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Aastha Pandey

Writer News & Blogger

भारत का कुल निर्यात 2025: $824.9 बिलियन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड और भारत की वैश्विक ताकत

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वित्त वर्ष 2025 भारत की आर्थिक यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव बनकर उभरा है। इस साल भारत का कुल निर्यात पहली बार $824.9 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रमाण है। आरबीआई के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि पिछले वर्ष से लगभग 6 प्रतिशत अधिक रही। इस रिकॉर्ड के पीछे सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स और सरकारी नीतियों का मजबूत योगदान रहा। आईटी सेवाओं, स्मार्टफोन निर्यात और फार्मा सेक्टर ने भारत को नई पहचान दी। साथ ही नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) ने भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजार खोले। रुपये की कमजोरी ने भी भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया। आज भारत का कुल निर्यात केवल पेट्रोलियम पर निर्भर नहीं है। अब यह एक विविध, संतुलित और भविष्य-उन्मुख निर्यात मॉडल बन चुका है। इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि यह रिकॉर्ड कैसे बना। साथ ही जानेंगे प्रमुख सेक्टर, सरकारी नीतियां और आगे की संभावनाएं। भारत का कुल निर्यात 2025: रिकॉर्ड $824.9 बिलियन की उपलब्धि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात $824.9 बिलियन तक पहुंच गया।यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष के $778 बिलियन से लगभग 6 प्रतिशत अधिक है।आरबीआई बुलेटिन (अप्रैल 2025) ने इस वृद्धि की आधिकारिक पुष्टि की है।इसमें वस्तुओं और सेवाओं दोनों का संतुलित योगदान देखने को मिला।भारत ने कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद निर्यात में मजबूती दिखाई।यह भारत की आर्थिक नीतियों और उद्योगों की क्षमता को दर्शाता है। सेवाओं का दबदबा: सेवा निर्यात ने रचा नया रिकॉर्ड $387.5 बिलियन का ऐतिहासिक सेवा निर्यात वित्त वर्ष 2025 में सेवा निर्यात $387.5 बिलियन तक पहुंच गया।यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।आईटी सेवाएं, सॉफ्टवेयर निर्यात और फिनटेक सेवाएं सबसे आगे रहीं।स्वास्थ्य सेवा और मेडिकल टूरिज्म ने भी मजबूत योगदान दिया।अमेरिका और यूरोप सेवा निर्यात के प्रमुख बाजार बने रहे। ये खबर भी पढ़े …MCU Bhopal: कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमोस्ट्रेशन क्यों मजबूत हुआ सेवा क्षेत्र डिजिटलाइजेशन और ग्लोबल आउटसोर्सिंग से भारत को लाभ मिला।भारतीय आईटी कंपनियों ने लागत-प्रभावी समाधान उपलब्ध कराए।कुशल मानव संसाधन भारत की सबसे बड़ी ताकत बना।इसी कारण भारत का कुल निर्यात सेवाओं से लगातार बढ़ता गया। ये खबर भी पढ़े …क्या वीकेंड पर देर तक सोना शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है? जानिए हार्वर्ड की Sleep Science क्या कहती है गैर-पेट्रोलियम निर्यात में भी मजबूत बढ़त गैर-पेट्रोलियम वस्तु निर्यात में भी लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।यह दर्शाता है कि भारत का निर्यात अब विविध हो चुका है।पेट्रोलियम पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होती जा रही है।यह लंबी अवधि में आर्थिक स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है। ये खबर भी पढ़े …वयस्क बच्चों की आर्थिक निर्भरता: पैरेंट्स की मदद कब और कैसे बंद करनी चाहिए? प्रमुख निर्यात क्षेत्र और उत्पाद 2025 इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बना गेम-चेंजर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ने 2025 में रिकॉर्ड ऊंचाई छुई।