिन पत्रकारों को मारा गया, उनमें से केवल दो ही विदेशी पत्रकार थे — बाकी सभी अपने ही देश में स्थानीय पत्रकारों को निशाना बनाया गया। इसका मतलब है कि पत्रकारों को अपने घर की मिट्टी पर भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता। ये खबर भी पढ़े….महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब 🔹 503 पत्रकार हिरासत में हैं RSF की रिपोर्ट के अनुसार, एक 1 दिसंबर 2025 तक 503 पत्रकारों को दुनिया भर में हिरासत में लिया गया है। यह संख्या प्रेस की आज़ादी पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है। 🔹 चीन में सबसे अधिक 121 पत्रकार जेल में हैं। 🔹 रूस में 48, और🔹 म्यांमार में 47 पत्रकार हिरासत में हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ देशों में पत्रकारों के खिलाफ अविश्वसनीय तरीके से आरोप लगाए जा रहे हैं, जैसे “देशद्रोह”, “गलत सूचना फैलाना” आदि। ये खबर भी पढ़े….धर्मेंद्र का आख़िरी सफर: बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ एक युग छोड़कर चला गया 🔹 135 पत्रकार लापता और 20 बंधक रिपोर्ट में यह भी आंकड़ा शामिल है कि लगभग 135 पत्रकार लापता हैं और 20 को बंधक बनाया गया है, जो यह दिखाता है कि संघर्ष और खतरों से पत्रकारों का सामना कितना गंभीर है। 🔹 RSF का संदेश और चेतावनी RSF ने अपनी रिपोर्ट में कहा है:🔹 “पत्रकार सिर्फ़ मरते नहीं — उन्हें मारा जाता है।”यह वाक्य यह स्पष्ट करता है कि पत्रकारों के खिलाफ हिंसा दुर्घटना नहीं बल्कि जानबूझकर की जा रही है। 2025 में पत्रकारों के खिलाफ मुख्य वजहें🔹 युद्ध और संघर्ष युद्ध के समय पत्रकारों को स्थिति रिपोर्ट करने के लिए आगे जाना पड़ता है, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। 🔹 संगठित अपराध मैक्सिको और कुछ अन्य देशों में संगठित अपराध पत्रकारों को डराने और रोकने के लिए हिंसा का उपयोग करते हैं। 🔹 राजनैतिक एवं सरकारी दबाव कुछ देशों में पत्रकारों को “गलत सूचना फैलाना” का आरोप लगाकर जेल में डाल दिया जाता है या प्रताड़ित किया जाता है। 🔹 डाटा से क्या समझें? 📌 यह जरूरी नहीं कि ये आंकड़े हर मौत को शामिल करें; रिपोर्ट केवल उन मौतों को गिनती में लेती है जिन्हें साक्ष्यों के साथ पत्रकारियों के काम से जोड़ा गया है।📌 अलग-अलग संस्थान, जैसे UNESCO या IFJ, उनके आंकड़े थोड़े अलग दे सकते हैं, लेकिन RSF का तरीका पत्रकार के काम से प्रत्यक्ष जुड़े मामलों पर केंद्रित होता है। 🔹 विश्व में प्रेस आज़ादी की स्थिति दुनिया भर में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा, गिरफ्तारी, उत्पीड़न, और लापता होने की घटनाओं ने यह दिखा दिया है कि प्रेस की आज़ादी पर आज भी भारी खतरा मंडरा रहा है। पत्रकार केवल खबरें नहीं लाते — वे सत्य, साक्ष्य और विश्वसनीय जानकारी साझा करते हैं। इसीलिए उनकी सुरक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। 🔹FAQs🔹1. 2025 में कुल कितने पत्रकार मारे गए? 2025 में Reporters Without Borders की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 67 पत्रकार मारे गए हैं, जो उनके काम या संघर्ष क्षेत्रों में खबर कवर करते समय हुए हमलों का परिणाम है। 🔹3. कितने पत्रकार जेल में हैं और किस देश में सबसे अधिक?RSF के अनुसार 503 पत्रकार दुनिया भर में जेलों में हैं।🔹 चीन में सबसे ज़्यादा 121 पत्रकार जेल में हैं, उसके बाद रूस और म्यांमार का स्थान है।