स्मार्टफोन, खासकर iPhone असेंबली ने बड़ा योगदान दिया।अब इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन गया।पीएलआई योजनाओं ने उत्पादन और निवेश को तेज किया। पेट्रोलियम उत्पादों का योगदान पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल का निर्यात मजबूत बना रहा।यूएई और यूरोप इसके प्रमुख बाजार रहे।हालांकि भारत अब पेट्रोलियम से आगे बढ़ चुका है। फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थ सेक्टर जेनेरिक दवाएं और वैक्सीन निर्यात में भारत अग्रणी रहा।यूएसए और यूरोपीय संघ प्रमुख बाजार बने रहे।भारत को “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाना और मजबूत हुआ। अन्य प्रमुख क्षेत्र इंजीनियरिंग गुड्स और मशीनरी का निर्यात बढ़ा।रसायन, वस्त्र और रत्न-आभूषण की मांग बनी रही।सोना, हीरे और मोती का निर्यात वैश्विक बाजार में लोकप्रिय रहा। भारत का कुल निर्यात बढ़ने के मुख्य कारण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स की भूमिका यूएई, ऑस्ट्रेलिया और यूके के साथ FTA से टैरिफ घटे।ओमान और न्यूजीलैंड के साथ नए समझौतों से पहुंच बढ़ी।भारतीय उत्पादों को नए बाजार मिले। सरकारी नीतियां और योजनाएं ‘मेक इन इंडिया’ ने घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया।निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) ने निर्यातकों को सहायता दी।पीएलआई योजना ने इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा को मजबूती दी। रुपये की कमजोरी का लाभ रुपये के कमजोर होने से निर्यात सस्ता और प्रतिस्पर्धी हुआ।इससे भारतीय निर्यातकों के मार्जिन बेहतर हुए।वैश्विक सौदे भारत के पक्ष में गए। भारत का कुल निर्यात: वस्तुएं बनाम सेवाएं निर्यात प्रकार 2023-24 2024-25 वृद्धि व्यापारिक सामान $450.7B $479.7B 6.4% सेवाएं $327.3B $345.2B 5.5% कुल $778B $824.9B 6.0% स्रोत: आरबीआई बुलेटिन, डीजीएफटी अपडेट आरबीआई का दृष्टिकोण: 2026 की संभावनाएं आरबीआई के अनुसार 2026 में निर्यात में मध्यम वृद्धि संभव है।वैश्विक ब्याज दरों में स्थिरता से व्यापार आसान होगा।शिपिंग और लॉजिस्टिक्स लागत नियंत्रण में रहने की उम्मीद है।सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा घटक भविष्य की ताकत बनेंगे। कानूनी और नियामक अपडेट डीजीएफटी अधिसूचना 64/2023 ने डिजिटल निर्यात प्रक्रियाएं आसान कीं।आरबीआई परिपत्र 04 (2024-25) ने निर्यात आय नियम सरल किए।निर्यात अनुपालन अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञों की राय व्यापार विशेषज्ञ विवेक आर. के अनुसार अनुपालन बेहद जरूरी है।गलत दस्तावेजीकरण से लाभ जल्दी नुकसान में बदल सकता है।जीएसटी, FEMA और डीजीएफटी नियमों का पालन अनिवार्य है। eFileTax निर्यातकों की कैसे मदद करता है eFileTax जीएसटी LUT फाइलिंग में सहायता देता है।डीजीएफटी IEC कोड पंजीकरण सरल बनाता है।FEMA सलाह और रियल-टाइम अनुपालन समर्थन उपलब्ध कराता है। FAQs Q1: भारत का कुल निर्यात 2025 में क्यों बढ़ा? सेवाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स और FTAs ने भारत का कुल निर्यात बढ़ाया।सरकारी नीतियों और वैश्विक मांग ने अहम भूमिका निभाई। Q2: भारत का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र कौन सा है? सेवा क्षेत्र सबसे बड़ा निर्यातक बना हुआ है।इसके बाद पेट्रोलियम और इलेक्ट्रॉनिक्स का स्थान आता है। Q3: क्या 2026 में भी भारत का कुल निर्यात बढ़ेगा? आरबीआई के अनुसार मध्यम वृद्धि की संभावना बनी हुई है।घरेलू उत्पादन और वैश्विक स्थिरता इसमें सहायक होंगे।

IIT Free Online Courses 2025: बिना एंट्रेंस एग्जाम IIT से फ्री में सीखें 6 डिमांडिंग कोर्सेज

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हर स्टूडेंट का सपना होता है कि वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी IIT से पढ़ाई करे। लेकिन हकीकत यह है कि कठिन एंट्रेंस एग्जाम और भारी फीस की वजह से लाखों छात्र इस सपने से दूर रह जाते हैं। अब यह सपना थोड़ा आसान हो गया है। IIT Madras, IIT Kharagpur और IIT Roorkee जैसे देश के टॉप टेक्निकल संस्थान मिलकर 2025 की शुरुआत में 6 फ्री ऑनलाइन कोर्स लॉन्च कर रहे हैं। इन कोर्सेज के लिए न तो JEE देना जरूरी है और न ही कोई ट्यूशन फीस। यह सभी कोर्स भारत सरकार के SWAYAM / NPTEL प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। इन कोर्सेज का फोकस डेटा साइंस, पायथन, एल्गोरिद्म और बिग डेटा जैसी डिमांडिंग स्किल्स पर है। आज के जॉब मार्केट में इन स्किल्स की जबरदस्त मांग है। यह रिपोर्ट आसान, बोलचाल वाली हिंदी में आपको हर कोर्स की पूरी जानकारी देती है, ताकि आप सही फैसला ले सकें। IIT Free Online Courses क्यों हैं खास? IIT के ये फ्री कोर्स छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स सिखाने पर फोकस करते हैं। पढ़ाई पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे देश के किसी भी कोने से छात्र जुड़ सकते हैं। SWAYAM (Study Webs of Active Learning for Young Aspiring Minds) भारत सरकार की आधिकारिक पहल है। इसके जरिए IITs अपने कोर्स आम छात्रों तक पहुंचाते हैं। ये खबर भी पढ़े …क्या वीकेंड पर देर तक सोना शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है? जानिए हार्वर्ड की Sleep Science क्या कहती है IIT Kharagpur का एल्गोरिद्म और ग्राफ थ्योरी कोर्स कोर्स क्या सिखाएगा? यह कोर्स कंप्यूटर साइंस के छात्रों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें एल्गोरिद्म और ग्राफ थ्योरी जैसे कठिन टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाया जाएगा। छात्र सीखेंगे कि कैसे बड़ी टेक कंपनियां ग्राफ थ्योरी का इस्तेमाल करके जटिल समस्याएं हल करती हैं। कौन कर सकता है आवेदन:कंप्यूटर साइंस और टेक्निकल बैकग्राउंड वाले छात्र। कोर्स अवधि:19 जनवरी से 10 अप्रैल 2025 तक। IIT Roorkee का Python with Data Analytics कोर्स ये खबर भी पढ़े …2025 में 67 पत्रकार मारे गए: RSF रिपोर्ट बताती है पत्रकारों पर बढ़ता जोखिम और खतरनाक स्थिति इस कोर्स का फायदा किसे होगा? यह कोर्स Python के जरिए डेटा एनालिसिस सिखाता है। इसमें रियल इंडस्ट्री केस स्टडी शामिल होंगी। किसके लिए बेहतरमैनेजमेंट और कंप्यूटर साइंस के छात्र।एनरोलमेंट की आखिरी तारीख:- 26 जनवरी 2025। IIT Kharagpur का Data Mining कोर्सडेटा माइनिंग आज हर कंपनी की जरूरत बन चुका है। इस कोर्स में सिखाया जाएगा कि कंपनियां बड़े डेटा से भविष्य की रणनीति कैसे बनाती हैं। एलिजिबिलिटी:इंजीनियरिंग और गणित के छात्र। रजिस्ट्रेशन लास्ट डेट:13 फरवरी 2025। यह कोर्स ज्यादा प्रैक्टिकल और कम थ्योरी पर आधारित होगा। IIT Madras का Data Science for Engineers Program यह कोर्स इंजीनियरिंग छात्रों के लिए डेटा साइंस में एंट्री का आसान रास्ता है। छात्र सीखेंगे कि डेटा टूल्स की मदद से काम को तेज और स्मार्ट कैसे बनाया जाए। योग्यता:किसी भी ब्रांच के B.Tech छात्र। अवधि:19 जनवरी से 13 मार्च 2025। ये खबर भी पढ़े …वयस्क बच्चों की आर्थिक निर्भरता: पैरेंट्स की मदद कब और कैसे बंद करनी चाहिए? IIT Madras का Python for Data Science कोर्स यह एक शॉर्ट टर्म कोर्स है। इसका उद्देश्य कम समय में Python की मजबूत समझ देना है। कौन पात्र:B.Tech फाइनल ईयर के छात्र। कोर्स टाइमलाइन:19 जनवरी से 13 फरवरी 2025। IIT Kharagpur का Big Data Analysis कोर्स आज सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से भारी मात्रा में डेटा निकलता है। इस कोर्स में सिखाया जाएगा कि इस डेटा को कैसे मैनेज और एनालाइज किया जाए। टारगेट ऑडियंस:AI, डेटा साइंस और गणित के छात्र। यह कोर्स भविष्य की हाई-टेक नौकरियों के लिए तैयार करता है। रजिस्ट्रेशन कैसे करें? इन सभी IIT Free Online Courses के लिए पढ़ाई बिल्कुल मुफ्त है। अगर छात्र IIT का सर्टिफिकेट चाहते हैं, तो अंत में एक परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा के लिए मामूली फीस ली जाती है। रजिस्ट्रेशन के लिए छात्रों को SWAYAM / NPTEL पोर्टल पर जाकर अकाउंट बनाना होगा। जरूरी तारीखें कोर्स शुरू: 19 जनवरी 2025 नामांकन की आखिरी तारीख: 26 जनवरी 2025 रजिस्ट्रेशन अंतिम तिथि: 13 फरवरी 2025 FAQs क्या IIT के ये फ्री कोर्स सच में बिना एंट्रेंस हैं? हां, इन कोर्सेज के लिए किसी भी तरह का एंट्रेंस एग्जाम जरूरी नहीं है। कोई भी योग्य छात्र SWAYAM प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कर सकता है। क्या IIT Free Online Courses से सर्टिफिकेट मिलेगा? हां, कोर्स पूरा करने के बाद छात्र IIT सर्टिफिकेट ले सकते हैं। इसके लिए अंतिम परीक्षा पास करनी होती है। क्या ये कोर्स नौकरी में मदद करेंगे? बिल्कुल। डेटा साइंस, पायथन और बिग डेटा जैसी स्किल्स आज IT और मैनेजमेंट सेक्टर में बहुत डिमांड में हैं।

वयस्क बच्चों की आर्थिक निर्भरता: पैरेंट्स की मदद कब और कैसे बंद करनी चाहिए?