IndiGo फ्लाइट कैंसिलेशन संकट: क्यों रद्द हो रहीं फ्लाइटें

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) पिछले कुछ दिनों से बड़े ऑपरेशनल संकट से जूझ रही है। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक ही दिन में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और चार दिनों में यह संख्या 2000 के पार पहुंच गई। लगभग 3 लाख यात्री सीधे तौर पर प्रभावित हुए, जिससे देशभर के एयरपोर्ट्स पर भारी अफरा-तफरी मच गई। यह पूरा संकट आखिर कैसे शुरू हुआ, सरकार ने क्या कदम उठाए और यात्रियों की परेशानी इतनी क्यों बढ़ी—आइए इसे बहुत आसान और साफ भाषा में समझते हैं। IndiGo की 1000+ उड़ानें रद्द – 4 दिन में लाखों यात्री प्रभावित। FDTL नियम, पायलट कमी व DGCA की छूट ने लाया हवाई अराजकता। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इन दिनों एक बड़े संकट से जूझ रही है। दिसंबर 2025 की शुरुआत में एक ही दिन में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। इसके बाद अगले तीन-चार दिन में कुल रद्द उड़ानों की संख्या 2000 के पार चली गई। अनुमान है कि इस दौरान करीब 3 लाख से अधिक यात्री सीधे प्रभावित हुए। Flughorizons पर अफरा-तफरी, टिकट काउंटर पर लंबी कतारें और गुस्साए यात्रियों की तस्वीरें आम हो गईं। इस संकट की जड़ है नया नियम — Flight Duty Time Limitation (FDTL) — जिसे पायलटों की सुरक्षा व थकान कम करने के लिए लागू किया गया था। लेकिन IndiGo ने इस बदलाव के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं की। 🚩 FDTL:नियम तूफान’ खड़ा किया नया FDTL नियम नवंबर 2025 से पूरी तरह लागू हुआ। इसमें पायलटों के काम-आराम समय को बदल दिया गया। पुराने अनुसार 36 घंटे की साप्ताहिक आराम-छुट्टी (weekly rest) अब बढ़ाकर 48 घंटे की गई। रात की उड़ानों व नाइट-लैंडिंग की सीमा भी तय की गई। इसका मकसद पायलटों की थकान कम करना और हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाना था। लेकिन इससे इंडिगो जैसे बड़े नेटवर्क वाली एयरलाइन्स के लिए क्रू प्लानिंग मुश्किल हो गई। IndiGo हर दिन करीब 2,200–2,300 उड़ानें संचालित करती है। इतना बड़ा नेटवर्क अगर पायलटों की कमी से चलना हो — तो एक छोटी गड़बड़ी पूरे नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है। ये खबर भी पढ़े …सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी में सामाजिक एकता का संदेश क्रू कमी व खराब प्लानिंग DGCA (DGCA) की रिपोर्ट कहती है कि नवंबर में IndiGo ने 1,232 उड़ानें रद्द कीं — जिनमें से 755 उड़ानें सिर्फ क्रू / FDTL कारणों से थीं। एयरलाइन ने खुद स्वीकार किया कि उसने नए नियम लागू होने पर “क्रू जरूरत” का सही अनुमान नहीं लगाया। पायलट यूनियन (क्रू एसोसिएशन) ने आरोप लगाया कि IndiGo ने पायलटों की भर्ती रोक दी थी, तनख्वाह स्थिर रखी थी और नॉन-पोचिंग समझौते पर काम कर रही थी — यानी, उनकी कर्मचारी व्यवस्था जानबूझकर पतली थी। इस वजह से, जब FDTL लागू हुआ — पायलटों की संख्या कम पड़ गई, और रात की उड़ानों व शिफ्टों के कारण बहुत सी उड़ानें रद्द हो गईं। ये खबर भी पढ़े …महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब पायलटों की भारी कमी इंडिगो ने खुद माना कि उनके पास कम से कम 200 पायलटों की कमी है।अगर कंपनी ने शुरुआती समय पर भर्ती की होती, तो आज यह संकट नहीं आता। नए पायलटों को भर्ती करने, ट्रेनिंग देने और लाइसेंस जारी करने में 6–8 महीने का समय लगता है। इसलिए अचानक हुए बदलाव ने पूरे सिस्टम को झटका दे दिया। हालत इतनी बिगड़ी एयरपोर्ट पर बैठे हुए यात्रियों की भीड़, टिकट काउंटर पर हंगामा, बोर्डिंग गेट्स पर गुस्से, कई उड़ानें 4–10 घंटे तक लेट हुईं। आमतौर पर जब उड़ानें कम रद्द होती थीं, किराया स्थिर रहता था। लेकिन इस आपदा के बीच कुछ रूट्स पर किराया 4–6 गुना तक बढ़ गया। इससे लोगों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ा। कई लोग अपनी यात्रा कैंसिल करके ट्रेन या बस से जाना पड़े; कुछयों को होटल में रात गुजारनी पड़ी। ये खबर भी पढ़े …धर्मेंद्र का आख़िरी सफर: बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ एक युग छोड़कर चला गया IndiGo की सफाई DGCA ने FDTL नियम के ‘weekly rest substitution’ वाले प्रावधान को फौरन वापस लिया — यानी अब छुट्टी को रेस्ट न मानने की शर्त हटा दी गई। IndiGo ने कहा है कि वह 8 दिसंबर से अपने ऑपरेशन को नियंत्रित करेगी, और पूरी तरह से 10 फरवरी 2026 तक सामान्य ऑपरेशन बहाल कर देगी। DGCA ने एक जांच समिति बना दी है, ताकि पता चल सके कि गलत योजना थी या शेड्यूल बढ़ा देने की मंशा थी। क्या यह सिर्फ IndiGo की गलती है? कई पायलट संगठन कहते हैं कि ये सिर्फ क्रू कमी नहीं है। सिंक में यह मानना गलत होगा कि FDTL नियम — पायलटों की सेहत के लिए – ही हवाई अराजकता की वजह है। उन्होंने कहा कि दूसरी एयरलाइन्स ने नियमों की तैयारी समय पर कर ली, इसलिए वे प्रभावित नहीं हुईं। कुछ लोग इसे एक तरह का दबाव मानते हैं — कि IndiGo ने जानबूझकर किरायों और शेड्यूल का हाल खराब करके नियमों की ढील दिलाई हो। हालांकि यह आरोप है, पर यात्रियों की असुविधा सच थी। अब आगे क्या होगा ? IndiGo कह रही है कि 10 फरवरी 2026 तक सब सामान्य हो जाएगा — यानी नए पायलटों की भर्ती, शेड्यूल में कटौती, और बेहतर क्रू प्रबंधन। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पायलट भर्ती, ट्रेनिंग, रेस्ट-शेड्यूल, और चार्टर्ड फ्लाइट नेटवर्क पर अच्छी प्लानिंग नहीं हुई -तो फिर से ऐसा संकट दोबारा हो सकता है। सरकार और DGCA को अब सुनिश्चित करना होगा कि यात्रियों का भरोसा बहाल हो, फीस-नियंत्रण हो और एयरलाइन्स भविष्य के लिए सुरक्षित व टिकाऊ योजना बनाएं। यह संकट सिर्फ एक एयरलाइन या एक नियम का नहीं है — यह पूरी इंडस्ट्री, योजना, सुरक्षा, जहाज़ी कर्मचारियों और यात्रियों के विश्वास का मसला है। जहाँ पायलटों की थकान कम करना ज़रूरी है, वहीं यात्रियों को सुविधा व भरोसे की गारंटी भी चाहिए। IndiGo की यह चूक, DGCA की ढील, और यात्रियों की पीड़ा — यह सब हमें याद दिलाता है कि वायु-यात्री व्यवस्था में संतुलन बहुत नाज़ुक है। उम्मीद है कि आगे से बेहतर तैयारी होगी; ऐसी स्थिति फिर नहीं आएगी; और यात्रियों को भरोसा मिलेगा कि उनका सफर आरामदायक, सुरक्षित व विश्वसनीय रहेगा। FAQs … Read more