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न्यूयॉर्क से आई यह रिपोर्ट आज हर देश और हर परिवार की सच्चाई बन चुकी है। नौकरी छूटने पर बेटा किराया नहीं दे पा रहा है, तो माता-पिता आगे आ जाते हैं। बेटी पढ़ाई पूरी करके घर लौटती है, और एजुकेशन लोन की किस्तें पैरेंट्स भरते हैं। शुरुआत में यह मदद मजबूरी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है। यही आदत आगे चलकर निर्भरता का रूप ले लेती है। वित्तीय विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि लगातार आर्थिक मदद वयस्क बच्चों की आत्मनिर्भरता को कमजोर करती है। इससे बच्चों में जिम्मेदारी का भाव कम होता है और माता-पिता की रिटायरमेंट सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है। महामारी, महंगी शिक्षा, बढ़ती महंगाई और एआई से बदला जॉब मार्केट आज के युवाओं के लिए चुनौती है। लेकिन इसका समाधान अनंत मदद नहीं है। यह रिपोर्ट आसान हिंदी-हिंग्लिश में समझाती है कि पैरेंट्स को कब और कैसे आर्थिक मदद सीमित करनी चाहिए। साथ ही यह भी बताती है कि मजबूत फैसले कैसे बच्चों को जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बना सकते हैं। वयस्क बच्चों की आर्थिक निर्भरता क्यों बढ़ रही है? आज के समय में युवा कई आर्थिक झटकों से गुजर रहे हैं। महामारी ने नौकरियां छीनीं। शिक्षा और घर बेहद महंगे हो गए। एआई की वजह से एंट्री-लेवल नौकरियां कम हुईं। Pew Research Center की रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में 18 से 35 साल के युवा दोबारा माता-पिता के साथ रहने लगे हैं। इन्हें “बूमरैंग किड्स” कहा जाता है। यह ट्रेंड सिर्फ अमेरिका नहीं, भारत और अन्य देशों में भी दिख रहा है। ये खबर भी पढ़े …महंगा हुआ लंबा रेल सफर: रोज़ाना यात्रियों की जेब सुरक्षित मदद कब सहारा बनती है और कब बोझ? शुरुआती मुश्किल समय में मदद देना गलत नहीं है। लेकिन जब मदद की कोई समय-सीमा नहीं होती, तब समस्या शुरू होती है। वित्तीय मनोवैज्ञानिक बैड क्लॉट्ज कहते हैं कि लगातार पैसा मिलने से बच्चे हालात बदलने की कोशिश नहीं करते। वे उसी स्थिति में टिके रहते हैं। इससे जिम्मेदारी का एहसास खत्म हो जाता है। ये खबर भी पढ़े …10वीं के बाद पढ़ाई आसान, Post Matric Scholarship देगी पूरा खर्च पैरेंट्स की रिटायरमेंट पर क्या असर पड़ता है? LIMRA (Life Insurance and Market Research Association) के सर्वे के अनुसार, लगभग 17% पैरेंट्स 26 साल से बड़े बच्चों की आर्थिक मदद कर रहे हैं। इनमें से आधों को अपनी रिटायरमेंट बचत कम करनी पड़ रही है। LIMRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ब्रायन हॉजन्स मानते हैं कि अगर यह सिलसिला चलता रहा, तो पैरेंट्स खुद अपनी रिटायरमेंट जरूरतें पूरी नहीं कर पाएंगे। ये खबर भी पढ़े …क्या वीकेंड पर देर तक सोना शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है? जानिए हार्वर्ड की Sleep Science क्या कहती है इमोशनल नहीं, मजबूत फैसले क्यों जरूरी हैं? एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सिर्फ यह कहना काफी नहीं कि “अब मदद बंद होगी।” उस फैसले पर टिके रहना ज्यादा जरूरी है। मदद अचानक बंद करने के बजाय धीरे-धीरे घटानी चाहिए। इससे बच्चों को खुद के पैरों पर खड़ा होने का समय मिलता है। जरूरत हो तो पैसा लोन की तरह दें। लौटाने की शर्त बच्चों में जिम्मेदारी लाती है। प्रोफेशनल सलाह कब लें? अगर बात समझाना मुश्किल हो जाए, तो फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद लें। वे बच्चों को साफ-साफ समझा सकते हैं कि लगातार खर्च पैरेंट्स की आर्थिक स्थिति कैसे कमजोर कर रहा है। American Psychological Association (APA) भी मानता है कि स्पष्ट सीमाएं परिवार में तनाव कम करती हैं और आत्मनिर्भरता बढ़ाती हैं। बूमरैंग किड्स और आज की हकीकत 2025 के बूमरैंग किड्स ट्रेंड में बड़ी संख्या में युवा फिर माता-पिता के घर लौटे हैं। कारण हैं—महंगी हाउसिंग, स्टूडेंट लोन और अस्थिर नौकरी बाजार। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सहारा देना और पूरी जिम्मेदारी उठाना, दोनों में फर्क है। माता-पिता को यह फर्क समझना जरूरी है। पैरेंट्स के लिए जरूरी सीख अब समय है साफ कहने का कि “मम्मी-पापा का एटीएम बंद है।” इसका मतलब बेरुखी नहीं, बल्कि बच्चों को मजबूत बनाना है। धीरे-धीरे सीमाएं तय करें। खर्च की जिम्मेदारी बच्चों पर डालें। इससे वे आत्मनिर्भर बनेंगे और पैरेंट्स की आर्थिक सुरक्षा भी बनी रहेगी। FAQsFAQ 1: वयस्क बच्चों की आर्थिक निर्भरता कैसे कम करें? वयस्क बच्चों की आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए मदद की स्पष्ट सीमा तय करें। पैसा धीरे-धीरे कम करें और जरूरत पड़ने पर लोन की तरह दें। इससे जिम्मेदारी बढ़ती है। FAQ 2: क्या बूमरैंग किड्स को घर में रखना गलत है? नहीं, मुश्किल समय में सहारा देना गलत नहीं है। लेकिन लंबे समय तक पूरी आर्थिक जिम्मेदारी उठाना बच्चों की आत्मनिर्भरता और पैरेंट्स की रिटायरमेंट दोनों के लिए नुकसानदायक है। FAQ 3: पैरेंट्स की रिटायरमेंट सुरक्षा क्यों जरूरी है? पैरेंट्स की रिटायरमेंट सुरक्षा इसलिए जरूरी है ताकि बुजुर्गावस्था में वे बच्चों पर निर्भर न रहें। विशेषज्ञ मानते हैं कि अपनी आर्थिक सुरक्षा पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