सीएम मोहन यादव के बेटे की शादी में सामाजिक एकता का संदेश

Mohan yadav

उज्जैन: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने छोटे पुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव की शादी को एक यादगार और सादगी भरे अंदाज़ में आयोजित किया। शिप्रा तट पर आयोजित इस अनोखे सामूहिक विवाह सम्मेलन में 22 जोड़ों ने एक साथ सात फेरे लिए। न कोई भव्य सजावट, न वीआईपी स्टेज—फिर भी यह समारोह सामाजिक समरसता और सादगी का शानदार संदेश बन गया। योग गुरु बाबा रामदेव ने वैदिक रीति से मंत्र पढ़कर जोड़ों का मंगल किया, जबकि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और जूना अखाड़ा के संतों ने सभी जोड़ों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। यह आयोजन न केवल सीएम परिवार की सरलता को दर्शाता है, बल्कि देश में सामूहिक विवाह की परंपरा को भी नया आयाम देता है। मध्य प्रदेश में सामूहिक विवाह: CM बेटे की शादी बनी मिसालएक समारोह, 22 जोड़े — सादगी, समरसता और संस्कार उज्जैन (Sanwarkhedi) — 30 नवंबर 2025 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav के पुत्र Abhimanyu Yadav ने अपनी प्रेमिका Ishita Patel के साथ सात फेरे लिए। लेकिन यह शादी सामान्य नहीं थी। उनके साथ 21 अन्य जोड़ों ने भी एक साथ विवाह किया — यानी कुल 22 दूल्हा-दुल्हन एक ही सामूहिक विवाह समारोह में परिणय सूत्र में बंधे। इस प्रकार का समूहीकरण — जहां दिखावे और भारी खर्च के बजाय सादगी और सामाजिक समरसता पर जोर हो — आज के समय में बेहद चर्चा का विषय बन गया है। ये खबर भी पढ़े…महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब समारोह का स्वरूप: दिखावे नहीं, सबका साथ विवाह स्थल सांवराखेड़ी के शिप्रा नदी किनारे सजाया गया। बारात में दूल्हे घोड़ों पर सवार हुए, जबकि दुल्हनें सज-धजकर बग्घियों में आईं। समारोह आयोजन बेहद व्यवस्थित था — 22 मंडप बनाए गए, ग्रीन रूम, अतिथि व्यवस्था व अन्य सुविधाएं पूरी की गई थीं। शादी के निमंत्रण कार्ड में मेहमानों से आग्रह किया गया था कि वे कोई उपहार न लाएँ — एक साफ संदेश कि शादियों में दिखावा नहीं, संवेदनशीलता व सामूहिकता होनी चाहिए। CM ने कहा कि यह कदम ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना का प्रतीक है। उनका मानना है कि इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को भी सम्मानजनक विवाह का अवसर मिले। ये खबर भी पढ़े…धर्मेंद्र का आख़िरी सफर: बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ एक युग छोड़कर चला गया गणमान्य अतिथि और सामाजिक संदेश इस समारोह में उपस्थित थे — योग गुरु Baba Ramdev जिन्होंने पूरी रस्में करवाईं, और धर्मगुरु Dhirendra Shastri भी मौजूद थे। दोनों ने इस पहल की सराहना की और इसे समाज में wasteful expenditure (अनावश्यक खर्च) को रोकने व सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। राज्य के राज्यपाल Mangubhai Patel ने भी CM की इस सोच को सराहा और कहा कि सामूहिक विवाह समाज में भाई-चारे व समानता का संदेश देता है। बहुत से दूल्हा-दुल्हन — जिनके परिवार आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं थे — अब बिना भारी खर्च के, सम्मान और गरिमा के साथ अपना गृहस्थ जीवन शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि वे इस पहल से बहुत खुश हैं। ये खबर भी पढ़े…Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी क्यों है यह विवाह अलग और महत्वपूर्णशादी में दिखावे से बचाव: कोई महंगा होटल, कोई भव्य सजावट नहीं। सादगी का संदेश: न्यूनतम खर्च और सादे निमंत्रण कार्ड — पारिवारिक और सामाजिक बोझ को कम करना। सर्वसमावेशिता: 22 जोड़ें, अलग-अलग पृष्ठभूमि — यह दिखाता है कि विवाह सिर्फ परिवार नहीं, समाज भी है। समरसता और आर्थिक न्याय: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को सम्मान के साथ विवाह — यह सामाजिक जिम्मेदारी है। CM ने खुद कहा कि “बड़ा नहीं, छोटा नहीं; सब बराबर हैं। मेरे बेटे की शादी हो रही है, लेकिन 21 और जोड़ों की भी नई जिंदगी शुरुआत हो रही है।” सामाजिक ओर राजनीतिक प्रतिक्रिया कई लोग कह रहे हैं कि यह पहल भविष्य में अन्य राजनेताओं और बड़े परिवारों के लिए मिसाल बनेगी। धार्मिक और सामाजिक गुरु भी इस तरह की सामूहिक विवाह सभाओं को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं — इससे समाज में wasteful expenditure कम होगा और विवाह समारोहों का असली मकसद — जोड़ना, आशीर्वाद, नए जीवन की शुरुआत — सामने आएगा। विपक्षी दलों में भी इस फैसले की सराहना हुई है कि एक राजनीतिक परिवार ने निजी दिखावे से हटकर आम जनता, गरीबों और समाज को प्राथमिकता दी है। इस सामूहिक विवाह समारोह ने ये साबित कर दिया कि शादी महज एक परिवार का निजी पर्व नहीं, बल्कि समाज का उत्सव हो सकता है। जब एक मुख्यमंत्री अपने बेटे की शादी में ऐसा उदाहरण पेश करता है, तो निश्चित रूप से आगे कई लोग इसे अपनाएंगे। यह दिखावा नहीं, संवेदनशीलता, व्यर्थ खर्च नहीं, सामूहिक खुशी — इस तरह की सोच समाज में स्थायी परिवर्तन ला सकती है। FAQs Q1: यह सामूहिक विवाह क्यों किया गया?A: इस विवाह को सामूहिक रूप से इसलिए आयोजित किया गया ताकि दिखावे (lavish weddings) से बचा जा सके और गरीब-जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को भी सम्मानजनक विवाह मिल सके। इससे शादी में होने वाले व्यर्थ खर्च और सामाजिक असमानता दोनों कम होती है। Q2: इस विवाह में कितने जोड़ें शामिल हुए?A: मुख्यमंत्री के बेटे सहित कुल 22 जोड़ें — यानी 1 दूल्हा-दुल्हन + 21 अन्य जोड़े — एक ही समारोह में विवाह के बंधन में बंधे। Q3: इसमें कौन-कौन शामिल हुआ — साधु-महात्मा, राजनीतिक शख्सियतें, आम लोग?A: समारोह में योग गुरु बाबा रामदेव, धर्मगुरु धीरेंद्र शास्त्री, राज्यपाल, कई मंत्री, विधायक आदि प्रमुख लोगों के साथ साथ 21 सामान्य जोड़े भी शामिल थे। यह शादी राजनीति, धर्म और समाज के तेनातंत्र को एकत्रित करने वाला उदाहरण बनी।

महिलाओं की गरिमा पर कोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स में महिलाओं की निजता और स्वास्थ्य सुरक्षा पर केंद्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा, दिशानिर्देश बनाने पर हो सकती है बड़ी पहल।सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की गरिमा और अधिकारों को केंद्र में रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर पहल की है। हरियाणा के एमडीयू में महिलाओं की कथित ‘पीरियड चेकिंग’ की खबर ने देश को झकझोर दिया, और इसी के बाद अदालत ने केंद्र और हरियाणा सरकार से तत्काल जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि पीरियड्स एक प्राकृतिक और निजी प्रक्रिया है, जिसे किसी भी महिला के सम्मान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। अब अदालत ऐसे अपमानजनक मामलों को रोकने के लिए पूरे देश में समान और सख्त दिशानिर्देश बनाने पर विचार कर रही है। यह फैसला महिलाओं की निजता, स्वास्थ्य और सम्मान की सुरक्षा में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। पीरियड्स कोई शर्म की बात नहीं –सुप्रीम कोर्ट ये खबर भी पढ़े…एआईसीटीई की नई मंजूरी प्रक्रिया: 2026–27 में खुलेंगे नए इंजीनियरिंग कॉलेज नयी दिल्ली की सर्द सुबह में जब सुप्रीम कोर्ट की एक महत्वपूर्ण सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर बड़ा कदम उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने पीरियड्स के दौरान महिलाओं की निजता और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार दोनों को नोटिस जारी किया। यह मामला तभी उठा जब हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) में महिला सफाई कर्मचारियों की कथित तौर पर फिजिकल चेकिंग किए जाने की खबरें सामने आईं। यह चेकिंग इस लिए की गई कि यह पता लगाया जाए कि कौन सी महिला “पीरियड में है और कौन नहीं’। यह खबर चौंकाने वाली थी, और इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने एक जनहित याचिका दायर की ताकि पूरे देश में ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्पष्ट और मजबूत दिशानिर्देश तैयार किए जा सकें। ये खबर भी पढ़े…NEET PG में नया सीट चार्ट – हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बदला हुआ फैसला “महिलाओं की इज्जत पर कोई समझौता नहीं”-सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान पीठ की अगुआई कर रहीं जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने बेहद सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला पीरियड्स की वजह से भारी काम नहीं कर पा रही है, तो नियोक्ता का कर्तव्य है कि: उसे हल्का काम दिया जाए, या किसी और को अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाए।उन्होंने साफ कहा— “पीरियड्स एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, कोई जांच का विषय नहीं।” जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि समाज में कुछ लोगों की सोच अब भी महिलाओं के प्रति भेदभाव से भरी है, और एमडीयू की घटना इसी मानसिकता को दिखाती है। ये खबर भी पढ़े…डिज़ाइन + टेक्नोलॉजी: कैसे बन रहा है UI/UX, VFX और XR में भविष्य का सबसे स्मार्ट करियर? “देश भर में ऐसी घटनाएं हो रही हैं” SCBA के अध्यक्ष विकाश सिंह ने अदालत को बताया कि हरियाणा ही नहीं, देश के दूसरे राज्यों से भी ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जहां महिलाओं से पीरियड्स के बारे में अनैतिक और अपमानजनक तरीके से सवाल या जांच की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें: महिलाओं की निजता का उल्लंघन करती हैं, संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 का सीधा हनन करती हैं और महिलाओं को मानसिक व भावनात्मक रूप से अपमानित करती हैं। इस पर पीठ ने गंभीर टिप्पणी की— “इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।” हरियाणा सरकार की रिपोर्ट— हरियाणा सरकार ने कोर्ट को बताया कि:- प्रशासन ने इस मामले में सहायक रजिस्ट्रार समेत दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। ठेके पर रखे गए दो सुपरवाइजर्स को बर्खास्त करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, यदि किसी महिला के साथ जातीय या सामाजिक भेदभाव हुआ है, तो SC/ST (अत्याचार रोकथाम) कानून भी लगाया गया है। अदालत ने इस अपडेट को गंभीरता से लिया और कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। पूरे देश के लिए दिशानिर्देश बनेंगे? सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अदालत सोच रही है कि क्या पूरे देश के लिए: स्पष्ट दिशानिर्देश- और सख्त नियम बनाए जाएं- ताकि कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में कोई भी महिला अपमानजनक जांच या भेदभाव का शिकार न हो। जस्टिस नागरत्ना ने कहा— “यह एक गंभीर मुद्दा है, और इस पर बात करने की जरूरत है।” उन्होंने कर्नाटक में “मंथली पीरियड लीव” नीति के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा:“अगर छुट्टी का प्रावधान बने, तो क्या महिलाओं से यह साबित करने के लिए कहा जाएगा कि वे पीरियड्स में हैं?” यह टिप्पणी अदालत की चिंता को साफ दर्शाती है।अगली सुनवाई अगले सप्ताह—महिलाओं के अधिकारों पर हो सकता है बड़ा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा दोनों से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड प्रज्ञा बघेल ने दायर की थी। याचिका में कई पुराने मामलों और घटनाओं का उल्लेख भी है, जहां महिलाओं के साथ मासिक धर्म के नाम पर अत्याचार किया गया था। यह मामला आगे चलकर पूरे देश में महिलाओं की निजता की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, सुरक्षा, और सम्मान से जुड़े कानूनों को नए रूप देने का आधार बन सकता है। FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल हाँ, ऐसी जांच महिलाओं की निजता का उल्लंघन है और संविधान के आर्टिकल 14, 19 और 21 के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट भी इसी मुद्दे पर दिशानिर्देश बनाने की सोच रहा है। क्योंकि हरियाणा के एमडीयू में महिलाओं की पीरियड्स जांच का मामला सामने आया था। अदालत चाहती है कि देशभर में ऐसी घटनाएं न हों और इसके लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।