क्या वीकेंड पर देर तक सोना शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है? जानिए हार्वर्ड की Sleep Science क्या कहती है

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हम में से ज़्यादातर लोग पूरे हफ्ते अलार्म से लड़ते रहते हैं। सोमवार से शुक्रवार तक नींद पूरी नहीं हो पाती, थकान बनी रहती है। फिर आता है वीकेंड, जब हम सोचते हैं देर तक सोकर सब ठीक हो जाएगा। लेकिन यहीं हम एक बड़ी और अनजानी गलती कर बैठते हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की Sleep Science बताती है कि वीकेंड पर देर तक सोना आराम नहीं, बल्कि शरीर के लिए झटका होता है। साइंस इसे Social Jet Lag कहती है, जो हमारी बॉडी क्लॉक को बिगाड़ देता है। जब हमारा उठने का समय रोज बदलता है, तो शरीर कन्फ्यूज हो जाता है। इस कन्फ्यूजन का असर नींद, वजन, मूड और एनर्जी पर पड़ता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मुताबिक, सोने से ज्यादा जरूरी होता है रोज एक तय समय पर जागना। यही आदत हमारी Circadian Rhythm को सही रखती है। जब यह रिदम बिगड़ती है, तो शरीर धीरे-धीरे बीमारियों की ओर बढ़ता है। इस आर्टिकल में हम आसान, बोलचाल वाली हिंदी-हिंग्लिश में समझेंगे। वीकेंड पर देर तक सोना क्यों नुकसानदेह है। Circadian Rhythm क्या होती है और क्यों जरूरी है। और रोज एक ही समय पर उठने से शरीर को कौन-कौन से फायदे मिलते हैं। हार्वर्ड Sleep Science क्या कहती है? ये खबर भी पढ़े…Bhopal News: डिवीजनल आईटीआई कैंपस प्लेसमेंट – टर्नर ट्रेड में 29 का चयन Social Jet Lag क्या होता है? ये खबर भी पढ़े…आधार अब जन्म तिथि प्रमाण नहीं रहेगा — यूपी सरकार ने फैसला किया Circadian Rhythm क्या है ये खबर भी पढ़े…दिमाग की परिपक्वता, 30s डेटिंग और असली रिश्तों की चुनौतियाँ रोज एक ही समय पर उठने के 6 बड़े फायदे 1. Circadian Rhythm पूरी तरह बैलेंस रहती है रोज तय समय पर उठने से बॉडी क्लॉक स्टेबल रहती है।इससे नींद के हार्मोन सही समय पर एक्टिव होते हैं।रात को नींद अपने आप और गहरी आने लगती है। 2. दिनभर बनी रहती है नेचुरल एनर्जी अनियमित नींद से दिनभर सुस्ती महसूस होती है।लेकिन नियमित उठने से शरीर अलर्ट और फ्रेश रहता है।ऐसे लोग बिना कॉफी भी ज्यादा एक्टिव महसूस करते हैं। 3. वजन और मेटाबॉलिज्म कंट्रोल में रहता है हार्वर्ड रिसर्च बताती है कि अनियमित नींद मेटाबॉलिज्म स्लो करती है।सही समय पर उठने से पाचन बेहतर रहता है।इससे मोटापा और डायबिटीज का खतरा कम होता है। 4. मेंटल हेल्थ और फोकस बेहतर होता है नियमित स्लीप पैटर्न से दिमाग को पूरा आराम मिलता है।इससे तनाव और एंग्जायटी कम होती है।काम पर फोकस और याददाश्त भी बेहतर होती है। 5. हार्ट हेल्थ के लिए फायदेमंद आदत स्टडीज बताती हैं कि अनियमित नींद से ब्लड प्रेशर बढ़ता है।रोज एक समय पर उठने वाले लोगों का हार्ट ज्यादा हेल्दी रहता है।यह आदत उम्र बढ़ाने में भी मदद करती है। 6. हार्मोन बैलेंस और ग्लोइंग स्किन नियमित रूटीन से कोर्टिसोल और मेलाटोनिन बैलेंस रहते हैं।इससे स्किन हेल्दी और चमकदार दिखती है।साथ ही उम्र बढ़ने की प्रक्रिया भी धीमी होती है। 7. वीकेंड पर देर तक सोने से क्या नुकसान हो सकता है? वीकेंड पर ज्यादा देर तक सोने से बॉडी क्लॉक पीछे हो जाती है।सोमवार को जल्दी उठना फिर मुश्किल लगता है।इसे ही “Monday Blues” का बड़ा कारण माना जाता है। बार-बार ऐसा करने से नींद की क्वालिटी गिरती है।दिनभर थकान और चिड़चिड़ापन बना रहता है।लंबे समय में यह लाइफस्टाइल बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है। सही तरीका क्या है, हार्वर्ड की सलाह FAQs प्रश्न 1: क्या वीकेंड पर देर तक सोना सच में नुकसानदेह है? हाँ, हार्वर्ड Sleep Science के अनुसार यह Social Jet Lag पैदा करता है।इससे Circadian Rhythm बिगड़ती है और शरीर स्ट्रेस महसूस करता है। प्रश्न 2: रोज एक ही समय पर उठना क्यों जरूरी माना जाता है? क्योंकि उठने का समय बॉडी क्लॉक को कंट्रोल करता है।इससे नींद, हार्मोन और मेटाबॉलिज्म सही रहते हैं। प्रश्न 3: क्या नींद पूरी करने के लिए वीकेंड पर सोना गलत है? नींद पूरी करना जरूरी है, लेकिन तरीका सही होना चाहिए।हार्वर्ड के अनुसार जल्दी सोना, देर से उठने से बेहतर विकल्प है।