धर्मेंद्र का आख़िरी सफर: बॉलीवुड का ‘ही-मैन’ एक युग छोड़कर चला गया

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बॉलीवुड के अमर सितारे और हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र देओल अब हमारे बीच नहीं रहे। 24 नवंबर 2025 की सुबह, मुंबई स्थित अपने निवास पर 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके जाने की खबर फैलते ही पूरे देश में गहरा दुख छा गया—सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक हर जगह शोक और भावुक संदेशों की बाढ़ आ गई। पीढ़ियों तक लोगों के दिलों पर राज करने वाले धर्मेंद्र सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की आत्मा थे, जिनकी मुस्कान, सादगी और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें एक अनमोल कलाकार बनाया। धर्मेंद्र का जीवन और उनकी विरासत मृत्यु की खबर बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र देओल का 24 नवंबर 2025 की सुबह मुंबई में निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलने पर देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके अंतिम संस्कार का आयोजन जुहू, मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में किया गया, जहाँ अमिताभ बच्चन, सलमान खान, आमिर खान जैसे बड़े सितारे शामिल हुए। सादा शुरुआत धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के एक गाँव में हुआ था। उन्होंने एक बेहद सरल परिवार में पले-बढ़े। शुरुआती समय में उन्होंने नौकरी करते हुए ऑडिशन दिए। उनका पहला बड़ा ब्रेक 1960 की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे से आया। कैरियर की ऊँचाइयाँ धर्मेंद्र ने लगभग 300 फिल्मों में काम किया और छह दशकों का बड़ा करियर बनाया। उनकी फिट बॉडी और दमदार आवाज़ ने उन्हें “ही-मैन” का खिताब दिलाया। उनकी फिल्मों में रोमांस, कॉमेडी, एक्शन और ड्रामा सभी का शानदार मिश्रण था। शोले (1975) उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है, जहाँ उन्होंने वीरू का किरदार निभाया, जिसे आज भी लोगों की यादों में बसा हुआ है। उनकी और हेमा मालिनी की ऑन-स्क्रीन जोड़ी बेहद लोकप्रिय थी, और दोनों ने 1980 में शादी की। उनके दो बच्चे, ईशा देओल और आहाना देओल, भी बॉलीवुड में जाने जाते हैं। मानवता का चेहरा धर्मेंद्र न सिर्फ़ बड़े अभिनेता थे, बल्कि एक बहुत ही दयालु इंसान भी थे। उनके भीतर विनम्रता और अपनापन था। उनके इस अंदाज ने उन्हें सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि लोगों के दिल का हीरो बना दिया। एक वीडियो में हाल ही में उन्होंने कहा था, “नेकी की किताब से बड़ा कोई ग्रंथ नहीं।” राजनीति और दूसरा अध्याय धर्मेंद्र राजनीति में भी सक्रिय रहे। वे 2004 से 2009 तक सांसद रहे।उनकी स्थिरता और प्रभाव ने उन्हें फिल्मों के अलावा पॉलिटिक्स में भी एक अहम चेहरा बना दिया। शोक और श्रद्धांजलि उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह “भारतीय सिनेमा का एक युग समाप्त होना” है।कई अन्य नेता, जैसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विपक्षी नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनकी सरलता, प्रतिभा और इंसानियत की तारीफ की। धर्मेंद्र की यादों का सफर शोले जैसी क्लासिक फिल्मों ने उन्हें फिल्मों के इतिहास में एक अमिट स्थान दिलाया। उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री हेमा मालिनी के साथ बेहद लोकप्रिय थी, और उनका ये रिश्ता पर्दे के बाहर भी सच्चा रहा। उन्होंने अपने करियर में दिखाया कि असल हीरो केवल शक्ति नहीं, बल्कि सादगी और दिल से भी बनता है। उनके फैन्स और बॉलीवुड साथी उन्हें “ही-मैन” के अलावा “सपोर्टिव, इंसानियत वाला सितारा” भी याद करेंगे। धर्मेंद्र की सबसे मशहूर फिल्म कौन-सी है? शोले उनकी सबसे मशहूर फिल्मों में से एक है, जिसमें उन्होंने वीरू का यादगार किरदार निभाया। धर्मेंद्र कब और कहाँ का जन्मे थे? उनका जन्म पंजाब के एक गाँव में हुआ था और उन्होंने बेहद साधारण परिवार में पनाह पाई। धर्मेंद्र का निधन क्यों हुआ? रिपोर्ट्स के अनुसार वे कुछ समय से बीमार थे और मुंबई में घर पर ही उनका निधन हुआ। उन्होंने राजनीति में भी भूमिका निभाई थी? हां, वे 2004–2009 के बीच सांसद भी रहे। उनके आखिरी फिल्म कौन सी होगी?उनकी आखिरी फिल्म Ikkis है, जिसे उनकी मृत्यु के बाद रिलीज़ किया जाना प्रस्तावित है।

Central Board of Secondary Education (CBSE) 10वीं दो-सेशन परीक्षा: पूरी जानकारी

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CBSE ने 10वीं कक्षा के लिए बड़े बदलाव का ऐलान कर दिया है, जिसके तहत अब बोर्ड परीक्षा दो सत्रों में होगी। नए मॉडल में पहला सत्र सभी छात्रों के लिए अनिवार्य रहेगा, जबकि दूसरा सत्र केवल सुधार, पुनः प्रयास या बेहतर स्कोर पाने का विकल्प देगा। खास बात यह है कि दूसरे सत्र में छात्र अधिकतम तीन विषयों की ही परीक्षा दे पाएंगे, जिससे अनावश्यक दबाव कम करने और स्कोर सुधारने का मौका मिलेगा। इस नई परीक्षा संरचना का उद्देश्य छात्रों को एक लचीला, तनाव-मुक्त और बेहतर प्रदर्शन वाला वातावरण देना है। वहीं 12वीं के लिए फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी—यानी एक ही मुख्य परीक्षा सत्र। ऐसा इसलिए क्योंकि 12वीं के छात्रों की प्रवेश परीक्षाओं और आगे की शैक्षणिक प्रक्रिया में एक समान टाइमलाइन की आवश्यकता होती है। 10वीं में दो-सेशन परीक्षा का ढांचा पहले सत्र और दूसरे सत्र की विशेषताएं ये खबर भी पढ़े…IMD Recruitment 2025: भारत मौसम विज्ञान विभाग में 136 प्रोजेक्ट स्टाफ पदों पर भर्ती, करें अप्लाई परिणाम, सुधार और मार्कशीट ये खबर भी पढ़े…इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड 12वीं की परीक्षा में ब बदलाव नहीं 12वीं की परीक्षा व्यवस्था अभी एक-सत्र वाली ही रहेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि 12वीं के छात्र अक्सर JEE Main, NEET जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे होते हैं और उन्हें उसी सत्र में परिणाम चाहिए। छात्रों-अभिभावकों के लिए सुझाव ये खबर भी पढ़े…WhatsApp का सबसे बड़ा डेटा लीक: Meta की चूक ने 3.5 अरब यूज़र्स को खतरे में डाला, करें ये उपाय क्यों आया यह नया मॉडल? FAQs Q1. क्या मैं दूसरे सत्र में सभी विषयों को दोबारा दे सकता हूँ?नहीं। 10वीं में दूसरे सत्र में केवल अधिकतम तीन विषयों के लिए चयन कर सकते हैं। उन विषयों में ही सुधार संभव है जिनका बाह्य मूल्यांकन 50 % या उससे ज्यादा है। Q2. अगर पहले सत्र में तीन से ज़्यादा विषयों में फेल हो गया तो क्या होगा?यदि छात्र तीन या अधिक विषयों में पहले सत्र में अनुपस्थित रहा या फेल हुआ हो, तो उसे दूसरे सत्र में शामिल होने का अधिकार नहीं मिलेगा। उसे अगले वर्ष मुख्य परीक्षा में शामिल होना होगा (Essential Repeat)। Q3. क्या 12वीं के छात्रों को भी दूसरा सत्र मिलेगा?इस समय 12वीं के लिए एक-सत्र मॉडल ही जारी रहेगा। दूसरा सत्र फिलहाल नहीं होगा क्योंकि 12वीं के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े होते हैं।

इमोशनल स्किल्स की ताकत: मैकिंजी रिपोर्ट में मिला भविष्य-काम का नया ट्रेंड

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मैकिंजी ग्लोबल इंस्टीट्यूट की “Skill Shift” रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक सोशल और इमोशनल स्किल्स की मांग 22-26% बढ़ेगी। यह बदलाव इसलिए हो रहा है क्योंकि ऑटोमेशन और एआई मशीनों से इंसानी समझ और इंपैथी उसकी जगह नहीं ले सकते। आज के कॉर्पोरेट वर्कप्लेस में दिल की ताकत (इमोशनल इंटेलिजेंस) ही नई सुपरपावर बन रही है। ग्लोबल वर्कप्लेस में बड़ा बदलाव आज की कॉर्पोरेट दुनिया एक गहरा ट्रांसफॉर्मेशन देख रही है। पहले जॉब में टेक्निकल स्किल्स और इंटेलिजेंस (IQ) को सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाता था। लेकिन अब कंपनियां महसूस कर रही हैं कि इमोशनल स्टैमिना — यानी दबाव में शांत रहने, दूसरों को समझने और टीम को एक साथ बांधे रखने की क्षमता — भविष्य में सफलता की बड़ी कुंजी है। यह सिर्फ कंपनियों की भावना नहीं है, बल्कि मैकिंज़ी ग्लोबल इंस्टीट्यूट (MGI) की रिपोर्ट “Skill Shift: Automation and the Future of the Workforce” में यह साफ-साफ दिखाया गया है। ये खबर भी पढ़े…प्रधानमंत्री (PM) का पर्सनल सेक्रेटरी कैसे चुना जाता है – जाने पूरी डिटैल्स मैकिंजी रिपोर्ट की बड़ी बातें ये खबर भी पढ़े… क्यों बढ़ रही है इमोशनल स्किल की जरूरत? एआई और ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहे हैं, और मशीनें बहुत सारे रिपीटेबल काम बेहतरीन तरीके से कर सकती हैं। लेकिन इंसानी संवाद, संकट-सम्भालन, भरोसा बनाने और टीम बॉन्डिंग की भूमिका अभी भी मानव ही निभा सकते हैं। इसलिए कंपनियों ने यह समझा है कि सिर्फ तकनीक नहीं, मानवता ही आगे चलने वाला “स्किल” है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एंटरप्रेन्योरशिप (पहल करना), इनिशिएटिव लेने की क्षमता बढ़ेगी और लीडरशिप की मांग में इजाफा होगा। ये खबर भी पढ़े…Lekhpal Recruitment : PET रिजल्ट जारी होते ही 7,994 पदों पर होगी सीधी भर्ती बिजनेस स्कूल और मैनेजर ट्रेनिंग में बदलाव विश्व-स्तर की बड़ी कंपनियाँ जैसे गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, डेलॉइट और कई बिज़नेस स्कूल अब मैनेजर्स की ट्रेनिंग में इमोशनल इंटेलिजेंस (EI) को टॉप प्रायरिटी दे रही हैं। उनके मुताबिक, मशीनें काम तो कर सकती हैं, लेकिन काम को इंसानी मायना देना इंसान ही कर सकता है। मैनेजर्स को इसलिए सिखाया जा रहा है कि वे टीम में इम्पैथी कैसे लाएं, आपस में भरोसा कैसे बनाएँ और तनावपूर्ण स्थितियों में भी स्थिरता बनाए रखें। यह सिर्फ करियर की रणनीति नहीं — यह नई मानव-केंद्रित सुपरपावर बन रही है। ये खबर भी पढ़े…WhatsApp का सबसे बड़ा डेटा लीक: Meta की चूक ने 3.5 अरब यूज़र्स को खतरे में डाला, करें ये उपाय इमोशनल इंटेलिजेंस का असर कई मनोवैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि लोगों की इमोशनल बुद्धिमत्ता (emotional intelligence) का सीधा असर होता है टीम के प्रदर्शन, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व पर। जब टीम में कोई कठिन परिस्थिति आए, तो जिन लोगों में ज़्यादा इमोशनल स्किल होती है, वे टीम को बेहतर तरीके से मैनेज करते हैं और टीम को टूटने से बचाते हैं एचआर का नजरिया — अब सिर्फ रेजूमे नहीं, दिल देखना भी ज़रूरी आज की HR टीम सिर्फ उम्मीदवार की टेक्निकल स्किल या रेज़्यूमे को नहीं देख रही है। बल्कि उनकी भावनात्मक स्थिरता, कोलैबोरेशन की भावना और मानसिक लचीलापन भी देख रही है। इंटरव्यू में सवाल बदल गए हैं: इन्हीं सवालों से देखा जा रहा है कि उम्मीदवार सिर्फ “काम कर सकता है” इस योग्य नहीं है, बल्कि “इंसानों के बीच काम कर सकता है” — यह बहुत मायने रखता है। FAQs Q1: मैकिंज़ी की रिपोर्ट में “सोशल और इमोशनल स्किल्स” से क्या मतलब है?A1: मैकिंज़ी रिपोर्ट में “सोशल और इमोशनल स्किल्स” से वह क्षमताएँ हैं जैसे — इम्पैथी, अन्य लोगों के साथ संवाद, नेतृत्व, टीम मैनेजमेंट, सहयोग और भावनात्मक लचीलापन। ये स्किल्स मशीनों द्वारा आसानी से नकल नहीं की जा सकतीं। Q2: 2030 तक सोशल-इमोशनल स्किल्स की मांग क्यों बढ़ेगी?A2: क्योंकि ऑटोमेशन और एआई मशीनें कई रिपीटेबल और डेटा-संबंधित काम कर सकती हैं, लेकिन इंसानी भावनाओं, संवादों और संकट-प्रबंधन की जरूरत बनी रहेगी। मैकिंज़ी का अनुमान है कि 2016-2030 के बीच तकनीकी बदलावों के कारण सभी इंडस्ट्रीज़ में इन स्किल्स की मांग करीब 22-26% तक बढ़ेगी। Q3: अगर मैं करियर की शुरुआत कर रहा हूँ, तो मुझे इमोशनल स्किल्स कैसे सुधारनी चाहिए?A3: आप कई तरीके अपना सकते हैं:

WhatsApp का सबसे बड़ा डेटा लीक: Meta की चूक ने 3.5 अरब यूज़र्स को खतरे में डाला, करें ये उपाय