MCU Bhopal: कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमोस्ट्रेशन

MCU Bhopal

MCU Bhopal Cartoon Shows Exhibitions and Live Demonstrations भोपाल। अखबार का धड़कता हुआ दिल पन्नों पर दिखने वाली छोटी सी काठी नहीं, बल्कि वह तेज़, तीक्ष्ण और कभी-कभी दर्दनाक दृष्टि है जो हँसी के बहाने समाज को आईने में दिखाती है। राजधानी के इस अनूठे कार्टून कार्यक्रम में पेंसिलों ने शब्दों से भी ज़्यादा कुछ कह दिया। लाइव स्केचिंग, प्रदर्शनी और चर्चाओं ने यह प्रमाणित किया कि कार्टून केवल चुटकला नहीं, सोचने का माध्यम भी है। मंच पर हर रेखा में सवाल थे और हर हँसी के पीछे एक गहरी सीख नजर आ रही थी। यह नज़ारा था शुक्रवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित कार्टून शो, प्रदर्शनी और लाइव डिमॉन्सट्रेशन का। सोचने पर मजबूर हम रेखाओं से दिमाग की तरह की नसों पर हल्का सा खरोंच करते हैं हँसी आती है तो सोच भी जग जाती है। अखबार का दिल तब और जोर से धड़कता है जब कार्टून उसकी सूनी राहों में परोक्ष सच फेंक देते हैं। और मंच से देशभर के नामी कार्टूनिस्टों ने भी कुछ ऐसे ही तीखे-मीठे बयान दिए जो मीडिया के विद्यार्थियों को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर कर रहे थे। अभिन्न अंग है शब्द और शीर्षक अखबार का ढांचा खड़ा करते हैं, कार्टून किसी अखबार का धड़कता हुआ दिल है।” यह उद्गार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने उद्घाटन सत्र में कहे। उन्होंने कहा कि कार्टूनिंग अखबार का एक अभिन्न अंग है और मीडिया के पाठ्यक्रमों में कार्टूनिंग जैसे विषयों को शामिल करना चाहिए। उनका मानना था कि कार्टून की कला तब तक रहेगी जब तक मानव जीवन रहेगा, क्योंकि शब्दों की सीमाओं के बाहर भी चित्र और रेखाएँ बहुत कुछ बोल जाती हैं। कार्यक्रम में प्रदर्शनी, लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन तथा कार्टून एप्रिशिएशन कार्यशाला से यह साबित हुआ कि कार्टून कला न केवल जीवित है, बल्कि बदलते मीडिया परिदृश्य और सोशल मीडिया की चुनौतियों के बीच नए आकार ले रही है। छात्रों के सवालों और कलाकारों के जवाबों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह विधा अभी भी उस क्षमता से भरी है जो समाज को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर कर दे। विज्ञापन हावी कार्टून की कला के बारे में कहा जाता है कि यह सिमटती जा रही है। हर तरह के मीडिया में कार्टून के लिए जगह सिमटती जा रही है, इस विषय पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट डा. देवेंद्र शर्मा ने कहा कि मौजूदा वक्त में मीडिया में बहुत बदलाव आ गए हैं। कार्टून की कला में बहुत कमी आ रही है ऐसा पूरी तरह से सही नहीं है, दरअसल कार्टून को लोग अब भी देखना चाहते हैं। आज मीडिया में विचार कम दिखते हैं, विज्ञापन हावी है और बाजार के अन्य कारकों का दबाव भी है, लेकिन इसके बावजूद कार्टून की कला लगातार अपनी जगह बनाए हुए है और नए आकार ले रही है। इसी बात पर सुप्रसिद्ध कार्टूनिस्ट हरिओम तिवारी ने कहा कि कार्टून में ह्यूमर और व्यंग्य दोनों ही होते हैं। आज कार्टून सोशल मीडिया पर भी पसंद किए जा रहे हैं और बहुत बड़ी तादाद में लोग उन्हें फालो करते हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस तरह के रिएक्शन आते हैं उससे हार्ड विषयों पर कार्टून बनाना मुश्किल भी होता जा रहा है। लेकिन कार्टून के कलाकार लगातार व्यंग्य और हास्य के साथ कार्टून बना रहे हैं। कार्टूनिंग की कला वरिष्ठ कार्टूनविद त्र्यम्बक शर्मा ने कहा कि आज सोशल मीडिया जैसे नए माध्यमों में ह्यूमर का स्वरूप बदल गया है। हमारी सोच भी बदलती जा रही है। हमारे जीवन में एआई का दखल बढ़ रहा है। इन सब का असर स्वाभाविक तौर पर कार्टूनिंग की कला पर पड़ रहा है। पत्रकारिता और मीडिया में कार्टून के विषयों पर अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ कार्टूनिस्ट हरिमोहन ने कहा कि कार्टून जर्नलिज्म का शुद्धतम रूप है। इस विधा में ज्यादातर राजनैतिक विषयों पर ही कार्टून बनते हैं। कार्टूनिस्ट शिरीष श्रीवास्तव ने कहा कि ज्यादातर कार्टूनिस्टों के लिए राजनीति एक सदाबहार विषय होता है लेकिन समसामयिक आधार पर विषयों का चयन बदलता रहता है। गुणों का होना जरूरी मुंबई से इस अवसर पर आए वरिष्ठ कार्टून विशेषज्ञ प्रशांत कुलकर्णी ने कहा कि कार्टूनिस्ट के नजरिये से हमें हर चीज ह्यूमर लगती है। चुनावी वक्त भी कार्टून निमार्ण के विषयों के लिहाज से बहुत अच्छा होता है। प्रसिद्ध कार्टूनिस्टर इस्माइल लहरी ने कहा कि कार्टून के कलाकार की दृष्टि अलग होती है। उसका नजरिया जरा हटकर होता है। वह चीजों को एक अलग तरह से देखता है। और उसमें इन गुणों का होना जरूरी है। तभी कार्टून अच्छे और प्रभावशाली बन पाते हैं। उन्होंने कहा कि कार्टून केवल चुटकला नहीं है। यह एक गंभीर विधा है। वरिष्ठ कार्टूनिस्ट गोविंद लाहोटी ने कहा कि कार्टूनिस्ट के भीतर विचार हमेशा कौंधते रहते हैं। यह सतत चलने वाली एक प्रक्रिया है। इस अवसर पर वरिष्ठ कार्टूनविद माधव जोशी ने कहा कि दरअसल कोई भी कलाकार दुनिया को अपनी कला से कुछ न कुछ देता है। कार्टून बनाने वाले हास्य और व्यंग्य के साथ आम जन को मीडिया के जरिये एक विषय देते हैं जिस पर वे सोच सकते हैं।सभी विशेषज्ञों ने कहा कि कार्टून कलाकार निर्जीव चीजों में भी प्राण डाल देते हैं। यह हंसने की नहीं सोचने की चीज है। हम सभी में एक कार्टूनिस्ट होता है। वे उन्हें सजीव बनाने का सार्मथ्य रखते हैं। लाइव स्केचिंग पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आयोजित हुए इस अनूठे कार्टून शो एवं लाइव स्केचिंग में देश के प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट देवेंद्र शर्मा, त्रयंबक शर्मा, प्रशांत कुलकर्णी, माधव जोशी, हरिमोहन वाजपेयी, चंद्रशेखर हाडा और अभिषेक तिवारी , इस्माइल लहरी और कुमार, हरिओम और शिरीष शामिल हुए। वरिष्ठ पत्रकार शिफाली पांडे ने इस पहले सत्र का संचालन किया। दूसरे सत्र में सभी विशेषज्ञों ने दोपहर दो बजे तक्षशिला और विक्रमशिला परिसर में दो ज्वलंत विषयों शहरी विकास यात्रा और भ्रष्टाचार पर लाइव स्केचिंग भी की। अपनी तरह के अनूठे कार्टून शो के इस पहले सीजन में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने अलग_अलग विषयों पर लाइव स्केच बनते हुए देखे तथा कलाकारों से संवाद भी किया। विस्तार से चर्चा कार्यक्रम के अंतिम सत्र में कार्टून एप्रिशिएसन कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें वरिष्ठ कार्टून कलाकार प्रशांत कुलकर्णी ने सोशल कार्टूनिंग … Read more

Bhopal News: डिवीजनल आईटीआई कैंपस प्लेसमेंट – टर्नर ट्रेड में 29 का चयन

Campus Placement

Divisional ITI Campus Placement – 29 selected in Turner trade भोपाल। सरकारी डिवीजनल आईटीआई गोविंदपुरा,भोपाल ने एक बार फिर उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल की है। प्रतिष्ठित कंपनी मॉथरसन ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजीज़ एंड इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित कैंपस प्लेसमेंट ड्राइव में संस्थान के कुल 36 प्रशिक्षुओं का चयन किया गया। इनमें टर्नर ट्रेड के सर्वाधिक 29, फिटर के 3 तथा मशीनिस्ट के 2 प्रशिक्षु शामिल हैं। उद्योग से रोजगार उल्लेखनीय है कि सभी चयनित प्रशिक्षु अभी अपने अंतिम वर्ष में ही अध्ययनरत हैं, इसके बावजूद उन्हें उद्योग से रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था, बेहतर तकनीकी शिक्षा तथा उद्योग- संबंधी कौशलों को दर्शाती है। कौशल विकास मिशन टर्नर ट्रेड के उत्कृष्ट परिणाम के लिए प्रशिक्षण अधिकारी संदीप चौकसे के मार्गदर्शन और सतत प्रयासों की विशेष सराहना की गई है, जिन्होंने छात्रों को कौशल आधारित प्रशिक्षण और उद्योग-उन्मुख तैयारी प्रदान की। डिवीजनल आईटीआई,भोपाल की यह सफलता न केवल संस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि प्रदेश के कौशल विकास मिशन को भी नई दिशा प्रदान करती है।

Art & Design Career: सिलिका इंस्टीट्यूट कैरियर गाइड, जीत पर प्राइज और प्रमाण पत्र भी

Art and Design

Silica Institute of Art and Design Career Guide Prize and Certificate on winning भोपाल। सिलिका इंस्टीट्यूट आर्ट एंड डिजाइन कैरियर गाइड की ओर से 15 नवंबर को करियर कॉलेज में सिलिका ‘डिजाइन क्वेस्ट 2025’ का आयोजन किया जा रहा है। इस एग्जीबिशन का आयोजन सुबह 11 से शाम 6 बजे तक किया जाएगा। इसमें मुख्य अतिथि विश्वास सारंग खेल और युवा कल्याण मंत्री हॉंगै। चार गर्तिविधियां सिलिका के रीजनल डायरेबटर नीरज संधवी ने बताया कि इसमें चार गर्तिविधियां मुख्य रूप से आयोजित की जा रही हैं। इसमें स्ट्रडेंट्स आर्ट एंड डिजाइन एग्जीबिशन है, जिसमें स्ट्रडेंट्स द्वारा तैयार स्कैचंग, फैशन डिजाइनिंग, प्रोडक्ट डिजाईनिंग, आर्किटेक्चर एंड इंटीरियर डिजाइन प्रोजेकट प्रदर्शत किए जाएंगे। क्रिएटिव वर्कशॉप द्सरी गंतिविधि क रूप में ड्रांग और डिजाइन कॉरम्पटिशन और क्रिएटिव वर्कशॉप आयोजित होगा, इसमें क्लास 9 वीं से 12वीं के कोईं भी स्टूडेंटस पार्टिसिपेट कर सकेंगे। इस’ कॉम्पिटिशन को जीतने पर प्राइज और प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। प्रतिभागियों को सुबह 9 तक कार्यक्रम स्थल पर रिपोर्ट करना होगा। फन जोन भी सिलिका की रीजनल डायरेक्टर निमित छाबड़ा ने बताया कि स्टूडेंट्स के लिए फन जोन भी रहेगा जहां वे वर्चुअल रियलिटी गेम्स खेल सकते है। इसके अलावा यहां पर देश के टॉप डिजाइन कॉलेज भी उपस्थित होंगे, स्टूडेंट्स को इनसे आर्ट डिजाइन, फैशन और आर्किटेक्चर जैसे क्रिएटिव करियर्स की जानकारी मिलेगी।