रात के करीब 11 बजे हैं। आप थके हुए बिस्तर पर लेटे हैं और अचानक फोन की स्क्रीन चमकती है। WhatsApp पर एक अनजान नंबर से मैसेज आता है—“Hi”, या शायद एक आकर्षक जॉब ऑफर। आप एक सेकंड रुकते हैं और सोचते हैं, “इसको मेरा नंबर मिला कहां से?” रोज़-रोज़ आने वाले ऐसे मैसेज हमें मामूली लगते हैं, लेकिन नवंबर 2025 की एक बड़ी रिसर्च ने इस छोटे से सवाल को एक विशाल सच में बदल दिया है—और सच यह है कि आपका नंबर शायद बहुत पहले से किसी और की पास था। ऑस्ट्रिया के रीसर्च ऑस्ट्रिया के रिसर्चर्स ने WhatsApp की एक खामोश लेकिन बेहद खतरनाक गलती का खुलासा किया है। इस गलती की वजह से दुनिया के 3.5 अरब WhatsApp यूज़र्स का डेटा—उनके फोन नंबर, प्रोफाइल फोटो और “About” जैसी पब्लिक जानकारी—कुछ ही घंटों में ऑटोमेटेड स्क्रिप्ट की मदद से स्क्रैप की जा सकती थी। सोचिए, बिना हैक किए, बिना किसी पासवर्ड के, कोई भी दुनिया भर के एक्टिव WhatsApp यूज़र्स की लिस्ट अपने पास जमा कर सकता था। यह घटना सिर्फ एक टेक्निकल गलती नहीं, बल्कि हमारी डिजिटल पहचान की कमज़ोर सुरक्षा का सबसे बड़ा सबूत है। Meta ने सफाई दी है, अपडेट जारी किए हैं, लेकिन जो सवाल उठे हैं… वो अभी भी हमारे सामने खड़े हैं। विएना की रिसर्चर्स की चौंकाने वाली खोज विएना (ऑस्ट्रिया) की यूनिवर्सिटी ऑफ़ विएना और SBA रिसर्च की टीम ने WhatsApp में एक गंभीर सुरक्षा समस्या पाई। उन्होंने “Contact Discovery” फीचर का गलत इस्तेमाल करके 100 मिलियन से ज़्यादा फोन नंबर प्रति घंटे चेक कर लिए। उनका कहना है कि उन्होंने करीब 3.5 अरब (3.5 billion) सक्रिय WhatsApp अकाउंट्स को एन्यूमेर (गिनाना) किया। ये खबर भी पढ़े…JEE Mains नहीं दिया? कोई बात नहीं! इन एग्ज़ाम से करें BTech एडमिशन यह चूक कैसी थी? WhatsApp का Contact Discovery फीचर: जब हम अपनी फोनबुक अपलोड करते हैं, तो यह पता चलता है कि कौन-सा नंबर WhatsApp पर है। रिसर्चर्स ने स्क्रिप्ट बनाई और मास स्केल पर नंबर भेजकर जांच की, क्योंकि WhatsApp पहले पर्याप्त rate-limiting (नियंत्रण) नहीं कर रहा था। इस तरह, उन्होंने सिर्फ नंबर ही नहीं, बल्कि पब्लिकली उपलब्ध डेटा जैसे प्रोफाइल फोटो, “About” टेक्स्ट, टाइमस्टैम्प्स और पब्लिक कीज़ (एन्क्रिप्शन से संबंधित) भी निकाल लिए। वो यह भी पता लगा पाए कि उपयोगकर्ता किस ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं, अकाउंट कब बना था, और उन्होंने कितने डिवाइस (जैसे WhatsApp Web) लिंक किए हैं। Meta (WhatsApp की माँ कंपनी) का जवाब रिसर्चर्स ने अप्रैल 2025 में Meta को अपनी खोज की सूचना दी। इसके बाद, अक्टूबर 2025 में Meta ने WhatsApp Web पर “rate-limiting” लागू किया ताकि इसी तरह के बड़े पैमाने की जाँच को रोका जा सके। Meta ने कहा कि रिसर्चर्स के ज़रिए मिला डेटा पहले ही सार्वजनिक था (जैसे कि पब्लिक फोटो या “About” टेक्स्ट): कोई निजी मैसेज एक्सेस नहीं किया गया था क्योंकि WhatsApp में end-to-end एन्क्रिप्शन जारी है। Meta ने आगे ये भी कहा है कि बग बाउंटी प्रोग्राम के ज़रिए यह मुद्दा सामने आया और उन्होंने रिसर्चर्स की भूमिका सराही है। ये खबर भी पढ़े…BPSC 71वीं PT Result Out: जनरल कट-ऑफ 88, जानें पूरी मेरिट लिस्ट रिस्क क्या है? डेटा एन्युमरेशन (गिनना): इस चूक की वजह से कोई भी ऑटोमेटेड स्क्रिप्ट चला कर दुनिया भर के लगभग हर WhatsApp नंबर की पुष्टि कर सकता था, और यह स्कैमर या साइबर क्रिमिनल्स के लिए खतरनाक हो सकता था। प्रोफाइल इनफार्मेशन का दुरुपयोग: 57% यूज़र्स की प्रोफाइल फोटो, और 29% का “About” टेक्स्ट सार्वजनिक था, जो उनकी पहचान और अन्य जानकारियों को उजागर कर सकता था। मेटाडेटा से इनसाइट्स: रिसर्चर्स ने यह भी अनुमान लगाया कि कौन-से यूज़र कई डिवाइस यूज़ करते हैं, उनका अकाउंट कितना पुराना है, और उनका ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है – ये सारी जानकारी साइबर अपराधियों के लिए उपयोगी हो सकती है। दमनकारी देशों में सुरक्षा ख़तरा: कुछ यूज़र्स ऐसे देशों में हैं जहां WhatsApp प्रतिबंधित है (जैसे चीन), और यह खुलासा उनकी पहचान और स्थिति को ख़तरे में डाल सकता था। क्या अब समस्या सुलझा दी गई है? हां — Meta ने rate-limiting लागू कर दिया है ताकि एक-ही स्रोत से इतनी तेजी से अनुरोध (requests) न किए जा सकें। रिसर्चर्स ने कहा है कि उन्होंने अपनी कलेक्ट की हुई डेटा लिस्ट डिलीट कर दी है। लेकिन रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि अगर कोई और बुरा अभिनेता (malicious actor) इस विधि का इस्तेमाल करता, तो यह “इतिहास का सबसे बड़ा डेटा लीक” साबित हो सकता था। ये खबर भी पढ़े…IMD Recruitment 2025: भारत मौसम विज्ञान विभाग में 136 प्रोजेक्ट स्टाफ पदों पर भर्ती, करें अप्लाई करें ये उपाय हमारी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा सकते हैं? प्राइवेसी सेटिंग्स चेक करें: WhatsApp में अपनी प्रोफाइल फोटो, “About” टेक्स्ट और स्टेटस की visibility को “Only My Contacts” पर सेट करें। अजनबी कॉल और मैसेज से सावधान रहें: अनजान नंबरों से आने वाले कॉल्स और मैसेजेज में स्कैमर के झांसे (जॉब ऑफर, लिंक आदि) हो सकते हैं। अपनी डिजिटल पहचान की निगरानी करें: यदि आप अक्सर स्पैम कॉल्स या मैसेजेज़ पाते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपका नंबर डेटा मार्केट में है। ऑनलाइन सिक्योरिटी पर अपडेट रहें: जैसे-जैसे Meta और अन्य टेक कंपनियां सुधार लाती हैं, उन अपडेट्स को ध्यान से देखें और समय-समय पर अपनी ऐप सेटिंग्स रिव्यू करें। ये खबर भी पढ़े…AFCAT 1 2026: एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट के लिए आवेदन शुरू, आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी FAQs Q1: यह WhatsApp डेटा ली क है या हैक?यह एक “लीक” जैसा है, लेकिन हैक नहीं। इसमें कोई मैसेज कंटेंट चोरी नहीं हुआ, बल्कि WhatsApp का Contact Discovery फीचर स्क्रैप किया गया। Q2: क्या Meta ने इस खामी को सुधार लिया है?हाँ, Meta ने अक्टूबर 2025 में rate-limiting लागू किया ताकि स्क्रैपिंग को रोका जा सके। रिसर्चर्स ने अपनी कलेक्ट की हुई डेटा लिस्ट डिलीट कर दी है। Q3: क्या यह खामी सभी देशों के WhatsApp यूज़र्स को प्रभावित करती है?हाँ। रिसर्चर्स ने दावा किया है कि यह विश्वव्यापी समस्या थी — उन्होंने 245 देशों में 3.5 अरब से ज़्यादा सक्रिय WhatsApp अकाउंट्स की पहचान की है।

10वीं के बाद पढ़ाई आसान, Post Matric Scholarship देगी पूरा खर्च

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पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को 10वीं के बाद भी पढ़ाई जारी रखने में मदद करती है। यह योजना छात्रों की फीस, हॉस्टल और अन्य जरूरी खर्चों को कम कर बड़ी राहत देती है। SC, ST, OBC और EWS वर्ग के छात्र आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और मंज़ूरी मिलने के बाद स्कॉलरशिप की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेज दी जाती है। पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना गरीब छात्रों के लिए बड़ी राहत देती है।यह योजना 10वीं के बाद पढ़ाई जारी रखने वालों को मजबूत सहारा देती है।बहुत से छात्र पैसों की कमी से पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।यह स्कॉलरशिप उनके सपनों को टूटने से बचाती है। सरकार इस योजना से फीस का पूरा खर्च उठाती है।छात्रों को कॉलेज की नॉन रिफंडेबल फीस वापस मिल जाती है।उन्हें हॉस्टल और खाने का खर्च भी दिया जाता है।इससे छात्र बिना चिंता पढ़ाई पर ध्यान दे पाते हैं। यह योजना SC, ST, OBC और EWS छात्रों के लिए बनाई गई है।राज्य के स्थायी निवासी को आवेदन करने की अनुमति मिलती है।छात्र का एडमिशन 11वीं या 12वीं में होना चाहिए।वह ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन या किसी टेक्निकल कोर्स में भी हो सकता है। माता-पिता की सालाना आय तय सीमा से कम होनी चाहिए।अधिकतर राज्यों में यह सीमा लगभग दो लाख रुपये होती है।छात्र अपने राज्य की आधिकारिक वेबसाइट पर यह सीमा चेक कर सकते हैं। आवेदन की प्रक्रिया बहुत सरल और ऑनलाइन है।छात्र अपने राज्य के सोशल जस्टिस विभाग की पोर्टल खोलें।नई आवेदन करने वाले छात्र New Application बटन दबाएँ।पुराने छात्र Renewal बटन पर क्लिक कर सकते हैं।सभी ज़रूरी दस्तावेज़ स्कैन करके अपलोड करने होते हैं। आवेदन के लिए आय प्रमाण पत्र जरूरी होता है।जाति प्रमाण पत्र और पिछली कक्षा की मार्कशीट भी चाहिए।फीस रसीद और बैंक पासबुक की कॉपी अपलोड करनी होती है।बैंक अकाउंट आधार नंबर से लिंक होना बहुत जरूरी है। स्कॉलरशिप की राशि सीधे छात्र के खाते में भेजी जाती है।गलत जानकारी देने पर आवेदन रद्द किया जा सकता है।छात्र आवेदन की अंतिम तिथि हमेशा वेबसाइट पर चेक करें।समय पर अप्लाई करने से स्कॉलरशिप जल्दी मिल जाती है। यह योजना लाखों छात्रों की जिंदगी बदल रही है।गरीब परिवारों के बच्चे अब बिना तनाव पढ़ाई पूरी कर पा रहे हैं।सरकार की यह कोशिश शिक्षा को मजबूत दिशा देती है। FAQs 1. पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप क्या है? यह एक सरकारी छात्रवृत्ति योजना है जो 10वीं के बाद पढ़ाई करने वाले गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता देती है। इसमें फीस, हॉस्टल और खाने का खर्च दिया जाता है। 2. स्कॉलरशिप के लिए कौन-कौन आवेदन कर सकता है? SC, ST, OBC और EWS वर्ग के छात्र आवेदन कर सकते हैं। छात्र अपने राज्य के स्थायी निवासी होने चाहिए और किसी मान्यता प्राप्त स्कूल या कॉलेज में एडमिशन होना चाहिए। 3. स्कॉलरशिप की राशि कैसे मिलती है? योजना की राशि सीधे छात्र के बैंक खाते में भेजी जाती है। इसलिए आधार से लिंक बैंक अकाउंट होना अनिवार्य है। 4. आवेदन के लिए कौन-से दस्तावेज़ जरूरी हैं? आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, पिछली कक्षा की मार्कशीट, फीस रसीद और बैंक पासबुक की स्कैन कॉपी आवश्यक होती है। 5. आवेदन कहाँ और कैसे किया जाता है? छात्र अपने राज्य के सोशल जस्टिस विभाग की आधिकारिक स्कॉलरशिप वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। नए छात्रों के लिए “New Application“ और पुराने छात्रों के लिए “Renewal” विकल्प होता है।